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उपमुख्यमंत्री साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन

रायपुर उपमुख्यमंत्री  साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने एवं आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु प्रदेश में सुशासन तिहार मनाया जा रहा है। इसी तारतम्य में आज  कोरबा जिले के विकासखण्ड पाली के ग्राम डोंगानाला में सुशासन तिहार के अंतर्गत जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन हुआ। उपमुख्यमंत्री  साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग तथा नगरीय प्रशासन व विकास मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  अरुण साव शामिल हुए। उन्होंने शिविर में 159 करोड़ 63 लाख 14 हजार की राशि के 18 विकास कार्याे की सौगात दी। जिसके अंतर्गत 153 करोड़ 66 लाख 61 हजार के कुल 8 कार्याे का भूमिपूजन, 5 करोड़ 96 लाख 53 हजार के 10 विकास कार्याे का लोकार्पण शामिल है। उन्होंने जिलेवासियों को विकास कार्याे के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम  मंत्री  लखन लाल देवांगन, विधायक पाली तनाखार  तुलेश्वर मरकाम, विधायक कटघोरा  प्रेमचंद पटेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत मती निकिता मुकेश जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य मती माया रूपेश कंवर, महापौर मती संजू देवी राजपूत, नगर पंचायत अध्यक्ष पाली  अजय जायसवाल, कलेक्टर  कुणाल दुदावत, प्रभारी पुलिस अधीक्षक  लखन पटले,  वनमण्डलाधिकारी कटघोरा  कुमार निशांत, डीएफओ कोरबा मती प्रेमलता यादव, निगमायुक्त  आशुतोष पाण्डेय सहित अन्य जनप्रतिनिधि  विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। उपमुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को तेजी से आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार द्वारा विकास के कार्यों को दुगनी गति से पूरा किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री  साव ने कहा कि सरकार गठन के साथ ही 18 लाख  पीएम आवास निर्माण की  स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार द्वारा 2 साल के धान का बकाया बोनस,  3100 रुपए प्रति क्विंटल व 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी कर किसानों का मान बढ़ाया। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को प्रति माह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। अब महिलाएं लखपति दीदी बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है। उपमुख्यमंत्री  साव के आतिथ्य में डोंगा नाला में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन उन्होंने कहा कि कोरबा जिला सहित पाली तानाखार क्षेत्र में विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। पाली तानाखार विधानसभा में सभी प्रकार के निर्माण व अन्य प्रशासनिक काम तेजी से हो रहा है। अनेक विकास कार्याे के लिए डीएमएफ से पर्याप्त राशि क्षेत्र को मिल रहा है।  साव ने कहा सरकार द्वारा प्रत्येक व्यक्ति की चिंता की जा रही है, इस हेतु जनता की समस्याओं का जनता के द्वार पर समाधान कर लाभ दिलाने शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में विभागीय अधिकारी उपस्थित होकर आमजनों को योजनाओं की जानकारी प्रदान कर रहे एवं उनकी समस्याओं का निराकरण भी कर रहे। इससे अधिकारियों की जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ी है। साथ ही लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने नही पड़ रहे। उन्होंने आमजनों से योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया। कैबिनेट मंत्री  देवांगन ने कहा कि सरकार जनता के हित मे लगातार जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर विकास की नई ऊंचाईयों में पहुचाने का काम कर रही है। 01 मई से जगह जगह सुसाशन तिहार का आयोजन कर आमजनों को राहत पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही सरकार के कार्याे का फीडबैक भी लिया जा रहा। सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े लोगो को मुफ्त राशन,  टेपनल के माध्यम से हर घर जल, शौचालय , सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है।  देवांगन ने कहा कि शिविरों में आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। जिससे कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाना नहीं पड़ रहा।  देवांगन ने डीएमएफ राशि के उपयोग की सुविधा देने हेतु प्रधानमंत्री  मोदी एवं मुख्यमंत्री  साय का धन्यवाद देते हुए कहा कि जिले में डीएमएफ की राशि से लगातार पिछड़े क्षेत्रों व आवश्यक स्थानों में अनेक पुल, पुलिया, सड़क, भवन सहित अन्य आवश्यक चीजों का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन व अधोसंरचना सुविधा का तेजी से विकास हुआ है। आगे भी शासन प्रशासन द्वारा जनहित में सदैव कार्य किया जाएगा। विधायक पाली तानाखार  मरकाम ने कहा कि लोगों को कार्यालयों का चक्कर लगाने की परेशानी से बचाने के लिए शिविरों का आयोजन हो रहा है। जहां जिला व खण्ड स्तरीय अधिकारी उपस्थित होकर आमजनो की समस्याओं को गम्भीरता से सुनते व निराकृत करते है। ऐसे आयोजनों से आम जनता का शासन पर विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने बताया कि पाली तानाखार विधानसभा में मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। डीएमएफ से स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस भवन , पुल-पुलिया निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। जिससे दूर दराज के लोगों को निश्चित रूप से  लाभ मिलेगा। कलेक्टर  दुदावत ने कहा कि राज्य शासन के मंशानुरूप प्रशासन द्वारा आमजनों की परेशानियों का समाधान एवं योजनाओं से लाभान्वित करने जिले में नियमित रूप से शिविर आयोजित किए जा रहे है। शिविरों में विभागीय अधिकारी आमजनों की समस्याओं की गम्भीरता से सुनते है एवं उन्हें विभागीय योजनाओं से लाभांवित करते है। शिविरों में प्राप्त आवेंदनो में से निराकरण योग्य आवेदनों का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को लाभ दिलाया जा रहा है। साथ ही मांग एवं शिकायत से सम्बन्धित आवेंदनो का पूर्ण परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। जिला खनिज संस्थान न्यास मद से अनेक जनहित के कार्य को गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री  साव ने की अनेक विकास कार्याे की घोषणा शिविर में क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु उपमुख्यमंत्री  साव द्वारा अनेक विकास कार्याे का घोषणा भी गई जिसमें प्रमुख रूप से पाली ब्लाक के मुनगाडीह व दमिया में स्कूल भवन निर्माण, दमिया में आंगनबाड़ी भवन, पाली के स्वामी आत्मानंद … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया निर्माणाधीन महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर का निरीक्षण

