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नीरज चोपड़ा की राह पर कृष्ण चंद्र, 79.92 मीटर थ्रो से U-18 में दुनिया के दूसरे नंबर के जैवलिन थ्रोअर

नई दिल्ली भारत के युवा जैवलिन थ्रोअर्स ने वर्ल्ड लेवल पर अपनी मजबूत छाप छोड़ रहे हैं. नीरज चोपड़ा और रोहित यादव के बाद अब  कृष्ण चंद्र जैसे जैवलिन थ्रोअर अपने परफॉर्मेंस से सबके ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं. हाल ही में भारत में आयोजित यूथ चैंपियनशिप में  कृष्ण चंद्र ने गोल्ड मेडल जीता,  कृष्ण चंद्र ने 79.92 मीटर का थ्रेो किया जिससे वह 2026 में दुनिया के टॉप पांच U18 जैवलिन थ्रोअर में शामिल हो गए हैं. टॉप 5 जैवलिन थ्रोअर में तीन भारतीय एथलीट भी शामिल हैं. भारत के कृष्ण चंद्र जिन्होंने 3 सितंबर को 79.92 मीटर का शानदार थ्रो करके U18 कैटेगरी में वर्ल्ड नंबर 2 का स्थान हासिल किया है।  उनसे आगे सिर्फ फिनलैंड के जेरे मुर्टो हैं, जिन्होंने 22 अगस्त को 82.88 मीटर का थ्रो किया था. कृष्ण के इस प्रदर्शन ने 700 ग्राम वाले जैवलिन के साथ एक नया भारतीय U18 रिकॉर्ड भी बनाया, जो उनकी जबरदस्त क्षमता को दिखा रहा है. भारत का दबदबा यहीं खत्म नहीं हुआ हैं. अंडर 19 में पुष्पक नेलवाड़े 76.09 मीटर के साथ तीसरे नंबर पर हैं, जबकि मंजीत कुमार 74.45 मीटर के साथ चौथे नंबर पर अपनी जगह बना पाने में सफल रहे हैं.  इटली के एंटोनियो डि पाल्मा 73.28 मीटर के साथ टॉप पांच में शामिल हैं।  दुनिया के टॉप पांच खिलाड़ियों में तीन भारतीयों का होना देश में जैवलिन थ्रो के तेजी से बढ़ते चलन को दिखाता है, यह ट्रेंड नीरज चोपड़ा की इंटरनेशनल लेवल पर मिली सफलता के बाद और तेज़ हुआ है. कृष्ण चंद्र, पुष्पक नेलवाड़े और मंजीत कुमार जैसे होनहार खिलाड़ियों के सामने आने से, पुरुषों के जैवलिन थ्रो में भारत का भविष्य पहले से कहीं ज़्यादा उज्ज्वल दिख रहा है।  अंडर 18 में साल 2026 में सबसे दूर भाला फेंकने वाले दुनिया के टॉप 5 जैवलिन थ्रोअर     जेरे मुर्तो, फिनलैंड- 82.88 22 AUG 2026     कृष्ण चंद्रा, भारत 79.92 03 SEP 2026     पुष्पक नेलवाडे, भारत 76.09 03 SEP 2026     मनजीत कुमार, भारत 74.45 03 SEP 2026     एंटोनियो डि पाल्मा, इटली, 73.28 18 JUL 2026 इन सबके अलावा रोहित यादव और यशवीर सिंह  सीनियर लेवल पर नीरज चोपड़ा के बाद अपना परचम लहरा रहे हैं. वहीं, अब एशियन गेम्स में यशवीर सिंह और रोहित यादव नीरज चोपड़ा की जगह भारत के लिए गोल्ड मेडल लाने की कोशिश करेंगे. 

गुरु रविदास प्रकाश पर्व पर जालंधर में ड्रोन शो आज, SDM ने तैयारियों का लिया जायजा

