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महंत अवैद्यनाथ के संकल्प से बदला शहजादपुर मंदिर, आज बना भव्य सिद्धपीठ

अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में स्थित शहजादपुर मोहल्ले में श्रीराम जानकी सिद्धपीठ एक ऐसा मंदिर है जो 120 साल की आस्था,संघर्ष और पुनर्जागरण की जीवंत कहानी कहता है। आज यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। वर्ष 1904 में देश में अंग्रेजों का राज था। लेकिन, यहां के जमींदारों के मन में राम भक्ति की लौ जल रही थी। शहजादपुर के जमींदारों ने लगभग पांच बिस्वा जमीन भगवान राम को समर्पित की। उस जमीन पर एक मंदिर बनाया गया। वह मंदिर मिट्टी और गारे से बना था। उसकी दीवारें मोटी और मजबूत थीं। मंदिर सादा था लेकिन भक्ति से भरा हुआ था। श्रीराम-जानकी मंदिर का किया था निर्माण मंदिर में भगवान श्रीराम माता जानकी, लक्ष्मण जी और बजरंगबली के विग्रह स्थापित किए गए। हर रोज पूजा, भोग और आरती होती थी। यह सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा। जमींदार परिवार के वंशज अवधेश कुमार मेहरोत्रा ने इस जिम्मेदारी को पूरी लगन से निभाया। मंदिर की इमारत जर्जर हो गई समय बीतता गया, मंदिर में पूजा तो होती रही लेकिन इमारत कमजोर होने लगी। मिट्टी और गारे की दीवारों में दरारें आ गईं। छत से पानी टपकने लगा। जो मंदिर कभी मोहल्ले की शान था वह अब जर्जर हो चला था। भक्तों के मन में दुख था। पैसे नहीं थे और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। तभी एक बड़ा बदलाव आया जिसने इस मंदिर की किस्मत पलट दी। महंत अवैद्यनाथ का आना और एक बड़ा संकल्प वर्ष 1992 में पूरे देश में राम जन्मभूमि का आंदोलन चल रहा था। अयोध्या में राम मंदिर का सपना करोड़ों लोगों के दिल में था इस आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे गोरक्षा पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ जी महाराज। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु भी थे। अपनी धर्म यात्रा के दौरान वे शहजादपुर के इस मंदिर में आए। मंदिर को जर्जर हालत देखकर उनका मन दुखी हो गया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी राम भक्ति में लगाई थी। उनसे यह हालत देखी नहीं गई। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि यह मंदिर भव्य बनेगा। उनका यह संकल्प एक दिव्य आशीर्वाद बन गया। मंदिर का नया अध्याय हुआ शुरू महंत अवैद्यनाथ के आशीर्वाद से 23 फरवरी 2015 को मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। यह दिन इस मंदिर के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। स्थानीय भक्तों, दानदाताओं और ट्रस्ट के लोगों ने मिलकर यह काम शुरू किया। करीब तीन साल तक निर्माण चलता रहा। हर ईंट में भक्ति और मेहनत की छाप थी। धीरे धीरे एक टूटा हुआ मंदिर एक भव्य सिद्धपीठ में बदल गया। आज का भव्य मंदिर आज यह मंदिर लगभग 7000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। यह दो मंजिला बन चुका है। मंदिर में कदम रखते ही एक अलग शांति और ऊर्जा का अहसास होता है। यहां कुल पांच दरबार हैं। पहला है श्रीराम दरबार जहां भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के विग्रह हैं। यह मंदिर का मुख्य दरबार है। दूसरा है माता जगदंबा दरबार जहां माँ की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तीसरा है संकटमोचन बजरंगबली दरबार जहां हनुमान जी भक्तों को शक्ति और साहस देते हैं। चौथा है भगवान शिव दरबार जहां शिव भक्त अपनी पूजा करते हैं। पांचवां है श्री राधा-कृष्ण दरबार जो प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। धार्मिक यात्रियों के लिए खास जगह श्रीराम जानकी मंदिर ट्रस्ट हर रोज सभी पांचों दरबारों में पूजा, भोग और आरती कराता है। सुबह मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक मंदिर में भक्ति का माहौल रहता है। पूरे साल यहां कई धार्मिक आयोजन होते हैं। रामनवमी पर शोभायात्रा और अखंड रामायण पाठ होता है। हनुमान जयंती पर सुंदरकांड पाठ और भंडारा होता है। जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण दरबार में सुंदर झांकियां सजती हैं। नवरात्रि में माता दरबार में नौ दिन का महोत्सव मनाया जाता है। सावन में शिव दरबार में खास अभिषेक होता है। अगर आप उत्तर प्रदेश की धार्मिक यात्रा पर हैं तो इस मंदिर जरूर आएं। अयोध्या, वाराणसी या प्रयागराज के दर्शन के साथ यहां भी दर्शन करें। यह मंदिर आपकी यात्रा को और पवित्र बना देगा। यहां आकर आप पांचों दरबारों में पूजा कर सकते हैं। एक महान संत के संकल्प की शक्ति को महसूस कर सकते हैं। 120 साल की यह यात्रा आज एक नए मोड़ पर है। शहजादपुर का यह सिद्धपीठ अब सिर्फ एक मंदिर नहीं है। यह सनातन धर्म की ताकत का, एक महान गुरु के संकल्प का और लाखों भक्तों की आस्था का जीवंत प्रमाण है।

