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LPU में बढ़ी सुरक्षा, वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने संभाला मोर्चा; DGP की चेतावनी

जालंधर. फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में रातभर हुए हंगामे के बाद सोमवार सुबह पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली। कैंपस में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। डीजीपी गौरव यादव, स्पेशल डीजीपी प्रवीण कुमार सिन्हा और डीआइजी नवीन सिंगला समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन भी कैंपस में तैनात की गई। डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम की जांच की जा रही है और जो भी व्यक्ति हिंसा, तोड़फोड़ या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पंजाब के DGP गौरव यादव ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) कैंपस में हुए घटनाक्रम को लेकर बयान दिया है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने बताया कि 26-27 सितंबर की दरम्यानी रात कैंपस के अंदर कुछ घटनाओं को लेकर देर रात अफवाहें फैलने लगी थीं. इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में बाहर आ गये. इस दौरान तोड़फोड़ की कुछ घटनाएं हुईं और गेट के एक हिस्से में आग भी लगा दी गयी. रात 1:30 बजे मौके पर पहुंचे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी DGP के मुताबिक, पुलिस को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, करीब रात 1:30 बजे जालंधर रेंज के डीआइजी नवीन सिंगला, कपूरथला के एसएसपी गौरव तूरा, होशियारपुर के एसएसपी, जालंधर ग्रामीण के एसएसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गये. पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित किया और छात्रों के साथ बातचीत शुरू की. छात्रों की शिकायतों को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन से कराया संवाद गौरव यादव ने कहा कि छात्रों की यूनिवर्सिटी प्रशासन से कुछ शिकायतें थीं. पुलिस ने छात्रों और प्रशासन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बातचीत करायी. अधिकारियों ने पूरे दिन छात्रों के साथ संवाद जारी रखा, ताकि विवाद को बातचीत के जरिये सुलझाया जा सके. पुलिस ने छात्रों पर बल प्रयोग नहीं करने का लिया फैसला DGP गौरव यादव ने कहा कि स्थिति में कुछ उकसावे और कार्रवाई की घटनाएं हुईं, लेकिन पुलिस ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने का सचेत फैसला लिया. उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतें यूनिवर्सिटी प्रशासन से जुड़ी थीं, इसलिए पुलिस ने बातचीत से समाधान निकालने पर जोर दिया. महिला स्टाफ की मांग समेत कई मुद्दों पर बनी सहमति पंजाब DGP गौरव यादव के अनुसार, छात्रों की प्रमुख मांगों में लड़कियों के हॉस्टल में केवल महिला स्टाफ की तैनाती शामिल थी. इसके अलावा भी कुछ अन्य मुद्दे थे. पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर शिकायतों के समाधान की दिशा में काम किया. उन्होंने कहा कि बुधवार को इस मुद्दे को सुलझा लिया गया और बैठकें भी हुईं. एक और बैठक आज होने की बात कही गयी है. हिंसा की घटना पर FIR, SIT करेगी विस्तृत जांच DGP गौरव यादव ने बताया कि घटना के संबंध में एफआइआर दर्ज कर ली गयी है. मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गयी है. टीम पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी और सभी पहलुओं की पड़ताल की जायेगी. पुलिस वाहन पर पथराव का भी जिक्र DGP गौरव यादव ने कहा कि पिछले रात एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई. कुछ तत्वों ने कथित उकसावे के बीच माहौल खराब करने की कोशिश की और पुलिस के वाहन पर पथराव किया. पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की पहचान कर रही है. CCTV फुटेज से होगी उपद्रवियों की पहचान पंजाब पुलिस प्रमुख ने कहा कि हिंसा और कानून हाथ में लेने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने बताया कि CCTV फुटेज समेत तकनीकी और वैज्ञानिक तरीकों से घटनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है. जांच के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने पुलिसिंग में संवेदनशील व्यवहार, तकनीक के उपयोग और जनसेवा को बताया प्रभावी पुलिसिंग की आधारशिला

