samacharsecretary.com

यूपीआईटीएस के सांस्कृतिक मंच पर दिखी प्रदेश की समृद्ध विरासत

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 के चौथे दिन कारोबार और उद्योग के साथ प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी आकर्षण का केंद्र रही। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की लोक एवं शास्त्रीय परंपराओं की विविधता को मंच पर जीवंत किया। वाराणसी के पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र की सितार प्रस्तुति ने शास्त्रीय संगीत की मधुरता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। लखनऊ की सबीना सैफी ने सुगम संगीत की प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय बनाया। नोएडा की निशा केसरी की कथक प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं और लयकारी का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। पीलीभीत के राजनेश राणा द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक थारू जनजातीय नृत्य ने प्रदेश की लोक एवं जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान को मंच पर प्रस्तुत किया। इसके साथ ही सूफी बैंड की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में संगीत की विविध रंगत जोड़ी और दर्शकों को देर तक बांधे रखा। यूपीआईटीएस के सांस्कृतिक मंच पर आयोजित इन प्रस्तुतियों ने व्यापारिक आयोजन को कला, संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का काम किया। देश-विदेश से आए आगंतुकों और प्रदर्शकों को उत्तर प्रदेश की विविध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने और अनुभव करने का अवसर मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि यूपीआईटीएस केवल व्यापार और निवेश का मंच नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की कला, संस्कृति, परंपरा और रचनात्मक प्रतिभाओं को व्यापक मंच देने वाला आयोजन भी है।

कक्षा 6 सें 8 के शिक्षण को प्रभावी बनाने पर जोर, कक्षाओं के अवलोकन और विद्यार्थियों के अनुभवों से जुड़ेगा शिक्षण

भोपाल राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ)-2023 और नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के अनुरूप कक्षा 6 से 8 की शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य स्रोत समूह (एसआरजी) का चार दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण सोमवार को भोपाल स्थित आइकफ आश्रम में प्रारंभ हुआ। प्रशिक्षण में गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों के 153 एसआरजी सदस्य भाग ले रहे हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के पाठ्यक्रम कक्ष के विषय विशेषज्ञों के साथ सहयोगी संस्था पीपल द्वारा प्रशिक्षण में अकादमिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करती है, जो विद्यार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करे। इसी दृष्टि को साकार करने के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न स्तरों और विषयों में आवश्यक बदलावों को दिशा दी गई है। कक्षा 6 से 8 के स्तर पर विद्यार्थियों की मूलभूत दक्षताओं को सुदृढ़ करते हुए उन्हें आगे के अध्ययन के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है। विकसित कक्षा 7 की नवीन NCERT पाठ्यपुस्तकों में विषय-वस्तु की संरचना और शिक्षण-अधिगम के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण संशोधन अंगीकृत किए गए हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य इन बदलावों, पाठ्यपुस्तकों की दृष्टि और उनके प्रभावी शिक्षण को समझने में एसआरजी सदस्यों की क्षमता को मजबूत करना है। पहले दिन राष्ट्रीय पाठ्यचर्या और नवीन पाठ्यपुस्तकों पर हुई चर्चा प्रतिभागियों के परिचय और प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों की जानकारी के साथ पहले दिन प्रशिक्षण की शुरुआत हुई। इसके बाद गत वर्ष के प्रशिक्षण का पुनरावलोकन, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 की अनुशंसाओं तथा नवीन पाठ्यपुस्तकों की विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों और विद्यार्थियों के सीखने को बेहतर बनाने के लिए अपनाई गई नई शिक्षण दृष्टि को समझने पर विशेष जोर दिया गया। इसके बाद गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के विषयवार सत्रों में अनुभवात्मक शिक्षण पर कार्य किया गया। गणित में भिन्न के साथ कार्य करने, विज्ञान में विद्युत परिपथ एवं उसके घटकों तथा सामाजिक विज्ञान में मौसम को समझने जैसे विषयों को गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया। साथ ही, वास्तविक कक्षा के अवलोकन के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को कक्षा की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। अगले तीन दिन विविध विषयों पर होगी चर्चा प्रशिक्षण के पहले दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शिक्षण सहायक के रूप में उपयोग करने पर चर्चा हुई। अगले तीन दिनों में आनंदमय शिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिकता एवं मूल्य, कौशल बोध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दीक्षा एवं आईगॉट पोर्टल तथा पाठ योजना निर्माण सहित विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। राज्य शिक्षा केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के बाद प्रदेश के 10 संभागों में 1,932 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। इन मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से प्रदेश के लगभग 76 हजार शिक्षकों तक नई शिक्षण दृष्टि और पाठ्यपुस्तकों की समझ से संबंधित जानकारी प्रशिक्षण के माध्यम से पहुंचाई जाएगी। 

