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भारतीय यात्रियों के लिए खुशखबरी: वीज़ा फ्री देशों की संख्या बढ़कर 59 हुई

नई दिल्ली अगर आप भी विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं, तो अब वो हकीकत में बदल सकता हैं। साल 2025 में भारतीय पासपोर्ट की ताकत में और भी बढ़ोतरी हुई है। Henley Passport Index 2025 के अनुसार, अब भारतीय पासपोर्ट धारक 59 देशों में बिना वीज़ा या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। इस साल भारत की रैंकिंग 85वें स्थान से बढ़कर 77वें स्थान पर पहुँच गई है, जो काफी बड़ी छलांग मानी जा रही है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों के लिए अब ज़्यादा देशों में यात्रा करना आसान हो गया है। मलेशिया, थाईलैंड, मालदीव, मॉरीशस जैसे कई लोकप्रिय देश अब भारतीय नागरिकों को वीज़ा-फ्री एंट्री दे रहे हैं। वहीं, श्रीलंका, कतर और म्यांमार जैसे देशों में वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिल रही है। यानी अब आपको लंबी वीज़ा प्रक्रिया से गुज़रने की ज़रूरत नहीं है। वीज़ा-फ्री और वीज़ा-ऑन-अराइवल: क्या है अंतर? विदेश यात्रा की योजना बनाने से पहले इन दोनों में अंतर समझना ज़रूरी है: वीज़ा-फ्री देश: इन देशों में घूमने के लिए भारतीय पासपोर्ट धारकों को पहले से वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं होती। आप सीधे फ्लाइट बुक करके वहाँ जा सकते हैं। हालाँकि, हर देश के अपने नियम होते हैं जैसे कितने दिनों तक रुक सकते हैं या किन उद्देश्यों के लिए जा सकते हैं। वीज़ा-ऑन-अराइवल : इसका मतलब है कि आप जिस देश में जा रहे हैं, वहाँ एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वीज़ा ले सकते हैं। इसके लिए वहाँ के वीज़ा काउंटर पर एक फॉर्म भरना, ज़रूरी दस्तावेज़ देना और निर्धारित फीस चुकानी होती है। भारतीय अब इन 59 देशों में कर सकते हैं यात्रा भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा देने वाले देशों की पूरी सूची इस प्रकार है: वीज़ा-फ्री देश (कुल 30): अंगोला, बारबाडोस, भूटान, ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह, कुक द्वीप समूह, डोमिनिका, फिजी, ग्रेनाडा, हैती, ईरान, जमैका, कज़ाकिस्तान, केन्या, किरिबाती, मकाओ, मेडागास्कर, मलेशिया, मॉरीशस, माइक्रोनेशिया, मोंटसेराट, नेपाल, नियू, फिलीपींस, रवांडा, सेनेगल, सेंट किट्स और नेविस, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, वानुअतु वीज़ा-ऑन-अराइवल देश (कुल 27): 31. बोलीविया 32. बुरुंडी 33. कंबोडिया 34. केप वर्डे द्वीप समूह 35. कोमरो द्वीप समूह 36. जिबूती 37. इथियोपिया 38. गिनी-बिसाऊ 39. इंडोनेशिया 40. जॉर्डन 41. लाओस 42. मालदीव 43. मार्शल द्वीप समूह 44. मंगोलिया 45. मोज़ाम्बिक 46. म्यांमार 47. नामीबिया 48. पलाऊ द्वीप समूह 49. कतर 50. समोआ 51. सिएरा लियोन 52. सोमालिया 53. श्रीलंका 54. सेंट लूसिया 55. तंजानिया 56. तिमोर-लेस्ते 57. तुवालु इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉरिटी वाले देश (2): 58. ज़िम्बाब्वे 59. सेशेल्स (ETA एक डिजिटल परमिट होता है जो यात्रा से पहले ऑनलाइन ही मिल जाता है।) यात्रा से पहले ज़रूरी जानकारी हर देश के अपने नियम होते हैं, जैसे रुकने की समय सीमा, ज़रूरी दस्तावेज़ या एंट्री की शर्तें। इसलिए, यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित देश की आधिकारिक वेबसाइट या दूतावास से पूरी जानकारी ज़रूर ले लें।