कुशीनग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुशीनगर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 450 करोड़ से बनने वाला यह विश्वविद्यालय पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के जीवन में खुशहाली लाने और उनकी आय बढ़ाने में मील का पत्थऱ साबित होगा। सरकार की मंशा है कि विश्वविद्यालय समय पर बने और चले। इस प्रोजेक्ट को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। उम्मीद है कि सितंबर-अक्टूबर में इसके उद्घाटन के लिए आएंगे। उससे पहले कृषि मंत्री सत्र प्रारंभ करने के लिए सभी औपचारिकताओं को पूरा करने यहां आएंगे, जिससे कुशीनगर में भी कृषि विश्वविद्यालय प्रारंभ हो सके।  इस सत्र से प्रारंभ करेंगे प्रवेश  मुख्यमंत्री योगी ने कृषि विश्वविद्यालय के निरीक्षण के उपरांत कहा कि सत्र शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस सत्र से यहां प्रवेश प्रारंभ करेंगे। दो-तीन महीने के लिए किराए पर भवन या स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन के सहयोग से वैकल्पिक व्यवस्था देंगे। यह विश्वविद्यालय न केवल किसान को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, बल्कि लागत कम-उत्पादन अधिक के साथ ही उसकी आमदनी को कई गुना बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा।  कुशीनगर अब विकास के नए प्रतिमान को स्थापित कर रहा है मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशीनगर अब पिछड़ा जनपद नहीं है, बल्कि यह बीमारी, उपद्रव, अराजकता से मुक्त है। यहां आपराधिक गतिविधियां व माफियागिरी बंद हुई है। यहां इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह समाप्त किया जा चुका है। कुशीनगर अब उत्सवपूर्ण माहौल में विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित कर रहा है।  अनंत संभावनाओं को लेकर चल रहा कुशीनगर  मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां मेडिकल कॉलेज, प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की स्थापना, नए हाईवे, फोरलेन-टूलेन सड़कों का निर्माण हो रहा है। गोरखपुर-सिलीगुड़ी मार्ग भी कुशीनगर होते हुए निकल रहा है। कुशीनगर विकास की अनंत संभावनाओं को लेकर चल रहा है। देवरिया-कुशीनगर फोरलेन को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। नार्थ-साउथ कॉरिडोर के तहत पडरौना से लेकर केवल कसया व देवरिया ही नहीं, बल्कि प्रयागराज व उससे आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है। लखनऊ की दूरी भी अब कम हो चुकी है।  कुशीनगर में है अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट  सीएम योगी ने कहा कि जब गोरखपुर-सिलीगुड़ी मार्ग जुड़ेगा तो गोरखपुर से शामली तक भी इकॉनामिक कॉरिडोर का निर्माण होगा। प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने के साथ ही यहां सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर की बेहतरीन स्थिति हुई है। यहां पहले ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट उपलब्ध कराया जा चुका है। नए एयरक्राफ्ट आने के साथ ही यहां वायुसेवा भी प्रारंभ होगी।  पत्रकारवार्ता के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कुशीनगर के सांसद विजय दुबे, गोरखपुर के सांसद रवि किशन, विधायक मोहन वर्मा, विवेकानंद पांडेय आदि मौजूद रहे।

हाईकोर्ट में जज साहब क्यों भड़के? बोले- अदालत के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं

प्रयागराज  कोर्ट की अवमानना से जुड़े एक मामले में की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत पर मामलों के बोझ की बात कही है। कोर्ट का कहना है कि कार्यवाहियों को पूरा होने में समय लगता है, लेकिन इस दौरान पक्षों को अदालत के आदेशों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने इसके खिलाफ सीधी चेतावनी दे दी है। याचिका पर सुनवाई कर रहे जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र ने कहा है कि कई बार अदालतों में एक दिन में 800 से ज्यादा केस आते हैं। जस्टिस शैलेंद्र ने कहा, '“इलाहाबाद उच्च न्यायालय जैसे अत्यधिक बोझ से दबे संवैधानिक न्यायालयों में जहां हर दिन प्रत्येक न्यायाधीश के समक्ष लगभग 400, 500, 600 और कभी कभी 800 से अधिक मामले सूचीबद्ध होते हैं, न्यायिक कार्यवाही के निपटारे में काफी समय लग सकता है। कभी-कभी वर्ष और कभी-कभी दशक भी। फिर भी लोग ऐसे अत्यधिक कार्यभार वाले न्यायाधीशों से हमेशा काम करने वाले सुपर रोबोट, सुपर कंप्यूटर या सुपरह्यूमन बनने की उम्मीद करते हैं।' दे दी चेतावनी उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यवाही के निपटारे में समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि इस लंबित प्रक्रिया के दौरान कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। जज ने कहा, 'कानून ऐसी हिम्मत को बर्दाश्त नहीं करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसी स्थिति की अनुमति दी गई, तो न्याय प्रशासन अराजकता में चला जाएगा। क्या था मामला दरअसल, कोर्ट एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोप थे कि शिक्षक की सैलरी से जुड़े आदेश को लागू नहीं किया गया था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर जिला विद्यालय निरीक्षक ने 18 अप्रैल 2022 को जारी एक आदेश को लागू नहीं किया था। इसपर राज्य ने कहा कि उनकी तरफ से कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक आवेदन दिया गया है, जिसके चलते आदेश का पालन नहीं हुआ। भड़क गया कोर्ट अब राज्य की तरफ से मिले इस जवाब पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा है कि संवैधानिक अदालत का आदेश सिर्फ एडवाइजरी नहीं है और न ही सिर्फ कागज का टुकड़ा है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा, 'इसके साथ संविधान की पूरी शक्ति और कानून के शासन का गंभीर आदेश जुड़ा होता है। जिस पल मुकदमों में शामिल पक्षों को अदालती आदेशों को अपनी मर्जी या विकल्प के तौर पर मानने की छूट दे दी जाएगी, उसी पल संवैधानिक शासन की बुनियाद कमजोर होने लगेगी।' कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी हुई है, वह तय नहीं कर सकता कि इसका पालन करना है या नहीं। बेंच ने कहा कि इस तरह के आवेदन अदालत के आदेश को कमजोर नहीं कर सकते। महात्मा गांधी का किया जिक्र कोर्ट ने कहा कि यह न्यायपालिका की अथॉरिटी पर हमला करने जैसा है। इ दौरान अदालत ने महात्मा गांधी 'My Experiments with Truth' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'महात्मा गांधी की एक मशहूर बात है, जो उन्होंने अपनी किताब 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' में लिखी थी कि 'आपकी इजाजत के बिना कोई आपका अपमान नहीं कर सकता।' यह बात कोर्ट की अवमानना के मामले में भी पूरी तरह लागू होती है। एक बड़े कोर्ट ने जो आदेश दे दिया, जब तक वह लागू है और रद्द नहीं हुआ है, तब तक उसे मानना ही पड़ेगा और उसका पूरा सम्मान करना होगा। अगर ऐसे आदेश को खुलेआम ताक पर रख दिया जाए और कोर्ट सिर्फ इसलिए चुप रह जाए या कोई कार्रवाई न करे क्योंकि उस आदेश को बदलने या हटाने की कोई अर्जी अभी कोर्ट के सामने पेंडिंग है, तो इससे कोर्ट की जो साख और ताकत कम होगी, उसके लिए सिर्फ आदेश तोड़ने वाला ही जिम्मेदार नहीं माना जाएगा।' क्या हुआ फैसला चार सालों तक आदेश लागू नहीं होने के मद्देनजर अदालत ने विद्यालय निरीक्षक को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया। साथ ही 8 जुलाई को आरोप तय किए जाने की बात कही है। कोर्ट ने कहा कि वह चाहें तो अभी भी साल 2022 के अदालती आदेश का पालन कर सकता है। वह ऐसा करके खुद को कोर्ट की अवमानना के आरोप से बचा सकता है।

