samacharsecretary.com

2026 में शनि की वक्री चाल, कुंभ और मीन राशि को मिल सकती है बड़ी राहत

 ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है. जब भी शनि देव अपनी चाल बदलते हैं, चाहे वह राशि परिवर्तन हो या मार्गी से वक्री होना, जिसका सीधा असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है. साल 2026 में एक बेहद महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना होने जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, शनि देव 27 जुलाई 2026 को अपनी उल्टी चाल यानी वक्री होने जा रहे हैं, जो 11 दिसंबर 2026 तक इसी अवस्था में रहेंगे. वर्तमान में मेष, मीन और कुंभ राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से गुजर रहे हैं. आमतौर पर शनि की वक्री चाल को कष्टदायक माना जाता है, लेकिन इस बार यह 138 दिनों की अवधि साढ़ेसाती से जूझ रही 2 विशेष राशियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी. शनि की उल्टी चाल से इन्हें मानसिक और आर्थिक कष्टों से बड़ी राहत मिलने वाली है. आइए जानते हैं कौन सी हैं वो भाग्यशाली राशियां और उन्हें क्या लाभ होने वाले हैं. कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि के जातकों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण (अवरोही चरण) चल रहा है. 27 जुलाई से शुरू हो रही शनि की वक्री चाल आपके लिए राहत की बड़ी खिड़की खोलने वाली है. पिछले काफी समय से जो मानसिक तनाव, काम में रुकावटें और अज्ञात भय बना हुआ था, वह अब धीरे-धीरे दूर होने लगेगा. यदि आपका पैसा कहीं फंसा हुआ था या बिजनेस में लगातार घाटा हो रहा था, तो इस अवधि में धन लाभ के मजबूत योग बनेंगे. नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में चल रही राजनीति से मुक्ति मिलेगी. आपके काम की सराहना होगी. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती का दूसरा यानी मध्य चरण चल रहा है, जिसे सबसे ज्यादा कष्टदायी माना जाता है. लेकिन इस वक्री काल में शनि देव आपके लिए थोड़े नरम रहने वाले हैं. जो काम पिछले कई महीनों से बिल्कुल ठप पड़े थे या जिनमें लगातार देरी हो रही थी, वे अब अचानक गति पकड़ेंगे. यदि आप व्यापार या मीडिया क्षेत्र से जुड़े हैं, तो इस 138 दिनों की अवधि में आपको कोई बड़ी डील या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. पुराने नुकसान की भरपाई होगी. लंबे समय से चली आ रही शारीरिक समस्याओं या पुरानी बीमारी में राहत देखने को मिलेगी और आत्मविश्वास वापस लौटेगा. शनि देव की कृपा पाने के अचूक उपाय पीपल के नीचे दीपक: हर शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक चौमुखा दीपक जरूर जलाएं. शनिवार का दान: शनिवार के दिन किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को काली उड़द, काले तिल, काले कपड़े या छाते का दान करें. हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव को हनुमान जी के भक्त बेहद प्रिय हैं. नियमित रूप से या हर शनिवार-मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें.

