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सपा सरकार में ठहरे निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार को मुख्यमंत्री योगी ने दी रफ्तार

लखनऊ कभी निवेशकों की प्राथमिकता सूची में पीछे रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था में शामिल हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 9 वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़े स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्र व राज्य सरकार के अभूतपूर्व तालमेल ने विकास की कई अहम पहलों के जरिए यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर किया है। सपा सरकार में उपेक्षित, योगी सरकार में रिकॉर्ड निवेश 2017 से पहले सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश की गति लगभग ठहर सी गई थी। कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल माहौल की कमी को निवेशकों की बड़ी चिंता माना जाता था, लेकिन 2017 के बाद स्थिति तेजी से बदली। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों से लगभग 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के चार चरणों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रोजेक्ट धरातल पर उतारे जा चुके हैं, जिनसे लगभग 60 लाख रोजगार अवसर पैदा हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट के साथ 5वीं जीबीसी प्रस्तावित है। पिछली सपा सरकार के मुकाबले यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशकों का विश्वास उत्तर प्रदेश में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जटिल प्रक्रियाओं के अनुपालन में कमी लाने के लिए यूपी को भारत में प्रथम स्थान मिला है। 65 विभागों में प्रक्रियागत 4,675 अनुपालन कम किए गए है। व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 13 राज्य अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत छोटे दंडात्मक प्रावधानों को हटाया गया है। एक्सप्रेसवे क्रांति से औद्योगिक विकास में तेजी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक सफलता के पीछे सबसे बड़ा आधार मजबूत बुनियादी ढांचा है। 2017 तक प्रदेश में सीमित एक्सप्रेसवे नेटवर्क था, जिनकी संख्या महज दो थी। वहीं आज उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। फिलहाल यूपी में 9 एक्सप्रेसवे संचालित, 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जिलों में 27 स्थानों पर 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के माध्यम से 56,662 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बनेगा। जल-थल-आकाश: हर तरफ खुले रास्ते वर्ष 2017 से पहले यूपी में केवल दो हवाई अड्डे (लखनऊ, वाराणसी) पूरी तरह और गोरखपुर हवाई अड्डा आंशिक रूप से क्रियाशील था। मोदी सरकार के मार्गदर्शन में योगी सरकार ने 9 वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से विकास किया। नतीजा यह कि प्रदेश में 17 हवाई अड्डे वर्तमान में चालू हैं और 7 अन्य हवाई अड्डों का विकास जारी है। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन के साथ ही यूपी 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला पहला राज्य बन गया। माल ढुलाई के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के तहत पूर्वी फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किमी से अधिक हिस्सा यूपी से गुजरता है। पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी का जंक्शन दादरी में स्थित है। भारत के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 यूपी में हैं। भारत का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल और फ्रेट विलेज (100 एकड़ से अधिक) वाराणसी में निर्माणाधीन है। एफडीआई, फैक्ट्रियों और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि औद्योगिक विकास का सबसे बड़ा संकेतक विदेशी निवेश, फैक्ट्रियों की संख्या और निर्यात होता है। इन तीनों क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। जून 2000 से मार्च 2017 तक प्रदेश में मात्र 3,303 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था। जबकि अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। योगी सरकार के कुशल नेतृत्व में इसमें पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी तरह फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के तहत पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या सपा सरकार में 2016-17 में 14,169 थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 31,459 हो गई। यानी प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या दोगुने से अधिक हुई। निर्यात के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। 2016-17 में प्रदेश का कुल निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो फिलहाल दो लाख करोड़ से आगे निकल चुका है। आईटी और आईटीईएस निर्यात में और भी अधिक वृद्धि हुई है। यह 2015 के 15 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 82 हजार करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 7 वर्षों में लगभग 1,058 प्रतिशत बढ़ा है। यह 3,862 करोड़ (2017-18) से बढ़कर 44,744 करोड़ (2024-25) हो चुका है। एमएसएमई व ओडीओपी बने गेमचेंजर योगी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाना है। वर्तमान में प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। योजना के तहत 20,396 उद्यमियों को 903.63 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जिससे सवा तीन लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित हुए। कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 8,435 लाभार्थियों को 80.48 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। इसके साथ ही 24 जिलों में 30 कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से सवा चार लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। प्लेज योजना के तहत 12 औद्योगिक पार्कों (10 से 50 एकड़) के विकास पर भी काम चल रहा है। रक्षा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर में नई पहचान पहले उत्तर प्रदेश को मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य माना जाता था, लेकिन गुजरे 9 वर्षों में यूपी हाई-टेक उद्योगों का केंद्र बनकर उभरा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के 6 नोड झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और कानपुर विकसित किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अब तक … Read more

