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शिक्षा व्यवस्था सुधारने की नई पहल, बिहार के मॉडल स्कूलों में अधिकारी निभाएंगे शिक्षक की भूमिका

पटना बिहार में अब जिला स्तरीय अधिकारी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ शिक्षक की भूमिका में भी नजर आएंगे. राज्य के 700 मॉडल स्कूलों में अधिकारियों को संबद्ध किया जा रहा है. ये अधिकारी स्कूलों में पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी करेंगे. साथ ही हर सप्ताह कम से कम एक कक्षा खुद भी लेंगे. इस संबंध में सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिया गया है. शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रोशन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक सरस्वती विद्या निकेतन यानी मॉडल स्कूल से एक जिला स्तरीय पदाधिकारी को संबद्ध किया जाए. हर सप्ताह अधिकारी खुद लेंगे कक्षा संबद्ध किए गए अधिकारी नियमित रूप से मॉडल स्कूलों का निरीक्षण करेंगे. वे स्कूल की शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा भी करेंगे. जरूरत के अनुसार अधिकारियों को सुधार के लिए दिशा-निर्देश देना होगा. अधिकारी हर सप्ताह अपनी रुचि के विषय के अनुसार एक या उससे अधिक कक्षाएं खुद लेंगे. इसके अलावा वे पाठ्य-टीका, गृहकार्य और क्लासरूम ट्रांजेक्शन का भी अवलोकन करेंगे. अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि स्कूल में निर्धारित पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो. आधुनिक सुविधाओं का सही इस्तेमाल हो. विद्यार्थियों की उपस्थिति भी बेहतर रहे. पढ़ाई से लेकर अनुशासन तक पर नजर अधिकारी विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास और अनुशासन की स्थिति की समीक्षा करेंगे. वे नियमित उपस्थिति पर भी नजर रखेंगे. शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी. स्कूल की मूलभूत सुविधाओं की भी जांच की जाएगी. इसमें बिजली, रंग-रोगन, शौचालय और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के साथ बैठक भी होगी. इसमें स्कूल के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा की जाएगी. स्कूलों में नवाचार को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा. अंग्रेजी कौशल पर भी रहेगा फोकस मॉडल स्कूलों में विद्यार्थियों के अंग्रेजी कौशल को बेहतर बनाने के लिए विशेष कक्षाएं चलेंगी. अधिकारियों को डिबेट, लेखन और व्याकरण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है. कक्षा लेने वाले अधिकारी स्कूल की स्थिति और अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को देंगे. इस रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी स्कूल की व्यवस्था में जरूरी सुधार करेंगे. ई-शिक्षा कोष पर होगी स्कूलवार निगरानी संबद्ध अधिकारियों को ई-शिक्षा कोष पर स्कूलवार पंजीकृत किया जाएगा. अधिकारियों से मिलने वाली रिपोर्ट को जिला शिक्षा पदाधिकारी राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करेंगे. इस व्यवस्था के जरिए मॉडल स्कूलों में पढ़ाई, अनुशासन, शिक्षकों की उपस्थिति और आधारभूत सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाएगी.

पानी का संकट गहराया, 3 साल में बिगड़े हालात; गंगा-सिंधु बेसिन में भी भूजल तेजी से घटा