जालंधर जालंधर में श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित ड्रोन शो आज 6 सितंबर को शाम 6 बजे स्थानीय लायलपुर खालसा कॉलेज में होगा। इसे लेकर प्रशासन ने तैयारियों का जायजा लिया और जरूरी निर्देश दिए। इस संबंध में उप मंडल मैजिस्ट्रेट शुभी आंगरा ने कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने और विभिन्न विभागों को ड्यूटियां सौंपने के लिए बैठक की। एसडीएम ने बताया कि ड्रोन लाइट शो के माध्यम से श्री गुरु रविदास महाराज जी के महान जीवन, दर्शन और शाश्वत शिक्षाओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया जाएगा। बैठक के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने के लिए यातायात प्रबंधन, उचित पार्किंग, कार्यक्रम स्थल की सफाई, बैठने की व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सहित व्यापक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। ड्रोन शो के अलावा प्रसिद्ध रागी जत्थे भी शामिल होंगे ड्रोन शो के अलावा प्रसिद्ध रागी जत्थे भी शामिल होंगे, जो संगत को श्री गुरु रविदास महाराज जी की पवित्र बाणी से जोड़ने के लिए कीर्तन करेंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगत के पहुंचने की उम्मीद है। कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी श्रद्धा भेंट करने के लिए साधारण श्रद्धालुओं के रूप में शामिल होंगे। पंजाब सरकार मना रही है गुरु रविदास प्रकाश पर्व पंजाब सरकार की ओर से श्री गुरु रविदास महाराज जी का प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। इस कड़ी में पूरे सूबे में ड्रोन शो के अलावा गुरु के जीवन को दर्शाने के लिए अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 650वें प्रकाश पर्व को समर्पित 6.50 लाख पौधे लगाने का अनूठा अभियान भी शुरू किया गया है। गुरु रविदास जी वाणी अध्ययन केंद्र की स्थापना की जा रही श्री गुरु रविदास महाराज जी की शिक्षाओं के प्रसार और अकादमिक शोध को प्रोत्साहित करने के लिए डेरा सचखंड बल्लां के पास करीब 11 एकड़ क्षेत्र में श्री गुरु रविदास जी वाणी अध्ययन केंद्र की स्थापना की जा रही है।

वंदे भारत स्लीपर का होगा धांसू विस्तार, 260 ट्रेनें देंगी फ्लाइट जैसी फील और लग्जरी सफर

