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5 राज्यों में फैला ड्रग नेटवर्क ध्वस्त, सिरसा में एएनटीएफ ने पकड़ी करोड़ों की खेप

 जयपुर राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार कार्रवाई करते हुए नशे के खिलाफ अपने अभियान में एक और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में मणिपुर से उत्तर भारत के रास्ते राजस्थान लाई जा रही करीब 90 किलोग्राम अवैध अफीम के दूध की खेप जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 4.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। हरियाणा के सिरसा जिले में हरियाणा पुलिस के सहयोग से अंजाम दी गई यह कार्रवाई हाल के वर्षों में एएनटीएफ की सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाइयों में गिनी जा रही है। राजस्थान को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का कहर अब नशे के सौदागरों पर वज्र बनकर टूटा है। एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि  उत्तर-पूर्वी राज्यों से उत्तर भारत में आ रही नशे की बड़ी खेपों को रोकने के लिए 'मणिपुर मॉड्यूल' पर तकनीकी अन्वेषण शुरू किया गया था। महीनों की अथक मेहनत और 5 राज्यों में फैले जाल को काटकर एएनटीएफ ने यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। दो महीने तक पकाई खिचड़ी: साए की तरह पीछे लगी रही एएनटीएफ एएनटीएफ को मणिपुर और उत्तर-पूर्वी राज्यों से राजस्थान में भारी मात्रा में मादक पदार्थ लाए जाने का इनपुट मिल रहा था। आईजी श्री विकास कुमार ने अपनी विशेष खुफिया टीमों को तीन बार मणिपुर भेजा, जहां टीमों ने 10-10 दिन कैंप कर पूरे इलाके का सर्वे किया। इस दौरान पाली निवासी सुखराम विश्नोई रडार पर आया, जो लगातार मणिपुर और राजस्थान के चक्कर काट रहा था। इस बार जब सुखराम मणिपुर गया, तो एएनटीएफ की टीमें साए की तरह उसके पीछे लग गईं। शातिर सुखराम लगातार अपने फोन, गाड़ियां और रास्ते बदलता रहा, लेकिन एएनटीएफ का इरादा नहीं बदल सका। मौज-मस्ती, भगवत भक्ति और पुलिस की पहेली मणिपुर से नशे का सौदा फाइनल कर सुखराम अपने ऐश-ओ-आराम के ठिकाने लखनऊ उत्तर प्रदेश पहुंचा। वहां उसने अपनी एक महिला मित्र को बुलाया और उसके साथ नैनीताल तथा प्रसिद्ध कैंची धाम की यात्रा कर जीवन के आनंद लेता रहा। एएनटीएफ इस पहेली को सुलझाने में जुटी रही कि जिस गाड़ी में करोड़ों का नशा होने का शक है, उससे यह जोड़ा खुलेआम घूम कैसे रहा है? आखिरकार, महिला मित्र बस से जयपुर के लिए रवाना हुई और सुखराम अपनी मिजोरम नंबर की कार से अलग रास्ते से जयपुर की तरफ बढ़ा। फोन बदले, गाड़ियां बदलीं, रास्ते बदले… लेकिन नहीं टूटा पुलिस का पीछा जयपुर के नजदीक नाकाबंदी कर एएनटीएफ ने सुखराम को दबोच लिया, लेकिन पूरी कार खंगालने पर भी एक ग्राम अफीम नहीं मिली। दरअसल, सुखराम ने टोल नाके पर पुलिस को देखकर अपने सारे मोबाइल और तकनीकी उपकरण रिसेट कर दिए थे। एएनटीएफ की तकनीकी विंग ने जब सुखराम के रिसेट उपकरणों से डेटा रिकवर किया, तो उसमें एक संदिग्ध ट्रक के फास्टैग कार्ड की डिटेल मिली। गहनता से जांच करने पर पता चला कि इस ट्रक का फास्टैग भुगतान सुखराम खुद कर रहा था और वह ट्रक मणिपुर से असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी होते हुए हरियाणा की सीमा में दाखिल हो चुका था। श्रीनगर और जम्मू का 'कोड