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स्पीड पोस्ट से लेट पहुंचा आवेदन, उपभोक्ता आयोग ने डाक विभाग को ठहराया जिम्मेदार

बलौदा बाजार. स्पीड पोस्ट से भेजे गए संविदा नौकरी के एक नहीं बल्कि तीन-तीन आवेदनों को डाक विभाग समय पर नहीं पहुंचा सका. हताश-परेशान आवेदक ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अर्जी दाखिल की. आयोग ने पूरा मामला सुनने के बाद डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मान डाक शुल्क के साथ परिवादी को मानसिक क्षति पूर्ति राशि देने का आदेश दिया है. लवन निवासी परिवादिनी पूनम चौहान ने तीन अलग-अलग पदों पर संविदा नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र लवन डाकघर से स्पीड पोस्ट के जरिए 12 मार्च 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला बलौदाबाजार -भाटापारा को भेजा था. आवेदन पत्र पहुंचने की अंतिम तिथि 17 मई 2025 थी, लेकिन समयावधि बीतने के बाद 19 मई को बंद लिफाफे में प्राप्त आवेदनों को सीएमएचओ कार्यालय ने लेने से इंकार करने हुए वापस भेज दिया. डाक विभाग की लापरवाही से परिवादिनी उक्त संविदा पदों में से एक पद में भर्ती होने का अवसर चूक गई. इस पर परिवादिनी ने समयावधि में डाक नहीं पहुंचने तथा डाक विभाग की लापरवाही के कारण मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति राशि के लिए बलौदाबाजार जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था. आयोग के अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्यगण हरजीत सिंह चावला व शारदा सोनी ने पेश दस्तावेजों एवं संबंधित नियम आदि का सूक्ष्मता से अध्ययन कर पाया कि विरोधी पक्षकार द्वारा अनेक कारणों से डाक को तय समय पर नहीं पहुंचाया गया, जो विरोधी पक्षकार का उक्त तर्क मान्य करने योग्य नहीं है. विरोधी पक्षकार की ओर से समुचित साधनों का उपयोग न कर सेवा में कमी प्रमाणित किया है. इस पर आयोग ने उप डाकपाल लवन तथा मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल, रायपुर को सेवा में कमी का आंशिक दोषी मानते हुए डाक के एवज में लिए शुल्क के तौर पर परिवादिनी को 123 रुपए एवं मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 10,000 रुपए और वाद-व्यय के लिए 3000 रुपए प्रदाय करने का आदेश दिया है.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर होगा अनोखा प्रदर्शन, भारत पहुंच रहे कॉकरोच पार्टी के फाउंडर

 नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभ‍िजीत दिपके ने कहा है कि वो 6 जून को भारत वापस आएंगे और दिल्ली में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे. उनकी मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए. वजह है परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियां, जिनसे लाखों छात्र परेशान हैं।  अभ‍िजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी किया. इसमें उन्होंने अपने समर्थकों और छात्रों से अपील की कि वो उनके साथ दिल्ली में आवाज उठाएं।  उन्होंने वीडियो में कहा 'अब वक्त आ गया है कि हम सब एक साथ आएं. संविधान के रास्ते पर चलते हुए शांति से अपनी बात रखें और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करें. अगर हम मिलकर बोलेंगे तो सरकार को सुनना ही पड़ेगा।  उन्होंने यह भी कहा कि 6 जून, शनिवार की सुबह वो दिल्ली पहुंचेंगे. उन्होंने लोगों से गुजारिश की कि वो एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करें. इसके बाद सब मिलकर संसद मार्ग थाने जाएंगे और जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत मांगेंगे. दिपके का आरोप है कि परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों और विवादों की वजह से छात्र बेहद परेशान हैं. उन्होंने सरकार से जवाबदेही की मांग की है।  वीडियो संदेश में अभिजित ने क्या-क्या कहा? अभ‍िजीत दिपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर भारत लौटने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि वे नीट परीक्षा विवाद और कथित पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश वापस आ रहे हैं।  अभ‍िजीत दिपके ने दावा किया कि नीट परीक्षा से जुड़े विवादों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं ने उनका समर्थन किया है. उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है और किसी न किसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।  उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका को लाखों लोगों का समर्थन मिला है. साथ ही, देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों और युवाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।  दिपके ने कहा कि वे 6 जून को दिल्ली पहुंचेंगे और अपने समर्थकों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की अनुमति मांगेंगे. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है और उनका प्रस्तावित आंदोलन इसी संवैधानिक अधिकार के तहत होगा।  अपने संदेश में उन्होंने समर्थकों, छात्रों और युवाओं से इस अभियान में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोग एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएंगे तो सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान देना होगा।  अभ‍िजीत दिपके ने यह भी कहा कि उनके परिचितों और परिवार के कुछ लोगों को आशंका है कि उन्हें दिल्ली पहुंचने पर हिरासत में लिया जा सकता है, लेकिन उन्हें भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर भरोसा है. उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित होगा।  वीडियो के अंत में उन्होंने कहा कि वे विदेश में नौकरी कर सकते थे, लेकिन देश और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर भारत लौटने का फैसला किया है. उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करने का आह्वान किया।  कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? यह एक युवाओं द्वारा चलाया जाने वाला सोशल मीडिया मूवमेंट है, जिसे अभ‍िजीत दिपके ने शुरू किया था. यह पार्टी सोशल मीडिया पर काफी तेजी से पॉपुलर हुई है और कई जानी-मानी हस्तियों ने भी इसे फॉलो किया है. इंस्टाग्राम पर इसके 22 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।  अब 6 जून को प्रस्तावित इस प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी, क्योंकि परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में चर्चा जारी है और छात्र समुदाय के बीच इस विषय को लेकर लगातार बहस हो रही है. ये भी देखना होगा कि ऑनलाइन तो दो करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े, लेकिन जमीन पर कितने इस प्रदर्शन में शामिल होते हैं। 

बेरोजगारी और नशे के मुद्दे पर युवाओं को साधने में जुटी कांग्रेस, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

 चंडीगढ़  पंजाब निकाय चुनाव में इस बार कांग्रेस ने आप के कड़ी टक्कर देते हुए सीटों के मामले में दूसरा स्थान हासिल किया है। इन चुनावों को सभी पार्टी विधानसभा-2027 का सेमीफाइनल के तौर पर लेते हुए तैयारी में जुटी थी। पंजाब में युवाओं का वोट जीत-हार में काफी अहम भूमिका अदा करेगा। सूबे में इस समय युवाओं के बीच बेरोजगारी, नशा, पेपर लीक और क्वालिटी एजुकेशन जैसे अहम मुद्दे हैं। ऐसे में कांग्रेस ने युवाओं की नब्ज को टटोलते हुए युवा वोटर को लेकर खास मेनीफेस्ट तैयार करना शुरु कर दिया है। कांग्रेस की चुनावी टीम इस बार पहली बार वोटर और यूथ प्रोफेशनल पर खास तौर पर फोकस कर रही है। विधानसभा चुनावों में जेन-जी का वोट हार जीत का फैसला करने में अहम भूमिका निभाएगा। पंजाब में इस समय युवाओं से जुड़े मुद्दे सबसे अधिक चर्चा में हैं। विदेश भाग रहा पंजाब का यूथ पंजाब का यूथ लगातार विदेश की ओर भाग रहा है, लेकिन वहां भी अब पंजाब के युवाओं को पहले जैसे मौके नहीं मिल पा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से जेन-जी को लेकर जल्द ही खास जागरुकता अभियान चलाया जाएगा,जिसे लेकर पार्टी की ओर से जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरु कर दी गई हैं। युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए कांग्रेस का यूथ विंग खास तौर से अब कालेज और यूनिवर्सिटी स्तर के वोटर पर फोकस कर रहा है। 2022 चुनावों से ली सीख 2022 पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी ने भी यूथ वोटर के दम पर सरकार बनाई थी। पंजाब में इस समय बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। जिसे कांग्रेस आगामी चुनाव में भुनाने की कोशिश में है। मोहाली में आयोजित एक क्रिकेट टूर्नामेंट में पहुंचा पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि कांग्रेस की ओर से एक प्रोग्राम तैयार किया जा रहा है जिसमें युवाओं की भागदारी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से भी युवाओं की समस्याओं को उठाने के साथ ही उनके समाधान को लेकर काम करने के लिए कहा गया है ,इसी दिशा में अब पंजाब कांग्रेस युवाओं तक पहुंचकर उनके सुझाव लेगी और उन्हें सरकार आने पर लागू करेगी। वडिंग ने कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में युवाओं की भागेदारी ही सबसे महत्वपूर्ण होगी और कांग्रेस हमेश से ही युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबध है। पंजाब में बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से दोगुणा पंजाब में बेरोजगारी का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से करीब दोगुणा है।15 से 29 वर्ष की उम्र में पंजाब में बेरोजगारी 17 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जबिक राष्ट्रीय बेरोजगारी औसत का आंकड़ा 9.9 प्रतिशत है। प्रदेश में शिक्षित युवाओं को भे रोजगार नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण युवाओं को प्रदेश से बाहर ही नहीं विदेशों की तरफ बेहतर करियर के लिए जाना पड़ रहा है। लेकिन वहां भी पंजाब के युवाओं को बेहतर रोजगार नहीं मिल पा रहे हैं। दूसरी तरफ पंजाब में लोगों के खर्च देश में औसत खर्च से अधिक हैं। सेकेंडरी एजुकेशन का ग्राफ पंजाब में 49 प्रतिशत है,जबिक देश में यह ग्राफ 42.4 प्रतिशत है। ग्रेजुएट का प्रतिशत पंजाब में 8.7 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय औसत 10.8 प्रतिशत है। पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर पंजाब में औसत 2.8 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय औसत 3.3 प्रतिशत है।

