samacharsecretary.com

परीक्षा में नकल पर DAVV का सख्त एक्शन, मोबाइल की जांच के लिए बनेगी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन कमेटी

 इंदौर  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में नकल प्रकरणों की जांच अब नई व्यवस्था के जरिए की जाएगी। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों से जब्त किए गए मोबाइल महीनों तक बंद पड़े रहने से उनकी बैटरी डिस्चार्ज हो जाती हैं। ऐसे में अनुचित संसाधनों की जांच समिति के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह रहती है कि मोबाइल में यह पता नहीं चल पाता कि विद्यार्थी ने परीक्षा के दौरान कितने प्रश्नों के उत्तर फोन देखकर लिखे थे। इससे नकल प्रकरणों पर उचित निर्णय लेने में देरी होती है। अब इस समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय अलग से मोबाइल जांच समिति बनाएगा। कार्यपरिषद ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय में सालभर स्नातक और स्नातकोत्तर की 780 से अधिक वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाएं होती हैं। इनमें औसतन 250 से 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। कई मामलों में विद्यार्थियों के पास गाइड, पाठ्यपुस्तक या अन्य सामग्री के पन्ने मिलते हैं। इन पन्नों के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि परीक्षा में किस तरह नकल की गई। इसलिए ऐसे मामलों में निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान होता है। फोन में क्या देखा, कितने सवालों के जवाब मिले सबसे ज्यादा परेशानी मोबाइल से जुड़े मामलों में आती है। परीक्षा केंद्र से जब्त मोबाइल विश्वविद्यालय में जांच होने तक लंबे समय तक बंद रखे जाते हैं। इस दौरान बैटरी खत्म हो जाती है। मोबाइल चालू नहीं होने पर समिति यह देख नहीं पाती कि विद्यार्थी ने फोन में क्या देखा और उससे कितने सवालों के जवाब लिखे। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि परीक्षा में मोबाइल लेकर आना ही नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद यदि प्रश्नपत्र हल करते समय किसी विद्यार्थी के पास मोबाइल मिलता है तो उड़नदस्ता या केंद्राध्यक्ष नकल प्रकरण बनाता है। इसी को देखते हुए नई समिति बनाई जा रही है। नई समिति का काम सिर्फ जब्त मोबाइल की तुरंत जांच कर नकल से जुड़े तथ्य जुटाना होगा। इससे प्रकरणों की जांच में तेजी आएगी।

MP को मिलेगी हाईस्पीड कनेक्टिविटी की सौगात, बैतूल-खंडवा फोरलेन से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक आसान होगी राह

