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संभागीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री साय सख्त, कृषि व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश

गरियाबंद/रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद-बीज उपलब्ध कराया जाए तथा इसकी जवाबदेही संबंधित कलेक्टरों की होगी। मुख्यमंत्री साय आज गरियाबंद जिला पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में रायपुर संभाग के जिलों की संभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लाभों की जानकारी दें, ताकि आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो सके। उन्होंने अवैध रेत उत्खनन के विरुद्ध तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस मैराथन समीक्षा बैठक में रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा क्षेत्र में पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तेल नदी पर एनीकट निर्माण के लिए 7 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेयजल जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए तथा प्रशासन के प्रति जनता की शिकायतों को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए। सीएम ने राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में तेजी लाने, टीबी मुक्त पंचायतों के निर्माण, आयुष्मान कार्डों का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने, जल जीवन मिशन के कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं बल्कि शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने और जनता से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने का माध्यम है। इसी उद्देश्य से वे स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक प्राप्त कर रहे हैं। समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आयुष्मान भारत योजना, जल जीवन मिशन, बिहान, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा धान उपार्जन एवं उठाव की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान कार्ड बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शिक्षा की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूलों में सीखने के स्तर में सुधार, नियमित मॉनिटरिंग तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है, वहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और देश में लागू नए तीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और नशा मुक्ति अभियान को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, रायपुर संभागायुक्त श्याम धावड़े, आईजी अमरेश मिश्रा सहित संबंधित जिलों के जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नगर निगमों में बढ़ी जवाबदेही, पंजाब के कमिश्नरों और ADC डेवलपमेंट को मिले सख्त आदेश

लुधियाना. लोकल बॉडीज विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी का चार्ज संभालते ही धनश्याम थोरी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने पंजाब के सभी नगर निगम कमिश्नरों को ग्राऊंड लैवल पर उतरने के निर्देश दिए हैं जिसके चलते पंजाब के सभी नगर निगम कमिश्नर व ए.डी.सी. डिवेल्पमेंट हफ्ते में 3 दिन सुबह एक घंटा फील्ड में नजर आएंगे। इस नए सिस्टम के तहत हर कमिश्नर को हर सोमवार सुबह 7 से 8 बजे तक फील्ड में रहने के लिए बोला गया है ताकि ग्राऊंड जीरो पर हालात का जायजा लेकर समस्याओं का समाधान करने की दिशा में कदम उठाया जाए। सी.एम., चीफ सैक्रेटरी से लेकर मंत्री तक वीडियो कॉल पर करेंगे चैकिंग थोरी द्वारा नगर निगम कमिश्नरों व ए.डी.सी. डिवैल्पमैंट पर हफ्ते में 3 दिन सुबह एक घंटा फील्ड में जरूर जाने की जो शर्त लगाई गई है, उस पर अमल होने बारे क्रॉस चैकिंग करने का भी फार्मूला लागू कर दिया गया है जिसके तहत प्रिंसीपल सैक्रेटरी खुद वीडियो कॉल पर रहेंगे और इसका लिंक सीएम, चीफ सैक्रेटरी से लेकर मंत्री तक होगा।

स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए अहम खबर: कल से शुरू होगी ट्रांसफर आवेदन प्रक्रिया, 3 साल की सेवा की शर्त

भोपाल. स्वास्थ्य विभाग के अफसर-कर्मचारियों की अब ट्रांसफर में मनमानी नहीं चलेगी। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SAP) जारी की है। जिसके तहत अब एक स्थान पर तीन साल की सर्विस को जरूरी कर दिया है। तीन साल की सर्विस पूरी कर चुके अफसर-कर्मचारियों का ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसमें भी अफसर-कर्मचारी मनपसंद जिले या गृह क्षेत्र के आसपास तबादला नहीं करा पाएंगे। इनका स्वेच्छा से किया जाएगा तबादला स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि करंट पोस्टिंग के दौरान सिर्फ गंभीर बीमारी, दिव्यांग, उनके आश्रित की देखभाल, विधावा, परित्यक्ता महिला, सिंगल मदर या फादर बच्चों की परवरिश या एक स्थान पर पति-पत्नी तबादला चाहते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जाएगा।  8 से 12 जून तक ऑनलाइन लिए जाएंगे आवेदन स्वास्थ्य विभाग ने अफसर-कर्मचारियों से पांच दिन में आवेदन मांगे हैं। इसके लिए 8 से 12 जून तक की तारीख जारी है। इस बीच अफसर-कर्मचारी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  ई-एचआरएमआईएस पोर्टल पर होगी पूरी प्रोसेस ट्रांसफर की पूरी प्रोसेस ई-एचआरएमआईएस पोर्टल के जरिए की जाएगी। किसी भी पद के लिए ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं किया जाएगा।