सोशल मीडिया पर नाबालिगों की एंट्री पर रोक, मलेशिया ने लागू किए सख्त नियम

कुआलालंपुर  मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगाने वाले नए नियम लागू करना शुरू कर दिया है. यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने की ग्लोबल कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि इस फैसले को लेकर सभी लोग सहमत नहीं हैं और कुछ लोगों ने डेटा सुरक्षा तथा संभावित निगरानी को लेकर चिंता भी जताई है. नए नियमों के तहत मलेशिया में कम से कम 80 लाख यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उम्र की जांच करने वाली व्यवस्था लागू करनी होगी. इसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे नया अकाउंट न बना सकें।  मलेशिया सरकार ने जारी किए निर्देश मलेशिया के कम्युनिकेशन और मल्टीमीडिया कमीशन के अनुसार मौजूदा यूजर्स की उम्र का सत्यापन अगले 6 महीनों के भीतर शुरू किया जाएगा. जिन यूजर्स की उम्र 16 साल से कम है, उन्हें अपने फोटो, वीडियो और अन्य डेटा डाउनलोड या ट्रांसफर करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा. इसके बाद उनके अकाउंट पर प्रतिबंध या अन्य कार्रवाई लागू की जा सकती है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन पर 1 करोड़ रिंगिट यानी लगभग 25 लाख अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं यदि कोई बच्चा नियमों को दरकिनार कर अकाउंट बनाने में सफल हो जाता है, तो उसके माता-पिता के खिलाफ कोई सजा नहीं होगी।  मलेशिया के अलावा अन्य देशों में बैन मलेशियाई सरकार का कहना है कि इन नियमों का मुख्य मकसद बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री, साइबर बुलिंग और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचाना है. सरकार का मानना है कि कुछ प्लेटफॉर्म फीचर्स बच्चों को लंबे समय तक ऑनलाइन रहने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उनके मानसिक और सामाजिक जीवन पर असर पड़ सकता है. दुनिया के कई अन्य देश भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ऐसे कदम उठा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों ने सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए उम्र आधारित नियम लागू किए हैं या उनकी घोषणा की है. वहीं ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी तरह की नीतियों पर विचार कर रहे हैं।  सोशल मीडिया को बैन करने का खास मकसद क्या है? मलेशिया के रेगुलेटरी बोर्ड ने कहा है कि इन नियमों का मकसद बच्चों को डिजिटल तकनीक से दूर करना नहीं है. बल्कि सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर सुरक्षा बढ़ाने, अत्यधिक उपयोग को रोकने और कम उम्र के यूजर्स व नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिए बाध्य करना है. हालांकि टेक्नोलॉजी कंपनियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वे इन नियमों का पालन किस तरह करेंगी. इस बीच, क्लारा कोह ने चेतावनी दी है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर पूरी तरह रोक लगाने से उल्टा असर भी हो सकता है. उनके अनुसार इससे किशोर सुरक्षित और नियंत्रित प्लेटफॉर्म छोड़कर इंटरनेट के ऐसे हिस्सों की ओर जा सकते हैं, जहां निगरानी और सुरक्षा के उपाय कम होते हैं।  ऑस्ट्रेलिया समेत इंडोनेशिया में सोशल मीडिया पर बैन ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है. यह नियम 10 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुआ. इसके बाद इंडोनेशिया ने 28 मार्च 2026 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कानूनी रोक लागू की. फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का विधेयक निचले सदन से पारित हो चुका है, हालांकि इसे अभी सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है. डेनमार्क भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की योजना पर काम कर रहा है।  दुनिया के कई देशों में बैन ग्रीस ने जनवरी 2027 से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. वहीं स्पेन, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, स्लोवेनिया, तुर्की और ब्रिटेन जैसे देश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के लिए नए नियमों और संभावित प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं. इटली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है. फ्रांस में पहले से लागू नियमों के तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अभिभावकों की सहमति आवश्यक है. जर्मनी में भी 13 से 16 साल की उम्र के बीच के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है।   

मोहाली नगर निगम चुनाव में कई प्रत्याशियों को बड़ा झटका, 75+ उम्मीदवारों की जमानत जब्त