MP कैबिनेट विस्तार को दिल्ली से हरी झंडी, अगले महीने बदल सकता है कई मंत्रियों का समीकरण

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरों और केंद्रीय नेतृत्व से लगातार मुलाकातों के बाद आखिरकार कैबिनेट विस्तार और फेरबदल का रास्ता साफ हो गया है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल करना पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। वे जब चाहें अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। संगठन हमेशा सरकार के फैसलों के साथ खड़ा रहता है, क्योंकि जिसे भी जिम्मेदारी मिलेगी, उसका मुख्य काम केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाना है।: अजय सिंह यादव, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा।

खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी का खतरा, पेंच टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ बड़ा वैक्सीनेशन अभियान

छिंदवाड़ा  पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे गांव के पालतू और आवारा कुत्तों को पकड़कर वन और पशु विभाग के कर्मचारी इन दिनों इंजेक्शन लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं. दरअसल कुछ दिनों पहले कान्हा टाइगर रिजर्व और दूसरे नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी के इंफेक्शन देखे गए थे. जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज ये कदम उठाए गए हैं।  छिंदवाड़ा सिवनी के 1500 कुत्तों का होगा वैक्सिनेशन पेंच टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर देव प्रसाद जे. ने बताया कि, ''वन्यजीव स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पेंच टाइगर रिजर्व द्वारा सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिलों के बफर क्षेत्र के गांवों में कैनाइन डिस्टेंपर की रोकथाम के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान प्रारंभ किया गया है. इस अभियान के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड स्टाफ द्वारा बफर क्षेत्र के लगभग 1500 पालतू एवं आवारा कुत्तों की पहचान कर उनका टीकाकरण एवं निगरानी की कार्यवाही शुरू की गई है. टीकाकरण अभियान की शुरुआत 31 मई 2026 को सिवनी जिले के टुरिया एवं सावंगी ग्राम तथा छिंदवाड़ा जिले के कुंभपानी गांव से की गई है।  कुछ टाइगर रिजर्व में फैला इन्फेक्शन, बरती जा रही सावधानी हाल ही में कुछ टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन फैला था. जिसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा सभी टाइगर रिजर्व को बीमारी की रोकथाम एवं कंट्रोल के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश एवं अलर्ट जारी किए गए हैं. इसी के चलते पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा यह टीकाकरण अभियान एक एहतियाती एवं सुरक्षा कदम के रूप में शुरू किया गया है, जिससे रिजर्व क्षेत्र एवं आसपास के वन्यजीवों को इंफेक्शन से सुरक्षित रखा जा सकेगा।  कैसे पहचाने कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी पेंच टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने लोंगो से अपील की है कि यदि किसी कुत्ते में कैनाइन डिस्टेंपर रोग के लक्षण जैसे आंख, नाक अथवा मुंह से पानी का बहाव होना, असामान्य व्यवहार करना, दौरे आना, लगातार गोल-गोल घूमना या अन्य असामान्य गतिविधियां दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग के फील्ड स्टाफ अथवा निकटतम वन अधिकारी को दें, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।  बाघों के लिए खतरा है कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन पशु चिकित्सक डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि, "यह बीमारी कुत्तों, सियार और लोमड़ियों में होने की वजह से फैलती है. जब जंगल या टाइगर रिजर्व में बाघ इन जानवरों का शिकार करके खाते हैं तो यह बीमारी बाघों में भी पहुंच जाती है. जिसकी वजह से बाघों की मौत होने की आशंका होती है. भारत में कान्हा नेशनल पार्क और राजस्थान के सरिस्का जैसे टाइगर रिजर्व में इस बीमारी से बाघों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं. इसके बाद ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA ने सुरक्षा के लिहाज से कदम उठाए हैं।  