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बाढ़ में प्रशासन और टीमवर्क की मिसाल, राहत-बचाव अभियान से लोगों को मिली सुरक्षा

बाढ़ आपदा के बीच जिला प्रशासन की तत्परता और टीमवर्क से सुरक्षित किया गया रेस्क्यू अभियान राहत शिविरों में सेवा एवं समपर्ण से किए जा रहे कार्य     रायपुर  धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश और जलभराव के बीच जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों के समन्वित प्रयासों से संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का सिलसिला लगातार जारी है।     कुरुद क्षेत्र के लोमश ऋषि आश्रम में बाढ़ के पानी के बीच फंसे 9 लोगों को पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन एवं पुलिस की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी 9 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर राहत दल, पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। सलोनी राहत शिविर में बेहतर व्यवस्थाएं, राजस्व अमले ने सेवा और समर्पण से किया कार्य     सलोनी स्थित बाढ़ राहत शिविर में साफ-सफाई, स्वच्छता एवं भोजन व्यवस्था संतोषजनक और व्यवस्थित रही। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरंतर जायजा ले रहे हैं। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों के लिए सुबह नाश्ते के साथ नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शिविर परिसर में स्वच्छता एवं हाईजीन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में बोले वित्त मंत्री

कमजोर और ग्रामीण वर्ग तक बीमा पहुंचाना सबसे जरूरी : सुरेश खन्ना यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में बोले वित्त मंत्री बोले- योगी सरकार के प्रयास से बीमा के बारे में जागरूकता बढ़ी है, दुर्घटना और बीमारी के समय आर्थिक नुकसान कम करने में बीमा बड़ी सुरक्षा बीमा एजेंटों से अपील- पॉलिसी की शर्तों और क्लेम की प्रक्रिया की पूरी जानकारी लोगों तक पहुंचाएं ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि योगी सरकार के प्रयास से बीमा के बारे में शहरी और आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर वर्ग तक इसकी पहुंच बढ़ाने की अभी बहुत जरूरत है। बीमारी, दुर्घटना या किसी दूसरी विपरीत परिस्थिति में सबसे ज्यादा आर्थिक संकट कमजोर परिवारों के सामने आता है। ऐसे में बीमा उन्हें आर्थिक सुरक्षा देने और नुकसान कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। वित्त मंत्री यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में आयोजित ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम में बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हेल्थ इंश्योरेंस, मोटर इंश्योरेंस, क्लेम, सरकारी बीमा योजनाओं और वित्तीय समावेशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उतना ही ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर ऐसी कई योजनाएं चल रही हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी भी है। इसके बावजूद इनका जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, उतना ही ज्यादा लोगों को लाभ मिलेगा। खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक बीमा की जानकारी पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सक्षम और शहरी वर्ग को बीमा के बारे में अपेक्षाकृत अधिक जानकारी होती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। दुर्घटना या दूसरी विपरीत परिस्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार पर बड़ा बोझ पड़ सकता है। बीमा के जरिए इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लोगों को पॉलिसी की पूरी शर्तें बताएं  एजेंट सुरेश खन्ना ने बीमा एजेंटों और कंपनियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एजेंट केवल पॉलिसी कराने तक सीमित न रहें, बल्कि बीमाधारक को प्रीमियम, नवीनीकरण, क्लेम और दूसरी जरूरी शर्तों की पूरी जानकारी दें। इससे जरूरत के समय