नई दिल्ली  दुनियाभर में भूजल का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर 34 प्रतिशत भूजल निगरानी केंद्रों पर जल स्तर सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत था। इस प्रकार महज एक साल के भीतर इस संकट में 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां भूजल स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच चुका है। तीन साल में तेजी से बिगड़े हालात वैश्विक स्तर पर पिछले तीन वर्षों के दौरान भूजल की स्थिति तेजी से खराब हुई है। वर्तमान में दुनिया के 65 प्रतिशत भूजल निगरानी केंद्रों पर जल स्तर सामान्य सीमा से बाहर चला गया है। वर्ष 2022 से 2025 के बीच भारत के अलावा अमेरिका, यूरोप, मेक्सिको, चिली, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भूजल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभाव से पिछले तीन वर्षों में दुनिया भर के ग्लेशियरों से 1400 गीगाटन बर्फ पिघलकर नष्ट हो चुकी है। पिछले पांच वर्षों में पानी की किल्लत और उससे जुड़ी समस्याओं के कारण हुई कुल मौतों में से 80 प्रतिशत मौतें एशिया और अफ्रीका में दर्ज की गईं। वहीं वर्ष 2021 से 2025 के चार वर्षों के दौरान गंगा और सिंधु नदी के ऊपरी बेसिन क्षेत्रों में जमीन के नीचे जमा पानी में लगातार कमी देखी गई है। नदियों के लिए सबसे सूखा वर्ष रहा 2025 वर्ष 2025 नदियों के जल प्रवाह के लिहाज से भी अत्यंत प्रतिकूल साबित हुआ है। इस दौरान दुनिया के 36 प्रतिशत नदी क्षेत्रों में पानी का बहाव सामान्य से कम रहा। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1991 से लेकर 2025 तक की समयावधि में यह नदियों के लिए अब तक का सबसे सूखा वर्ष दर्ज किया गया।

किसानों के लिए नई योजना, ₹6 लाख तक कर्ज पर सरकार देगी 5% ब्याज अनुदान

लखनऊ  किसानों के बहुउपयोगी योजना के रूप में उभर कर सामने आई किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ प्रदेश के लाखों किसानों ने उठाया, लेकिन केसीसी का लाभ लेने वालों में डिफाल्टरों की संख्या बढ़ गई, जो बैंक और शासन दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा था। ऐसे में योगी सरकार ने इसके समाधान और किसानों को सुविधा के लिए मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की शुरूआत की है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है। क्या है मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की घोषणा की थी, जिसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की ओर से किसानों को कम ब्याज पर लोन दिया जाता है। सरकार का मानना है रियायती ब्याज दर पर ऋण प्राप्त होने से किसान ऋणमाफी की मानसिकता से बाहर निकलेंगे और दीर्घकालीन पूंजी निवेश कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित होंगे। ऋण पर पांच प्रतिशत का अनुदान मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण सिर्फ छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाएगा। राज्य सरकार ऋणों पर पांच प्रतिशत अनुदान देगी। यह अनुदान उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो निर्धारित अवधि के अंदर किस्तें अदा कर रहे हैं। बता दें कि नाबार्ड उच्च ब्याज दर (11 से 11.50 प्रतिशत) पर ऋण देता है, जिसका भुगतान कई बार किसान नहीं कर पाते थे। ऐसे में प्रस्तावित योजना के अंतर्गत लघु किसानों को छह लाख रुपये तक का ऋण छह प्रतिशत रियायती वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाएगा मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना की पात्रता योगी सरकार किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में ही यह योजना लॉन्च की गई। योजना का लाभ लेने के लिए किसान को उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है ओर साथ ही उसके पास कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए और सरकारी रिकॉर्ड में जमीन का का दस्तावेज हों। पांच साल से अधिक ऋण अवधि का विकल्प ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के माध्यम से चलाई जाएगी। बैंक द्वारा किसानों को दीर्घकालिक ऋण न्यूनतम ब्याज पर दिया जाएगा। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार ब्याज पर अनुदान देगी, जिससे खेती किसानी के लिए लिया जाने वाला यह ऋण काफी सस्ता पड़ेगा। ऋण पांच साल और उससे अधिक अवधि के लिए दिया जाएगा। बता दें कि 15 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक में लघु एवं सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक ऋण की विशेष सुविधा देने के लिए बनाई मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की तैयारी, गांवों में लगे सोलर सिस्टम के आधार पर तय होंगे ‘सोलर विलेज’