नई दिल्ली वंदे भारत सीरीज की ट्रेनों ने 2019 में अपनी शुरुआत के बाद से लंबा सफर तय किया है. दिन के समय चलने वाली प्रीमियम चेयर-कार सर्विस के तौर पर शुरू हुई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन अब ओवरनाइट जर्नी की दिशा में भी विस्तार कर रही है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के जरिए लंबी दूरी के और ज्यादा रूट्स पर सेमी-हाई-स्पीड रेल जर्नी का विकल्प मिलने की उम्मीद है।  वंदे भारत स्लीपर की पहली ट्रेनें इस साल की शुरुआत में गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर सेवा में शामिल हुई थीं. वंदे भारत स्लीपर की दूसरी ट्रेनसेट फिलहाल ट्रायल प्रक्रिया में है. इसके संभावित रूट को लेकर बेंगलुरु-मुंबई का नाम सामने आया है, लेकिन रेलवे की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. इसलिए अगली यात्री सेवा का रूट फिलहाल तय नहीं माना जा सकता।  भारतीय रेलवे वंदे भारत सीरीज की स्लीपर ट्रेनों को अब बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है. रेलवे की मौजूदा योजना के तहत कुल 260 वंदे भारत स्लीपर रेक तैयार किए जाने हैं. इससे लंबी दूरी के रात वाले सफर के लिए तेज और आधुनिक ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ सकता है. इसका मकसद उन रूट्स पर तेज सेवा उपलब्ध कराना है, जहां यात्रियों को रातभर का सफर करना पड़ता है।  कौन बनाएगा कितने रेक? मौजूदा योजना के मुताबिक, 260 वंदे भारत स्लीपर रेक अलग-अलग कंपनियों और उत्पादन इकाइयों में तैयार किए जाएंगे. इनमें भारत अर्थ मूवर्स ​लिमिटेड (BEML) 10, चेन्नई इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 50, किनेट रेलवे सॉल्यूशंस (KRS) 120 और टीटागढ़-भेल (Titagarh-BHEL 80) रेक बनाएंगे।  BEML को शुरुआती 10 ट्रेनसेट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है. ये ट्रेनें 16-कोच वाली होंगी. वहीं, ICF चेन्नई 50 ट्रेनसेट तैयार करेगा. ICF के 24-कोच वाले सेट में पैंट्री कार भी शामिल होगी. अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए प्रोडक्शन ड्रॉइंग तैयार की जा चुकी हैं।  लातूर में बनेंगे 120 ट्रेनसेट रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग (TMH) की जॉइंट वेंचर Kinet Railway Solutions को 120 ट्रेनसेट तैयार करने हैं. ये सभी ट्रेनसेट लातूर में बनाए जाएंगे और हर ट्रेन में 16 कोच होंगे. RVNL के मुताबिक, इनकी मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो चुकी है. कंपनी के 23वें एनुअल जनरल मीटिंग में चेयरमैन सलीम अहमद ने बताया था कि प्रोटोटाइप की डेडलाइन में बदलाव किया गया है. पहले इसे जून 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है।  180 Kmph डिजाइन स्पीड वंदे भारत स्लीपर को सेमी-हाई-स्पीड ओवरनाइट ट्रेन के तौर पर डिजाइन किया गया है. इसकी डिजाइन स्पीड 180 Kmph है, जबकि वास्तविक ऑपरेशनल स्पीड रूट और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर 160 Kmph तक रह सकती है. लोकोमोटिव से चलने वाली ट्रेडिशनल ट्रेनों के विपरीत, वंदे भारत स्लीपर में डिस्ट्रिब्यूटेड पावर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. इस तकनीक में ट्रेन के डिब्बो को एक अलग इंजन नहीं खींचता बल्कि ट्रेन के हर कोच में एक्सिलरेशन सिस्टम लगा होता है. यानी हर कोच अपने आप में इंजन का काम करता है. इससे वंदे भारत ट्रेन तेजी से रफ्तार पकड़ सकती है और जल्दी ब्रेक लगा सकती है. इस तकनीक से ट्रेन को अपनी एवरेज स्पीड बढ़ाने और ट्रैवल टाइम करने में मदद मिलती है।  16 कोच वाले प्रोटोटाइप में क्या खास? वंदे भारत स्लीपर को सेमी-हाई-स्पीड ओवरनाइट ट्रेन के तौर पर विकसित किया गया है और इसके डिजाइन में आधुनिक यूरोपीय रेल सिस्टम से प्रेरित तकनीकी खूबियां शामिल हैं. अगर कहें कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में यात्रियों को राजधानी ट्रेनों से बेहतर खूबियां और हवाई जहाज जैसी लग्जरी मिलेगी तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी।  मौजूदा 16-कोच प्रोटोटाइप में 11 एसी 3-टियर, 4 एसी 2-टियर और 1 एसी फर्स्ट क्लास कोच शामिल हैं. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुशन वाली बर्थ और ऊपरी बर्थ तक पहुंचने के लिए नया डिजाइन दिया गया है. रात की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए ट्रेन में नाइट लाइटिंग, इंटीग्रेटेड अनाउंसमेंट सिस्टम, डिस्प्ले पैनल, CCTV, मॉड्यूलर पैंट्री, रीडिंग लाइट, चार्जिंग पॉइंट और रिफ्रेशमेंट टेबल जैसी सुविधाएं दी गई हैं।  वंदे भारत स्लीपर की सेफ्टी पर भी जोर वंदे भारत स्लीपर में सील्ड गैंगवे और ऑटोमैटिक इंटरकनेक्टिंग डोर दिए गए हैं. तय स्टेशनों पर खुलने वाले ऑटोमैटिक डोर भी इसमें शामिल हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए बायो-वैक्यूम (Bio-Vacuum) टॉयलेट और दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग वॉशरूम की व्यवस्था है. एसी फर्स्ट क्लास कोच में शॉवर और हॉट वॉटर की सुविधा भी दी गई है. सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन में कवच, रिजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम, सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम और इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे फीचर शामिल हैं. लंबी दूरी के यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर का विस्तार अहम बदलाव ला सकता है. हालांकि, नई सेवाएं शुरू होने से पहले प्रोटोटाइप की टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और संबंधित रूट की तैयारियां पूरी करनी होंगी। 

भारत के बाद विदेशी बाजारों पर काइनेटिक की नजर, 7 देशों में EV स्कूटर की होगी एंट्री