भोपाल  पुलिस मुख्यालय के कांफ्रेंस हॉल में उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से भेंट कर पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली, पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराध नियंत्रण, नक्सल समस्या के समाधान तथा कानून-व्यवस्था एवं प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षुओं से संवाद किया।डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक  के.एफ. रुस्तमजी के योगदान को स्मरण करते हुए उनके कार्यकाल के महत्वपूर्ण प्रसंगों पर चर्चा की। उन्होंने चंबल क्षेत्र में डकैती की समस्या तथा उसे समाप्त करने के लिए किए गए पुलिस प्रयासों की जानकारी भी प्रशिक्षुओं से साझा की। नक्सल समस्या से निपटने से लेकर कानून-व्यवस्था प्रबंधन तक दी जानकारी डीजीपी  मकवाणा ने बताया कि मध्यप्रदेश ने नक्सल समस्या के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने प्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने के लिए अपनाई गई पुलिसिंग और रणनीति के बारे में प्रशिक्षुओं को जानकारी दी। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिसिंग तथा संवेदनशील परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया।उन्होंने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके लिए प्रशिक्षण एवं अधोसंरचना से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, ई-समन जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं और पुलिसिंग को आधुनिक एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। साइबर अपराध और नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियानों से कराया परिचित डीजीपी ने बताया कि नशा मुक्त भारत-2029 के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।  उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत विभिन्न अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं संवाद को और मजबूत करना है। तकनीक के माध्यम से पुलिसिंग को बनाया जा रहा आधुनिक डीजीपी  मकवाणा ने पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि डायल-112 एवं एफआरवी व्यवस्था, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस सहित विभिन्न तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस के माध्यम से पुलिस कार्यालयों को पेपरलेस बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं ईएचआरएमएस में लगभग एक लाख पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा चुका है।उन्होंने पुलिस बल की कार्यक्षमता और कल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि तनाव प्रबंधन के लिए पिछले वर्ष हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू किया गया है और इसके माध्यम से पुलिसकर्मियों के स्ट्रेस मैनेजमेंट पर कार्य किया जा रहा है। पुलिस अधिकारी संवेदनशील रहें, जनता की जरूरत के समय मदद करें : डीजीपी डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी का व्यवहार अच्छा और संवेदनशील होना चाहिए। जनता को जब पुलिस से मदद की आवश्यकता हो, तब उनकी सहायता के लिए तत्पर रहना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।  कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. विनीत कपूर, पीएसओ टू डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को डीजीपी  कैलाश मकवाणा के कार्यों एवं पुलिस सेवा के अनुभवों से परिचित कराया। इस अवसर पर सहायक पुलिस महानिरीक्षक  रामजी वास्तव ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस की मूलभूत जानकारी एवं पुलिस व्यवस्था से परिचित कराया।  प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ जागरूकता अभियान तथा ‘सेफ क्लिक’ साइबर जागरूकता अभियान पर आधारित वीडियो प्रस्तुतियां दिखाई गईं। कार्यक्रम के दौरान उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने भोपाल में अपने प्रशिक्षण एवं भ्रमण के अनुभव भी साझा किए और मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली एवं पुलिसिंग के विभिन्न नवाचारों के संबंध में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  रवि कुमार गुप्‍ता, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  एन.बी. वायंगणकर, उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण  मनीष अग्रवाल, एस.ओ. टू डीजीपी  मलय जैन एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  अंकित सोनी उपस्थित रहें। 

मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल स्थित परिसर में 12.40 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है प्रयोगशाला

भोपाल प्रदेशवासियों के लिए एक अच्छी खबर है। यदि आपको घर में आने वाले दूध या दुग्ध उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। मध्यप्रदेश में सहकारिता क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार हो गई है। मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल परिसर में स्थापित इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ताओं के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनवाई गई है। शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों की सटीक जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे दूर करने के लिए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है। 12.40 करोड़ की लागत, NABL और FSSAI से मिलेगी मान्यता यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' (NPDD) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग एवं मार्गदर्शन से बनाई गई है। इसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। प्रयोगशाला को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त होगी। 100 से अधिक मानकों पर होगी जांच प्रयोगशाला में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं और जल्द ही जांच की सुविधा भी मिलनी शुरू हो जाएगी। राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आमजन और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस सुविधा का सीधा फायदा आम नागरिकों के साथ खाद्य उत्पादक संस्थाओं को मिलेगा। प्रयोगशाला के संचालन से राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की समग्र गुणवत्ता में सुधार आएगा, शुद्धता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य पर इसका अत्यंत सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।  

