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राजस्थान में पांचना समझौता लागू, तकनीकी खामी दूर कर बांध के सभी गेट खोले गए

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश और लगातार मॉनिटरिंग के बाद पांचना समझौते के तहत जल प्रवाहित कर दिया गया. जल प्रवाह के दौरान आई तकनीकी खामी को दूर करने के लिए जल संसाधन विभाग और एसडीआरएफ की टीमें पूरी रात मौके पर जुटी रहीं. स्थिति की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया और जल संसाधन विभाग तथा एसडीआरएफ की तकनीकी टीमों को मौके पर लगाया. मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने युद्ध स्तर पर पूरी रात तकनीकी खामी को दूर करने का काम किया. सभी गेट खोल दिए गए लिफ्ट, कैनाल और नदी की ओर निर्धारित सभी गेट खोले गए. जिस गेट में तकनीकी दिक्कत आ रही थी, उसे भी मंगलवार तड़के सुबह 4:50 बजे सफलतापूर्वक खोल दिया गया. इसके लिए पूरी रात टीमें लगातार काम करती रहीं. भरतपुर, बीसलपुर और मथुरा से विशेषज्ञों को भी बुलाया गया था.  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिल्ली प्रवास के दौरान भी पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग करते रहे, और अधिकारियों से नियमित फीडबैक लेते रहे. अधिकारियों के अनुसार जिन गेटों में करीब 20 वर्षों से तकनीकी खामी के कारण संचालन में दिक्कत आ रही थी, उन्हें भी इस अभियान के दौरान खोल दिया गया, जिससे पांचना समझौते के तहत जल प्रवाह सुनिश्चित हो सका. 20 साल बाद पानी की निकासी शुरू राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध है. 20 साल बाद पानी की निकासी शुरू हो गई है. सोमवार दोपहर 12 बजे मंत्री सुरेश रावत और गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने पहले गेटों का पूजन किया. इसके बाद बटन दबाकर पांचना बांध से गंभीर नदी, कमांड क्षेत्र की नहरों और गुडला-पांचना लिफ्ट परियोजना के लिए एक साथ पानी छोड़ा. 21 राजस्व गांवों के किसानों को होगा फायदा 61 करोड़ रुपये की लागत वाली गुडला-पांचना लिफ्ट परियोजना के जीर्णोद्धार और दो नवीन लिफ्ट परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया गया. बांध से पानी छोड़े जाने के बाद 21 राजस्व गांवों के किसानों को फसल की सिचाई का फायदा होगा. पांचना बांध से पानी छोड़े से जाने के बाद कुछ किसानों में खुशी दिखी. 