ढिकली गांव में सांपों का कुनबा बरामद, मां के साथ 22 नवजात रसेल वाइपर रेस्क्यू

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर शहर के ढिकली गांव से गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक ट्यूबवेल के चेंबर से रसेल वाइपर प्रजाति के सांपों (Russells Viper Snakes) का पूरा कुनबा बरामद किया गया है. चेंबर के भीतर एक साथ इतने जहरीले सांपों की मौजूदगी की खबर फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर (WARC) की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और एक रेस्क्यू अभियान चलाया. जब टीम ने चेंबर से सांपों को बाहर निकालकर गिनना शुरू किया तो गिनती 1, 2, 3, 4 करते हुए सीधे 23 पर जाकर रुकी. इस सफल रेस्क्यू के बाद सामने आया कि इन सांपों में 22 नवजात बच्चे और उनकी मां शामिल है. अंडे नहीं, सीधे बच्चों को जन्म देती है रसेल वाइपर प्रजाति इस रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के संभागीय अध्यक्ष डॉ. चमन सिंह चौहान ने सांपों की इस प्रजाति के बारे में एक विशेष जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि रसेल वाइपर सांपों की अन्य सामान्य प्रजातियों की तरह अंडे नहीं देता, बल्कि यह सीधे बच्चों को जन्म देता है. जीव विज्ञान के अनुसार, इस प्रजाति का प्रजनन काल सामान्यतः नवंबर महीने के आसपास होता है और इसके बाद जून-जुलाई के महीनों में बच्चे जन्म लेते हैं. यही वजह है कि जून के महीने में इस ट्यूबवेल चेंबर के भीतर एक साथ इतने सारे नवजात बच्चे अपनी मां के साथ पाए गए. वन्य जीवों को नुकसान न पहुंचाने की विशेष अपील रेस्क्यू के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने स्थानीय लोगों से एक अपील भी की. विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि कभी भी किसी के घर या आसपास कोई वन्य जीव या सांप दिखाई दे, तो लोग घबराकर उसे खुद पकड़ने या जान से मारने का प्रयास बिल्कुल न करें. ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचित करना चाहिए ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास में भेजा जा सके.

एफपीपीसीए वसूली पर विवाद, नियामक आयोग ने कॉर्पोरेशन को फिर भेजा नोटिस

लखनऊ प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं से जून माह में 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को दोबारा नोटिस जारी किया है। उन्हें 19 जून तक इस वसूली का आधार बताने वाली रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। विद्युत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) की वसूली हो रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसके विरोध में नियामक आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को नियम विरुद्ध बताया। उसने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया। प्रबंध निदेशक ने जवाब के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। वर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और वसूली रोकने की मांग की। इसके बाद नियामक आयोग ने बुधवार को प्रबंध निदेशक को फिर नोटिस भेजा। आयोग की सख्त टिप्पणी आयोग ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि एफपीपीसीए के आंकड़े यूपीपीसीएल के पास होने चाहिए। यूपीईआरसी विनियमों के तहत यह जानकारी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। कॉर्पोरेशन ने आयोग द्वारा मांगी गई मूल सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। वह अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने की बात कर रहा है। जबकि आयोग ने केवल उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत एफपीपीसीए के आंकड़ों का आधार पूछा था। बिना आंकड़े वसूली अवैध अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन के पास एफपीपीसीए निर्धारण के आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली अवैध है। यह स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने आयोग से तत्काल 10 प्रतिशत की वसूली पर रोक लगाने की मांग की। पारदर्शिता और जवाबदेही परिषद अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने यूपीपीसीएल को 19 जून तक सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग का यह आदेश इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मामले को गंभीरता से ले रही है।  उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि वसूलने से पहले सभी गणनाएं और नियामकीय प्रक्रियाएं स्पष्ट होनी अनिवार्य हैं।  यदि नियमानुसार अभिलेख वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं किए गए, तो यह नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन है। आयोग ने 1 जून को ही इस आदेश को गैर कानूनी बताया था।  

