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भारत-अमेरिका समझौता अंतिम चरण में, निर्णायक बैठकों का दौर आज से शुरू

 नई दिल्ली भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बड़ा अपडेट आया है, इसे लेकर अब फाइनल निर्णय हो सकता है. अमेरिका का एक हाई लेवल प्रतिनिधिमंडल सोमवार 1 जून को भारत की चार दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचे और इसका उद्देश्य India-US अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है. द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर 4 जून तक बैठकों का दौर चलेगा. अमेरिकी वार्ताकारों की टीम का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच करेंगे, जबकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के नेतृत्व में बात आगे बढ़ाएगा।  ट्रेड डील पर 99% बातचीत पूरी इस बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका अपने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के करीब हैं और 99% बातचीत पूरी हो चुकी है, जबकि छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि भारत बहुत जल्द अमेरिका के साथ पहले BTA पर साइन करेगा. गोयल के मुताबिक, इस समझौते की औपचारिक घोषणा से पहले बचे हुए कुछ मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच आज 2 जून से 4 जून तक चर्चा जारी रहेगी।  4 जून तक भारत में US अधिकारी India-US ट्रेड पर बातचीत 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान के बाद शुरू हो रही है, जिसमें दोनों देशों ने बीटीए के पहले चरण के ढांचे या एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की थी. अब दोनों देशों को उस समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देना है. नई दिल्ली में 4 जून तक अमेरिकी अधिकारी रहेंगे और बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाएंगे।  गौरतलब है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा था कि दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका अंतरिम समझौते के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने और बाजार पहुंच, नॉन-टैरिफ उपायों, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा जैसे तमाम क्षेत्रों पर व्यापक बीटीए के तहत बातचीत को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।  भारत को लेकर टैरिफ पर बात  ड्राफ्ट को देखें, तो अमेरिका ने भारत पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई थी. इसके अलावा रूसी तेल खरीदने पर भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया था. हालांकि, इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था और उनके टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था. इस कानूनी झटके के बाद, ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया था. टैरिफ की इस बदली स्थिति पर भी दोनों पक्ष बातचीत के दौरान पुनर्विचार कर सकते हैं।  भारत ने अगले पांच सालों में 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी एनर्जी, प्रोडक्ट्स से लेकर विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला आयात करने की योजना के संकेत भी दिए हैं।  US राजदूत ने दिए ये सिग्नल एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते शुक्रवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिया था कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. उन्होंने IIT Delhi में यूएस-इंडिया ट्रस्ट इनिशिएटिव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि पिछले हफ्ते ही भारत ने उस ट्रेड डील के अंतिम 1% को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन डीसी में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था और अब यहां एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करेंगे. गोर ने आगे कहा था, 'हमें पूरी उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों और महीनों में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। 