जसमत ग्राम के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में उठाई अतिक्रमण हटाने की मांग

विधायक की जनसुनवाई में पहुचे जसमत ग्राम के ग्रामीण,हनुमान मंदिर के सामने किये अतिक्रमण को हटवाने की मांग की, जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याएं,जनसुनवाई में आये 48 आवेदन आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा जनपद पंचायत के ग्राम जसमत में स्तिथ हनुमान मंदिर के सामने दान की गई जमीन पर ग्राम के कुछ लोगो ने अतिक्रमण कर लिया है,उक्त अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर आज ग्राम जसमत के ग्रामीण विधायक की जनसुनवाई में पहुचे ओर उक्त स्थल से अतिक्रमण हटाने की मांग का आवेदन सौपा । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रति बुधवार को आम जन की समस्याओं को सुनने आयोजित जन सुनवाई में पहुचे जसमत के ग्रामीणों ने विधायक को अपनी समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि ग्राम जसमत में हनुमान मंदिर स्तिथ है,इस मंदिर को दान में मिली जमीन पर कुछ लोगो ने अतिक्रमण कर लिया है उसे हटवाया जाये । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । आज जनसुनवाई में करीब 48 आवेदन ग्रामीणों की ओर से दिये गये है । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । विधायक ने जनसुनवाई में पहुचे मीडिया के साथियों से चर्चा में कहा की जनसुनवाई में जो भी आवेदन चाहे वे किसी मांग के हो या समस्या के निराकरण के हो उसकी हम साप्ताहिक समीक्षा करते है,जिन विभागों को आये आवेदन भेजे जाते है,उनसे भी कार्यवाही की जानकारी ली जाती है तथा जब विभागीय समीक्षा बैठक होती है उसमें भी भेजे गये आवेदनों पर की गई कार्यवाही की जानकारी ली जाती है । आज जनसुनवाई में कई विभागों के  आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा। विधायक कार्यालय से जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश दिलाने, पारिवारिक विवाद,रोजगार दिलाने, रास्ते से अतिक्रमण हटवाने,नगर पालिका द्वारा पुश्तैनी मकान का अन्य रिश्तेदार के नाम नामांतरण कर देने की शिकायत,परोलिया पार मैं मांगलिक भवन निर्माण,प्रधानमंत्री आवास योजना की तृतीय क़िस्त प्रदाय कराने,खेत सड़क मार्ग निर्माण बमुलिया खिंची में करवाने, स्वीकृत कॉलोनी के रास्ते के निर्माण पर आपत्ति लगाना,सास बहू का पारिवारिक विवाद हल करवाने, आर्थिक सहायता दिलाने, प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय कराने,ग्राम किल्लोद में ग्रेवल रोड निर्माण कराने, ग्राम कादूखेड़ी में लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण कराने, सोयाबीन फसल खराब होने पर मुआवजा राशि दिलाने,सड़क पर नाली निर्माण को रुकवाने सहित अन्य 48 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2025 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 जुलाई

