samacharsecretary.com

शिक्षकों के लिए खुशखबरी: तदर्थ सेवा अवधि अब पेंशन गणना में शामिल होगी

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तदर्थ (एडहॉक) सेवा अवधि को पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल करने के मामले में शिक्षकों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने कानपुर के उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा छह मई 2026 को पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को तदर्थ सेवाओं का लाभ देने से इनकार किया गया था। हाई कोर्ट के इस निर्णय से प्रभावित शिक्षकों को सीधा लाभ होगा। उन्हें हाई कोर्ट के इस निर्णय का फायदा पेंशन में मिलेगा। रमेश सिंह चौहान और तीन अन्य शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी संपूर्ण सेवा अवधि, जिसमें तदर्थ सेवाकाल भी शामिल है, को पेंशन, चयनित ग्रेड और पदोन्नति संबंधी लाभों की गणना में जोड़ने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके दावे को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के दायरे में है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि तदर्थ सेवाओं को पेंशन प्रयोजन के लिए मान्य करने का मुद्दा पहले ही नंद लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में तय हो चुका है। अदालत ने माना कि वर्तमान मामला पूर्व में दिए गए निर्णयों से पूरी तरह आच्छादित है। इसके बाद कोर्ट ने उप शिक्षा निदेशक को तदर्थ सेवा अवधि जोड़कर पेंशन की पुनर्गणना करने, समस्त बकाया भुगतान सुनिश्चित करने और आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के दो महीने के भीतर पूरी कार्रवाई संपन्न करने का निर्देश दिया। साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया गया। जाहिर है कि इस आदेश के बाद अब संबंधित शिक्षकों की तदर्थ (एडहॉक) सेवा अवधि को भी पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना में शामिल किया जाएगा।

अब बिना ट्रांजिट पास नहीं आएगी बालू-गिट्टी, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

भागलपुर. बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले बालू, गिट्टी, पत्थर, मोरंग एवं अन्य लघु खनिजों के परिवहन पर निगरानी कड़ी करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी लघु खनिज लदे वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत 10 जून से ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 20 जून से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। जिला खनिज पदाधिकारी बलवंत कुमार के अनुसार अब झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से बिहार आने वाले खनिज वाहनों को आनलाइन पंजीकरण कराकर ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा। जिला खनन विकास पदाधिकारी ने बताया कि अवैध खनन, फर्जी चालान और अनियमित खनिज परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत वाहन मालिक, ट्रांसपोर्टर और खनिज कारोबारी आईएसटीपी बिहार पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। पंजीकरण के बाद प्राप्त लागिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया जाएगा। विभाग ने समय रहते सभी संबंधित लोगों से प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। विभाग द्वारा ट्रांजिट पास शुल्क भी निर्धारित कर दिया गया है। यदि खनिज की मात्रा वजन के आधार पर दर्ज है तो 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क देना होगा। वहीं आयतन के आधार पर दर्ज खनिज के लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क लिया जाएगा। भुगतान केवल आनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। नए नियम के अनुसार खनिज स्रोत स्थल से परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज के अनुरूप ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा। इसकी वैधता परिवहन चालान की अवधि के बराबर होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास संबंधित राज्य का वैध चालान और आईएसटीपी दोनों दस्तावेज होना आवश्यक होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान दोनों में से कोई भी दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समाहरण, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली-2019 तथा संशोधित नियमावली-2026 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जुर्माना दस लाख तक हो सकती है। खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्यों के कारण खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी मात्रा में बालू, गिट्टी और पत्थर दूसरे राज्यों से मंगाए जा रहे हैं। अब तक इनके परिवहन की कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं थी, जिससे वास्तविक आंकड़े जुटाने में कठिनाई होती थी। नई आनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद राज्य में आने वाले प्रत्येक खनिज वाहन का डिजिटल रिकार्ड तैयार होगा। इससे एक ही चालान पर बार-बार ढुलाई, अवैध परिवहन और राजस्व चोरी जैसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी। सरकार को आयातित खनिजों का सटीक डाटा उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। बिहार सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था खनन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