सफेद बालों से राहत के लिए करी पत्ते का तेल, जानें फायदे और इस्तेमाल का तरीका

 आजकल कम उम्र में बालों का सफेद होना एक आम समस्या बन गई है. पहले जहां लोगों के बाद उम्र बढ़ने पर सफेद होते थे, वहीं अब 20-30 साल के युवाओं में भी ये परेशानी तेजी से देखने को मिल रही है. ऐसे में युवाओं से लेकर बड़े लोग तक बार-बार अपने सफेद बालों को काला करने के लिए हेयर डाई या केमिकल वाले हेयर कलर का इस्तेमाल करते हैं. केमिकल वाली हेयर डाई से बाल काले तो हो सकते हैं, लेकिन लगातार इनका इस्तेमाल बालों को नुकसान भी पहुंचा सकता है. यही वजह है कि आजकल लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों की तलाश में रहते हैं. अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो केमिकल हेयर डाई लगाना पसंद नहीं करते हैं और बालों को काला करने के लिए किसी नेचुरल नुस्खे की तलाश में रहते हैं, तो ये खबर आपके लिए है. आपने करी पत्ते की मदद से सफेद बालों को काला करने के बारे में जरूर सुना होगा. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में करी पत्ता सफेद बालों पर असर करता है या ये सिर्फ एक घरेलू नुस्खा भर है? आइए जानते हैं कि सफेद बालों के लिए करी पत्ते का इस्तेमाल कैसे किया जाता है, इससे बालों को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं. कम उम्र में बाल सफेद क्यों हो रहे हैं? पहले सफेद बाल सिर्फ बढ़ती उम्र की निशानी माने जाते थे, लेकिन अब छोटी उम्र के लोगों में भी ये समस्या तेजी से बढ़ रही है. 20-30 साल के कई लड़के-लड़कियों के बाल उम्र से पहले ही सफेद होने से परेशान हैं. इसके पीछे तनाव, खराब खानपान, प्रदूषण, जेनेटिक्स और बालों पर बार-बार केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल जैसी कई वजहें होती हैं. यही कारण है कि आजकल लोग बालों की देखभाल के लिए नेचुरल और घरेलू उपायों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. बालों के लिए क्यों फायदेमंद माना जाता है करी पत्ता? करी पत्ता बालों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों और स्कैल्प के लिए बढ़िया माने जाते हैं. इनका नियमित इस्तेमाल बालों की जड़ों को मजबूत बनाने, स्कैल्प को पोषण देने, ड्राईनेस को कम करने और बालों की चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है. साथ ही, ये समय से पहले बाल सफेद होने की एक वजह माने जाने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भी मददगार हो सकता है. क्या करी पत्ता सफेद बालों को दोबारा काला कर सकता है? इसका सटीक जवाब मिल पाना मुश्किल है क्योंकि ऐसा कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो ये साबित करे कि करी पत्ता सफेद बालों को फिर से काला कर सकता है. अगर बालों की नेचुरल तरीके से रंग बनाने वाले सेल्स काम करना बंद कर चुके हैं, तो सिर्फ करी पत्ते से बालों का काला हो पाना संभव नहीं है. हालांकि, ये बालों को हेल्दी रखने और समय से पहले सफेद होने की रफ्तार को कुछ हद तक धीमा करने में मदद कर सकता है. सफेद बालों के लिए करी पत्ते का तेल कैसे बनाएं? अगर आप इसे आजमाना चाहते हैं, तो घर पर आसानी से करी पत्ते का तेल तैयार कर सकते हैं. तेल बनाने के लिए आपके चाहिए:     15-20 ताजे करी पत्ते     2 बड़े चम्मच नारियल का तेल बनाने का तरीका     सबसे पहले नारियल का तेल हल्का गर्म करें.     इसमें करी पत्ते डाल दें.     पत्तों का रंग गहरा होने तक धीमी आंच पर पकाएं.     अब गैस बंद करके तेल को ठंडा होने दें.     ठंडा होने के बाद तेल छानकर किसी साफ बोतल में भर लें. इस्तेमाल करने का सही तरीका     तेल को स्कैल्प और बालों की जड़ों में अच्छी तरह लगाएं.     5-10 मिनट हल्के हाथों से मसाज करें.     करीब 2 घंटे तक तेल लगा रहने दें.     इसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें.     बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में 2 से 3 बार इस्तेमाल किया जा सकता है.  