वर्ड' एएनटीएफ की हनुमानगढ़, गंगानगर और नागौर की टीमें तुरंत उस ट्रक के पीछे लग गईं। इसी बीच जम्मू में बैठे मुख्य सूत्रधार मगनलीप (काल्पनिक नाम) ने सुखराम के पकड़े जाने के डर से ट्रक ड्राइवर को कोड वर्ड में निर्देश दिया- "रात तक श्रीनगर (जोधपुर) पहुंचना था पर अब जम्मू ही रुकना पड़ेगा, आगे नहीं जाएंगे।" इसका मतलब था कि पुलिस के डर से अब माल राजस्थान नहीं बल्कि रास्ते में ही ठिकाने लगाया जाएगा। इसके बाद ट्रक अचानक राजस्थान सीमा से ठीक पहले हरियाणा के सिरसा इलाके में रुक गया। महिला इंस्पेक्टर का जांबाज नेतृत्व और सिरसा पुलिस की मुस्तैदी इस क्रिटिकल मोड़ पर आईजी विकास कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने रात के करीब 03:30 बजे हरियाणा के सिरसा एसपी श्री दीपक सारण को फोन किया। मुस्तैदी दिखाते हुए सिरसा एसपी ने तत्काल अपनी फोर्स को राजस्थान एएनटीएफ की टीम के साथ अटैच किया। इस पूरे धरपकड़ ऑपरेशन की कमान एएनटीएफ की महिला इंस्पेक्टर श्रीमती किरणजीत कौर (हनुमानगढ़ टीम प्रभारी) के हाथ में थी, जो पिछले 36 घंटों से बिना खाए-पिये और बिना सोए पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य को अंजाम दे रही थीं। संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर संदिग्ध ट्रक को ढूंढ निकाला। ट्रक के नीचे वेल्डिंग कर बनाया था गुप्त कमरा शुरुआती जांच में ट्रक पूरी तरह खाली मिला और ड्राइवर अनजान बनता रहा। लेकिन जब एएनटीएफ की टीम ने ट्रक के निचले हिस्से (चेसिस) की बारीकी से जांच की, तो दंग रह गए। तस्करों ने ट्रक के नीचे लोहे की पत्तियों से वेल्डिंग कर और नट-बोल्ट लगाकर एक गुप्त कमरेनुमा केबिन बना रखा था। जब कटर से उस तहखाने को तोड़ा गया, तो उसके अंदर से 95 पोटलियों में पैक 88.970 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई। मौके से आरोपी किशनाराम विश्नोई पुत्र छोगा राम उम्र 44 साल निवासी शिवपुरा जिला पाली को गिरफ्तार किया गया और मुख्य सूत्रधार सुखराम विश्नोई को हिरासत में लिया गया। क्यों रखा गया 'ऑपरेशन जमुहार' नाम? पांच राज्यों में फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त करने वाले इस मेगा ऑपरेशन का नामकरण (ज-मु-हा-र) इन राज्यों के शुरुआती अक्षरों को मिलाकर किया गया: ° *ज* – जम्मू (जहां मुख्य सूत्रधार बैठा था) ° *म* – मणिपुर (जहां से नशे की खेप चली) ° *उ* – उत्तर प्रदेश (ट्रांजिट पॉइंट – लखनऊ) ° *हा* – हरियाणा (जहां माल को दबोचा गया) ° *र* – राजस्थान (जहां नशे की सप्लाई होनी थी) ° *शाब्दिक अर्थ:* 'जमुहार' का शाब्दिक अर्थ मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाने वाली 'जहरीली घास' होता है, जो मणिपुर से लाए जा रहे अफीम के इस जहर के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है। मुख्यालय में किया जाएगा जांबाज टीम को सम्मानित एएनटीएफ महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने बताया कि हाल ही के दिनों की यह सबसे बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई है। 36 घंटों तक बिना आराम किए इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली महिला निरीक्षक किरणजीत कौर और उनकी पूरी टीम को विशेष कार्यक्रम आयोजित कर एएनटीएफ मुख्यालय, जयपुर में सम्मानित किया जाएगा। एएनटीएफ की आमजन से अपील महानिरीक्षक … Read more