पटना  बिजली कंपनी अब सोलर विलेज योजना को आगे लाने की तैयारी में है। किसी गांव में कितनी संख्या मे सोलर सिस्टम काम रहे उनकी संख्या के आधार पर गांवों की रैंकिंग की जाएगी। रैकिंग के आधार पर सोलर विलेज यानी सौर ग्राम तय होंगे। शीर्ष के सोलर विलेज को बिजली कंपनी के स्तर से इंसेंटिव यानी प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। सोलर सिस्टम की होगी गणना इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार गांवों में स्थित स्कूल, घर की छतों और अगर स्वास्थ्य केंद्र है तो वहां लगे सोलर सिस्टम की गिनती सोलर विलेज तय किए जाने को लेकर होगी। प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली सूर्य घर योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भी घर की छतों पर सोलर सिस्टम लगने शुरू हुए हैं। इनकी गिनती सोलर विलेज तय करने में महत्वपूर्ण होगी। सभी सिस्टम अब ग्रिड कनेक्टेड हैं। वर्तमान में प्राय: सभी गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट काम कर रहे हैं इसलिए सोलर विलेज योजना में इसकी गणना नहीं होगी। अधिक से अधिक लगे सोलर सिस्टम बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारी ने बताया कि किसी गांव को पूरी तरह से सोलर विलेज के रूप में विकसित करना संभव नहीं है। पर यह कोशिश है कि गांव में अधिक से अधिक सोलर सिस्टम लगे। अब जो भी सिस्टम लग रहा वह ग्रिड कनेक्टेड लग रहा। धरनई गांव को बनाया गया था पहला सोलर विलेज वर्ष 2014 में बिहार के एक गांव को सोलर विलेज के रूप में विकसित किए जाने का प्रयोग किया गया था। उस समय लोग सौर ऊर्जा को नकली बिजली कहते थे। जहानाबाद जिले के धरनई गांव में कुछ संस्थाओं के माध्यम से सोलर माइक्रो ग्रिड की स्थापना की गयी थी। पर बाद के सालों में रख रखाव के अभाव में यह प्रोजेक्ट बंद हो गया इसके अलावा हाल ही में नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड स्थित डोईया गांव को साेलर माडल गांव के रूप में विकसित किया गया है। गुजरात में है देश का पहला सोलर विलेज गुजरात का मोढेरा गांव देश का पहला सोलर विलेज है। यहां 24 घंटे सौर ऊर्जा से बिजली की आपूर्ति होती है। सोलर इनर्जी की तकनीक ग्राउंड माउंटेड सोलर पावर प्लांट और बैट्री इनर्जी स्टोरेज सिस्टम यहां लगा है। सभी घरों की छत पर सोलर पैनल लगे हुए हैं।  

PNS जुल्फिकार हाईजैक प्लान: अलकायदा के साथ मिलकर अमेरिकी-भारतीय जहाजों पर हमले की थी तैयारी

