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उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज राज्य के सभी नगर निगमों तथा जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को शहरों के विकास, स्वच्छता, राजस्व वसूली, योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के साथ ही जवाबदेही से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय केवल बजट खर्च करने वाली संस्था नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की योजनाएं बनाने, जनसुविधाएं उपलब्ध कराने तथा नागरिकों की कल्याणकारी संस्था है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा और संचालक  नीलेशकुमार क्षीरसागर भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में कहा कि शहरों के विकास के काम तथा राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए अधिकारी सक्रियता से काम करें। प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंचाएं। उन्होंने निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों के सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने और संपत्ति कर जमा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा निकायों में आनलाइन भुगतान की सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि वे निर्माण कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा निर्माणाधीन कार्यों की कड़ाई से निरीक्षण करें। उन्होंने सप्ताह के अलग-अलग दिनों में राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए कार्य-पद्धति विकसित करने के निर्देश दिए।  उप मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों और अतिक्रमणों का पता चलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाओं का अतिरिक्त भार निकाय पर पड़ता है। उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को प्रतिदिन प्रातः भ्रमण कर साफ-सफाई की व्यवस्था और निर्माण कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। इससे कार्यों की मैदानी हकीकत पता चलने के साथ ही शहर की समस्याओं और लोगों के फीडबैक की भी जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शहरों की अधोसंरचना भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित होनी चाहिए।   साव ने नगरीय निकायों में अगले 50 वर्षों की जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक योजना बनाने पर जोर देते हुए शहरों के सभी घरों में पेयजल आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था तैयार करने को कहा। भविष्य के जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निकायों के अधिकारी ही शहर की छवि और विकास की दिशा तय करने वाले प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी हैं, इसलिए पूरी क्षमता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करें। शहरों की व्यवस्था ऐसी हो कि नागरिकों को निकाय की मौजूदगी का अहसास हो :  सोनमणि बोरा नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि नगरीय निकायों का दायित्व केवल निर्माण कार्यो और योजनाओं को पूरा करना नहीं है, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं का निर्बाध और सुचारू संचालन भी है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और बढ़ती जनआकांक्षाओं के अनुरूप निकायों को भविष्य की जरूरतों का रोडमैप तैयार कर उस पर प्रभावी ढंग से अमल करना होगा। शहरवासियों को निकाय की मौजूदगी का अहसास होना चाहिए। उन्हें विभिन्न आयोजनों व कार्यक्रमों में सहभागी बनाया जाना चाहिए।  प्रमुख सचिव  बोरा ने कहा कि नगरीय निकायों का काम संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसका कार्यक्षेत्र बेहद व्यापक है। नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही शहरों में आधुनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना भी निकायों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं और विकास कार्यों का असर कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। निगम आयुक्त और सीएमओ शहरी विकास और कल्याण की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने शहरों में उपलब्ध खाली स्थानों का चिन्हांकन कर वहां सघन वृक्षारोपण कराने और 'अर्बन फारेस्ट' विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का गंभीरता और सक्रियता से पालन करने को कहा। उन्होंने सामान्य सभा और एमआईसी की बैठकें भी समयबद्ध तरीके से नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन सभी नालंदा परिसरों को शीघ्र शुरू करने की दिशा में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने पर भी जोर दिया गया। प्रमुख सचिव ने फर्नीचर, आइटी सुविधाओं, किताबों तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए राशि स्वीकृत कर जल्द टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। सूडा के सीईओ  सुमित अग्रवाल, अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता  रमेश शर्मा सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों के सीएमओ, राजस्व अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता और संभागीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे। इन कार्यों की हुई समीक्षा उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री की घोषणाओं की अद्यतन स्थिति, अधोसंरचना कार्यों, नालंदा परिसर, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं, पीएम स्वनिधि और पीएम ई-बस सहित विभिन्न राज्य प्रवर्तित योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, एनर्जी बिल ऑडिट, एबीसी रूल्स एवं गोधाम योजना, निकायों की टीम द्वारा प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट, सीएम हेल्पलाइन, लोक सेवा गारंटी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।

