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बड़ा प्रशासनिक बदलाव: IAS श्रद्धा शुक्ला का ट्रांसफर, MP कैडर में हुईं शामिल

रायपुर. रायपुर की बेटी 2022 बैच की आईएएस अधिकारी श्रद्धा शुक्ला का कैडर बदलकर मध्यप्रदेश कर दिया गया है। इससे पहले वह तेलंगाना कैडर में पदस्थ थीं। विवाह के बाद केंद्र सरकार की कॉमन कैडर नीति के तहत उन्होंने अपने पति के साथ मध्यप्रदेश में सेवाएं देने का विकल्प चुना। IAS श्रद्धा शुक्ला कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला की पुत्री हैं। कुछ माह पहले उनका विवाह मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी ऐश्वर्या वर्मा से हुआ था। विवाह के बाद दंपती को एक ही राज्य में सेवाएं देने का अवसर मिले, इसके लिए लागू कॉमन कैडर व्यवस्था के तहत श्रद्धा शुक्ला ने मध्यप्रदेश कैडर का विकल्प चुना। इसके बाद उनका कैडर तेलंगाना से बदलकर मध्यप्रदेश आवंटित कर दिया गया। श्रद्धा शुक्ला के मध्यप्रदेश कैडर में स्थानांतरण को लेकर रायपुर और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है। इसे अखिल भारतीय सेवाओं में लागू उस व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पति-पत्नी दोनों अधिकारियों को यथासंभव एक ही राज्य में पदस्थापना देने का प्रयास किया जाता है।

हाईवे सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, राष्ट्रीय राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने को लेकर नई गाइडलाइन

पटना  बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) के दोनों ओर अब मनमाने ढंग से मकान, दुकान या किसी भी तरह का व्यावसायिक ढांचा खड़ा करना मुमकिन नहीं होगा। सूबे में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए सम्राट सरकार एक बेहद सख्त नीति बनाने की तैयारी में जुट गई है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस नई नीति के तहत बिहार के भीतर राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों तरफ 15-15 मीटर की तय दूरी तक किसी भी प्रकार के नए निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। राज्य सरकार का पथ निर्माण विभाग इस बड़े प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर चुका है, जिस पर अमल करने के लिए अब शासन स्तर पर काफी तेज कवायद शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव यह बड़ी पहल सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने और उसके किनारे निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगाने को लेकर दिए गए कड़े निर्देशों पर की जा रही है। पथ निर्माण विभाग द्वारा तैयार किए गए इस नीतिगत प्रस्ताव पर राज्य के विभिन्न संबंधित विभागों से परामर्श लिया जा रहा है। चूंकि अतिक्रमण और सड़कों की सुरक्षा का यह गंभीर मामला सीधे तौर पर ट्रैफिक पुलिस, विधि विभाग और परिवहन विभाग से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर विधि विभाग समेत विभिन्न विभागों से गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही इसे पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर लागू होगा नियम यह नया नियम बिहार से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों पर समान रूप से प्रभावी होगा। नीति के लागू होने के बाद हाईवे के किनारे जिसकी भी निजी जमीन होगी, वह 15 मीटर के इस दायरे के भीतर केवल रास्ता बनाने, पेड़ लगाने या खेती करने जैसे कार्यों के लिए ही भूमि का उपयोग कर सकेगा। लेकिन, इस 15 मीटर की नो-कंस्ट्रक्शन जोन की सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का पक्का या कच्चा निर्माण कार्य करने की इजाजत कतई नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नीति के प्रभावी होने से हाईवे पर विजिबिलिटी बेहतर होगी और हादसों में भारी कमी आएगी। मालूम हो कि वर्तमान में भी पूरे राज्यभर में एनएच से अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन द्वारा लगातार बुलडोजर अभियान चलाया जा रहा है।

भूजल संकट बढ़ाने में 45 फैक्ट्रियां जिम्मेदार! नारनौल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अनदेखी