जयपुर राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती 2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। उम्मीदवार इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in पर जाकर 25 जुलाई 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।  बोर्ड द्वारा ग्राम विकास अधिकारी पद पर चयनित उम्मीदवारों को प्रारंभिक नियुक्ति के दौरान निश्चित मासिक वेतन दिया जाता है। हालांकि, स्थायी नियुक्ति मिलने के बाद न केवल सैलरी में बढ़ोतरी होती है, बल्कि उन्हें कई सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी मिलते हैं। ऐसे में आइए जानें ग्राम विकास अधिकारी की सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी और स्थायी नियुक्ति के बाद मिलने वाले लाभों का विस्तृत विवरण। प्रारंभिक वेतनमान और पे स्केल राज्य सरकार द्वारा ग्राम विकास अधिकारी (VDO) पद के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पे मैट्रिक्स लेवल-6 में वेतन निर्धारित किया गया है। इस स्तर पर वेतन 35,400 रुपये से शुरू होकर 1,12,400 रुपये तक जाता है। हालांकि, चयनित अभ्यर्थियों को शुरुआत में सीधे इस वेतनमान का लाभ नहीं मिलता, बल्कि उन्हें परिवीक्षा अवधि पूरी करने के बाद ही इसका लाभ मिल पाता है। फिक्स सैलरी का प्रावधान नियमानुसार, सभी चयनित उम्मीदवारों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि (Probation Period) के अंतर्गत नियुक्त किया जाता है। इस अवधि में वेतन श्रृंखला के स्थान पर केवल राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियत पारिश्रमिक (Fixed Remuneration) प्रदान किया जाता है। यह राशि आमतौर पर 18,000 रुपये से 23,700 रुपये के बीच होती है। इस दौरान उन्हें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता (DA, HRA, आदि) नहीं दिया जाता। चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति प्रक्रिया चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, चयनित अभ्यर्थियों की सूची राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को भेजी जाती है। वहां से जिलेवार मेरिट लिस्ट तैयार कर प्रोबेशनर ट्रेनी के रूप में अभ्यर्थियों को नियुक्त किया जाता है। यह प्रक्रिया विभागीय स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित होती है। स्थायी नियुक्ति की शर्तें और मिलने वाले लाभ परिवीक्षा अवधि के दौरान प्रशिक्षण, मूल्यांकन और परीक्षा पास करना जरूरी होता है। सफलतापूर्वक स्थायी नियुक्ति मिलने पर अभ्यर्थी को वेतनमान, DA, HRA, चिकित्सा सुविधा, और अन्य सरकारी भत्तों का लाभ मिलता है। इसके अलावा, प्रमोशन और वार्षिक वेतन वृद्धि भी निर्धारित नियमों के अनुसार दी जाती है।  

Reels का जादू या जाल? सेहत पर पड़ रहा है खतरनाक असर

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर रील्स देखना आजकल युवाओं के लिए दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। खासकर रात में सोने से पहले रील्स या शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना एक सामान्य आदत बन गई है, लेकिन ये आदत मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात को लगातार रील्स देखने से डिजिटल एंजायटी यानी इंटरनेट से जुड़ी मानसिक बेचैनी तेजी से बढ़ रही है। ग्वालियर के जेएएच अस्पताल में मानसिक रोग विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल में 18 से 30 वर्ष के युवाओं में मानसिक परामर्श लेने वालों की संख्या में 40% तक बढ़ोतरी हुई है। इनमें ज़्यादातर छात्र, नौकरीपेशा लोग या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं, जो दिनभर की थकान मिटाने के लिए रात को मोबाइल पर रील्स देखते हैं। लेकिन यह आदत उन्हें राहत देने की बजाय और ज्यादा बेचैन कर रही है। नींद का पैटर्न हो रहा गड़बड़ मनोचिकित्सक डॉ. अतर सिंह के अनुसार, रील्स की लत धीरे-धीरे 'डूम स्क्रॉलिंग' में बदल जाती है। व्यक्ति घंटों तक मोबाइल पर स्क्रॉल करता रहता है, लेकिन उसे संतोष नहीं मिलता। इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी महसूस होती है। यह आदत धीरे-धीरे डिप्रेशन और सोशल आइसोलेशन का कारण भी बन सकती है। डोपामिन हिट्स से बढ़ रही बेचैनी रील्स की तेजी से बदलती क्लिप्स दिमाग को लगातार डोपामिन हिट्स देती हैं। इससे दिमाग बार-बार उसी खुशी की तलाश करता है। जब ये हिट कम होने लगती है, तो व्यक्ति बेचैन और असहज महसूस करने लगता है, जिसे विशेषज्ञ 'डिजिटल एंजायटी' कहते हैं। बचाव के उपाय मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर का सुझाव है कि सोशल मीडिया के उपयोग पर एक समय-सीमा तय करनी चाहिए। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल बंद कर देना चाहिए। उसकी जगह किताब पढ़ें, धीमा संगीत सुनें या मेडिटेशन करें। अगर लगातार बेचैनी, नींद न आना या चिड़चिड़ापन महसूस हो, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