इस्लामाबाद पाकिस्तानी नौसेना युद्धकाल में ही नहीं, शांतिकाल में भी पूरी दुनिया के लिए खतरा है। 2014 में तो पाकिस्तानी नौसेना के बागी अफसरों ने अल कायदा आतंकवादियों के साथ मिलकर परमाणु हथियारों से लैस एक युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश की थी। गनीमत रही कि उनकी यह कोशिश नाकाम हो गई और बागी अफसर पकड़े गए। नहीं तो उनकी योजना युद्धपोत को अगवा कर उसमें तैनात मिसाइलों से अरब सागर में तैनात भारतीय और अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला करने की थी। अगर ऐसा होता तो यह किसी बड़े युद्ध की शुरुआत हो सकती थी। पीएनएस जुल्फिकार को अगवा करने की कहानी पाकिस्तानी युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश 2014 में की गई थी। इस घटना का विस्तार से वर्णन स्टीव कोल की 2018 की बेस्टसेलर पुस्तक 'डायरेक्टोरेट एस' में किया गया है। इसकी योजना पाकिस्तानी नौसेना के दो कट्टरपंथी अधिकारी लेफ्टिनेंट जीशान रफीक और ओवैस जखरानी ने बनाई थी, हालांकि इसमें दर्जनों दूसरे अधिकारी और नौसैनिक शामिल थे। इन दोनों अधिकारियों का संबंध अल कायदा से था। उस समय पीएनएस जुल्फिकार पाकिस्तानी नौसेना का सबसे आधुनिक युद्धपोत था, जो चीन में निर्मित 3,144 टन वजनी चार टाइप एफ-22पी श्रेणी के फ्रिगेटों में से पहला था। पीएनएस जुल्फिकार से अमेरिकी युद्धपोत पर हमले की थी प्लानिंग इन दोनों की योजना चालक दल और कप्तान को बंधक बनाकर युद्धपोत का अपहरण करना ही नहीं था। बल्कि, इन दोनों ने युद्धपोत पर तैनात मिसाइलों से हमला कर अमेरिकी नौसेना के जहाज को डुबानी की भी प्लानिंग की थी। इनके निशाने पर अमेरिकी युद्धपोत यूएसएनएस सप्लाई था, जो एक फार्स्ट कॉम्बेट सपोर्ट शिप है। इसका इस्तेमाल मिशन पर तैनात अमेरिकी नौसेना के दूसरे युद्धपोतों को ईंधन, हथियार और खाने की डिलीवरी करने के लिए किया जाता है। उस समय यह जहाज उत्तरी अरब सागर में तैनात था, जो अमेरिकी नौसेना के एक फ्रिगेट के लिए सप्लाई लेकर जा रहा था। पीएनएस जुल्फिकार पर हथियारों की सप्लाई बागी अधिकारियों ने पीएनएस जुल्फिकार पर कब्जे के लिए छोटे हथियार और ऑटोमेटिक रायफलों को बैग में भरकर पहले ही अंदर पहुंचा दिया था। उन्होंने मिसाइल रूम और ऑपरेशन रूम की डुप्लिकेट चाभी भी बनवा ली थी। उन्हें एक और कमजोरी का पता था कि पीएनएस ज़ुल्फिकार पर मौजूद तोप और C-802 मिसाइलों को जहाज के मुख्य ऑपरेशन रूम के बाहर से ही तैयार और लॉन्च किया जा सकता था। C-802 मिसाइलों को दूसरे डेक से तब तक संचालित किया जा सकता था जब तक कि मिसाइलों का आटोमेटिक सिस्टम बंद रहता था। परमाणु हथियार से लैस था पीएनएस जुल्फिकार पीएनएस जुल्फिकार कोई साधारण जहाज नहीं था। यह पाकिस्तान की नौसेना सामरिक बल कमान का हिस्सा था, जिसे 2012 में स्थापित किया गया था। उस समय पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार दागने में सक्षम कोई पनडुब्बी नहीं थी, लेकिन 19 और 21 दिसंबर 2012 को इस फ्रिगेट ने कथित तौर पर C-802 क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया। इन मिसाइलों में दो से चार किलोटन की क्षमता वाला छोटा परमाणु हथियार भी लगाया जा सकता था, जो 1945 में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की विस्फोटक क्षमता का लगभग 15 से 25 प्रतिशत था। हमले के लगभग छह सप्ताह बाद, भारत की खुफिया एजेंसी (R&AW) ने कराची से मिली जानकारी के आधार पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सूचित किया कि हमले के समय पीएनएस जुल्फिकार पर एक परमाणु हथियार मौजूद था गोलीबारी में मारे गए मुख्य अपहरणकर्ता 6 सितंबर 2014 की सुबह कराची में, लेफ्टिनेंट रफीक और जखरानी पीएनएस जुल्फिकार पर सवार हुए। उनके कुछ साथी नौसैनिक वर्दी में एक छोटी नाव में बंदरगाह की ओर बढ़े। एक सतर्क संतरी ने उन्हें देख लिया और गोलीबारी शुरू हो गई। जब गोलीबारी रुकी, तो रफीक और जखरानी समेत तीन हमलावर मारे गए। उन्हें अपने हथियारों का इस्तेमाल करने या फ्रिगेट की तोपों से फायरिंग करने का मौका नहीं मिला। 5 पाकिस्तान नौसैनिको को मौत की सजा मिली इस साजिश में शामिल पांच जीवित पाकिस्तानी नौसेना अधिकारियों को मार्च 2016 में एक गुप्त सैन्य मुकदमे के बाद नौसेना न्यायाधिकरण द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी। इनमें सब-लेफ्टिनेंट हम्माद अहमद, इरफानुल्लाह, मोहम्मद हम्माद, अरसलान नज़ीर और हाशिम नसीर शामिल थे। 2024 में उनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी गई थी। उनके वर्तमान ठिकाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