श्रम संहिताएं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में निभाएंगी महत्वपूर्ण भूमिका : अनिल राजभर

ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताएं देश और प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उद्योग जगत के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए दोनों के हितों और भविष्य को ध्यान में रखकर ही नीतियां एवं निर्णय लिए जा रहे हैं। अनिल राजभर ने यह बात सोमवार को उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के चौथे दिन आयोजित ‘विशेष श्रम संहिताएं’ सत्र को संबोधित करते हुए कही।  श्रम मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार दो वर्षों से देश में नए कारखानों के पंजीयन के मामले में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बड़ी संख्या में नए कारखाने पंजीकृत हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार ने उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया, कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार हुआ, पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की गई और उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया गया। इन प्रयासों का परिणाम प्रदेश में बढ़ते निवेश और रोजगार के अवसरों के रूप में सामने आ रहा है। मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार के सामने हमेशा यह चुनौती रही है कि श्रमिकों के हितों को प्रभावित किए बिना उद्योग जगत का मनोबल बनाए रखा जाए। इसी उद्देश्य से सरकार श्रमिकों और उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि बिना उद्योग के श्रमिकों और बिना श्रमिकों के उद्योग की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए दोनों के हितों, भावनाओं और भविष्य को समझते हुए निर्णय लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चार श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रम कानूनों में सुधार और सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने संहिताओं के संबंध में विभिन्न हितधारकों से संवाद किया है और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ भी विचार-विमर्श किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है। श्रम मंत्री ने कहा कि सरकार ने उद्योग जगत के लिए अपने दरवाजे हमेशा खुले रखे हैं। यदि किसी उद्योग की कोई समस्या है या उसे सरकार से सहयोग की आवश्यकता है तो विभागीय अधिकारी और सरकार उसके समाधान के लिए उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति और आज विकास के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। इस परिवर्तन में उद्योग जगत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने निवेशकों और उद्यमियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास का लक्ष्य उद्योग जगत के सहयोग और सहभागिता के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। अनिल राजभर ने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां और बढ़ेंगी। ऐसे में सरकार और उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद, सहयोग और समन्वय के माध्यम से उत्तर प्रदेश को विकास के नए अवसरों की ओर आगे बढ़ाया जाएगा।  कार्यक्रम में श्रम विभाग के अपर मुख्य सचिव आशीष कुमार गोयल, श्रम आयुक्त सौम्य अग्रवाल, जुनैद, बसंत गंगवार, राकेश द्विवेदी, बृजेश सहित गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा एवं एनसीआर क्षेत्र के श्रम विभाग के अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बॉक्स  श्रम संहिताओं से उद्योगों के लिए आसान होगा अनुपालन, सिंगल विंडो व्यवस्था को भी मिलेगा विस्तार : गोयल अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन आशीष कुमार गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन के अनुरूप चार श्रम संहिताओं के माध्यम से पुराने अनेक श्रम कानूनों को समाहित कर व्यवस्था को सरल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उद्योग जगत की मांग रही है कि श्रम कानूनों की जटिलता और अधिक संख्या के कारण अनुपालन में होने वाली कठिनाइयों को दूर किया जाए। चारों संहिताओं के माध्यम से श्रम कानूनों को व्यवस्थित किया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में इनसे संबंधित अधिकांश नियमावलियां जारी हो चुकी हैं। साथ ही, उद्योगों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं, जिसके तहत विभिन्न विभागों और स्थानीय निकायों के लिए एक ही पोर्टल से आवेदन की सुविधा होगी। इससे उद्योगों का समय बचेगा, अनुपालन आसान होगा और प्रदेश में निवेश का वातावरण और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों के हितों में संतुलन बनाते हुए श्रमिकों की सुरक्षा के साथ उद्योगों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में श्रम संहिताओं के प्रति जागरूकता के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में इनके प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन उद्योग और श्रमिक दोनों के हित में : सौम्या अग्रवाल श्रमायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि इस सत्र का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में उद्योग और श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए श्रमिक सम्मान, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पुराने श्रम कानूनों को समाहित करते हुए चार श्रम संहिताएं- वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता लागू की गई हैं और इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इन संहिताओं के माध्यम से मल्टीपल रजिस्ट्रेशन से मुक्ति और सिंगल विंडो व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना, श्रमिकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण पहल है। व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने और महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण के … Read more