समान नागरिक संहिता (UCC) पर राजनांदगांव में बैठक सम्पन्न

रायपुर  छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा गठित यूसीसी समिति ने जनपरामर्श की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में राजनांदगांव के जिला पंचायत सभाकक्ष में बैठक में यूसीसी समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी  एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता  मोहन पवार एवं सेवानिवृत्त प्राचार्या डॉ. ज्योति रानी सिंह के समक्ष विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे विषयों पर खुलकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।  बैठक की मुख्य बातें पारंपरिक-सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। UCC के पक्ष और विपक्ष दोनों में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।  बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के सर्व आदिवासी समाज, बौद्ध, जैन, मुस्लिम, ईसाई, साहू, कलार, लोधी, यादव, क्रिश्चयन समाज, पटेल, गड़रिया समाज और सेन समाज, अध्यक्ष गोड़ समाज, सामाजिक कार्यकर्ता, उराव समाज, मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों सहित विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और अपने सुझाव समिति के समक्ष रखे। विभिन्न सामाजिक संगठनों दिए गए सुझाव में समान नागरिक संहिता  (Uniform Civil Code – UCC) के तहत सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक जैसा कानून होना चाहिए। ड्राफ्ट निर्माण की प्रक्रिया समिति के सदस्यों ने बताया कि प्राप्त सभी सुझावों के आधार पर ही अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने बताया कि आम जनता से ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। विधिक सलाहकार द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से UCC की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही आम नागरिक समिति की आधिकारिक वेबसाईट https://ucc.cgstate.gov.in/:  एवं ई-मेल ucc-chhattisgarh@cg.gov.in  के माध्यम से भी अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। बैठक के दौरान संभागायुक्त  सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर  जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ  दुर्गा प्रसाद अधिकारी तथा अपर कलेक्टर  सी.एल. मारकंडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ

वाराणसी  मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पोषण मेले में देश के विभिन्न राज्यों की पोषण परंपराओं और आहार विविधता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग राज्यों के पोषण आहार का रंग-रूप और बनाने का तरीका भले ही अलग रहा, लेकिन सभी में पोषण के तत्वों को प्राथमिकता दी गई। पोषण मेले में कुल 15 पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए। इनमें सात राज्यों के स्टॉल के साथ आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े स्टॉल भी शामिल रहे। अनुपूरक पुष्टाहार, ईसीसीई, सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित गतिविधियों को भी प्रदर्शित किया गया। मेले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की योजनाओं, पोषण आहार और नवाचारों की जानकारी साझा की। एक-दूसरे के पोषण प्रयोगों को जानने का अवसर मिजोरम से आए जोयला  ने बताया कि मेले में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को उनके यहां तैयार किए जाने वाले पोषण आहार और उसे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्टॉल पर जाकर भी कई नई जानकारियां मिलीं। वहीं, उनके स्टॉल पर पहुंचे लोगों ने भी मिजोरम के पोषण संबंधी प्रयोगों और व्यंजनों के बारे में जानकारी ली। राजस्थान से आईं एकीकृत बाल विकास सेवा की उपनिदेशक डॉ. मंजू यादव ने अपने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में संचालित पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं काफी जागरूक हैं और पोषण आहार प्लांट का संचालन भी कर रही हैं। विश्वविद्यालयों के होम साइंस विभागों की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्षय पात्र के माध्यम से स्कूली बच्चों को गर्म और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ के साथ साझेदारी तक उत्तराखंड से आईं चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीतू पुलारा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों में अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। सभी राज्यों के अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के बेहतर प्रयोगों को जाना और उन्हें अपने क्षेत्रों में अपनाने के लिए जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे फास्ट फूड की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। ऐसे में मिजोरम के स्टॉल पर मिलेट्स से तैयार नूडल्स का प्रयोग काफी अच्छा लगा। वहीं, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ के साथ मिलकर चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी मिली। इससे यह जानने का अवसर मिला कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए किस तरह संपर्क और सहयोग किया जा सकता है।नीतू पुलारा ने बताया कि उत्तराखंड से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर कई नई बातें सीखीं। इस आयोजन को लेकर उनमें काफी उत्साह देखने को मिला। मानदेय बढ़ने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया आभार   वाराणसी और आसपास के जिलों से कार्यक्रम में पहुंचीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय में बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने पर योगी सरकार के प्रति आभार जताया। गाजीपुर से आईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशिकला और सहायिका स्नेहलता ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने से उन्हें कई नई जानकारियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि इन जानकारियों को वे अपने कार्यक्षेत्र में अमल करने का प्रयास करेंगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  तारा पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वक्ताओं के संबोधन से कई नई बातें जानने को मिलीं। उन्होंने कहा कि अब इन बातों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।   मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया संवाद  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडिशा,तमिलनाडु,गुजरात और गोरखपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका से संवाद किया।  तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने ‘वणक्कम’ से शुरू किया संवाद, जुड़वां बच्चों की देखभाल की सुनाई कहानी कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर.रंजनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ‘वणक्कम’ कहकर संवाद शुरू किया। उन्होंने अपने कार्य का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक परिवार में 21 दिन के जुड़वां बच्चों की मां की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में उन्होंने परिवार के लोगों को समझाया और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से संभालने के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी उनकी मदद की।  आर. रंजनी ने बताया कि दोनों बच्चे अब दो साल से आंगनवाड़ी केंद्र आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वस्थ और सामान्य रूप से बढ़ते हुए देखकर उन्हें काफी खुशी होती है। उनके इस अनुभव ने यह भी दिखाया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका केवल पोषण आहार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वे बच्चों और परिवारों को भावनात्मक एवं व्यक्तिगत सहयोग भी देती हैं।  मुख्यमंत्री ने ओडिशा से आईं सहायिका से कुपोषित बच्चों के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका के बारे में जानकारी ली। गोरखपुर के बसियापुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उनके गांव जा चुके हैं। इस पर कार्यकर्ता ने सहज अंदाज में मुख्यमंत्री से कहा कि आप मेरे घर भी आए हैं।

