samacharsecretary.com

30 मई 2019 से अब तक यानी 2258 दिन तक गृह मंत्रालय की कमान, अमित शाह ने नया रिकार्ड बनाया

नई दिल्ली  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया है। वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेता बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। खास बात है कि उन्होंने यह उपलब्धि 5 अगस्त को हासिल की है। इसी दिन उन्होंने संसद में जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का ऐलान किया था। अमित शाह भारत के गृहमंत्री पद पर 2 हजार 258 दिनों से हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 30 मई 2019 को यह पद पहली बार संभाला था। इसके बाद 2024 में NDA सरकार बनने के बाद भी वह इस पद पर काबिज हुए। इस पद पर आडवाणी के बाद कांग्रेस दिग्गज गोविंद वल्लभ पंत सबसे ज्यादा समय तक रहे हैं। एक ओर जहां आडवाणी ने 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक कुल 2 हजार 256 दिन गृहमंत्री के तौर पर सेवाएं दीं। वहीं, पंत 10 जनवरी 1955 से 7 मार्च 1961 तक इस पद पर रहे। यानी कुल 6 साल 56 दिन तक वह गृहमंत्री रहे। खास बात है कि शाह देश के पहले सहकारिता मंत्री भी हैं। इससे पहले वह गुजरात के गृहमंत्री भी रह चुके हैं। पीएम मोदी ने की तारीफ मंगलवार को प्रधानमंत्री ने NDA सांसदों के साथ बैठक में गृह मंत्री अमित शाह की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वह अब सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले केंद्रीय गृह मंत्री बन गए हैं। पीएम ने भाषण में कहा कि पांच अगस्त एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि इसी दिन पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था। उन्होंने कहा कि NDA सरकार ने संविधान का सही अर्थों में पालन किया है। खास बात है कि मंगलवार को भाजपा की अगुवाई वाली NDA सरकार ने जून 2024 में सरकार बनने के बाद से संसद के सत्रों के दौरान इस तरह की यह दूसरी बैठक की है।  

लाल निशान पर बाजार बंद, अमेरिकी टैरिफ ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 308.47 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,710.25 और निफ्टी 73.20 अंक या 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,649.55 पर था। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 225.50 अंक या 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,206.85 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 28.85 अंक या 0.16 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,864.55 पर था। निफ्टी में आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी, मीडिया और एनर्जी इंडेक्स लाल निशान में थे, जबकि मेटल, ऑटो और कमोडिटी इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स पैक में टाइटन, मारुति सुजुकी, ट्रेंट, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एसबीआई, एलएंडटी, एचसीएल टेक और एक्सिस बैंक टॉप गेनर्स थे। रिलायंस, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल (जोमैटो), बीईएल, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड और आईटीसी टॉप लूजर्स थे। जानकारों के मुताबिक, बाजार के गिरने की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर और टैरिफ लगाए जाने की धमकी को माना जा रहा है। आशिका इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने नोट में कहा, "क्षेत्रवार रुझान मिले-जुले रहे, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में अपेक्षाकृत मजबूती देखी गई, जबकि ज्यादातर अन्य क्षेत्र नुकसान में रहे। खास तौर पर, तेल और गैस, फार्मा, निर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं में भारी गिरावट देखी गई।" नोट में आगे कहा कि मौद्रिक नीति से पहले बाजार में निवेशकों के बीच सर्तकता देखी गई। सत्र के दूसरे भाग में बैंकिंग शेयरों में बिकवाली हुई। बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी। सुबह करीब 9 बजकर 58 मिनट पर सेंसेक्स 384.11 अंक या 0.47 प्रतिशत की गिरावट के बाद 80,634.61 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 113.80 अंक या 0.46 प्रतिशत की गिरावट के बाद 24,608.95 पर था।