प्रदूषण पर दिल्ली सरकार का प्लान, पार्किंग शुल्क बढ़ेगा; EV पार्किंग फ्री

नई दिल्ली दिल्ली में 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना होगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को पार्किंग शुल्क से राहत मिलेगी। प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने कई बड़े कदमों की जानकारी दी है। ऑफिस की टाइमिंग में भी बदलाव किया जाएगा। दिल्ली सरकार के मुताबिक, 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा। इसका मकसद निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करना और लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर बढ़ाना है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क फ्री रहेगा। ऑफिस टाइमिंग में भी होगा बदलाव प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए ऑफिस की टाइमिंग में बदलाव किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे ट्रैफिक और प्रदूषण के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि फिलहाल दिल्ली में 588 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। बेड़े में 150 और इलेक्ट्रिक बसें जोड़ने की तैयारी है। सरकार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। सरकार ने दिल्ली में 62 प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान की है। इनमें से 42 जगहों पर प्रदूषण का स्तर पहले ही नियंत्रण में लाया जा चुका है। बाकी जगहों पर भी काम जारी है। मंत्री ने बताया कि इन हॉटस्पॉट के 3 किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है। इसके लिए सभी 11 जिला मजिस्ट्रेटों के कार्यालयों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। हॉटस्पॉट के आसपास आने वाली खास जगहों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इनमें श्मशान घाट, डंपिंग साइट और निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे वाली जगहें शामिल हैं। इन स्थानों के बेहतर प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन के साथ काम किया जा रहा है। 'ब्राउन पैच' से धूल रोकने की तैयारी सड़क किनारे उड़ने वाली मिट्टी और धूल को कम करने के लिए 'ब्राउन पैच' विकसित किए जाएंगे। सरकार जन-भागीदारी अभियान के जरिए हरियाली बढ़ाने पर भी काम करेगी। इसका उद्देश्य सड़क किनारे मौजूद मिट्टी और धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। दिल्ली में सड़कों की गहरी सफाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। योजना के मुताबिक हर दो हफ्ते में सड़कों की डीप क्लीनिंग की जाएगी। इसका मकसद सड़कों पर जमा मिट्टी और धूल को हटाना है। इस काम के लिए बनाई गई टीमों में हर गाड़ी पर चार लोग होंगे। इनमें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और MCD के प्रतिनिधि शामिल होंगे। दिल्ली पुलिस के साथ भी तालमेल किया जाएगा। 'जीरो बर्निंग' के तहत बनाए जाएंगे हीटिंग स्पॉट सर्दियों में खुले में जलाने की समस्या से निपटने के लिए 'जीरो बर्निंग' पहल के तहत इस बार 'हीटिंग स्पॉट' बनाए जाएंगे। अस्थायी शेल्टर में हीटिंग की व्यवस्था होगी। लोगों को ठंड से बचाने के लिए शेल्टर के अंदर जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। 'नो PUC, नो फ्यूल' मिशन मोड में लागू होगा सिरसा ने बताया कि दिल्ली में 'नो PUC, नो फ्यूल' को मिशन मोड में लागू किया जाएगा। यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) को लेकर नियमों के पालन पर जोर दिया जाएगा। सारथी ऐप को मिशन मोड में बढ़ावा सार्वजनिक वाहनों को प्राथमिकता देने और मेट्रो कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए दिल्ली मेट्रो के सारथी ऐप को मिशन मोड में प्रमोट किया जाएगा। सरकार का फोकस लोगों को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने पर है। 3,065 किलोमीटर सड़कों के पुनर्निर्माण का लक्ष्य दिल्ली में सड़कों के पुनर्विकास पर भी काम चल रहा है। सरकार के मुताबिक, 2026 में 3,065 किलोमीटर सड़कों के पुनर्निर्माण का लक्ष्य रखा गया था। 20 सितंबर तक 1,193 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। प्रदूषण कम करने के लिए कई मोर्चों पर काम दिल्ली सरकार की रणनीति में पार्किंग शुल्क बढ़ाने, EV को बढ़ावा देने, सार्वजनिक परिवहन मजबूत करने, प्रदूषण हॉटस्पॉट पर काम करने, सड़कों की डीप क्लीनिंग, धूल रोकने के लिए हरियाली बढ़ाने और 'नो PUC, नो फ्यूल' को मिशन मोड में लागू करने जैसे कदम शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी उपायों को तेज गति से लागू किया जा रहा है।

एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने उत्तरी मालवा क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए रतलाम के 220 केवी सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की है। रतलाम सबस्टेशन में वर्ष 1988 में स्थापित सेकंड जेनरेशन के 160 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नये थर्ड जेनरेशन तकनीक आधारित 220/132 केवी वोल्टेज स्तर का 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। रतलाम जिले का पहला 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जा मंत्री  तोमर ने बताया कि रतलाम जिले में पहली बार इतनी उच्च क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इससे क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मालवा क्षेत्र का 5 वां और प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर एमपी ट्रांसको रतलाम -मंदसौर के अधीक्षण अभियंता  वाय आर मांडलेकर ने बताया कि रतलाम में ऊर्जीकृत हुआ यह पावर ट्रांसफार्मर प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। मालवा क्षेत्र में इस क्षमता का यह पांचवां पावर ट्रांसफार्मर है। इसके स्थापित होने से रतलाम 220 केवी सबस्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 520 एमवीए हो गई है। जिले का 28 वां पावर ट्रांसफार्मर यह रतलाम जिले का 28वां पावर ट्रांसफार्मर है। एमपी ट्रांसको जिले में अपने 10 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण व्यवस्था का संचालन कर रही है। इनमें 220 केवी के रतलाम, जावरा एवं सैलाना सबस्टेशन तथा 132 केवी के रतलाम, सैलाना, शिवगढ़, ताल, आलोट और बिलपांक सबस्टेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगरा में एक स्विचिंग सबस्टेशन भी संचालित है। नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही रतलाम जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2165 एमवीए की हो गई है।  

बलरामपुर में गाय की हत्या कर मांस खाने का आरोप, 4 कटे पैर मिलने से खुला मामला; 9 गिरफ्तार

बलरामपुर रनहत: बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के चौकी रनहत अंतर्गत ग्राम चंदौरा में गोवंश (गाय) की हत्या कर उसका मांस पकाने और खाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए महिलाओं सहित कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रार्थी सुदन हड्डे निवासी चंदौरा ने चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी गाय 23 सितंबर को चरने के दौरान पास के जंगल में खो गई थी। तलाश के दौरान 24 सितंबर को गांव के ही धर्मजीत अगरिया के घर के पास बने सोख्ता गड्ढे में गाय के चार कटे हुए पैर बरामद हुए। घटना के बाद गांव में बुलाई गई पंचायत की बैठक में जब संदेहियों से पूछताछ की गई, तो आरोपियों ने गाय को मारकर पकाने और खाने का अपराध स्वीकार कर लिया। प्रार्थी की शिकायत और पंचायती निर्णय के बाद रनहत पुलिस ने दबिश देकर मामले में शामिल राजेश कुम्हरिया, प्रदीप चरगट, धर्मजीत अगरिया, रविशंकर, अमरसाय, नधुराम, कोमला, फुलबसिया और रेशमा उर्फ हुगली (सभी निवासी चंदौरा) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325, 3(5) और छत्तीसगढ़ पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4, 6, 10 के तहत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की है।

इंटरनेशनल ट्रेड शो में 300 जेन जी-जेन अल्फा के बीच कला-संस्कृति का ‘मुकाबला’