महिला कोऑर्डिनेटर के साथ कथित मारपीट, BJP पार्षद सहित 4 के खिलाफ मामला दर्ज

फाजिल्का. बीजेपी पार्षद सहित 4 लोगों पर FIR दर्ज होने की खबर सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक, फाजिल्का में आम आदमी पार्टी की महिला कोऑर्डिनेटर के साथ मारपीट करने के संगीन आरोप लगे हैं। इस मारपीट के आरोप में सिटी थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बीजेपी वार्ड नं. 9 के पार्षद सहित 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, फिलहाल पुलिस द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है। क्या है पूरा मामला इस संबंधी जानकारी देते हुए इंस्पेक्टर परमजीत कुमार ने बताया कि मंजू रानी निवासी राधा स्वामी कॉलोनी फाजिल्का की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। महिला ने बताया कि, उनके वार्ड में हाल ही में नगर कौंसिल के चुनाव जीतने वाले बीजेपी पार्षद सुरेश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना के फार्म पैसे लेकर भरे जा रहे थे। महिला ने बताया कि, इसकी सूचना मिलने पर वह अपने भाई के साथ पार्षद के  दफ्तर में पहुंची। इस दौरान जैसे ही उसने फार्म भरने को लेकर सवाल किया और वीडियो बनानी शुरू कर दी तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि, महिला मंजू रानी और उसका भाई घायल हो गए जिन्हें फाज्लिका के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस द्वारा जानकारी के अनुसार रमन कुमार पुत्र सुरेश कुमार, सुरेश कुमार पुत्र कुंदन लाल, साजन पुत्र पप्पू निवासी राधा स्वामी कॉलोनी फाजिल्का और एक अज्ञात महिला के खिलाफ FIR दर्ज की है। वहीं इस मामले में पुलिस का कहना है कि जांच जारी है उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एलपीजी शवदाह गृह से लकड़ी पर निर्भरता घटेगी, शहर को मिलेगी बड़ी सुविधा

 मुंगेर  मुंगेर नगर निगम क्षेत्र के लोगों के साथ साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए जल्द ही अंतिम संस्कार की आधुनिक एवं सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध होने वाली है। शहर में एलपीजी (गैस) आधारित आधुनिक मोक्षधाम के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रस्तावित मोक्षधाम का निर्माण दोमंठ घाट के निकट किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने जिला प्रशासन से लगभग एक एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह परियोजना धरातल पर उतरेगी जिससे लोगों को पारंपरिक व्यवस्थाओं और तकनीकी समस्याओं से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग की पहल पर बिहार के कई प्रमुख शहरों में गैस आधारित शवदाह गृह स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस योजना में मुंगेर के अलावा पटना, गयाजी, सहरसा, सारण, भागलपुर और बेगूसराय को भी शामिल किया गया है। विभाग का मानना है कि एलपीजी आधारित शवदाह गृह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और समयबद्ध बनाएगा। इससे लकड़ी की खपत में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। नगर निगम द्वारा जिला प्रशासन को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि शहर की बढ़ती आबादी और नागरिक सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए आधुनिक मोक्षधाम का निर्माण जरूरी हो गया है। विभागीय मानकों के अनुसार परियोजना के लिए एक एकड़ भूमि की आवश्यकता है। भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप इस परियोजना को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने का प्रयास किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में दोमंठ घाट पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह स्थापित करने की योजना पर विचार किया गया था लेकिन अब विभागीय स्तर पर एलपीजी आधारित प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है। नई तकनीक के माध्यम से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक सरल और तकनीकी रूप से बेहतर होगी। इससे लोगों को कम समय में सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। वहीं शहर के लाल दरवाजा स्थित मुक्ति धाम में पहले से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह संचालित है लेकिन पुराना हो जाने के कारण वह अक्सर खराब रहता है। इसके कारण अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को मजबूरन लकड़ी का सहारा लेना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में नए गैस आधारित मोक्षधाम को शहर की एक बड़ी आवश्यकता माना जा रहा है। नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के अनुसार नए गैस आधारित शवदाह गृह का निर्माण पहले से संचालित मोक्षधाम के आसपास किए जाने को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर भूमि चयन एवं अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। शहरवासियों का कहना है कि आधुनिक मोक्षधाम के निर्माण से न केवल नगर निगम क्षेत्र बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं।

