samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पीपल का पौधारोपण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में शामिल होने गरियाबंद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जिला पंचायत कार्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पीपल का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गत वर्ष ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की गई थी। यह अभियान लोगों को अपनी माताओं के सम्मान में पौधारोपण के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी पूरे देश में यह अभियान उत्साहपूर्वक संचालित किया जा रहा है तथा इसके तहत प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया। कार्यक्रम में राजिम विधायक  रोहित साहू,बिन्द्रानवागढ़ विधायक  जनक ध्रुव, जिला पंचायत अध्यक्ष  गौरीशंकर कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

एमपीएसईडीसी की पहल से 400 से अधिक विद्यार्थियों को मिला प्रशिक्षण

भोपाल  मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा उद्योग साझेदार एवं एसएसआरजीएसपी के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में 400 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान कर प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी,बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ओरिएंटल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंस और एआईएसईसीटी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, भोपाल के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य साइबर सुरक्षा और एआई एवं एमएल जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं के कौशल का विकास करना और उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना था। समापन दिवस पर आयोजित तकनीकी सत्रों में डेटा सुरक्षा, सुरक्षित कोडिंग और  साइबर खतरों की पहचान और प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। “ डेटा सिक्योरिटी फंडामेंटल्स” सत्र में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, डेटा गवर्नेंस एवं नियामकीय अनुपालन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। वहीं “सिक्योर कोडिंग एंड डेवलपर सिक्योरिटी प्रैक्टिसेज” सत्र में सॉफ्टवेयर विकास प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों के महत्व पर प्रकाश डाला गया। “सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (एसओसी), थ्रेट डिटेक्शन, मॉनिटरिंग एंड रिस्पॉन्स” विषयक सत्र में प्रतिभागियों को आधुनिक साइबर सुरक्षा तंत्र, एसआईईएम प्लेटफॉर्म, एंडपॉइंट डिटेक्शन सिस्टम तथा वल्नरेबिलिटी स्कैनिंग उपकरणों की कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया। साथ ही साइबर खतरों की पहचान और रोकथाम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर भी जानकारी साझा की गई। उल्लेखनीय है कि 400 से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश में तकनीकी कौशल विकास को प्रोत्साहित करने तथा मध्यप्रदेश को डिजिटल प्रतिभा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

भारत-पाक सीमा पर सख्ती तेज, दीपावली से पहले अवैध ढांचे गिराने की तैयारी

जैसलमेर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य और चाक-चौबंद करने के लिए बीएसएफ और आईबी एक्शन मोड में हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कड़े निर्देशों के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने एक संयुक्त रणनीति के तहत भारत-पाक बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सर्वे अभियान छेड़ दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन क्लीन’ नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हुए सभी प्रकार के अवैध निर्माणों की पहचान करना, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करना और इन निर्माणों में इस्तेमाल की गई संदिग्ध फंडिंग का पर्दाफाश करना है। अमित शाह की हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद एक्शन शुरू जैसलमेर की जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बीकानेर दौरे के दौरान एक हाई-प्रोफाइल सुरक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सीमावर्ती इलाकों में हो रही संदिग्ध गतिविधियों और अवैध निर्माणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी, जिसके तुरंत बाद इस बड़े ऑपरेशन को जमीन पर उतारा गया। सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध कब्जे या निर्माण को पूरी तरह रोकने के लिए राजस्व विभाग की विशेष टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में तैनात किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर जमीनों और इमारतों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। इस अत्यंत गोपनीय और संयुक्त विशेष सर्वे को शुरू हुए करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है। दीपावली से पहले अवैध निर्माणों होंगे ध्वस्त! अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सुरक्षा मामलों से जुड़े उच्चाधिकारियों द्वारा इस विशेष सर्वे को अक्टूबर महीने तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त योजना है कि सर्वे और जांच की फाइनल रिपोर्ट तैयार होते ही, आगामी दीपावली त्योहार से पहले-पहले सभी चिन्हित अवैध अतिक्रमणों और अवैध ढांचों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कार्रवाई को तेजी से अंजाम देने के लिए पुलिस, राजस्व और स्थानीय प्रशासन सहित सभी संबंधित महकमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर इस पूरे अभियान का सबसे संवेदनशील और अहम हिस्सा सुरक्षा जांच तथा वित्तीय फंडिंग की स्क्रूटनी होगी। सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से उन बड़े और भारी निवेश वाले व्यावसायिक या निजी निर्माणों पर केंद्रित है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक खड़े किए गए हैं। आलीशान निर्माणों की होगी अलग से जांच प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि सीमावर्ती क्षेत्र के भीतर कोई भी ऐसा निर्माण पाया जाता है जिसमें मोटी रकम खर्च की गई है, तो उसकी वित्तीय जांच अलग से की जाएगी। इस काम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) जैसी देश की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। ये एजेंसियां गहराई से यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन आलीशान या बड़े निर्माणों के पीछे वास्तविक चेहरे कौन से हैं और इस पैसे का असली स्रोत क्या है। सीमा के इतने नजदीक इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां और भारी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं, इसलिए एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।  

