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कांग्रेस का बड़ा एक्शन: जिला अध्यक्ष तैयार करेंगे विवादित नेताओं की सूची, अनुशासनहीनों पर गिरेगी गाज

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस में अक्सर अपने ही नेताओं के कारण पार्टी की मुसीबतें बढ़ती रहती हैं। कई नेता सीधे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह तक को निशाने पर ले लेते हैं। अब पार्टी लाइन से हटकर अक्सर विवादित बयान देने वाले कांग्रेसियों की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। एमपी कांग्रेस अब ऐसे विवादित नेताओं की लिस्ट तैयार करने जा रही है जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं। जिला अध्यक्ष बनाएंगे विवादित बयानवीरों की लिस्ट एमपी कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने बताया कि पार्टी फोरम पर सीनियर लीडर्स ने कई बार यह विषय उठाया है कि कई कार्यकर्ता ऐसे हैं जो अक्सर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करते हैं। ऐसे नेताओं पर लगाम लगाने के लिए अब पार्टी कड़ा फैसला लेने जा रही है। सोशल मीडिया पर भी पार्टी के खिलाफ लिखने वाले होंगे चिन्हित कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने सभी जिला अध्यक्षों को भेजे पत्र में लिखा है कि पार्टी को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और फैसलों के खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं। इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। चिन्हित करें नोटिस दें न मानें तो एक्शन लें पत्र में कहा गया है कि प्रदेश प्रभारी के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने तय किया है कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। जिला अध्यक्षों से कहा गया है कि ऐसे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की पहचान कर उन्हें पहले नोटिस जारी करें। यदि इसके बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं होता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें और इसकी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजें। जिले में कार्रवाई नहीं हो सकती तो सबूतों के साथ प्रदेश को रिपोर्ट भेजें पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन नेताओं के खिलाफ जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं है, उनके मामलों की पूरी जानकारी और साक्ष्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाए, ताकि उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके। संगठन ने जिला इकाइयों से इस काम को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

Crude Oil Forecast: सिटी बैंक का बड़ा दावा, कच्चे तेल की कीमतें और गिरेंगी; क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

नई दिल्ली  दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत का दौर अब खत्म होने की कगार पर है. मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सॉक्‍स के बाद अब दिग्गज अमेरिकी निवेश बैंक सिटी (Citigroup) ने भी भविष्यवाणी की है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो इससे भारतीय तेल कंपनियों पर बोझ कम होगा और देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती हो सकती है।  सिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्‍य पर दोहरी नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई थी. इस वजह से कच्‍चे तेल की सप्‍लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई. लेकिन अब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने से तनाव कम हुआ है और इस महत्‍वपूर्ण समुद्री रास्‍ते पर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है. कच्चा तेल पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध है. इस वजह से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दूसरी तिमाही में लगभग 30% तक टूटकर 71.92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।  भरपूर मात्रा में उपलब्‍ध है कच्‍चा तेल सिटी बैंक के विश्लेषकों के मुताबिक, तेल बाजार अब तेजी से अपनी पुरानी और सामान्य स्थिति में लौट रहा है. होर्मुज रूट खुलने से रिफाइनरियों को भरपूर कच्चा तेल मिल रहा है. दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश चीन फिलहाल बाजार से थोड़ी दूरी बनाए हुए है, जिससे कच्चे तेल की फिजिकल मांग कमजोर हुई है. वैश्विक तेल भंडारों में उम्मीद के मुकाबले बेहद कम गिरावट दर्ज की गई है, यानी स्टॉक में तेल की कोई कमी नहीं है।  $60-65 के दायरे में आएगा ब्रेंट क्रूड सिटी के विश्लेषकों का अनुमान है कि गर्मियों के दौरान अगर तेल की कीमतों में कोई अस्थायी तेजी आती भी है, तो उसे केवल बिकवाली का अवसर माना जाना चाहिए क्योंकि अंततः कीमतों को नीचे ही आना है. बैंक के मुताबिक, साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड आसानी से 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच जाएगा।  केवल सिटी ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े वित्तीय संस्थान भी कच्‍चे तेल में गिरावट का अनुमान जता चुके हैं. गोल्डमैन सॉक्‍स ने कहा था कि ईरान विवाद शांत होने के बाद बाजार में फिर से ओवरसप्‍लाई की स्थिति बन जाएगी. वहीं, मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) भी पिछले कुछ हफ्तों में दो बार कच्चे तेल के अपने अनुमानित दामों में कटौती कर चुका है।  भारत के लिए इसके क्या मायने हैं? भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का $60 के स्तर पर आना भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं होगा. कच्चे तेल के दाम कम होने से कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा. इससे कंपनियों को पेट्रोल और डीजल का रेट घटाने का मौका मिलेगा।