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सरकारी नौकरी के नियमों में बड़ा बदलाव, दो से अधिक बच्चों पर रोक; प्रोबेशन पूरा होते ही ऑटो परमानेंट होंगे कर्मचारी

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार छह दशक बाद सरकारी नौकरी के लिए सेवा की सामान्य शर्तें बदलने जा रही है। 1961 की सेवा शर्तों में महिला अपराध में दोषी सिद्ध होने वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया था, लेकिन अब नैतिक पतन को इसमें शामिल किया गया है यानी हत्या, भ्रष्टाचार सहित अन्य गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने पर भी पात्रता नहीं रहेगी। दरअसल, परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) समाप्त करने को लेकर भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने पर अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो यह मान लिया जाएगा कि कोई आपत्ति नहीं है और संबंधित को शासकीय सेवा में स्थायी कर दिया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान यथावत रखा गया है। 24 साल पुराना नियम फिर बरकरार मध्य प्रदेश सरकार अपने सिविल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 का नया मसौदा जारी किया है। इस ड्राफ्ट में सबसे चर्चित बात यह है कि दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी की पाबंदी को हटाया नहीं गया है। यह नियम मूल रूप से 2001 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने लागू किया था। पिछले साल खुद जीएडी ने इस पाबंदी को हटाने का प्रस्ताव बनाया था। साथ ही, मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी। वहीं, नए ड्राफ्ट में सरकार उस फैसले से पलट गई है। दो बच्चों का नियम क्या कहता है? नए ड्राफ्ट के नियम पांच और छह के तहत पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई हैं। जिस उम्मीदवार की दो से अधिक जीवित संतानें हों और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ हो, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। जुड़वां बच्चों के मामले में भी राहत नहीं है। यदि पहले से एक बच्चा हो और अगली डिलीवरी में दो या ज्यादा बच्चे हों, तो वह उम्मीदवार अपात्र माना जाएगा। प्रोबेशन में बड़ा बदलाव नए नियमों में प्रोबेशन (Probation – परिवीक्षा काल) को लेकर एक अहम प्रावधान जोड़ा गया है। यदि किसी कर्मचारी की प्रोबेशन अवधि खत्म होने के छह महीने के भीतर विभाग कोई निर्णय नहीं लेता, तो उसे स्वतः स्थायी मान लिया जाएगा। यानी विभागीय लापरवाही का फायदा अब कर्मचारी को मिलेगा। भर्ती दो माध्यमों से होगी। सीधी भर्ती और पदोन्नति (Promotion)। वयस्क होने पर नियुक्ति से पहले मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहमति ली जाएगी। सीधी भर्ती से आए कर्मचारियों को प्रोबेशन पर रखा जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अधिकतम एक साल तक बढ़ाया जा सकता है। नियमों में स्पष्टता के लिए नया प्रारूप तैयार प्रदेश में शासकीय सेवा के लिए सामान्य सेवा शर्तें 1961 में निर्धारित की गई थीं। बीच-बीच में कुछ संशोधन हुए मगर विभागों को असमंजस रहता था और वे सामान्य प्रशासन विभाग से मार्गदर्शन मांगते थे। इस प्रक्रिया में अनावश्यक समय लगता था। इसे देखते हुए सरकार ने नियम में स्पष्टता के लिए नए सिरे से नियम बनाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने प्रारूप तैयार करके 15 जून तक सुझाव मांगे हैं ताकि इन्हें जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाए। अपात्रता, स्वास्थ्य परीक्षण और दो बच्चों का नियम एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता रहेगी। हालांकि, विशेष कारण होने पर इसमें सरकार छूट दे सकती है। स्वास्थ्य परीक्षण में उत्तीर्ण होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी को स्वास्थ्य परीक्षण में अयोग्य घोषित कर दिया तो कोई भी इसकी अनदेखी नहीं कर सकेगा। इसमें किसी को विवेकाधिकार से निर्णय का अधिकार भी नहीं होगा। दो बच्चे से अधिक होने पर सेवा समाप्ति का प्रविधान यथावत रखा गया है। वरिष्ठता और पदोन्नति का नया विन्यास वहीं, वरिष्ठता का निर्धारण चयन सूची में क्रम के अनुसार होगा न कि पदभार ग्रहण करने के आधार पर यानी जुलाई में यदि चयन होता है और कुछ अगस्त तो कुछ सितंबर में पदभार ग्रहण करते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वरिष्ठता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए गए व्यक्तियों की वरिष्ठता वही होगी जैसे उस संवर्ग में है, जिससे पदोन्नति की जाती है। परिवीक्षा अवधि को लेकर यह निर्धारित किया है कि जो अवधि शासन द्वारा निर्धारित की गई है, उसमें स्थायी करने या न करने को लेकर निर्णय लेना ही होगा। सीनियरिटी का नया फॉर्मूला एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति से लोग आते हैं तो सीनियरिटी का क्रम इस तरह होगा। पहले सीधी भर्ती वाले, फिर अनुकंपा नियुक्ति वाले और आखिर में पदोन्नति वाले। वहीं, यदि तीनों का नियुक्ति आदेश एक ही तारीख को निकले, तो प्रमोटेड कर्मचारी सबसे सीनियर माना जाएगा। हर साल 01 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक नई ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List – वरिष्ठता सूची) अपडेट की जाएगी। इन 4 स्थितियों में भी नौकरी नहीं मिलेगी नए ड्राफ्ट में चार और कारण जोड़े गए हैं जिनमें उम्मीदवार अयोग्य माना जाएगा। पहला, एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर (विशेष मामलों में छूट संभव)। दूसरा, शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट पाए जाने पर। तीसरा, नैतिक अधोपतन या चारित्रिक मामलों में दोषी होने पर। चौथा, केंद्र, राज्य या किसी स्थानीय निकाय से पहले बर्खास्त हो चुके कर्मचारी भी अपात्र होंगे। इसके अलावा ड्राफ्ट में पांच परिस्थितियों में सेवा समाप्त करने का भी प्रावधान है: उपयुक्त शासकीय सेवक न पाए जाने पर, जरूरी योग्यता या दक्षता न होने पर, असंतोषजनक प्रदर्शन पर, विभागीय परीक्षा पास न करने पर और नियुक्ति के समय झूठी जानकारी देने पर। FIR वाले नियम पर उठा सवाल ड्राफ्ट के एक नियम पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रावधान है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला … Read more