नापाक याराना फिर याद दिलाया गया! टैरिफ विवाद पर भारत की सैन्य प्रतिक्रिया ने अमेरिका को घेरा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बोल और भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद दोनों देशों में जारी तनातनी के बीच भारतीय सेना ने अमेरिका को आईना दिखाया है और 54 साल पुराना वाकया याद दिलाया है। दरअसल, भारतीय सेना ने मंगलवार को 1971 में प्रकाशित एक अखबार की क्लिप शेयर कर अमेरिका पर तंज कसा है। इस क्लिप में दिखाया गया है कि अमेरिका कैसे दशकों से पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है। यह पोस्ट इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से भारत के तेल खरीदने पर भारतीय सामानों पर और अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। एक दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि वह भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करेंगे क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद कर रहा है लेकिन अमेरिका खुद भूल गया कि उसका अतीत कैसा रहा है। भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने क्या लिखा? इसी संदर्भ में ट्रंप सरकार को आईना दिखाते हुए भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने 5 अगस्त, 1971 को प्रकाशित अखबार की एक क्लिप साझा की है। उस क्लिप में तत्कालीन रक्षामंत्री विद्याचरण शुक्ला द्वारा राज्यसभा में दिए गए बयान का जिक्र है। तब शुक्ला ने नाटो शक्तियों द्वारा पाकिस्तानी सेना को संभावित हथियारों की सप्लाई को लेकर संसद में बयान दिया था। इसमें दिखाया गया है कि कैसे अमेरिका 1971 के युद्ध की तैयारी के लिए दशकों से पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई कर रहा था। सेना ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा है, “आज का दिन, युद्ध की तैयारी का वह साल – 5 अगस्त, 1971।” तब के रक्षा मंत्री ने संसद में दिया था बयान शुक्ला ने तब राज्यसभा में दिए अपने बयान में बताया था कि कैसे बांग्लादेश में इस्लामाबाद के सशस्त्र आक्रमण की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति को लेकर नाटो और सोवियत संघ से संपर्क किया गया था। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सोवियत संघ और फ्रांसीसी सरकार ने पाकिस्तान को हथियार देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना समर्थन जारी रखा था। इसमें यह भी कहा गया है कि तब अमेरिका और चीन दोनों ने पाकिस्तान को औने-पौने दामों पर हथियार बेचे थे। इससे यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान ने 1971 में भारत के साथ युद्ध दोनों देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए हथियारों से लड़ा था। इसमें एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है कि अमेरिका से पाकिस्तान को 1954 के बाद से करीब दो अरब डॉलर के हथियारों की आपूर्ति की गई है। पाकिस्तान पर मेहरबान ट्रंप बता दें कि अमेरिका अभी भी पाकिस्तान पर मेहरबान और नरम है क्योंकि उस पर लगाए गए टैरिफ इसी बात का संकेत देते हैं। हाल ही में अमेरिका ने जो टैरिफ लगाए हैं, उनमें पाकिस्तान को बड़ी छूट दी गई है। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान पर टैरिफ 29 प्रतिशत से घटकर 19 प्रतिशत कर दिया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिकी शुल्क में खासी बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर भारी मात्रा में रूस से तेल खरीदने और उसे बड़े मुनाफे पर बेचने का आरोप लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा, "भारत रूस से भारी मात्रा में तेल सिर्फ खरीद ही नहीं रहा है, बल्कि उस तेल के बड़े हिस्से को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है।" भारत पर बिदक रहे ट्रंप इसके साथ ही ट्रंप ने कहा, "उसे (भारत को) इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है। इसी वजह से मैं भारत से अमेरिका को दिए जाने वाले शुल्क को काफी बढ़ाने जा रहा हूं।" ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाने के साथ ही रूस से तेल एवं गैस खरीदने पर जुर्माना लगाने की भी घोषणा की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस से सैन्य उपकरण और कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर जुर्माना लगाने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में आई अधिसूचना में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया था।  