मोहाली  मोहाली नगर निगम चुनाव के घोषित नतीजों ने जहां आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत देकर सत्ता की चाबी सौंपी है, वहीं राजनीतिक दलों और निर्दलीयों के लिए एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने रखा है। चुनाव मैदान में उतरे 50 वार्डों के 75 से अधिक उम्मीदवार आवश्यक वोट हासिल न कर पाने के कारण अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। इस चुनाव में मतदाताओं ने छोटे व कमजोर उम्मीदवारों को पूरी तरह नकारते हुए मुख्य दावेदारों पर भरोसा जताया है, जिससे कई प्रत्याशियों का आंकड़ा दहाई तक भी नहीं पहुंच पाया। चुनाव परिणामों में सबसे हैरान करने वाला मामला वार्ड नंबर 14 से सामने आया, जहां निर्दलीय उम्मीदवार जस्मीत कौर को पूरे वार्ड से केवल एक ही वोट नसीब हुआ। मतदाताओं की इस बेरुखी का शिकार सिर्फ निर्दलीय ही नहीं, बल्कि मुख्यधारा की पार्टियों के प्रत्याशी भी बने। वार्ड नंबर 20 से निर्दलीय हरमनजोत सिंह और वार्ड नंबर 22 से रवनीत कौर को केवल 6-6 वोट मिले। वहीं, वार्ड 23 से किरण शर्मा को 8 और वार्ड 3 से कुलदीप कौर को सिर्फ 9 वोटों से संतोष करना पड़ा। बड़े दलों के उम्मीदवारों का भी रहा बुरा हाल राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस बार मुकाबला बहुकोणीय होने के बावजूद मतदाताओं ने अपना वोट चुनिंदा और मजबूत उम्मीदवारों के पक्ष में ही केंद्रित किया। इसी वजह से शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जैसी पारंपरिक पार्टियों के कई उम्मीदवार अपनी जमानत गंवा बैठे। अकाली दल : वार्ड 18 से गुरदीप सिंह को 19, वार्ड 42 से अमित कुमार को 22 और वार्ड 27 से आत्मजीत कौर को 31 वोट ही मिल सके। कांग्रेस व आम आदमी पार्टी : वार्ड 42 से कांग्रेस के जसदीप सिंह शेरगिल को 47 वोट मिले, जबकि वार्ड 13 से सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की जसबीर कौर को महज 41 वोटों पर सिमटना पड़ा। भाजपा : भाजपा के भी कई चेहरे पिछड़ गए; वार्ड 24 से करण गुप्ता को 62, वार्ड 16 से संदीप कुमार माधोक को 92 और वार्ड 18 से ऋतिका को 93 वोट मिले। सबसे कम वोट पाने वाले प्रमुख उम्मीदवार चुनाव में सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों की स्थिति इस प्रकार रही: वार्ड 14 : जस्मीत कौर, निर्दलीय – 1 वोट वार्ड 20 : हरमनजोत सिंह, निर्दलीय – 6 वोट वार्ड 22 : रवनीत कौर, निर्दलीय – 6 वोट वार्ड 23 : किरण शर्मा, निर्दलीय – 8 वोट वार्ड 3 : कुलदीप कौर, निर्दलीय – 9 वोट वार्ड 48 : रवि शर्मा, निर्दलीय – 12 वोट वार्ड 15 : सुखदर्शन सिंह, अकाली दल – 25 वोट वार्ड 28 : रजनी, अकाली दल – 28 वोट वार्ड 27 : आत्मजीत कौर, अकाली दल – 31 वोट वार्ड 49 : रीना, निर्दलीय – 32 वोट इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि मोहाली के मतदाताओं ने इस बार बंटे हुए जनादेश के बजाय मुख्य दावेदारों को चुनकर एकतरफा फैसला सुनाया है। यही वजह रही कि बड़ी संख्या में खड़े हुए छोटे और निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी रेस से पूरी तरह बाहर हो गए।

पिछले पांच वर्षों में 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण, ग्रामीण प्रशासन हुआ और मजबूत

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में ग्रामीण विकास और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालयों की स्थापना कर ग्रामीणों को सरकारी सेवाएं उनके गांव में ही उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों में 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण कर पंचायतों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। ग्राम सचिवालयों की स्थापना से ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, पेंशन योजनाओं की जानकारी, मनरेगा संबंधी सेवाएं, जन्म-मृत्यु पंजीकरण समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब बार-बार तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है।      पिछले 5 वर्षों में 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है। ग्राम सचिवालयों में फर्नीचर, कम्प्यूटर, इंटरनेट, पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत सहायक और डाटा एंट्री ऑपरेटर की तैनाती की गई है। कुल 1875 रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और कन्सल्टिंग इंजीनियर(सिविल) का इम्पैनलमेंट किया गया है।  राज्य स्तरीय कॉल सेन्टर एवं आनलाइन अटेण्डेन्स सिस्टम किया गया लागू      विभाग द्वारा बताया गया कि ग्राम पंचायतों को भेजी जाने वाली समस्त धनराशि का भुगतान ग्राम सचिवालय में स्थापित कम्प्यूटर से किये जाने के लिए जिओ फेन्स्ड एंड क्यू आर कोड तकनीक (Geo fenced and QR Code technique) लागू किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से धनराशि के व्यय में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित किया गया है। एआई मॉडल का प्रयोग कर व्यय का अनुश्रवण किया जा रहा है। समस्याओं के त्वरित निस्तारण एवं संचार हेतु राज्य स्तरीय कॉल सेन्टर एवं आनलाइन अटेण्डेन्स सिस्टम लागू किया गया है।    प्रदेश सरकार द्वारा निर्मित पंचायत भवन ग्रामीण प्रशासन के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इन भवनों में पंचायत बैठकों, जनसुनवाई, डिजिटल सेवाओं और विकास योजनाओं की निगरानी के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पंचायत भवनों के निर्माण से ग्राम पंचायतों को स्थायी कार्यालय मिले हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।     ग्राम सचिवालय और पंचायत भवनों का यह व्यापक नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन को नई गति देने के साथ-साथ गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। इससे ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और आम लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हुई है। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में यह उपलब्धि प्रदेश के गांवों को सशक्त, डिजिटल और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

