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योगी सरकार के तहत यूपी बना देश में सबसे अधिक बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य

लखनऊ  कई अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दर्जनों उपक्रम में नंबर एक बने उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रविवार रात को बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित करते हुए देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल एवं निर्बाध पूर्ति कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में अब तक की सर्वाधिक पीक पावर डिमांड पूरी करने वाला राज्य बन गया है। इससे पहले 13 मई 2026 को महाराष्ट्र ने 32,317 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए गए हैं। 21 जून को रात 10:48 बजे 32,348 मेगावाट रिकॉर्ड पीक डिमांड आपूर्ति की गई है। जोकि अब तक के इतिहास में सबसे अधिक है। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति करने में लगातार सबसे आगे हैं। 20 जून को यूपी में 31549 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। 19 जून को भी प्रदेश में 30968 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इससे पहले 24 मई को यूपी में सबसे अधिक 31824 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। साल 2025 में 11 जून को 31486 मेगावाट पीक डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। इस तरह 21 जून 2026 को डिमांड बिजली आपूर्ति ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। प्रचंड गर्मी में बिजली की मांग चरम पर यूपी जैसे विशाल राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रदेश में बिजली अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार नए उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है और पुराने उपकरणों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया गया है। उत्तर प्रदेश ने रिकॉर्ड मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सक्षम हो चुकी है। बिजलीकर्मी दिन-रात फील्ड में डटे प्रदेश भर में बिजलीकर्मी दिन-रात मैदान में डटे हुए हैं। तूफानी भरी रात हो या फिर भारी बारिश या चिलचिलाती गर्मी, बिजलीकर्मी हर परिस्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और सुचारु बिजली आपूर्ति करने में जुटे हैं। रात्रिकालीन मेंटेनेंस कार्यों के माध्यम से विभिन्न जिलों में बिजली लाइनों, ट्रांसफार्मरों और उपकेंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। ट्रांसफार्मरों की सुरक्षित और प्रभावी कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए उनकी अर्थिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभागीय टीमों द्वारा नियमित रूप से अर्थिंग में पानी डालकर सिस्टम को सुरक्षित और स्थिर रखा जा रहा है। उपकेंद्रों का अधिकारी कर रहे लगातार निरीक्षण प्रदेश भर में वरिष्ठ अधिकारी भी उपकेंद्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर स्थिति में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और फील्ड रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि 32,348 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग की सफल पूर्ति उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने कहा कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं तक निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है। पूरे प्रदेश में ब्रेक डाउन में आये फीडरों को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए शटडाउन लेने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि फीडरों के शटडाउन के लेने के लिए अधिशाषी अभियंताओं को अधिकृत किया गया है। जिससे शटडाउन महत्वपूर्ण व आवश्यक है, यह सुनिश्चित किया जा सकें।  

प्रसूताओं पर संकट के बीच मंत्री गजेंद्र सिंह की टिप्पणी, कहा- दर्द से बचने की चाह से बढ़ रहे सीजेरियन