सेंचुरियन हो या मुंबई, जब टेस्ट मुकाबलों ने दिल जीत लिया

नई दिल्ली भारत और इंग्लैंड के बीच एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के लिए खेली गई पांच मैच की सीरीज 2-2 से बराबर रही जिससे कड़े मुकाबले वाली सीरीज की लंबी सूची में एक और चमकदार पन्ना जुड़ गया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ जबकि कोई टेस्ट सीरीज रोमांच के चरम पर समाप्त हुई हो। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है। पिछले डेढ़ दशक में हुए कुछ यादगार मुकाबलों का संकलन किया है, जिनमें टेस्ट क्रिकेट के उतार-चढ़ाव देखे गए। इस लिस्ट में भारत की 5 टेस्ट सीरीज शामिल है। आईए एक नजर डालते हैं पूरी लिस्ट पर- भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया, 2020-21 संभवतः यह क्रिकेट के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ सीरीज में से एक थी, जिसमें भारत ने अपने कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने और कुछ कड़ी चुनौतियों से पार पाकर ऑस्ट्रेलिया पर 2-1 से जीत दर्ज की। एडिलेड में 36 रन के अपने न्यूनतम स्कोर पर आउट होने से लेकर गाबा में तीन विकेट की जीत तक, कार्यवाहक कप्तान अजिंक्य रहाणे के नेतृत्व में भारत ने ऑस्ट्रेलियाई टीम को उसकी धरती पर ही धूल चटा दी थी। भारत बनाम श्रीलंका, 2015 इस सीरीज से ही नए कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में अगले दशक के लिए टेस्ट क्रिकेट में भारत के दमदार प्रदर्शन की शुरुआत की। गॉल में श्रीलंका ने भारत को 63 रन से हरा दिया। लेकिन भारत ने कोलंबो में अगले दो मैचों (पी सारा ओवल और एसएससी) में कोहली के कभी हार न मानने वाले रवैये को अपनाया तथा 278 और 117 रन से जीत हासिल करके सीरीज 2-1 से अपने नाम कर दी। भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका 2010-11 यह आखिरी टेस्ट सीरीज थी जिसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की मशहूर तिकड़ी ने अपना प्रभाव छोड़ा था। सेंचुरियन में पारी और 25 रन से मिली करारी हार के बाद भारत ने डरबन टेस्ट में जोरदार वापसी करते हुए 85 रन से जीत हासिल की, जहां लक्ष्मण ने डेल स्टेन और मोर्ने मोर्केल की आक्रामक जोड़ी के सामने 96 रन की पारी खेली थी। केपटाउन में अंतिम टेस्ट में भारत को मैच बचाने के लिए पूरे पांचवें दिन बल्लेबाजी करनी थी और वह गौतम गंभीर (184 गेंदों पर 68 रन), द्रविड़ (112 गेंदों पर 31 रन), तेंदुलकर (91 गेंदों पर नाबाद 14 रन) और लक्ष्मण (67 गेंदों पर नाबाद 32 रन) की बदौलत ऐसा करने में सफल रहा। भारत बनाम इंग्लैंड, 2011-12 अहमदाबाद में इंग्लैंड को नौ विकेट से हराने के बाद भारत चार मैचों की सीरीज में अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा था लेकिन केविन पीटरसन के शतक से प्रेरित होकर एलिस्टेयर कुक के नेतृत्व में इंग्लैंड ने मुंबई में भारत को 10 विकेट से हराया और फिर ईडन गार्डन्स में सात विकेट से जीत हासिल की। नागपुर में इंग्लैंड ने चौथा टेस्ट आसानी से ड्रॉ कराकर सीरीज 2-1 से जीत ली। जो रूट ने उस टेस्ट में डेब्यू किया था। ऑस्ट्रेलिया बनाम दक्षिण अफ्रीका, 2016-17 यह दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजों के बीच की जंग थी। दक्षिण अफ्रीका के पास कगिसो रबाडा और वर्नोन फिलैंडर थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया के पास मिशेल स्टार्क और जोश हेजलवुड जैसे गेंदबाज थे। दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों ने इस मुकाबले में बाजी मारी क्योंकि उन्होंने पर्थ और होबार्ट में अपनी टीम को जीत दिलाई जबकि ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड में डे-नाइट टेस्ट मैच जीता था। यह 2008 के बाद ऑस्ट्रेलिया की घरेलू सीरीज में पहली हार थी। न्यूजीलैंड बनाम पाकिस्तान 2017-18 जैसे ही न्यूज़ीलैंड ने अबू धाबी में कदम रखा, पाकिस्तान की अपने मजबूत स्पिन आक्रमण के कारण 3-0 से जीत की भविष्यवाणी की जाने लगी। लेकिन कीवी टीम ने पहला टेस्ट चार रन के मामूली अंतर से जीत लिया, जबकि पाकिस्तान ने दुबई में पारी और 16 रन से जीत हासिल की। लेकिन अबू धाबी में, कीवी टीम ने ऑफ स्पिनर विलियम सोमरविले के सात विकेटों की बदौलत 123 रन से जीत हासिल की और सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। भारत बनाम इंग्लैंड 2021-22 यह सीरीज कोविड-19 महामारी के कारण खाली स्टेडियमों में खेली गई थी। नॉटिंघम में ड्रॉ के बाद लॉर्ड्स में भारत ने 151 रन से जीत हासिल की लेकिन इंग्लैंड ने लीड्स में पारी और 76 रन से जीत हासिल करके हिसाब बराबर कर दिया था। भारत ने ओवल में चौथा टेस्ट 157 रन से जीता था, लेकिन सितंबर 2021 में मेहमान टीम के सदस्यों के कोविड पॉजिटिव पाए जाने के कारण दौरे को स्थगित कर दिया गया था। उस समय भारत पांच मैचों की सीरीज में 2-1 से आगे चल रहा था, लेकिन इंग्लैंड ने जुलाई 2022 में बर्मिंघम में खेले गए पांचवें टेस्ट में 378 रन से जीत हासिल करके सीरीज को बराबर कर दिया था।  