स्कूलों में जंक फूड पर लगाम: CBSE ने तय किए तेल-चीनी के नए नियम

ग्वालियर अब छात्रों को स्कूल में मिलने वाले समोसे, पेस्ट्री, जूस या चाय के साथ यह जानकारी भी मिलेगी कि उनमें कितना तेल और शक्कर मिला है। CBSE ने एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि कैंटीन, मेस या कैफेटेरिया में मिलने वाले खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त ऑयल और शुगर की मात्रा बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह निर्णय बच्चों में बढ़ती मोटापा, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। CBSE का मानना है कि यदि छात्र खुद यह जानेंगे कि वे क्या खा रहे हैं और उसमें कितनी कैलोरी, शुगर और फैट है, तो वे अपने खानपान को लेकर ज्यादा जागरूक होंगे। ग्वालियर के स्कूलों में भी लागू होंगे नियम ग्वालियर के सभी CBSE स्कूलों में अब कैंटीन के बाहर ऐसे बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर हर स्नैक की पोषण जानकारी दी जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी समोसे का वजन 100 ग्राम है तो उसमें लगभग 28 ग्राम तेल होता है, जिससे लगभग 362 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। इसी तरह एक 300ml कोल्ड ड्रिंक में 32 ग्राम शक्कर और 132 कैलोरी पाई जाती है। सेहत के लिए फायदेमंद पहल रिटायर्ड बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.पी.एस. जादौन का कहना है कि यह कदम खासतौर पर किशोरावस्था के छात्रों के लिए बेहद जरूरी है। इस उम्र में अनहेल्दी डाइट भविष्य में मोटापा, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है। इस तरह की पहल छात्रों को फूड अवेयरनेस के प्रति सजग बनाएगी। स्कूल प्रिंसिपल और शहरवासी भी हुए सहमत एक निजी स्कूल के प्राचार्य विनय झलानी ने CBSE की इस पहल को सराहा और कहा कि अब समय आ गया है कि हम बच्चों को पोषण से जुड़ा ज्ञान भी दें। स्कूल प्रशासन के मुताबिक वे जल्द ही इन न्यूट्रिशन बोर्ड्स को स्कूल में लगाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। वायरल अफवाह ने मचाई थी हलचल कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई थी जिसमें दावा किया गया था कि अब हलवाई और होटल संचालकों को भी जलेबी, समोसे और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में प्रयुक्त तेल और शक्कर की मात्रा बतानी होगी। हालांकि यह खबर अफवाह निकली, लेकिन इसने आमजन में हलचल जरूर मचा दी। ग्वालियर के स्थानीय मिष्ठान विक्रेता दीपू गुप्ता ने बताया कि जलेबी और समोसे में आमतौर पर सरसों का तेल ही उपयोग होता है और किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती। लेकिन हर चीज में तेल और शक्कर का प्रतिशत बताना तकनीकी रूप से जटिल है।