संकट की इस घड़ी में हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के डोंगाघाट पहुंचे और बाढ़ से प्रभावित परिवारों से आत्मीयतापूर्वक मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से खड़ी है तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए शासन के प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त प्रत्येक प्रभावित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹10-10 हजार की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे और आकलन तेजी से पूरा कर पात्र परिवारों तक शासन की सहायता शीघ्र पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री  साय ने डोंगाघाट में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावितों से बाढ़ के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों, मकानों एवं घरेलू सामान को हुए नुकसान तथा वर्तमान में उपलब्ध कराई जा रही राहत के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न हो। भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री प्रभावित लोगों तक समय पर पहुंचाई जाए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा जरूरतमंद लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए राहत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इंद्रावती के जलस्तर और प्रभावित इलाकों का किया अवलोकन मुख्यमंत्री  साय ने इंद्रावती पुल पहुंचकर नदी के जलस्तर तथा आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से जिले में बारिश एवं बाढ़ की स्थिति, प्रभावित गांवों और शहरी क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित परिवारों के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलस्तर में बदलाव और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए। निचले एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह तैयार रहनी चाहिए। बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। जलस्रोतों की सफाई एवं आवश्यक उपचार के साथ जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रखा जाए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविर लगाने, दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता रखने और बीमारी के किसी भी संभावित प्रकोप पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्य केवल बाढ़ का पानी उतरने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन को सामान्य बनाने तक आवश्यक व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से जारी रहें। मकान, फसल और पशुधन की क्षति का शीघ्र हो आकलन मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों को बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों, पशुधन और अन्य संपत्तियों का संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ सर्वे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का वास्तविक आकलन कर संबंधित परिवारों को शासन के प्रावधानों के अनुसार सहायता शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। कोई भी पात्र प्रभावित परिवार सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत शिविरों और प्रभावित बस्तियों में नियमित रूप से पहुंचकर लोगों की जरूरतों की जानकारी लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि राहत कार्यों में मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक आवश्यक मदद समय पर पहुंचे। हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है सरकार : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत और उनके जीवन को जल्द से जल्द सामान्य बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुरूप त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। इस अवसर पर महापौर  संजय पाण्डेय, नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन,   कमलचंद्र भंजदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह, आईजी  बी.एन. मीणा, कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि, Singapore-India Growth Forum 2026 में CM साय करेंगे प्रतिनिधित्व

रायपुर. विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर दौरे पर रहेंगे। जहां वे छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री 5 अक्टूबर को होने वाले सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में शामिल होंगे। यह फोरम सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) की ओर से आयोजित किया जा रहा है और इसका यह पहला संस्करण है। फोरम में सिंगापुर और भारत के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उद्योग जगत के प्रमुख, निवेशक और उद्यमी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारी के अवसरों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय राज्यों की आर्थिक प्राथमिकताओं और निवेश अवसरों को भी सामने रखा जाएगा। एमएसएमई और स्टार्टअप की संभावनाएं रखेंगे मुख्यमंत्री साय फोरम में छत्तीसगढ़ में एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर राज्य का पक्ष रखेंगे। इसके जरिए राज्य की उपलब्धियों और कारोबारी अवसरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर के स्किल सेंटर, मंडई वाइल्डलाइफ रिजर्व और गार्डन्स बाय द बे के साथ भी बैठकें करेगा। इन बैठकों में कौशल विकास, वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर यात्रा छत्तीसगढ़ को वैश्विक साझेदारों से जोड़ने और राज्य के विकास के लिए नए सहयोग के अवसर तलाशने का माध्यम बनेगी। ये अधिकारी भी रहेंगे प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार और मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) उमेश अग्रवाल शामिल रहेंगे।

PM आवास की मांग पर शिवपुरी में हंगामा, मासूम संग पानी की टंकी पर चढ़ा परिवार; अफसरों के आश्वासन से माने