नारनौल. भूजल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए सरकार वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। औद्योगिक क्षेत्रों, संस्थानों और बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना अनिवार्य किया गया है, लेकिन नारनौल का एकमात्र औद्योगिक क्षेत्र निजामपुर रोड इन दावों की जमीनी हकीकत बयान कर रहा है। नारनौल के औद्योगिक क्षेत्र में कुल 45 छोटी फैक्ट्रियां संचालित हैं। करीब दो दशक पहले विकसित किया गया यह औद्योगिक क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां कई स्थानों पर जल निकासी व्यवस्था कमजोर है। वर्षा के दौरान सड़कों पर पानी जमा होना आम बात है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब औद्योगिक क्षेत्र में ड्रेनेज व्यवस्था ही पूरी तरह व्यवस्थित नहीं है तो वर्षा जल संचयन के नियमों का पालन किस स्तर तक हो रहा होगा। कई इकाइयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग से संबंधित कोई स्पष्ट संरचना दिखाई नहीं देती। जल संचयन प्रणाली स्थापित करना आवश्यक अधिकांश वर्षा जल सीधे सड़कों, खाली भूखंडों और नालियों में बह जाता है। जबकि हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक भूखंडों पर स्थापित औद्योगिक इकाइयों, संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है। इसका उद्देश्य वर्षा के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को बढ़ाना है। कई मामलों में भवन नक्शा स्वीकृति और अन्य अनुमतियों के दौरान भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग की शर्त शामिल रहती है। भूजल संकट वाले जिले में बढ़ रही चिंता महेंद्रगढ़ जिला लंबे समय से गिरते भूजल स्तर की चुनौती का सामना कर रहा है। कई क्षेत्रों में भूजल दोहन लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि औद्योगिक क्षेत्रों में प्रभावी वर्षा जल संचयन व्यवस्था विकसित की जाए तो हर वर्ष लाखों लीटर पानी भूगर्भ में पहुंचाया जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई मूलभूत समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं। जगह-जगह टूटी सड़कें, जल निकासी की समस्या और अधोसंरचना की कमी के बीच उद्योगों को संचालित करना आसान नहीं है। उनका तर्क है कि सरकार को वर्षा जल संचयन के नियमों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों की आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत करना चाहिए। जल संग्रहण व संरक्षण की अनूठी मिसाल उधर, कनीना में जल संकट से उबरने के लिए गांव रामबास के युवाओं ने वर्षा जल संग्रहण एवं संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। युवा पर्यावरण प्रेमी मनोज कुमार रामबास के नेतृत्व में गांव के युवाओं ने मिलकर वर्ष 2022 में एक ऐसे तालाब का निर्माण किया, जिसने न केवल वर्षा जल को संरक्षित किया बल्कि आसपास की गोचर भूमि को भी हरियाली से आच्छादित कर दिया। 35 फीट लंबा और 6 फीट गहरा तालाब तैयार मनोज कुमार ने बताया कि लगातार गिरते भूजल स्तर और पानी की बढ़ती समस्या को देखते हुए उनके मन में वर्षा जल को संरक्षित कर उसका उपयोग पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए करने का विचार आया। इसके बाद गांव के युवाओं ने श्रमदान करते हुए लगभग 35 फीट लंबा और 6 फीट गहरा तालाब तैयार किया। तालाब का निर्माण कम लागत में करने के उद्देश्य से बेकार पड़े कंक्रीट, पुरानी ईंटों तथा अन्य अनुपयोगी निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया। पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे तालाब तक वर्षा जल पहुंचाने के लिए विशेष रूप से जल निकासी मार्ग बनाए गए ताकि बारिश का अधिकतम पानी तालाब में एकत्रित हो सके। बरसात के मौसम में यह तालाब भर जाता है और इसमें संचित पानी लगभग तीन से चार महीने तक बना रहता है। इसी जल का उपयोग आसपास लगाए गए पौधों की सिंचाई के लिए किया जाता है। तालाब के चारों ओर सुरक्षा के लिए फेंसिंग की गई तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बेलपत्र, जामुन, लेहसुआ, नीम, कचनार, अमलतास, करोंदा, पापड़ी और अर्जुन सहित अनेक प्रजातियों के पौधे लगाए गए। आज ये पौधे वृक्ष बनने की ओर अग्रसर हैं और क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जल संकट जैसी बड़ी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पहल से आसपास की गोचर भूमि में हरियाली बढ़ी है और अनेक पौधे गर्मी के मौसम में भी सुरक्षित रह पाए हैं। वर्षा जल संरक्षण का यह माडल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। सीमित संसाधनों में युवाओं द्वारा किया गया यह कार्य दर्शाता है कि यदि सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच हो तो जल संकट जैसी बड़ी समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर भी संभव है। दूसरे गांव के लिए बनी प्रेरणा पर्यावरण प्रेमी मनोज कुमार ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हर गांव में वर्षा जल संग्रहण के ऐसे छोटे-छोटे प्रयास किए जाएं तो भूजल स्तर सुधारने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक पौधारोपण करने और वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने का आह्वान किया। गांव रामबास की यह पहल आज जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामुदायिक भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है, जिससे अन्य गांव भी प्रेरणा ले रहे हैं।