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन हेतु राज्य सरकार की पहलों पर विशेष फोकस

रायपुर  राज्यसभा सांसद एवं वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष  डोला सेन की अध्यक्षता में आज रायपुर के एक निजी होटल में समिति की बैठक आयोजित की गई।  बैठक में ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’’ विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति के सदस्यों द्वारा व्यापार, निवेश, निर्यात-आयात तथा दोनों देशों के मध्य आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। अध्ययन दौरे का उद्देश्य संबंधित हितधारकों एवं अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर विषय पर व्यापक एवं तथ्याधारित रिपोर्ट तैयार करना है। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में विशेष रूप से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों, उपलब्ध सहायता तंत्र, निर्यात प्रोत्साहन उपायों तथा इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। समिति ने कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, निर्यात संवर्धन तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने राज्य में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन, निवेश आकर्षित करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा व्यापारिक अवसरों के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की। समिति ने इन पहलों की समीक्षा करते हुए निर्यात क्षमता के बेहतर उपयोग तथा वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के संबंध में भी चर्चा की। इस अवसर पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य सांसद  अमरा राम,  बिश्वजीत सिन्हा,  रमेश अवस्थी,  अतुल गर्ग,  धनंजय भीमराव महाडिक, मती रेणुका चौधरी, मती रोजी सैलो दामोदरन, मती लामनेई सिंगसित,  दिलीप यादव,  सदानंद महालू शेट तानवड़े, मती अनीता शुभदर्शिनी, डॉ. शिवपाल सिंह पटेल,  आनंद भदौरिया, डॉ. प्रशांत यादवराव पडोले, डॉ. संगीता बलवंत, मती विजया एस. राजशेखर,  राजेन्द्र कुमार तथा  गिरधारी यादव उपस्थित थे। बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव  अंकित आनंद, छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएसआईडीसी) के प्रबंध संचालक  विश्वेश झा, कृषि विभाग के संचालक  राहुल देव सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया।