यश की टॉक्सिक पर हुमा कुरैशी बोलीं, देरी के बावजूद फिल्म होगी शानदार

साउथ सुपरस्टार यश की आने वाली फिल्म 'टॉक्सिक' 26 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. हालांकि फिल्म की रिलीज डेट कई बार आगे बढ़ाई जा चुकी है. फिल्म में अहम किरदार निभा रही एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ने फिल्म की देरी को लेकर अपनी बात रखी. इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि आखिर फिल्म की रिलीज बार-बार क्यों टल रही है. इस पर हुमा ने क्या जवाब दिया आपको बताते हैं. हुमा कुरैशी ने 'लल्लनटॉप' के साथ एक इंटरव्यू में कहा, "नई रिलीज डेट 26 अगस्त है. देरी की वजह जो भी रही हो, मुझे लगता है कि अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि फैंस फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. मैं भी फिल्म को लेकर बहुत एक्साइटेड हूं, क्योंकि मैंने जितना भी देखा है, उसके आधार पर कह सकती हूं कि यह एक शानदार विजुअल अनुभव होने वाली है. यह बहुत बड़ी फिल्म है." 'टॉक्सिक' के एक्शन को बताया अनोखा अनुभव हुमा कुरैशी ने आगे कहा, "मैंने अभी पूरी फिल्म नहीं देखी है, लेकिन मैंने जितना देखा है, उसके हिसाब से हर कलाकार और हर किरदार ने अपना बेस्ट प्रदर्शन किया है. मुझे नहीं लगता कि दर्शकों ने इससे पहले इतने बड़े लेवल का एक्शन अनुभव किया होगा." उन्होंने यह भी कहा कि किसी फिल्म को सिर्फ इसलिए जल्दी रिलीज नहीं करना चाहिए कि वह बाकी फिल्मों से पहले सिनेमाघरों में आ जाए. फिल्म को तभी रिलीज किया जाना चाहिए, जब वह पूरी तरह तैयार हो. हुमा ने कहा, "फिल्म मार्च में आए, जून में आए या अगस्त में, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. मकसद सबसे पहले रिलीज करना नहीं होना चाहिए, बल्कि फिल्म को तब रिलीज करना चाहिए जब वह पूरी तरह तैयार हो."  यश की 'टॉक्सिक' में नजर आएंगे ये सितारे 'टॉक्सिक' का निर्देशन गीतू मोहनदास कर रही हैं. फिल्म में यश, नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी जैसे कलाकार नजर आएंगे. फिल्म की शूटिंग कन्नड़ और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ की गई है. इसके अलावा इसे हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम भाषाओं में भी रिलीज किया जाएगा.

बिहार में हवाई सेवा का विस्तार, पताही एयरपोर्ट को कोड-बी एयरपोर्ट बनाने की तैयारी तेज

पटना बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित पताही एयरपोर्ट से छोटे विमानों की सेवा शुरू करने की तैयारी जोर पकड़ चुकी है। इसी कड़ी में पताही एयरपोर्ट को कोड-बी एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। एयरपोर्ट का टर्मिनल भवन निर्माण का काम अगले साल जून तक पूरा हो जाएगा। वहीं, रनवे के लिए दस दिन में टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। 43 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण एवं विकास के प्रथम चरण का कार्य दो जुलाई से शुरू हो गया है। इसके तहत 23 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से टर्मिनल भवन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) भवन, फायर स्टेशन भवन सहित अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड में पूरी की जाएगी। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार परियोजना के प्रथम चरण की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पिछले महीने निर्माण एजेंसी को कार्य आवंटित करते हुए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया था। दो जुलाई से निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत भी हो गई है। एजेंसी को कार्य पूरा करने के लिए 11 माह की समय-सीमा दी गई है। निर्धारित समय के अनुसार टर्मिनल भवन अगले वर्ष जून तक तैयार हो जाएगा। उत्तर बिहार में हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पटना, गयाजी, दरभंगा और पूर्णिया से नागरिक विमान सेवाएं शुरू होने के बाद अब मुजफ्फरपुर से भी उड़ान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। छोटे विमानों के संचालन की तैयारी एयरपोर्ट के रनवे को विकसित करने के लिए अगले दस दिनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। नागरिक विमानों के संचालन के अनुरूप रनवे को तैयार करने के लिए उसका पक्कीकरण किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में यहां से छोटे विमानों के संचालन की योजना है। इसे ध्यान में रखते हुए टर्मिनल भवन की क्षमता एक समय में लगभग 150 यात्रियों के आवागमन के अनुरूप विकसित की जा रही है। दशकों पुरानी मांग पर दस साल पहले शुरू हुई पहल दशकों से पताही एयरपोर्ट को दोबारा चालू करने की मांग उठ रही थी, लेकिन 10 साल पहले ही इसपर गंभीर पहल शुरू हुई। तत्कालीन डीएम आनंद किशोर के समय दो निजी विमान कंपनियों ने निजी सेवा में रुचि दिखाई, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद डीएम मो. सोहैल ने वाणिज्य मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी कि एयरपोर्ट चालू होने से यहां प्रति व्यक्ति आय में कम से कम चार फीसदी का इजाफा होने की संभावना है। इसके लिए उन्होंने एयर ट्रैफिक सर्वे भी कराया, जिसमें बताया गया कि उत्तर बिहार से करीब सात हजार यात्री पटना जाकर विमान पकड़ते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट चालू करने के लिए 548 एकड़ जमीन की मांग के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लोगों की उम्मीदें तब जगी जब नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभा में एयरपोर्ट के पुन: चालू करने की घोषणा की। इसके बाद ही इसे घरेलू विमान सेवा के लिए चुना गया और अब टर्मिनल अगले साल जून तक पूरा करने का टेंडर पास हुआ है।