IAS अशोक खेमका को राहत: हाई कोर्ट ने समानता के आधार पर दिया बड़ा निर्णय

चंडीगढ़  हरियाणा कैडर के चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके जरिये खेमका को भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल किए जाने का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर यह लाभ दिया है तो अशोक खेमका को इससे वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने 29 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी थे। वर्ष 2010 में उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के कई अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एंपैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं मिला। केंद्र सरकार ने कहा था कि उन्होंने भारत सरकार में उप सचिव या उससे ऊपर के पद पर कम से कम तीन वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पूरी नहीं की है, इसलिए वे पात्र नहीं हैं। खेमका ने इस निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी। उनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने पहले भी कई आईएएस अधिकारियों को इस शर्त में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एंपैनल किया है, जबकि उनके पास भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवश्यक अनुभव नहीं था। उन्होंने 20 ऐसे अधिकारियों की सूची पेश की, जिनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और अन्य राज्यों के आईएएस अधिकारी शामिल थे। इनमें से कई अधिकारियों को शून्य केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनुभव के बावजूद अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हाई कोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार ने याचिका में उठाए गए इन तथ्यों का कोई प्रभावी खंडन नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि नियमों में छूट देने की शक्ति मौजूद है और उसका उपयोग अन्य समान अधिकारियों के पक्ष में किया गया है, तो अशोक खेमका को वही लाभ नहीं देना स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि खेमका का दावा खारिज होने के बाद भी तमिलनाडु कैडर के 1992 बैच के आईएएस अधिकारी जे राधाकृष्णन को इसी प्रकार की छूट देकर अतिरिक्त सचिव स्तर पर एंपैनल किया गया था। हालांकि, अदालत ने माना कि खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का वास्तविक लाभ नहीं दिया जा सकता। फिर भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में जिन आयोगों, प्राधिकरणों, ट्रिब्यूनलों या अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अतिरिक्त सचिव या सचिव स्तर पर एंपैनल होना वांछनीय या प्राथमिक योग्यता माना जाता है, वहां अशोक खेमका को भी उसी स्तर का अधिकारी माना जाएगा और उन्हें एंपैनल अतिरिक्त सचिव/सचिव के समान दर्जा दिया जाएगा। इस प्रकार अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें भविष्य की नियुक्तियों और अवसरों के लिए समान अधिकार प्रदान कर दिए।