75 जिलों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर तीन दिन चली परीक्षा, फर्जी अभ्यर्थियों और भ्रामक वीडियो प्रसारित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून 2026 को प्रदेश के 75 जनपदों के 1183 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में शांतिपूर्ण, पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई। परीक्षा के दौरान अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी, ई-केवाईसी सत्यापन, बायोमेट्रिक मिलान और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए भर्ती बोर्ड ने नकल, प्रतिरूपण और अफवाह फैलाने के प्रयासों पर प्रभावी अंकुश लगाया। भर्ती बोर्ड के अनुसार परीक्षा के लिए कुल 28,86,798 अभ्यर्थियों को आहूत किया गया था। इनमें 19,62,561 पुरुष अभ्यर्थी (67.99 प्रतिशत) तथा 9,24,237 महिला अभ्यर्थी (32.01 प्रतिशत) शामिल थीं। तीन दिवसीय परीक्षा में कुल 21,92,236 अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जो कुल पंजीकृत अभ्यर्थियों का 75.94 प्रतिशत है। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का सफल आयोजन प्रदेश की प्रशासनिक क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। परीक्षा के दौरान जनपद गौतमबुद्ध नगर के मिहिर भोज पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी अंकित कुमार पुत्र सत्यदेव निवासी कुटियाना, थाना कोतवाली देहात, जनपद एटा की ई-केवाईसी मिसमैच होने पर जांच की गई। जांच में सामने आया कि वह कूटरचित आधार कार्ड के माध्यम से परीक्षा में शामिल हुआ था। मामले में थाना दादरी, गौतमबुद्ध नगर में 9 जून 2026 को मुकदमा संख्या 255/2026 धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत अभियोग पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू की गई है। इसी प्रकार जनपद अलीगढ़ के डीएवी बालिका इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर अंकित पुत्र रविंद्र सिंह निवासी तालिबपुर, थाना खुर्जा देहात, जनपद बुलंदशहर को दूसरे अभ्यर्थी लोकेश पुत्र नेत्रपाल के नाम से परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। बायोमेट्रिक मिसमैच और दस्तावेजों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद थाना क्वार्सी, अलीगढ़ में 9 जून 2026 को मुकदमा संख्या 474/2026 धारा 318(4), 336(2), 336(3), 337, 338, 340(2) भारतीय न्याय संहिता तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4 एवं 13(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। भर्ती बोर्ड द्वारा जारी व्हाट्सएप नंबर 9454457951 पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परीक्षा के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। यूट्यूब पर "Shubham Mittal" नामक चैनल द्वारा परीक्षा को लेकर भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में थाना हुसैनगंज, लखनऊ कमिश्नरेट में मुकदमा संख्या 83/2026 दर्ज किया गया। आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 221 एवं 292, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4 एवं 13(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में इंस्टाग्राम यूजर reshami68yadav द्वारा परीक्षा के संबंध में भ्रामक वीडियो प्रसारित करने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 82/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया। इंस्टाग्राम यूजर durgeshsaxena94 एवं आईडी mukti.reem_98 द्वारा परीक्षा संबंधी भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 84/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2008 के अंतर्गत दर्ज किया गया। वहीं इंस्टाग्राम यूजर Rohit (Oye Hero) एवं आईडी Rohitvlogs_24*7 द्वारा परीक्षा को लेकर भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो प्रसारित करने पर थाना हुसैनगंज में मुकदमा संख्या 85/2026 धारा 221, 292 भारतीय न्याय संहिता, धारा 66D सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-2024 की धारा 4/13(2) के तहत अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को जनपद कानपुर नगर के लालू प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज, माल रोड परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी नागेश कुमा…

20 जून तक चलेंगे शिविर, प्रदर्शनी और स्वच्छता अभियान

करनाल  एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि सरकार के 12 वर्षों के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने के लिए 20 जून तक जिला में विशेष प्रचार एवं जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से जन कल्याण शिविर, जन प्रतिनिधियों द्वारा अपने लोकसभा एवं विधानसभा में एक दिन व्यतीत करना, प्रदर्शनी, पौधा रोपण, विशेष स्वच्छता अभियान एवं रोजगार मेले आदि शामिल हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के अधिकारी आपसी तालमेल बनाते हुए जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। एडीसी डा. राहुल रईया ने इस विशेष अभियान के संबंध में अधिकारियों को बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इससे पहले मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने चंडीगढ़ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला उपायुक्तों को विशेष प्रचार अभियान से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सांसद प्रत्येक विधानसभा में एक दिन व्यतीत करेंगे। इस दौरान वे पौधारोपण एवं स्वच्छता अभियान में भाग लेंगे। इसी प्रकार केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं और उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विकसित भारत संकल्प सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। कृषि विभाग, बागवानी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संयुक्त प्राकृतिक खेती पर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा पशु मेला लगाया जाएगा, जिसमें विभाग की नवीनतम उपलब्धियों, पशुओं के रखरखाव और टीकाकरण की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और विकास कार्यों को आमजन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित होगा। इस मौके पर एसीयूटी सोहम शैलेंद्र व एआईपीआरओ अनुराग मौजूद रहे।  

बिहार में पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत, हजारों परिवारों को मिलेगा घर-घर पानी