पुणे  पुणे की EV दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी काइनेटिक वाट्स एंड वोल्ट्स (KWV) अब भारतीय बाजार से बाहर अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने सात अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान की है, जहां वह अपने EV स्कूटर पेश करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है। इनमें तुर्किये, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, केन्या, नाइजीरिया और मिस्र शामिल हैं। कंपनी इन देशों में स्थानीय नियमों, ग्राहकों की जरूरतों, EV दोपहिया वाहनों की मांग और संभावित वितरण साझेदारों का आकलन कर रही है। यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बाजारों पर नजर काइनेटिक वाट्स एंड वोल्ट्स की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना में यूरोप, दक्षिण एशिया और अफ्रीका के बाजार शामिल हैं। कंपनी फिलहाल यह तय करने की प्रक्रिया में है कि इन सात देशों में से किन बाजारों में प्रवेश किया जाए और वहां किस तरह का वितरण नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। कंपनी भारत में फिलहाल काइनेटिक डीएक्स और डीएक्स प्लस EV स्कूटर बेचती है। इन स्कूटरों को शहरी आवागमन को ध्यान में रखते हुए किफायती विकल्प के तौर पर पेश किया गया है। घरेलू बाजार में कारोबार बढ़ने के बाद अब कंपनी विदेशी बाजारों में भी अपने उत्पादों की संभावनाएं तलाश रही है। मकरंद जोशी संभालेंगे अंतरराष्ट्रीय कारोबार विदेशी बाजारों में विस्तार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कंपनी ने मकरंद जोशी को अंतरराष्ट्रीय कारोबार विकास का प्रमुख नियुक्त किया है। उन्हें भारतीय वाहन उद्योग के उत्पादों के लिए विदेशी बाजार विकसित करने का दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका के बाजारों में काम किया है। उनके अनुभव में दोपहिया वाहनों के साथ-साथ वाणिज्यिक वाहन और ट्रैक्टर क्षेत्र भी शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क और नए बाजारों में प्रवेश की रणनीति तैयार करने का भी अनुभव है। काइनेटिक वाट्स एंड वोल्ट्स के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजिंक्य फिरोदिया ने कहा कि कंपनी के उत्पादों को व्यापक स्तर के बाजारों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि घरेलू कारोबार में मिल रही गति के बाद कंपनी ने अब अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में आधार तैयार करना शुरू कर दिया है। हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इन सात देशों में से किन देशों में सबसे पहले प्रवेश करेगी। विदेशी बाजार में लॉन्च की समयसीमा की जानकारी भी फिलहाल साझा नहीं की गई है। भारत में भी बढ़ाया जा रहा डीलर नेटवर्क विदेशी विस्तार की योजना के साथ कंपनी भारत में भी अपने नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रही है। KWV के पास इस समय देश में 45 एक्सक्लूसिव शोरूम हैं और कंपनी अगले दो महीनों में 40 और शोरूम शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा कंपनी ने संभावित डीलरशिप साझेदारों को 150 लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) भी जारी किए हैं। इस तरह कंपनी एक ओर भारतीय बाजार में अपने बिक्री और डीलर नेटवर्क को मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी ओर तुर्किये, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, केन्या, नाइजीरिया और मिस्र जैसे बाजारों में EV दोपहिया वाहनों की संभावनाओं का आकलन कर रही है।

राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में उमड़ी दिलचस्पी, 20 हजार से अधिक लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन

इंदौर  19 सितंबर को इंदौर में होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कांग्रेस नेताओं ने कमर कस ली है। इस आयोजन में न तो कांग्रेस के नेता राहुल के साथ मंच साझा करेंगे और न ही कांग्रेस का झंडा आयोजन में कहीं नजर आएगा, लेकिन पर्दे के पीछे कांग्रेस नेता इस आयोजन की बागडोर संभाले हुए हैं। विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का विकल्प दिया गया है। इसमें अब तक 20 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन की बात कही जा रही है। इस आयोजन में 70 हजार से ज्यादा लोगों के जुटने की उम्मीद है। आयोजन स्थल को भी समतल किया जा रहा है, लेकिन शुक्रवार को हुई बारिश की वजह से काम रुक गया। पहले यह कार्यक्रम इंदौर के नेहरू स्टेडियम में होना था, लेकिन वहां नगर निगम ने इसकी अनुमति नहीं दी। गैर-राजनीतिक आयोजन बता रही कांग्रेस राहुल गांधी के 19 सितंबर के आयोजन को कांग्रेस नेता गैर-राजनीतिक बता रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा को इस आयोजन को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए। राहुल गांधी शामिल युवाओं से उनके सपनों, शिक्षा के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद करेंगे। इस कारण इसे 'छात्रों की गूंज' नाम दिया गया है, लेकिन भाजपा ने स्टेडियम नहीं देकर छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की है। विजयवर्गीय को भी आमंत्रण देगी कांग्रेस आयोजन की तैयारियों को लेकर बैठक हो रही थी। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इस आयोजन में शामिल होने के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी आमंत्रण पत्र भेजने की बात कही। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को दी है।

Vande Bharat में ब्रेक लगाने पर पैदा होती है बिजली, जानिए कैसे काम करता है रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम

 नई दिल्‍ली वंदे भारत ट्रेन तेजी भारतीय रेलवे नेटवर्क में फैल रहा है. देश के ज्‍यादातर रूटों पर वंदे भारत ट्रेन चलाई जा रही है. आपने भी कभी ना कभी वंदे भारत एक्‍सप्रेस से सफर किया ही होगा या फिर उसकी बनावट या लग्‍जरी सुविधाओं के बारे में सुना या देखा ही होगा, लेकिन क्‍या आपको पता है कि इस ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्‍टम भी काफी कमाल का है।  वंदे भारत ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्‍टम बिल्‍कुल कार की तरह ही काम करता है, जो ट्रेन में ही इस्‍तेमाल किए जाने वो ब्रेकिंग सिस्‍टम से पूरी तरह अलग है. इस सिस्‍टम में इलेक्ट्रो न्यूमेटिक (Electro Pneumatic) डिस्क ब्रेक लगाए जाते हैं. इसके ब्रेक पहियों के बगल में नहीं बल्कि साथ लगाए जाते हैं।  बिजली के जरिए ही इसका ब्रेकिंग सिस्‍टम ट्रांसमिट होता है, जो काफी तेजी से काम करता है और ब्रेक लगाते ही इसका असर दिखने लगता है. यह ब्रेक सिस्‍टम ठीक वैसा ही है जैसे एक काम में होता है, जिसमें डिस्‍क और ड्रम ब्रेक लगे होते हैं. यही कारण है कि वंदे भारत ट्रेन बाकी ट्रेनों की तुलना में ज्‍यादा सुरक्षित है।  इंमरजेंसी में कैसे ट्रेन को रोकता है ये सिस्‍टम?  वंदे भारत ट्रेन में ऐसा सिस्‍टम होता है, जो इमरजेंसी में ट्रेन को आसानी से रो देता है. इसमें इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) लगाया गया है जैसा की कार में भी होता है. यह सिस्‍टम हाईस्पीड ट्रेन को इमरजेंसी में बिना किसी परेशानी के रोका सकता है. इस सिस्‍टम का ट्रॉयल अगस्‍त में पूरा कर लिया गया है, जो बिना किसी नुकसान के ट्रेन को आसानी से रोक देगा. अभी इसे यात्री ट्रेनों में लागू नहीं किया गया है।  बिजली बनाता है ये सिस्‍टम जब ट्रेन तेज गति से चल रही होती है और ब्रेक लगाया जाता है, तो सामान्‍य ब्रेक में ट्रेन की गतिज ऊर्जा बर्बाद हो जाती है, लेकिन वंदे भारत में इलेक्ट्रिक मोटर को ब्रेकिंग के दौरान जनरेटर की तरह चलाया जा सकता है. ट्रेन के पहिए मोटर को घुमाते हैं और मोटर बिजली पैदा होती है. यह बिजली रेलवे के विद्युत सिस्टम में वापस भेजी जा सकती है या सिस्टम की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल होती है।  हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार ब्रेक लगाने पर उतनी ही बिजली वापस मिलती है. ऊर्जा की कुछ मात्रा मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सिस्‍टम में नुकसान के कारण प्रभावित होती है. एक अनुमान के हिसाब से इस तकनीक का प्रयोग करके कम से 30 फीसदी बिजली पैदा की जा सकती है। 

26 करोड़ की पांच मंजिला बिल्डिंग पर ताला, JP अस्पताल में मरीज परेशान; पोर्च में खड़ी हो रहीं गाड़ियां