सतलुज विवाद पर बोले राम गोपाल वर्मा, फिल्म हटाने पर उठाए सवाल

दिलजीत दोसांझ और अर्जुन रामपाल स्टारर फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा. रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर ही फिल्म को ZEE5 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई. अब इस पूरे विवाद पर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने भी खुलकर अपनी राय रखी है. राम गोपाल वर्मा ने अपने X अकाउंट पर एक लंबा-चौड़ा नोट शेयर करते हुए फिल्म की जमकर तारीफ की और साथ ही इसे हटाए जाने पर बेबाक तरीके से सवाल भी उठाए. 'ये फिल्म नहीं, कभी न भरने वाला जख्म है' राम गोपाल वर्मा ने लिखा कि 'सतलुज' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि ऐसा गहरा जख्म है जो कभी नहीं भर सकता. उनके मुताबिक ये फिल्म देश के इतिहास के सबसे अंधेरे अध्यायों में से एक को फिर से सामने ले आती है. उन्होंने कहा कि ये सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सच से सामना कराने वाला माध्यम है. राम गोपाल वर्मा ने दिलजीत दोसांझ की एक्टिंग की जमकर सराहना की. उन्होंने लिखा कि फिल्म में दिलजीत ने बिना किसी हीरो वाली दिखावटी बहादुरी के बेहद संयम और गुस्से से भरा शानदार अभिनय किया है. दिलजीत के हाथ में कोई हथियार नहीं, सिर्फ एक रजिस्टर (लेजर) और उनका जमीर है. यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है. RGV ने अर्जुन रामपाल की एक्टिंग की भी खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि अर्जुन ने फिल्म में सिस्टम और सत्ता की कड़वी सच्चाई को बहुत दमदार तरीके से दिखाया है. उनका किरदार इतना असली लगता है कि उसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. 'डायरेक्टर ने सनसनी नहीं, सच्चाई दिखाई' राम गोपाल वर्मा ने डायरेक्टर हनी त्रेहान की तारीफ करते हुए लिखा कि उन्होंने इस संवेदनशील विषय को सनसनीखेज बनाने की बजाय बेहद संजीदगी से पेश किया है. उन्होंने कहा कि फिल्म धीरे-धीरे एक इन्वेस्टिगेशन थ्रिलर की तरह खुलती है, जिसमें सरकारी फाइलें, श्मशान घाट के रिकॉर्ड और धीमी बातचीत के जरिए सच्चाई सामने आती है. यही संयम फिल्म को और ज्यादा असरदार बना देता है. अपने पोस्ट में राम गोपाल वर्मा ने लिखा कि फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष ये है कि ये दिखाती है कि कैसे एक लोकतंत्र कभी-कभी अपने ही नागरिकों को निगल जाता है और बाद में सबूत मिटाने की कोशिश करता है. उन्होंने कहा कि फिल्म किसी तरह का भाषण नहीं देती, बल्कि दर्शकों को खुद सोचने पर मजबूर करती है. 'सतलुज के साथ खालड़ा जैसा मत होने देना' पोस्ट के आखिर में राम गोपाल वर्मा ने भावुक अपील करते हुए लिखा- मैं सत्ता में बैठे सभी लोगों से अपील करता हूं कि 'सतलुज' के साथ वही मत कीजिए जो जसवंत सिंह खालड़ा के साथ हुआ था. उन्होंने आगे लिखा- सच्चाई को जितना छिपाने की कोशिश की जाती है, वो उतनी ही ज्यादा ताकत के साथ सामने आती है. राम गोपाल वर्मा का ये बयान ऐसे समय आया है, जब 'सतलुज' को ZEE5 से हटाए जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी फिल्म को दोबारा स्ट्रीम करने की मांग तेज होती जा रही है, जबकि इस पूरे मामले पर बहस अभी थमती नहीं दिख रही है. एक के बाद एक कई सेलेब्स इस मामले पर अपनी राय दे रहे हैं, साथ ही फिल्म बॉडीज ने भी सेंसरशिप पर सवाल उठाए हैं.