कोविड-19 प्रभावित TET का हवाला देकर अनुकंपा नियुक्ति पर रोक नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

बिलासपुर. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एन के चन्द्रवंशी की एकलपीठ ने कहा है, कि कोरोना महामारी के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) समय पर आयोजित नहीं होने का नुकसान अनुकंपा नियुक्ति के आवेदक को नहीं भुगतना पड़ेगा. कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है. दरअसल, धमतरी निवासी वासुदेव साहू के पिता, जो सहायक शिक्षक थे, का वर्ष 2017 में सेवा के दौरान निधन हो गया था. इसके बाद वासुदेव ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया. आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के लिए उन्हें तीन वर्ष का समय दिया गया था. उन्होंने डी.एल.एड. की परीक्षा समय पर उत्तीर्ण कर ली, लेकिन मार्च 2020 में होने वाली टेट परीक्षा कोविड-19 के कारण निरस्त हो गई. बाद में जनवरी 2022 में आयोजित परीक्षा में उन्होंने सफलता प्राप्त की. इसके बावजूद पंचायत विभाग ने निर्धारित समय में योग्यता प्राप्त न करने का हवाला देकर उनकी अनुकंपा नियुक्ति का दावा अस्वीकार कर दिया. जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि, टेट परीक्षा समय पर आयोजित न होना अभ्यर्थी के नियंत्रण से बाहर की परिस्थिति थी. इसलिए उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा, कि कोविड अवधि में समय-सीमा संबंधी राहत के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश इस मामले में भी लागू होंगे. हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2022 का अयोग्यता आदेश निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को वासुदेव साहू के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण पर विधि अनुसार पुनर्विचार कर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने कहा है.

अयोध्या प्रकरण में नया मोड़: इस्तीफों की पुष्टि के बाद ट्रस्ट की पारदर्शिता पर विवाद गहराया