इंदौर से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का राज्य स्तरीय शुभारंभ 8 अक्टूबर तक चलेगा अभियान

भोपाल प्रदेश में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का बुधवार को इंदौर से राज्य स्तरीय शुभारंभ हुआ। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम के साथ 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण एवं स्वास्थ्य को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि स्वस्थ बच्चे ही प्रदेश और देश के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप पोषण को केवल सरकारी कार्यक्रम न बनाकर समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की जरूरत है। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को अभिभावकों, सरपंचों, पार्षदों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों तथा सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से जोड़ा जाए। समाज की सक्रिय भागीदारी से आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से स्थानीय जरूरतों के अनुसार नए प्रयोग करने तथा सफल नवाचारों को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करने का भी आह्वान किया, जिससे दूसरे केंद्र भी उनसे प्रेरणा ले सकें।उन्होंने कहा कि पोषण माह के दौरान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा दिया जाएगा। गर्भवती और धात्री माताओं को पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और बच्चों की देखभाल के प्रति जागरूक करने के साथ कुपोषण की रोकथाम पर विशेष ध्यान रहेगा। मंत्री ने बताया कि विभाग ने आंगनवाड़ी भवनों की उपलब्धता बढ़ाने, मिनी आंगनवाड़ियों को मुख्य आंगनवाड़ी में उन्नयन करने और कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के प्रयास किए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। चार संस्थाओं के साथ एमओयू पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए चार संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन भी किए गए। अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन , एम्स , आईपीई ग्लोबल और नई दिशा फाउंडेशन के साथ हुए एमओयू के माध्यम से बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों की भागीदारी से पोषण एवं बाल विकास के अभियान को नई ताकत मिलेगी। राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार ने कहा कि ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के संदेश के साथ बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पोषण को केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि भोजन की गुणवत्ता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों पर भी बराबर ध्यान जरूरी है। उन्होंने पोषण ट्रैकर, वन स्टॉप सेंटर और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और सांसद श्री शंकर लालवानी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। स्थानीय अनाज और पारंपरिक व्यंजनों पर जोर पोषण माह के शुभारंभ पर लता मंगेशकर सभागृह परिसर में पोषण मेला और रेसिपी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। यहां टेक होम राशन (THR), गर्म पका भोजन (HCM), स्थानीय दालों, चना, मूंगफली, सोया, दूध एवं दुग्ध उत्पादों, मिलेट्स और मौसमी सब्जियों से तैयार पौष्टिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। ‘नो योर प्रोटीन —अपने प्रोटीन को पहचानें’ अभियान के जरिए परिवारों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रोटीन के स्रोतों और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी गई। पोषण माह के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को स्थानीय और विविधतापूर्ण ताजा नाश्ता तथा गर्म पका भोजन उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता की निगरानी में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। केंद्रों पर साप्ताहिक मेन्यू बोर्ड भी लगाए जाएंगे, इससे अभिभावकों और समुदाय को बच्चों को दिए जा रहे भोजन की जानकारी मिल सके। अभियान के तहत बच्चों की शारीरिक माप, पोषण संबंधी जागरूकता, रेसिपी प्रदर्शन और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का अधिकतम लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के लिए विशेष गतिविधियां भी संचालित होंगी।  