पंचकूला पुलिस का बड़ा अभियान, सड़क पर लापरवाही पड़ी भारी; हर दिन हो रहे ट्रैफिक चालान

पंचकूला. सड़क पर कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी और सुरक्षा नियमों की अनदेखी लोगों की जेब पर भी भारी पड़ रही है। पंचकूला में यातायात नियमों की अनदेखी करने पर इस साल छह महीनों के दौरान ट्रैफिक पुलिस ने 26,109 चालान किए हैं। एक जनवरी से 30 जून तक का यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। क्योंकि औसतन हर दिन लगभग 150 चालान काटे जा रहे हैं। वहीं, इन चालानों के जरिए 12 करोड़ 12 लाख चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक लापरवाही दोपहिया वाहन चालक कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चालान टू-व्हीलर सवारों के हेलमेट न पहनने के हुए हैं, जबकि शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों की संख्या भी चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, बिना हेलमेट वाहन चलाने पर सबसे अधिक 12,914 चालान किए गए और छह करोड़ 30 लाख 46 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इससे साफ है कि पंचकूला ट्रैफिक पुलिस की तरफ से लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियान और सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में दोपहिया चालक नियमों को ताक पर रख सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं। वहीं ऐसे वाहन चालक अपनी और दूसरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। ड्रंक एंड ड्राइव के 2950 चालान इसके अलावा इन छह महीनों में ड्रंक एंड ड्राइव के 2950 चालान काटे गए। हालांकि इन मामलों का निपटारा कोर्ट से होता है। ऐसे में जुर्माना की राशि भी अदालत से तय होती है। वहीं गलत पार्किंग के 2464, ट्रिपल राइडिंग के 913, रेड लाइट जंप करने के 516 और बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाने के 401 चालान किए गए। ओवर स्पीड के केवल तीन मामले दर्ज हुए। ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे वाहन चालक ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि चालान का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि पंचकूला में अब भी बड़ी संख्या में लोग बुनियादी ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