फैजाबाद के ‘डंका शाह’ की कहानी, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जगाई आजादी की आग

 अयोध्या  जिले के फैजाबाद शहर की शहादत की एक कहानी अनसुनी है। यह कहानी एक बागी संत मौलाना अहमदुल्लाह शाह की है जिन्होंने देश की आजादी के लिए बलिदान दे दिया था। उनको 156 साल पहले 5 जून 1858 को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के इशारे पर धोखा देकर मार दिया गया था। नगाड़ा साथ लेकर चलते थे मौलाना मौलाना अहमदुल्लाह शाह की कहानी उस साहस और बलिदान को याद दिलाती है, जिसने भारत की आजादी की 1857 की पहली महान लड़ाई को आकार दिया था। मौलाना अहमदुल्लाह शाह को 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था। कहा जाता है कि वे अपने साथ एक नगाड़ा लेकर चलते थे जिससे लोगों को उनके आगमन का संकेत मिलता था। जीवन आजादी के लिए समर्पित करने की प्रेरणा बताया जाता है कि अहमदुल्लाह शाह के आध्यात्मिक गुरु एक हिंदू साधु थे, जिन्होंने उन्हें देश को आजादी दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित करने के लिए प्रेरित किया था। उनके बारे में 'अवध एब्स्ट्रैक्ट प्रोसीडिंग्स' सहित अन्य अभिलेखीय रिकॉर्ड में लिखा गया है कि उनका प्रभावशाली व्यक्तित्व था और वे जोशीले भाषण देते थे। वे अपने भाषणों से लोगों में जोश भर देते थे और उनको अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने को प्रेरित करते थे। वे बिना थके अलग-अलग इलाकों का दौरा करते थे और जहां भी जाते थे, लोगों का समर्थन जुटाने में सफल होते थे। मौलाना को अंग्रेज मानते थे बड़ा खतरा अंग्रेज मौलाना अहमदुल्लाह शाह को एक गंभीर खतरा मानते थे। एक समय उनके लखनऊ और आगरा जैसे बड़े शहरों में प्रवेश पर रोक लगाने के आदेश भी जारी किए गए थे। उनकी मौजूदगी से ही अंग्रेजी शासन के अधिकारी सतर्क हो जाते थे। सार्वजनिक सभाओं के दौरान उन्हें सेना के जवान घेर लेते थे। सन 1857 की क्रांति के दौरान क्रांतिकारियों ने उन्हें अपनी 22वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट का नेता नियुक्त किया था। हालांकि कर्नल लेनॉक्स ने उन्हें पकड़कर मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन बागियों ने उन्हें छुड़ा लिया था। फैजाबाद उनका मुख्य केंद्र था। वे यहीं से पूरे अवध में अंग्रेजी शासन के विरोध की गतिविधियां चलाते थे। शाहजहांपुर के राजा ने कराई थी हत्या जब उनकी सेना लखनऊ की ओर बढ़ी तो वहां उनका फिर से अंग्रेजों से सामना हुआ। उन्हें विशेष रूप से चिनहट की लड़ाई (30 जून 1857) में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है। उनके बढ़ते प्रभाव के चलते वे औपनिवेशिक शासन के मुख्य निशाने पर आ गए थे। जब वे औपनिवेशिक शासन के विरोध में संघर्ष के लिए समर्थन मांगने जा रहे थे, तब शाहजहांपुर के राजा जगन्नाथ सिंह ने उनकी हत्या कर दी थी। यह घटना 5 जून 1857 को हुई थी।  