ग्रेटर नोएडा  कहीं नृत्य की थिरकन और समूहगान के सुर तो कहीं कैनवास पर उतरती संस्कृति। कहीं नई पीढ़ी के हाथ पारंपरिक कला और शिल्प को आकार देते दिखे। आधुनिक कारोबार और वैश्विक अवसरों के मंच यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में रविवार को जेन जी और जेन अल्फा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े नजर आए। कला एवं संस्कृति प्रतियोगिता में 28 से अधिक स्कूलों के 300 से अधिक विद्यार्थियों के बीच तीन विधाओं में मुकाबला हुआ। जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा ने सह-नोडल विद्यालय ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा के साथ प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रस्तुति कला, दृश्य कला और ‘हाथों की विरासत’ कला एवं शिल्प में कक्षा 6-8 और 9-12 के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सुर-ताल में दिखे संस्कृति के रंग प्रस्तुति कला के कक्षा 6-8 वर्ग में एस्टर पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की तोशिता प्रथम, श्रीराम मिलेनियम स्कूल, नोएडा की अर्शिया महाजन द्वितीय और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की ग्रुप सॉन्ग टीम तृतीय रही। कक्षा 9-12 में बेथनी कॉन्वेंट स्कूल की युविका एवं चार्वी प्रथम रहीं। बेथनी कॉन्वेंट स्कूल की संस्कृति पाठक एवं ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की अर्पिता द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की सांची तृतीय रहीं। कैनवास पर उतरी विरासत दृश्य कला के कक्षा 6-8 वर्ग में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की वर्णिका त्यागी प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल की अंशी मौर्य द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की कृतिका सिंह तृतीय रहीं। कक्षा 9-12 में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की अंशिका शर्मा प्रथम, ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की तान्या चौहान द्वितीय और रयान इंटरनेशनल स्कूल की चार्वी बघेल तृतीय रहीं। हाथों ने दिया परंपरा को आकार ‘हाथों की विरासत’ के कक्षा 6-8 वर्ग में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की सानवी सिंह प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल के लोविश भाटी द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की श्रद्धा तृतीय रहीं। कक्षा 9-12 में जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा के नवदीप तोमर एवं अनिका प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल के सार्थक द्वितीय और स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की सानवी सिंह तृतीय रहीं। जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की सांची, कृतिका सिंह और श्रद्धा ने अपनी-अपनी विधाओं में तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि नवदीप तोमर एवं अनिका ने पहला स्थान प्राप्त किया। इनके हाथ रही कमान आयोजन जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की प्रधानाचार्या मीता भंडूला और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा की प्रधानाचार्या अदिति बसु के मार्गदर्शन में हुआ। समन्वय जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा की हेडमिस्ट्रेस रितु भटनागर और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की सुशीला ने किया। निर्णायक मंडल में पी.टी. डी.यू. मॉडल इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. बिनिता, राजकीय उच्च विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रजनी पिलानी, केंद्रीय विद्यालय, दिल्ली के कला विशेषज्ञ आर.पी. पॉल और DJIC, होशियारपुर की गीतांजलि शामिल रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों की मौलिकता, रचनात्मकता, प्रस्तुति और सांस्कृतिक विरासत की समझ की सराहना की।

उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान, वृक्षारोपण और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया संवाद

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा, समर्पण एवं राष्ट्रनिष्ठा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वाराणसी से वडनगर तक निकाली जा रही सेवा यात्रा का सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र में राज्य मंत्री  टेटवाल ने स्वागत किया। नागरिकों के साथ पचोर से सारंगपुर तक यात्रा में सहभागिता की। वाराणसी से प्रारंभ होकर वडनगर तक जा रही सेवा यात्रा में अलग-अलग समूह सहभागिता कर रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य पवित्र नदियों का जल लेकर काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी और हाटकेश्वर महादेव, वडनगर में जलाभिषेक करना है। यात्रा के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया जा रहा है। सेवा को जीवन का संकल्प बनाएं मंत्री  टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा, समर्पण और राष्ट्र के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के प्रेरणादायी वर्ष हैं। सेवा किसी एक अवसर या अभियान तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति निरंतर जिम्मेदारी है। सेवा संकल्प अभियान प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण तथा युवाओं को कौशल और रोजगार से जोड़ने जैसे कार्यों में जनभागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। उड़नखेड़ी में सेवा यात्रियों का सम्मान उड़नखेड़ी में आयोजित कार्यक्रम में सेवा यात्रियों ने वाराणसी से वडनगर तक की यात्रा के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर यात्रियों का सम्मान किया गया। इसके बाद शिव मंदिर परिसर में वृक्षारोपण किया गया। राज्य मंत्री  टेटवाल ने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए। महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद राज्य मंत्री  टेटवाल ने स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं एवं लखपति दीदियों से संवाद किया। उन्होंने महिलाओं से उनके स्वरोजगार, समूह के माध्यम से किए जा रहे कार्यों और आर्थिक गतिविधियों की जानकारी ली। महिलाओं ने भी आत्मनिर्भर बनने के अपने अनुभव साझा किए। राज्य मंत्री  टेटवाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार और समाज की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत करना भी है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और लखपति दीदियों की सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। राज्य मंत्री  टेटवाल ने कौशल विकास और रोजगार के अवसरों के माध्यम से युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय संसाधनों और कौशल को रोजगार से जोड़ना सेवा और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर सांसद रोडमल नागर अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। 

किसान आईडी में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि, उत्तर भारत में 100% लक्ष्य पाने वाला पहला राज्य