“माफ करना ही सबसे बड़ी जीत है”ऑस्कर वाइल्ड का गहरा संदेश

अक्सर हम सोचते हैं कि माफ करना एक कमजोरी है, लेकिन ऑस्कर वाइल्ड इसे एक चालाकी भरी जीत की तरह देखते हैं. जब कोई आपका बुरा करता है, तो वह उम्मीद करता है कि आप भी गुस्सा करेंगे, बदला लेंगे या दुखी होंगे. जब आप ऐसा नहीं करते और उसे माफ कर देते हैं, तो आप उसका पूरा गेम खराब कर देते हैं. यह उन्हें परेशान क्यों करता है? उन्हें कोई भाव नहीं मिलता: दुश्मन चाहता है कि आप उसे गंभीरता से लें. जब आप उसे माफ कर देते हैं, तो आप बिना कुछ कहे यह जता देते हैं कि वह आपके लिए इतना महत्वपूर्ण ही नहीं है कि आप उस पर अपना समय बर्बाद करें. आप शांत रहते हैं, वे नहीं: जब आप माफी की राह चुनते हैं, तो आप अपनी मानसिक शांति बनाए रखते हैं. दूसरी ओर, आपका दुश्मन इस बात से अंदर ही अंदर जलता रहता है कि उसे आपकी तरफ से वह प्रतिक्रिया नहीं मिली जो वह चाहता था. आपकी जीत: दुश्मन को हराने का मतलब सिर्फ उसे लड़कर पछाड़ना नहीं होता.  अपनी गरिमा (Dignity) बनाए रखना और नकारात्मकता को खुद से दूर कर देना ही आपकी सबसे बड़ी जीत है. निष्कर्ष: संक्षेप में, वाइल्ड कहना चाहते हैं कि अपनी ऊर्जा को नफरत में खर्च करने के बजाय उसे माफ कर आगे बढ़ जाना, दुश्मन को सबसे ज्यादा चुभता है. यह उन्हें यह अहसास कराता है कि आप उनसे कहीं अधिक बेहतर और मजबूत इंसान हैं. ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) कौन थे? ऑस्कर वाइल्ड (1854–1900) आयरलैंड के एक महान कवि, नाटककार और कहानीकार थे. वे 19वीं सदी के सबसे चर्चित लेखकों में से एक माने जाते हैं.  वे अपनी हाजिरजवाबी (Wit) और व्यंग्यपूर्ण (Sarcastic) शैली के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं.  वे अपनी बातों को बहुत कम शब्दों में लेकिन गहरा अर्थ छिपाकर कहने में माहिर थे, जिससे वे आज भी साहित्य की दुनिया में बहुत पसंद किए जाते हैं.