कैसे फैलता है कैनाइन डिस्टेंपर इंफेक्शन पशु चिकित्सक डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि, ''यह बीमारी ज्यादातर कुत्तों से फैलती है. यह इन्फेक्शन वाली बीमारी बहुत जल्दी जानवरों में सर्कुलेट होती है जो जानवरों के लिए जानलेवा साबित होती है. जब कोई संक्रमित कुत्ता या जंगली जानवर खांसता, छींकता या भौंकता है, तो वायरस हवा में बूंदों के रूप में फैल जाते हैं. स्वस्थ कुत्ते सांस के जरिए इस वायरस को अंदर खींच लेते हैं।  इसके साथ ही संक्रमित कुत्ते के मूत्र, मल, लार, आंखों या नाक से निकलने वाली लार के संपर्क में आने से स्वस्थ कुत्ते भी संक्रमित हो सकते हैं. ये वायरस भोजन के बर्तन, पानी के कटोरे, खिलौनों और बिस्तर पर जीवित रह सकता है. यदि कोई गर्भवती फीमेल डॉगी इस वायरस से संक्रमित है, तो प्लेसेंटा के माध्यम से यह बीमारी उसके अजन्मे पिल्लों तक भी फैल सकती है। 

पाकिस्तान पर पानी की चोट! भारत ने चिनाब और ब्यास नदियों पर बनाई बड़ी रणनीति

नई दिल्ली केंद्र सरकार इस साल 1 अगस्त से अपने सबसे महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो (रिवर लिंकिंग) प्रोजेक्ट्स में से एक पर काम शुरू करने जा रही है. करीब 2,300 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को 31 जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी बेसिन में मोड़ा जाएगा. पिछले हफ्ते ही सीएनएन-न्यूज18 ने सबसे पहले इस रणनीतिक परियोजना की जानकारी दी थी. अब चैनल को इस प्रोजेक्ट का विस्तृत ब्लूप्रिंट भी मिला है।  एनएचपीसी (NHPC) के एक दस्तावेज के अनुसार, ‘लिंक-3 प्रोजेक्ट’ हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की लाहौल घाटी में चिनाब नदी पर प्रस्तावित है. इस योजना के तहत चिनाब नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाया जाएगा. इसके साथ एक इंटेक स्ट्रक्चर और करीब 8.7 किलोमीटर लंबी जल परिवहन सुरंग (टनल) का निर्माण किया जाएगा. परियोजना के दूसरे चरण में जलविद्युत उत्पादन की भी संभावना रखी गई है।  पहाड़ों के बीच बनेगा बैराज दस्तावेज में बताया गया है कि प्रस्तावित बैराज के आसपास का इलाका बेहद दुर्गम और पहाड़ी है. यहां चिनाब नदी एक चौड़ी यू-आकार की घाटी से होकर बहती है. क्षेत्र की ऊंचाई लगभग 3,095 मीटर से लेकर 6,517 मीटर तक है और यहां तीखी पर्वत श्रृंखलाएं तथा गहरी घाटियां मौजूद हैं।  सिंधु की लाइफलाइन है चिनाब का पानी करीब 8.7 किलोमीटर लंबी यह सुरंग चिनाब बेसिन के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी प्रणाली में पहुंचाएगी. इस परियोजना को पाकिस्तान के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चिनाब सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों में शामिल है, जिन पर भारत के अधिकार सीमित रहे हैं. हालांकि, पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया था।  पानी मोड़ने का प्रस्तावित स्थल कोस्कर गांव के पास स्थित है और यह अटल टनल रोहतांग के उत्तरी छोर से आगे पड़ता है. इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक इंजीनियरिंग या जलविद्युत परियोजना नहीं है, बल्कि पश्चिमी नदियों के पानी के बेहतर उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है।  तो पाकिस्तान नहीं जाएगा चिनाब का पानी भारतीय नीति निर्माताओं और जल विशेषज्ञों का लंबे समय से मानना रहा है कि पश्चिमी नदियों का काफी पानी पर्याप्त भंडारण और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण बिना इस्तेमाल हुए पाकिस्तान की ओर बह जाता है. चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना को इसी समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।  इस प्रस्तावित बैराज के आसपास का इलाका बेहद दुर्गम और पहाड़ी है. सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना से उत्तर भारत में जलविद्युत उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी. अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे चरण में पानी के इस नए प्रवाह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है।  हिमालयी नदियों को भारत की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा संपत्तियों में गिना जाता है. ऐसे समय में जब देश थर्मल पावर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है, यह परियोजना ऊर्जा और जल प्रबंधन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