जोधपुर  राजस्थान में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. कोटा, बीकानेर और अब जोधपुर में सामने आए मामलों पर उन्होंने कहा कि सभी मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं और इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि प्रभावित महिलाओं में से छह की हालत बिल्कुल ठीक है, जबकि एक महिला को बेहतर उपचार के लिए एम्स रेफर किया गया है. चिकित्सा मंत्री ने सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामलों पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रसव पीड़ा नहीं चाहती, इसलिए सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. मंत्री के इस बयान को लेकर एक बार फिर बवाल मच गया है।  चिकित्सा मंत्री यहीं नहीं रूके, उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीज गंभीर हालत में रेफर होकर बड़े अस्पतालों में पहुंचते हैं. लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान धक्के खाते हुए आखिरकार मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचते हैं, ऐसे में हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं. उन्होंने दावा किया कि मातृ मृत्यु दर मात्र एक प्रतिशत है. मंत्री ने कहा कि कोटा मामले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में गड़बड़ी मिलने के बाद निजी खरीद 25 प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि जोधपुर में कोई महिला गंभीर नहीं है और अब तक की जांच में संक्रमण बड़ा कारण सामने नहीं आया है. किडनी फेलियर के कारणों की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है।  रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत गंभीर इधर, जोधपुर के पावटा स्थित सेटेलाइट अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार, एमडीएम अस्पताल में रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य छह महिलाओं का उपचार सेटेलाइट अस्पताल में जारी है. डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।  प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका है  एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा के अनुसार, आठ महिलाओं में से एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हुआ था, जबकि दूसरी महिला डायबिटीज की मरीज है और उसका ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया था. प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है. संक्रमण के संदेह के चलते अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को फिलहाल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है तथा प्रभावित महिलाओं के उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम तैनात की गई है।  जिला कलेक्टर ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक में डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा, सेटेलाइट अस्पताल के पीएमओ कुलबीर सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई और अब तक की जांच रिपोर्ट तथा उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई।      कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का समाचार बेहद चिंताजनक है।     प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी… पूर्व सीएम गहलोत ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो महिलाओं की हालत गंभीर होने की खबर बेहद चिंताजनक है. प्रसूताओं में सेप्टीसीमिया और किडनी संबंधी गंभीर समस्याएं सामने आना चिकित्सा व्यवस्था की खामियों और संभावित लापरवाही की ओर इशारा करता है. सबसे गंभीर बात यह है कि एक ओर शहर में सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी दौरों की तैयारियों पर जोर दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर माताओं-बहनों की जान जोखिम में पड़ रही थी. ऐसे मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।  भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पावटा सेटेलाइट अस्पताल में प्रसूता की तबीयत बिगड़ने के मामले पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है. मामले की जांच जारी है तथा सरकार पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है. राठौड़ ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाया जाएगा।  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. भगवान भरोसे चल रही है प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस ने नेता टीकाराम जुली का कहना है कि कोटा में प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में चिकित्सीय लापरवाही और अब जोधपुर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं बेहद गंभीर हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है और माताओं-बहनों की जान जोखिम में है. कांग्रेस ने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय अपनी विफलताओं को छिपाने में लगी है. पार्टी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि अस्पतालों में बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं, दोषियों पर कार्रवाई कब होगी और प्रदेश की जनता को सुरक्षित व भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं आखिर कब मिलेंगी।  कांग्रेस नेता खाचरियावास ने मंत्री के बयान को बताया महिलाओं का अपमान चिकित्सा मंत्री … Read more

रेलवे अपडेट: तीसरी लाइन कमीशनिंग के चलते दर्जनों ट्रेनों पर असर, यात्रियों को परेशानी