महिलाओं के लिए खुशखबरी! अन्नपूर्णा योजना के तहत मिलेगा 3000 रुपये महीना

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना की तर्ज पर अब बंगाल सरकार ने भी महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ शुरू करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कल्याणी में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि 27 मई से इस योजना के आवेदन फॉर्म बांटने शुरू कर दिए जाएंगे। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना खासतौर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि जरूरतमंद महिलाओं को समय पर आर्थिक सहयोग मिले, ताकि वे अपने दैनिक खर्च और परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर सकें।  कौन-कौन महिलाएं होंगी पात्र अन्नपूर्णा योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदक को कुछ जरूरी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। योजना के अनुसार आवेदक महिला भारत की नागरिक होनी चाहिए और पश्चिम बंगाल की निवासी होना आवश्यक है। महिला की आयु सामान्यतः 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक के परिवार की आय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर, विधवा, परित्यक्ता, बेरोजगार और निम्न आय वर्ग की महिलाओं को इस योजना में प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम पात्रता मानदंड आवेदन फॉर्म के दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से दिए जाएंगे। कहां मिलेगा अन्नपूर्णा योजना का आवेदन फॉर्म मुख्यमंत्री के अनुसार अन्नपूर्णा योजना के आवेदन फॉर्म राज्य सचिवालय और संबंधित सरकारी कार्यालयों से प्राप्त किए जा सकेंगे। इसके अलावा जिला प्रशासन, ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO ऑफिस), नगर निकाय कार्यालय और पंचायत कार्यालयों में भी फॉर्म उपलब्ध कराए जाने की संभावना है। सरकार जल्द ही एक आधिकारिक सूचना जारी कर फॉर्म वितरण केंद्रों की पूरी सूची सार्वजनिक करेगी, ताकि महिलाओं को आवेदन लेने में किसी तरह की परेशानी न हो।  आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को आवेदन फॉर्म के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। इनमें आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और आय प्रमाण पत्र शामिल हो सकते हैं। यदि आवेदक विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता हैं तो संबंधित प्रमाण पत्र भी जमा करना पड़ सकता है। दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।  फॉर्म कैसे भरें और कहां जमा करें महिलाओं को आवेदन फॉर्म सावधानीपूर्वक भरना होगा। फॉर्म में नाम, पता, आधार नंबर, बैंक खाता विवरण, मोबाइल नंबर और पारिवारिक आय से जुड़ी जानकारी सही-सही भरनी होगी। फॉर्म भरने के बाद इसे संबंधित ब्लॉक कार्यालय, नगर निगम कार्यालय, पंचायत कार्यालय या जिला प्रशासन के निर्धारित केंद्रों पर जमा करना होगा। कुछ जिलों में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू की जा सकती है।  फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान आवेदन करते समय सभी जानकारी स्पष्ट और सही दर्ज करें। बैंक खाता नंबर और IFSC कोड भरते समय विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि इसी खाते में योजना की राशि भेजी जाएगी। फॉर्म जमा करने से पहले सभी दस्तावेजों की स्वप्रमाणित प्रतियां संलग्न करें और आवेदन की एक कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें। गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज आवेदन खारिज होने का कारण बन सकते हैं।  महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी योजना पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि अन्नपूर्णा योजना महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगी। हर महीने मिलने वाली 3,000 रुपये की सहायता से महिलाएं घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। यह योजना राज्य की लाखों महिलाओं के लिए राहत और सम्मानजनक जीवन का नया आधार बन सकती है। 

राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने तेज की तैयारी, इन नेताओं के नाम सबसे आगे

नई दिल्ली राज्यसभा की 24 सीटों और कुछ राज्यों की विधान परिषद सीटों के चुनाव को लेकर भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर बैठक की। बैठक में उम्मीदवारों के चयन और सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे पर चर्चा हुई। पार्टी ने महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी। दिग्गजों का जमावड़ा प्रधानमंत्री आवास पर दो घंटे से ज्यादा चली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा समेत चुनाव समिति के सदस्य मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में राज्यसभा की 24 सीटों में भाजपा को मिलने वाली लगभग एक दर्जन सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई। राज्यों से आए नामों को लेकर केंद्रीय चुनाव समिति ने मंथन किया और कई सीटों पर अपनी राय बना ली है। बैठक में महाराष्ट्र और बिहार में विधान परिषद की सीटों को लेकर भी चर्चा की गई। क्या हुई चर्चा आंध्र प्रदेश में राज्यसभा की चार सीटों में भाजपा एक सीट की मांग कर रही है। हालांकि, पार्टी ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में राज्य में गठबंधन के प्रमुख सहयोगी मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की राय को प्रमुखता दी जाएगी। गौरतलब है कि टीडीपी भाजपा के बजाय दूसरी सहयोगी जन सेना को एक सीट देना चाहती है। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह के साथ अलग से भी बैठक की है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्यसभा उम्मीदवारों, विधान परिषद के उम्मीदवार और सहयोगी दलों के साथ सीटों के तालमेल को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही पश्चिम बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चा की गई। इन नेताओं को टिकट मिलने के आसार सूत्रों के अनुसार, मणिपुर से पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को पार्टी टिकट दे सकती है, जबकि रिटायर हो रहे दो केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को भी टिकट दिए जाने की संभावना है। संगठन की अहम बैठक आज भाजपा की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक सोमवार को पार्टी मुख्यालय में होगी। पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारी के साथ इस बैठक में प्रदेशों के अध्यक्ष और संगठन महामंत्री भी शामिल रहेंगे। बैठक में केंद्र सरकार के सत्ता में 12 साल पूरे होने और मौजूदा कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर देशभर में किए जाने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा होगी। साथ ही, संगठन के विभिन्न मुद्दों पर देशभर के संगठन मंत्रियों और प्रदेश अध्यक्षों से राष्ट्रीय अध्यक्ष अद्यतन राजनीतिक और संगठनात्मक जानकारी हासिल करेंगे। इन राज्यों में फैली हैं 24 सीटें चुनावी दौर से गुजरने वाली 24 सीटों में आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक से 4-4, मध्य प्रदेश, राजस्थान से 3-3, झारखंड से 2 और अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम से 1-1 सीट है।

UP फतह के लिए BJP का बड़ा प्लान, आधी टीम बदलने की चर्चा; कई नेताओं की छुट्टी तय?