पूर्व CM भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाईकोर्ट जाने का दिया निर्देश

 रायपुर / नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आपराधिक मामलों में राहत पाने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा सीधे उसके पास आने की प्रथा की निंदा की।अदालत ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से की जा रही जांच के सिलसिले में हाई कोर्ट जाने को कहा। 'हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?' ये मामले छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और अन्य केस से संबंधित हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जायमाल्या बागची की पीठ ने पूछा कि प्राथमिकी, गिरफ्तारी और रिमांड तथा मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रविधानों के खिलाफ उनकी याचिकाओं पर शीर्ष अदालत को क्यों विचार करना चाहिए? पीठ ने सवालिया लहजे में पूछा, "याचिकाकर्ता हाई कोर्ट क्यों नहीं गए। वह भी संवैधानिक न्यायालय है और इस मुद्दे पर फैसला सुना सकता है। यही वह समस्या है, जिसका हम सामना कर रहे हैं। हाई कोर्ट इस मुद्दे पर फैसला क्यों नहीं कर सकता, अन्यथा उन अदालतों का क्या फायदा?" शीर्ष अदालत ने ये भी पूछा कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट क्यों नहीं गए, जो खुद भी एक संवैधानिक न्यायालय है और ऐसे मामलों पर फैसला कर सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘हम इसी समस्या को झेल रहे हैं। उच्च न्यायालय इस मामले का फैसला क्यों नहीं कर सकता? अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर उन अदालतों का क्या मतलब है? यह एक नया चलन बन गया है- जैसे ही कोई संपन्न व्यक्ति उच्चतम न्यायालय आता है, हम अपने निर्देशों को बदलने लगते हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आम लोगों और उनके साधारण वकीलों के लिए उच्चतम न्यायालयों में कोई जगह नहीं बचेगी।’’ SC क्यों पहुंचे थे पिता-पुत्र? भूपेश बघेल और चैतन्य बघेल ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और पीएमएलए के प्रावधानों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक एम. सिंघवी ने कहा, "गिरफ्तारी का यह सिलसिला पूरे देश में देखा जा रहा है और प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियां टुकड़ों में आरोपपत्र दाखिल कर रही हैं, किसी को भी फंसा रही हैं और सभी को गिरफ्तार कर रही हैं।” ईडी पर क्या-क्या आरोप? पूर्व मुख्यमंत्री की तरफ से पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं चल सकता। लोगों का नाम प्राथमिकी या शुरुआती आरोपपत्रों में नहीं होता, लेकिन अचानक उनके नाम पूरक आरोपपत्र में आ जाते हैं और उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है।’’ बघेल के बेटे की ओर से पेश सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम दो-तीन आरोपपत्रों में नहीं था, लेकिन मार्च में उनके घर पर अचानक छापा मारा गया और बाद में एक पूरक आरोपपत्र में उनका नाम आने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ED SC के फैसले का उल्लंघन कर रहा: सिब्बल सिब्बल ने दलील दी कि ईडी शीर्ष अदालत द्वारा 2022 के फैसले में निर्धारित कानून का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें गिरफ्तारी के उसके अधिकार को बरकरार रखा गया था। कपिल सिब्बल ने कहा कि इसलिए याचिका में पीएमएलए की धारा 50 और 63 की वैधता को चुनौती दी गई है। ये धाराएं अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति को तलब करने, दस्तावेज मंगवाने, जांच के दौरान बयान दर्ज करने और झूठा बयान देने पर सजा देने का अधिकार देती हैं। हाई कोर्ट जाने का आदेश पीठ ने पूछा कि अगर ईडी कानून का पालन नहीं कर रहा था या प्रक्रिया से भटक रहा था, तो क्या कोई इसे अदालत के संज्ञान में लेकर आया या जांच एजेंसियों की कार्रवाई को चुनौती दी। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत पहले भी कह चुकी है कि आरोपपत्र दाखिल होने के बाद आगे की जांच केवल अदालत की अनुमति से ही हो सकती है। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसे कई मामले होते हैं जहां कानून वैध होता है, लेकिन उस पर की गई कार्रवाई अवैध हो सकती है।’’ अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे अपने मामले से जुड़े सभी तथ्य उच्च न्यायालय के समक्ष रखें। पीएमएलए की धाराओं 50 और 63 को चुनौती देने के संबंध में पीठ ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस मुद्दे पर नई रिट याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं, और न्यायालय उन पर सुनवाई लंबित मामलों के साथ करेगा। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी और उच्च न्यायालय से कहा कि वह उनकी याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई करे।  

बड़ी खबर: आयुष्मान योजना पर संकट, IMA ने दी 7 अगस्त से सेवाएं रोकने की धमकी

नई दिल्ली  बीजेपी सरकार के शासन वाले हरियाणा में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जो लाखों आयुष्मान कार्डधारकों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 7 अगस्त तक निजी अस्पतालों का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो वे आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर देंगे। इस फैसले से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच संकट में पड़ सकती है। आइए जानते हैं इस गंभीर हालात के पीछे की असली वजहें और इसका प्रभाव। आयुष्मान भारत योजना पर संकट क्यों? हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना ने गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारियों के इलाज में राहत दी है। योजना के तहत कार्डधारकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जो सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में उपलब्ध है। लेकिन अब लगभग 500 करोड़ रुपये के बकाए के कारण निजी अस्पताल इस सेवा को जारी रखने में असमर्थता जता रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने स्पष्ट किया है कि अगर यह बकाया राशि जल्द न चुकाई गई, तो वे योजना के अंतर्गत इलाज देना बंद कर देंगे। मरीजों को हो सकता है बड़ा नुकसान हरियाणा में लगभग 650 निजी अस्पताल इस योजना के अंतर्गत सेवाएं प्रदान करते हैं और 5 लाख से अधिक कार्डधारक इससे लाभान्वित हैं। लेकिन बकाया भुगतान रोकने से अस्पतालों के हाथ-पांव फूल सकते हैं, जिससे कैंसर, हृदय रोग, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। IMA ने सरकार से आयुष्मान योजना के लिए बजट को मौजूदा 800 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये करने की मांग की है, ताकि भविष्य में बकाया भुगतान जैसी समस्या दोबारा न आए। दूसरी ओर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री ने इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए आश्वासन दिया है कि सरकार जल्द से जल्द बकाया राशि का भुगतान करेगी और योजना को बिना बाधा के जारी रखा जाएगा।