लखनऊ रेलवे गोंडा से गोंडा कचहरी के बीच पांच किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन को कमीशंड करने के लिए अगले माह प्री इंटरलाकिंग और नान इंटरलाकिंग की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस कारण गोंडा रूट होकर चलने वाली कई ट्रेनों को सात से 11 जुलाई तक निरस्त किया जाएगा। वहीं, कई ट्रेनों के रूट बदलेंगे। छह, सात व 10 जुलाई को 15109 छपरा-मथुरा एक्सप्रेस लखनऊ नहीं आएगी। ये ट्रेनें निरस्त होंगी – 22921 -बांद्रा-बलरामपुर एक्सप्रेस -05 जुलाई – 22922 -बलरामपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -07 जुलाई – 15081- गोरखपुर-गोमतीनगर एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15082- गोमतीनगर-गोरखपुर एक्सप्रेस -07 से 11 जुलाई – 15133 -छपरा-आनंद विहार एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15134 -आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15031- गोरखपुर-लखनऊ जंक्शन एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15032- लखनऊ जंक्शन-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15070- ऐशबाग-गोरखपुर एक्सप्रेस -सात से 10 जुलाई – 15069- गोरखपुर-ऐशबाग एक्सप्रेस -आठ से 11 जुलाई – 22199- ग्वालियर-बलरामपुर सुशासन एक्सप्रेस-08 जुलाई – 22200- बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15029- गोरखपुर-पुणे एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15030- पुणे -गोरखपुर एक्सप्रेस अयोध्या होकर चलेंगी यह ट्रेनें – 15078- गोमतीनगर-कामाख्या एक्सप्रेस -29 जून – 15904- चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस -28 जून व 08 जुलाई – 12512- तिरुवनंतपुरम-गोरखपुर एक्सप्रेस -28 जून से 07 जुलाई – 15046- ओखा-गोरखपुर एक्सप्रेस 28 जून व 05 जुलाई – 12592- यशवंतपुर-गोरखपुर एक्सप्रेस -29 जून व 06 जुलाई – 15134- आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस -01 व 04जुलाई – 19409 – साबरमती-थावे एक्सप्रेस -02 जुलाई – 22534- यशवंतपुर-गोरखपुर सुपरफास्ट -01 जुलाई – 19623- मदार जंक्शन-दरभंगा अमृत भारत -03 जुलाई – 12522- एर्नाकुलम-बरौनी एक्सप्रेस -03 जुलाई – 15065- गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस -06 से 10 जुलाई – 15067- गोरखपुर-बांद्रा एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12587- गोरखपुर-जम्मूतवी अमरनाथ एक्सप्रेस -06 जुलाई – 12565- बिहार संपर्कक्रांति एक्सप्रेस -09 जुलाई – 15651- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -06 जुलाई – 15066- पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15565- वैशाली एक्सप्रेस – 08 से 10 जुलाई – 12571- गोरखपुर-आनंद विहार एक्सप्रेस-08 व 10 जुलाई – 12572- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस – 09 जुलाई – 14673 शहीद एक्सप्रेस -08 व 09 जुलाई – 15005- गोरखपुर-देहरादून एक्सप्रेस-08 जुलाई – 15652- जम्मूतवी-गुवाहाटी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 12596- आनंद विहार-गोरखपुर एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15566- वैशाली एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15653- गुवाहाटी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -08 जुलाई – 15204- बरौनी-जम्मूतवी एक्सप्रेस -09 जुलाई – 12555- गोरखधाम एक्सप्रेस -09 जुलाई – 22537- गोरखपुर-एलटीटी कुशीनगर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 11079- एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस -09 जुलाई – 14674- शहीद एक्सप्रेस -09 जुलाई वाराणसी शटल समेत दो ट्रेनों में बढ़ेंगे कोच रेलवे प्रशासन ने लखनऊ और वाराणसी रूट सहित दो प्रमुख ट्रेनों में कोचों की स्थायी वृद्धि करने का बड़ा फैसला लिया है। इसमें गाड़ी संख्या 20401/20402वाराणसी-लखनऊ-वाराणसी सुपरफास्ट शटल एक्सप्रेस में 27 जून से कोच बढ़ाए जा रहे हैं। ट्रेन में सफर को सुगम बनाने के लिए एक वातानुकूलित (एसी) चेयर कार और एक शयनयान (स्लीपर) श्रेणी का कोच स्थायी रूप से जोड़ा जाएगा। इस बढ़ोतरी के बाद ट्रेन की कुल कोच संख्या 20 से बढ़कर 22 हो जाएगी, जिससे दैनिक यात्रियों को सीटों के लिए मारामारी नहीं करनी पड़ेगी। रेलवे ने वाराणसी-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (द्वि-साप्ताहिक और साप्ताहिक) में भी जुलाई की शुरुआत से एक एसी प्रथम श्रेणी और एक एसी 2-टियर कोच की स्थायी वृद्धि करने की घोषणा की है, जिससे इसकी क्षमता भी 22 कोच की हो जाएगी। इससे रेलयात्रियों को राहत मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव: 17 नए और 16 निर्माणाधीन अस्पताल PPP मोड में शामिल