महाभारत युद्ध में इन 4 महान योद्धाओं ने नहीं लिया हिस्सा, वजह जानकर चौंक जाएंगे

महाभारत का युद्ध मानव इतिहास में धर्म और अधर्म के बीच लड़ा गया सबसे भीषण युद्ध माना जाता है. माना जाता है कि यह युद्ध 18 दिनों तक चला था, जिसमें कुल 18 अक्षौहिणी (प्राचीन भारत में चतुरंगिणी सेना की सबसे बड़ी और मानक माप इकाई) सेनाओं ने भाग लिया था. कौरवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना थी, जबकि पांडवों की ओर से केवल 7 अक्षौहिणी सेनाएं युद्ध में उतरी थीं. उस समय लगभग कोई भी राजा-महाराजा इस युद्ध से स्वयं को पूरी तरह अलग नहीं रख पाया था. लेकिन कुछ ऐसे महान योद्धा भी थे, जिन्होंने अपनी अपार शक्ति के बावजूद इस युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था. आइए जानते हैं ऐसे ही 4 महान योद्धाओं के बारे में, जिन्होंने युद्ध में भाग नहीं लिया था. बलराम जी भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी यदुवंश के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक थे. उन्होंने मगध नरेश जरासंध के युद्ध अभियानों को कई बार विफल किया था. कथा के मुताबिक, एक बार जब कौरवों ने श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को बंदी बना लिया था, तब बलराम जी अकेले ही हस्तिनापुर पहुंचे थे. वहां कौरवों ने उनका अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने अपने हल से हस्तिनापुर को गंगा में डुबाने के लिए खींचना शुरू कर दिया. भयभीत होकर कौरवों ने तुरंत सांब को मुक्त कर दिया था. कहा जाता है कि बलराम जी शेषनाग के अवतार माने जाते हैं. दुर्योधन उनका प्रिय शिष्य था, लेकिन श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन का साथ देने के कारण उन्होंने इस युद्ध में निष्पक्ष रहना ही उचित समझा. यदि वे कौरवों की ओर से युद्ध करते, तो परिणाम कुछ और भी हो सकता था. रुक्मी रुक्मिणी के भाई और श्रीकृष्ण के साले रुक्मी भी एक महान योद्धा थे. वे विदर्भ के राजा भीष्मक के पुत्र थे और विजय नामक धनुष धारण करते थे. जब श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण किया था, तो रुक्मी ने उन्हें रोकने के लिए सेना के साथ उनका पीछा किया. उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि यदि वे श्रीकृष्ण को बंदी बनाकर नहीं लाए, तो वे अपने राज्य कुंडिनपुर (विदर्भ की राजधानी) वापस नहीं जाएंगे. लेकिन युद्ध में वे श्रीकृष्ण से हार गए. श्रीकृष्ण ने उनका अपमान करते हुए उनकी दाढ़ी-मूंछ काट दी. अपनी प्रतिज्ञा के कारण रुक्मी कभी अपने राज्य वापस नहीं लौटे और महाभारत युद्ध में भी उन्होंने भाग नहीं लिया था. वीर बर्बरीक भीम के पौत्र वीर बर्बरीक को महाभारत का सबसे महान धनुर्धर माना जाता है. वे घटोत्कच और मोरवी के पुत्र थे. बर्बरीक ने प्रतिज्ञा की थी कि वे युद्ध में हमेशा हारने वाले पक्ष का साथ देंगे. जब वे कुरुक्षेत्र की ओर बढ़े, तो श्रीकृष्ण उनकी इस प्रतिज्ञा से चिंतित हो गए, क्योंकि वे जानते थे कि अंततः कौरवों की हार निश्चित है. बर्बरीक के पास केवल तीन बाण थे, लेकिन उनकी शक्ति इतनी अद्भुत थी कि वे पूरे युद्ध को कुछ ही क्षणों में समाप्त कर सकते थे. इसी कारण श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे दान में उनका मस्तक मांग लिया. बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश दान कर दिया और इस प्रकार वे युद्ध में भाग नहीं ले सके, लेकिन उन्होंने पूरे युद्ध को अपने दृष्टिकोण से देखा. विदुर महाभारत के समय विदुर ने युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था. उन्होंने खुद को इस लड़ाई से दूर रखा और सिर्फ एक दर्शक बनकर सब कुछ देखा. विदुर राजा धृतराष्ट्र के मुख्य सलाहकार थे, लेकिन एक बार दुर्योधन ने उनका अपमान कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने दरबार और युद्ध दोनों से दूरी बना ली. विदुर हमेशा धर्म और सच्चाई के पक्ष में खड़े रहने वाले व्यक्ति थे. उन्हें अच्छी तरह समझ आ गया था कि कौरव गलत रास्ते पर चल रहे हैं. यही वजह थी कि उन्होंने किसी भी पक्ष का साथ देने के बजाय तटस्थ रहना सही समझा.