CMHO की सख्ती: हथाईखेड़ा अस्पताल के 25 स्वास्थ्यकर्मियों पर गिरी गाज, कारण बताओ नोटिस भेजा

भोपाल  राजधानी के सिविल अस्पताल हथाईखेड़ा में लापरवाही और अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है। जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1 अगस्त 2025 को कराए गए आकस्मिक निरीक्षण में अस्पताल के 25 स्वास्थ्यकर्मी अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल मनीष शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 3 कार्यदिवस के भीतर स्पष्टिकरण मांगा है। जवाब नहीं मिलने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। डॉक्टर्स से लेकर टेक्नीशियन तक शामिल प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुबह 9:45 बजे तक अस्पताल में कोई नर्सिंग स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना पड़ा। अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों से लेकर तकनीकी स्टाफ तक शामिल हैं। अनुपस्थित पाए गए प्रमुख स्वास्थ्यकर्मी: चिकित्सा अधिकारी 1. डॉ. योगेश सिंह कुरव 2. डॉ. सुनन्दा जैन 3. डॉ. अब्दुल हाफीज 4. डॉ. मनीष मुकाती 5. डॉ. दानिष पटेल 6. डॉ. दयाशंकर त्रिमूर्ति 7. डॉ. भावना मालवीया 8. डॉ. हर्षिता शर्मा 9. डॉ. सुरती शर्मा नर्सिंग ऑफिसर  10. संध्या नारीया 11.  रजनी मोवाडे 12. भाग्यश्री फाटेगाओंकर 13. मोनीका बोबड़े 14.  मेघा सोनी 15.  लीना जाटव 16.  रेखा गुप्ता 17. श्रष्टि खसदेव (प्रशिक्षक) 18.मीना वाडकेले 19. पायल भास्कर और ये भी पढ़े     फार्मासिस्ट और तकनीकी स्टाफ 20.ममता माजोका 21. ललीता साह 22. एन.एन. वर्मा 23. ज्ञान सिंह बोरेला (लैब टेक्नीशियन) 24. लोकेश जैन (लैब टेक्नीशियन) 25. जयदीप माजोका (एक्स-रे टेक्नीशियन) नोटिस में कहा गया है कि इन कर्मचारियों की समय पर गैर-मौजूदगी से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका, जो कि सेवा अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारी का उल्लंघन है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आपकी अनुपस्थिति से हितग्राहियों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित होना पड़ा है। यह घोर लापरवाही है। 3 दिन के भीतर जवाब दें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, यह निरीक्षण भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि समयपालन, जिम्मेदारी और मरीजों को गुणवत्ता वाली सेवा सुनिश्चित की जा सके।  