 पटना बिहार को आगामी पांच वर्षों के भीतर चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के एक मेडिकल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सूबे के विभिन्न क्षेत्रों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार लगातार निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिसमें स्वास्थ्य को मुख्य प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है कि सूबे में मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का कायाकल्प अब लोक निजी साझेदारी (PPP) मॉडल के आधार पर किया जाएगा। इस नीति के तहत बिहार के अलग-अलग जिलों में कुल 33 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का तेजी से विकास किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिलना संभव हो सकेगा। 17 नए और 16 निर्माणाधीन अस्पताल होंगे शामिल इस योजना के तहत चिन्हित किए गए कुल 33 अस्पतालों का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। इनमें 17 बिल्कुल नए अस्पताल 'ग्रीन फील्ड' के रूप में विकसित किए जाएंगे, जबकि पहले से ही अलग-अलग चरणों में चल रहे 16 'ब्राउन फील्ड' मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को भी इसी पीपीपी मॉडल में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, नए 'ग्रीन फील्ड' अस्पतालों को 60 साल के लिए और निर्माणाधीन 'ब्राउन फील्ड' अस्पतालों को 30 साल की अवधि के लिए पीपीपी मोड के आधार पर संचालन हेतु निवेशकों को सौंपा जाएगा। इन सभी अस्पतालों के पूर्ण रूप से धरातल पर उतरने के बाद बिहार में कुल सरकारी व पीपीपी संचालित मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की संख्या वर्तमान से बढ़कर सीधे 54 हो जाएगी, जिससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता में भी भारी इजाफा होगा। नेपाल और बांग्लादेश के मरीजों के लिए भी बड़ा केंद्र बनेगा बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति, पटना के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने इस योजना के दूरगामी राजनैतिक और सामाजिक प्रभावों को साझा करते हुए बताया कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में इस अभूतपूर्व आधारभूत संरचना के विकास से बिहार न केवल उत्तर-पूर्वी भारत, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश के लिए भी मुख्य चिकित्सा हब के रूप में उभरेगा। इस योजना के साकार होने से बिहार के आम मरीजों की दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे सुदूर महानगरों के नामचीन अस्पतालों पर से निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और हर बीमारी का त्वरित इलाज राज्य के भीतर ही संभव होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में देश और विदेश के प्रतिष्ठित निवेशकों से निवेश के आधिकारिक प्रस्ताव आमंत्रित कर लिए हैं। निवेशकों की सहूलियत, स्थलीय निरीक्षण और विभिन्न विभागों से त्वरित अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने एक विशेष नोडल पदाधिकारी भी तैनात कर दिया है ताकि इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी प्रशासनिक देरी के पूरा किया जा सके।

विकास का मेगा पैकेज: राजनांदगांव में 333 परियोजनाओं का शुभारंभ, सीएम साय ने दी 510 करोड़ की सौगात