आध्यात्मिक जगत को बड़ी क्षति, मां देवी राजरानी के ब्रह्मलीन होने से श्रद्धालु भावुक

जालंधर. जालंधर के बस्ती शेख स्थित राजेश्वरी धाम की गद्दी नशीन एवं संचालिका मां देवी राजरानी शनिवार को ब्रह्मलीन हो गईं। उनके निधन का समाचार मिलते ही श्रद्धालुओं, अनुयायियों तथा धार्मिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वर्षों से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी मां देवी राजरानी के निधन को धार्मिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। मां देवी राजरानी लंबे समय से राजेश्वरी धाम के माध्यम से धार्मिक और आध्यात्मिक सेवाओं में सक्रिय थीं। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सनातन संस्कृति, धार्मिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता के प्रसार को समर्पित किया। उनके मार्गदर्शन में राजेश्वरी धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि अनेक श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत भी रहा। समाज में पहुंचाया सकारात्मक संदेश धार्मिक कार्यक्रमों, सत्संगों और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने समाज में सकारात्मक संदेश देने का निरंतर प्रयास किया। उनके सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े और उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में सम्मान मिला। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर के बाद धाम में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगातार जारी रहा। मां देवी राजरानी के निधन पर शहर की विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। कई प्रमुख हस्तियों ने इसे समाज और धार्मिक जगत की अपूरणीय क्षति बताया। श्रद्धांजलि संदेशों में उनके सरल स्वभाव, धार्मिक समर्पण और समाज सेवा के कार्यों को याद किया गया। आज शाम होगा अंतिम संस्कार परिवारजनों और धाम प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार मां देवी राजरानी का अंतिम संस्कार शनिवार को शाम साढ़े तीन बजे बस्ती शेख श्मशानघाट में किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

नगर निगमों के लिए नए नियम लागू, 10 लाख से ऊपर के कार्यों में ई-टेंडरिंग अनिवार्य

भिलाई. अब भिलाई नगर निगम क्षेत्र में बिना स्थल निरीक्षण नहीं बनेगा कोई भी प्राक्कलन, 10 लाख से ऊपर के काम ई-निविदा से ही होंगे। उक्त आदेश सचिव के जारी आदेश में प्राक्कलन से लेकर निविदा, अनुबंध और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया तय की गई है। छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्माण कार्यों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रस्ताव से पहले स्थल निरीक्षण अनिवार्य होगा। भूमि विवादमुक्त होनी चाहिए। प्राक्कलन पूर्ण ड्राइंग-डिजाइन के साथ बने। एसओआर में रोड, बिल्डिंग, इलेक्ट्रिकल, पीएचई की तिथि का स्पष्ट उल्लेख हो। तकनीकी स्वीकृति सहायक अभियंता 50,000 रुपए तक, कायर्पालन अभियंता 50,00,000 रुपए तक, अधीक्षण अभियंता 2,00,00,000 रुपए तक रहेगी। इलेक्ट्रिकल एसओआर की तकनीकी स्वीकृति कायर्पालन अभियंता (इलेक्ट्रिकल) से ही होगी। जनसंख्या के आधार पर नगर निगमों में आयुक्त, मेयर इन काउंसिल और निगम की वित्तीय शक्तियां तय की गई है. इसमें 10 लाख से अधिक आबादी वाले निगम में आयुक्त को 1.50 करोड़ रुपए तक या इससे ऊपर के कार्यों के लिए राज्य शासन की पूर्व स्वीकृति जरूरी की गई है। 10 लाख रुपए से अधिक के सभी काम ई-निविदा के साथ कार्यालय में प्रत्यक्ष रूप से निविदा फॉर्म देना पूर्णतः बंद होगा। दरों की सहमति के बाद 3 दिन में अनुबंध हेतु पत्र जारी होगा। पत्र मिलने के 15 दिन में अनुबंध निष्पादन अनिवार्य किया गया है। अनुबंध के दिन ही कार्यादेश जारी होगा। भूमि पूजन के 3 दिन में काम शुरू करना होगा। हर माह के अंतिम मंगलवार को राज्य स्तरीय जिला नोडल अधिकारी निविदाओं की समीक्षा करेंगे।