NCR प्लान-2041: दिल्ली का बोझ घटाने को नए ग्रीनफील्ड शहरों का खाका तैयार

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती आबादी और दबाव को कम करने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने बड़ा खाका तैयार किया है। अगले सप्ताह मंजूरी के लिए रखे जाने वाले रीजनल प्लान-2041 में 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही दिल्ली समेत एनसीआर के प्रमुख शहरों को महज 30 मिनट की दूरी पर लाने की योजना है। NCRPB की योजना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए नए स्मार्ट शहर बसाए जाएंगे। इन टाउनशिप में आधुनिक नागरिक सुविधाएं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल अपनाया जाएगा। दिल्ली का बोझ कम करने पर फोकस रीजनल प्लान-2041 प्लान में मौजूदा शहरों और बस्तियों के पुनर्विकास के साथ-साथ नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का सुझाव दिया गया है। इन शहरों को आत्मनिर्भर और स्व-संपूर्ण बनाया जाएगा ताकि रोजगार, आवास और अन्य सुविधाओं के लिए लोगों को दिल्ली पर निर्भर न रहना पड़े। योजना में उत्तर प्रदेश सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया (YEIDA) को 20 लाख आबादी वाले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित करने और हरियाणा में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित पंचग्राम परियोजना का भी जिक्र किया गया है। रीजनल प्लान-2041 की बड़ी बातें     NCR में 5-8 नए स्मार्ट ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव     दिल्ली से प्रमुख एनसीआर शहरों की दूरी 30 मिनट करने की योजना     हाई-स्पीड रेल और हेली-टैक्सी नेटवर्क पर जोर     YEIDA और हरियाणा के पंचग्राम को नए विकास केंद्र के रूप में शामिल किया गया     अगले 15 सालों में 20 लाख करोड़ रुपये निवेश की जरूरत     2030 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन सकता है दिल्ली-एनसीआर दिल्ली से जुड़ेंगे एनसीआर के प्रमुख शहर रीजनल प्लान-2041 का सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्ताव 30 मिनट NCR है। इसके तहत दिल्ली और NCR के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय 30 मिनट तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हाई-स्पीड और सीमित स्टॉपेज वाली मास ट्रांजिट रेल प्रणाली, सुपरफास्ट ट्रेनें और हेली-टैक्सी जैसी सुविधाओं की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव है। योजना के अनुसार अन्य रेल सेवाओं से NCR के किसी भी हिस्से तक 60 मिनट और कार से 2 से 3 घंटे के भीतर पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। 2030 तक बनेगा दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर प्लान के अनुसार, साल 2030 तक दिल्ली-एनसीआर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहरी क्षेत्र बन सकता है। जो कि जापान की राजधानी टोक्यो को भी छोड़ देगा। अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में 3 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को बसाने और मौजूदा आबादी के लिए बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।  

वनडे क्रिकेट में भारत का जलवा बरकरार, ICC ODI रैंकिंग में हासिल किया शीर्ष स्थान

नई दिल्ली आईसीसी की पुरुष ODI रैंकिंग में टीम इंडिया टॉप पर बनी हुई है. आईसीसी की जारी रैंकिंग में टीम इंडिया के 1189 प्वाइंट हैं. पिछले साल की तुलना में टीम इंडिया के प्वाइंट में एक अंक की कमी आई है. न्यूजीलैंड 113 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर है. वहीं, ऑस्ट्रेलिया 109 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर है।  टॉप 10 पोजीशन में एक एक ही बड़ा बदलाव हुआ है. दक्षिण अफ्रीका 102 अंकों के साथ पाकिस्तान को पीछे छोड़ते हुए चौथे स्थान पर पहुंच गया है. पाकिस्तान वनडे रैंकिंग में 98 अंक हैं। 