कैशियर मर्डर केस के बाद बड़ा फैसला, मिनटों में सील होगा चंडीगढ़ शहर

चंडीगढ़. यहां सेक्टर-11 में स्थित श्री कुमार केमिस्ट के कैशियर जानकी दास की दिनदहाड़े हत्या के बाद पुलिस ने सुरक्षा और निगरानी प्रणाली में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। अब किसी भी क्रिमिनल घटना के बाद मिनटों में पूरे शहर को सील किया जाएगा जबकि बीट स्टाफ को अपने एरिया से बाहर जाने की इजाजत नहीं होगी। पुलिस विभाग द्वारा बीट स्टाफ, ट्रैफिक पुलिस और P.C.R. कर्मचारियों के लिए करीब 2800 ऐसे आधुनिक वायरलेस सेट खरीदे जा रहे है, जिनसे हर समय उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। इससे सीनियर अधिकारी यह पक्का करेंगे कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी निर्धारित इलाके में ही मौजूद रहें। पुलिस ने सभी थाना मुखियों को अपने क्षेत्रों से बाहर जाने वाली सड़कों की पहचान कर तुरंत नाकाबंदी के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। इस बार शहर को सील करने की पूरी जिम्मेदारी S.P. सिटी को सौंपी गई है। इसलिए हर थाने को 40 से 45 नए बैरिकेड दिए जा रहे हैं। नाकों पर उठे सवाल  कैशियर मर्डर केस ने पुलिस के नाका सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जानकी दास की हत्या उसी जगह पर की जहां नाका लगा हुआ था, लेकिन वहां तैनात कर्मचारियों को घटना की भनक तक नहीं लगी। हत्यारे वारदात को अंजाम देने के बाद ऑटो में बैठकर भाग गए। इससे पहले सेक्टर-9 के प्रॉपर्टी डीलर मर्डर केस और पंजाब BJP ऑफिस पर बम हमले के आरोपी शहर के नाकों से होकर फरार हो गए थे। ऐसे मामलों ने नाकों के असर पर सवाल खड़े किए हैं। बीट सिस्टम होगा मजबूत पुलिस विभाग अब बीट सिस्टम को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। बीट कर्मचारियों को बाजारों और कमर्शियल इलाकों में रेगुलर गश्त करने और दुकानदारों से सीधा संपर्क बनाने को कहा गया है, ताकि लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हो सके।

बेल्जियम से ड्रॉ के बाद ईरान टीम की अनोखी विदाई, ड्रेसिंग रूम में संदेश ने जीता दिल