सुशासन तिहार बना किसान निर्मल राम के लिए वरदान, किसान क्रेडिट कार्ड से मिली आर्थिक मजबूती

सुशासन तिहार से किसान निर्मल राम को मिली आर्थिक मजबूती, बना किसान क्रेडिट कार्ड अब सहकारी समिति से मिलेगा ऋण, खाद और बीज की सुविधा, खेती होगी अधिक लाभकारी रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार किसानों के लिए राहत और सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रहा है। शासन की इस पहल के तहत गांव-गांव आयोजित समाधान शिविरों में किसानों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है और उन्हें विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ सीधे उपलब्ध कराया जा रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम लटोरी निवासी किसान निर्मल राम को सुशासन तिहार के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का लाभ मिला है। केसीसी बनने से अब उन्हें खेती-किसानी के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता, खाद और बीज की उपलब्धता पहले की अपेक्षा अधिक सहज हो गई है। निर्मल राम ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें खेती के दौरान आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पूंजी की कमी के चलते खाद और बीज निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खरीदने पड़ते थे, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती थी। सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर में आवेदन देने के बाद उनका किसान क्रेडिट कार्ड तत्काल बनाकर प्रदान किया गया। अब वे सहकारी समिति के माध्यम से कृषि ऋण प्राप्त कर सकेंगे तथा उचित मूल्य पर खाद और बीज भी आसानी से उपलब्ध होंगे। इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। किसान निर्मल राम ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान गांव में ही हो रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड मिलने से उन्हें खेती के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में बड़ी सुविधा होगी और आर्थिक चिंता भी कम होगी। उल्लेखनीय है कि सुशासन तिहार के तहत प्रदेशभर में आयोजित समाधान शिविरों में किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पेंशन एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मामलों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर मिल रहा है तथा वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

हाईकोर्ट आदेश के बाद भी पेंशन विवाद जारी, बुजुर्ग कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें

 रांची  रांची नगर निगम के करीब 450 सेवानिवृत्त कर्मियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। एक ओर नगर निगम प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिल रही बढ़ी हुई पेंशन को बंद कर राज्यकर्मियों की तर्ज पर पेंशन भुगतान व्यवस्था समाप्त करने की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर अप्रैल और मई महीने की पेंशन भी अब तक नहीं मिली है। ऐसे में बुजुर्ग पेंशनधारियों के सामने परिवार चलाने, दवाइयां खरीदने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट में मामला जीतने के बाद निगम के सेवानिवृत्त कर्मियों को राज्यकर्मियों की तरह अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। बाद में हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर 2024 को भी स्पष्ट किया कि निगम कर्मियों को सेवानिवृत्ति की तिथि से ही पेंशन का लाभ दिया जाए, न कि किसी कृत्रिम समय या तिथि से। साथ ही कोर्ट ने निगम को शेष पेंशनरी लाभ का भुगतान तीन माह के भीतर करने का निर्देश दिया था हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप रांची नगर निगम पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष अवध बिहारी तिवारी ने निगम प्रशासन के प्रस्तावित फैसले का विरोध करते हुए इसे हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन देने और बकाया राशि भुगतान का निर्देश दिया है, लेकिन निगम प्रशासन अब नियमों की अलग व्याख्या कर पेंशन कम करने की कोशिश कर रहा है। इस संबंध में अवमानना याचिका भी दायर की गई है। अवध तिवारी ने बताया कि अभी हमें छठे वेतन मान के अनुसार पेंशन मिलता है, अगर निगम बिहार के तर्ज में हमें पुराना पेंशन देना शुरू करता है तो हमें प्रत्येक माह वर्तमान में मिलने वाले पेंशन से पांच से सात हजार रुपये कम मिलेंगे। 32 अधिकारियों का वेतन, पेंशनरों पर बोझ निगम में हाल के वर्षों में झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग से करीब 32 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है, जिनके वेतन भुगतान का अतिरिक्त बोझ निगम पर पड़ा है। आर्थिक दबाव के बीच निगम प्रशासन पेंशन मद में कटौती की तैयारी कर रहा है। हालांकि पेंशनधारियों का कहना है कि वित्तीय संकट का बोझ बुजुर्ग कर्मचारियों पर डालना अन्यायपूर्ण है। दवा और घर खर्च चलाना मुश्किल पेंशनधारियों का कहना है कि अप्रैल और मई महीने की पेंशन नहीं मिलने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। अधिकांश पेंशनर 70 से 85 वर्ष की आयु के हैं और नियमित रूप से दवाइयों पर निर्भर हैं। कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार पेंशन ही है। ऐसे में दो माह से भुगतान नहीं होने के कारण दवा खरीदना, बिजली-पानी का बिल चुकाना और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