मोबाइल नंबर ब्लॉक करने पर हाईकोर्ट सख्त, पति की शिकायत को बताया गलत

प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ पुलिस को फटकार लगाई है। साथ ही साइबर सेल को निर्देश दिया है कि वह एक महिला के ब्लॉक किए गए मोबाइल नंबर को तुरंत बहाल करे। कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए साफ किया कि राज्य की एजेंसियों की लापरवाही के कारण किसी नागरिक को इस तरह परेशान नहीं किया जा सकता। न्यूज़ वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने महिला द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। पति ने आपसी अनबन के कारण पत्नी के खिलाफ साइबर सेल में एक झूठी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने बिना पूरी जांच किए महिला का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैये पर जताई नाराजगी अदालत ने लखनऊ के साइबर सेल इंचार्ज द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या-5 (पति) के बीच स्पष्ट रूप से वैवाहिक विवाद है और शिकायत भी पति की ओर से की गई है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी द्वारा दाखिल व्यक्तिगत शपथपत्र में अपनाया गया रुख बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने साइबर पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर खातों या सेवाओं को ब्लॉक, डेबिट अथवा फ्रीज करने संबंधी गृह मंत्रालय के आदेशों का हवाला दिया है। ऐसे आदेशों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। बेंच ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की एजेंसियों की इस तरह की लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के कारण किसी भी नागरिक के अधिकारों का दमन नहीं किया जा सकता। जियो और पुलिस को एक हफ्ते का अल्टीमेटम हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाता, जो प्रथम दृष्टया जियो टेलीकॉम सर्विसेज लिमिटेड प्रतीत होती है। उससे संपर्क कर याचिकाकर्ता का मोबाइल नंबर तत्काल बहाल कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में किए गए कार्यों का शपथ पत्र अदालत में दाखिल करें। अदालत ने महिला के पति को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि निराधार और तुच्छ शिकायत दर्ज कराने के लिए उस पर हर्जाना क्यों न लगाया जाए। बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ता महिला की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पांडेय ने पक्ष रखा था।