खेल नर्सरियों पर गहन पड़ताल, हिसार में कोचों की भूमिका भी जांच में शामिल

हिसार खिलाड़ियों को निखारने और उन्हें खेल की बारीकियों से परिचित कराने के उद्देश्य से स्थापित खेल नर्सरियों की अब गहन पड़ताल शुरू हो गई है। खेल विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया है कि कहीं इन नर्सरियों की आड़ में केवल औपचारिकताएं ही तो पूरी नहीं की जा रहीं। इसी क्रम में हिसार जिले की 169 खेल नर्सरियों की जांच शुरू कर दी गई है। जिला खेल अधिकारी नरेश सैनी के नेतृत्व में गठित टीम ने जांच का जिम्मा संभाल लिया है। जांच को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए इसमें विभिन्न खेलों के अनुभवी कोचों को शामिल किया गया है, ताकि हर नर्सरी का मूल्यांकन उसके खेल विशेष के मानकों पर किया जा सके। जांच शुरू होते ही मचा हलचल गत सप्ताह जैसे ही जांच प्रक्रिया शुरू हुई, नर्सरियों में कार्यरत कोचों के बीच हलचल तेज हो गई। एक-दूसरे से संपर्क साधकर वे जांच के मानकों और पूछे गए बिंदुओं की जानकारी जुटाने में लगे हैं। जिन नर्सरियों की जांच पूरी हो चुकी है, वहां के कोचों से अन्य लोग विस्तार से जानकारी ले रहे हैं। यह पहला अवसर नहीं है जब खेल नर्सरियों की जांच की जा रही है। पूर्व वर्षों में हुई जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आई थीं, जिनकी रिपोर्ट निदेशालय को सौंपी गई थी और कई खेल नर्सरियों पर निदेशायल ने संज्ञान भी लिया था। पुराने इसी अनुभव के आधार पर इस बार जांच को और अधिक गहराई से अंजाम दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य, प्रतिभा को मिले सही मंच सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि उभरती खेल प्रतिभाओं को वे सभी सुविधाएं मिलें, जिनके लिए ये नर्सरियां स्थापित की गई हैं। यदि खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण और संसाधन मिलते हैं, तो वे प्रदेश और देश के लिए पदक जीतकर गौरव बढ़ा सकते हैं। हिसार के जिला खेल अधिकारी नरेश सैनी ने कहा कि निदेशालय के दिशा-निर्देश पर खेल नर्सरियों की जांच की जा रही है। पिछले करीब एक सप्ताह से टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। जांच दल में विभिन्न खेलों के कोचों को शामिल किया गया है।  

झाड़ू से जुड़े वास्तु नियम: घर में सुख-समृद्धि के आसान उपाय

वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू न केवल सफाई का एक उपकरण है, बल्कि इसे माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इसलिए, घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए झाड़ू का उपयोग करते समय कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है.   झाड़ू लगाने की सही दिशा और तरीका वास्तु के अनुसार, घर में झाड़ू लगाने की प्रक्रिया का विशेष महत्व है. सफाई हमेशा घर के मुख्य द्वार से शुरू करके घर के भीतरी हिस्सों (जैसे रसोई, बेडरूम, और अन्य कमरों) की ओर होनी चाहिए.  माना जाता है कि प्रवेश द्वार सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है, इसलिए वहां से सफाई शुरू करने से घर में खुशहाली और सकारात्मकता का प्रवेश होता है. इसके विपरीत, घर के अंदर से बाहर की ओर झाड़ू लगाना वर्जित माना गया है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इससे घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है और नकारात्मकता का प्रभाव बढ़ सकता है. झाड़ू लगाने का उचित समय वास्तु शास्त्र में झाड़ू लगाने के लिए सुबह का समय, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त, सबसे शुभ और उत्तम माना गया है. शाम के समय या सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाना शुभ नहीं माना जाता. यदि किसी वजह से शाम को झाड़ू लगानी भी पड़े, तो यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि घर का कचरा उस समय बाहर न फेंका जाए, क्योंकि शाम के समय कचरा बाहर फेंकने से आर्थिक हानि की संभावना बढ़ जाती है. ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें और सावधानियां सफाई करने के बाद कचरे को घर में लंबे समय तक जमा करके नहीं रखना चाहिए, इसे तुरंत बाहर फेंक देना चाहिए, क्योंकि जमा कचरा दरिद्रता को आमंत्रित करता है. झाड़ू का अपमान कभी नहीं करना चाहिए; इसे कभी भी पैर न लगाएं. न ही इसे घर में कहीं भी खुले में खड़ा रखें. वास्तु नियमों के अनुसार, झाड़ू को हमेशा छिपाकर या किसी ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां बाहर से आने वाले लोगों की नजर उस पर न पड़े. जब भी आपको नई झाड़ू का उपयोग शुरू करना हो, तो शनिवार का दिन इसके लिए बहुत शुभ माना जाता है.