बेटियां अपने परिवार, मातृभूमि, समाज और राष्ट्र के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखें : मंत्री परमार

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और संवेदना के साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझना भी है। बेटियां अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से आगे बढ़ते हुए परिवार, मातृभूमि, समाज एवं राष्ट्र के प्रति सदैव कृतज्ञता का भाव रखें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। मंत्री  परमार बुधवार को भोपाल स्थित शासकीय गीतांजलि कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय में आयोजित ‘प्राचार्य पदक वितरण समारोह’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्राचार्य पदक प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मंत्री  परमार ने कहा कि हमारी बेटियों की उपलब्धियां केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति का गौरवपूर्ण अध्याय हैं। उत्कृष्टता का सम्मान विद्यार्थियों को और बेहतर करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए करें और अपने जीवन में कर्तव्य, संस्कार तथा राष्ट्रभाव को सर्वोच्च स्थान दें। भारतीय ज्ञान परंपरा को शोध और अनुसंधान से आगे बढ़ाएं मंत्री  परमार ने भारतीय पुरातन ज्ञान परंपरा की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का ज्ञान सदैव सार्वभौमिक और मानव कल्याण की भावना से युक्त रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से संबंधित समृद्ध ज्ञान विद्यमान है। आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी इस ज्ञान को समझे और उसके युगानुकूल परिप्रेक्ष्य में शोध, अनुसंधान एवं दस्तावेजीकरण के माध्यम से आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने स्वत्व के जागरण, भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने और राष्ट्र के पुनर्निर्माण में योगदान देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल, संस्कार और समग्र व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित है।  परमार ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय भावना की वैश्विक प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए इस भावना को सार्थक किया। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाती है।  मंत्री  परमार ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि ज्ञान, सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता से युक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। भारत वर्ष 2047 तक विश्व के अन्य देशों की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी सक्षम और सामर्थ्यवान बनेगा। इस संकल्प को साकार करने में युवा शक्ति और विशेषकर बेटियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। महाविद्यालय के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं इस अवसर पर मंत्री  परमार ने महाविद्यालय को 100 कंप्यूटर उपलब्ध कराने तथा छात्रावास एवं ऑडिटोरियम के अनुरक्षण के लिए ₹1 करोड़ की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने महाविद्यालय की कैंटीन का नाम ‘अन्नपूर्णा’, छात्रावास का नाम ‘मैत्रेयी’, क्रीड़ा भवन का नाम ‘पी.टी. उषा भवन’ तथा विज्ञान भवन का नाम ‘गार्गी भवन’ किए जाने की घोषणा भी की। समारोह में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. जय मिश्रा ने महाविद्यालय की उपलब्धियों एवं शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय को वर्ष 2011 में स्वशासी का दर्जा प्राप्त हुआ है तथा वर्तमान में 13 विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित हैं। महाविद्यालय में बी.ए. नृत्य एवं मनोविज्ञान विषय प्रारंभ करने तथा कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। कार्यक्रम में वार्ड पार्षद  मनोज राठौर एवं अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा डॉ. मथुरा प्रसाद सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्राएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संचालन डॉ. सुनीता जैन तथा आभार प्रदर्शन डॉ. जया शर्मा ने किया। पुरस्कार वितरण समिति की संयोजक डॉ. शैलजा सोनी का आयोजन में विशेष योगदान रहा।  