SAIL-BHEL पर संकट: कमजोर प्रदर्शन के बाद महारत्न दर्जे पर सवाल

बोकारो  भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों Steel Authority of India Limited (SAIL) और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) का महारत्न दर्जा खतरे में पड़ सकता है। बीते तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने दोनों कंपनियों को चेतावनी नोटिस जारी कर वित्तीय स्थिति में सुधार लाने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, नोटिस की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान कंपनियों के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जाएगी। एक वर्ष बाद पुनः समीक्षा की जाएगी और यदि निर्धारित वित्तीय मानकों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो दोनों कंपनियों का महारत्न दर्जा वापस लेकर उन्हें नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है। 5 हजार करोड़ रुपये का चाहिए वार्षिक लाभ सरकार के नियमों के मुताबिक किसी कंपनी को महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि सेल इस अनिवार्य मानक को पूरा नहीं कर सकी है, जिसके कारण उसे चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। वहीं, भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन संचालित भेल को भी अपेक्षित वित्तीय प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण लोक उद्यम विभाग की ओर से चेतावनी दी गई है। विभाग ने कंपनी प्रबंधन को लाभप्रदता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। सेल को 2010 और भेल को 2013 में मिला था दर्जा गौरतलब है कि सेल को मई 2010 में तथा भेल को फरवरी 2013 में नवरत्न से पदोन्नत कर महारत्न का दर्जा प्रदान किया गया था। महारत्न का दर्जा मिलने से कंपनियों को निवेश और व्यावसायिक निर्णयों में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है। ऐसे में यह दर्जा बनाए रखना दोनों सार्वजनिक उपक्रमों के लिए प्रतिष्ठा और कारोबारी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

राजगीर क्रिकेट स्टेडियम की डेडलाइन तय, खेल ढांचे को मिलेगा बड़ा विस्तार

पटना बिहार में खेलों के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए ओलंपिक स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को खेल परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया। राजगीर क्रिकेट स्टेडियम के लिए तय हुई डेडलाइन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजगीर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही पटना के डुमरी खेल परिसर में विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम विकसित करने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। गांवों तक पहुंचेगी खेल सुविधाएं बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में से 4700 पंचायतों में 5266 खेल मैदानों का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष खेल मैदानों के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए पंचायत स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। मुख्यमंत्री ने VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण) के माध्यम से पंचायतों में खेल मैदानों के निर्माण पर भी जोर दिया। खिलाड़ियों को मिलेगा हर संभव सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, कोचिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए खेल प्रशिक्षण केंद्रों को और मजबूत किया जाए तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास पर जोर बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को गति दी जाए। इसके अलावा स्टेडियम तक बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि बड़े खेल आयोजनों के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की समस्या न हो। पंचायतों में खेल संस्कृति विकसित करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सव और प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से पूर्व खिलाड़ियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को मजबूत किया जाए। साथ ही जिला और प्रखंड स्तर पर खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं तथा आउटडोर स्टेडियमों के निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

लगातार तीन बार सही अनुमान के बाद फिर चर्चा में क्लेमेंट, नीदरलैंड्स को बताया विजेता