भारतीय पुरुषों में बढ़ती तोंद का बड़ा कारण, खराब डाइट और लाइफस्टाइल जिम्मेदार

भारत में पुरुषों का मोटापा और बाहर निकली हुई तोंद आज के समय में काफी कॉमन समस्या बन चुकी है. जहां पहले कुछ लोग ही ओवरवेट होते थे, वहीं आजकल कम उम्र के लोगों में भी पेट बाहर आने की समस्याएं दिख रही हैं, जबकि वेस्टर्न देशों के पुरुष बढ़ती उम्र में भी काफी फिट और मस्कुलर नजर आते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे कोई जेनेटिक जादू नहीं बल्कि हमारी रोजाना की खराब आदतें और डाइट पैटर्न जिम्मेदार हैं. यदि समय रहते इन गलत आदतों को सुधार लिया गया तो आप भी तोंद कम कर सकते हैं और बीमारियों से बच सकते हैं. लेकिन उससे पहले भारतीयों की तोंद निकलना का कारण समझ लीजिए. कम प्रोटीन और ज्यादा कार्ब्स की आदत भारतीय पुरुषों के मोटे होने का सबसे बड़ा कारण उनका खानपान है. दरअसल, भारतीयों की डेली डाइट में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम और कार्बोहाइड्रेट्स (जैसे रोटी, चावल) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. वहीं इसके विपरीत वेस्टर्न पुरुष हाई प्रोटीन और एक बैलेंस्ड डाइट को फॉलो करते हैं. इसके अलावा भारतीय पुरुष दिनभर में कई बार मीठी चाय, बिस्कुट और नमकीन खाते हैं जो शरीर में एक्स्ट्रा कैलोरी स्टोर करता है. वेस्टर्न लाइफस्टाइल में प्रोसेस्ड फूड और मीठे का सेवन काफी सीमित मात्रा में किया जाता है. खराब ईटिंग टाइमिंग और सिटिंग लाइफस्टाइल भारतीय वर्किंग कल्चर में ज्यादातर पुरुषों की लाइफस्टाइल बैठने वाली हो चुकी है जिसमें फिजिकल मूवमेंट बहुत कम होता है. सबसे बड़ी गड़बड़ी रात के खाने के समय में होती है. भारतीय घरों में अक्सर देर रात 10 या 11 बजे हैवी डिनर किया जाता है और लोग तुरंत सो जाते हैं. वहीं, वेस्टर्न देशों में लोग शाम को 7 से 8 बजे तक अपना लाइट डिनर पूरा कर लेते हैं. देर से खाने और कम एक्टिविटी के कारण कैलोरी बर्न नहीं हो पाती और वह सीधे पेट के आसपास फैट के रूप में जमा होने लगती है. कम नींद, भारी स्ट्रेस और पानी की कमी मोटापे का सीधा कनेक्शन मेंटल हेल्थ और स्लीपिंग पैटर्न से भी है. भारतीय पुरुष अक्सर काम के प्रेशर में ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं और मात्र 5-6 घंटे की अधूरी नींद लेते हैं, जिससे हार्मोनल इंबैलेंस होने लगता है. वहीं वेस्टर्न लाइफस्टाइल में बेहतर स्ट्रेस मैनेजमेंट और 7-8 घंटे की गहरी नींद को प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा भारतीय पुरुषों की डाइट में फाइबर और पानी की भारी कमी देखी जाती है जिससे डाइजेशन सुस्त हो जाता है. तोंद कम करने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट्स का कहना है, यदि आप भी बाहर निकलती तोंद को अंदर करना चाहते हैं तो सिर्फ क्रैश डाइट करने से काम नहीं चलेगा. इसके लिए आपको अपनी आदतें बदलनी होंगी. हर मील में अंडे, पनीर या दाल जैसे प्रोटीन के ऑप्शंस शामिल करें. रोजाना कम से कम 8 से 10 हजार स्टेप्स पैदल चलने की आदत डालें. चीनी, मीठी चाय और जंक फूड को अपनी लाइफ से तुरंत कम करें. रात का डिनर हर हाल में 7-8 बजे तक खत्म कर लें और 7-8 घंटे की भरपूर नींद लें. इसके साथ ही हफ्ते में 4 से 5 दिन वर्कआउट जरूर करें.