लोगों को क्लेम लेने में परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर लोगों से सीधे जुड़े व्यक्तियों तक भी बीमा की जानकारी पहुंचनी चाहिए। इनके माध्यम से गांवों में ज्यादा लोगों को जागरूक किया जा सकता है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अनदेखी पड़ सकती है भारी वित्त मंत्री ने वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि इसकी अहमियत अक्सर दुर्घटना होने के बाद समझ में आती है। गांवों में कई बार लोग लापरवाही या जानकारी के अभाव में वाहनों का जरूरी बीमा नहीं कराते। दुर्घटना होने और किसी तीसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचने की स्थिति में यह बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस इस तरह के जोखिम को कवर करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए वाहन मालिकों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत है। हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम को लेकर दूर हुईं कई भ्रांतियां कार्यशाला में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ परिस्थितियों में पॉलिसी की शर्तों के अनुसार नेटवर्क या इम्पैनल्ड अस्पताल से बाहर इलाज कराने पर भी जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने पर रीइम्बर्समेंट क्लेम किया जा सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस तरह की जानकारी आम लोगों तक पहुंचना जरूरी है। कई बार पॉलिसीधारक को अपनी पॉलिसी में उपलब्ध सुविधाओं और क्लेम की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। इस कारण वह जरूरत के समय बीमा का पूरा लाभ नहीं उठा पाता। गंभीर बीमारी कभी परिवार के सामने खड़ा कर देती थी आर्थिक संकट कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पहले परिवार में किसी व्यक्ति को लिवर सिरोसिस, किडनी की गंभीर बीमारी, कैंसर या हृदय रोग जैसी बीमारी होने पर इलाज का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन जाता था। कई परिवारों की जमा पूंजी खत्म हो जाती थी और जमीन-जायदाद तक बेचने या गिरवी रखने की नौबत आ जाती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। योजना के तहत पात्र परिवारों को द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। पांच लाख तक कैशलेस इलाज, दूसरे राज्य में भी उपचार की सुविधा कार्यक्रम में बताया गया कि योजना के तहत सरकारी और इम्पैनल्ड निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसमें देशभर में पोर्टेबिलिटी का प्रावधान भी है। यानी पात्र लाभार्थी दूसरे राज्य में भी योजना से जुड़े अस्पताल में उपचार करा सकता है। उत्तर प्रदेश में योजना के वित्तपोषण में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी है। इसमें केंद्र सरकार की 60 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश सरकार की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बीमा को गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर वित्त मंत्री ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे मंच पर वित्तीय समावेशन और बीमा पर चर्चा का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि बीमा को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी है। इसके लिए बीमा कंपनियों, एजेंटों और स्थानीय प्रतिनिधियों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि विशेष ध्यान उन लोगों पर होना चाहिए जो गरीबी रेखा के नीचे हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जिनके लिए किसी दुर्घटना अथवा गंभीर बीमारी का खर्च पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ सकता है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शासन की सचिव वित्त संदीप कौर, आईआरडीएआई के जीएम पंकज तिवारी, एक्सिस मैक्स के वीपी सुमित सत्यन, बजाज जनरल इंश्योरेंस के वीपी एजाज खान और केयर हेल्थ  रूरल के सीडीओ अतुल सबरवाल समेत बीमा एवं वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