इंदौर  बैतूल से खंडवा के बीच फोरलेन प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. यह प्रोजेक्ट इंदौर और नागपुर के बीच की दूरी को बेहद कम कर देगा. दोनों शहरों के बीच का सफर 6 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह परियोजना बैतूल-खंडवा-वडोदरा कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे मध्य प्रदेश की गुजरात और महाराष्ट्र से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी. इस फोरलेन के बनने से नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली, नांदेड़ जैसे शहर कनेक्ट होंगे. वहीं गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा जैसे बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. इसलिए यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के लिए अहम है, क्योंकि आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा।  इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में होगा बैतूल से खंडवा फोरलेन बनने से सबसे बड़ा फायदा इंदौर नागपुर रूट पर होगा. केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट दस्तावेज में इस कॉरिडोर को इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट, इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जोड़ने वाली कड़ी बताया गया है. इंदौर से पहले सीधे बैतूल तक का सफर होगा. इसके बाद बैतूल से नागपुर का सफर तय किय जाएगा. पहले इंदौर से नागपुर जाने में 13 से 14 घंटे का समय लगता था. क्योंकि पूरा रूट 2 लेन हाईवे था. यह नया मार्ग सीधे नेशनल NH-47, NH-753 और NH-52 जैसी बड़ी सड़कों को आपस में इंटरलिंक करदेगा. इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को इस अपग्रेडेशन से सीधी मदद मिलेगी. इस फोरलेन के बनने से पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो जाएगा. जिससे इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. इसलिए इंदौर से नागपुर और दक्षिण भारत के बीच का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा।  एमपी की गुजरात और महाराष्ट्र तक कनेक्टिविटी     मध्य प्रदेश: बैतूल खंडवा फोरलेन हाईवे से इंदौर, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी जैसे शहर सीधे कनेक्ट हो जाएंगे.      महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों के लिए भी राह आसान हो जाएगी.      गुजरात: इस प्रोजेक्ट से एमपी के खंडवा का सीधा कनेक्शन अहमदाबाद, वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों से भी हो जाएगा.  मध्य प्रदेश के शहरों को फायदा यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के भीतर एक मजबूत कनेक्टिविटी जाल तैयार करेगा, क्योंकि इससे एमपी के कई बड़े शहर आपस में कनेक्ट होंगे. बैतूल, छिंदवाड़ा और नागपुर की तरफ से आने वाला ट्रैफिक खंडवा होते हुए इंदौर और भोपाल की तरफ बेहद आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सकेगा. खंडवा, खरगोन और बड़वानी: निमाड़ अंचल के ये तीनों प्रमुख जिले इस हाईवे के जरिए सीधे बैतूल और छिंदवाड़ा से कनेक्ट हो जाएंगे।  सिंहस्थ-2028 में भी फायदा बैतूल-खंडवा-जुलवानिया फोरलेन से मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ की कनेक्टिविटी भी मजबूत हो जाएगी. उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के आयोजन के हिसाब से यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा. क्योंकि उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के मंधाता में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से प्रबंधित करने में मदद करेगा. जिससे सिंहस्थ में महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ से आने वाले यात्रियों को इस फोरलेन का फायदा होगा. इसलिए यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।  बैतूल-खंडवा फोरलेन को केंद्र की मंजूरी  बैतूल से खंडवा के बीच बनने वाले इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने जून 2026 में मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के लिए 4415.60 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. जिसकी कुल दूरी 233.653 किलोमीटर होगी. फिलहाल इसे 4 लेन में विकसित किया जाएगा. जबकि भविष्य में इसे 6 लेन बनाने की योजना है. ताजा अपडेट के मुताबिक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है. जिसे मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा. जनवरी 2027 से इसका काम शुरू होने की संभावना है. खास बात यह है कि सभी ब्लैक स्पॉट्स खत्म होंगे, जिससे गाड़ियां 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी. वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2029 के अंत तक या 2030 की शुरुआत में यह हाईवे पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। 

8th Pay Commission पर बड़ा सवाल, पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्टर का फायदा मिलेगा या नहीं? PM मोदी को पत्र