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव अभी भले दूर दिखाई देता हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उसकी तैयारी लगभग युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं और हालिया संगठनात्मक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि यूपी बीजेपी में बड़ा फेरबदल होने वाला है। चर्चा यह भी है कि संगठन की लगभग आधी टीम बदली जा सकती है और ऐसे नेताओं को हटाया जा सकता है जो लंबे समय से एक साथ कई पदों पर बने हुए हैं। यह बदलाव केवल चेहरे बदलने का मामला नहीं है, बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है।  आखिर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ था। 80 सीटों वाले राज्य में बीजेपी और उसके सहयोगियों का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने महसूस किया कि केवल सरकार के कामकाज के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता, संगठन को भी उतना ही मजबूत करना होगा। हालांकि बाद के उपचुनावों में बीजेपी ने वापसी की, लेकिन पार्टी नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि 2027 की लड़ाई कहीं ज्यादा कठिन होगी। इसी वजह से बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की समीक्षा की जा रही है। दोहरे पदों पर बैठे नेताओं पर क्यों है नजर? बीजेपी की संगठनात्मक संस्कृति हमेशा "एक व्यक्ति, एक जिम्मेदारी" की बात करती रही है। लेकिन समय के साथ कई नेता ऐसे हो गए हैं जो संगठन और सत्ता दोनों में प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी अब ऐसे नेताओं की सूची तैयार कर रही है जो एक से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। पार्टी का मानना है कि चुनावी तैयारी के दौर में संगठन को पूरा समय देने वाले नेताओं की जरूरत होगी। ऐसे में कुछ नेताओं को संगठन से और कुछ को सरकार से हटाकर नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। क्या आधी टीम बदल सकती है? हालिया रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि प्रदेश संगठन में 50 प्रतिशत तक बदलाव संभव है। क्षेत्रीय अध्यक्षों, मोर्चा अध्यक्षों और कई प्रमुख पदाधिकारियों को बदला जा सकता है। जिला स्तर पर इसकी शुरुआत भी दिखाई देने लगी है, जहां लगातार नए जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी 2027 से पहले संगठन में "एंटी-इन्कम्बेंसी" नहीं आने देना चाहती। लंबे समय से एक ही पद पर बैठे नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। ब्रज, अवध, काशी, गोरखपुर आदि क्षेत्रों के अध्यक्षों में बदलाव संभावित है। नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को अपनी टीम खुद चुनने की छूट मिलेगी, ताकि स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा आए। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक मोर्चे सहित सातों मोर्चों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद करीब 70-95 जिलों में जिलाध्यक्ष बदले जा चुके हैं। गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी री-शफल हुआ है। यह राज्य स्तर के बदलाव की तैयारी माना जा रहा है। 61 'कठिन' सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस बीजेपी ने 2027 के चुनावों के लिए एक खास रणनीति बनाई है। पार्टी सबसे पहले उन 61 विधानसभा सीटों पर काम कर रही है, जहां उसे 2012, 2017 और 2022 के लगातार तीन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। इन 61 सीटों का भौगोलिक बंटवारा कुछ इस तरह है: इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। क्षेत्र                         कुल कठिन सीटें          प्रमुख जिले पूर्वी उत्तर प्रदेश             22                   आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश         13                    सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर अन्य क्षेत्र                       26                   पूरे प्रदेश में फैली अन्य सीटें मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी नेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव प्रचार के शुरुआती चरण में इन्हीं 61 मुश्किल सीटों को प्राथमिकता दें। इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। जातीय समीकरण भी बड़ी वजह बीजेपी का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट केवल संगठनात्मक नहीं, सामाजिक भी है। 2024 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने "PDA" (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए कई वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत की थी। इसके बाद बीजेपी ने भी सामाजिक समीकरणों पर नए सिरे से काम शुरू किया है। हालिया कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक चर्चाओं में ओबीसी, दलित और गैर-यादव पिछड़े वर्गों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर जोर देखा गया है। योगी सरकार और संगठन में तालमेल पर फोकस बीजेपी नेतृत्व की एक बड़ी चिंता संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बाद कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाएं तेज हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा ताकि चुनावी तैयारियों में कोई भ्रम न रहे।