मध्यप्रदेश में निवेश का बड़ा धमाका, हेलियन की पहली भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकाई पीथमपुर में होगी स्थापित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निवेश प्रयासों को मिली बड़ी सफलता हेलियन की पहली भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकाई का पीथमपुर में 8 जून को होगा भूमि-पूजन लगभग 2000 करोड़ रुपए का होगा निवेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का एक और महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निवेश संपर्क अभियानों, क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलनों तथा विदेश निवेश संवादों के माध्यम से प्रदेश में निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। इसी क्रम में विश्व की अग्रणी कंज्यूमर हेल्थकेयर कंपनी हेलियन द्वारा प्रदेश के पीथमपुर स्थित स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित की जाने वाली भारत की पहली मैन्युफैक्चरिंग इकाई का भूमि-पूजन 8 जून को मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव के यूनाइटेड किंगडम प्रवास और वहां आयोजित निवेश संवादों से सार्थक हुई है। निवेशकों के साथ हुई विस्तृत चर्चाओं और मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं के प्रभावी प्रस्तुतीकरण के बाद हेलियन ने प्रदेश में अपना निवेश विस्तार करने का निर्णय लिया। अब यह निवेश प्रस्ताव क्रियान्वयन के चरण में पहुंच चुका है, जो प्रदेश में निवेश परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। लगभग दो हजार करोड़ रुपए की लागत से स्थापित होने वाली यह परियोजना प्रदेश में साकार हो रही महत्वपूर्ण विदेशी निवेश परियोजनाओं में शामिल है। पीथमपुर के स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में 40 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाने वाली यह अत्याधुनिक इकाई मुख्य रूप से ओरल हेल्थ उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित होगी। यहां उत्पादित सामग्री घरेलू बाजार की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ एशिया-प्रशांत, मध्य-पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के अनेक देशों में निर्यात भी की जाएगी। हेलियन वैश्विक स्तर पर कंज्यूमर हेल्थकेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों में शामिल है। सेंसोडाइन, क्रोसिन, ईनो, ओट्रिविन, आयोडेक्स, सेंट्रम तथा ऑस्टोकैल्शियम जैसे लोकप्रिय उत्पादों के माध्यम से कंपनी विश्वभर में अपनी मजबूत पहचान रखती है। लगभग 170 से अधिक देशों में उपस्थिति रखने वाली यह कंपनी स्वास्थ्य एवं स्व-देखभाल (Self-Care) क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर चुकी है। कंपनी की वैश्विक उपस्थिति और मध्यप्रदेश में प्रस्तावित यह निवेश, प्रदेश के औद्योगिक वातावरण और निवेश-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र पर अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। परियोजना से लगभग 500 प्रत्यक्ष और 500 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही स्थानीय एमएसएमई इकाइयों, सप्लायर नेटवर्क, परिवहन, लॉजिस्टिक्स तथा अन्य सहायक उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे। स्थानीय प्रतिभाओं के कौशल विकास को बढावा देने के साथ कम से कम 30 प्रतिशत महिला कार्यबल की रोजगार में भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देगी। स्थानीय मानव संसाधन के उपयोग पर विशेष ध्यान दिए जाने से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने पिछले वर्षों में निवेश आकर्षित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य सरकार द्वारा विकसित औद्योगिक अधोसंरचना, निवेशक-अनुकूल नीतियां, अनुमोदनों की सरलीकृत व्यवस्था, भूमि की उपलब्धता और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण ने मध्यप्रदेश को वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। हाल के वर्षों में प्रदेश में विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश इसी बढ़ते विश्वास का प्रमाण हैं। हेलियन की यह परियोजना मध्यप्रदेश को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह निवेश प्रदेश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निर्यात संवर्धन और वैश्विक निवेश आकर्षण के प्रयासों को नई मजबूती प्रदान करेगा और विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शहरी विकास योजनाओं का लिया जायजा, कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शहरी विकास योजनाओं का किया सघन निरीक्षण  इंटेक-वेल, फिल्टर प्लांट, डब्ल्यूटीपी, नालंदा परिसर और तालाब सौंदर्यीकरण कार्यों का लिया जायजा शहरवासियों की सुविधाएं बढ़ाने निर्माणाधीन कार्यों को जल्द पूरा करने के दिए निर्देश रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज जगदलपुर में नगर निगम द्वारा कराए जा रहे किए विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों का बारीकी से अवलोकन कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने जगदलपुर के पावर हाउस चौक स्थित इंटेक-वेल व फिल्टर प्लांट तथा महारानी वार्ड में लगभग 101 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित नयामुंडा फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी लेते हुए नागरिकों को बेहतर एवं निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साव ने पीजी कॉलेज धरमपुरा में लगभग 11 करोड़ 18 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन 500 सीटर नालंदा परिसर के कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए इसका काम शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द आधुनिक अध्ययन सुविधाओं का लाभ मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी वार्ड में लगभग 79 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे पण्डरीतरई तालाब सौंदर्यीकरण कार्य तथा करीब 3 करोड़ 71 लाख रुपये की लागत से के गंगामुड़ा तालाब सौंदर्यीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने तालाबों के सौंदर्यीकरण एवं संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों तालाबों के गहरीकरण से शहर के जलस्तर में भी सुधार होगा। साव के निरीक्षण के दौरान सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पाण्डेय, पार्षदगण, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जिला प्रशासन एवं नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