रायपुर.  किसानों की समृद्धि, गांवों का विकास और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी संकल्प के साथ राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश में विकास और सुशासन के नए अध्याय लिख रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजनांदगांव के स्टेट हाई स्कूल मैदान में आयोजित प्रगतिशील किसान सम्मेलन एवं लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव जिले को 510 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक की लागत के 333 विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने शिवनाथ नदी के मोहारा मेला स्थल से ऑक्सीजन जोन तक सस्पेंशन ब्रिज, ईरा एनीकट निर्माण एवं संरक्षण कार्य, कुमरदा-गेंदाटोला-कल्लूबंजारी मार्ग निर्माण तथा घुमरिया व्यपवर्तन जीर्णोद्धार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव जिले ने फसल चक्र परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। यहां किसानों को पारंपरिक खेती के साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खरीफ 2026 से कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर दलहन, तिलहन अथवा अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इससे किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषक उन्नति योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और अन्य किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार किसानों को खेती के लिए आवश्यक खाद और बीज समय पर उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सुशासन को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है, जहां नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज कराकर निर्धारित समय-सीमा में समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के माध्यम से आय, जाति, निवास सहित विभिन्न विभागों की 400 से अधिक सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के माध्यम से जरूरतमंद उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जा रही है। वहीं प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के जरिए आम नागरिकों को बिजली बिल से दीर्घकालिक राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपने घरों में रूफटॉप सोलर लगाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विकास कार्यों का निर्माण नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप आवास, बिजली, पानी, सड़क और डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि फसल चक्र परिवर्तन एवं जल संरक्षण के लिए किसानों एवं ग्रामवासियों में जागृति लाने के लिए पद्मफूलबासन बाई यादव महिला स्वहसहायता समूह की महिलाओं के साथ अप्रैल-मई की दोपहरी में यात्रा करती रही और एक अद्भुत कार्य किया गया। राजनांदगांव में फसल चक्र परिवर्तन होने से  फसल विविधीकरण के लिए किसान प्रेरित हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन एवं एबीस एक्सपोर्ट के बीच किसानों के सोयाबीन उत्पाद की खरीदी के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों, कृषि सखी दीदियों, सरपंचों तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों का सम्मान किया गया और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कृषकों को मिनी किट वितरित किए गए। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद संतोष पांडे, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अब किताबों से आगे की पढ़ाई: विद्यार्थियों को मिलेगी AI और रोबोटिक्स की ट्रेनिंग

लखनऊ  प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब पारंपरिक पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी भी मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और तकनीकी दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश के 18 मंडलों में ड्रीम लैब स्थापित की जा रही हैं। इसके लिए टाटा समूह के प्रतिष्ठान नेल्को के साथ हब और स्पोक माडल पर अनुबंध किया गया है नेल्को की ओर से ड्रीम लैब की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री की आपूर्ति इसी माह कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की योजना वर्तमान शैक्षिक सत्र में इन लैब का संचालन शुरू करने की है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा। ड्रीम लैब ऐसी अत्याधुनिक प्रयोगशाला है, जहां विद्यार्थी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) आधारित शिक्षा को प्रयोगों के माध्यम से समझ सकेंगे। यहां उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), रोबोटिक्स, इंटरनेट आफ थिंग्स (आइओटी), कोडिंग, थ्री-डी डिजाइन और इलेक्ट्रानिक उपकरणों के संचालन जैसी उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रयोगशाला केवल किताबों तक सीमित शिक्षा की अवधारणा को बदलकर विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’ का अवसर देगी। हब और स्पोक माडल के तहत प्रत्येक मंडल में स्थापित मुख्य ड्रीम लैब (हब) से आसपास के चयनित विद्यालयों (स्पोक) के विद्यार्थी भी जुड़ेंगे और उपलब्ध संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे। इससे सीमित संसाधनों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक आधुनिक तकनीकी शिक्षा पहुंच सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रीम लैब विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, समस्या समाधान कौशल और नवाचार की सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच तकनीकी संसाधनों की दूरी भी कम होगी और वे भविष्य की रोजगारोन्मुखी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे

अब AI और ड्रोन रखेंगे पक्षियों पर नजर, सुल्तानपुर नेशनल पार्क में बनेगा डिजिटल डेटा बैंक