वर्ल्ड कप जीत के नायक शापूर जादरान नहीं रहे, क्रिकेट जगत में शोक

नई दिल्ली अफगानिस्तान क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले शापूर जादरान का निधन हो गया है, लंबे समय से गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे जादरान ने मंगलवार (7 जुलाई) को अंतिम सांस ली. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने सोशल मीडिया के जरिए उनके निधन की जानकारी दी. शापूर जादरान के निधन की खबर सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शापूर जादरान पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. जनवरी से नई दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनके भाई घमई जादरान और अफगानिस्तान के पूर्व कप्तान असगर अफगान इलाज के दौरान उनके साथ भारत आए थे. जादरान की तबीयत पिछले साल अक्टूबर में खराब हुई थी, जिसके बाद उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने शापूर जादरान के निधन पर दुख जताते हुए बयान जारी किया. एसीबी ने कहा, 'बेहद दुख और गहरे शोक के साथ अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान के निधन पर शोक व्यक्त करता है. शापूर जादरान अफगानिस्तान क्रिकेट की नींव रखने वाली हस्तियों में से एक थे. उनके समर्पण, जुनून और अटूट प्रतिबद्धता ने देश में क्रिकेट के विकास और उसके उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह उन गौरवशाली क्रिकेटरों में शामिल थे, जिन्होंने अफगानिस्तान क्रिकेट के शुरुआती सफर में अहम भूमिका निभाई और टीम को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया.' किस बीमारी से जूझ रहे थे शापूर? शापूर जादरान हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नाम की एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे. इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली असामान्य रूप से सक्रिय हो जाती है और शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है. परिवार की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, गंभीर संक्रमण के कारण उनकी हालत और बिगड़ गई थी. संक्रमण उनके शरीर के कई हिस्सों में फैल गया था. शापूर जादरान के भाई घमई जादरान ने इस साल की शुरुआत में क्रिकइंफो को बताया था, 'यह बेहद गंभीर संक्रमण था. उनका पूरा शरीर संक्रमण की चपेट में था, जिसमें टीबी भी शामिल थी. संक्रमण उनके दिमाग तक फैल गया था.' इलाज के दौरान शापूर जादरान की हालत में कुछ समय के लिए सुधार भी हुआ था. इसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी और वह करीब तीन सप्ताह तक अस्पताल के पास स्थित एक होटल में रहे थे. 39वां जन्मदिन नहीं मना सके शापूर हालांकि, यह राहत ज्यादा समय तक नहीं चली. संक्रमण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत बिगड़ने पर उन्हें ICU में रखा गया, जहां आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया. दुखद संयोग यह रहा कि शापूर जादरान का निधन उनके 39वें जन्मदिन से सिर्फ एक दिन पहले हुआ. शापूर जादरान को अफगानिस्तान क्रिकेट के शुरुआती नायकों में गिना जाता है. लंबे कद, तेज रफ्तार, आक्रामक रन अप और लंबे बालों के कारण उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर अपनी अलग पहचान बनाई थी. उनके करियर का सबसे यादगार पल 2015 के वनडे वर्ल्ड कप में आया था. अफगानिस्तान की टीम तब पहली बार वनडे वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही थी. स्कॉटलैंड के खिलाफ डुनेडिन में खेले गए रोमांचक मुकाबले में शापूर जादरान ने विजयी रन बनाकर अफगानिस्तान को वर्ल्ड कप इतिहास की पहली जीत दिलाई थी. जीत के बाद मैदान पर हाथ फैलाकर दौड़ते हुए जादरान के जश्न की तस्वीर अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास के सबसे यादगार पलों में शामिल हो गई. एसीबी ने अपने बयान में आगे कहा, 'अपने पूरे करियर के दौरान शापूर ने सम्मान, साहस और गर्व के साथ अफगानिस्तान क्रिकेट की सेवा की. मैदान पर उपलब्धियों के अलावा वह अफगानिस्तान के कई युवा क्रिकेटरों और दुनियाभर के क्रिकेट फैन्स के लिए प्रेरणा थे. उनके जुझारूपन, दृढ़ संकल्प और खेल के प्रति प्यार ने कई लोगों को उम्मीद दी और एक पूरी पीढ़ी को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया.' शापूर जादरान ने 2009 में अफगानिस्तान के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था. उन्होंने 44 ओडीआई और 36 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया. ओडीआई मैचों में उन्होंने 36.95 की औसत से 43 विकेट झटके. जबकि टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने 24.51 के एवरेज से 37 विकेट चटकाए. उन्होंने अपना आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला 2020 में खेला था. हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा और 2022 में अपना आखिरी प्रतिस्पर्धी मुकाबला खेला. जनवरी 2025 में शापूर ने क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी.

क्या ऐप से बंद हो सकता है ATM? वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता, एक्सपर्ट्स ने बताया सच