युवा नवाचार और उद्यमिता की ओर बढ़ें, राज्यपाल रमेन डेका ने दिया संदेश

विचारों को उद्यम में बदलने का साहस रखें युवा-  रमेन  डेका तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव का शुभारंभ, सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण किया राज्यपाल ने रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि युवाओ को सिर्फ नौकरी पाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि  अपने विचारों को उद्यम में बदलने का साहस भी रखना चाहिए। एक अच्छा विचार, सही मार्गदर्शन और उपयुक्त तकनीक के साथ आगे बढ़े तो वही नवाचार सफल स्टार्टअप का रूप ले सकता है और आगे चलकर अनेक लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता है। राज्यपाल डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर रायपुर में छत्तीसगढ़ के युवाओं में नवाचार, उद्यमिता विकास और प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय ‘यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर उन्होंने  विश्वविद्यालय में स्थापित  सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल ने कहा कि हर क्षेत्र में नवाचार की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। देश की बढ़ती आबादी की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ नई तकनीकों और नए प्रयोगों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य के लिए आवश्यक मूलभूत खाद्य पदार्थों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है। जब हमारी खाद्य आवश्यकताएं सुरक्षित होंगी, तभी हम विकास के अन्य क्षेत्रों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवाचार की सबसे बड़ी संभावनाएं हमारे अपने संसाधनों में हैं। कृषि, वनोपज, खाद्य प्रसंस्करण, मिलेट, जैविक खेती, पशुपालन और जनजातीय उत्पादों जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार अवसर हैं। कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज ऐसे नवाचारों की आवश्यकता है, जो किसानों की लागत कम करें, उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाएं, फसल के नुकसान को कम करें तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और बाजार उपलब्ध कराने में मदद करें। ऐसे नवाचार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। उन्होंने किचन गार्डन और बाड़ी की अवधारणा को फिर से बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि स्टार्टअप शुरू करने से पहले बाजार का सर्वेक्षण करें और उत्पाद या सेवा की मांग तथा बाजार की संभावनाओं को समझें। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उसकी स्पष्ट योजना और रोडमैप तैयार करना चाहिए। योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने पर सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए परिश्रम और प्रशिक्षण के साथ बाजार का सर्वेक्षण, प्रबंधन क्षमता और वित्तीय समझ भी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के साथ युवाओं को कौशल प्रदान करना आवश्यक है, ताकि वे अपनी पारिवारिक आय बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास में योगदान दे सकें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। उन्होंने कहा कि देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और नई शिक्षा नीति में भी कौशल एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है। इस अवसर पर डेका ने युवा नवाचारी उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन  भी किया। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल, आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर डॉक्टर राजीव प्रकाश, एनआईटी के डायरेक्टर डॉ समीर बाजपेई, नाबार्ड के अधिकारी, सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्यमी और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

पहले सेल्फी, फिर सात फेरे… ट्रेड शो में योजनाओं को बताने का मनभावन अंदाज

ग्रेटर नोएडा इंटरनेशनल ट्रेड शो घूमने पहुंचे लोग जब समाज कल्याण विभाग के आउटलेट में कदम रखते हैं तो एक-एक कर अलग-अलग दृश्य उनका ध्यान खींचते हैं। सामने डिजिटल सेल्फी प्वाइंट है, कुछ कदम आगे विवाह मंडप में दूल्हा-दुल्हन फेरे लेते नजर आते हैं। आगे बढ़ने पर सिलाई केंद्र और किराना स्टोर के मॉडल ग्रामीण परिवारों की बदलती तस्वीर दिखाते हैं। यानी सरकारी योजनाओं की जानकारी यहां पढ़ने के बजाय देखने और महसूस करने का अनुभव देती है। क्लिक होते ही खुद मोबाइल तक पहुंच रही सेल्फी आउटलेट के प्रवेश हिस्से में बनाया गया डिजिटल सेल्फी प्वाइंट युवाओं और परिवारों को रोक रहा है। यहां क्यूसेक मशीन के माध्यम से सेल्फी लेने की सुविधा है। फोटो लेने के बाद तस्वीर सीधे संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन पर पहुंच जाती है। सेल्फी लेने के बाद लोग आसपास लगी योजनाओं की प्रदर्शनी देखने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। इसके बाद कन्या विवाह योजना का मॉडल सामने आता है। दो सजे विवाह मंडपों में कटआउट के जरिए दूल्हा-दुल्हन को फेरे लेते हुए दिखाया गया है। मंडप में इलेक्ट्रॉनिक हवन कुंड भी लगाया गया है। पूरा दृश्य विवाह समारोह का आभास कराता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित योजना को आसानी से समझने का माध्यम बनता है। कुछ कदम आगे अभ्युदय कोचिंग योजना का प्रदर्शन है। कटआउट और डिस्प्ले के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई है। समाज कल्याण विभाग की दूसरी कल्याणकारी योजनाओं को भी अलग-अलग मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। ज्योति टेलर से दीपक किराना स्टोर तक दिखा आत्मनिर्भरता का रास्ता महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की पहल 'ज्योति टेलर' काउंटर पर दिखाई देती है। ग्रामीण परिवेश की महिला को घर से सिलाई का काम करते हुए दिखाकर यह समझाने का प्रयास किया गया है कि सरकारी योजनाओं से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर को आय के साधन में बदल सकती हैं। पास ही दीपक किराना स्टोर का मॉडल छोटे कारोबार के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की तस्वीर सामने रखता है। आउटलेट में ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है। उत्पादों की जानकारी लेने के साथ ट्रेड शो में आने वाले लोग उनकी खरीदारी भी कर रहे हैं। मंच की ओर बढ़ते ही दृश्य बदल जाता है। यहां अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की लोककलाओं और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां हो रही हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों की भीड़ जुटती है और मोबाइल कैमरे निकल आते हैं। कोई वीडियो बनाता है तो कोई कलाकारों के साथ सेल्फी लेता है। योगी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया यह आउटलेट सहायता से लेकर शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, रोजगार और संस्कृति तक की तस्वीर एक ही परिसर में पेश कर रहा है। योजनाओं को मॉडल और प्रत्यक्ष प्रदर्शन से जोड़ने के कारण यह आउटलेट ट्रेड शो में महज सूचना केंद्र न रहकर लोगों के लिए अनुभव और संवाद का केंद्र बन गया है।