आईटीआई प्रवेश अभियान को जनआंदोलन बनाने के निर्देश, हर प्रशिक्षणार्थी को रोजगार से जोड़ने पर जोर

भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल ने प्रदेश के सभी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के संयुक्त संचालकों, प्राचार्यों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक कर आगामी प्रवेश सत्र, प्रशिक्षण गुणवत्ता, परीक्षाओं की तैयारियों तथा रोजगार एवं प्लेसमेंट गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में संचालक कौशल विकास संचालनालय  बसंत कुर्रे एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी एमपीएसएसडीईजीबी  गिरीश शर्मा भी उपस्थित रहे। बैठक में मंत्री  टेटवाल ने एसएसआर ग्लोबल स्किल्स पार्क के उन प्रशिक्षणार्थियों के अभिभावकों से संवाद किया, जिनका चयन प्रतिष्ठित औद्योगिक समूह एसआरएफ लिमिटेड की अंतर्राष्ट्रीय इकाई में हुआ है। जुलाई 2024 बैच के तीन प्रशिक्षणार्थी वर्तमान में कंपनी की हंगरी स्थित इकाई में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मंत्री  टेटवाल ने इसे मध्यप्रदेश की कौशल विकास व्यवस्था की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने चयनित प्रशिक्षणार्थियों एवं उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। मंत्री  टेटवाल ने कहा कि प्रदेश में कौशल विकास को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गत वर्ष संचालित “चलो आईटीआई अभियान” के सकारात्मक परिणाम सामने आए थे और उपलब्ध सीटों पर 95 प्रतिशत से अधिक प्रवेश सुनिश्चित हुए थे। इस वर्ष प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में लगभग 55 हजार से अधिक सीटें उपलब्ध हैं तथा लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में और अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने का है। इसको भी शत-प्रतिशत प्राप्त किया जाए। मंत्री  टेटवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईटीआई में उपलब्ध रोजगार, स्वरोजगार, अप्रेंटिसशिप एवं उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी युवाओं और अभिभावकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। साथ ही सफल प्रशिक्षणार्थियों की प्रेरक कहानियों को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक युवा तकनीकी एवं कौशल शिक्षा की ओर आकर्षित हों। बैठक में आगामी एनसीवीटी एवं एससीवीटी परीक्षाओं की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री  टेटवाल ने प्रशिक्षण अधिकारियों से कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए तथा परीक्षा पूर्ण होने के बाद प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को रोजगार, अप्रेंटिसशिप, उच्च शिक्षा अथवा ग्लोबल स्किल्स पार्क जैसी उन्नत प्रशिक्षण व्यवस्थाओं से जोड़ने के लिए संस्थागत स्तर पर विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर एवं रोजगार सक्षम बनाना है और इस दिशा में सभी संस्थानों को परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनानी होगी।  

छात्राओं की सुरक्षा और अधिकारों पर विशेष फोकस, जनजातीय बालिकाओं को दी जा रही जानकारी

जनजातीय छात्राओं को सुरक्षा और अधिकारों के प्रति किया जा रहा जागरूक रक्षा सखी अभियान के तहत बड़वानी पुलिस दे रही महिला सुरक्षा, साइबर अपराध एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी भोपाल जनजातीय छात्राओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा एवं आत्मरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से बड़वानी पुलिस द्वारा “रक्षा सखी” अभियान चला रही है। अभियान के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। कार्यक्रम में छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों एवं साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी प्रदान की जा रही है। बड़वानी पुलिस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को अनुसूचित जनजाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना तथा महिला संबंधी अपराधों के बारे में विस्तार से अवगत कराया जा रहा है। साथ ही महिलाओं एवं बालिकाओं के संरक्षण के लिए बनाए गए कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बड़वानी के पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ला ने बताया है कि कार्यक्रम में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव एवं डिजिटल सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी जा रही है। इसके अलावा यातायात नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया जा रहा है। छात्राओं को आत्मरक्षा, आत्मविश्वास एवं किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में पुलिस सहायता प्राप्त करने के उपायों की जानकारी देते हुए उन में आत्म विश्वास पैदा किया जा रहा है। इस दौरान महिला हेल्पलाइन 1090, साइबर हेल्पलाइन 1930, डायल-112 तथा अन्य पुलिस सहायता सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका प्रभावी उपयोग किया जा सके। कार्यक्रम में छात्राओं की महिला सुरक्षा और जागरूकता से जुड़े विषयों पर सक्रिय सहभागिता दिखाई दे रही है तथा स्वयं को सुरक्षित, जागरूक और सशक्त बनाने का संकल्प भी कराया जा रहा है। बड़वानी पुलिस का “रक्षा सखी” अभियान जनजातीय एवं ग्रामीण अंचलों की बालिकाओं और महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बन रहा है।  