नुक्कड़ नाटकों से गूंजेगी ‘सेवा’ की गाथा, इन्फ्लूएंसर दिखाएंगे बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सेवाकाल के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक प्रदेशभर में आयोजित होने वाले सेवा संकल्प अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ प्रभावी बनाने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज नया रायपुर स्थित अपने आवास कार्यालय पर अभियान के तहत पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में सचिव डॉ. एस. भारतीदासन पर्यटन एवं संस्कृति छत्तीसगढ़ शासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री  अग्रवाल ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनसेवा, जनभागीदारी और विकास के प्रति नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने का व्यापक अवसर है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान से जुड़ी गतिविधियों को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और जनोन्मुखी बनाया जाए, ताकि योजनाओं एवं विकास कार्यों का संदेश प्रदेश के अधिक से अधिक लोगों तक सहज और प्रभावशाली ढंग से पहुंच सके। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से दिखेगी योजनाओं से आए बदलाव की कहानी संस्कृति विभाग द्वारा अभियान के दौरान प्रदेश के महाविद्यालयों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों, सामुदायिक केन्द, पंचायत सहित विभिन्न प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा इन योजनाओं से आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भावपूर्ण एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। नुक्कड़ नाटकों में स्थानीय भाषा, लोककला, संगीत और प्रभावी संवादों का उपयोग करते हुए योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों की जीवन-परिवर्तन की कहानियों को आमजन तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी को केवल औपचारिक प्रचार तक सीमित न रखते हुए उसे जनसंवाद और जनजागरूकता का माध्यम बनाना है। महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में होने वाली प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। वहीं सार्वजनिक स्थलों पर प्रस्तुतियां आयोजित कर आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। पर्यटन विभाग के माध्यम से दुनिया देखेगी बदलता छत्तीसगढ़ अभियान के दौरान पर्यटन विभाग द्वारा देश और प्रदेश के इन्फ्लूएंसरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा प्रदेश की बदलती तस्वीर को लोगों तक पहुंचाने की पहल की जाएगी। इन्फ्लूएंसरों के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, विकसित अधोसंरचना, पर्यटन सुविधाओं और विकास कार्यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विकास की कहानी को व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के साथ प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाना है। डिजिटल माध्यमों की व्यापक पहुंच को देखते हुए इस पहल के जरिए युवाओं और सोशल मीडिया से जुड़े नागरिकों को अभियान से जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा। सेवा और विकास की गाथा बनेगी जनभागीदारी का माध्यम ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेशभर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देना है। अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘कहानी बदलाव की’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’ और ‘सेवा सेतु अभियान, ‘सरकार आपके द्वार’ सहित अनेक गतिविधियां होंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र नागरिकों तक पहुंचाने, योजनाओं के लाभ से वंचित पात्र हितग्राहियों को जोड़ने तथा समाज के विभिन्न वर्गों…

वोट बैंक के लिए समाज बांटने वालों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती माफिया के सामने: सीएम योगी

वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग वोट बैंक के लिए समाज को जातीय आधार पर बांटने और विभाजन की राजनीति करने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब दुर्दान्त माफिया और अपराधियों पर कार्रवाई की बात आती है तो इनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। वे मौन हो जाते हैं। भले ही उनके अपने परिवार का नुकसान हुआ हो, वे माफिया के सामने गिड़गिड़ाते हुए ही दिखाई दिए। लेकिन, डबल इंजन की सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा। खासकर बेटियों व महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं। जब महिला बिना डर घर से निकलेगी, तभी वह स्कूल, कॉलेज, नौकरी, कारोबार और सामाजिक जीवन में अपनी भागीदारी बढ़ा सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को वाराणसी के पिंडरा विधानसभा में कामकाजी महिला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आधी आबादी के सम्मान और उसकी सामर्थ्य का अहसास कराने वाला है। महिलाओं की भागीदारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 2017 से पहले सुरक्षा की चिंता, अब सपनों की उड़ान सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले बेटी को स्कूल भेजना हो तो परिवार को उसकी सुरक्षा की चिंता होती थी। घर में शौचालय न हो तो बेटी, बहन और मां के सम्मान की चिंता रहती थी। रसोई में धुआं हो तो स्वास्थ्य की चिंता, इलाज कराना हो तो पैसे की चिंता और घर चलाना हो तो आमदनी की चिंता  होती थी। महिला घर से बाहर निकलकर कुछ करना चाहती थी तो उसके सामने रास्ते, कनेक्टिविटी, अवसर और उस अवसर तक पहुंचने की कीमत का सवाल खड़ा होता था। जब परिवार को सुरक्षा का भरोसा नहीं होता है तो सबसे पहले बेटी के सपनों पर रोक लगती है। भाजपा सरकार ने तय किया कि बेटी को पढ़ाना है, बढ़ाना है और सुरक्षा की चिंता भी समाप्त करनी है। हमने पहले डर हटाया, फिर बेटी को पढ़ाया,  हुनर दिया और उसे रोजगार से जोड़ा। पहले सवाल था कि बेटी घर से बाहर कैसे निकलेगी, आज सवाल यह है कि उसे जाना कहां तक है। अब कोई बेटी केवल इसलिए अपने सपनों को नहीं छोड़ेगी कि वह गरीब परिवार में पैदा हुई है। कोई महिला केवल पूंजी के अभाव में पीछे नहीं रहेगी और कोई परिवार अवसर के अभाव में विकास से दूर नहीं रहेगा। बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं है। हमारी सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। महिलाओं की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं हो सकता। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या होगी 50 हजार के पार मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ाई गई है। 2017 में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं। आज यह संख्या 44 हजार हो गई है और नई भर्ती के बाद यह 50 हजार से अधिक हो जाएगी। मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। महिला बीट पुलिस अधिकारियों की तैनाती और इंटीग्रेटेड महिला बीट सिस्टम लागू किया गया है। 1090 और 181 जैसी व्यवस्थाओं को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ा गया है। पीएसी में तीन महिला बटालियन भी स्थापित हो रही हैं। इन्हें वीरांगना अवंती बाई लोधी, वीरांगना ऊदा देवी पासी और वीरांगना झलकारी बाई के नाम से जाना जाएगा। महिला के लिए सड़क सपनों तक पहुंचने का माध्यम सीएम योगी ने कहा कि बेटी-बहन के लिए रास्ते का अर्थ केवल सड़क नहीं है। स्कूल, अस्पताल, बाजार या कार्यस्थल तक पहुंचने के रास्ते उनके सपनों की मंजिल तक जाने के मार्ग हैं। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में हाईवे से एयरपोर्ट और रेलवे से मेट्रो तक कनेक्टिविटी का व्यापक विस्तार हुआ है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक जैसी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने आवागमन को आसान बनाया है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्कूल-कॉलेज, बाजार, रोजगार और कार्यस्थल की दूरी कम होती है। इसका सबसे बड़ा लाभ महिलाओं व बेटियों को मिलता है। सड़क और परिवहन व्यवस्था केवल विकास का ढांचा नहीं, बल्कि महिलाओं के अवसरों तक पहुंचने का माध्यम भी है। जन्म से लेकर विवाह तक बेटियों के साथ सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने बेटी के जीवन के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना इसी दिशा में प्रयास हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25 हजार रुपये का पैकेज दिया जा रहा है। बेटी के विवाह योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से उसका विवाह कराया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के लोग इस योजना का मजाक उड़ाते थे और इसे बेटी का अपमान बताते थे। आज इसी योजना के तहत पांच लाख से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न हो चुका है। 50 हजार मेधावी बेटियों को जल्द स्कूटी सीएम ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है। पहले ये विद्यालय कक्षा छह से आठ तक संचालित होते थे, अब इन्हें 12वीं तक चलाने की दिशा में काम हो रहा है। अटल आवासीय विद्यालयों में बेटियों के लिए आधी सीटें रखी गई हैं। सैनिक स्कूलों में भी बेटियों के लिए अवसर बढ़ाए गए हैं। बेटियों व युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन देने की योजना भी आगे बढ़ाई गई है। जल्द ही स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से जोड़ने की तैयारी है। प्रोजेक्ट गंगा में चार हजार महिला डिजिटल उद्यमी मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल शिक्षा व सुरक्षा तक सीमित नहीं है। आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना भी उतना ही जरूरी है। सरकार स्किल डेवलपमेंट मिशन, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से बेटियों को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ रही है। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत … Read more