नई दिल्ली जर्मनी के गणितज्ञ योआखिम क्लेमेंट की पिछले तीन फीफा विश्व कप की भविष्यवाणी सच हुई है। 2014 में जर्मनी, 2018 में फ्रांस और 2022 में उन्होंने अर्जेंटीना को चैंपियन बनने का अनुमान लगाया था। उनके तीनों ही अनुमान सही हुए थे। फीफा विश्व कप 2026 के शुरू होने में एक हफ्ते से भी कम का समय बचा हुआ है। योआखिम क्लेमेंट के अनुमान के अनुसार इस बार नीदरलैंड्स की टीम खिताब जीतेगी। योआखिम क्लेमेंट का कहना है कि उन्होंने यह मॉडल यह दिखाने के लिए बनाया था कि विश्व कप विजेता का अनुमान लगाना लगभग असंभव है। 2014 में जब उनकी भविष्यवाणी सही निकली और जर्मनी चैंपियन बना, तो वे खुद भी हैरान रह गए थे। उन्होंने कहा, 'जब जर्मनी ब्राजील में विश्व चैंपियन बना तो मैं चौंक गया था, क्योंकि अधिकांश विशेषज्ञों का मानना था कि कोई भी यूरोपीय टीम दक्षिण अमेरिका में विश्व कप नहीं जीत सकती।' कैसे काम करता है क्लेमेंट का मॉडल? योआखिम क्लेमेंट का मॉडल कई अहम बातों को ध्यान में रखता है। जैसे- किसी देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी, उस देश की आबादी, लोगों में फुटबॉल की लोकप्रियता, फीफा रैंकिंग में टीम की स्थिति। इसके साथ ही लक का भी एलिमेंट है। क्लेमेंट इस बात पर भी जोर देते हैं कि किस्मत का रोल फुटबॉल में बहुत बड़ा होता है। किसे हराकर चैंपियन बनेगा नीदरलैंड्स? अपने मॉडल के अनुसार क्लेमेंट का अनुमान है कि नीदरलैंड सेमीफाइनल में स्पेन को हराकर फाइनल में पहुंचेगा। दूसरा सेमीफाइनल इंग्लैंड और पुर्तगाल के बीच होगा। इसमें पुर्तगाल को जीत मिलेगी। फाइनल में नीदरलैंड्स की टीम पुर्तगाल के खिलाफ जीत हासिल करेगी। हालांकि उनकी पिछली भविष्यवाणियां सही रही हैं, लेकिन क्लेमेंट खुद लोगों को उनकी भविष्यवाणी पर दांव लगाने से मना करते हैं। उन्होंने कहा, 'यह बिल्कुल लॉटरी जैसा है। अगर कोई मेरी भविष्यवाणी के आधार पर सट्टा लगाता है, तो मैं उसकी मदद नहीं कर सकता।' उन्होंने इसे सिक्का उछालने जैसा बताते हुए कहा कि अगर कोई चार बार लगातार सही अनुमान लगा ले, तो इसका मतलब यह नहीं कि अगली बार भी वही होगा। फीफा विश्व कप में नीदरलैंड्स का सफर नीदरलैंड्स ने अभी तक फीफा विश्व कप का खिताब नहीं जीता है। टीम इस बार ग्रुप एफ में है। इस ग्रुप में जापान, स्वीडन और ट्यूनीशिया की भी टीम है। 1974 और 1978 के अलावा 2010 में टीम फाइनल तक पहुंची थी। 2014 में उसने तीसरे स्थान पर फिनिश किया था। 2018 में क्वालीफाई करने में फेल रहने के बाद 2022 में नीदरलैंड ने फीफा विश्व कप में क्वार्टरफाइनल तक का सफर तय किया था। इस बार टीम का पहला मुकाबला 14 जून को जापान से है।  

बारिश ने दी गर्मी से राहत, हरियाणा के 16 जिलों में बरसे बादल, 7 में आज भी चेतावनी

हिसार. प्रदेश में तेजी से मौसम बदल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से वीरवार शाम के बाद 16 जिलों में वर्षा हुई। शुक्रवार को भी जींद में वर्षा से मौसम सुहावना हो गया। मौसम विज्ञानियों ने शनिवार को भी सात जिलों में वर्षा का अलर्ट जारी किया है। वीरवार को हुई वर्षा के चलते तापमान में तीन से चार डिग्री तक कमी आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार छह जून तक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। उसके बाद सात से 10 जून तक मौसम साफ रहने की उम्मीद है। 11 जून से फिर से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण वर्षा की संभावना बन रही है। विज्ञानियों के अनुसार वीरवार और शुक्रवार को हुई वर्षा के कारण तापमान में कमी आई है। तापमान तीन से चार डिग्री तक कम हुआ है। साथ ही कुछ जिलों में वीरवार को आए रेत के तूफान के कारण बिजली के खंभे भी टूट गए थे। इससे बिजली सप्लाई बाधित हुई जिसे रात तक ठीक किया गया है। वर्षा का यलो अलर्ट : हिसार, फरीदाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी। वर्षा (मिलीमीटर में)     अंबाला : 0.8     हिसार : 1.7     करनाल : 7.6     नारनौल : 6.5     भिवानी : 4     चरखी दादरी : 0.5     गुरुग्राम : 10     जींद : 1.7     महेंद्रगढ़ : 7     पलवल : 34     रोहतक : 1.5     सोनीपत : 15.5     यमुनानगर : 7.5     मेवात : 3.5 तापमान (डिग्री सेल्सियस में)      जिला न्यूनतम  अधिकतम अंबाला                     24.8       37.3 भिवानी                     20.5       41.5 फरीदाबाद                   26.7       37.4 गुरुग्राम                     26.1       35.5 हिसार                      25.8       39 करनाल                     22.5       36.2 नारनौल                     20.5       40 रोहतक                     22.8       43.6