सोशल मीडिया और AI पर सख्ती: कनाडा लाएगा नया डिजिटल सेफ्टी विधेयक

अब एक और देश बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान से बचाना चाहता है, जिसके लिए वह एक नया कानून ला रहा है. इस देश का नाम कनाडा है और वहां की सरकार ने एक नया डिजिटल सुरक्षा विधेयक पेश किया है. नए विधेयक के तहत 16 साल से कम उम्र के किशोर और बच्चों को सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित किया जाएगा. हालांकि नए कानून के तहत उन प्लेटफॉर्म को छूट भी मिल सकती है, जो कुछ सेफ्टी रूल्स को फॉलो करते हैं. AI चैटबॉट्स भी होंगे रेगुलाइज जानकारी के मुताबिक, नया विधेयक AI चैटबॉट्स को भी अधिक सुरक्षित बनाने के लिए एक डिजिटल रेगुलेटर बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, जो असल में सेफ्टी रूल्स को तैयार करेगा. डिजिटल सेफ्टी एक्ट का विधेयक लाने के साथ ही कनाडा भी उन देशों की सूची में शामिल किया जा चुका है, जो बच्चों पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सख्त कानून लेकर आ रहे हैं.   कनाडा के मंत्री मार्क मिलर ने कहा है कि उन्होंने देखा है कि ऑनलाइन नुकसान कितने गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि बच्चों की सुरक्षा को टाला नहीं जा सकता है. नियम ना मानने पर लगेगी पैनल्टी कनाडा के प्रस्तावित विधेयक में पेनल्टी को भी मेंशन किया है, जहां बताया गया है कि अगर कोई कंपनी नियम का पालन नहीं करती हैं तो उनपर ग्लोबल रेवेन्यू या 3 परसेंट या 1 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग 68 करोड़ रुपये) तक का हर्जाना लगाया जा सकता है, जो अधिक हो. विधेयक Bill C-34 के प्रस्ताव में कनाडा सरकार ने कहा कि ऑनलाइन नुकसान केवल नागरिकों से नहीं बल्कि डिजिटल सेवाओं के डिजाइन और ऑपरेशनल सिस्टम की वजह से भी होते हैं.   सुरक्षा संबंधित बातों को ध्यान में रखते हुए विधेयक सोशल मीडिया और AI चैटबॉट्स के लिए नए सुरक्षा नियम लागू करना चाहता है. इसके साथ ही कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर संभावित जोखिमों की पहचान करनी होगी और उन्हें कम करने की दिशा में काम करना होगा. ऑस्ट्रेलिया बन चुका है पहला देश   बीते साल के दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन चुका है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन किया जा चुका है. कानून लागू होने के बाद एक महीने के अंदर कंपनियों ने सामूहिक रूप से 50 लाख टीनएजर्स के अकाउंट को डिएक्टिवेट कर दिया था. और भी देश कर रहे हैं तैयारी कनाडा ही नहीं और भी देश बच्चों पर सोशल मीडिया की वजह से पड़ने नकारात्मक नुकसान को कम करना चाहते हैं. इसके लिए वे देश भी सोशल मीडिया उपयोग पर लगने वाले नियमों को सख्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं. ग्रीस कर चुका है ऐलान ग्रीस अप्रैल में ऐलान कर चुका है कि वह जनवरी 2027 से 15 साल से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करेगा.

Airtel की ‘Fast Lane’ सर्विस क्या है? रीब्रांड के बाद फिर छिड़ी नेट न्यूट्रैलिटी की बहस