मध्यप्रदेश के बड़े गांवों को मिलेगा नियोजित विकास का तोहफा, मास्टर प्लान की तैयारी शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के 2000 से ज्यादा आबादी वाले गांवों को आदर्श गांव बनाने के लिए जल्द ही एक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. इसके लिए संभागों से 5-5 गांवों का चयन किया गया है. प्रदेश के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि इस योजना के तहत पहले चरण में राज्य के संभागों से 5-5 गांवों का चयन किया गया है, जिन्हें आदर्श गांवों के रूप में विकसित किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि मास्टर प्लान का उद्देश्य 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों का विकास करना है ताकि विकास का प्रवाह अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंच सके. इस योजना का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है जहां विकास को लागू करके बदलाव लाया जा सके. इस मामले पर बात करते हुए पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश के गांवों को लेकर मास्टर प्लान का उद्देश्य 2,000 से अधिक आबादी वाले गांवों को विकसित करना है। इस मास्टर प्लान की विकास की धारा अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रयास ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है जहां विकास को अमली जामा पहना कर परिवर्तन लाया जा सके। इन गांवो के विकास के लिए सरकार की तरफ से मास्टर प्लान बनाकर इनका विकास किया जाएगा। इससे लोगों को काफी सुविधाएं मिल जाएंगी मंत्री ने कहा कि दो हजार से अधिक की आबादी वाले गांवों की पहचान होनी है ताकि उन्हें आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पांच संभाग से पांच गांव लिए गए हैं, जिनमें इंदौर का परवलिया, उज्जैन का चिंतामन जवासिया, ग्वालियर का बदरवास, जबलपुर का बरमान और सागर का मडियादो शामिल हैं। पटेल ने कहा कि इन गांवों को आदर्श के तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि अन्य गांवों के लिए योजना बनाने में सुविधा हो। प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों की पहचान की जानी है ताकि उन्हें आदर्श गांवों के रूप में विकसित किया जा सके. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पांच संभागों से 5 गांवों को चुना गया है. इनमें इंदौर का परवलिया, उज्जैन का चिंतामन जवासिया, ग्वालियर का बदरवास, जबलपुर का बरमान और सागर का मड़ियादोह. उन्होंने कहा कि इन गांवों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि अन्य गांवों के लिए योजना बनाना आसान हो सके. 

वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू

पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए त्रि-पक्षीय अनुबंध आज 24 जुलाई को आज 24 जुलाई को होगा पेसा एक्ट पर त्रि-पक्षीय समझौता, ग्राम स्वशासन को मिलेगा बल वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू भोपाल प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आज 24 जुलाई को त्रि-पक्षीय अनुबंध होगा। अनुबंध सचिव पंचायती राज मंत्रालय, केन्द्र सरकार, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा। कार्यक्रम मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान वाल्मी, भोपाल में आज 24 जुलाई को शाम 4 बजे से होगा। कार्यक्रम में पेसा एक्ट पर बनी पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा। साथ ही देशभर से आए पेसा एक्ट पैनलिस्ट, विशेषज्ञों के बीच चर्चा होगी। प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन, उपनियमों को लागू करना, जनजातीय समुदाय को प्रशिक्षण देना, जनजातीय समुदाय की परंपराओं की रक्षा, नए शोध, जनजातीय कलाओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए और जनजातीय समुदाय के बीच हो रहे बेहतर कार्यों का प्रचार-प्रसार, के बारे में चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में केन्द्रीय सचिव पंचायती राज मंत्रालय विवेक भारद्वाज, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, संचालक सह आयुक्त पंचायत राज संचालनालय छोटे सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