EPF में गड़बड़ी से परेशान? ये है सरकारी समाधान पोर्टल और शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली क्या आपकी सैलरी से कट रहा पीएफ अमाउंट पासबुक में दिखाई नहीं दे रहा? या फिर आप अपनी पिछली जॉब में कटा पीएफ का पैसा अपने अकाउंट में नहीं देख पा रहे? तो जान लें कि अब सिर्फ एक सरकारी पोर्ट्ल पर आपको पीएफ से जुड़ी हर समस्या का समाधान मिल जाएगा। आपको अपने पीएफ अकाउंट से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। दरअसल सरकार ने इसके लिए पोर्टल लॉन्च किया है जहां आप पीएस खाते से जुड़ी किसी भी शिकायत को दर्ज करा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर रिमाइंडर भी भेज सकते हैं। चलिए इस पूरे तरीके को समझते हैं और जानते हैं कि आखिर कैसे आप अपने पीएफ अकाउंट से जुड़ी किसी भी समस्या को दूर कर सकते हैं। EPFiGMS क्या है? EPFiGMS का मतलब है Employees’ Provident Fund Grievance Management System। यह एक ऑनलाइन सरकारी पोर्टल है जिसे की PF से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया है। इस पोर्टल पर PF से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान आसानी से मिल सकता है। अब भले आपके PF ट्रांसफर में देरी हो, क्लेम अटका हो, अकाउंट में कोई गलत जानकारी दर्ज हो या ऑफिस से जवाब न मिल रहा हो, आप इस पोर्टल की मदद से कम से कम समय में अपनी समस्या का समाधान पा सकते हैं। इस पोर्टल की खासियत यह है कि आप इस पर शिकायत के साथ जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी सबमिट कर सकते हैं और जल्द से जल्द अपनी शिकायत का निवारण पा सकते हैं। इसके अलावा अगर आपको अपनी शिकायत का जवाब मिलने में समय लगता है, तो आप रिमाइंडर भी भेज सकते हैं, ताकि आपकी समस्या पर तेजी से काम किया जा सके। कैसे करें शिकायत? PF से जुड़ी किसी भी समस्या की शिकायत करने के लिए आपको: स्टेप 1: सबसे पहले गूगल पर EPFiGMS सर्च करें। स्टेप 2: सबसे पहले लिंक पर क्लिक करें और वहां Register Grievance पर क्लिक करें। स्टेप 3: इसके बाद अपना स्टेटस चुनें जैसे कि PF Member। स्टेप 4: अगर आपकी शिकायत किसी क्लेम से जुड़ी है, तो क्लेम आईडी डाल कर क्लेम की डिटेल्स दें। या फिर आप Claim ID के दिए NO को सलेक्ट कर सकते हैं। स्टेप 5: अपना UAN नंबर दर्ज करें और कैपचा डालकर Get Details पर क्लिक करें। इसके बाद आपको अपने फोन नंबर और ईमेल आईडी पर एक OTP मिलेगा जिसे दर्ज करके आप आगे बढ़ सकते हैं। स्टेप 6: इसके बाद आपको अपनी बेसिक डिटेल्स दर्ज करनी होंगी जैसे कि पता। स्टेप 7: अब पीएफ नंबर चुनकर अपनी शिकायत डिटेल में बता दें। साथ में समस्या से जुड़े डॉक्युमेंट्स अटैच करना न भूलें। स्टेप 8: इसके बाद अपनी शिकायत को सबमिट कर दें। दो फीचर हैं कमाल इस पोर्ट्ल पर आपको दो ऐसे फीचर मिलते हैं जिनसे आपके काम बहुत तेजी से पूरे हो जाएंगे। दरअसल आप इस पोर्ट्ल पर एक बार शिकायत करने के बार हर 7 दिन में एक रिमाइंडर भेज सकते हैं ताकि आपकी समस्या का जल्द समाधान मिल सके। इसके अलावा आप अगर मिलने वाले समाधान से संतुष्ट न हों तो आप अपना फीडबैक भी इस पोर्टल पर सब्मिट कर सकते हैं। ध्यान रखने वाली बातें इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए दो बातों का खास तौर पर ध्यान रखें कि अपनी शिकायत से संबंधित सभी ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स जरूर उपलब्ध कराएं। इससे आपकी समस्या का समाधान जल्द हो सकेगा। इसके अलावा शिकायत दर्ज करने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को ध्यान से रखें ताकि अपनी शिकायत का स्टेटस बाद में चेक कर सकें।