जयपुर  राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश ने केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी के लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इसके साथ राजस्थान उत्तर भारत में 100 प्रतिशत किसान आईडी लक्ष्य हासिल करने वाला पहला और देश का छठा राज्य बन गया है। वर्ष 2015-16 की कृषि गणना में प्रदेश में 76.54 लाख परिचालित जोत दर्ज थीं। इनके मुकाबले किसान आईडी की उपलब्धि करीब 118 प्रतिशत पहुंच गई है। इस आधार पर राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। किसान आईडी को आधार और भूमि अभिलेखों से जोड़ने के साथ जन आधार से भी जोड़ा गया है। करीब 83 लाख किसान जन आधार में किसान आईडी के साथ जुड़े हैं। राज्य में लगभग 99 प्रतिशत गांवों का भू-संदर्भीकरण पूरा हो चुका है। वहीं रबी 2025-26 के दौरान 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल फसल सर्वे किया गया। प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा किसान आईडी के दायरे में आ चुका है। प्रधानमंत्री किसान योजना के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को भी किसान आईडी से जोड़ा गया है। किसान आईडी के जरिए किसान की डिजिटल पहचान को उसकी कृषि भूमि और फसल संबंधी जानकारी से जोड़ा जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं में पात्र लाभार्थियों की पहचान, उर्वरक और बीज वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि उपकरण, फसल बीमा तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को अधिक लक्षित बनाने में मदद मिलेगी। राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है। एग्रीस्टैक के आंकड़ों को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों को बार-बार समान दस्तावेज देने की जरूरत कम होने और सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान होने की संभावना है। क्रम    उपलब्धि                                                    स्थिति 1    किसान आईडी का लक्ष्य                                90.19 लाख का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा 2    राष्ट्रीय स्थिति                                                उत्तर भारत में पहला, देश में छठा राज्य 3    परिचालित जोत के मुकाबले उपलब्धि             करीब 118 प्रतिशत 4    किसान आईडी से पीएम-किसान लाभार्थी         करीब 50 लाख 5    बोया गया क्षेत्र                                               करीब 62 प्रतिशत क्षेत्र कवर 6    गांवों का भू-संदर्भीकरण                                   करीब 99 प्रतिशत पूरा 7    डिजिटल फसल सर्वे                                        2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्ड 8    जन आधार से जुड़ाव                                        करीब 83 लाख किसान 9    डिजिटल एकीकरण                                          आधार, भूमि रिकॉर्ड, पीएम-किसान व अन्य कृषि योजनाओं से जुड़ाव 10    विशेष अभियान    1 से 30 सितंबर 2026 तक छूटे किसानों को जोड़ने का अभियान कृषि विभाग के अनुसार, छूटे हुए पात्र किसानों को किसान आईडी से जोड़ने के लिए 1 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में कृषि पर्यवेक्षकों की भागीदारी, पीएम-किसान लाभार्थियों को सूचना और अन्य स्तरों पर सत्यापन की व्यवस्था की गई है।

छत्तीसगढ़ की बेटी ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से देश-प्रदेश का मान बढ़ाया : मुख्यमंत्री साय

रायपुर एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य और छत्तीसगढ़ की बेटी सु संजू देवी ने आज मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सु संजू देवी को बधाई देते हुए उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सु संजू देवी को 51 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सु संजू देवी ने अपने उत्कृष्ट खेल, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं में अपार सामर्थ्य है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और प्रोत्साहन मिले, ताकि वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री ने सु संजू देवी से एशियन गेम्स के अपने अनुभवों और भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन के संबंध में आत्मीय बातचीत की। उन्होंने संजू देवी की मेहनत और खेल के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक खिलाड़ी की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, बल्कि वह अपने साथ हजारों युवाओं के सपनों को भी नई उड़ान देती है। संजू देवी की सफलता प्रदेश के गांवों और छोटे शहरों में खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रहे बच्चों और युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाएगी। उल्लेखनीय है कि जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की महिला कबड्डी स्पर्धा में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबले में ईरान को पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की सु संजू देवी ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के दूरस्थ अंचलों से निकलने वाली प्रतिभाओं को भी अपनी क्षमता निखारने और देश-दुनिया के खेल मंचों तक पहुंचने के पर्याप्त अवसर मिलें। सु संजू देवी जैसी प्रतिभाओं की उपलब्धियां इस संकल्प को और मजबूत करती हैं। सु संजू देवी ने सम्मान और प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से मिला यह प्रोत्साहन उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।