प्यार और विदेश के झांसे में फंसाने की साजिश, 36 घंटे में पुलिस ने किया बड़ा रेस्क्यू

पूर्वी चंपारण पूर्वी चंपारण पुलिस ने प्रेमजाल और मानव तस्करी से जुड़े एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए महज 36 घंटे के भीतर चार नाबालिग लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में एक मौलवी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर लड़कियों को प्यार, सुनहरे भविष्य और विदेश घुमाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाने का आरोप है। चार नाबालिग लड़कियों के लापता होने से मचा हड़कंप सिकरहना अनुमंडल के शिकरगंज थाना क्षेत्र से चार नाबालिग लड़कियों के अचानक लापता होने के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच टीम का गठन किया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। मदरसे की छात्रा के जरिए संपर्क में आया आरोपी पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी असफाक मदरसे में पढ़ने वाली एक छात्रा के संपर्क में आया था। उसने पहले छात्रा का विश्वास जीता और फिर मोबाइल फोन के जरिए लगातार बातचीत कर उसे अपने प्रभाव में ले लिया। इसके बाद उसने छात्रा की सहेलियों को भी अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया। जांच में सामने आया है कि आरोपी लड़कियों को बेहतर जिंदगी, शादी और विदेश यात्रा के सपने दिखाकर बहला-फुसला रहा था। छात्रा के बयान से मानव तस्करी की आशंका हुई मजबूत मामले में बड़ा खुलासा तब हुआ जब बरामद की गई एक छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसने आरोपी को फोन पर किसी व्यक्ति से यह कहते हुए सुना था कि लड़कियों को कहीं ले जाकर बेच दिया जाएगा। इस जानकारी के बाद पुलिस को मानव तस्करी की आशंका और अधिक प्रबल लगी तथा जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। शिकायत के बाद मदरसे से हटाया गया था आरोपी जानकारी के अनुसार आरोपी की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद परिजनों ने मदरसा प्रबंधन से शिकायत की थी। शिकायत के बाद उसे मदरसे से हटा दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद आरोपी मोबाइल फोन के जरिए लड़कियों के संपर्क में बना रहा और उन्हें अपने साथ ले जाने में सफल हो गया। एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर सिकरहना एसडीपीओ अभिषेक कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी अनुसंधान, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और लगातार छापेमारी के आधार पर पुलिस ने ढाका थाना क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर चारों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। मोबाइल फोन जब्त, गिरोह से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है। अब जांच की जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित मानव तस्करी गिरोह तो सक्रिय नहीं था। पुलिस मोबाइल फोन के डेटा, कॉल डिटेल और आरोपी के संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि चारों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। समय रहते पुलिस की कार्रवाई ने चार मासूम लड़कियों को संभावित मानव तस्करी के चंगुल में फंसने से बचा लिया। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।  