गल्ले में 500 के नोट, लेकिन 5-10-20 के सिक्कों और नोटों के लाले; बाजार में बढ़ी परेशानी

निम्बाहेड़ा  पितृपक्ष के बाद अब नवरात्र और दीपावली का त्योहारी सीजन सिर पर है। आम तौर पर इन दिनों बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है, लेकिन निम्बाहेड़ा के छोटे बाजारों से लेकर मुख्य किराना और फल-सब्जी मंडियों तक इस समय एक अजीब सी माथापच्ची चल रही है। ग्राहक की जेब में 200 या 500 का नोट है, उसे 20 या 30 रुपए का सामान चाहिए, लेकिन दुकान पर पहुंचते ही सबसे पहला और बड़ा सवाल यही गूंज रहा है भाई साहब, 10 का छुट्टे देना; छुट्टे हैं क्या? त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े इस दौर में छोटे नोटों और सिक्कों की किल्लत ने रोजमर्रा के लेन-देन को बड़ा सिरदर्द बना दिया है। डिजिटल दौर की अपनी मजबूरियां और यूपीआई का भ्रम आज के समय में डिजिटल भुगतान (यूपीआई) को नकदी का सबसे बड़ा विकल्प माना जाता है, लेकिन निम्बाहेड़ा के स्थानीय बाजारों की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। हर ग्राहक डिजिटल नहीं: बुजुर्ग, छोटे बच्चे, ग्रामीण इलाकों से आने वाले खरीदार और ठेले-पटरियों से रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने वाले लोग आज भी पूरी तरह कैश पर निर्भर हैं।     यूपीआई चार्ज का डर: हाल ही में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर संभावित शुल्क लगने की चर्चाओं और भ्रम ने आम जनता के मन में एक मनोवैज्ञानिक डर पैदा कर दिया है। इसके चलते लोग अपने पास मौजूद छोटे नोटों को खर्च करने के बजाय होल्ड (संचित) करने लगे हैं।     तकनीकी अड़चनें: त्योहारों के सीजन में लोड बढ़ने पर सर्वर डाउन होना या नेटवर्क फेल होना आम बात है। ऐसे में इंटरनेट या स्कैनर धोखा दे जाते हैं और मौके पर केवल छुल्ले पैसे ही काम आते हैं। आपसी जुगाड़ से चल रहा काम, आगे और बिगड़ेगी स्थिति जब आधिकारिक बैंकिंग व्यवस्था से कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा, तो निम्बाहेड़ा के छोटे व्यापारियों ने खुद ही इसका तोड़ निकाल लिया है। व्यापारी आपस में ही एक-दूसरे को बड़े नोट देकर चिल्लर और छोटे नोटों का जुगाड़ कर रहे हैं। लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल आने वाले नवरात्र और दीपावली के पीक सीजन को लेकर है। जब त्योहारी खरीदारी का दौर परवान चढ़ेगा, तब छोटे मूल्यवर्ग की जरूरत सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाएगी। यदि समय रहते बैंकों और स्थानीय स्तर पर छोटे नोटों की यह किल्लत दूर नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में छुट्टा है क्या? सिर्फ एक दुकानदार का सवाल नहीं, बल्कि पूरे बाजार की सबसे बड़ी रुकावट बन जाएगा। गल्ले में 500 के नोट, पर चिल्लर के लाले दुकानदारों की परेशानी यह है कि दिनभर की बिक्री में बड़े नोट तो धड़ल्ले से आ रहे हैं और गल्ले में जमा होते जा रहे हैं, लेकिन ग्राहकों को खुले पैसे या खुल्ले लौटाने के लिए 5, 10, 20 और 50 रुपए के नोट या सिक्के ढूंढे नहीं मिल रहे। बाजार की तस्वीर यह है कि एक दुकानदार के पास यदि गलती से सिक्के आ गए, तो आस-पास के दूसरे दुकानदार उससे चिल्लर मांगने पहुंच जाते हैं। यानी बाजार में कुल नकदी तो घूम रही है, लेकिन वह उस छोटे मूल्यवर्ग में नहीं है जिसकी रोजमर्रा के खुदरा कारोबार को सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 46 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत

भोपाल  खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 46 हजार 454 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। जबलपुर संभाग में 21 हजार 333, नर्मदापुरम में 5 हजार 167, भोपाल में 2 हजार 272, रीवा में 10 हजार 939, शहडोल में 4 हजार 552 और सागर संभाग में 2 हजार 166 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। उपार्जित फसल के भुगतान के लिये बैंक खाता किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

CM की अध्यक्षता में बनेगी ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद, 15 गैर सरकारी सदस्य होंगे शामिल

रांची  राज्य में वीबी-जी राम जी योजना के बेहतर क्रियान्वयन और प्रभावी निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया जाएगा. ग्रामीण विकास विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है. जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी होने की संभावना है. परिषद में अधिकारियों के साथ 15 गैर सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा. इसका उद्देश्य योजना के संचालन, निगरानी, मूल्यांकन और शिकायत निवारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है. वीबी-जी राम जी अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है और इसके तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का प्रावधान है. मुख्यमंत्री होंगे परिषद के अध्यक्ष राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे. राज्य स्तरीय सामान्य सभा में पंचायती राज, वित्त, वन एवं पर्यावरण, जल संसाधन, राजस्व एवं भूमि सुधार, भवन निर्माण, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता, कल्याण तथा श्रम एवं कौशल विकास सहित संबंधित विभागों के मंत्री सदस्य होंगे. परिषद में मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव भी शामिल होंगे. योजना आयुक्त को सदस्य सचिव बनाया जायेगा. इसके अलावा राज्य सरकार कम से कम 15 गैर सरकारी सदस्यों को नामित करेगी. योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन करेगी परिषद परिषद का मुख्य काम योजनाओं के प्रभावी संचालन और निगरानी को सुनिश्चित करना होगा. इसके अलावा योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन किया जाएगा तथा राज्य सरकार को योजना से जुड़े विभिन्न मामलों में सुझाव भी दिए जाएगे. परिषद वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने के साथ निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी. जरूरत के अनुसार इसमें सुधार के लिए सिफारिश की जाएगी. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी संचालन समिति योजना के परिचालन संबंधी मार्गदर्शन, समन्वय और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति का भी गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे या राज्य सरकार द्वारा नामित अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे. संचालन समिति का खाका भी तैयार किया गया है. समिति राज्य में योजना की तकनीकी और परिचालन जरूरतों के साथ डिजिटल प्रणालियों, निगरानी व्यवस्था और प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर मार्गदर्शन देगी.