खेतों में जानलेवा खतरा, 189 कीटनाशक सैंपल फेल, विधानसभा में पेश हुआ डेटा

जयपुर  दो साल में 535 किसानों की मौत, 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा और 189 घटिया कीटनाशक सैंपल… आंकड़े थोड़े चौकाने वाले हैं लेकिन राजस्थान में सवाल उठा रहे हैं। विधानसभा में पेश किए गए ये आंकड़े केमिकल-आधारित खेती के खतरनाक पहलू और सुरक्षा में कमी व नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 और जनवरी 2026 के बीच खेतों में काम करते समय कीटनाशकों के संपर्क में आने से किसानों की मौत हुई। बीकानेर में सबसे ज्यादा 57 मौतें हुईं, इसके बाद चुरू (56), हनुमानगढ़ (42) और झालावाड़ (42) का नंबर आता है। जोधपुर में 38 मौतें हुईं। श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 मौतें हुईं। मुआवजे में भी सामने आई कमी इस दौरान राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजे के तौर पर 5.1 करोड़ रुपये दिए। हालांकि, अलग-अलग जिलों में मुआवजे की रकम में काफी अंतर था और इससे मौतों की रिपोर्ट और मंजूर किए गए दावों के बीच की कमियां सामने आईं। बीकानेर को मुआवजे के तौर पर 92 लाख रुपये, चुरू को 72 लाख रुपये, जोधपुर को 58 लाख रुपये और हनुमानगढ़ को 48 लाख रुपये मिले। श्रीगंगानगर को 18 लाख रुपये मिले। झालावाड़ में 42 मौतें होने के बावजूद, वहां भी सिर्फ 18 लाख रुपये ही मिले। डीग में आठ मौतें हुईं लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला, जबकि कोटा में 11 मौतें हुईं और 2 लाख रुपये मिले। अधिकारियों ने इस अंतर की वजह दावों की जांच और मंजूरी की प्रक्रियाओं को बताया। नहीं बताई हर मौत की सटीक वजह कृषि विभाग के रिकॉर्ड में हर मौत की सटीक वजह नहीं बताई गई थी। इस डेटा में कीटनाशकों के इस्तेमाल से जुड़े खेती के कामों के दौरान हुई मौतें शामिल थीं और इसमें सिर्फ वही मामले थे जिनकी रिपोर्ट अधिकारियों ने दी थी और जिनकी पुष्टि की थी। किशनपोल के विधायक अमीन कागजी ने कहा, "अगर रोजमर्रा के खेती के कामों के दौरान सैकड़ों किसान मर रहे हैं तो सरकार सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। हमें जवाबदेही, कीटनाशकों के लिए सख्त नियम और पूरे राजस्थान में किसानों के लिए एक व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम की जरूरत है।" कीटनाशक के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल मौतों के इन आंकड़ों के साथ विधानसभा से एक और चिंताजनक जानकारी सामने आई। उसी दो साल की अवधि में 189 कीटनाशक के नमूने क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए। पूरे राजस्थान से इकट्ठा किए गए 5,570 कीटनाशक के नमूनों में से 5,521 का विश्लेषण किया गया। जहां 5,332 नमूने तय मानकों पर खरे उतरे, वहीं 189 घटिया क्वालिटी के पाए गए। क्वालिटी की जांच के बाद अधिकारियों ने 282 नोटिस जारी किए, 14 कोर्ट केस दर्ज किए, 14 लाइसेंस सस्पेंड किए और 22 लाइसेंस रद कर दिए। घटिया क्वालिटी वाले कीटनाशक नमूनों की सूची में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सबसे ऊपर रहे, जहां हर जगह 17-17 नमूने खराब पाए गए। इसके बाद बीकानेर (13), कोटा (10) और भीलवाड़ा (9) का नंबर आता है। श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा 34 नोटिस भी जारी किए गए, जिसके बाद बीकानेर (20), हनुमानगढ़ (19) और चूरू (17) का स्थान रहा। 14 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें बीकानेर में पांच और श्रीगंगानगर में तीन मामले शामिल थे। कीटनाशक को लेकर खड़े होते सवाल ये आंकड़े भारत में कीटनाशकों से जुड़े खतरों की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। ज्यादा पैदावार वाली खेती में लंबे समय से केमिकल वाले कीटनाशकों पर बहुत ज्यादा निर्भरता रही है, लेकिन जानकारों ने बार-बार चेतावनी दी है कि सुरक्षा के अपर्याप्त साधनों, असुरक्षित तरीके से इस्तेमाल, जरूरत से ज्यादा छिड़काव और खराब क्वालिटी के एग्रोकेमिकल्स की वजह से खेत जहरीली जगहों में बदल सकते हैं। इंसानी सेहत को होने वाले खतरों के अलावा, कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल का संबंध मिट्टी की क्वालिटी खराब होने, पानी के दूषित होने, जैव-विविधता के नुकसान और परागण करने वाले व फायदेमंद कीड़ों की आबादी घटने से भी जोड़ा गया है। इससे केमिकल पर बहुत ज्यादा निर्भर खेती के टिकाऊपन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अच्छी शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर दें जोर: राज्यपाल बागडे