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग के लागू होने का केंद्रीय सरकारी कर्मचारी जितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उतना ही इंतजार देशभर के पेंशनर्स को भी है. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हुए 10 महीने से ज्‍यादा समय हो गया है और आयोग इस बीच काफी सारी एक्‍सरसाइज कर चुका है. फिलहाल देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकों का दौर जारी है।  इस बीच पेंशनर्स के एक संघ रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने 8th Pay Commission के ToR यानी टर्म ऑफ रेफरेंस के एक बिंदु पर आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र (Letter to PM Modi) लिखा है।  क्‍या पुराने पेंशनर्स को नहीं मिलेगा फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ? रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने मंगलवार, 7 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है. संघ को आशंका है कि OPS यानी ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम के तहत आने वाले पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ नहीं मिलेगा. एसोसिएशन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन की मांग की है. संगठन के अनुसार , करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें पेंशन संशोधन का लाभ मिलेगा या नहीं।  8th CPC के ToR में किस बात को लेकर है आपत्ति?  संघ की आपत्ति 8वें वेतन आयोग के ToR के प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर है. उनका कहना है कि मौजूदा ToR में पेंशन, NPS और UPS का उल्लेख है, लेकिन पुराने पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन को स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया है।  एसोसिएशन का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के ToR में 'revision of pre-retirement pension' का स्पष्ट उल्लेख था. संगठन ने छठे और 5वें वेतन आयोग के ToR में भी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख होने का दावा किया है।  वित्त मंत्री और वित्त सचिव को भी भेजा पत्र  एसोसिएशन ने वित्त मंत्री और वित्त सचिव को पहले पत्र भेजे जाने की बात कही है. संगठन के मुताबिक, अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है।  एसोसिएशन ने मांग की है कि ToR में स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन/फैमिली पेंशन के संशोधन पर भी सिफारिश का लाभ देगा।  जब तक औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक सरकार से प्रेस रिलीज या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की गई है. संगठन ने ये पत्र प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री, वित्त सचिव और DoPPW के सचिव को भी भेजा है।  पेंशन को लेकर डरने की जरूरत नहीं, यहां दूर करें कन्‍फ्यूजन    इस मसले पर कुछ जानकारों से बात की और मसले को समझने का प्रयास किया कि क्‍या वाकई ये डर वाजिब है. अगर हां तो सरकार या आयोग आगे क्‍या कर सकता है. 8वें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन में ToR में प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर संघ शंका में है. रिटायर्ड एम्‍प्‍लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव साधु सिंह से बात करने की कोशिश की, जो खबर लिखे जाने तक नहीं हो पाई है. फिर हमने दूसरे एक्‍सपर्ट्स से समझने की कोशिश की।  ऐसे मामलों के एक एक्‍सपर्ट ने समझाया कि आपत्ति क्‍यों है… उन्‍होंने कहा, ' 2(e) में लिखा है- Review the structure of Death-cum-Retirement Gratuity and Pension including NPS/UPS and outside NPS for the employees… यानी प्रावधान में पेंशन, ग्रेच्युटी, NPS/UPS और NPS के बाहर के कर्मचारियों का उल्लेख है, लेकिन एसोसिएशन का तर्क है कि इसमें 'existing pensioners' यानी मौजूदा पेंशनर्स, pre-2026 retirees यानी 2026 से पहले रिटायर होने वाले कर्मी, 'family pensioners' या 'revision of pre-retirement pension' जैसी स्पष्ट भाषा नहीं है. इसी को लेकर को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री से ToR संशोधन की मांग की है।  8वें वेतन आयोग के ToR को लेकर NDTV ने AINPSF के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल से समझना चाहा. उन्‍होंने इसी ToR में 2(f) के तीसरे प्‍वाइंट का जिक्र किया, जिसमें लिखा है- The Unfunded cost of non-Contributory Pension Schemes…'.  डॉ पटेल ने समझाया कि Unfunded Non Contributed के अंदर बिना कंट्रीब्‍यूशन वाले पेंशनर्स यानी NPS/UPS के अलावा वाले पुराने पेंशनर्स भी आ जाते हैं. दूसरी बात कि अगर 2(e) में पुराने पेंशनर्स का जिक्र नहीं है तो पुराने वर्किंग एम्‍प्‍लॉईज का भी अलग से जिक्र नहीं है. तो इसका मतलब ये न समझा जाए कि वे भी फिटमेंट फैक्‍टर के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। 

इजरायल चुनाव में नेतन्याहू पिछड़े, गादी आइजनकोट की याशार पार्टी को बढ़त; सर्वे में 25 सीटें