 शिवपुरी शहर के मनीयर में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सरकारी जमीन पर पक्का निर्माण रोकने से नाराज एक युवक अपने पूरे परिवार और नौ माह के दुधमुंहे बच्चे को लेकर 70 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया। करीब दो घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे में नीचे खड़ी पुलिस-प्रशासन की सांसें अटकी रहीं। युवक टंकी से ही परिवार सहित कूदकर जान देने की धमकी देता रहा। अंत में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और कोतवाली टीआई रोहित दुबे ने मौके पर पहुंचकर उसे पीएम आवास दिलाने का आश्वासन दिया, तब जाकर वह नीचे उतरा। क्या है पूरा मामला? मनीयर में सर्वे नंबर 454 की सरकारी जमीन पर पवन जाटव पिछले 25-30 साल से झोपड़ी बनाकर रह रहा है। नगर पालिका द्वारा सड़क बनवाने के बाद उसकी झोपड़ी सड़क से नीची हो गई, जिसमें बारिश का पानी भरने लगा। परेशान होकर पवन ने उसी जगह बुनियाद भरकर दो पक्के कमरे बनाना शुरू कर दिया। इस पर पड़ोस में रहने वाले महेश धाकड़, बाबू धाकड़ सहित अन्य लोगों ने कोतवाली में शिकायत कर दी कि सरकारी जमीन पर जबरन पक्का कब्जा किया जा रहा है। शिकायत पर पुलिस पवन के घर पहुंची और जमीन के दस्तावेज मांगे। दस्तावेज न होने पर पुलिस पूछताछ के लिए उसके मामा रामभजन को थाने ले गई। इससे आक्रोशित होकर पवन अपनी मां रामश्री जाटव, पत्नी सपना जाटव और नौ माह के बेटे इशांक को लेकर मनीयर टोल टैक्स के पास बनी जलावर्धन योजना की टंकी पर चढ़ गया। फोन पर चली दो घंटे बात, फिर माना प्रशासन का आश्वासन सूचना मिलते ही तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और टीआई रोहित दुबे टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नीचे से फोन पर पवन को समझाने का दौर शुरू हुआ। पवन का एक ही कहना था कि, "मैं 30 साल से यहीं रह रहा हूं, मुझे यहीं घर बनाने दो, नहीं तो न्याय नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगा।" करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन ने उसे भरोसा दिलाया कि उसे अवैध कब्जे की जगह वैध मकान दिलाया जाएगा, तब कहीं जाकर वह नीचे उतरकर आया।   पीएम आवास की कॉलोनी में करवाएंगे आवेदन तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने बताया, "पवन जाटव सर्वे नंबर 454 की शासकीय भूमि पर अतिक्रमित है। उसे समझाया गया है कि वह जितना पैसा यहां कच्चे-पक्के निर्माण में लगाएगा, उतने में मेडिकल कॉलेज के पीछे बनी पीएम आवास कॉलोनी में उसे पात्रता के अनुसार पक्का मकान मिल जाएगा। वह बीपीएल श्रेणी का है, उसके पास रहने की व्यवस्था नहीं है। कल उसका आवेदन करवा रहे हैं।" टंकियां क्यों बनीं आत्मघाती अड्डा? यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर में जलावर्धन योजना के तहत 8 से 10 बड़ी पानी की टंकियां बनी हैं, लेकिन एक पर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। किसी भी टंकी की सीढ़ियों पर लोहे का गेट या ताला नहीं है। चेतावनी बोर्ड, सीसीटीवी कैमरा और चौकीदार का कोई अता-पता नहीं। इसी का परिणाम है कि, शाम होते ही इन टंकियों पर नशेड़ी और आवारा तत्वों की महफिल सजती है। जब जिसके मन में आता है, वह टंकी पर चढ़कर प्रशासन को ब्लैकमेल करता है। नगर पालिका की जिम्मेदारी क्या है? मध्यप्रदेश म्युनिसिपल एक्ट और जल प्रदाय मैनुअल साफ कहता है कि, हर जल संरचना पर लोहे का गेट, ताला, खतरे का बोर्ड, सीसीटीवी और 24 घंटे कर्मचारी की तैनाती अनिवार्य है। इसका उद्देश्य पानी को दूषित होने से बचाना और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकना है। लापरवाही पर सीएमओ और जल शाखा प्रभारी पर आपराधिक मामला तक दर्ज हो सकता है। शिवपुरी नपा में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