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान ईरान फुटबॉस टीम ने एक ऐसा काम किया जिसकी जमकर सराहना की जा रही है। सोमवार यानि 21 जून को बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ करने के बाद इरानी खिलाड़ियों ने लॉस एंजलिस में स्थित सोफी स्टेडियम को भावुक तरीके से विदाई दी है। उनकी ओर से ड्रेसिंग रूम में एक नोट छोड़ा गया जिसको पढ़ने के बाद हर खेल और फुटबॉल प्रेमी का दिल खुशी और भावुकता से लबरेज हो जाएगा। ईरानी टीम ने छोड़ा खास नोट सोशल मीडिया पर ईरानी टीम का एक खास नोट सामने आया है। जिसमें उन्होंने लॉस एंजलिस से अपनी विदाई को भावुक मोड़ दिया है। नोट में समर्थकों को शुक्रिया कहने के साथ ही विश्व में शांति की अपील की है। नोट में लिखा , 'हजारों साल पुरानी प्राचीन फारस को लेकर आज के सभ्य ईरान तक भावना आज भी जीवित और अडिग है। आपकी मेहमाननवाजी के लिए बहुत शुक्रिया लॉस एंजलिस। हम गर्व के साथ यहां आए, सम्मान के साथ खेले और सम्माने के साथ ही विदा लेते हैं।' ईरान का होम ग्राउंड बन गया लॉस एंजलिस लॉस एंजलिस का मैदान एक तरह से ईरान टीम का होम ग्राउंड लग रहा था। लाखों की संख्या में ईरानी समर्थक अपनी टीम का सपोर्ट करने के लिए स्टेडियम में नजर आए। इसकी एक वजह ये भी है कि लॉस एंजलिस दुनिया के सबसे बड़े ईरानी समुदाय के गढ़ों में से एक है। फैंस को धन्यवाद करते हुए नोट में लिखा कि, 'हर उस ईरानी फैन का शुक्रिया जिसने खेल के 180 मिनटों में हमारा साथ नहीं छोड़ा। आपने अपनी आवाज और आत्मा से हमारा समर्थन किया।' फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ईरान को हुई परेशानी फीफा वर्ल्ड कप 2026 का सफर ईरान टीम के लिए आसान नहीं रहा। USA में प्रतिबंध के चलते खिलाड़ियों को 48 घंटे के ज्यादा रहने की अनुमति नहीं मिली। इसके कारण उन्हें अपना बेस मैक्सिको के तिजुआना शहर में बनाना पड़ा। इसके अलावा कुछ खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ को वीजा संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा।  

अलीगंज के पुरनिया इलाके में आग से हड़कंप, कई लोगों के फंसे होने की आशंका

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक दुकान में अचानक भीषण आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरी इमारत धुएं और लपटों की चपेट में आ गई. दुकान के ऊपर एक कोचिंग सेंटर चल रहा था, जिसकी वजह से स्थिति काफी भयानक हो गई. आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. कोचिंग सेंटर में मौजूद छात्र-छात्राओं और अन्य लोगों के बीच दहशत फैल गई. धुएं और आग की लपटों ने पूरी इमारत को घेर लिया, जिससे अंदर मौजूद लोगों के सामने बाहर निकलने की चुनौती खड़ी हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हालात इतने गंभीर हो गए कि कुछ लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इमारत के छज्जों और छत से छलांग लगानी पड़ी. आग और धुएं के बीच फंसे लोगों को देखकर आसपास मौजूद लोगों में भी चिंता बढ़ गई. घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए. स्थानीय लोगों ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसी दौरान दमकल विभाग और पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई. सूचना मिलते ही दमकल और पुलिस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया. आग का धुआं बना खतरा, इमारत में मची चीख-पुकार दमकल कर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. वहीं पुलिस और अन्य बचाव दल इमारत के भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे हुए हैं. पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और सभी आवश्यक कदम उठाने को कहा है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों को इलाज उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही प्रशासन को हर स्तर पर सतर्कता बरतने को कहा गया है ताकि राहत कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए. मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों की सतत मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए हैं. सीएम के निर्देश के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना में घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास जारी है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. दमकल और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है. अलीगंज के पुरनिया इलाके में हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल

51 स्कूल बसों की जांच, 5 नियमों का उल्लंघन करती मिलीं; कार्रवाई कर काटे चालान

भिलाई. भिलाई–दुर्ग के 4 शैक्षणिक संस्थानों के परिवहन करने वाले 51 बसों की रविवार को जांच की गई। जांच के दौरान यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग ने खामियां मिलने पर कुल 05 स्कूली बसों पर कार्रवाई कर चालान काटा गया। वहीं शिविर के दौरान चालक एवं परिचालकों के स्वास्थ्य परीक्षण भी कराए गए। इसमें 13 चालकों में रक्तचाप एवं शुगर संबंधी स्वास्थ्य शिकायतें पाई गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात ऋचा मिश्रा ने बताया कि रविवार को स्कूली छात्र-छात्राओं के सुरक्षित परिवहन को दृष्टिगत रखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप यातायात पुलिस दुर्ग एवं परिवहन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से पुलिस ग्राउंड सेक्टर- 06 भिलाई में स्कूल बस जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिले के 04 शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित 51 स्कूल बसों का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान परिवहन विभाग ने वाहन पंजीयन, परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र, रोड टैक्स एवं वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस का परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 05 स्कूल बसों में निर्धारित सुरक्षा मानकों एवं आवश्यक दस्तावेजों संबंधी खामियां पाए जाने पर मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत चालानी कार्रवाई की गई। संबंधित संचालकों को कमियों का निराकरण कर ही बसों का संचालन करने हेतु निर्देशित किया गया। शिविर के दौरान चालक एवं परिचालकों के स्वास्थ्य परीक्षण भी कराए गए, जिसमें 13 चालकों में रक्तचाप एवं शुगर संबंधी स्वास्थ्य शिकायतें पाई गईं। इनके संबंध में आवश्यक चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया गया है।

भौगोलिक दूरियां होंगी खत्म: वनांचलों से लेकर शहरों तक पहुंच रही आधुनिक शिक्षा

विशेष आलेख ​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में 'PM-USHA' की महा-क्रांति  भौगोलिक दूरियां होंगी खत्म: वनांचलों से लेकर शहरों तक पहुंच रही आधुनिक शिक्षा रायपुर  ​     छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा जगत में एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है। वर्ष 2014 से 2026 के बीच केंद्र सरकार से मिली प्रमुख स्वीकृतियों और सौगातों की शृंखला में 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान' (PM-USHA) राज्य के लिए वरदान साबित हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी क्रियान्वयन, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की नैशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) ग्रेडिंग में सुधार, और अनुसंधान (Research) के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारी-भरकम वित्तीय अनुदान की स्वीकृति दी गई है। यह योजना पूर्ववर्ती राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का ही एक परिष्कृत और अधिक उन्नत रूप है। ​अधोसंरचना विकास के लिए मिला 'मेगा बजट' ​      इस योजना के तहत देश भर के लिए कुल 12,926.10 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस विशाल बजट का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा छत्तीसगढ़ के हिस्से आया है। ​योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चयनित पात्र शासकीय विश्वविद्यालयों को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च यूनिवर्सिटीज़ (MERU) के अंतर्गत प्रति संस्थान 20 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपए तक का भारी-भरकम अनुदान मिल रहा है। वहीं, चिन्हित शासकीय महाविद्यालयों को बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण (Grants to Strengthen Colleges) के लिए 5 करोड़ रुपए तक का प्रोजेक्ट-बेस्ड अनुदान स्वीकृत किया जा रहा है। इस वित्तीय भार का वहन केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात (60% केंद्रांश और 40% राज्यांश) में किया जा रहा है। ​धरातल पर उतरी योजना: स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक लैब का निर्माण जारी     ​छत्तीसगढ़ में यह योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर तेजी से प्रगति कर रही है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) निष्पादित किया जा चुका है। वर्तमान में, चयनित कॉलेजों द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। इसके साथ ही, राज्य के शिक्षण संस्थानों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक लैब, और कंप्यूटर सेंटर जैसे अत्याधुनिक अधोसंरचना निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।       ​ बस्तर से सरगुजा तक सभी 33 जिलों को मिल रहा है सीधा लाभ       ​PM-USHA योजना का सबसे खूबसूरत पहलू इसका समावेशी होना है। इस परियोजना का लाभ छत्तीसगढ़ के समस्त 33 जिलों को मिल रहा है। योजना के तहत विशेष रूप से राज्य के ​आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों जैसे बस्तर संभाग और सरगुजा संभाग,​कम सकल नामांकन अनुपात (GER) वाले क्षेत्रों,​आकांक्षी जिलों जैसे धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद आदि के शासकीय कॉलेजों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया गया है, ताकि विकास की दौड़ में पीछे छूटे क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाया जा सके। ​5 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के सपनों को उड़ान       ​इस दूरदर्शी परियोजना से राज्य के विभिन्न शासकीय शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत लगभग 5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और महिला वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिल रहा है। अब छत्तीसगढ़ के वनांचलों और दूरदराज के गांवों के युवाओं को भी वैश्विक स्तर की आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान की सुविधाएं अपने ही राज्य में सुलभ हो रही हैं, जो उनके सुनहरे भविष्य की मजबूत नींव रख रही हैं।  विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक

ATS जांच में बड़ा खुलासा! संदिग्ध आतंकी ने उगले राज, मिशन-2047 के तहत सक्रिय था मॉड्यूल

भोपाल  मध्यप्रदेश में आतंकी नेटवर्क के खुलासे के बाद गिरफ्तार किए गए इजहार उल हक ने खुलासा किया है कि ये लोग पाकिस्तानी आतंकी ग्रुप से जुड़े हुए थे और मिशन 2047 पर काम कर रहे थे। एटीएस की जाँच के दौरान आतंकी ने माना है कि सभी आतंकी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स, जैसे-व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तान स्थित आकाओं के संपर्क में थे। इनका उद्देश्य देशभर में नेटवर्क खड़ा करना, युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें स्लीपर सेल के रूप में तैयार करना था। इसके तहत पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के एजेंडे को साल 2047 तक देश में लागू करना मुख्य मकसद था। एटीएस के अनुसार, इस एजेंडे का उद्देश्य देश में कट्टर इस्लामिक कानून लागू करना बताया गया है। पूछताछ में इजहार ने बताया कि देशभर में तैयार हो रहे उनके कथित मुजाहिद्दीन समय आने पर एक साथ बाहर आएंगे और शासन को उखाड़ फेंकेंगे। यह भरोसा उन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दिलाया था। उन्हें शपथ दिलाई गई थी कि समय आने पर उन्हें टारगेट किलिंग और देश में डर का माहौल पैदा करने जैसे काम करने होंगे। इनका मकसद ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ यानी PFI के ‘मिशन-2047’ के लिए काम कर रहे थे। एटीएस के मुताबिक, पीएफआई का मकसद साल 2047 तक देश में इस्लामी कानून लागू करना है। पूछताछ में इजहार उल हक ने बताया है कि वक्त आने पर सभी आतंकी एक साथ बाहर आएँगे और शासन को उखाड़ फेकेंगे। उन्हें टारगेट किलिंग और देश में डर का माहौल पैदा करना है। सदस्यों के काम करने के तरीके पर पूछताछ जारी बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार इजहार उल हक से पूछताछ में कथित नेटवर्क की भूमिका और उसके सदस्यों के काम करने के तरीके को लेकर जानकारी मिली है। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े थे और किस स्तर तक इसकी गतिविधियां फैली हुई थीं। तमाम जानकारियां हासिल करने के लिए एटीएस ने इजहार को 22 जून तक रिमांड पर लिया हुआ है। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने कहा- जिहादी बनो, शहादत मिलेगी फराज से पूछताछ में सामने आए इनपुट के मुताबिक सभी संदिग्ध कथित तौर पर पाकिस्तानी वॉट्सएप ग्रुप के संपर्क में थे। जांच के अनुसार, फराज पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर अन्य युवकों को जोड़ने का काम शुरू कर चुका था। इसका मकसद युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना था। एटीएस की पूछताछ में फराज ने इसकी पुष्टि की है। नईम के संपर्क में रहा था फराज पूछताछ में फराज ने बताया कि वह पिछले 5-6 सालों से देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था। नईम ने ही फराज और बिहार निवासी संदिग्ध आतंकी का परिचय कथित पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया था। हैंडलर्स ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के नाम पर प्रभावित किया और वीडियो कॉल के जरिए शपथ दिलाई कि वह सच्चा जिहादी बनेगा। हैंडलर्स द्वारा दिए गए कामों को अंजाम तक पहुंचाएगा और जिहाद के रास्ते पर चलते हुए अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेगा। भारत के कई राज्यों सहित पाकिस्तान के लोगों से संपर्क चारों संदिग्धों ने पूछताछ में टेलीग्राम और वॉट्सएप ग्रुप के जरिए भारत और पाकिस्तान में नेटवर्क से जुड़े सक्रिय लोगों के संपर्क में रहने की बात स्वीकार की है। फराज को सोशल मीडिया ग्रुप में 'खालिद सैफुल्ला' के नाम से जाना जाता था। हैंडलर्स ने कथित तौर पर लोगों में भय पैदा करने और समय आने पर बताए गए टारगेट पर कार्रवाई करने का टास्क दिया था। गौरतलब है कि इजहार उल हक को बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार किया गया था। जबकि मोहम्मद फराज को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उसे खालिद सैफुल्लाह नाम से पाकिस्तानी हैंडलर ने लश्कर कमांडर के तौर पर पेश किया था। उसका काम स्लीपर सेल तैयार करना था। इसी तरह नईम अब्दुल्ला यूपी के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था। वह मोम्मद फराज को ऑनलाइन ग्रुप से जोड़ा था। आरोपितों के पास से संदिग्ध डिजिटल दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई थी, जिसकी फोरेंसिक जाँच चल रही है। फराज को दिए थे पासपोर्ट बनवाने के निर्देश हैंडलर्स ने फराज को पासपोर्ट बनवाने के निर्देश भी दिए थे। उसे भरोसा दिलाया गया था कि किसी अन्य देश के रास्ते पाकिस्तान बुलाया जाएगा, जहां उसे मुजाहिदीन बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। एटीएस की दबिश के दौरान फराज के कमरे से मिली जिहादी सामग्री की जांच की जा रही है।