चोरी से परेशान किसान बोले- बार-बार नुकसान क्यों? QR कोड दो, रकम सीधे ले जाओ

फरीदकोट. फरीदकोट के गांव पक्की कलां में ट्यूबवेल मोटरों की लगातार हो रही चोरियों से परेशान किसानों ने चोरों को ही एक अनोखा प्रस्ताव दे दिया है। किसानों का कहना है कि चोर उनकी मोटरें चोरी करने की बजाय खेतों में अपना यूपीआई (UPI) स्कैनर या क्यूआर कोड लगाकर चले जाएं, वे आपस में पैसे इकट्ठे करके उनके खाते में डाल देंगे, लेकिन उनकी कृषि मशीनरी को नुकसान न पहुंचाया जाए। यह अनोखी अपील उस समय सामने आई जब बीती रात चोरों ने गांव के खेतों से करीब 25 ट्यूबवेल मोटरें चोरी कर लीं। एक ही रात में बड़ी संख्या में मोटरों की चोरी के बाद किसानों ने अपना रोष और बेबसी जाहिर करने के लिए एक पोस्टर तैयार किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में मोटरों की चोरी उनके लिए बड़ा संकट बन जाती है। मोटरों के गायब होने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। उनका आरोप है कि बार-बार हो रही चोरियों के बावजूद न तो पुलिस और न ही प्रशासन इस समस्या पर प्रभावी रोक लगा सका है। गांव के किसानों ने कहा कि हर साल ऐसी घटनाओं के कारण उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मोटरों की चोरी से फसलों का पूरा चक्र प्रभावित हो जाता है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इसी कारण वे मजबूरी में यह कहने को विवश हुए हैं कि चोर मोटरों को हाथ न लगाएं और बदले में पैसे ले जाएं। गांव के किसान और मजदूर रात के समय खेतों में बने कमरों में रहकर मोटरों की रखवाली करते थे, लेकिन अब चोरी करने वाले गिरोहों के हथियारबंद होने के कारण लोग डर महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि अंधेरा होते ही खेत सुनसान हो जाते हैं और किसान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। बताया जा रहा है कि ये चोरी करने वाले गिरोह 10 से 12 सदस्यों के होते हैं और चोरी की गई मोटरों को तोड़कर कबाड़ियों को बेच देते हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पहले भी ऐसे मामलों में कुछ चोरीशुदा मोटरें कबाड़ियों से बरामद की जा चुकी हैं। किसानों की यह अनोखी अपील उनकी बेबसी और कृषि उपकरणों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाती है, जिसने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

फुहारों से बदला मौसम का मिजाज, बस्तर समेत कई इलाकों में 5 दिन तक राहत के आसार

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बस्तर समेत कई इलाकों में प्री मानसून बारिश शुरू हो गई है. राजधानी रायपुर को अभी राहत देने वाली बारिश का इंतजार है. मध्य इलाके- बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. इन क्षेत्रों में 42 डिग्री के करीब तापमान दर्ज हो रहा है. मौसम विभाग ने संभावना जताई कि प्रदेश में अगले 5 दिनों तक एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन की गतिविधि के साथ तेज हवा, वज्रपात और वर्षा जारी रहेगी. मौसम विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में एक दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई. इस दौरान सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान बिलासपुर में 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं सबसे कम न्यूनतन तापमान 23.4 पेंड्रा रोड में दर्ज हुआ. रायपुर में आज ऐसा रहेगा मौसम ? रायपुर में शनिवार को मौसम विभाग ने आसमान में बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है. हालांकि अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. इन इलाकों में हुई बारिश जानकारी के अनुसार प्रदेश के ओडगी में 5 सेंटीमीटर, कुआकोंडा में 4 सेंटीमीटर, बड़े बचेली में 3 सेंटीमीटर, सुकमा, बलरामपुर, तोंगपाल, कांसाबेल, मनोरा में 2-2 सेंटीमीटर बारिश हुई है. चिरमिरी, गादीरास, छिंदगढ़ में भी बारिश हुई. मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने जानकारी दी  कि छत्तीसगढ़ में लगातार नमी आ रही है. बस्तर में वर्षा भी हो रही है. मानसून के लिए तय मानकों के अनुरूप वर्षा होने और परिस्थितियों पर नजर है. मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हालात मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, पूरे गोवा, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्सों, कर्नाटक के कुछ और हिस्सों, तमिलनाडु के शेष हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिम-मध्य, पूर्व मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और यह समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ है. प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है.