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक बार फिर बहस छिड़ गई है. एयरटेल ने अपने ‘Priority Postpaid’ प्लान को रीब्रांड करके अब ‘Fast Lane’ नाम दे दिया है. नाम बदलने के साथ ही यह सर्विस फिर चर्चा में आ गई है, क्योंकि इसे लेकर पहले ही यूजर्स में काफी नाराजगी देखी गई थी. दरअसल Airtel ने कुछ समय पहले ‘Priority’ नाम से एक पोस्टपेड सर्विस शुरू की थी. कंपनी का दावा था कि इस प्लान में पोस्टपेड यूजर्स को भीड़-भाड़ वाले इलाकों में प्रीपेड यूजर्स के मुकाबले ज्यादा स्पीड मिलेगी और बेहतर नेटवर्क एक्सपीरियंस मिलेगा. हालांकि, जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि क्या अब बेहतर नेटवर्क स्पीड पाने के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे? अब कंपनी ने उसी सर्विस को नए नाम ‘Fast Lane’ के साथ पेश किया है. Airtel ने सिर्फ नाम बदला है, जबकि प्लान और इसकी सुविधाएं लगभग पहले जैसी ही हैं. कंपनी इसे एक प्रीमियम एक्सपीरियंस के तौर पर पेश कर रही है. कंपनी के मुताबिक नया पोस्टपेड प्लान रीब्रांड कर दिया गया है. दरअसल कंपनी नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी का यूज करके बेहतर 5G एक्सपीरिएंस देने की बात कह रही है. एयरटेल के मुताबिक फास्ट लेन नाम इस प्लान के हिसाब से सही है, इसलिए प्रायॉरिटी प्लान की जगह ये नया नाम दिया गया है. Fast Lane है क्या? आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसी सर्विस है जिसमें कुछ यूजर्स को नेटवर्क पर प्रायॉरिटी दी जाती है. यानी जब नेटवर्क पर ज्यादा भीड़ होती है, तब Fast Lane वाले यूजर्स को बेहतर स्पीड और कम लेटेंसी मिल सकती है. यही वजह है कि इसे लेकर नेट न्यूट्रैलिटी की बहस फिर शुरू हो गई है. नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब होता है कि सभी यूजर्स को इंटरनेट पर बराबर का एक्सेस मिले. लेकिन अगर कुछ यूजर्स को पैसे देकर ‘फास्ट लेन’ मिलती है, तो बाकी यूजर्स के लिए अनुभव खराब हो सकता है. कंपनी का स्टैंड है कि इस तरह की सर्विस से नेट न्यूट्रैलिटी के साथ कोई खिलवाड़ नहीं हो रहा है. दूसरी कंपनियों ने भी कहा है कि नेटवर्क स्लाइसिंग पहले से यूज होता आया है. कंपनी का कहना है कि यह सर्विस नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है, जो 5G के साथ आती है. इसका मतलब यह है कि नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग यूजर्स को अलग अनुभव दिया जा सकता है. कंपनी यह भी दावा करती है कि इससे बाकी यूजर्स पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ेगा. यानी फास्ट लेन लेने वालों को फायदा मिलेगा, लेकिन बाकी लोगों की स्पीड कम नहीं होगी. लेकिन टेक एक्सपर्ट्स इस दावे को पूरी तरह से मानने के लिए तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर नेटवर्क लिमिटेड है और कुछ यूजर्स को प्राथमिकता दी जाती है, तो इसका असर बाकी यूजर्स पर जरूर पड़ेगा, खासकर भीड़ वाले इलाकों में. कुछ यूजर्स का कहना है कि यह टेलीकॉम इंडस्ट्री में एक खतरनाक शुरुआत हो सकती है, जहां फ्यूचर में हर बेहतर सर्विस के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे. वहीं कुछ लोग इसे प्रीमियम सर्विस मानते हैं, जैसे एयरपोर्ट पर फास्ट ट्रैक या टोल पर फास्टैग. यानी जो ज्यादा पैसे देगा, उसे बेहतर और तेज अनुभव मिलेगा.. अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में बाकी टेलीकॉम कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल सकती हैं. इसका मतलब यह होगा कि इंटरनेट का अनुभव अब पूरी तरह समान नहीं रहेगा. फिलहाल Airtel ने साफ किया है कि प्लान्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है, सिर्फ ब्रांडिंग बदली गई है.

लोकसभा में अलग ब्लॉक की मांग, TMC में 20 सांसद बागी गुट में शामिल

पश्चिम बंगाल TMC लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी पार्टी के बागी 'काकोली ग्रुप' में शामिल हो गए हैं. उन्होंने संसद में एक अलग ब्लॉक बनाने की मांग वाले पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उनके इस कदम से तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में विभाजन का संकट और गहरा गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही बगावत रूकने का नाम नहीं ले रही है. बुधवार तक जो लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी ममता के साथ खड़े थे उन्होंने अब पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावती रुख अपनाते हुए बागी सांसदों के 'काकोली ग्रुप' का दामन थाम लिया है. प्रसून बनर्जी ने संसद में एक अलग गुट बनाने की मांग करने वाले पत्र पर अपने हस्ताक्षर (साइन) भी कर दिए हैं. टीएमसी के भीतर का बागी गुट लोकसभा में खुद को एक अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता दिलाने की कोशिशों में जुटा है. इस गुट में अभी तक प्रसून को मिलाकर 20 लोकसभा सांसद शामिल हो चुके हैं. वहीं अब ममता के खेमे में 8 सांसद बचे हैं. बागी गुट अपने कुनबे को बढ़ाने के लिए लगातार सांसदों का समर्थन जुटा रहा है. प्रसून बनर्जी हावड़ा से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए हैं और खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी उनका बड़ा कद है. TMC के बागी सांसदों की लिस्ट आई सामने! शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान का भी नाम इससे पहले राज्यसभा से कई सांसदों के इस्तीफे और कुछ अन्य सांसदों के बागी गुट के संपर्क में होने की खबरें आई थीं. हालांकि, कुछ सांसदों ने इन खबरों का खंडन भी किया था, लेकिन प्रसून बनर्जी के इस कदम ने बागी गुट के दावों को मजबूत कर दिया है. 