भोपाल राजधानी के जेपी अस्पताल में मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज देने के लिए तैयार की गई नई बहुमंजिला इमारत अब खुद ही बदहाली का शिकार होने लगी है। करीब 26 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुई पांच मंजिला इमारत को मरीजों के लिए खोलने की कई समय-सीमाएं तय हो चुकी हैं, लेकिन अब तक इसका शुभारंभ नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि लंबे समय से बंद पड़ी इमारत के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होने लगा है। परिसर में शराब की बोतलें दिखाई दे रही हैं, जबकि अस्पताल के बाहर बने पोर्च में लोग मोटरसाइकिल और कार खड़ी कर रहे हैं। करीब डेढ़ साल से तैयार इस इमारत का उपयोग शुरू नहीं होने से एक तरफ मरीजों को नई सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खाली पड़े परिसर की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।  15 अगस्त तक शुरू करने के थे निर्देश नई इमारत को चालू करने को लेकर प्रशासन की ओर से कई बार समय-सीमा तय की गई। हाल ही में कलेक्टर की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि हर हाल में 15 अगस्त तक नई इमारत शुरू की जाए। इसके बावजूद सितंबर शुरू हो चुका है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से यहां मरीजों को शिफ्ट करने या सेवाएं शुरू करने की कोई ठोस गतिविधि दिखाई नहीं दे रही है। इससे पहले भी भवन को शुरू करने की तारीखें तय की गई थीं। नवंबर 2025 की रिपोर्ट में भी सामने आया था कि करीब 26 करोड़ रुपए से तैयार भवन मरीजों के लिए नहीं खुल सका था। उस समय भवन को अस्पताल प्रशासन को सौंपने और तकनीकी कमियों को लेकर मामला अटका हुआ बताया गया था। पांच मंजिल की इमारत, इलाज की सुविधाओं का विस्तार नई इमारत जेपी अस्पताल परिसर में ही पुराने भवन के पास बनाई गई है। पांच मंजिला भवन में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त बिस्तरों और कई महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाओं की योजना बनाई गई है।परियोजना के शुरुआती प्रस्ताव में 270 बिस्तर और चार आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाने की बात सामने आई थी। बाद की विस्तृत योजना में भवन की क्षमता 240 बिस्तर बताई गई। इसमें आपातकालीन उपचार, शल्य चिकित्सा और अलग-अलग वार्डों के साथ जांच तथा अन्य चिकित्सा सुविधाओं को एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की योजना थी। 2024 की योजना के मुताबिक करीब 26 करोड़ रुपए की लागत वाली इस इमारत में राज्य सरकार की करीब 19 करोड़ और केंद्र की करीब 7 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी बताई गई थी। इसमें भूतल पर आपातकालीन और अलग-अलग वार्ड, ऊपरी मंजिलों पर शल्य चिकित्सा वार्ड, निजी वार्ड और चार ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था प्रस्तावित थी। एक मंजिल पर रक्त बैंक बनाने की भी योजना थी। इमारत पर असामाजिक तत्वों का कब्जा नई इमारत के शुरू नहीं होने का असर अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को अभी पुराने भवन की ही सीमित जगह में इलाज कराना पड़ रहा है। दूसरी ओर खाली पड़ी नई इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल परिसर में शराब की बोतलें मिलने और लोगों के पोर्च में वाहन खड़े करने से साफ है कि बंद भवन का इस्तेमाल धीरे-धीरे दूसरे कामों के लिए होने लगा है। यदि समय रहते यहां सुरक्षा और निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भवन की संपत्ति को नुकसान पहुंचने के साथ मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। निर्माण पूरा, लेकिन शुरू करने की जिम्मेदारी पर अटका मामला नई इमारत के मामले में पहले भी निर्माण पूरा होने के बावजूद इसे अस्पताल प्रशासन को सौंपने और तकनीकी कमियों को लेकर विवाद सामने आया था। नवंबर 2025 में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कुछ कमियों के कारण शिफ्टिंग रोके जाने की बात कही गई थी, जबकि निर्माण एजेंसी की ओर से अपना काम लगभग पूरा होने का दावा किया गया था। अब सवाल यह है कि जब प्रशासन कई बार समय-सीमा तय कर चुका है  तो अभी तक दरवाजे क्यों नहीं खुले हैं। अधीक्षक बोले नहीं आई अभी तक कोई डेट  जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय जैन ने बताया कि अभी तक शुरू करने की कोई डेट फिक्स नहीं की गई है। जल्द ही इसे शुरू किया जाएगा। गाड़ी पार्किंग को लेकर कहां की कोई डॉक्टर की गाड़ी खड़ी होगी बाइक अगर खड़ी है तो दिखाता हूं। और शराब की बोतलों को लेकर उन्हें कहा कि मै जांच करवाता हूं।   