पटना केंद्र प्रायोजित अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के तहत बिहार सरकार ने दो शहरों की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कुल 259.33 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। इनमें एक योजना हाजीपुर जलापूर्ति से संबंधित है तो दूसरी सहरसा से। इन योजनाओं के पूरा होने से दोनों शहरों के करीब 37 हजार परिवारों को घर-घर साफ पीने का पानी उपलब्ध हो जाएगा। हाजीपुर जलापूर्ति परियोजना नगर विकास एवं आवास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हाजीपुर जलापूर्ति परियोजना पर 131.88 करोड़ रुपये खच होंगे। योजना के तहत 19,436 घरों को पेयजल की सुविधा दी जाएगी। परियोजना में तात ट्यूबवेल, सात क्लोरीनेटर प्रणाली युक्त पंप हाउस, छह जलमीनार तथा 212.70 किलोमीटर जल वितरण नेटवर्क का निर्माण होगा। सहरसा जलापूर्ति परियोजना वहीं, सहरसा जलापूर्ति परियोजना पर 127.45 करोड़ रुपये खर्च होंगे। योजना के अंतर्गत 17,454 घरों को पेयजल की आपूर्ति होगी। परियोजना में 12 ट्यूबवेल, 12 क्लोरीनेटर युक्त पंप हाउस, आठ आयरन रिमूवल प्लांट, आठ जलमीनार और 186.49 किलोमीटर जल वितरण नेटवर्क का निर्माण शामिल है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से हाजीपुर और सहरसा के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नियमित एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही शहरों की आधारभूत जलापूर्ति व्यवस्था भी अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनेगी।

योग दिवस पर 45 मिनट का अभ्यास, शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण शुरू

जमशेदपुर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर इस वर्ष झारखंड के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में योग का व्यापक अभियान चलाया जाएगा. राज्य सरकार ने 21 जून को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को योगमय झारखंड 2026-27 के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. रविवार होने के बावजूद राज्य के सभी स्कूल सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे और स्टूडेंट्स, टीचर्स और कर्मियों की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. 12 से 15 जून तक शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह द्वारा जारी निर्देश के अनुसार इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” निर्धारित की गई है. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने एसओपी जारी की है. योजना के तहत 12 से 15 जून तक जिला, प्रखंड और संकुल (क्लस्टर) स्तर पर शिक्षकों का विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम होगा. वहीं स्कूलों में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय योग ओलंपियाड के अंतर्गत पोस्टर, स्लोगन, कविता और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी. चयनित एंट्रीज को प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर मूल्यांकन के बाद एनसीइआरटी के राष्ट्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. 16 से 20 जून तक रोजाना योग अभ्यास 16 से 20 जून तक सभी स्कूलों में प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे से 8:00 बजे तक 45 मिनट का सामूहिक योगाभ्यास कराया जाएगा. इसमें स्टूडेंट्स के साथ सभी टीचर और अन्य कर्मियों की भागीदारी अनिवार्य होगी. इसके अलावा 17 जून को सभी स्कूलों में सात सदस्यीय योग क्लब का पुनर्गठन भी किया जाएगा, जो पूरे साल योग से जुड़ी गतिविधियों का संचालन करेगा. क्लास शुरू होने से पहले होगा दो मिनट का मेडिटेशन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने निर्देश जारी करते हुए निर्देश दिया है कि अब स्कूलों में हर दिन पहली क्लास शुरू होने से पहले क्लास टीचर दो मिनट का ध्यान (मेडिटेशन) कराएंगे. शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे स्टूडेंट्स में एकाग्रता, मानसिक संतुलन और सीखने की क्षमता में सकारात्मक सुधार आएगा. साथ ही स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले स्टूडेंट्स को 21 जून को सम्मानित किया जाएगा. कार्यक्रम पर होने वाला खर्च समग्र शिक्षा के कॉम्पोजिट स्कूल ग्रांट मद से उठाया जाएगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि योग दिवस कार्यक्रम के सफल आयोजन और शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल की होगी.