 जयपुर राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि अच्छी शिक्षा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता कैसे बढ़े, इस पर भी विशेष रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में नैतिकता और सहनशीलता के गुण विकसित करने पर विशेष ध्यान दे।  उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रकाश पुंज होते है। ज्ञान का पूरे समाज में प्रसार यहीं से होता है। इसलिए उन्हें उत्कृष्ट बनाने लिए सभी मिलकर कार्य करें। राज्यपाल श्री बागडे रविवार को लोकभवन से महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के 23 वें स्थापना दिवस पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि वह विरले संत थे। उनके नाम पर विश्वविद्यालय में भवन निर्माण अच्छी पहल है। वह ऐसे संत थे जो प्रचार प्रसार से दूर रहते थे। उन्होंने कभी अपनी फोटो तक नहीं खिंचवाई। अपने चरण छूने से भी वह मना करते थे। ऐसे आदर्श संतों से प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे ही एक महापुरुष गीता प्रेस के जरिए देश में संस्कृति और संस्कारों के प्रसार की अभूतपूर्व भूमिका निभाने वाले  हनुमान प्रसाद पोद्दार जी थे।  गोविंद वल्लभ पंत जी उन्हें भारत रत्न पुरस्कार देना चाहते थे और परन्तु उन्होंने लेने से मना कर दिया। श्री बागडे ने विश्वविद्यालय भवनों का नाम संत, महात्माओं के नाम पर किए जाने की सराहना की परंतु यह भी कहा कि जिन महापुरुषों, संतों के नाम पर भवनों के नाम रखे गये हैं, उनके बारे में संक्षिप्त और सार्थक परिचय पुस्तिका भी प्रकाशित हो ताकि नई पीढ़ी को उनके बारे में निरंतर जानकारी मिलती रहे। उन्होंने कहा कि बीकानेर में महाराजा गंगासिंह जी के समय खेजड़ी को काटने पर रोक का कानून बना था। राज्य सरकार ने भी खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाया है। लोकभवन स्तर पर पिछले वर्ष सर्वपल्ली राधाकृष्ण आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 300 से अधिक खेजड़ी के पेड़ लगाए गए। हमारा प्रयास है कि खेजड़ी का एक ऐसा पार्क विकसित किया जाए ताकि इस मरुभूमि के कल्पवृक्ष के बारे में जागरूकता का प्रसार हो। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की इस वृक्ष से इसीसे और निकटता होगी। राज्यपाल ने गंग नहर निर्माण शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पानी की बचत ही इसका निर्माण है। पानी बचाने के लिए जागरूकता का प्रसार होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राजस्थान के पारंपरिक पेड़ पौधों और जल संरक्षण से जुड़ी संस्कृति से जुड़ी किसी परियोजना पर कार्य करने की भी आवश्यकता जताई। केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का जो संकल्प देश के प्रधानमंत्री की पहल पर लिया गया है, उसकी पूर्ति युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ज्ञान परंपरा के आलोक में भारतीय संस्कृति से जुड़े मूल्यों पर कार्य करने की आवश्यकता जताई। उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि  गंगनहर योजना के शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण के महती काम आरंभ हुए हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा में राजस्थान में किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी और कहा कि सरकार का प्रयास है कि उच्च शिक्षा गुणवत्ता और प्रसार में राजस्थान अग्रणी बने। इससे पहले कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने विश्वविद्यालय गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री बागडे ने विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र, आचार्य तुलसी भवन, विज्ञान भवन, करणी भवन, कला भवन, रामसुखदास जी भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन के साथ विश्वविद्यालय के हुए एमओयू के लिए बधाई दी और कहा कि इससे विद्यार्थियों को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के नवीनतम ज्ञान, कौशल विकास का लाभ मिलेगा।