बेसन और कच्चे दूध से बने नेचुरल फेस वॉश से पाएं चमकती त्वचा

खूबसूरत, बेदाग और चमकती त्वचा पाना हर किसी का सपना होता है जिसके लिए लोग बाजार में मिलने वाले महंगे से महंगे फेस वॉश और साबुन पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स में मौजूद हानिकारक केमिकल्स आपकी त्वचा का नेचुरल ऑयल छीन लेते हैं जिससे चेहरा समय से पहले रूखा, बेजान और बूढ़ा दिखने लगता है. अगर आप भी इस केमिकल के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर त्वचा पर असली और परमानेंट ग्लो चाहते हैं तो आपको महंगे पार्लर या महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं है. आपकी रसोई में ही कुछ ऐसी जादुई चीजें मौजूद हैं जो त्वचा को अंदर से साफ कर सकती हैं. आज हम आपको घर पर ही सिर्फ 2 प्राकृतिक चीजों से एक बेहतरीन नेचुरल फेस वॉश बनाने का तरीका और उसके इस्तेमाल का तरीका बताने जा रहे हैं. इससे रोजाना सिर्फ 5 मिनट मसाज करने से केवल 10 दिनों के भीतर आपकी त्वचा में ऐसा चमत्कारी बदलाव आएगा कि चेहरा हीरे जैसा चमकने लगेगा. फेस वॉश बनाने और इस्तेमाल करने की डिटेल्स बेसन: 1 बड़ा चम्मच (यह त्वचा की गहराई से सफाई करता है और अतिरिक्त तेल सोखता है). कच्चा दूध या गुलाब जल: आवश्यकताानुसार (यह त्वचा को मॉइश्चराइज करता है और रंगत निखारता है). नोट: अगर त्वचा बहुत ज्यादा ड्राई है तो आप इसमें आधा चम्मच शहद भी मिला सकते हैं. बनाने का तरीका एक छोटी कटोरी में एक चम्मच बेसन लें. अब इसमें आवश्यकताानुसार कच्चा दूध या गुलाब जल मिलाकर एक स्मूथ और गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. आपका केमिकल-फ्री, 100% नेचुरल फेस वॉश तैयार है. इस्तेमाल और मसाज की विधि सबसे पहले अपने चेहरे को नॉर्मल पानी से हल्का सा गीला कर लें. अब तैयार किए गए इस होममेड फेस वॉश को अपने पूरे चेहरे और गर्दन पर अच्छी तरह लगाएं. अपने दोनों हाथों की उंगलियों से सर्कुलर मोशन में चेहरे की कम से कम 5 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें. माथे, नाक और ठुड्डी के आसपास थोड़ा अच्छे से मसाज करें ताकि ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स निकल जाएं. 5 मिनट की मसाज के बाद चेहरे को साफ और ठंडे पानी से धो लें.