अमेरिका के F-35 फाइटर जेट के पार्ट्स हांगकांग भेजे गए, पेंटागन और कांग्रेस ने शुरू की जांच

 वॉशिंगटन ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका ले जाए जा रहे F-35 फाइटर जेट के बेहद संवेदनशील पुर्जों वाली एक खेप को हांगकांग भेज दिया गया। इस घटना के बाद अमेरिका ने जांच शुरू कर दी है, क्योंकि आशंका है कि ये पुर्जे चीनी अधिकारियों के हाथ लग सकते थे। पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिपमेंट में F-35 का कैनोपी शामिल था और ये एयरक्राफ्ट के स्टील्थ सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। यह सामान एक ब्रोकर के जरिए ले जाया जा रहा था लेकिन यह साफ नहीं है कि शिपमेंट को असल में कहां भेजा गया या ये पार्ट्स अभी किसके पास हैं। मामले की जांच शुरू इस घटना के बाद पेंटागन और कांग्रेस, दोनों ने ही जांच शुरू कर दी है। जून में अमेरिकी विदेश विभाग और पेंटागन के अधिकारियों ने कांग्रेस की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम कमेटियों के स्टाफ को जानकारी देना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि ये ब्रीफिंग अभी भी जारी हैं और आगे भी और बैठकें होने की उम्मीद है। F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने पुष्टि की कि उसे F-35 लाइटनिंग II के पार्ट्स से जुड़ी शिपमेंट की समस्या के बारे में जानकारी थी। अमेरिकी अधिकारी इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर इन पार्ट्स को वापस लाने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करने पर काम कर रहे हैं। क्यों अहम हैं ये पुर्जे यह गायब हिस्सा पायलट के कॉकपिट के लिए सिर्फ एक सुरक्षा कवच से कहीं ज्यादा है। F-35 का कैनोपी कॉकपिट के ऊपर लगा एक ऐक्रेलिक बबल है जिस पर पारदर्शी रडार-एब्जॉर्बिंग मटीरियल की एक पतली परत चढ़ी होती है और यह कोटिंग विमान के रडार सिग्नेचर को कम करके उसके स्टील्थ डिजाइन का एक हिस्सा बनती है। समय के साथ कोटिंग खराब हो सकती है, जिसका मतलब है कि जैसे-जैसे F-35 फ्लीट बढ़ेगी, कैनोपी की मरम्मत या उन्हें बदलने की जरूरत होगी। अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए 1,300 से ज्यादा फाइटर जेट बनाए जा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में F-35 के लिए मेंटेनेंस की सुविधाएं तो हैं लेकिन अभी उनमें से किसी में भी इसकी कैनोपी की मरम्मत करने की क्षमता नहीं है। F-35 प्रोग्राम पुर्जों को स्टोर करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और उनकी मरम्मत करने के लिए दुनिया भर में फैली सुविधाओं के नेटवर्क पर निर्भर करता है। इस विमान को बनाने वाली कंपनी, लॉकहीड मार्टिन, प्रोग्राम की पूरी सप्लाई चेन को मैनेज करती है और पुर्जों को लाने-ले जाने के लिए कमर्शियल शिपिंग कंपनियों की मदद लेती है। कंपनी ने क्या कहा? कंपनी का कहना है कि सुरक्षा कारणों से वह अलग-अलग शिपमेंट के बारे में बात नहीं कर सकती लेकिन एयरक्राफ्ट के पार्ट्स की आवाजाही से जुड़े अमेरिकी नियमों का पालन करती है। कंपनी ने कहा, "हमारी टीमें F-35 प्रोग्राम की विश्वसनीयता और हमारे सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर शिपमेंट को पूरी सावधानी और सुरक्षा उपायों के साथ संभालती हैं।" यह ताजा घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी सरकार की F-35 के स्पेयर पार्ट्स को ट्रैक करने की क्षमता को लेकर लंबे समय से चिंताएं बनी हुई हैं। सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) की 2023 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि मई 2018 से एक मुख्य ठेकेदार ने 85 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 1 मिलियन से ज्यादा F-35 स्पेयर पार्ट्स खो दिए थे। निगरानी संस्था के अनुसार, F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने उन नुकसानों में से 2 प्रतिशत से भी कम की समीक्षा की थी। GAO ने यह भी पाया कि अक्टूबर 2022 तक 66 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 900,000 से ज्यादा अतिरिक्त पार्ट्स की जानकारी समीक्षा के लिए प्रोग्राम ऑफिस को नहीं दी गई थी। यह समस्या कुछ हद तक F-35 के ग्लोबल स्पेयर-पार्ट्स पूल के मैनेजमेंट के तरीके से जुड़ी है। पार्ट्स पेंटागन के होते हैं, जबकि मुख्य कॉन्ट्रैक्टर ज्यादातर इन्वेंट्री को मैनेज करते हैं, जिससे सरकार के लिए उनकी लोकेशन और नुकसान का पता लगाने में कमियां रह जाती हैं। GAO ने कहा कि यह ग्लोबल पूल अमेरिका और विदेशों में 50 से ज्यादा जगहों पर फैला हुआ है। जून 2026 की एक रिपोर्ट में GAO ने कहा कि पेंटागन को अभी भी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और कॉन्ट्रैक्टर्स पर ज्यादा निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ेगा आपदाओं का खतरा? वैज्ञानिक टापियो श्नाइडर ने दी नई चेतावनी