व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला, 123 शहरों में दुकानों को 24×7 संचालन की अनुमति

जयपुर राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश में व्यापार रोजगार और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी गई है. इस नए संशोधन के लागू होने के बाद प्रदेश के 123 चिह्नित शहरों में दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान( शॉपिंग मॉल्स) को 24 घंटे तक संचालित करने की अनुमति मिल जाएगी.संशोधन से पहले दुकानों और प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के लिए काम करने की दैनिक समय-सीमा 9 घंटे निर्धारित थी।हालांकि, बाद में हुए संशोधनों के जरिए दैनिक काम की सीमा को 9 से बढ़ाकर 10 घंटे किया गया था. लंबे समय से व्यापारी कर रहे थे 24 घंटे बाजार खोलने की मांग प्रदेश के व्यापारी लंबे समय से 24 घंटे बाजार खोलने की अनुमति की मांग कर रहे थे. सरकार के इस फैसले को व्यापार, रोजगार और शहरी अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, संशोधित व्यवस्था के साथ कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए भी कई शर्तें लागू की गई हैं. कर्मचारियों के हितों का रखना होगा ध्यान बाजारों को 24 घंटे खोलने की छूट देने के साथ सरकार ने प्रत्येक कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन साप्ताहिक अवकाश देना अनिवार्य होगा. किसी भी कर्मचारी से प्रतिदिन 10 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा. निर्धारित सीमा से अधिक काम लेने पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ओवरटाइम का भुगतान करना होगा. सरकार ने अधिसूचना में साफ स्पष्ट किया है कि यदि कोई दुकान या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान इन शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है. शराब की दुकानों और नाइट क्लबों के समय को लेकर अटकलें तेज इस फैसले के बाद प्रदेश के राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में एक नई बहस भी छिड़ गई है.  क्या सरकार आने वाले दिनों में शराब की दुकानों और नाइट क्लबों के संचालन समय में भी ढील देने पर विचार कर रही है? हालांकि, आबकारी विभाग या सरकार के किसी भी आधिकारिक स्तर से इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई है.