चिकित्सा घोटाले में ED की रेड, रायपुर में करोड़ों की संपत्ति पर कसा शिकंजा

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर में चिकित्सा उपकरण एवं री-एजेंट खरीद घोटाले के संबंध में बड़ी कार्रवाई की है। पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत ईडी ने छत्तीसगढ़ में शशांक चोपड़ा, उनके परिवार के सदस्यों, व्यावसायिक संस्थाओं और राज्य के अधिकारियों सहित अन्य सहयोगियों के आवासीय व कार्यालय परिसरों में 30 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक छापेमारी अभियान चलाया। 40 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त इस दौरान 20 स्थानों पर तलाशी ली गई। छापे के दौरान बैंक खातों में जमा राशि, सावधि जमा, डीमैट खातों में शेयर और वाहनों के रूप में 40 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति सामने आई। विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और चल-अचल संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गई हैं। ईडी ने कहा- अभी और खुलासे होंगे ईडी ने इस मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ी जांच के तहत की गई है, जिसमें कई और खुलासे संभावित हैं। 

साउथ इंडस्ट्री ने खोया बेहतरीन कलाकार, अभिनेता शानवास का निधन

साउथ के सुपरस्टार शानवास ने 71 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। इस इंडस्ट्री में अशोक की लहर दौड़ पड़ी है। पिछले काफी लंबे वक्त से किडनी की समस्या से जूझ रहे थे, जिनकी हालत खराब होने पर उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था, जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक्टर का सोमवार की रात करीब 11:50 के आसपास निधन हुआ है। दरअसल, कल रात उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद परिजनों द्वारा उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए और उनका निधन हो गया। इस खबर से इंडस्ट्री के साथ-साथ उनके फैंस भी काफी दुखी हैं। इस तरह उनका यूं दुनिया से चले जाना लोगों के लिए बहुत बड़ा झटका है। फिलहाल, संवास का अंतिम संस्कार पलायन मुस्लिम जमात कब्रिस्तान में किया जाएगा। बड़े-बड़े दिग्गज कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, साथ ही परिवार का भी ढांढस बंधा रहे हैं। फिल्मी करियर शानवास के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने करीब 96 फिल्मों में काम किया है, जो कि मलयालम और तमिल भाषा की थीं। 1955 में तिरुवंतपुरम में जन्मे एक्टर ने फिल्म प्रेम गीतांगल से इंडस्ट्री में डेब्यू किया था, जो कि 1981 में रिलीज हुई थी। यह पूरी तरह से रोमांटिक फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दीं। वह अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते थे, क्योंकि उनके पिता फिल्म इंडस्ट्री के लिए एंट्री एक्टर प्रेम नजीर थे। टीवी में भी आए थे नजर शानवास ने टीवी जगत में भी अपनी किस्मत आजमाई थी। उन्होंने सत्यमेव जयते, वेलुथु कैटरीना जैसे शो में काम किया था। हालांकि, कुछ टाइम के लिए उन्होंने एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था और अपने परिवार के साथ समय गुजारने लगे थे। बाद में उन्होंने साल 2011 में फिल्म चाइना टाउन से वापसी की थी। उनकी आखिरी फिल्म साल 2022 में रिलीज़ हुई थी, जिसका नाम जन गण मन था। फिल्मी सफर उनका काफी रोमांचक भर रहा है। यह उन चुनिंदा एक्टर्स की लिस्ट में शुमार हैं, जिन्होंने एक्टिंग की दुनिया में अपनी मेहनत से पहचान बनाई है। लोग उन्हें इतना ज्यादा प्यार देने लगे कि उनकी दीवानगी लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगी। करियर में उन्होंने कई तरह के रोल निभाए हैं, जिनके लिए उन्होंने काफी मेहनत भी की थी। संवास में अपने पिता के साथ करीब सात फिल्मों में काम किया था, जो कि उनके लिए काफी गर्व की बात थी। वह हमेशा ही अपने पिता का गुणगान किया करते थे।