हरियाणा में पुलिस भर्ती को लेकर बड़ा ऐलान, अगले साल 20 हजार जवानों की होगी भर्ती

 गुरुग्राम  हरियाणा पुलिस अगले दो साल में अपने आधुनिकीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 1300 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इस साल अब तक 5500 भर्तियां हो चुकी हैं और नवंबर में 4000 जवानों की और भर्ती होगी। अगले साल 20 हजार पुलिस भर्ती करने का लक्ष्य है। यह बात हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अजय सिंघल ने सोमवार को गुरुग्राम में कही। वे सेक्टर 17-सी में नवनिर्मित सेक्टर 17-18 थाने की नई बिल्डिंग के उद्घाटन के मौके पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। साढ़े चार करोड़ में बना नया थाना डीजीपी ने बताया कि साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बने इस नए थाने का निर्माण पुलिस हाउसिंग बोर्ड ने किया है। अब तक थाना पुरानी बिल्डिंग से संचालित हो रहा था। इस साल पूरे प्रदेश में 8 नए पुलिस थाने, 3 पुलिस चौकियां, 9 पुलिस बिल्डिंग और 313 पुलिस आवासों का निर्माण किया गया है। इस साल पुलिस मॉडर्नाइजेशन पर साढ़े छह सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ANTF, महिला सुरक्षा के लिए 33 थाने नशे पर उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य पंजाब से सबसे अधिक तस्करी हो रही है, रोकने के लिए (एएनटीएफ) एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। गृह मंत्रालय भी इस पर गंभीर है। कहा कि महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश में 33 महिला थाने, सीसीटीवी नेटवर्क, 112 ऐप और स्कूल-कॉलेज के पास दुर्गा शक्ति वाहन तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही महिलाओं के लिए एक ऐप भी शुरू किया जा रहा है, जो कामकाजी महिलाओं को ट्रिपिंग सुविधा देगा। साइबर क्राइम पर उन्होंने कहा कि यह नया चैलेंज है, लेकिन पिछले दो सालों में इसमें कमी लाई गई है। आतंक फैलाने वालों से आतंकी जैसा सलूक बढ़ते एक्सटॉर्शन के मामलों पर डीजीपी ने सख्त लहजे में कहा कि जो व्यक्ति जनता में भय फैलाएगा, पुलिस उसके साथ वैसा ही सलूक करेगी। जो आतंक फैलाएगा, उसके साथ आतंकी जैसा ही व्यवहार होगा। विदेश में बैठे गैंगस्टरों पर भी लगाम लगाई जा रही है, पिछले दो सालों में 25 गैंगस्टरों को विदेश से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है और आगे भी प्रक्रिया जारी है। गुरुग्राम में रोडरेज पर उन्होंने कहा कि महिला बाइकर के साथ हुई घटना में आरोपी को राजस्थान से पकड़कर लाया गया है। रोडरेज की घटनाओं पर भी पुलिस गंभीर है युवराज मनचंदा मामले में पुलिस चूक की जांच दिल्ली के युवक युवराज मनचंदा की गुरुग्राम में मौत के मामले में पूछे गए सवाल पर डीजीपी ने माना कि गुरुग्राम पुलिस से चूक हुई है। उन्होंने कहा कि एसओपी के अनुसार किसी भी शव का अंतिम संस्कार तीन दिन बाद कर दिया जाता है। इस मामले में कोर्ट ने संज्ञान लिया है। कहां-कहां लैप्स हुए हैं, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

उज्जैन में मस्जिद विवाद ने लिया तूल, सुबह कार्रवाई के दौरान पथराव; 10 लोगों पर FIR