अमरकंटक में अवैध अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई

अनूपपुर  कलेक्टर  रत्नाकर झा के निर्देशानुसार अमरकंटक नगरीय क्षेत्र में सुगम आवागमन एवं शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से जनहित में विशेष कार्रवाई की गई। मुख्य नगर पालिका अधिकारी  चैन सिंह परस्ते के नेतृत्व में नगरीय निकाय एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा विभिन्न प्रमुख स्थलों पर किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाया गया। कार्रवाई के अंतर्गत दीनदयाल चौराहा से शांति कुटीर तक सड़क किनारे किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाया गया। इसी क्रम में नर्मदा मंदिर प्राधिकरण कार्यालय के सामने शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को भी हटाया गया। कार्रवाई के दौरान सार्वजनिक मार्गों पर यातायात एवं आम नागरिकों तथा श्रद्धालुओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमणों को हटाकर संबंधित क्षेत्रों को व्यवस्थित किया गया। इस संबंध में प्रशासन द्वारा बताया गया कि नगरीय क्षेत्र में शासकीय भूमि एवं सार्वजनिक मार्गों पर किए गए अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

मध्यप्रदेश ईवी नीति-2025 से संवर रहा हरित एवं सतत परिवहन का भविष्य

भोपाल  विश्व ईवी दिवस विश्व ईवी दिवस के अवसर पर बुधवार को भोपाल में मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) द्वारा नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सहयोग तथा 'सिटीज फोरम' के तकनीकी समन्वय से इलेक्ट्रिक वाहन जागरूकता रैली तथा ईवी एक्सपो का आयोजन हुआ। रैली का शुभारंभ गोविंदपुरा दशहरा मैदान से हुआ, जो नगर के प्रमुख व्यावसायिक एवं आवासीय मार्गों से होकर मैनिट परिसर पहुंची। रैली में पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित करते हुए 50 से अधिक विविध इलेक्ट्रिक वाहनों ने सहभागिता की। इनमें दोपहिया वाहन, व्यक्तिगत कारें, ई-ऑटो, वाणिज्यिक ई-ऑटो, इलेक्ट्रिक पिकअप वाहन तथा पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बसें सम्मिलित थीं। इस आयोजन का मूल ध्येय शून्य-उत्सर्जन परिवहन के लाभों से नागरिकों को परिचित कराना एवं नगरीय वायु गुणवत्ता में सुधार के लिये जन-सहभागिता को जागृत करना था। अपर आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास श्री अभिषेक सराफ ने कहा कि राज्य शासन 'मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025' के माध्यम से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक सुदृढ़, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल मोबिलिटी इकोसिस्टम के निर्माण के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नीतिगत प्रोत्साहनों से न केवल स्वच्छ परिवहन को बल मिल रहा है, अपितु राज्य में औद्योगिक निवेश और नवीन संभावनाओं का भी विस्तार हो रहा है। इसी क्रम में भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं भोपाल नगर निगम अपर आयुक्त सुश्री अंजू अरुण कुमार ने नागरिक सहभागिता और नवाचार को नगरीय परिवहन की रीढ़ बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार और आधुनिक तकनीकों का अंगीकार नगरों को प्रदूषण-मुक्त बनाने तथा राष्ट्रीय जलवायु एवं पर्यावरण संरक्षण लक्ष्यों को पूर्ण करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। मैनिट परिसर में आयोजित ईवी एक्सपो में अग्रणी वाहन निर्माताओं का प्रदर्शन मैनिट परिसर में आयोजित ईवी एक्सपो में ऑटोमोबाइल क्षेत्र की प्रतिष्ठित निर्माण कंपनियों द्वारा अपनी नवीनतम इलेक्ट्रिक गाड़ियों, उन्नत तकनीकों एवं बैटरी समाधानों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। इस एक्सपो में महिंद्रा, टाटा मोटर्स, हुंडई, मारुति सुजुकी, किआ, बीवाईडी, एमजी मोटर, ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी और सिंपल एनर्जी जैसी प्रमुख कंपनियों ने सहभागिता की। इस समन्वित आयोजन ने मैनिट भोपाल और नगरीय विकास एवं आवास विभाग की स्वच्छ, हरित एवं सतत नगरीय परिवहन व्यवस्था निर्मित करने की साझा संकल्पबद्धता को गरिमामय रूप से प्रदर्शित किया। मध्यप्रदेश ईवी नीति-2025 से संवर रहा हरित एवं सतत परिवहन का भविष्य पर्यावरण-अनुकूल, स्वच्छ एवं सतत् नगरीय परिवहन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू की गई 'मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025' प्रदेश को ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रही है। इस दूरदर्शी नीति के अंतर्गत प्रदेश के पांच प्रमुख महानगरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन—को मॉडल ईवी शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। नीति के माध्यम से ई-वाहनों के पंजीयन शुल्क एवं रोड टैक्स में छूट, सार्वजनिक तथा निजी चार्जिंग अधोसंरचना के विस्तार के लिए प्रोत्साहन, बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं की स्थापना तथा हरित परिवहन क्षेत्रों का निर्धारण कर ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम को अभूतपूर्व गति प्रदान की जा रही है। साथ ही, नागरिकों एवं निवेशकों की सुविधा के लिए 'ईवी तरंग' पोर्टल के माध्यम से एकीकृत सूचना प्रणाली उपलब्ध कराई गई है, जो वर्ष 2030 तक हरित परिवहन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हो रही है। मध्यप्रदेश में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 के एकल माह में 15,838 नए इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीयन दर्ज किया गया, जो संपूर्ण देश के कुल ईवी बाजार का 5 प्रतिशत से अधिक का योगदान दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, विगत पांच वर्षों के निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश भर में 1,400 से अधिक आधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। यह विस्तृत नेटवर्क प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के सुगम संचालन और उपभोक्ताओं में विश्वास सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत आधारशिला बनकर उभरा है। 