चंडीगढ़. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अब कृत्रिम बुद्धिमता (एआइ) और ड्रोन के माध्यम से पक्षियों की गणना होगी। पहली बार डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा कि आगामी सीजन में कितने प्रवासी पक्षी आए, कब पहुंचे और किन हिस्सों में रुके। साथ ही पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक प्रवासी पक्षी रहे और पर्यावरणीय बदलावों का उनकी गतिविधियों पर क्या असर पड़ा। गुरुग्राम जिले में फरुखनगर के पास स्थित सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में अभी तक पक्षियों की गणना प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित रही है। इसमें पक्षियों की मौजूदगी का केवल एक समय का चित्र सामने आता था। जलभराव, दलदली हिस्से और संवेदनशील क्षेत्र कई बार प्रत्यक्ष गणना को सीमित कर देते हैं। निगरानी टावरों पर लगाए एआई कैमरे  नई व्यवस्था में ड्रोन उन हिस्सों का सर्वे भी करेंगे जहां सामान्य टीमें नहीं पहुंच पातीं। इससे पक्षियों की गतिविधि का ज्यादा व्यापक और सटीक रिकार्ड तैयार होने की उम्मीद है। ड्रोन से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो एआइ विश्लेषण के साथ जोड़कर गणना को अधिक विश्वसनीय बनाने की योजना है। उद्यान में दो स्थानों पर बने निगरानी टावरों पर एआइ आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पार्क की झीलों, जलभराव वाले क्षेत्रों और आसपास के खुले भूभाग को लगातार रिकार्ड करेंगे। इससे पूरे मौसम का व्यावहारिक डेटा तैयार होगा, जिससे पता लगेगा कि कौन सी प्रजाति किस समय सबसे ज्यादा सक्रिय रही, किस हिस्से में आवाजाही बढ़ी या घटी और किन इलाकों का उपयोग कम हुआ। एआई से इन कामों में मिलेगी मदद एआइ सिस्टम दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों की पहचान के साथ उनके व्यवहार और आवास में बदलाव के संकेत भी रिकार्ड करेगा। देखा जाएगा कि जल क्षेत्र कितना बदला, वनस्पति की स्थिति कैसी रही और किस हिस्से में पक्षियों की गतिविधि कम या ज्यादा हुई। अक्टूबर से शुरू होने वाली डिजिटल निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बदलता मौसम, मानसून में देरी, गर्मी-सर्दी, सिकुड़ते वेटलैंड और बढ़ती मानवीय गतिविधियां प्रवासी पक्षियों को किस तरह प्रभावित कर रही हैं। इसके आधार पर भविष्य में पानी प्रबंधन, वनस्पति नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में आगंतुकों की आवाजाही और संरक्षण की रणनीति तय की जा सकेगी। लगातार बदल रही पक्षियों की संख्या सुल्तानपुर में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी होते हैं, जिनमें 100 से ज्यादा प्रवासी प्रजातियां शामिल रहती हैं। हाल के वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि पक्षियों की संख्या और प्रजातियों की संरचना लगातार बदल रही है। 2025 में यहां 48 प्रजातियों के 2,593 प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए, जबकि 2024 में 43 प्रजातियों के 2686 और 2023 में 61 प्रजातियों के 6,036 पक्षी दर्ज किए गए थे।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को किया सम्मानित

फिरोजाबाद.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जनसभा स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के स्टॉल पर बच्चों और उप्र पुलिस के स्टॉल पर पुलिस कर्मियों से संवाद स्थापित किया। कृषि विभाग, एमएसएमई, आजीविका मिशन, खादी ग्रामोद्योग, फिरोजाबाद-शिकोहाबाद विकास प्राधिकरण, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग आदि के स्टॉल आदि पर जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में लेकर दुलारा-पुचकारा और उनका अन्नप्राशन किया। यहां फिरोजाबाद की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई।  विधायक मनीष ने लगवाया नारा- देखो-देखो शेर आया  मंच संचालिका ने जब फिरोजाबाद विधायक मनीष असीजा को संबोधन के लिए बुलाया तो उन्होंने शीघ्रता से अपनी बात रखी। विधायक असीजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया और जनता से नारा लगवाया। उन्होंने बोला, देखो-देखो कौन आया, जनता ने ‘शेर आया-शेर आया’ के गगनचुंबी नारों से सीएम योगी का स्वागत किया।  सीएम ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया। सीएम के हाथों चेक, चाबी, प्रमाण पत्र, स्वीकृति पत्र आदि पाकर लाभार्थियों के चेहरे खिल उठे।  सीएम के हाथों इन्हें मिली चाबी  प्रदीप कुमार- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- चाबी  शशि- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- चाबी आलोक प्रताप सिंह- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी  मीरा देवी- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी पिंकी- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -चाबी इन्हें मिला चेक  अंकित झा – मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान- 5 लाख का चेक  रानी/डाली- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-6.45 करोड़ का चेक  श्रीनिवास- त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत 12.80 लाख का चेक  ओमकार नाथ ब्रिज- पीएम कुसुम योजना- 2.66 लाख का चेक ।