मुख्यमंत्री ने किए मां पाटेश्वरी के दर्शन

लखनऊ/बलरामपुर  गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार सुबह तुलसीपुर में देवी शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी मंदिर में दर्शन, पूजन-अर्चन किया। उन्होंने मां की आरती उतारी और सुखी, स्वस्थ व समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया।  सीएम योगी शुक्रवार को बलरामपुर पहुंचे। यहां विकास कार्यों के लोकार्पण- शिलान्यास के बाद मंदिर में रात्रि विश्राम किया। शनिवार सुबह दर्शन-पूजन के बाद मंदिर में आये श्रद्धालुओं का अभिवादन भी किया। सीएम ने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा व स्वच्छता की समुचित व्यवस्था का भी निर्देश दिया।  स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों, संतों आदि से मुलाकात भी की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने गोंडा के लिए प्रस्थान किया।  दर्शन-पूजन के दौरान महंत मिथिलेश नाथ योगी, कालीबाड़ी गोरखपुर के महंत रविंद्र दास जी, विधायक पलटूराम, कैलाश नारायण शुक्ल आदि भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ऐतिहासिक चतुर्भुज विष्णु मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सक्ती जिले के जैजैपुर विकासखंड स्थित ग्राम ठठारी पहुंचकर ऐतिहासिक चतुर्भुज विष्णु मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।  मुख्यमंत्री  साय ने भगवान विष्णु से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए आशीर्वाद मांगा। यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार यहां स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा चौथी शताब्दी की मानी जाती है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता को और अधिक विशेष बनाती है। उल्लेखनीय है कि सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय लगातार प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। वे गांवों में पहुंचकर आमजन से सीधे संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, जनसमस्याओं और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक ले रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री  साय ग्राम ठठारी में आयोजित जनचौपाल में भी शामिल हुए, जहां उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शासन की योजनाओं के लाभांवितों से चर्चा कर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित और संवेदनशील निराकरण के निर्देश दिए। इस अवसर पर जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद मती कमलेश जांगड़े, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर  अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

नीट 2026 परीक्षा: 21 जून को अभ्यर्थियों को मुफ्त बस यात्रा, CM ने दिए निर्देश

पटना नीट परीक्षा देने वाले दिन बिहार के छात्र-छात्राओं का बस भाड़ा नहीं लगेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीट परीक्षार्थियों के लिए सभी सरकारी बसों में मुफ्त सफर का ऐलान किया है। 21 जून को होने वाले नीट एग्जाम में शामिल होने वाले अभ्यर्थी बिना टिकट के ही बस का सफर कर सकेंगे। सीएम ने इस संबंध में सभी जिलों को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने शुक्रवार को नीट परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा भी की। सीएम सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को नीट परीक्षा के मद्देनजर कई अहम निर्देश दिए। सभी जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। बता दें कि 21 जून को बिहार समेत देश भर में नीट परीक्षा का आयोजन होगा। पेपर एक ही पारी में एक ही दिन होगा। पूर्व में हुए पेपर लीक और धांधली से बचने के लिए इस बार प्रशासन ने सख्त तैयारियां की हैं। बिहार में 331 सेंटर पर होगा नीट एग्जाम राज्य के 35 जिलों में नीट परीक्षा के 331 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन सक्रिय है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नीट परीक्षा के आयोजन में किसी तरह की लापरवाही ना बरतें। सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। समय से तैयारियां पूरी कर ली जाएं। परीक्षा केंद्रों पर सुविधाएं जरूर रखें सम्राट चौधरी ने कहा कि नीट एग्जाम सेंटर पर परीक्षार्थियों के लिए पेयजल, शौचालय, बिजली आपूर्ति, मेडिकल सहायता और अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाए। नीट परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को यातायात की समुचित व्यवस्था मिले। सूचना तंत्र को प्रभावी बनाया जाए। ताकि उन्हें सहूलियत हो और परेशानी का सामना ना करना पड़े। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस परीक्षा के मार्क्स के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में यूजी कोर्स के लिए एडमिशन होते हैं। पिछले महीने 3 मई को नीट यूजी एग्जाम आयोजित किया गया था। मगर पेपर लीक होने और गड़बड़ी मिलने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने फिर से परीक्षा का आयोजन करने का ऐलान करते हुए तारीख 21 जून तय की। परीक्षा का समय दोपहर 2 से शाम 5.15 बजे के बीच रखा गया है। हालांकि, परीक्षार्थियों को समय से पहले ही एग्जाम सेंटर पहुंचना होगा। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए राज्य सरकार कुछ अतिरिक्त बसों का संचालन भी कर सकती है। एग्जाम देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त सफर का ऐलान करने के बाद बिहार की सरकारी बसों में 21 जून को भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है। इससे अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने हुई नीट परीक्षा के पेपर लीक के तार बिहार से भी जुड़े थे। इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने पेपर लीक के मुख्य सरगना रॉकी उर्फ राकेश रंजन को दबोचा। उसके तार इस रैकेट के पुराने मास्टरमाइंड संजीव मुखिया से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा झारखंड, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से भी कई लोगों को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि 3 मई को हुई नीट परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी। परीक्षा से पहले ही कई परीक्षार्थियों के पास पेपर पहुंच गए थे। इसका सौदा लाखों रुपये में किया गया था।