46 डिग्री तापमान के बीच सक्रिय हुआ नया पश्चिमी विक्षोभ, कई जिलों में येलो अलर्ट

 जयपुर राजस्‍थान में भीषण गर्मी के बीच आज से नया पश्च‍िमी व‍िक्षोभ एक्‍ट‍िव हो रहा है, ज‍िससे आंधी-बार‍िश का दौरा फ‍िर से शुरू होने का अनुमान है. इसकी वजह से तापमान में कमी होगी. लोगों को गर्मी से राहत म‍िलने की उम्‍मीद है. मौसम विभाग ने यह जानकारी दी. बुधवार सुबह राज्‍य के पूर्वी भाग में कहीं-कहीं हल्‍की बार‍िश र‍िकॉर्ड हुई है. जबक‍ि पश्‍च‍िमी राजस्‍थान में भीषण गर्मी रही. श्रीगंगानगर में 46 डिग्री पारा श्रीगंगानगर में सबसे अध‍िक तापमान 46 ड‍िग्री सेल्‍स‍ियस के पार पहुंच गया. गर्मी से लोगों को बुरा हाल हो रहा है. दोपहर 12 बजे तक सड़क पर इक्‍का-दुक्‍का वाहन ही नजर आते हैं. पश्‍च‍िमी राजस्‍थानके बीकानेर और जोधपुर में गर्मी से राहत म‍िलने की उम्‍मीद नहीं है. ज्‍यादातर इलाकों में मौसम शुष्‍क रहेगा. अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री दर्ज होने का अनुमान है. कुछ जगहों पर लू चलेगी. 20-30 क‍िलोमीटर प्रत‍ि घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. आंधी-बारिश का दौर फिर बढ़ेगा नए पश्‍चिमी व‍िक्षो से आज कुछ ज‍िलों में आंधी-बार‍िश की गत‍िव‍िधियां फ‍िर बढ़ेंगी. 11 से 14 जून के दौरान बीकानेर, जयपुर, अजमेर, भरतपुर संभाग के कुछ भागों में 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार से तेज आंधी चलेगी.  साथ ही कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.  जैसलमेर: आंधी और हवाओं से मिली थोड़ी राहत, लेकिन दोपहर में फिर बढ़ेगी तपिश,11 से 14 जून के बींच आंधी बारिश का अलर्ट है. आंधी बारिश का येलो अलर्ट राजस्थान में आंधी-बारिश का येलो अलर्ट है. डीग, भरतपुर और धौलपुर जिलों में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम मेघगर्जन गरज-चमक के साथ अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है. 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. मौसम विभाग ने लोगों को अलर्ट किया है.

उत्तर प्रदेश में पंचायत मतदाताओं की संख्या 12.58 करोड़ पहुंची, बलिया में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

लखनऊ  राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। प्रदेश में कुल 29.01 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। इसके साथ ही अब कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 12.58 करोड़ हो गई है। मतदाता सूची का अनंतिम प्रकाशन 23 दिसंबर को हुआ था। दावे-आपत्तियों के निस्तारण के लिए आयोग ने पांच बार तारीख भी बढ़ाई थी। कुल 169 दिन बाद आयोग ने मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया है। आयोग ने पहली बार सभी मतदाताओं को स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किया गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाता थे। इसके बाद 23 दिसंबर को जारी अनंतिम मतदाता सूची में कुल 12.69 करोड़ मतदाता हो गए थे। इसके बाद कुल 2.32 करोड़ नाम जोड़े गए और 2.03 करोड़ नाम काटे गए। ऐसे में कुल मतदाताओं की संख्या 12.58 करोड़ हो गई है। मतदाता वृद्धि के मामले में बलिया प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है, यहां 1,60,376 मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद लखीमपुर खीरी में कुल 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162 और कुशीनगर में 1,20,011 मतदाता बढ़े हैं। शीर्ष दस जिलों में शाहजहांपुर, प्रयागराज, गोंडा और जौनपुर भी शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के जिलों में मतदाताओं की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पुनरीक्षण अभियान के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने, मृत व स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई है, जो आगामी पंचायत चुनाव का आधार बनेगी। गौरतलब है कि पिछले दिनों हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव समय पर न होने पर नाराजगी जताते हुए आयोग से अगली सुनवाई में चुनाव की तारीख मांगी है। ऐसे में अब पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज होने की संभावना है। गाजीपुर में सबसे अधिक घटे मतदाता मतदाताओं की संख्या में कमी वाले जिलों में गाजीपुर सबसे ऊपर रहा है, जहां 94,757 मतदाता कम हुए हैं। मैनपुरी में 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 मतदाता कम हुए हैं। आगरा में 23,294, एटा में 23,429, कानपुर देहात में 10,759 और हापुड़ में 366 मतदाता घटे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक पुनरीक्षण अभियान के दौरान मृत, स्थानांतरित और पात्रता खो चुके मतदाताओं के नाम हटाने के कारण आंकड़ों में यह बड़ा अंतर देखने को मिला है। कई स्थानों पर गांव के परिवार अब शहर में रहने लगे हैं। ऐसे में उनके नाम गांव की मतदाता सूची से काटे गए हैं। सर्वाधिक मतदाता वाले टॉप 10 जिले जिला          जनसंख्या जौनपुर          36,97,376 आजमगढ़       35,76,287 प्रयागराज      34,95,203 सीतापुर          31,18,029 गोरखपुर         29,63,142 लखीमपुर खीरी     28,87,290 हरदोई              28,73,247 गाजीपुर           28,11,268 बलिया           26,97,200 गोंडा               26,74,509 सबसे कम मतदाता वाले 10 जिले जिला                       जनसंख्या गौतमबुद्धनगर              2,09,562 महोबा                          5,88,137 चित्रकूट                        7,00,457 हमीरपुर                      7,28,518 हापुड़                         7,47,201 शामली                        7,48,921 बागपत                         8,11,402 ललितपुर                       8,57,275 श्रावस्ती                        8,58,977 औरैया                          9,57,338