नई दिल्ली जलवायु वैज्ञानिक टापियो श्नाइडर ने कहा है कि शुरुआती चेतावनी प्रणालियों का दायरा केवल बारिश की घटनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें नेपाल में अचानक आई बाढ़ जैसी आपदाओं की वजहों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ मिनट पहले भी चेतावनी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की जान बचा सकती है। अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) में पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग के प्रोफेसर श्नाइडर छात्रों को संबोधित करने और एक परिचर्चा में हिस्सा लेने के लिए अशोक विश्वविद्यालय पहुंचे थे। नेपाल बाढ़ में 1200 से अधिक लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को ऊंचाई वाले क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद आई भीषण बाढ़ के कारण मलबा तिब्बत से बहकर मध्य नेपाल तक पहुंचा, जिससे 1,200 से अधिक लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग अब भी लापता हैं। श्नाइडर ने कहा, 'शुरुआती चेतावनी प्रणालियां महत्वपूर्ण हैं। हमें शायद इनका दायरा बारिश के कारण होने वाली घटनाओं से आगे बढ़ाकर ऐसी घटनाओं तक भी करना चाहिए, ताकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को कम से कम कुछ मिनट पहले चेतावनी मिल सके और इस तरह कुछ लोगों की जान बचाई जा सके।' उन्होंने कहा कि जलवायु गर्म होने के साथ बर्फ पिघल रही है और ऐसी घटनाएं और बढ़ने की आशंका है 'हालांकि हर घटना के तात्कालिक कारण अलग-अलग होंगे।' वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि जलवायु वैज्ञानिक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है और यह 'अपरिहार्य' है कि दुनिया को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि वाले एक दशक का सामना करना पड़ेगा। श्नाइडर 'क्लाइमेट मॉडलिंग अलायंस' का भी नेतृत्व करते हैं। यह कैलटेक, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा अप्लाइड गणितज्ञों का गठबंधन है, जो पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का एक नया मॉडल विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की टीम 'आधुनिक कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर का अधिकतम उपयोग करने और उपलब्ध आंकड़ों का ज्यादा व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करने' की दिशा में काम कर रही है। भारत में वैश्विक तापमान वृद्धि का दिख रहा प्रभाव श्नाइडर ने कहा कि वायु गुणवत्ता में सुधार के प्रयास तेज होने के बावजूद भारत में वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभाव और अधिक देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में पहले ही अत्यधिक गर्म दिनों और अत्यधिक बारिश की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। भारत में बारिश का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल होने के मुद्दे पर उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जिन्हें अन्य बड़े पैमाने के मॉडल की तुलना में चलाना काफी सस्ता हो। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के समूह ऐसे मॉडल विकसित कर सकते हैं और उन्हें भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के साथ इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