उज्जैन कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक मार्ग चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद (Shahi Masjid Ujjain) का करीब 10 फीट बाधक हिस्सा हटाया जा रहा है। सोमवार सुबह प्रशासन और‌ मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाजजन खुद बाधक हिस्सा हटाने पहुंचे। इस दौरान नारेबाजी हुई और कुछ समाजजन ने कार्रवाई का विरोध भी किया। उपद्रव करने की कोशिश कर रहे लोगों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज का एक तबका आगर नाके पर जमा हो गया। दोपहर करीब 12 बजे उपद्रवियों ने फिर पत्थर फेंके। पुलिस ने लाठी चार्ज किया। 10 पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। दोपहर तक लाठीचार्ज के बाद स्थिति नियंत्रण में हुई। मस्जिद के बाधक हिस्से को मस्जिद कमेटी तोड़ रही है। मस्जिद पक्ष की अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त इसके साथ ही शाही मस्जिद मामले में मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई की युगलपीठ ने भोजनावकाश के बाद की मामले में सुनवाई। विस्तृत आदेश देर शाम तक जारी होगा। उल्लेखनीय है कि उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ा मार्ग प्रस्तावित है। शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा इस सड़क की निर्धारित सीमा में बाधक बन रहा था। इसी हिस्से को हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। शहर काजी ने कहा- मस्जिद का मसला हल हो चुका है, अफवाहों पर ध्यान न दें उज्जैन में शादी मस्जिद का हिस्सा हटाने को लेकर उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा कि मस्जिद का मसला रात में ही हल हो चुका है। समाज के लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। बिना वजह बाजार में न खड़े हो और वहां न जाएं। ऐसी कोई बात नहीं है जिसके पीछे हम वहां जाएं। जिस बात के लिए वादा हुआ है वो काम पूरा होना है। वो लोग अपने काम को कर रहे हैं। अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। अफवाहों की वजह से घर से बाहर न निकलें।     उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा- शाही मस्जिद का मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं।  उज्जैन प्रशासन और शहर काजी ने भी आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। इसे लेकर उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निर्माण कार्य चल रहे हैं, मास्टर प्लान के हिसाब से मार्गों का चौड़ीकरण चल रहा है। इसमें अच्छी बात यह है कि सभी धर्म-समुदाय के लोग स्वतः इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।  उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें। https://t.co/3uv9WlGE7E#Ujjain  उनके मकान, धर्मस्थल जो भी बीच में आ रहे हैं, उन्हें वे स्वतः हटा रहे हैं। इसी क्रम में छत्री चौक पर आज शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें। उपद्रवियों ने पत्थर फेंके। क्राइम ब्रांच की महिला टीआई पुष्पा पांचाल को चोट लगी। यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को जोड़ता है। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बनाने के लिए मार्ग चौड़ीकरण किया जा रहा है। शाही मस्जिद के भीतर की तोड़ाई चल रही है। समाजजन खुद इसे हटा रहे हैं। हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला, आज सुनवाई शादी मस्जिद के हिस्से को हटाने के विरोध में मस्जिद कमेटी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंची थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मस्जिद 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और इसके ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं। आगर नाके पर विरोध-प्रदर्शन करने पहुंचे लोग। एकलपीठ में याचिका निरस्त होने के बाद इसे फिर से युगलपीठ के सामने प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने दावा किया था कि 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी। उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क है। शाही मस्जिद को हटाने की प्रशासनिक तैयारी के बीच मस्जिद पक्ष की याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर युगल पीठ में सोमवार को सुनवाई होगी। एकल पीठ याचिका को 15 दिन पहले निरस्त कर चुकी है, अब सबकी नजरें युगल पीठ की सुनवाई पर लगी हुई हैं। शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा (एक तरफ से चार फीट और दूसरी तरफ से नौ फीट) हटाया जा रहा है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम मस्जिद द्वारा मस्जिद 636 साल पुरानी होने का दावा करते कहा जा रहा है कि भवन का हिस्सा तोड़े जाने से पूरी संरचना को नुकसान पहुंचेगा और पूरी इमारत प्रभावित हो सकती है। वहीं, मस्जिद को हटाने की संभावित कार्रवाई को देखते हुए शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शाही मस्जिद के भीतर और बाहर एकत्रित रहे थे। रविवार को भी विरोध और नारेबाजी जारी रही थी। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए और पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती की गई। औवेसी ने जताया विरोध उधर, एआईएमआइएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शाही मस्जिद को हटाने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि वक्फ कानून में संशोधन इसीलिए किए गए ताकि कलेक्टर्स और राज्य सरकार को मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों, कब्रिस्तानों को मुसलमानों से छीन लिया जाए।