लाइट पॉल्यूशन का खतरा बढ़ा, भारत में 50% लोग कृत्रिम रोशनी के असर से प्रभावित

इंदौर  आर्टिफिशियल रोशनी की वजह से दुनिया का 80% हिस्सा प्रभावित है। 2014 से 2022 के बीच दुनिया में रात के समय आर्टिफिशियल रोशनी में लगभग 16% वृद्धि हुई। क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप प्राणा एयर के मुताबिक भारत की 50% से अधिक आबादी हर रात आर्टिफिशियल रोशनी से होने वाले प्रदूषण का सामना करती है। बड़े शहरों की रातें 60 गुना ज्यादा चमकीली हो चुकी हैं। इंसानों, कीटों, जानवरों और पक्षियों पर भी इसका असर हो रहा है। इंसानों की नींद, फूल खिलने, पक्षियों के प्रजनन पर असर प्रकाश प्रदूषण पशु-पक्षियों में प्रवास, प्रजनन, घोंसला बनाने और अंडों से बच्चे निकलने जैसी कई जैविक प्रक्रियाओं को बदल देता है। कई रात्रिकालीन कीट विलुप्त हो रहे हैं। इंसानों की आंखों की रोशनी और नींद के साइकिल पर भी असर पड़ रहा है। रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर घट रहा। इससे डायबिटीज, डिप्रेशन, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसे रोग बढ़ने का जोखिम। चेक रिपब्लिक में स्ट्रीट लाइट ऊपर दिखी तो 3 लाख जुर्माना चेक रिपब्लिक में स्ट्रीटलाइट्स को केवल जमीन पर फोकस नहीं करने पर 3 लाख रुपए से ज्यादा जुर्माना लग सकता है। फ्रांस में रात 1 बजे के बाद दुकानों, दफ्तरों की बाहरी लाइट बंद करना जरूरी। तीन हजार केल्विन से ज्यादा नहीं लगा सकते। जर्मनी में रिहायशी इलाकों में रात 10 बजे के बाद तेज रोशनी प्रतिबंधित की गई है।

यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड का बड़ा फैसला, कलावा-मंगलसूत्र पहनकर भी दे सकेंगे एग्जाम

  लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर इस बार एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे परीक्षा देने जा रही लाखों शादीशुदा महिलाओं और अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है. अक्सर परीक्षाओं में कड़े सुरक्षा नियमों के नाम पर कलावा काटने या मंगलसूत्र उतरवाने की तस्वीरें सामने आती हैं, जिससे अभ्यर्थियों को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. भर्ती बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षा केंद्रों पर कलावा या मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने पर कोई पाबंदी नहीं होगी और चेकिंग के दौरान इन्हें जबरन हटवाया नहीं जाएगा।  स्मार्ट गैजेट्स पर 'डिजिटल' पहरा यह परीक्षा आठ जून से शुरू हो रही है. इस बार परीक्षा केंद्र में धार्मिक आस्था को सम्मान देने के साथ ही बोर्ड ने परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया है. इस बार नकल माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और भी हाईटेक हो चुकी हैं. बोर्ड ने विशेष तौर पर निर्देश दिए हैं कि 'स्मार्ट मेटा चश्मे', इलेक्ट्रॉनिक पेन और अन्य छिपे हुए स्मार्ट गैजेट्स पर कड़ी निगरानी रखी जाए. सख्ती का आलम यह होगा कि परीक्षा ड्यूटी में तैनात रहने वाले कर्मचारी और शिक्षक भी केंद्र के भीतर अपना मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे. सुरक्षा को देखते हुए एग्जाम सेंटर पर सीसीटीवी की नजरें लगी रहेंगी।  28 लाख अभ्यर्थी, 75 जिले और महापरीक्षा यह उत्तर प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक होने जा रही है. आगामी 8 से 10 जून के बीच होने वाली इस सिपाही भर्ती परीक्षा में 32,679 पदों के लिए प्रदेश भर से 28 लाख से अधिक अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे. परीक्षा को पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 1183 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। 

सियासी समीकरण बदलते ही केंद्र का बड़ा प्लान, परिसीमन और One Nation One Election पर बढ़े कदम

