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New York AI Ban: बच्चों की पढ़ाई में AI पर लगा ब्रेक, सरकारी स्कूलों में 8वीं कक्षा तक इस्तेमाल प्रतिबंधित

न्यूयॉर्क आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर हर तरफ चर्चा है, अधिकतर लोग मानने लगे हैं कि अब इसके बिना कुछ भी संभव नहीं है, लेकिन अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने प्राइमरी स्कूलों में AI के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है।  न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है. अब स्टूडेंट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल पर इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक का ऐलान कर दिया है।  अमेरिका में स्कूलों को लेकर AI के संबंध में लिया गया है, यह अब तक का सबसे बड़ा और सख्त फैसला माना जा रहा है. अब लॉस एंजिल्स समेत कई अन्य शहरों के स्कूलों में AI के नियमों का दोबारा रिव्यू किया जा रहा है।  40 एजुकेशन AI टूल को किया है बैन न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने बुधवार को बताया है कि शहर के स्कूलों की क्लासेस में फिलहाल इस्तेमाल किए जा रहे हैं 40 एजुकेशन AI टूल्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।  स्टूडेंट को टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए मेयर ने कहा है कि बच्चों को सीखने और बढ़ने के लिए टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए. स्टूडेंट को साथियों के साथ मिलकर कौशल सीखने चाहिए और टीचर्स से नई-नई चीजों को सीखना चाहिए।  बच्चों के लिए एआई टूल्स पर क्यों लगी पाबंदी?     यह पाबंदी प्री-किंडरगार्टन से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर लागू की गई है। मेयर ममदानी और स्कूल्स चांसलर कामर सैमुअल्स द्वारा जारी इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग यानी खुद से सोचने-समझने की क्षमता को बचाना और शिक्षकों व छात्रों के बीच संवाद को बनाए रखना है।     इस नए नियम के तहत शिक्षा अधिकारी 38 से अधिक क्लासरूम प्रोग्राम्स के स्वचालित (ऑटोमेटेड) फीचर्स को पूरी तरह बंद कर देंगे। इसके अलावा चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे पब्लिक चैटबॉट सभी स्तर के स्कूलों में पूरी तरह से ब्लॉक रहेंगे। न्यूयॉर्क ने साल 2023 में भी चैटजीपीटी पर बैन लगाया था, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया था। अब प्रशासन ने पिछली नीतियों में बदलाव करते हुए दो-तिहाई छात्रों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। चैटबॉट्स के इस्तेमाल से बच्चों को क्या हैं नुकसान? क्रिटिकल थिंकिंग की कमी: एआई चैटबॉट्स से बच्चों को हर जटिल सवाल का बना-बनाया जवाब सेकंडों में मिल जाता है, इससे वे खुद से तर्क करना, समस्याओं का विश्लेषण करना और दिमागी कसरत करना छोड़ देते हैं। इससे उनकी सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होती है। रचनात्मकता और मौलिकता की कमी: निबंध, कविताएं या प्रोजेक्ट खुद तैयार करने के बजाय बच्चे एआई का सहारा लेते हैं। इससे उनकी भाषा शैली, कल्पनाशीलता और खुद को अभिव्यक्त करने की प्राकृतिक कला धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। गलत सूचनाओं का असर: चैटबॉट्स अक्सर गलत या भ्रामक तथ्यों को बहुत ही प्रामाणिक और आत्मविश्वास भरे ढंग से पेश करते हैं। कच्ची उम्र के बच्चे इन जानकारियों को पूरी तरह सच मान लेते हैं, जिससे उनके बुनियादी ज्ञान की नींव ही गलत तथ्यों पर खड़ी हो सकती है। मानवीय और सामाजिक कौशल में गिरावट: कक्षा में दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन करने या शिक्षकों से सवाल पूछने की बजाय स्क्रीन देखते रहने के कारण बच्चों के संवाद और सामाजिक कौशल का विकास रुक जाता है। शिक्षक-छात्र संबंधों में दूरी: एक शिक्षक बच्चे की मानसिक स्थिति, उसकी कमजोरी और मजबूती को समझकर व्यक्तिगत मार्गदर्शन देता है। हर समस्या के लिए मशीनों पर निर्भरता इस भावनात्मक जुड़ाव और जरूरी मार्गदर्शन को पूरी तरह खत्म कर देती है। स्क्रीन टाइम लिमिट कम करने पर जोर     इस पाबंदी से हाई स्कूल के छात्रों को थोड़ी राहत दी गई है। उन्हें साल में दो बार एआई साक्षरता की कक्षाएं दी जाएंगी और कड़ी निगरानी में कुछ चुनिंदा एआई प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी। दूसरी ओर शिक्षकों को लेसन प्लानिंग और प्रशासनिक कार्यों के लिए एआई टूल्स का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।     हालांकि, कॉपियां जांचने (ग्रेडिंग) या छात्रों के किसी भी तरह के औपचारिक मूल्यांकन के लिए एआई का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रशासन ने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की लिमिट भी तय कर दी है। इसके तहत तीसरी से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए 30 मिनट और छठी से आठवीं कक्षा के लिए 45 मिनट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, दिव्यांग छात्रों और अंग्रेजी भाषा सीखने वाले बच्चों को इन नियमों में विशेष छूट दी जाएगी। टेक कंपनियों के दावों पर मेयर का पलटवार प्रेस ब्रीफिंग के दौरान शहर के अधिकारियों ने टेक इंडस्ट्री की उस सोच को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें एआई को शिक्षा के लिए जरूरी बताया जाता है। मेयर जोहरान ममदानी ने कड़े शब्दों में कहा कि टेक कंपनियां हमें यह विश्वास दिलाना चाहती हैं कि शुरुआती शिक्षा में एआई जरूरी है, लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूलों का काम बच्चों को सवाल पूछना और चीजों को परखना सिखाना है, इसलिए यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे व्यावसायिक सॉफ्टवेयर की आंख मूंदकर अनुमति देने के बजाय उसकी कड़ी निगरानी करें। फैसले पर उठ रहे सवाल     इस बड़े फैसले पर शिक्षा जगत से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ टीचर्स के अध्यक्ष माइकल मुलग्रू ने स्क्रीन टाइम लिमिट और विशेष बच्चों को दी गई छूट का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय टेक कंपनियों और सप्लायर्स से सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की मांग की जानी चाहिए।     वहीं फेयरप्ले के कार्यकारी निदेशक जॉश गोलिन ने चिंता जताई कि एआई के लंबे समय तक पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझने के लिए एक साल का समय काफी नहीं है। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे स्कूल के बाद घर जाकर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर होमवर्क के लिए एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं।     चांसलर कामर सैमुअल्स ने भी माना कि घर पर बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखने के लिए स्कूल के साथ-साथ अभिभावकों की भी मदद लेनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया और इसके प्रभाव पर नजर रखने … Read more