जापान के एयर चीफ ने की तेजस की तारीफ, बोले- भारत के तकनीकी नवाचार और ‘मेक इन इंडिया’ का प्रतीक

नई दिल्ली  भारत-जापान द्विपक्षीय वायु रक्षा अभ्यास 'वीर गार्जियन 2026' के तहत जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरी। इस बीच जापान के एयर चीफ ने इंडियन आर्मी के चीफ का आभार व्यक्त किया है। मेरे लिए सम्मान की बात जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने कहा कि एयर चीफ मार्शल सिंह, आज आपके साथ होना मेरे लिए सम्मान की बात है, और मैं आपके गर्मजोशी भरे स्वागत और मेहमाननवाज़ी के लिए अपना आभार व्यक्त करना चाहता हूं। तेजस में उड़ान भरने के इस अमूल्य अवसर के लिए मैं बहुत आभारी हूं। तकनीकी नवाचार का प्रतीक उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी रक्षा क्षमताओं से बना विमान होने के नाते, तेजस भारत के तकनीकी नवाचार का प्रतीक है और 'मेक इन इंडिया' पहल को साकार करता है। उड़ान के दौरान, मैंने उन कई लोगों के प्रयासों के बारे में सोचा सेना और उद्योग दोनों में जिन्होंने इसके विकास में योगदान दिया। शक्तिशाली प्रतीक के रूप में भी याद रखूंगा उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव के माध्यम से, मुझे भारतीय वायु सेना में उपलब्ध उत्कृष्ट प्रशिक्षण वातावरण और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (कोकू जीताई) के लिए इस अभ्यास से मिलने वाले जबरदस्त लाभ का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ। मैं इसे न केवल एक वास्तव में अमूल्य अनुभव के रूप में याद रखूंगा, बल्कि हमारे दोनों वायु सेनाओं के बीच कई वर्षों से बने भरोसे, विश्वास और दोस्ती के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में भी याद रखूंगा। दूसरा द्विपक्षीय लड़ाकू अभ्यास उन्होंने आगे कहा कि 'वीर गार्जियन' हमारी सेनाओं के बीच दूसरा द्विपक्षीय लड़ाकू अभ्यास है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह भारत में कोकू जीताई लड़ाकू विमानों की पहली तैनाती है। कई वर्षों से, हमने रक्षा सहयोग और अभ्यासों का लगातार विस्तार किया है। 2018 में यहां आयोजित हमारे पहले द्विपक्षीय अभ्यास 'शिन्यू मैत्री' के बाद से, भारत में हमारे लड़ाकू विमानों की तैनाती एक लंबे समय से चली आ रही इच्छा रही है।

मानसून की विदाई से पहले मौसम का पलटवार, UP-दिल्ली समेत 13 राज्यों में तेज बारिश और तूफान की चेतावनी