सक्ति जिले के ठठारी गांव पहुंचे मुख्यमंत्री, चौपाल लगाकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत सक्ती जिले के ग्राम ठठारी के प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने चतुर्भुज तालाब पार स्थित विशाल बरगद के पेड़ की छांव में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। खुले वातावरण में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं, सुझाव प्राप्त किए तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। जनचौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि यह जानना भी है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। उन्होंने ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली, पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही अत्याधुनिक सीएम हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था होगी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ लेकर उपभोक्ता बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि  रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं तथा बस्तर में जनता के सहयोग से शांति और विकास का नया वातावरण स्थापित हुआ है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के समक्ष गांव की आवश्यकताओं, विकास कार्यों तथा विभिन्न योजनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने चतुर्भुज विष्णु मंदिर के निकट श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आरती घाट निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए ठठारी में बैंक शाखा खोलने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने ठठारी को नगर पंचायत बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने हेतु कलेक्टर को निर्देशित करते हुए कहा कि आने वाले समय में ठठारी को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य भी स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और सहभागिता को मजबूत करना है। जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी सीधे लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, तभी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। बरगद की छांव में सजी यह चौपाल ग्रामीणों के लिए एक यादगार अवसर बन गई, जहां उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिला। जनचौपाल में सांसद मती कमलेश जांगड़े, मती संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

संस्कृत शिक्षा व्यवस्था में सुधार की तैयारी, संचालन के लिए जल्द आएगी SOP

पटना. प्रदेश के संस्कृत स्कूलों के संचालन को ले शिक्षा विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है। संस्कृत विद्यालय अब एसओपी के माध्यम से ही संचालित होंगे। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने संस्कृत शिक्षा बोर्ड के दफ्तर को इंटर मीडिएट कांउसिल भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। संस्कृत स्कूलों को ले बन रहे एसओपी के बारे में मिली जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था की जा रही कि सब कुछ डिजिटल मोड में उपलब्ध हो। अभी संस्कृत स्कूलों के बारे में एक जगह सभी जानकारी नहीं है। आसानी से मिलेगी जानकारी कुछ सूचनाएं संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पास है और कुछ सचिवालय में। एसओपी के तहत अब संस्कृत स्कूलों को कितना अनुदान मिला और विद्यालय का संचालन कहां हो रहा यह जानकारी सहजता से मिल सकेगी। अभी यह मालूम करने में परेशानी है कि संस्कृत स्कूल बीच में ही कहां-कहां बंद हो गए। जो राजकीय संस्कृत संचालित हो रहे थे उनमें बहुतों के बंद होने की सूचना विभाग को मिलती रहती है पर विभाग के पास इसका विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं रहता। जो एसओपी बनाया जा रहा उसके हिस्से में यह जानकारी भी रहेगी कि कितने संस्कृत विद्यालय सही तरीके से संचालित हो रहे। एसओपी के माध्यम से यह गाइडलाइन उपलब्ध कराया जाएगा कि कब किस विद्यालय को अनुदान मिलना है। संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी इसके माध्यम से नियमित की जाएगी। जिस संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की संख्या छात्रों के लिहाज से काफी कम है वहां आने वाले समय में नियुक्ति की प्रक्रिया भी आरंभ होगी। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई तक एसओपी के आने की उम्मीद है।  