धमतरी का महा-परिवर्तन, 60 करोड़ रुपए की ऐतिहासिक खरीदी के साथ तैयार होगा आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब

धमतरी का 'महा-परिवर्तन': 60 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड खरीदी और 30 हजार मीट्रिक टन का नया 'लॉजिस्टिक्स हब' ​अब नहीं भटकेगा किसान, ब्रॉडगेज रेल और आधुनिक गोदामों से बदलेगी धमतरी की तकदीर ​धान का कटोरा अब बनेगा 'वेयरहाउसिंग हब': धमतरी की नई आर्थिक उड़ान रायपुर     ​​छत्तीसगढ़ का कृषि प्रधान जिला धमतरी आज विकास और आत्मनिर्भरता के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। कभी रबी फसलों के रिकॉर्ड उपार्जन के बाद भंडारण की कमी से जूझने वाला यह जिला, आज अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और प्रशासनिक दूरदर्शिता के कारण प्रदेश के एक प्रमुख 'वेयरहाउसिंग एवं कृषि लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में उभर रहा है।       ​राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) और छत्तीसगढ़ राज्य भंडारण गृह निगम (SWC) के संयुक्त प्रयासों से जिले में 30 हजार मीट्रिक टन की अतिरिक्त वैज्ञानिक भंडारण क्षमता विकसित की जा रही है, जो धमतरी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है।     ​अतीत की चुनौती से लिया सबक               ​विगत वर्षों में धमतरी ने रबी फसलों, विशेषकर चने के रिकॉर्ड उत्पादन और उपार्जन का गवाह बना। लेकिन इस खुशी के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आई।जिले में पर्याप्त भंडारण क्षमता का न होना। मजबूरी में उपज को दूसरे जिलों के गोदामों में भेजना पड़ा, जिससे न केवल परिवहन का खर्च बढ़ा, बल्कि प्रशासनिक और सहकारी संस्थाओं पर भी भारी दबाव पड़ा।     ​इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए धमतरी प्रशासन ने जिले में ही स्थायी और आधुनिक भंडारण अधोसंरचना विकसित करने की एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू किया। ​'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' का मिला संबल      ​केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना” धमतरी के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके तहत जिले की चार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का चयन किया गया है। जिसमे ​अंवरी,​कोसमर्रा,पोटियाडीह-आमदी और ​कोलियारी शामिल है। ​इन चारों समितियों में 2,500-2,500 मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदामों का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है। इनके पूरा होते ही ग्रामीण स्तर पर ही 10 हजार मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा। ​इसके साथ ही, राज्य भंडारण गृह निगम (SWC) द्वारा धमतरी और कुरूद में 10-10 हजार मीट्रिक टन क्षमता के दो बड़े गोदाम विकसित किए जा रहे हैं। केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के पास पहले से उपलब्ध 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक की क्षमता के साथ अब धमतरी का नेटवर्क बेहद मजबूत होने जा रहा है। रिकॉर्ड खरीदी और आर्थिक समृद्धि(रबी विपणन वर्ष 2026)        ​भंडारण क्षमता में यह विस्तार हवा में नहीं, बल्कि जमीन पर बढ़ती कृषि समृद्धि को देखकर किया जा रहा है। रबी विपणन वर्ष 2026 में जिले के 9,103 किसानों से 1 लाख 16 हजार 162 क्विंटल चने की रिकॉर्ड खरीदी की गई है, जिसके एवज में 60.54 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में भुगतान करने की प्रक्रिया जारी है। चने के साथ-साथ सरसों और मसूर का भी सफल उपार्जन किया गया है। ​राइस मिलर्स और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार     ​धान मिलिंग के क्षेत्र में धमतरी हमेशा से अग्रणी रहा है, लेकिन अक्सर तैयार चावल और धान के सुरक्षित रख-रखाव की समस्या आती थी। इस नई क्षमता विस्तार से ​मिलिंग गतिविधियों में तेजी आएगी,​भंडारण का दबाव कम होगा और ​परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी कमी आएगी। ​इसके साथ ही, धमतरी में ब्रॉडगेज रेल लाइन पर जल्द शुरू होने वाला रैक संचालन जिले के विकास में चार चांद लगाने वाला है। रेल मार्ग जुड़ने से यहां का चावल और कृषि उत्पाद देश के बड़े बाजारों तक बेहद कम लागत में पहुंच सकेंगे। ​     धमतरी में विकसित हो रही वेयरहाउसिंग अधोसंरचना और जल्द प्रारंभ होने वाली ब्रॉडगेज रेल सेवाएं जिले को प्रदेश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। यह पहल रोजगार सृजन, व्यापार विस्तार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। भंडारण क्षमता बढ़ने से कृषि उपज का बेहतर प्रबंधन, परिवहन लागत में कमी और विपणन व्यवस्था में सुधार होगा। यह नई अधोसंरचना किसानों, सहकारी संस्थाओं, व्यापारियों और उद्योगों के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी। ​     ​धमतरी की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे सही समय पर सही बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का निर्माण करके एक पूरे क्षेत्र की तकदीर बदली जा सकती है। आने वाले वर्षों में, भंडारण की यह सुदृढ़ व्यवस्था और रेल कनेक्टिविटी न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगी, बल्कि धमतरी को छत्तीसगढ़ के नक्शे पर एक बड़े 'कृषि-व्यापार और लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में नई पहचान दिलाएगी।