BRICS समिट में जिनपिंग की मौजूदगी तय, बांग्लादेशी PM का दौरा रद्द; सुरक्षा तैयारियां तेज

नई दिल्ली  भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं। जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है। बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है। तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

450 साल पुराने नक्शे में बदलाव की तैयारी, अफ्रीका का असली आकार आएगा सामने; भारत ने किया समर्थन

न्यूयॉर्क दुनिया को देखने और समझने के तरीके में बड़ा बदलाव आने वाला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक नए वर्ल्ड मैप को अपनाने के पक्ष में मतदान किया है। इस नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले के मुकाबले बड़ा दिखाई देगा, जबकि उत्तरी अमेरिका और यूरोप छोटे नजर आएंगे। नए नक्शे को ‘इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन’ कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इसका मकसद दुनिया के महाद्वीपों के भू-भाग को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है। प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने वोट किया, जबकि अकेले अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। क्यों बदला जा रहा है दुनिया का पुराना नक्शा? अब तक दुनिया में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला मर्केटर प्रोजेक्शन 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने तैयार किया था। इसे मुख्य रूप से समुद्री नौवहन के लिए डिजाइन किया गया था। इस नक्शे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें धरती के ध्रुवों के पास मौजूद इलाके अपने वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं। नए इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का उद्देश्य इस विकृति को कम करना और महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है। 164 देशों ने किया समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध UN महासभा में नए नक्शे से जुड़े प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया, जबकि छह देश मतदान से अलग रहे। हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है। इसका मकसद सदस्य देशों को शिक्षा, संस्थानों और दूसरी जगहों पर ज्यादा सटीक वर्ल्ड मैप इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारत ने UN के "नक्शे को सही करने" वाले प्रस्ताव का स्वागत किया है। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने यूएन में कहा, "समान क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे महाद्वीपीय या क्षेत्रीय भू-भागों के सापेक्ष आकार और क्षेत्रफल को बनाए रखते हैं।" क्या अब मर्केटर मैप पूरी तरह खत्म हो जाएगा? नहीं। UN के प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि मर्केटर प्रोजेक्शन पर तत्काल रोक लग गई है। नया प्रस्ताव सदस्य देशों से पारंपरिक मर्केटर नक्शे की जगह इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को अपनाने का आग्रह करता है, ताकि दुनिया के भू-भाग का ज्यादा सटीक प्रतिनिधित्व हो सके। यानी आने वाले समय में स्कूलों, संस्थानों और दूसरी जगहों पर दुनिया का नक्शा पहले से अलग नजर आ सकता है। अफ्रीका को लेकर क्यों है इतनी चर्चा? नए नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटर प्रोजेक्शन की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। इसी वजह से यह बदलाव खास तौर पर चर्चा में है। नए नक्शे का उद्देश्य केवल अफ्रीका को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों के वास्तविक भू-भाग को अधिक सटीक तरीके से प्रस्तुत करना है।