‘Naagin 7’ फिनाले ट्विस्ट: राधिका पर जानलेवा हमला, कहानी में बड़ा मोड़

 एकता कपूर का लोकप्रिय सुपरनैचुरल शो ‘नागिन 7’ अपने फिनाले की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को हाई-वोल्टेज ड्रामा, साजिश और बदले की कहानी देखने को मिलेगी. शो के फिनाले को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, विशाखा की एंट्री पूरे खेल को बदल सकती है. राधिका पर होगा बड़ा हमला फिनाले से पहले राधिका की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. कहानी में एक ऐसा मोड़ आएगा, जब उस पर जानलेवा हमला किया जाएगा. इस हमले के बाद उसकी हालत बिगड़ जाएगी और उसे अपनी जान बचाने के लिए मदद की जरूरत पड़ेगी. इसी दौरान वह विशाखा से संपर्क करती नजर आएगी. विशाखा और राधिका बनाएंगी नई रणनीति आने वाले एपिसोड में राधिका और विशाखा एक-दूसरे के करीब आती दिखेंगी. दोनों का लक्ष्य एक ही दुश्मन को मात देना होगा. इसी वजह से वे मिलकर एक नई योजना तैयार करेंगी. उनकी यह साझेदारी अनंता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. आर्यमान बनेगा निशाना फिनाले में सबसे बड़ा झटका तब लगेगा, जब विशाखा आर्यमान को निशाना बनाने की कोशिश करेगी. बताया जा रहा है कि अनंता को रोकने और उसकी ताकत कमजोर करने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। आर्यमान पर मंडराता खतरा कहानी में रोमांच को और बढ़ा देगा. अधूरी रह जाएगी पूजा कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आएगा जब अनंता अपने मिशन के लिए विशेष पूजा कर रही होगी। इसी दौरान आर्यमान पर संकट की खबर उसे पूजा बीच में छोड़ने पर मजबूर कर देगी. अपने पति को बचाने के लिए वह तुरंत कार्रवाई करती नजर आएगी. फिनाले में होगा बड़ा मुकाबला शो के अंतिम एपिसोड में अनंता अपने दुश्मनों का सामना करती दिखाई देगी. वहीं विशाखा की वापसी और नई चालें कहानी को और दिलचस्प बना देंगी. फैंस को एक्शन, इमोशन और सुपरनैचुरल ड्रामे से भरपूर फिनाले देखने को मिलने वाला है, जो शो के अंत को यादगार बना सकता है.

चांदी महंगी होने पर बदली योजना, दुल्हन के खाते में बढ़कर भेजे जाएंगे 64 हजार रुपये

लखनऊ मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में राज्य सरकार ने बदलाव करते हुए पायल और बिछिया उपहार की जगह भी दुल्हन के खाते में धनराशि ट्रांसफर की जाएगी। ये बदलाव चांदी की कीमतों में उछाल आने के बाद किया गया है सरकार ने अब विवाह करने वाली कन्याओं को दी जाने वाली चांदी की पायल और बिछिया के बदले भी नकद राशि देने का फैसला किया है। इसके लिए समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र द्वारा शासनादेश जारी कर दिया गया है। क्या है मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति युगल एक लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पूर्व में इसमें से 60 हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाती थी और 25 हजार रुपये से पायल, बिछिया सहित अन्य उपहार दिए जाते थे। जबकि 15 हजार रुपये की राशि आयोजन पर खर्च की जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में भारी उछाल आ रहा है। जिसके बाद चांदी की पायल और बिछिया नहीं देने का निर्णय लिया गया है। इसके बजाय चार हजार रुपये की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाएगी। क्यों हुआ बदलाव इस तरह से दुल्हन के खाते में कुल 64 हजार रुपए भेजे जाएंगे। उपहार सामग्री पर 21 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत पहले निर्धारित वजन (30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम चांदी की बिछिया) के लिए 4 हजार रुपए निर्धारित थे, लेकिन चांदी की बढ़ती कीमतों के बाद 4 हजार रुपए में ये सब खरीद पान मुश्किल है। ऐसे में सरकार ने 4 हजार रुपए सीधे दुल्हन के खाते में भेजने का निर्णय लिया है। इस नए फैसले के बाद अब कन्या के बैंक खाते में 60 हजार की जगह कुल 64 हजार भेजे जाएंगे। बाकि योजना में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