नई दिल्ली ONOE यानी एक देश एक चुनाव और परिसीमन विधेयक जल्द ही एक बार फिर संसद में पेश किया जा सकता है। खबर है कि पहली बार परिसीमन बिल पर चोट के बाद भारतीय जनता पार्टी अब बड़ी प्लानिंग कर रही है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम जैसे बड़े क्षेत्रीय दलों को चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकार 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एक देश एक चुनाव बिल पेश कर सकती है। खास बात है कि अप्रैल में संविधान संशोधन बिल फेल होने के बाद अब भाजपा नए सिरे से तैयारी कर रही है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि केंद्रीय गृहमंत्रालय नया परिसीमन बिल तैयार कर रहा है। पहले क्या हुआ था जब संसद में लोकसभा की सीटों की सीमाएं दोबारा तय करने वाला परिसीमन बिल लाया गया, तो कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी जैसी सभी विपक्षी पार्टियों INDIA गठबंधन के 230 सांसदों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया। विपक्ष का मुख्य ऐतराज इस बात पर था कि सरकार ने महिलाओं को आरक्षण देने वाले कानून को लोकसभा की सीटें बढ़ाने के विवादित मुद्दे से जोड़ दिया है। साथ ही, विपक्ष को यह बड़ा डर भी था कि आबादी के हिसाब से सीटें तय होने पर उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी। क्षेत्रीय दल निभाएंगे बड़ी भूमिका रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा की ये कोशिशें हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद तेज हुईं हैं। सूत्रों ने अखबार को बताया कि तमिलनाडु में हार और कांग्रेस के साथ छोड़ने के बाद DMK यानी द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम 'कुछ मुद्दों' पर भाजपा के साथ बातचीत के लिए तैयार है। कहा यह भी जा रहा है कि भाजपा की नजरें टीएमसी में जारी गतिविधियों पर भी हैं। ये अटकलें ऐसे समय पर सामने आईं हैं, जब बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी नेताओं में जमकर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं, पार्षद स्तर के नेता इस्तीफा सौंप रहे हैं। संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि कुछ सांसद टीएमसी छोड़कर भाजपा में जा सकते हैं। ONOE पर भी बड़े ऐक्शन की तैयारी फिलहाल, संसदीय समिति की तरफ से एक देश एक चुनाव विधेयक की समीक्षा की जा रही है। अखबार से बातचीत में जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा था, 'कानून में जल्द ही संशोधन किया जाएगा। रिपोर्ट के मामले में हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं और हम समय पर रिपोर्ट जमा कर देंगे।' अखबार से बातचीत में भाजपा नेता ने कहा कि राज्यों में चुनावों को देखते हुए कानून को चरणों में लागू किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात चुनाव का हवाला दिया है। इन राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। DMK किस मूड में रिपोर्ट के अनुसार, DMK के एक बड़े नेता ने कहा, 'परिसीमन सीटें बढ़ाने का काम और एक देश, एक चुनाव जैसे मुद्दों पर हमारी पार्टी का फैसला सिर्फ किसी राजनीतिक विचारधारा पर नहीं, बल्कि हमेशा तमिलनाडु के हक और फायदे को देखकर तय होता है। अगर केंद्र सरकार इस बात का पक्का भरोसा दे कि जिन राज्यों ने आबादी रोकने में अच्छा काम किया है, उन्हें संसद में सीटें कम करके सजा नहीं दी जाएगी। साथ ही सबकी सहमति से एक ऐसा फॉर्मूला बनाया जाए जिससे हमारी मौजूदा सीटों का हिस्सा सुरक्षित रहे, तो इस प्रस्ताव को ठुकराने की कोई वजह नहीं है। हमारी सबसे बड़ी चिंता बस यही है कि संसद में तमिलनाडु की आवाज कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। DMK के एक पूर्व मंत्री ने अखबार से कहा, 'अभी हम गठबंधन करने के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे हैं। बीजेपी के साथ हमारे मतभेद सबको अच्छे से पता हैं। लेकिन राजनीति में चीजें कभी हमेशा के लिए एक जैसी नहीं होतीं। भारतीय संसद के इतिहास में ऐसा पहले भी हुआ है जब पार्टियों ने खास मुद्दों पर सरकार का साथ दिया है या देश को संभालने के लिए मदद की है, जैसे वाजपेयी जी के समय में हुआ था। भविष्य का कोई भी फैसला उस समय के राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगा और इस बात पर तय होगा कि तमिलनाडु के हक और राज्यों के अधिकार सुरक्षित हैं या नहीं।' खास बात है कि कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि सरकार को प्रक्रिया का पालन करना होगा। साथ ही कोई भी कदम उठाने से पहले सभी पार्टियों के साथ बात करनी होगी।