काली ब्रा से ब्रेस्ट कैंसर का डर सिर्फ एक मिथक, मेडिकल रिसर्च ने किया साफ

नई दिल्ली   हाल ही में सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि काली रंग की ब्रा पहनने से महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इस खबर ने कई महिलाओं को डराया है, जबकि कुछ इसे अफवाह मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं। आइए, इस दावे की वैज्ञानिक जांच करते हैं और समझते हैं कि इसमें कितनी हकीकत है। काली ब्रा और ब्रेस्ट कैंसर का दावा कैसे फैला? इंटरनेट पर कई बार यह बात सामने आई है कि काली ब्रा, खासकर टाइट या अंडरवायर ब्रा पहनने से शरीर में गर्मी बढ़ती है, जिससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है और यह ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों का मानना है कि काले रंग की ब्रा सूरज की किरणों को ज्यादा सोखती है, जिससे स्तन के टिश्यू में गर्मी बढ़ती है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन क्या यह सच है? क्या है वैज्ञानिक सच? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और Cancer Research UK जैसी प्रमुख संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि ब्रा का रंग, चाहे वह काला हो या कोई भी रंग, ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनता है। 2014 में फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर, सिएटल की एक स्टडी में 1500 महिलाओं पर रिसर्च की गई, जिसमें ब्रा पहनने की आदतों जैसे कि ब्रा की टाइटनेस, पहनने का समय, और रंग का ब्रेस्ट कैंसर से कोई संबंध नहीं पाया गया। 2023 में कैंसर रिसर्च यूके ने भी इस बात को दोहराया कि ब्रा का रंग या स्टाइल ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ा नहीं है। 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में मैमोग्राम और बायोप्सी डेटा की मदद से यह पाया गया कि ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क फैक्टर्स में जेनेटिक म्यूटेशन (BRCA1 और BRCA2 जीन), फैमिली हिस्ट्री, हार्मोनल बदलाव, मोटापा, शराब और स्मोकिंग जैसे कारण शामिल हैं, लेकिन ब्रा का रंग या टाइट होना इनमें कहीं भी शामिल नहीं है। डॉक्टर क्या कहते हैं? नई दिल्ली के अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रमेश शर्मा, जो 20 सालों से ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, कहते हैं कि काली ब्रा और ब्रेस्ट कैंसर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह सिर्फ एक मिथक है जो सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का खतरा मुख्य रूप से जेनेटिक कारणों, जीवनशैली और उम्र से जुड़ा होता है। उन्होंने यह भी बताया कि बहुत टाइट ब्रा पहनने से त्वचा में जलन या चुभन हो सकती है, लेकिन इससे कैंसर नहीं होता। इसलिए महिलाओं को चाहिए कि वे नियमित रूप से मैमोग्राम करवाएं और ब्रेस्ट का सेल्फ-चेकअप करें। अगर ब्रेस्ट में कोई गांठ, निप्पल से स्राव, या त्वचा में कोई बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।   काली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होने का दावा पूरी तरह से गलत और बिना किसी वैज्ञानिक आधार के है। महिलाओं को इस तरह की अफवाहों से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे अपनी सेहत का ध्यान रखें, नियमित जांच कराएं और सही जानकारी ही फैलाएं।  

वर्ल्ड पॉवर चैम्पियनशिप में 10 लाख से अधिक स्कूली छात्रों ने की भागीदारी

भोपाल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंग्लिश भाषा के शिक्षकों के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। प्रशिक्षण के लिये भोपाल में एक राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान इंग्लिश लर्निंग ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट (ईएलटीआई) कार्यरत है। यह संस्थान राज्य के समस्त शासकीय, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षण संस्थानों में इंग्लिश भाषा संबंधी अकादमिक और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मार्गदर्शन एवं सहयोग कर रहा है। ईएलटीआई संस्थान इंग्लिश भाषा अध्यापन क्षेत्र में सतत उन्नयन एवं स्तरीकरण के लिये हैदराबाद के इंग्लिश एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (ईएफएलयू) से सहयोग प्राप्त कर रहा है। इंग्लिश भाषा शिक्षकों का प्रशिक्षण स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी सकूलों में इंग्लिश भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया है। प्रशिक्षण के लिये ईएलटीआई ने शिक्षण सत्र के लिये कैलेंडर तैयार किया है। संस्थान इंग्लिश भाषा के मूल्यांकन के लिये विभिन्न स्तरों के प्रश्न-पत्रों के निर्माण और अन्य विषय के प्रश्न-पत्रों के अनुवाद कार्य में भी सहयोग कर रहा है। इंग्लिश भाषा के शिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े डिप्लोमा कोर्स कराने के लिये उनकी चयन प्रक्रिया में भी सहयोग कर रहा है। प्रदेश के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में कार्यरत शिक्षकों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में संस्थान विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता के आकलन एवं मूल्यांकन के कार्यों को भी सतत रूप से कर रहा है। इंग्लिश ओलम्पियाड संस्थान ने पिछले वर्ष इंग्लिश विषय में कक्षा-2 से 8 के लिये संकुल, विकासखण्ड तथा जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिये ओलम्पियाड प्रश्न बैंक तथा प्रश्न-पत्रों का निर्माण किया था। पिछले वर्ष ओलम्पियाड में शामिल छात्रों की संख्या 10 लाख से अधिक रही। संस्थान ने माध्यमिक शालाओं में इंग्लिश विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिये आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण के लिये मेन्युअल का भी निर्माण किया है। संस्थान ने राज्य द्वारा निर्मित कक्षा-1 से 8 तक की इंग्लिश की पाठ्य-पुस्तकों और एनसीईआरटी से जुड़ी कक्षा-9 से 12 तक की पाठ्य-पुस्तकों के निर्माण में समन्वय का कार्य भी किया है।  