 नई दिल्ली मानसून के जाते-जाते मौसम विभाग ने एक बार फिर से मुश्किल बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज  यानी 21 सितंबर को यूपी, दिल्ली समेत 13 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। वहीं, पहाड़ी राज्यों के कुछ इलाकों में लैंडस्लाइड की चेतावनी दी गई है। वहीं, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। किसानों और मछुआरों को अलर्ट रहने की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा इस तेज आंधी के चलते कुछ इलाकों में बड़े-बड़े वृक्ष धाराशायी हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ राज्यों में किसानों के फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इस बीच बंगाल की खाड़ी से चलने वाली तूफानी हवाएं पूर्वी भारत के राज्यों में लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। वहीं, राजस्थान के लोगों के लिए आज विशेष अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आस-पास के इलाकों में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेस मौजूद है। इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे पूर्वी राजस्थान के ऊपर ऊपरी हवाओं में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। तो चलिए आपलोगों को बताते हैं देश के अन्य राज्यों में आज  यानी 21 सितंबर को मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम जिलावार भी मौसम का हाल बताने जा रहे हैं… देश के 13 राज्यों में भारी बारिश-आंधी की चेतावनी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज  यानी 21 सितंबर को देश के 13 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक की तेज आंधी चलने का अलर्ट है। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों की यात्रा से पहले मौसम विभाग का अपडेट जरूर पढ़ लीजिए नहीं तो परेशानी में फंस सकते हैं। दिल्ली में आज  मौसम कैसा रहेगा दिल्ली(21 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक दिल्ली में आज  यानी 21 सितंबर को दिल्ली में हल्की बारिश और मध्यम गति की हवा की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है। वहीं, दिल्ली में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस जाएगा। यूपी में आज  मौसम कैसा रहेगा यूपी(21 सितंबर-हल्की बारिश का अलर्ट): गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, मथुरा, मोरादाबाद, आगरा, अलीगढ़, कानपुर, मिर्जापुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, जौनपुर, सोनभद्र, कुशीनगर, महाराजगंज, प्रयागराज और सुल्तानपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, लखनऊ में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। बिहार में आज  मौसम कैसा रहेगा बिहार (21 सितंबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, गया, जहानाबाद, भोजपुर, पटना, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, भागलपुर, किशनगंज, मुंगेर और खगड़िया में बारिश और आंधी का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। वहीं, पटना में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा। झारखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा झारखंड (21-22 सितंबर-तेज बारिश-आंधी का अलर्ट): रांची, रामगढ़, खूंटी, बोकारो, चतरा, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, पलामू, दुमका, पलामू, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह और गुमला में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। उत्तराखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा उत्तराखंड (21 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, ऋषिकेश, पौड़ी गढ़वाल, चमोली, हरिद्वार और टिहरी गढ़वाल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी है। देहरादून में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहेगा। हिमाचल में आज  मौसम कैसा रहेगा हिमाचल (21 सितंबर-बारिश-तूफान का अलर्ट): किन्नौर, मंडी, ऊना, चंबा, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कांगड़ा में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, मनाली में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। जम्मू-कश्मीर में आज  मौसम कैसा रहेगा जम्मू-कश्मीर (21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): पुंछ, बारामूला, किश्तवाड़, रियासी, गांदरबल, उधमपुर, रामबन, शोपियां, बांदीपोरा और जम्मू में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, श्रीनगर में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमा 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। पश्चिम बंगाल में आज  का मौसम कैसा रहेगा पश्चिम बंगाल(21-22 सितंबर-बारिश-आंधी की संभावना): हावड़ा, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, अलीपुर द्वार, दार्जिलिंग, कूचबिहार, दुर्गापुर, बीरभूम और कोलकाता में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का अलर्ट है। वहीं, कोलकाता में आज  यानी 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक पहुंचेगा और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। पंजाब में आज  मौसम कैसा रहेगा पंजाब (21 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): फिरोजपुर, संगरूर, होशियारपुर, कपूरथला, चंडीगढ़, संगरूर, लुधियाना, अमृतसर, गुरदासपुर, बठिंडा, बरनाला और फरीदकोट में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। राजस्थान में आज  मौसम कैसा रहेगा राजस्थान (21 सितंबर-भारी बारिश की संभावना): जयपुर, उदयपुर, चुरू, बारां, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, दौसा, चुरू, भरतपुर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, जैसलमेर और अलवर में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे … Read more