फाजिलनगर का नाम बदलकर पावागढ़ करने का प्रस्ताव, अब यह भगवान महावीर जी के नाम पर जाना जाएगा: मुख्यमंत्री

कुशीनगर   कुशीनगर की धरती से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास बनाम अराजकता के मुद्दे पर कहा कि पहले की सरकारों के समय उत्तर प्रदेश कट्टा-बम बनाने वालों की पहचान से जुड़ा था, जबकि आज वही उत्तर प्रदेश देश की सुरक्षा के लिए ब्रह्मोस मिसाइल बना रहा है। पिछली सरकारें निर्दोष लोगों, व्यापारियों को लूटने के लिए कट्टा-बम बनाती थीं। बेटियों की सुरक्षा में सेंध लगाती थीं, लेकिन हमने इन शोहदों को ठीक किया है। जो ठीक नहीं हुआ, बोली से नहीं माना वो गोली से जरूर मान गया है। मंगलवार को कुशीनगर में ₹424+ करोड़ की 278 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों की विकृत मानसिकता ने कुशीनगर को बीमारी, भुखमरी और बेरोजगारी दी, लेकिन डबल इंजन सरकार ने इंसेफेलाइटिस और माफिया, दोनों पर प्रभावी प्रहार करते हुए विकास, सुरक्षा और रोजगार का नया वातावरण तैयार किया है। कुशीनगर अब पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि बुलेट स्पीड से आगे बढ़ते नए उत्तर प्रदेश का प्रतीक बन रहा है। डबल इंजन सरकार के प्रयासों से कुशीनगर की तस्वीर बदल गई मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम के पुत्र कुश, भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की तपोभूमि कुशीनगर आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जबकि 9-10 वर्ष पहले यह जनपद पहचान के संकट, इंसेफेलाइटिस, माफिया राज, भूख, बेरोजगारी और अव्यवस्था से जूझ रहा था। खनन माफिया का आतंक था, किसान शोषण का शिकार था, उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता था, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं बदहाल थीं तथा फाजिलनगर व कसया क्षेत्र में मुसहर समुदाय के लोगों की भूख से मौत की खबरें आती थीं। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नया रास्ता चुना और डबल इंजन सरकार के प्रयासों से कुशीनगर की तस्वीर बदल गई। आज जिले में लगभग 90 हजार गरीबों को आवास, 3.14 लाख से अधिक परिवारों को शौचालय, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा सहित अनेक जनकल्याणकारी सुविधाएं मिल रही हैं। पहले दंगे, अपराध और अराजकता प्रदेश की पहचान बन गए थे, जबकि आज सुरक्षा, विकास और गरीब कल्याण नई पहचान है। बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। मच्छर व माफिया, दोनों समस्याओं का किया समाधान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस कुशीनगर में कभी मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय और एयरपोर्ट की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी, आज वहां अपना मेडिकल कॉलेज, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसी सुविधाएं साकार रूप ले चुकी हैं। इसी सत्र से कृषि विश्वविद्यालय का संचालन शुरू होगा और बच्चों का प्रवेश कराया जाएगा। किसानों को गन्ने का मूल्य 315 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति कुंतल दिया जा रहा है तथा भुगतान भी समय पर सुनिश्चित किया जा रहा है। इंसेफेलाइटिस की बीमारी लगभग समाप्त हो चुकी है, ठीक वैसे ही जैसे उत्तर प्रदेश से माफिया राज समाप्त हुआ है। मच्छर बीमारी लाता था और माफिया बेरोजगारी, लेकिन डबल इंजन सरकार ने दोनों समस्याओं का समाधान किया है। आज कुशीनगर की बेटियां व युवा पुलिस समेत विभिन्न सरकारी नौकरियों में चयनित हो रहे हैं तथा निवेश से पैदा हो रहे नए रोजगारों का लाभ भी उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसका श्रेय जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को देते हुए कहा कि पहले तमकुही राज और फाजिलनगर विकास नहीं, उपेक्षा और मजाक का विषय बने हुए थे, जबकि आज विधायक और सांसद के प्रयासों से विकास परियोजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। फाजिलनगर का नाम बदलकर पावागढ़ करने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे यह क्षेत्र भगवान महावीर की विरासत से जुड़कर वैश्विक पहचान प्राप्त करेगा। अच्छे जनप्रतिनिधि विकास, सुरक्षा, रोजगार और खुशहाली लेकर आते हैं तथा डबल इंजन सरकार हर किसान को उचित मूल्य, हर युवा को अवसर, हर बेटी को सुरक्षा और हर परिवार को बेहतर जीवन देने के संकल्प के साथ सतत कार्य कर रही है। समाजवादी पार्टी घोषित रूप से रामद्रोही मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण सदियों के संघर्ष, आस्था और संकल्प की विजय का प्रतीक है। 498 वर्ष पूर्व भगवान राम की जन्मभूमि पर विदेशी आक्रांता द्वारा मंदिर ध्वस्त किए जाने के बाद अनेक पीढ़ियां इसके पुनर्निर्माण के लिए संघर्ष करती रहीं, लेकिन राम मंदिर निर्माण को वास्तविक गति डबल इंजन की भाजपा सरकार के कार्यकाल में मिली। कांग्रेस आजादी के बाद चाहती तो राम मंदिर बना सकती थी, लेकिन उसने नहीं बनने दिया। समाजवादी पार्टी तो घोषित रूप से रामद्रोही रही है। ये लोग लगातार बाधाएं खड़ी करते रहे, लेकिन हमारा संकल्प अटूट था। आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बन चुका है और आधुनिक अयोध्या अपने वैभव, विकास और आध्यात्मिक भव्यता से त्रेता युग की अनुभूति कराती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों से रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक क्षण करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा था और उस अवसर पर लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे। एक वोट की ताकत से बना अयोध्या में भव्य राममंदिर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के एक वोट की ताकत का परिणाम अयोध्या, लखनऊ और दिल्ली तक दिखाई देता है। इसी जनादेश की ताकत से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 समाप्त हुई और उत्तर प्रदेश ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण केंद्र बन रहा है। जब भारत का बहादुर जवान दुश्मन की छाती पर ब्रह्मोस दागता है, तो पाकिस्तान “बचाओ-बचाओ” चिल्लाने लगता है। कुशीनगर के लोगों को अब विकास की राह पर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि डबल इंजन सरकार विकास के लिए धन की कमी नहीं आने देगी और एक-एक पैसे का हिसाब रखते हुए हर क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करेगी। कुशीनगर कभी पिछड़ा नहीं था, बल्कि पिछली सरकारों की विकृत नीतियों ने इसे बीमारी, भुखमरी और बेरोजगारी के संकट में धकेल दिया था। अब यह जनपद विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा आधुनिक बुनियादी ढांचे के बल पर बुलेट स्पीड से आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर कुशीनगर के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, सांसद देवरिया शशांक मणि, गोरखपुर के सांसद रविकिशन, विधायक तमकुही राज डॉ. असीम कुमार, विधायक फाजिलनगर सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा, जिला पंचायत … Read more