पिछले दिनों जिस तरह से BAT-BMS नाम की ऐप सड़क चलते ई-रिक्शा बंद कर रही थी, कुछ वैसा ही अब ATM मशीनों के साथ होता दिख रहा है। दरअसल इंटरनेट पर एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि एक ऐप की मदद से ATM मशीन को बंद या चालू किया जा सकता है। हालांकि तेजी से फैल रहे इस वीडियो की प्रमाणिकता को पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि फोन में मौजूद ऐप की मदद से ATM को बंद और चालू किया जा रहा है। वीडियो में ऐसा करने वालों के चेहरे नहीं दिख रहे लेकिन इतना साफ है कि वे बैंक या ATM मशीन को मैनेज करने वाला स्टाफ नहीं है। इसके अलावा वीडियो में दिख रहे ऐप का इंटरफेस काफी हद तक उस ऐप से मेल खाता है, जो कि पिछले दिनों ई-रिक्शों को बंद करने की वजह बनी थी। इसके बाद सरकार ने इन ऐप्स पर सख्त कदम उठाते हुए इन्हें ब्लॉक कर दिया था ई-रिक्शों के बाद निशाने पर ATM?     पिछले दिनों ई-रिक्शों को बंद करने वाली BAT-BMS ऐप की तर्ज पर अब एक ऐसी ऐप का वीडियो इंटनरेट पर फैल रहा है, जिससे ATM की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि किसी ऐप की मदद से ATM को बंद और फिर रीस्टार्ट किया जा सकता है।     इससे पहले BAT-BMS और Lossigy जैसे चीनी मोबाइल ऐप्स का गलत इस्तेमाल कर चलते हुए ई-रिक्शा को दूर से बंद करने के कई मामले देखने को मिले थे। अब जिस ऐप से ATM को कंट्रोल करते हुए दिखाया जा रहा है उसका इंटरफेस बी BAT-BMS जैसी ही है। इतनी आसानी से हैक हो सकते हैं ATM?     एक्सपर्ट्स के अनुसार ई-रिक्शा को उसके असुरक्षित BMS सिस्टम की वजह से चीनी ऐप द्वारा कंट्रोल किया जाना संभव था लेकिन ATM एक बेहद सुरक्षित मशीन होती है। यह मशीनें बैंकों के नेटवर्क, वीपीएन (VPN) और मल्टी-लेयर सिक्योरिटी फायरवॉल पर काम करती हैं। इन्हें किसी ऐप या ब्लूटूथ की मदद से कंट्रोल किया जाना नामुमकिन है।     इस वीडियो को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि संभव है कि मशीन खुद ही रीबूट हो रही हो और वीडियो बनाने वाले ने सिर्फ टाइमिंग को मैच कर ऐसा दिखाने की कोशिश की है कि वह खुद मशीन को ऐप की मदद से बंद या चालू कर रहा है।     वीडियो में BAT BMS ऐप जैसे इंटरफेस की वजह से यह शक और पुख्ता हो जाता है कि यह सिर्फ व्यूज बटोरने की एक कोशिश भर है। हालांकि फिलहाल इस पर किसी बैंक की ओर से कोई जवाब नहीं आया है सरकार ने किया था ब्लॉक BAT BMS ऐप के जरिए ई-रिक्शा बंद किए जाने के मामले सामने आने के बाद पिछले दिनों भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर को कड़े आदेश दिए थे। इसके बाद दोनों ही ऐप स्टोर्स से BAT BMS ऐप जैसे एप्लिकेशन डाउन कर दिए गए थे। हालांकि फिल्हाल गूगल प्ले स्टोर पर BAT BMS नाम से कई फर्जी ऐप्स मौजूद हैं, जिन्हें लोग डाउनलोड भी कर रहे हैं।

चंडीगढ़ हाईकोर्ट को मिली नई ग्रीन पार्किंग, 6.23 एकड़ में 700+ गाड़ियां होंगी पार्क