बिना कोचिंग की पढ़ाई से रचा इतिहास! श्रद्धा पांडेय ने किया BPSC 70वीं परीक्षा टॉप

पटना  बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का फाइनल रिजल्ट आ गया है. इसके बाद से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई है.  जिले के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली श्रद्धा पांडेय ने 593 अंक हासिल कर पूरे बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग मिठाइयां बांटकर जश्न मना रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस उपलब्धि के बाद उन्हें SDM का पद मिल सकता है. खास बात यह है कि श्रद्धा पहले से ही उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर लखनऊ में तैनात हैं और अब उन्होंने BPSC में टॉप कर एक और बड़ी उपलब्ध हासिल की है।  शनिवार को जारी हुआ रिजल्ट  बिहार लोक सेवा आयोग ने शनिवार को 70वीं CCE का फाइनल रिजल्ट जारी किया. इस परीक्षा में श्रद्धा पांडेय ने कुल 593 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें SDM पद मिल सकता है. श्रद्धा प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली हैं.उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS कैटेगरी से 153वीं रैंक हासिल की थी. पहले ही अटेम्प्ट में यूपी PCS क्वालीफाई करने वाली श्रद्धा ने अब BPSC में भी परचम लहरा दिया।  दूसरे प्रयास में किया टॉप  श्रद्धा पांडेय की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वह लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने UPPSC संयुक्त राज्य सेवा परीक्षा 2024 में EWS श्रेणी से 153वीं रैंक हासिल कर पहले ही प्रयास में यूपी PCS परीक्षा पास की थी. इसके बाद वह असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त हुईं. अब उन्होंने एक और कमाल कर दिखाया है. दूसरे प्रयास में BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर उन्होंने अपनी मेहनत और तैयारी का एक और उदाहरण पेश किया है।  क्या करते हैं श्रद्धा के पिता?  श्रद्धा के पिता संतोष पांडेय वकील होने के साथ किसान भी हैं,जबकि मां सुनीता पांडेय हाउस वाइफ हैं.  श्रद्धा की शुरुआती पढ़ाई रानीगंज के मनीष मेमोरियल स्कूल से इंटर, संगम इंटरनेशनल स्कूल से और ग्रेजुएशन स्वामी करपात्री जी महाराज राजकीय महाविद्यालय से हुआ. खास बात यह कि श्रद्धा ने कही भी कोचिंग नहीं ली है और पहले ही कामयाबी में उन्होंने असिस्टेंट कमिश्नर निकला तो दूसरे प्रयास में बिहार पीसीएस टॉप कर दिया।  परिवार में खुशी की लहर  श्रद्धा की इस सफलता पर परिवार के लोग बेहद खुश हैं. घर पर मिठाइयां बांटी जा रही हैं और रिश्तेदार व शुभचिंतक लगातार बधाई देने पहुंच रहे हैं. बेटी की इस उपलब्धि पर पिता ने कहा कि बेटी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. उसने कभी कोचिंग की मदद नहीं ली है और हमेशा खुद पर भरोसा रखा. उसकी सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है. वहीं, गांव के लोगों का भी कहना है कि श्रद्धा की सफलता से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। 

महंगे पेट्रोल से परेशान गिग वर्कर्स का बड़ा फैसला, इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाकर बढ़ाई कमाई