‘शक्तिमान’ के जैकाल का स्टार किड्स पर बयान, बोले- “2-3 साल एक्टिंग सीख लो”

शक्तिमान अपने वक्त का भारत का सबसे पसंद किया जाने वाला सुपरहीरो शो है। इस शो के किरदार आज भी लोगों को याद हैं। अब शक्तिमान में डॉक्टर जैकाल का किरदार निभाने वाले एक्टर ललित परिमू ने जाह्नवी कपूर और अनन्या पांडे जैसे स्टार किड्स को एक्टिंग सीखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जब आप एक बड़े परिवार से आते हो तो सीखने का जज्बा नहीं होता है। स्टार किड्स की ट्रोलिंग पर क्या बोले शक्तिमान के जैकाल? सिद्धार्थ कनन ने एक्टर से कहा कि अक्सर जाह्नवी कपूर, अनन्या पांडे, शनाया कपूर जैसे स्टार किड्स को इसलिए ट्रोल किया जाता है कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती है। तो इन स्टार किड्स को आप क्या सलाह देंगे? एक्टर ने कहा- एक्टिंग सीख लो। अनन्या पांडे- जाह्नवी कपूर को दी एक्टिंग सीखने की सलाह उन्होंने कहा, “सीख लो एक्टिंग। थोड़ा झुक के, 2-3 साल एक्टिंग सीखने में लगा लो। लेकिन दिक्कत ये है कि अगर आप एक बड़े परिवार से हैं तो वो सीखने का जज्बा नहीं होता है। वो तब आता है जब आप में आर्थिक कमियां हों।” अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए एक्टर ललित ने कहा कि एक्टिंग को पहले दिन से किसी बिजनेस की तरह नहीं ट्रीट किया जा सकता है, एक आखिरकार एक आर्ट फॉर्म है। लोग अपने सोशल मीडिया, फैशन या फिजिकल अपीरियंस के जरिए स्पॉटलाइट में रह सकते हैं, लेकिन एक एक्टर को एक आर्टिस्ट को अपने अंदर से बनाना पड़ता है। नए एक्टर्स की फिल्में नहीं देखते ललित परिमू ललित परिमू ने ये भी माना कि वो आज के एक्टर्स का काम नहीं देखते हैं, वो आज भी क्लासिक बॉलीवुड जैसे कि राजेश खन्ना और दिलीप कुमार की फिल्में देखते हैं। अर्जुन कपूर की ट्रोलिंग पर क्या बोले ललित परिमू? ललित अर्जुन कपूर के साथ फिल्म मुबारकां में नजर आए थे। उस फिल्म की रिलीज के बाद अर्जुन कपूर को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। ललित से अर्जुन की ट्रोलिंग को लेकर भी सवाल हुआ। उन्होंने कहा, "ये लोग खुशनसीब हैं कि ऐसे परिवार से आते हैं और एक्टर्स बन गए हैं। लेकिन ये बहुत दुख की बात है। कह नहीं सकता कि इन लोगों को बिल्कुल ही एक्टिंग नहीं आती। ये कहना न्यायसंगत नहीं होगा। ये लोग एक्टिंग कर रहे हैं और लोग अपनी जर्नी और अनुभवों से ही सीखते हैं। हमारे संजय दत्त साहब और अभिषेक बच्चन भी इस जर्नी से गुजरे हैं और समय के साथ बेहतर हुए हैं।