28 जून को बनेगा ‘लाभ दृष्टि योग’, मेष, सिंह, धनु और मकर राशियों को बड़ा फायदा

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर और उनकी दृष्टि को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. जून के महीने में एक ऐसा ही बड़ा ज्योतिषीय संयोग बनने जा रहा है, जिसे 'लाभ दृष्टि योग' कहा जा रहा है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 28 जून को देवगुरु बृहस्पति (गुरु) और साहस के कारक मंगल देव की स्थितियों के चलते यह बेहद शुभ योग निर्मित होगा. जब भी कुंडली या गोचर में मंगल और गुरु का संबंध बनता है, तो इसे ज्ञान, पराक्रम और धन-धान्य में वृद्धि कराने वाला माना जाता है. आइए जानते हैं कि इस खास योग का किन राशियों पर सबसे सकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है. क्या होता है लाभ दृष्टि योग? ज्योतिषीय गणना के अनुसार, गुरु को भाग्य, समृद्धि और ज्ञान का कारक माना जाता है, जबकि मंगल ऊर्जा, भूमि और साहस के प्रतीक हैं. जब ये दोनों ग्रह एक-दूसरे से विशेष भाव या दृष्टि संबंध में होते हैं, तो एक शक्तिशाली 'लाभ दृष्टि' का निर्माण होता है. यह योग मुख्य रूप से अटके हुए कामों को गति देने, आर्थिक तंगी दूर करने और करियर में अप्रत्याशित सफलता दिलाने के लिए जाना जाता है. इस शुभ संयोग का असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ विशेष राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान चौतरफा लाभ मिलने के संकेत हैं. 1. मेष राशि (Aries) मेष राशि के स्वामी स्वयं मंगल देव हैं. इस योग के प्रभाव से आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी. कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा. पदोन्नति के योग बनेंगे. लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है. निवेश के लिए समय उत्तम है. 2. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए गुरु और मंगल का यह संयोग मान-सम्मान में वृद्धि लेकर आएगा. यदि आप नया व्यापार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो 28 जून के बाद का समय अनुकूल रहेगा. पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं. आकस्मिक धन लाभ हो सकता है. 3. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के स्वामी गुरु बृहस्पति हैं, इसलिए इस योग का सीधा और बेहद सकारात्मक प्रभाव आप पर दिखेगा. विद्यार्थियों के लिए यह समय स्वर्ण काल की तरह हो सकता है. किसी बड़ी परीक्षा या इंटरव्यू में सफलता मिल सकती है. धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और समाज में आपकी प्रतिष्ठा मजबूत होगी. 4. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के जातकों के लिए यह योग आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत देने वाला साबित होगा. आय के नए स्रोत बनेंगे. अगर आप नौकरी बदलने का विचार कर रहे हैं, तो अच्छे ऑफर मिल सकते हैं. परिवार में चल रहा तनाव दूर होगा. आपसी सामंजस्य बढ़ेगा. शुभ फलों के लिए करें ये उपाय – भगवान विष्णु और हनुमान जी की संयुक्त पूजा करें. – गुरुवार और मंगलवार के दिन पीले या लाल वस्त्रों का प्रयोग करें. – गुरु मंत्र या हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी रहेगा.