पर्यटन के क्षेत्र में GPM की बड़ी उपलब्धि, ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से सम्मानित

विश्व पर्यटन दिवस पर जीपीएम जिले को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ पुरातात्विक धरोहर धनपुर पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन जिले की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को मिली नई पहचान रायपुर  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा यहां की समृद्ध प्राकृतिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के उल्लेखनीय प्रयासों के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा जीपीएम जिले को ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। राजधानी रायपुर में 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं ‘छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन’ (सीजीटीटीए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस’ के दौरान जिले को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर जिले की महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर ‘धनपुर’ पर आधारित आकर्षक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया। कॉफी टेबल बुक का विमोचन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे, कलेक्टर जीपीएम श्री विजय दयाराम के. तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे द्वारा किया गया। धनपुर की पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को समर्पित इस कॉफी टेबल बुक में क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व, पुरातात्विक धरोहर और पर्यटन संभावनाओं को आकर्षक एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह पहल धनपुर को प्रदेश और देश के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ ही जीपीएम जिले की अन्य पर्यटन एवं सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति पर्यटकों की रुचि बढ़ाने में भी सहायक होगी। उल्लेखनीय है कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी समृद्ध है। जिले में पर्यटन स्थलों की पहचान, संरक्षण, प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन की संभावनाओं के विकास के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ जिले के इन्हीं प्रयासों को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। यह सम्मान जीपीएम को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

कुनकुरी को बड़ी सौगात, सूर्य नमस्कार चौक और सामुदायिक भवन के लिए ₹1.01 करोड़ स्वीकृत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल, कुनकुरी में 1.01 करोड़ रुपये के दो विकास कार्यों को मिली स्वीकृति सूर्य नमस्कार चौक के लिए 76.81 लाख और सामुदायिक भवन के लिए 24.83 लाख रुपये स्वीकृत कुनकुरी में अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को मिलेगी गति, नगरवासियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के अनुरूप जशपुर जिले के कुनकुरी नगर में दो महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 1 लाख 64 हजार रुपये की अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें सूर्य नमस्कार चौक और सामुदायिक भवन का निर्माण शामिल है। दोनों कार्यों की स्वीकृति मिलने से कुनकुरी में अधोसंरचना विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने ग्राम कलिबा में नवनिर्मित कलिबेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान इन दोनों विकास कार्यों की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अब दोनों कार्यों को अंतिम स्वीकृति मिलने के साथ ही इनके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 76.81 लाख रुपये से विकसित होगा सूर्य नमस्कार चौक कुनकुरी के वार्ड क्रमांक 06 में हनुमान टेकड़ी के पास सूर्य नमस्कार चौक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 76.81 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। चौक के विकसित होने से नगर को एक आकर्षक और व्यवस्थित सार्वजनिक स्थल मिलेगा। यह नगर की पहचान को नया स्वरूप देने के साथ नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा। 24.83 लाख रुपये से बनेगा सामुदायिक भवन वार्ड क्रमांक 06 में हनुमान टेकड़ी के पास ही सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया जाएगा। इसके लिए 24.83 लाख रुपये की अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। सामुदायिक भवन बनने से स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी होने पर नगरवासियों में खुशी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के अनुरूप दोनों विकास कार्यों को स्वीकृति मिलने पर कुनकुरी नगरवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है। नगरवासियों का कहना है कि इन कार्यों के पूरा होने से स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाएं बढ़ेंगी और कुनकुरी के विकास को नई गति मिलेगी।

बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे वित्त मंत्री ओपी चौधरी, जाना लोगों का हाल