 ग्वालियर पीठ पर भारी – भरकम डिलीवरी बैग, माथे पर पसीने की बूंदें और दिल में पेट्रोल के मीटर को देखकर बढ़ती धडकऩे…। ये आज के देशभर की सड़कों का कड़वा सच है। वहीं, बात करें मध्य प्रदेश के ग्वालियर की तो शहर में अचलेश्वर मंदिर की चौखट से लेकर महाराज बाड़े की तंग और व्यस्त गलियों तक जो युवा शहर की रफ्तार बने हुए थे, उनके बजट को भी पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने हिलाकर रख दिया है। आलम ये है कि, कमाई 'सेंटीमीटर' में सिमटती चली जा रही है और पेट्रोल के खर्च 'किलोमीटर' की रफ्तार से भागते चले जा रहा है, लेकिन ग्वालियर के बड़ी आबादी के युवाओं ने भी हार मानने के बजाय एक 'स्मार्ट' ऑप्शन खोज निकाला है। ईंधन की इस बेलगाम बढ़ती आग से बचने के लिए शहर के करीब 60 फीसदी गिग वर्कर्स ने पेट्रोल को 'बाय – बाय' कह दिया है और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की राह थाम ली है। जुगाड़ और स्मार्ट वर्क का नया फॉर्मूला ग्वालियर की इस गिग इकोनॉमी का पूरा गणित ही बदलकर रख दिया है। शहर में 750 से अधिक गिग वर्कर्स एक्टिव हैं, जो रोजाना डिलिवरी पहुंचाते हुए 50 से 80 किलो मीटर तक की यात्रा शहर के भीतर ही तय कर लेते हैं। दिनभर में 7 से 8 ऑडर्स निपटाने और प्रति ऑर्डर 50 से 100 रुपए कमाने वाले इन युवाओं के लिए पेट्रोल का खर्च एक गहरा आर्थिक घाव बन रहा था। ऐसे में उन्होंने तीन बड़े बदलाव किए हैं। बाइक को कहा अलविदा, ई-स्कूटर का स्वागत कई युवाओं ने अपनी पुरानी पेट्रोल बाइक बेच दी और बची – खुची जमा पूंजी से डाउन पेमेंट देकर नया ई-स्कूटर घर ले आए। किराए की सवारी का सहारा जो युवा नया वाहन खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते, वे अब किराए की ई – बाइक लेकर रोजाना की पेट्रोल की मार से खुद को बचा रहे हैं। लंबी दूरी को सीधे 'नो' अब आंख मूंदकर ऑडर्स नहीं उठाए जा रहे। युवाओं ने 'फिल्टरिंग' शुरू कर दी है। लंबी दूरी के ऑडर्स को छोड़कर कम दूरी वाले ट्रिप्स से ईंधन और समय का संतुलन बिठाया जा रहा है। रोजगार का बढ़ता ग्राफ और चुनौती… रोजगार कार्यालय के उप संचालक (रोजगार) पवन कुमार भिवटे कहते हैं कि, ग्वालियर में गिग वर्कर्स का काम तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक सिंगल रोजगार मेले से ही कंपनियों को 20 – 25 युवा मिल जाते हैं और सालभर में 200 से ज्यादा युवा इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। चूंकि, इनका पूरा काम दोपहिया वाहन पर ही टिका है, इसलिए पेट्रोल का महंगा होना सीधे इनके मुनाफे पर चोट कर रहा है। पेट्रोल की टंकी जेब खाली कर रही थी शहर के एक गिग वर्कर श्याम कुमार ने पत्रिका से बातचीत के दौरान बताया कि, पहले बाइक से ही दिनभर भागदौड़ होती थी, लेकिन जब पेट्रोल के दाम बजट से बाहर होने लगे तो ईवी ही एकमात्र रास्ता बचा। मैं रोजाना करीब 8 पार्सल डिलीवर करता हूं और हाल ही में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर शिफ्ट हुआ हूं, जिससे अब कुछ बचत हो पाती है।