एरोपोनिक तकनीक से सात गुना बढ़ा आलू बीज उत्पादन, दूसरे राज्यों की जरूरतें भी पूरी करेगा हरियाणा

करनाल धान, गेहूं को छोड़ प्रदेश का किसान सब्जी और बागवानी की ओर बढ़ रहा है। कुछ सालों से आलू की खेती में किसानों का रुझान बढ़ रहा है। किसान की आय बढ़ाने के लिए शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र (पीटीसी) ने ऐरोपोनिक तकनीक अपना सफल शोध किया है। इस तकनीक से एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर (बीज के आलू) मिलेंगे। आलू बीज उत्पादन में आई यह क्रांति कई बड़े राज्यों के लिए गेम चेंजर साबित होगी। हरियाणा अब उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा। प्रदेश में करीब 34 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। इसमें पांच प्रमुख किस्में कुफरी उदय, पुखराज, कुफरी मोहन, कुफरी चिपसोना व कुफरी सूर्या, आनंद, पुष्कर शामिल हैं। शामगढ़ केंद्र में आलू की नई किस्म "कुफरी उदय" पर शोध किया गया। इस किस्म के पौधों में ट्यूबर बनने की रफ्तार भी सबसे अधिक पाई गई। साथ ही, मिट्टी में न होने के कारण यह बीज शत-प्रतिशत फंगस रहित, बैक्टेरिया और वायरस मुक्त है। यह है एरोपोनिक तकनीक एरोपोनिक तकनीक खेती की एक आधुनिक विधि है, जिसमें पौधों की जड़ें मिट्टी या पानी के बजाय हवा में रहती हैं। इससे कम पानी, कम जगह में तेज वृद्धि और अधिक उत्पादन मिलता है। क्या है एरोपोनिक तकनीक? इस तकनीक में पौधे को हवा में लटकाकर कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों से जड़ों में पोषक तत्वों की बौछारें की जाती हैं। इस व्यवस्था से बीज उत्पादन में सात गुना यानी एक पौधे से बीज के 60 आलू मिले हैं। जबकि परंपरागत और नेट हाउस के अंदर प्रति पौधा केवल आठ मिनी ट्यूबर का उत्पादन ही हो पाता था। नए रिकॉर्ड से उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार व पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों की बीज की जरूरत को पूरा करेगा हरियाणा मिट्टी और कोकोपिट के बिना कुफरी उदय किस्म में एरोपोनिक तकनीक से शोध में आए सुखद परिणाम कृषि की इस तकनीक से हरियाणा में सात गुना बढ़ेगा आलू के बीज का उत्पादन     आठ आलू अब तक एक पौधे से मिलते हैं।     34 हजार हेक्टेयर में प्रदेश में होती है आलू की खेती। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैलेगा नेटवर्क शामगढ़ आलू प्रौद्योगिकी केंद्र करीब 4500 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला आलू बीज दूसरे राज्यों को भेज रहा है। नए शोध में प्रति पौधा 60 मिनी ट्यूबर मिलने के बाद केंद्र की बीज उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ेगी। अब देश की सबसे बड़ी आलू उत्पादक बेल्ट वाले राज्यों को कवर करने की योजना तैयार की जा रही है। अब हरियाणा अपने किसानों की जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दूसरे बड़े राज्यों के किसानों को बड़े पैमाने पर आलू बीज देने में पूरी तरह सक्षम होगा। एरोपोनिक तकनीक में एक पौधे से 60 मिनी ट्यूबर प्राप्त होना हमारे लिए मील का पत्थर है। इससे पहले के शोध में हम केवल 40 मिनी ट्यूबर ही उगाने में कामयाब हो पा रहे थे, लेकिन हमारे विज्ञानियों के गहन अध्ययन, सटीक न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट और निरंतर प्रयास से यह बड़ी सफलता मिली है। क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और हम दूसरे राज्यों के लिए बीज उपलब्धता के साथ-साथ निर्यात करने की स्थिति में आ सकते हैं। -डॉ. मनोज भानुकर, उप निदेशक, आलू प्रौद्योगिकी केंद्र शामगढ़ करनाल।