नौकरी के नाम पर जाल: झालावाड़ से मुंबई तक फैला सेक्स रैकेट नेटवर्क

झालावाड़ झालावाड़ पुलिस ने नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त के सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है. इन लड़कियों से वैश्यावृत्ति करवाने के लिए बाकायदा एंग्रीमेंट करवाया जाता था. परिजनों से स्टांप पर साइन लेने के बाद इन लड़कियों को धकेल दिया जाता था. लड़कियों के परिजन जब लड़की को बेचते थे तो उन्हें मामूली रकम मिलती थी. फिर दलाल के जरिए बिकने के बाद 35 लाख रुपये तक की कीमत वसूली जाती थी. यह पूरा रैकेट मुंबई तक चल रहा था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लड़कियों को रैकेट से मुक्त करवाया है. वहीं, महिला समेत 5 दलालों को गिरफ्तार भी किया है. परिजनों ने भी साध रखी थी चुप्पी मामले की हकीकत तब पता चली जब मुंबई पुलिस ने ऐसे ही मामले में कार्रवाई की. प्रकरण के तार झालावाड़ से जुड़े और फिर पूरा मामला खुल गया. एक ही समुदाय की कई लड़कियों को शिकार बनाया गया. लेकिन सामाजिक कुरीतियों, झगड़ा प्रथा और प्रभावशाली दलालों के डर के कारण पूरा समुदाय चुप्पी साधे हुए था. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर ने स्पेशल जांच टीम गठित कर गोपनीय जांच शुरू की. बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर झांसा दलालों का गिरोह गरीब परिवारों की बच्चियों को नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर खरीदता था. इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी उम्र बढ़ाई जाती और उन्हें मुंबई समेत अन्य शहरों में वैश्यावृत्ति के लिए भेज दिया जाता था. पुलिस ने जानकारी जुटाना शुरू किया. फिर बूंदी से आए 5 आरोपियों को डिटेन कर लिया. ‎अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय के तहत मुंबई से 4, बूंदी से 1 और टोंक से 1 अन्य लड़की को भी दस्तयाब किया गया. कुल 10 लड़कियों में 7 नाबालिग और एक बालिग बताई जा रही है. जबकि दो लड़कियों की उम्र के बारे में सही जानकारी सामने नहीं आई है. स्टांप में लिखी शर्त ऐसी की पढ़कर कांप उठेंगे स्टांप से खुलासा हुआ है कि लड़कियों की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा दलाल खुद हड़प लेते थे. इतना ही नहीं, अनुबंध में यह अमानवीय शर्त भी दर्ज थी कि केवल आत्महत्या की स्थिति में ही कर्ज माफ माना जाएगा. ‎झालावाड़ पुलिस की इस कार्रवाई को मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है. फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हुई है.