चिकित्सकों की कमी दूर करने और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं मजबूत करने को सरकार का बड़ा कदम

लखनऊ। प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने और आमजन को बेहतर एवं समयबद्ध चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने बड़ा जनहितकारी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष किए जाने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और बढ़ती जनसंख्या तथा अस्पतालों में मरीजों के बढ़ते दबाव के बीच चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा। उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। अस्पतालों के बाह्य एवं अन्तः रोगी विभागों में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 500 निःसंवर्गीय पदों पर होगा पुनर्नियोजन अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 500 निःसंवर्गीय पदों के सापेक्ष पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों का पुनर्नियोजन किया जाएगा। नियुक्ति वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से अनुबंध के आधार पर होगी। पुनर्नियोजन नियमित चिकित्साधिकारियों से पद भरे जाने अथवा एक वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, तक किया जाएगा। इसके बाद कार्य एवं आचरण, गुण-दोष तथा स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष-दर-वर्ष अवधि बढ़ाई जा सकेगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 70 वर्ष की आयु तक होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित नियुक्ति होने के बाद संबंधित निःसंवर्गीय पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। किसी भी स्थिति में पुनर्नियोजन के कुल पदों की संख्या 500 से अधिक नहीं होगी। कन्सलटेन्ट के रूप में देंगे सेवाएं पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों को कोई प्रशासनिक पद नहीं दिया जाएगा और न ही उन्हें संवर्गीय पदनाम मिलेगा। वे ‘कन्सलटेन्ट’ अथवा ‘परामर्शी’ के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। अस्पताल की आवश्यकता के अनुसार उन्हें आपातकालीन एवं आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में भी योगदान देना होगा। साथ ही, सैन्य सेवा से अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने वाले विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों को भी पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त चिकित्सकों की भांति पुनर्नियोजित किए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं, एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद 65 वर्ष तक पुनर्नियोजन की वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी। प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। अस्पताल में सरकारी नियमों के अंतर्गत उपलब्ध दवाओं की ही मरीजों के लिए संस्तुति की जा सकेगी। प्राइवेट प्रैक्टिस अथवा निर्धारित शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में पुनर्नियोजन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार अनुभवी सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का उपयोग नियमित नियुक्तियों के साथ किए जाने से प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को तत्काल मजबूती मिलेगी। योगी सरकार का यह निर्णय बढ़ती आबादी और मरीजों के दबाव के बीच सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।