चंडीगढ़. पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट आने वाले वकीलों, वादियों और आम लोगों को चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ी राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट के बाहर कच्ची और पथरीली जगहों पर प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने ग्रीन पार्किंग बना दी है। करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनी इस पार्किंग को आम लोगों के लिए शुरू कर दिया गया है। यहां करीब 6.23 एकड़ में पार्किंग का निर्माण किया गया है, जहां 700 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी करने की क्षमता होगी। लंबे समय से लोग पार्किंग के कारण परेशान होते थे। इस पार्किंग के बनने से लोगों की समस्या का काफी हद तक समाधान हुआ है। पार्किंग को पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। पूरे परिसर में ग्रीन पेवर ब्लाॅक्स लगाए गए हैं, जिनके बीच घास भी रहेगी। तय दूरी पर पेड़ भी लगे हैं, ताकि हरियाली बनी रहे और वाहनों को प्राकृतिक छाया मिल सके। ग्रीन पेवर ब्लाक्स की विशेषता यह है कि बारिश का पानी जमीन में आसानी से समा जाएगा, जिससे जलभराव की समस्या भी नहीं होगी। पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस क्षेत्र में ग्रीन पेवर ब्लाॅक्स लगाने की अनुमति दी थी। इसके बाद प्रशासन ने लैंडस्केप कंसल्टिंग कंपनी से डिजाइन तैयार कराया। चूंकि यह क्षेत्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कैपिटल काॅम्प्लेक्स का हिस्सा है, इसलिए पूरे प्रोजेक्ट को विशेष निगरानी और हेरिटेज मानकों के आधार पर किया गया। इस काम के लिए प्रशासन ने पिछले साल टेंडर जारी कर दिया था। अक्टूबर 2025 से यहां निर्माण कार्य शुरू हो गया था। वर्ष 2023 में हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट में यहां भूमिगत मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का विरोध किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा निर्माण धरोहर परिसर के वास्तविक स्वरूप को प्रभावित कर सकता था और ट्रैफिक व प्रदूषण भी बढ़ा सकता था। इसी वजह से प्रशासन ने पर्यावरण अनुकूल ग्रीन पार्किंग बनाने का फैसला किया।

मोरिंगा ऑयल से पाएं जवां त्वचा, झुर्रियां और फाइन लाइन्स होंगी कम

आज के समय में खराब खानपान, प्रदूषण और लगातार बढ़ते तनाव के कारण लोग उम्र से पहले ही बूढ़े दिखने लगे हैं. चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां, फाइन लाइन्स और डार्क सर्कल्स आना बेहद आम हो गया है. अपनी त्वचा को वापस जवां और ग्लोइंग बनाने के लिए लोग महंगे स्किन केयर ट्रीटमेंट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन उनमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर आप भी बुढ़ापे से पहले बूढ़ा नहीं दिखना चाहते और नेचुरल तरीके से अपनी स्किन को टाइट और ग्लोइंग बनाना चाहते हैं तो मोरिंगा का तेल आपके लिए एक जादुई वरदान साबित हो सकता है. सहजन के बीजों से निकलने वाला यह तेल एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिंस का पावरहाउस है, जो आपकी त्वचा को अंदर से पोषण देकर उसे हमेशा यूथफुल बनाए रखता है. आइए जानते हैं त्वचा के लिए इसके फायदे और इस्तेमाल करने का सही तरीका. इस्तेमाल करने का सही तरीका: रात का नाइट सीरम: रोज रात को सोने से पहले अपने चेहरे को माइल्ड फेस वॉश से अच्छी तरह साफ कर लें. अब अपनी हथेलियों पर मोरिंगा के तेल की 3-4 बूंदें लें और उन्हें आपस में रगड़कर हल्का गुनगुना करें. इसके बाद चेहरे और गर्दन पर सर्कुलर मोशन में हल्के हाथों से 2-3 मिनट तक मसाज करें और रातभर के लिए छोड़ दें. गुआ शा या रोलर के साथ: अगर आप चेहरे की पफिनेस कम करना चाहते हैं और फेस को परफेक्ट शेप देना चाहते हैं, तो मोरिंगा ऑयल लगाकर फेस रोलर या गुआ शा टूल से मसाज कर सकते हैं. फेस पैक में मिलाकर: आप अपने रेगुलर होममेड फेस पैक (जैसे मुल्तानी मिट्टी या चंदन पाउडर) में भी इस तेल की 4-5 बूंदें मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं. मोरिंगा के फायदे मोरिंगा के तेल में भरपूर मात्रा में साइटोकिनिन और मुख्य रूप से ज़ियाटिन पाया जाता है, जो त्वचा की कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं. इसमें मौजूद विटामिन ए, सी और ई त्वचा को डीप हाइड्रेशन देते हैं, जिससे चेहरे का रूखापन खत्म होता है और एक नेचुरल गुलाबी निखार आता है. एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होने के कारण यह तेल मुंहासों को रोकता है और ब्लैकहेड्स व डार्क स्पॉट्स को तेजी से हल्का करता है. यह तेल त्वचा में कोलेजन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है, जिससे ढीली पड़ चुकी त्वचा में कसाव आता है