निवेश प्रवाह बढ़ने के संकेत, SBI-कोटक रिपोर्ट में बड़े पूंजी इनफ्लो का अनुमान

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया नीतिगत घोषणाओं और निवेश संबंधी सुधारों से भारत में 75 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आ सकती है। एसबीआई रिसर्च और कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन सुधारों से विदेशी निवेश बढ़ेगा, रुपये को मजबूती मिलेगी और सरकारी उधारी की लागत कम हो सकती है। एसबीआई का अनुमान है कि आरबीआई के उपायों से कम से कम 40 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है, जबकि कोटक सिक्योरिटीज ने 50 से 75 अरब डॉलर तक पूंजी प्रवाह की संभावना जताई है। दोनों संस्थानों का मानना है कि अगस्त में मौद्रिक नीति समिति रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रख सकती है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.9 प्रतिशत था। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए कमजोर वैश्विक मांग, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को जिम्मेदार बताया है। वहीं खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। पीएम ने आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ किया विमर्श प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक उथल पुथल के बीच आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्यों के साथ भारत की आर्थिक वृद्धि को और गति देने के उपायों पर विचार विमर्श किया और सुझाव लिए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए विभिन्न सुझावों और नीतिगत कदमों पर विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही जीवन की सुगमता और कारोबार की सुगमता को बेहतर बनाने से जुड़े सुधारों पर भी मंथन हुआ। इस समय वैश्विक पटल पर पश्चिम एशिया का संघर्ष एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बैठक के दौरान इस भू-राजनीतिक संकट को लेकर भी गंभीरता से चर्चा हुई। पीएम-ईएसी के सदस्यों ने पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अपना आकलन प्रधानमंत्री के सामने पेश किया। यह आकलन सरकार को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नीतियां तैयार करने में मदद करेगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और असमान विकास दर जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। बैठक में पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास भी मौजूद रहे। वर्तमान में ईएसी-पीएम के अध्यक्ष एस महेंद्र देव हैं। परिषद में तीन पूर्णकालिक सदस्य और 11 अंशकालिक सदस्य शामिल हैं। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए यह 7.7% रह सकती है। आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था की वृद्धि के प्रमुख चालक बने हुए हैं। वैश्विक संकट में विकास की रणनीति पीएम व आर्थिक सलाहकार परिषद के बीच हुई इस बैठक में मुख्य रूप से उन रणनीतियों पर मंथन किया गया, जो भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी तेजी से आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल नीतियां बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार करना भी जरूरी है।  

अब नहीं चलेगी मनमानी! पंजाब में हूटर और सायरन लगाने वालों पर होगी कार्रवाई

जालंधर/चंडीगढ़. यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए पंजाब पुलिस ने निजी वाहनों पर हूटर, सायरन और फ्लैशर के अवैध उपयोग के खिलाफ पांच दिवसीय राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया, जिसके दौरान 29 हजार से अधिक वाहनों की जांच की गई। यह व्यापक अभियान पूरे राज्य में 2 जून 2026 से शुरू किया गया था। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डी.जी.पी.) गौरव यादव के निर्देशों पर चलाए गए इस अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले तथा बिना किसी अधिकार के हूटर, सायरन, फ्लैशर या अन्य किसी भी अवैध संकेतक उपकरण का उपयोग करने वाले निजी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। विशेष पुलिस महानिदेशक (स्पैशल डी.जी.पी.) कानून एवं व्यवस्था प्रवीण सिन्हा ने अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे उपकरण केवल आपातकालीन वाहनों और आवश्यक सेवाओं के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि निजी व्यक्तियों को इनका दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पांच दिवसीय अभियान के परिणाम साझा करते हुए स्पेशल डीजीपी ने बताया कि पुलिस टीमों ने कुल 29,324 वाहनों की जांच की। जांच के दौरान 52 अवैध हूटर, 10 सायरन और 403 फ्लैशर वाहनों से हटाए गए। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले 4,221 वाहनों के चालान किए गए तथा 48 वाहनों को जब्त भी किया गया। उल्लंघनकत्र्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए प्रवीण सिन्हा ने कहा कि यह अभियान पूरे राज्य में आगे भी जारी रहेगा और फ्लैशर, सायरन या हूटर का अनधिकृत उपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के 137वें दिन भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही। पुलिस टीमों ने आठ हथियारों सहित 320 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जिससे अभियान शुरू होने के बाद से अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या 34,532 हो गई है। इसके अतिरिक्त 97 व्यक्तियों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की गई, जबकि 13 व्यक्तियों को सत्यापन और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। पुलिस ने अभियान के दौरान सात भगोड़े अपराधियों (पीओ) को भी गिरफ्तार किया।