ज्ञान भारतम मिशन: राजस्थान की 23 लाख पांडुलिपियां होंगी डिजिटल, जिला स्तर पर बनेंगे संरक्षण केंद्र

जयपुर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित "ज्ञान भारतम मिशन" के तहत राजस्थान राज्य में "पाण्डुलिपि डिजिटलीकरण कार्यशाला" का आयोजन सोमवार को जयपुर के झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन तथा कला एवं संस्कृति मंत्री  दिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव वी.निवास उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने कागज या ग्रन्थ नहीं हैं, ये भारत के हजारों वर्षों के साहित्य, परम्परा, इतिहास और दर्शन की धरोहर हैं। इनमें हमारे पूर्वजों के अनुभव, शोध और ज्ञान का भण्डार सुरक्षित है। एक पाण्डुलिपि केवल अतीत की कहानी नहीं कहती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए नए मार्ग खोलती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में "ज्ञान भारतम मिशन" इसी संकल्प को नई तकनीक से जोड़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि हमारा प्राचीन ज्ञान अलमारियों में बंद न रहे, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया तक पहुंचे और विकसित भारत की शक्ति बने। प्रधानमंत्री जी की सोच को केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी के मार्गदर्शन में साकार किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के मार्गदर्शन में राजस्थान में पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के तहत राजकीय व निजी संग्रह, पुस्तकालयों, मंदिर, मठों आदि से लगभग 23 लाख पांडुलिपियों का सर्वे किया गया है, जिसमें से लगभग एक लाख चौबीस हजार को डिजिटाइज्ड किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान की प्रत्येक पाण्डुलिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए ताकि युवा शोधार्थी, विद्यार्थी और आम जन भी हमारे शास्त्रों, आयुर्वेद, ज्योतिष और साहित्य के ज्ञान से जुड़ सकें। इसके लिए जिला स्तर पर भी संरक्षण केन्द्र विकसित किए जाएंगे और निजी संग्रहकर्ताओं को भी इस मिशन से जोड़ा जाएगा। प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर -मुख्य सचिव  मुख्य सचिव वी.निवास ने कहा कि प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं और ज्ञान भारतम मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राजस्थान का इतिहास और सभ्यता बहुत समृद्ध है। मिशन को और सफल बनाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों को साथ लेकर तालपत्रों के संरक्षण और संस्कृत शब्दावली तैयार करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और युवाओं को इस क्षेत्र में शोध के लिए प्रेरित किया जाए। पाण्डुलिपियों में छिपा ज्ञान यदि तकनीक के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध होगा तो यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की ज्ञान परम्परा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। उक्त कार्यशाला में संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली से संयुक्त सचिव समीर नंदा, निदेशक इंद्रजीत सिंह , आयुक्त पर्यटन विभागमती रुक्मणी रियार, शासनउप सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, अनुपम कायल, निदेशक राजस्थान संस्कृत अकादमी, डॉ. लतामाली, सयुंक्त निदेशक, पुरातत्व संग्रहालय विभाग,मती कृष्णकांता शर्मा, प्रबंधक रविन्द्र मंच, कविता गोदारा, सहायक नोडल अधिकारी ज्ञानभारतम, रजनीश हर्ष एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। ज्ञानभारतम मिशन के राजस्थान समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने राजस्थान का प्रजेंटेशन दिया और सभी राज्य से आये हुए अधिकारीगणों को अवगत कराया कि राजस्थान किस प्रकार इस मिशन में रोल मॉडल बनकर उभरा है।