अगले साल झारखंड में हो सकते हैं पंचायत चुनाव, प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज

धनबाद. झारखंड में अगले वर्ष यानी अप्रैल-मई 2027 के महीने में पंचायत चुनाव होगा। चुनाव सही ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र देकर तैयारियां करने का आदेश दिया है। साथ ही पंचायत चुनाव को लेकर कई जानकारियों की मांग की है। इस आदेश के बाद धनबाद जिले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से जिलों को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि अप्रैल-मई 2027 में पंचायत चुनाव होना है। इस त्रिस्तरीय चुनाव के तहत जिला परिषद, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और पंचायत वार्ड सदस्य के पद पर चुनाव होगा। ऐसे में जिलों से वहां मौजूद छोटी और बड़ी मतपेटियों की संख्या, बूथों की जानकारी, पंचायतों की संख्या से संबंधित जानकारी की मांग की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, धनबाद जिले में 256 पंचायते हैं और जिला के पास करीब पांच हजार से अधिक मतपेटियां हैं। यह भी बताया गया है कि प्रत्येक बूथ के लिए दो बड़ी मतपेटी और एक छोटी मतपेटी का उपयोग किया जाएगा। इस संबंध में जिला पंचायती राज पदाधिकारी धनबाद मुकेश कुमार बाउरी ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग से आदेश पत्र प्राप्त हुआ है। उपरोक्त आदेशों पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त धनबाद से आदेश लेने के बाद कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। मतपत्र से होगा चुनाव: नगर निकाय चुनाव की तरह ही पंचायत चुनाव भी मतपत्रों के माध्यम से ही होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतपेटियों के बावत जानकारी मांगी है। इससे यह साफ हो गया है कि मतपत्रों से ही चुनाव होगा। एक मतदाता को तीन वोट देने होंगे। इनमें जिला परिषद सदस्य, मुखिया और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए वोट दिया जाएगा। चार रंगों के रहेंगे मतपत्र: निर्वाचन आयोग के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत होने वाले चुनाव में अलग-अलग पदों के लिए चार रंग के मतपत्रों को उपयोग किया जाएगा। इसमें सफेद रंग का मतपत्र पंचायत के वार्ड सदस्य के लिए होगा। इसी प्रकार से मुखिया के लिए गुलाबी, पंचायत समिति सदस्य के लिए हल्का हरा और जिला परिषद सदस्यों के लिए हल्के पीले रंग का मतपत्र होगा।