लद्दाख से थार तक तेजस की ताकत बढ़ाएगा F404 इंजन, GE ने HAL को दिए 3 नए इंजन

बेंगलुरु  भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस की ताकत बढ़ने वाली है. LCA तेजस Mk1A प्रोग्राम को बड़ा बढ़ावा मिला है. अमेरिकी कंपनी  GE Aerospace ने बताया कि उसने भारत को तीन पावरफुल फाइटर जेट इंजन सौंपे हैं. इन इंजन को तेजस में लगाया जाएगा. कंपनी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इसी साल अगस्त में ये इंजन दिए. यह डिलीवरी ऐसे समय में हुई है जब F404 इंजनों की सप्लाई में देरी के कारण तेजस Mk1A के उत्पादन और डिलीवरी कार्यक्रम पर असर पड़ा था. HAL पहले ही कह चुका है कि उसकी उत्पादन लाइन तैयार है, लेकिन विमानों की अंतिम डिलीवरी इंजन उपलब्धता पर निर्भर है।  क्या है F404-IN20 इंजन? F404-IN20, GE की F404 सीरीज का वह वैरिएंट है जिसे खास तौर पर भारतीय तेजस के लिए डेवलेप किया गया है. यह इंजन आफ्टरबर्नर के साथ करीब 84 kN (19,000 lbf) का मैक्सिमम थ्रस्ट पैदा करता है, जो तेजस को सुपरसोनिक गति और जबरदस्त मैन्युवरिंग क्षमता देता है. कहा जा सकता है कि यह इंजन केवल एक नॉर्मल अपग्रेड नहीं, बल्कि फाइटर जेट को हर मोर्चे पर घातक बनाने वाला पावरहाउस है।  लद्दाख से लेकर रेगिस्तान तक अचूक प्रहार इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका हर तरह के मौसम और इलाके में असरदार रहना है. यह इंजन लद्दाख के माइनस तापमान और लेह जैसे हाई-एल्टीट्यूड एयरबेसों से लेकर थार के 50 डिग्री तापमान वाले रेगिस्तान तक बिना पावर लॉस के काम करता है. इसके लिए इसमें खास सिंगल-क्रिस्टल टर्बाइन ब्लेड्स और एडवांस कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं।  यह इंजन पूरी तरह फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) टेकनोलॉजी से लैस है. यह सिस्टम ईंधन की खपत को बेहतर बनाती है और डॉगफाइट के दौरान पायलट को तुरंत थ्रॉटल रिस्पॉन्स देती है।  तेजस Mk1A के लिए क्यों अहम है यह डिलीवरी? भारत का तेजस प्रोग्राम इंजन की कमी के चलते लगातार डिले हो रहा था.  अब तीन नए इंजन मिलने से HAL को तैयार एयरफ्रेम को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी. भारतीय वायुसेना ने फिलहाल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है. ऐसे में अब इन इंजनों की जल्द डिलीवरी होने की संभावना बढ़ गई।  MiG-21 की जगह लेगा तेजस भारतीय वायुसेना पुराने MiG-21 बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है. ऐसे में तेजस Mk1A ही भविष्य के फ्रंटलाइन फाइटर स्क्वाड्रनों की रीढ़ बनने जा रहा है. F404-IN20 इंजन के साथ तेजस  लद्दाख जैसे हाई-एल्टीट्यूड बेस, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और  पश्चिमी सीमा के फॉरवर्ड एयरबेस पर तैनात किए जा सकेंगे।  क्या हैं तेजस Mk1A की खासियतें? तेजस Mk1A, मौजूदा तेजस Mk1 का एडवांस वैरिएंट है. यह फाइटर जेट AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, BVR मिसाइल क्षमता, बेहतर मेंटेनेंस प्रोफाइल, कम ऑपरेटिंग लागत और आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता जैसी खासियतों के साथ भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा। 

New York AI Ban: बच्चों की पढ़ाई में AI पर लगा ब्रेक, सरकारी स्कूलों में 8वीं कक्षा तक इस्तेमाल प्रतिबंधित