नो ट्रिपिंग जोन बनाने की तैयारी, 1500 करोड़ की योजना पर काम तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने लखनऊ नो ट्रिपिंग जोन बनाने की ठान ली है। इसमें केंद्र सरकार की मदद से आधुनिकीकरण का काम होगा। इससे लखनऊ की बिजली व्यवस्था को वर्ष 2032 के हिसाब से आधुनिक किया जाएगा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड इसकी तैयारी में जुट गया है। राजधानी की बिजली व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्ष 2032 के हिसाब से तैयार करने की तैयारी है। इस पूरे काम को वर्ष 2028 मध्य तक करना होगा। वर्ष 2032 में राजधानी के उपभोक्ताओं को कितनी बिजली चाहिए होगी, कितने उपभोक्ता होंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर कितना मजबूत करना होगा। उसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने का काम तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। पंद्रह सौ करोड़ रुपये खर्च करके वर्ष 2028 मध्य तक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। टीम देखेगी कि कैसे पांच वर्ष में बिजली की डिमांड लखनऊ में बढ़ी है। उसी आधार पर आगे की रणनीति बनाएगी। वर्ष 2032 में कितने बिजली उपकेंद्र व ट्रांसमिशन उपकेंद्र चाहिए होंगे। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) राजधानी में बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें पावर कारपोरेशन के निदेशक होंगे, मध्यांचल के निदेशक तकनीकी और लेसा के एक मुख्य अभियंता को रखा गया है। यह समिति दीपावली तक पूरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट शक्ति भवन को सौंप देगी। इसके बाद मध्यांचल लखनऊ में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने पर काम करेगा। यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। हर वर्ष बढ़ रही है डिमांड और उपभोक्ता लखनऊ में हर वर्ष दो से ढाई सौ मेगावाट एम्पियर बिजली की डिमांड बढ़ रही है। हर वर्ष दो सौ मेगावाट की खपत और एक लाख उपभोक्ता बढ़ रहे है। इसको देखते हुए नए ट्रांसमिशन बिजली उपकेंद्र के साथ ही नए बिजली उपकेंद्र भी नए विकसित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। वहीं पुराने लखनऊ व घनी आबादी वाले क्षेत्र में पावर ट्रांसफार्मर रखे जाएंगे। इसके लिए जमीन भी तलाशी जाएगी, जिससे छोटे बिजली उपकेंद्र भी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बनाए जा सके। बिजली उपकेंद्र को डबल व त्रिपल सोर्स से लैस करने पर फोकस होगा। वीआइपी क्षेत्रों में एलटी केबल भी ओवरहेड न जाए, उन्हें ट्रंच लाइन में ले जाया जाए, इस पर भी विचार होगा।  

बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा बदलाव, पंजाब बोर्ड ने समझ और कौशल आधारित मूल्यांकन पर दिया जोर

लुधियाना. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पी.एस.ई.बी.) की परीक्षाओं में अब केवल किताबी अभ्यास के प्रश्नों को रटकर पास होने वाले विद्यार्थियों की राह आसान नहीं होगी। बोर्ड ने अकादमिक साल 2026-27 के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा की सालाना परीक्षा के प्रश्न-पत्रों के पूरे पैटर्न को ही बदल दिया है। नए बदलाव के तहत अब विद्यार्थियों को किताबों के हर पाठ को गहराई से समझना होगा। बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार अब परीक्षाओं के प्रश्न-पत्रों में 50 प्रतिशत प्रश्न पाठ्य पुस्तकों की विषय वस्तु में से यानी अभ्यास के अलावा पाठ के बीच में से पूछे जाने लाजमी किए गए हैं। वहीं, बाकी बचे 50 प्रतिशत प्रश्न ही पाठ्य पुस्तकों के अभ्यासों के प्रश्न-बैंक में से शामिल किए जाएंगे। बोर्ड का मुख्य मकसद विद्यार्थियों की कॉन्सैप्चुअल अंडरस्टैंडिंग को मजबूत करना है ताकि वे रट्टा लगाने की बजाय विषय को अच्छी तरह समझ सकें। इस बड़े फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए बोर्ड के उप-सचिव (अकादमिक) द्वारा समूह जिला शिक्षा अफसर (सै.सि.), पंजाब को कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अफसरों को हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने जिलों में इन कक्षाओं को पढ़ा रहे सभी अध्यापकों को इस नए बदलाव की तुरंत जानकारी दें, ताकि अध्यापक अभी से अपने विद्यार्थियों को इसी बदले हुए पैटर्न के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करवाना शुरू कर दें।