परमा एकादशी 2026 आज, भगवान विष्णु की पूजा से मिलता है विशेष पुण्य फल

 आज अधिकमास की परमा एकादशी मनाई जा रही है. एकादशी की तिथि अपने आप में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह व्रत शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना गया है. इससे मानसिक शांति, एकाग्रता और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है. साल में सामान्यतः 24 एकादशी आती हैं, लेकिन जब अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) आता है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है. अधिकमास में आने वाली एकादशी विशेष रूप से अधिक फलदायी और पुण्यदायी मानी जाती है. इन्हीं में से एक है परमा एकादशी, जो अत्यंत दुर्लभ होती है क्योंकि यह केवल अधिकमास में ही आती है. परमा एकादशी की तिथि 11 जून यानी आज अर्धरात्रि 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन आज ही रात में 10 बजकर 36 मिनट पर होगा. परमा एकादशी का पारण 12 जून यानी कल सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर 8 बजकर 10 मिनट तक कर सकते हैं. परमा एकादशी व्रत की पूजा विधि परमा एकादशी का व्रत विशेष रूप से 5 दिनों तक करने की परंपरा बताई जाती है. व्रत की शुरुआत एकादशी से पहले या उसी दिन की जा सकती है. इस दौरान अनाज का सेवन नहीं किया जाता और केवल फल, दूध या तरल आहार लिया जाता है, जबकि संभव हो तो निर्जल व्रत रखना सर्वोत्तम माना गया है. व्रत के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ, विशेषकर सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पूजा के दौरान ऊं नमो नारायणाय और विष्णवे नमः जैसे मंत्रों का जप करना शुभ होता है. साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम, भगवद्गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी पर किया जाता है, जिसमें किसी जरूरतमंद को भोजन या अन्न का दान दिया जाता है और उसके बाद नींबू पानी या हल्के आहार से व्रत खोला जाता है. व्रत के दौरान ध्यान रखें ये बातें एकादशी व्रत के दौरान मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है. इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और अधिक से अधिक समय भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए. साथ ही दान-पुण्य करना भी इस व्रत के फल को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे व्यक्ति को आध्यात्मिक और मानसिक दोनों प्रकार का लाभ प्राप्त होता है. परमा एकादशी का महत्व परमा एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से दरिद्रता दूर होती है और धन संबंधी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं. साथ ही संतान प्राप्ति का योग बनता है और व्यक्ति को जीवन में यश व प्रसिद्धि मिलती है. धार्मिक दृष्टि से यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि इसके प्रभाव से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति और भगवान विष्णु के दर्शन का फल भी मिलता है. यदि कोई व्यक्ति अपनी विशेष मनोकामना पूरी करना चाहता है, तो उसे इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करते हुए व्रत अवश्य रखना चाहिए.

अनुभव सिन्हा का बड़ा बयान: “निर्देशकों से छीना जा रहा है सबसे जरूरी चीज”

फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री को लेकर अपनी बात रखी है. उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि आज के समय में फिल्म निर्देशकों से उनके काम की सबसे अहम चीज विश्वास धीरे-धीरे छीनी जा रही है. इस बीच उन्होंने निर्देशक इम्तियाज अली की आने वाली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की जमकर तारीफ भी की है. “निर्देशकों से छीनी जा रही है सबसे जरूरी चीज” – अनुभव सिन्हा अनुभव सिन्हा ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, इम्तियाज, मेरे दोस्त, मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि ‘मैं वापस आऊंगा’ बन रही है. आज के समय में जब फिल्म निर्देशकों से उनके काम की सबसे अहम चीज कई कारणों से छीन ली जा रही है, तब तुम्हारी फिल्म का हर फ्रेम उसी सबसे जरूरी गुण से भरा हुआ है – विश्वास. यह फिल्म इस गलत धारणा को तोड़ देती है कि दर्शक क्या पसंद करते हैं और क्या नहीं, और अपने दिल और आत्मा पर मजबूती से खड़ी रहती है. उन्होंने आगे लिखा, इसकी आत्मा बहुत मजबूत भी है और बेहद भावुक व दिल को छू लेने वाली भी है. यह कहानीकार और उसके देश के बीच एक बहुत ही गहरा और खूबसूरत रिश्ता दिखाती है. प्रिय दर्शकों, यह शायद वही फिल्म है जिसका आप लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, जिसे आप अपने परिवार के साथ थिएटर में देखना चाहेंगे. जिंदाबाद दोस्त! इम्तियाज अली की फिल्म और उनकी सोच इम्तियाज अली की आने वाली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे. इम्तियाज ने फिल्म में दिलजीत के साथ अपने सहयोग के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट भावनात्मक रूप से बहुत गहरा है और उन लोगों के साथ एकजुटता दिखाता है, जिन्होंने इतिहास के कठिन समय को झेला है. इम्तियाज ने कहा कि विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था और ऐसी स्थितियां आज भी दुनिया के कई हिस्सों में देखने को मिलती हैं.