न्यूयॉर्क आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को लेकर हर तरफ चर्चा है, अधिकतर लोग मानने लगे हैं कि अब इसके बिना कुछ भी संभव नहीं है, लेकिन अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने प्राइमरी स्कूलों में AI के इस्तेमाल पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है।  न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है. अब स्टूडेंट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल पर इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक का ऐलान कर दिया है।  अमेरिका में स्कूलों को लेकर AI के संबंध में लिया गया है, यह अब तक का सबसे बड़ा और सख्त फैसला माना जा रहा है. अब लॉस एंजिल्स समेत कई अन्य शहरों के स्कूलों में AI के नियमों का दोबारा रिव्यू किया जा रहा है।  40 एजुकेशन AI टूल को किया है बैन न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने बुधवार को बताया है कि शहर के स्कूलों की क्लासेस में फिलहाल इस्तेमाल किए जा रहे हैं 40 एजुकेशन AI टूल्स के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।  स्टूडेंट को टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए मेयर ने कहा है कि बच्चों को सीखने और बढ़ने के लिए टीचर चाहिए और उनसे जुड़ाव चाहिए. स्टूडेंट को साथियों के साथ मिलकर कौशल सीखने चाहिए और टीचर्स से नई-नई चीजों को सीखना चाहिए।  बच्चों के लिए एआई टूल्स पर क्यों लगी पाबंदी?     यह पाबंदी प्री-किंडरगार्टन से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर लागू की गई है। मेयर ममदानी और स्कूल्स चांसलर कामर सैमुअल्स द्वारा जारी इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग यानी खुद से सोचने-समझने की क्षमता को बचाना और शिक्षकों व छात्रों के बीच संवाद को बनाए रखना है।     इस नए नियम के तहत शिक्षा अधिकारी 38 से अधिक क्लासरूम प्रोग्राम्स के स्वचालित (ऑटोमेटेड) फीचर्स को पूरी तरह बंद कर देंगे। इसके अलावा चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे पब्लिक चैटबॉट सभी स्तर के स्कूलों में पूरी तरह से ब्लॉक रहेंगे। न्यूयॉर्क ने साल 2023 में भी चैटजीपीटी पर बैन लगाया था, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया था। अब प्रशासन ने पिछली नीतियों में बदलाव करते हुए दो-तिहाई छात्रों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। चैटबॉट्स के इस्तेमाल से बच्चों को क्या हैं नुकसान? क्रिटिकल थिंकिंग की कमी: एआई चैटबॉट्स से बच्चों को हर जटिल सवाल का बना-बनाया जवाब सेकंडों में मिल जाता है, इससे वे खुद से तर्क करना, समस्याओं का विश्लेषण करना और दिमागी कसरत करना छोड़ देते हैं। इससे उनकी सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होती है। रचनात्मकता और मौलिकता की कमी: निबंध, कविताएं या प्रोजेक्ट खुद तैयार करने के बजाय बच्चे एआई का सहारा लेते हैं। इससे उनकी भाषा शैली, कल्पनाशीलता और खुद को अभिव्यक्त करने की प्राकृतिक कला धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। गलत सूचनाओं का असर: चैटबॉट्स अक्सर गलत या भ्रामक तथ्यों को बहुत ही प्रामाणिक और आत्मविश्वास भरे ढंग से पेश करते हैं। कच्ची उम्र के बच्चे इन जानकारियों को पूरी तरह सच मान लेते हैं, जिससे उनके बुनियादी ज्ञान की नींव ही गलत तथ्यों पर खड़ी हो सकती है। मानवीय और सामाजिक कौशल में गिरावट: कक्षा में दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन करने या शिक्षकों से सवाल पूछने की बजाय स्क्रीन देखते रहने के कारण बच्चों के संवाद और सामाजिक कौशल का विकास रुक जाता है। शिक्षक-छात्र संबंधों में दूरी: एक शिक्षक बच्चे की मानसिक स्थिति, उसकी कमजोरी और मजबूती को समझकर व्यक्तिगत मार्गदर्शन देता है। हर समस्या के लिए मशीनों पर निर्भरता इस भावनात्मक जुड़ाव और जरूरी मार्गदर्शन को पूरी तरह खत्म कर देती है। स्क्रीन टाइम लिमिट कम करने पर जोर     इस पाबंदी से हाई स्कूल के छात्रों को थोड़ी राहत दी गई है। उन्हें साल में दो बार एआई साक्षरता की कक्षाएं दी जाएंगी और कड़ी निगरानी में कुछ चुनिंदा एआई प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी। दूसरी ओर शिक्षकों को लेसन प्लानिंग और प्रशासनिक कार्यों के लिए एआई टूल्स का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।     हालांकि, कॉपियां जांचने (ग्रेडिंग) या छात्रों के किसी भी तरह के औपचारिक मूल्यांकन के लिए एआई का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रशासन ने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की लिमिट भी तय कर दी है। इसके तहत तीसरी से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए 30 मिनट और छठी से आठवीं कक्षा के लिए 45 मिनट की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, दिव्यांग छात्रों और अंग्रेजी भाषा सीखने वाले बच्चों को इन नियमों में विशेष छूट दी जाएगी। टेक कंपनियों के दावों पर मेयर का पलटवार प्रेस ब्रीफिंग के दौरान शहर के अधिकारियों ने टेक इंडस्ट्री की उस सोच को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें एआई को शिक्षा के लिए जरूरी बताया जाता है। मेयर जोहरान ममदानी ने कड़े शब्दों में कहा कि टेक कंपनियां हमें यह विश्वास दिलाना चाहती हैं कि शुरुआती शिक्षा में एआई जरूरी है, लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूलों का काम बच्चों को सवाल पूछना और चीजों को परखना सिखाना है, इसलिए यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे व्यावसायिक सॉफ्टवेयर की आंख मूंदकर अनुमति देने के बजाय उसकी कड़ी निगरानी करें। फैसले पर उठ रहे सवाल     इस बड़े फैसले पर शिक्षा जगत से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ टीचर्स के अध्यक्ष माइकल मुलग्रू ने स्क्रीन टाइम लिमिट और विशेष बच्चों को दी गई छूट का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय टेक कंपनियों और सप्लायर्स से सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की मांग की जानी चाहिए।     वहीं फेयरप्ले के कार्यकारी निदेशक जॉश गोलिन ने चिंता जताई कि एआई के लंबे समय तक पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझने के लिए एक साल का समय काफी नहीं है। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे स्कूल के बाद घर जाकर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर होमवर्क के लिए एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं।     चांसलर कामर सैमुअल्स ने भी माना कि घर पर बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखने के लिए स्कूल के साथ-साथ अभिभावकों की भी मदद लेनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया और इसके प्रभाव पर नजर रखने … Read more

BRICS समिट में जिनपिंग की मौजूदगी तय, बांग्लादेशी PM का दौरा रद्द; सुरक्षा तैयारियां तेज

नई दिल्ली  भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं। जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है। बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है। तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।