आम की छांव में सजी मुख्यमंत्री की चौपाल, खाट पर बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं; मौके पर दिए समाधान

आम की छांव में मुख्यमंत्री की चौपाल: खाट पर बैठे, ग्रामीणों की सुनी बात, मौके पर दिए समाधान निमधा में नर्सिंग कॉलेज, मिनी स्टेडियम और मंगल भवन की घोषणा लापरवाह अधिकारियों को सख्त चेतावनी : महिलाओं को दिया ‘करोड़पति दीदी’ बनने का मंत्र स्व-सहायता समूहों की सफलता को मिली नई पहचान, मुख्यमंत्री ने किया ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आज मरवाही विकासखंड के ग्राम निमधा में एक अनूठा और आत्मीय जनसंवाद देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय गांव के बीच आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए, उनकी समस्याएं सुनीं और शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बिजली, पानी, राशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासन स्वयं गांवों तक पहुंचकर जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव है, उनका मौके पर ही समाधान किया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों और मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने जिले में नर्सिंग कॉलेज, ग्राम निमधा में मिनी स्टेडियम तथा सर्वसमाज के लिए विशाल मंगल भवन की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तीनों मांगों को तत्काल स्वीकृति प्रदान करते हुए उनकी घोषणा की। ग्रामीणों द्वारा बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याएं उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों से जानकारी ली और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएंगे। जनसंवाद के दौरान राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायत सामने आने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित राजस्व निरीक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री के इस स्पष्ट संदेश से सुशासन और जवाबदेही के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक बार फिर सामने आई। मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद करते हुए उन्हें आर्थिक प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य केवल लखपति बनना नहीं, बल्कि करोड़पति दीदी बनना होना चाहिए। महिलाओं ने उन्हें बताया कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त होने वाली राशि उनके परिवार, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है, जिसका लाभ ग्राम निमधा सहित पूरे जिले की महिलाओं को मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा की कि प्रदेश में शीघ्र ही सीएम हेल्पलाइन प्रारंभ की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध निराकरण के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जा रही है। जनचौपाल के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। महिलाओं ने विष्णु भोग चावल, ब्लैक राइस, शहद, पापड़ और लड्डू जैसे स्थानीय उत्पादों की आकर्षक टोकरी मुख्यमंत्री को भेंट की। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की सराहना करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने सरई के दोना-पत्तल में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों – जामुन, कोईलार भाजी, बेल का शरबत, आम की चटनी और आमपना का स्वाद भी लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की प्रेरणादायक सफलता कहानियों पर आधारित ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास, परिश्रम और सफलता का जीवंत दस्तावेज है, जो हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह दौरा केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि लोगों के बीच बैठकर उनकी वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और राज्य सरकार इसी संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सुसमीरा पैकरा, उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, नगर पालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।