बाढ़ की मुश्किल घड़ी में अपनों के बीच पहुंचे वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सरिया के राहत शिविर में माताओं-बहनों, बुजुर्गों और बच्चों से मिलकर जाना हाल, कहा—हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है सरकार ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर जानी जरूरतें, अधिकारियों को राहत शिविर में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश रायपुर  महानदी के बढ़ते जलस्तर से रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सरिया अंचल में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति के बीच वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी आज प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचे। चौधरी ने सरिया स्थित कन्या शाला में बनाए गए राहत शिविर पहुंचकर वहाँ ठहरे ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। राहत शिविर में चौधरी ने माताओं-बहनों, बुजुर्गों, बच्चों और युवाओं के बीच बैठकर उनसे सीधे संवाद किया। उन्होंने बाढ़ के कारण उत्पन्न परेशानियों और परिवारों की आवश्यकताओं की जानकारी ली। मुश्किल परिस्थितियों के बीच अपने जनप्रतिनिधि को अपने बीच पाकर प्रभावित ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी बातें साझा कीं। चौधरी ने कहा कि बाढ़ के कारण लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में आना पड़ा है। यह समय प्रभावित परिवारों के लिए कठिन जरूर है, लेकिन वे स्वयं को अकेला न समझें। शासन-प्रशासन उनके साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ा है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राहत शिविर में भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, दवाइयों, साफ-सफाई सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर में रह रहे किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी न हो। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जरूरतों का संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखने के निर्देश दिए। चौधरी ने अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और महानदी के जलस्तर की सतत निगरानी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में प्रशासन पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करे तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करे। उल्लेखनीय है कि महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रायगढ़ जिले के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों तक पहुंचाने के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा, पीड़ित परिवारों से मिलकर जाना हाल

बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ने सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा, पीड़ित परिवारों से मिलकर जाना हाल राहत शिविर में प्रभावितों को स्वयं भोजन परोसकर मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला सुकमा में बाढ़ प्रभावित करीब 300 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलेंगे 10-10 हजार रुपये अतिरिक्त बाढ़ से हुई क्षति का शीघ्र आकलन कर आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजा देने के निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा – प्रत्येक प्रभावित परिवार तक शीघ्र पहुंचे सहायता, राहत और पुनर्वास में नहीं हो कोई कमी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बाढ़ से प्रभावित शबरीनगर, श्रीनगर, लाइनपारा सहित विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने राहत एवं स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं एवं आवश्यकताएं जानीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है। बाढ़ से जिन परिवारों के मकान, घरेलू सामान अथवा अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, उन्हें नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के साथ राहत और पुनर्वास के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने शबरीनगर में स्थापित राहत एवं स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री राहत शिविर में रह रहे प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे और उन्हें स्वयं भोजन परोसकर आत्मीयता के साथ उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित परिवार के घर भी पहुंचे। उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत कर बाढ़ के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों और हुए नुकसान की जानकारी ली तथा उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की कठिनाइयों को समझते हुए सहायता पहुंचाने में किसी प्रकार का विलंब नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि 23 एवं 24 सितंबर को हुई अतिवृष्टि से सुकमा जिले के अनेक क्षेत्रों में बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति निर्मित हुई थी। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के साथ स्वास्थ्य शिविर संचालित किए जा रहे हैं। जरूरतमंद परिवारों को तात्कालिक सहायता, सूखा राशन एवं गर्म वस्त्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन और आवश्यक स्वच्छता संबंधी उपाय भी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कोंटा क्षेत्र में भी बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। पिछले दिनों लगातार बारिश के कारण सबरी नदी में जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के गांवों के साथ कोंटा नगर पालिका के चार वार्डों में पानी भर गया था। कोंटा क्षेत्र में प्रभावितों के 19 राहत केंद्रों में ठहरने, भोजन, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों को देखा और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ से मकानों, घरेलू सामान तथा अन्य परिसंपत्तियों को हुए नुकसान का प्राथमिकता से आकलन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पात्र प्रभावितों को आरबीसी 6-4 के प्रावधानों के तहत मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि शीघ्र प्रदान की जाए। करीब 300 परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ के कारण घरों में रखे सामान को नुकसान पहुंचने से प्रभावित परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे करीब 300 प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी। यह राशि आरबीसी 6-4 के तहत पात्रता के अनुसार मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में हर संभव सहयोग दिया जाए। क्षति के आकलन से लेकर सहायता राशि के वितरण तक पूरी प्रक्रिया संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पूरी हो। कोई भी पात्र परिवार सहायता से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत के बाद अब पुनर्वास के कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जाए। जिन परिवारों ने इस आपदा में नुकसान सहा है, उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए शासन की सहायता समय पर उन तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार इस कठिन समय में प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।