कोर्ट ने जताई चिंता: ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं डिलीवरी कर्मचारी, पुलिस नहीं करती वैरिफिकेशन

इंदौर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई बिंदुओं पर बात की। ऑनलाइन खाने-पीने का सामान सप्लाय करने वालों को लेकर कहा कि सबसे ज्यादा रेड सिग्नल जंप डिलीवरी वाले ही करते हैं। दो मिनट बचाने रेड लाइट जंप करते हैं और कुछ नहीं होता। ये हमारे घरों तक पहुंच रखते हैं, लेकिन इनके पुलिस सत्यापन की व्यवस्था नहीं है। कभी इनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं जांचा। इस बारे में नीति बनानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन बेल्ट, उद्यान और फुटपाथ पर धड़ल्ले से धार्मिक स्थल बन रहे हैं, लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। ये धार्मिक स्थल यातायात को बाधित कर रहे हैं। यह किसी एक क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे शहर की समस्या है। इसका स्थायी समाधान जरूरी है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर धार्मिक गतिविधियों के नाम पर कब्जा हो रहा है। हालत यह हो जाती है कि 80 फीट चौड़ी सड़क पर भी चलना मुश्किल है। ई-रिक्शा को लेकर कोई योजना नहीं कोर्ट ने ई-रिक्शा की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। कहा कि इस बारे में सख्ती से कार्रवाई जरूरी है। पुलिस ई-रिक्शा चालकों के पुलिस सत्यापन, ट्रेनिंग इत्यादि की व्यवस्था करे। ई-रिक्शा के चालकों की कोई सूची नहीं है। कभी उनका आपराधिक रिकार्ड नहीं जांचा जाता। इस संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहिए। यह कहा याचिकाकर्ता ने याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि     चौराहों पर लगे सिग्नल 24 घंटे चालू रखे जाएं।     पुलिसकर्मी चौराहों पर यातायात नियंत्रित करने के बजाय मोबाइल चलाते हैं। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।     वीआईपी मूवमेंट के दौरान सिग्नल ग्रीन रखे जाएं।     सड़कों पर गड्ढों की समस्या का स्थायी समाधान हो। कोर्ट ने कहा कि     जो रेड लाइट जंप करते हैं, उन्हें वहीं दो घंटे रोकें।     जिस चौराहे पर चालान बन रहे हैं, वहां तैनात पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।     बीमा रिन्यू करने वाली कंपनी पहले बकाया चालान जमा कराए। इसके बाद बीमा रिन्यू किया जाए।     कार पुलिंग को बढ़ावा दें। शुरुआत हाई कोर्ट से हो सकती है। एक ऑफिस से जुड़े वकील एक कार से कोर्ट आएं तो सड़क पर वाहन संख्या कम करने में मदद होगी।     आईटीएमएस साफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी और कानूनी कार्रवाई के लिए सैकड़ों स्थानों पर हाईडेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं।     पिछले दो वर्ष में यातायात पुलिस द्वारा 12 लाख से अधिक ई-चालान किए गए हैं।     यातायात नियमन के तीनों घटकों – यातायात इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।     सरकार ने राहवीर योजना शुरू की है। इसके तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाले व्यक्ति को उचित पुरस्कार दिया जाता है।     किसी भी समय समस्या पर प्रतिक्रिया देने और उसका समाधान करने के लिए 40 से अधिक त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) बनाए गए हैं।