तेल अवीव इजरायल में आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सर्वे के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. सोमवार को जारी एक ओपिनियन पोल के मुताबिक, अगर आज चुनाव होते हैं तो पूर्व इजरायली सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की याशार पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है. सर्वे में नेतन्याहू की जीत-हार को लेकर भी बड़े दावे सामने आ रहे हैं।  सर्वे में याशार को 25 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 21 सीटों पर सिमटती दिख रही है. यह सर्वे इजरायल के मार्केट रिसर्च और पब्लिक ओपिनियन पोलिंग संस्थान मिडगैम ने चैनल 12 के लिए किया है. पिछले सर्वे के मुकाबले याशार को एक सीट का फायदा हुआ है, जबकि लिकुड की दो सीटें कम हुई हैं. इजरायल की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं।  विपक्षी गठबंधन को बहुमत से ज्यादा सीटों का अनुमान सर्वे के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की टुगेदर पार्टी को 13 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि, यह उसके हालिया सर्वे में सबसे कम आंकड़ा है और पिछली बार के मुकाबले पार्टी को दो सीटों का नुकसान हुआ है।  यायर गोलान की अगुवाई वाली डेमोक्रेट्स पार्टी 11 सीटों पर बनी हुई है. वहीं एविगडोर लिबरमैन की यिसराइल बेतेनु पार्टी को 8 सीटें मिलने का अनुमान है. यूनाइटेड टोरा यहूदी धर्म पार्टी को भी 8 और आर्येह डेरी की शास पार्टी को 7 सीटें मिल सकती हैं।  बेजलेल स्मोट्रिच और मोशे फेइग्लिन की अगुवाई वाले राइट-विंग धार्मिक जियोनिज्म और जेहुत गठबंधन को 6 सीटें मिलने का अनुमान है. ओफर विंटर की अमचा यिसराइल को 4 सीटें मिल सकती हैं।  इजरायल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अरब पार्टियों में जॉइंट लिस्ट को 7 और मंसूर अब्बास की यूनाइटेड अरब लिस्ट को 4 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट और अवी माओज की नोआम यिसराइल समेत कई पार्टियां 3.25 फीसदी के चुनावी थ्रेशोल्ड को पार करती नहीं दिख रही हैं।  पीएम पद की पसंद में भी आइजनकोट आगे राजनीतिक गुटों की बात करें तो विपक्षी खेमे को कुल 68 सीटें मिलने का अनुमान है. इनमें 57 सीटें यहूदी पार्टियों और 11 सीटें अरब पार्टियों की हैं. नेतन्याहू के खेमे को 52 सीटें मिलने का अनुमान है. स्मोट्रिच और विंटर की पार्टियों के चुनावी थ्रेशोल्ड पार करने से नेतन्याहू के खेमे को दो सीटों का फायदा हुआ है।  इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. ऐसे में मौजूदा सर्वे के आंकड़े विपक्ष को बढ़त देते हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए गठबंधन की तस्वीर अहम होगी प्रधानमंत्री पद के लिए भी नेतन्याहू पिछड़ते दिख रहे हैं. सर्वे में 42 फीसदी लोगों ने गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए ज्यादा उपयुक्त बताया, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 35 फीसदी लोग रहे. यानी आइजनकोट को नेतन्याहू पर 7 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली।  यह सर्वे ऐसे समय आया है जब 27 अक्टूबर के आम चुनाव के लिए पार्टियों ने अपनी उम्मीदवार सूची जमा कर दी है. आइजनकोट ने बेनेट की पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया है. वहीं ओफर विंटर ने भी स्मोट्रिच की पार्टी के साथ जाने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 

मध्य प्रदेश में कांग्रेस का मिशन 2028! 70 कमजोर सीटों की पहचान, भाजपा की 35 सीटों पर खास नजर

 भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए अब लगभग दो वर्ष ही बचे हैं। ऐसे में पिछले चुनाव में करारी हार झेल चुकी कांग्रेस ने उन सीटों पर अभी से जोर लगाना शुरू कर दिया है, जिन पर वह कभी नहीं जीती या एक-दो बार ही जीती है। ऐसी 70 सीटों की पहचान की गई है। पार्टी सबसे पहले इन विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर मतदाता सूची का सत्यापन करेगी। इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी के दौरे के बाद पार्टी इन सीटों पर फोकस करेगी। मतदाताओं के नाम, फोन नंबर सहित उनकी जानकारी संकलित की जाएगी, जिससे उनसे संपर्क किया जा सके। बता दें कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 सीटों में से 66 ही कांग्रेस को मिली थीं। कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती हैं ये विधानसभा सीटें भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट पर 1980 से भाजपा का कब्जा है। यहां पहले बाबूलाल गौर और पिछले दो बार से उनकी बहू कृष्णा गौर विधायक हैं। सागर की रहली विधानसभा सीट से भाजपा के गोपाल भार्गव 1985 से लगातार जीत रहे हैं। इंदौर-2 विधानसभा सीट 1993 से भाजपा के पास है। घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे पार्टी कार्यकर्ता महामंत्री एवं संगठन प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस, डॉ. संजय कामले ने कहा कि पार्टी ने ऐसी 70 विधानसभा सीटें चिह्नित की हैं, जिनमें प्रदर्शन कमजोर रहा है। पार्टी इन सीटों पर कभी नहीं जीती या अभी तक में एक-दो बार ही जीती हैं। इन सीटों पर सबसे पहले मतदाता सूची के सत्यापन के लिए अभियान चलाया जाएगा जो लगभग छह माह चलेगा। भाजपा के लिए 35 सीटों पर चुनौती भाजपा ने भी जनसंघ के समय से नहीं जीती या बहुत कम बार जीती 35 सीटों की पहचान की है। इन सीटों की जिम्मेदारी बड़े नेताओं को दी जाएगी। चार-चार गांवों का क्लस्टर गठित कर एक प्रभारी बनाया जाएगा जो कमजोरियों की पहचान कर दूर करने का प्रयास करेगा। दरअसल, भाजपा ने वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में खुद को मजबूत बनाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग रणनीति बनाई है। पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए "पन्ना प्रमुखों" को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर प्रभावी जाति समूहों एससी-एसटी व अन्य को साधने के लिए नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। मंत्रियों की तैनाती भी इन "कठिन" सीटों पर की गई है। संगठन के दिग्गज मंत्रियों और कोर ग्रुप के सदस्यों को प्रभारी बनाया गया है ताकि वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा जीत सकें। सीटें जो भाजपा के लिए हैं चुनौती गुना जिले की राघौगढ़ विधानसभा सीट पर 1977 से कांग्रेस का कब्जा है। सीधी जिले की चुरहट विधानसभा सीट से भाजपा सिर्फ दो बार जीत पाई है। भोपाल की उत्तर विधानसभा सीट वर्ष 1998 से कांग्रेस के पास है। कसरावद भीकनगांव में 2013 से लगातार कांग्रेस जीती है। बड़वानी के राजपुर से बाला बच्चन भी लगातार तीन बार से जीते हैं।  

छात्रों की पढ़ाई होगी आसान, ‘ई-ज्ञानसेतु’ YouTube चैनल पर मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण वीडियो कंटेंट; 9 सितंबर को शुभारंभ

ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल पर विद्यार्थियों को मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-वीडियो कंटेंट मंत्री परमार 9 सितंबर को करेंगे ई-ज्ञानसेतु YouTube चैनल का शुभारंभ उच्च शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में शासकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों से तैयार कराया गया है कंटेंट भोपाल  मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ई-वीडियो कंटेंट अब 9 सितंबर 2026 से e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध होंगे। ई- वीडियो कंटेंट के प्रकाशन का उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार द्वारा 9 सितंबर को शाम 5 बजे शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण Google Meet एवं e-GyanSetu YouTube Channel के माध्यम से होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 की भावना के अनुरूप तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मंत्री परमार के मार्गदर्शन में प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 2,305 वीडियो शूट किए जा चुके हैं, जिनमें से 954 वीडियो का एडिटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है । ई-वीडियो कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स एवं डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया गया है। वीडियो की शैक्षणिक एवं विषयगत गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ये वीडियो प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। वीडियो की प्रमाणिकता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार ई-कंटेंट का विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जाता है। सत्यापन के बाद ही वीडियो को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी तथा संस्कृत सहित क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए गए हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुँचाने में मदद मिलेगी। मंत्रालय में आयोजित बैठक में मंत्री परमार के समक्ष तैयार ई-कंटेंट वीडियो प्रदर्शित किए गए थे। बैठक में हुई चर्चा के दौरान मंत्री द्वारा वीडियो को शीघ्र e-GyanSetu YouTube Channel पर अपलोड एवं प्रकाशित किए जाने के निर्देश दिए गए। e-GyanSetu पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अध्ययन कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को विषयवस्तु को दोहराने, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझने तथा अपनी सीखने की गति के अनुसार अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी। ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।