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे सवाल यही है कि सबूत सुरक्षित हैं या नहीं? शनिवार को तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र की पुष्टि के बाद घटनाक्रम की समयरेखा को देखें तो कई ऐसे बिंदु सामने आते हैं, जिन पर जवाब अब भी बाकी हैं। एफआईआर होने तक सभी आठ आरोपी भी मंदिर में पहले जैसे ही आते-जाते रहे। अंदर उनसे काम लिया जा रहा था या नहीं, इसकी भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। सवाल उठता है कि मंदिर के अंदर किसी की निगरानी थी या नहीं या जो कठघरे में हैं उन्हीं के हवाले छोड़कर सभी मौन हैं। चंपत राय ने क्यों कहा- कुछ उल्लेखनीय नहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विशेषकर महामंत्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा को कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने या जांच की पहल करने में देरी क्यों हुई। अखिलेश यादव के बयान के बाद चंपत राय ने वीडियो जारी कर यहां तक कहा था कि ट्रस्ट में नियमित ऑडिट होता है। कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। मगर अब रुपयों की बरामदगी और गिरफ्तारी ने साफ कर दिया कि गड़बड़ी तो थी। जांच के दौरान भी आरोपी कार्य करते रहे ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर सब कुछ सामान्य था तो एसआईटी जांच की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि एसआईटी गठन से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक जिन आठ कर्मचारियों पर आरोप लगे, वे अपने पदों पर कार्यरत रहे। साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। 23 जून को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी संबंधित पदाधिकारी व्यवस्थाओं की कमान संभालते दिखाई दिए। राम भक्तों का विश्वास बनाए रखने की चुनौती यहीं से एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है-क्या जांच शुरू होने और एफआईआर दर्ज होने के बीच संबंधित लोगों की संस्थान तक निरंतर पहुंच से संभावित साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका थी। फिलहाल इसका कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और न ही एसआईटी या सरकार ने ऐसा कोई निष्कर्ष जारी किया है। अब इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुनौती केवल दोषियों को सजा दिलाने की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास को बनाए रखने की है। आने वाले दिनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि कथित हेराफेरी की वास्तविक जिम्मेदारी किस पर है और क्या जांच के दौरान साक्ष्यों की सुरक्षा तथा ट्रस्ट की भूमिका पर उठे सवालों के संतोषजनक उत्तर मिल पाते हैं। 24 घंटे में बदली तस्वीर, पहले इनकार, फिर इकरार राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आठ आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अगले 24 घंटे में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि अयोध्या से लेकर देशभर में इसकी चर्चा होने लगी। शुक्रवार दोपहर अचानक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, लेकिन शुरुआत में ट्रस्ट से जुड़े लगभग हर व्यक्ति ने इससे इनकार किया। गोपाल राव का प्रचार माध्यम पर निशाना कारसेवकपुरम से लेकर कार्यशाला तक मौजूद सेवादारों का कहना था कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह भी बताया गया कि चंपत राय पूरे दिन कारसेवकपुरम स्थित अपने आवास 'भरत कुटी' से बाहर नहीं निकले। ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल राव ने भी मुस्कुराते हुए कहा, ‘प्रचार माध्यमों को देखकर लगता है कि ये लोग चंपत राय जी का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे।’ उनके इस बयान के बाद भी अटकलों का दौर थमा नहीं। उधर सोशल मीडिया पर इस्तीफे की चर्चा लगातार तेज होती गई। अयोध्या में लोग एक-दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने की कोशिश करते रहे। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया। नासिक से सबसे पहले इस्तीफे की पुष्टि सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने इसे बड़े स्तर की कार्रवाई की शुरुआत बताते हुए दावा किया कि अब ‘बड़ी मछलियों’ पर भी कार्रवाई तय है। इसके बावजूद न तो ट्रस्ट और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई। करीब 24 घंटे बाद शनिवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। नासिक में मौजूद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी ने कुछ पत्रकारों के व्हाट्सएप संदेशों का जवाब देते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र की पुष्टि कर दी। इस्तीफे के बाद सोना-चांदी के सुरक्षित होने का दावा इसके तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति में केवल इस्तीफों की पुष्टि ही नहीं की गई, बल्कि पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलला को समर्पित चांदी की ईंटें, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान समर्पण सुरक्षित हैं तथा उनका पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है। इस तरह महज 24 घंटे में इनकार से आधिकारिक पुष्टि तक का घटनाक्रम पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी पर विवाद, नागा नेताओं की बैठक को लेकर विपक्ष का हमला

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने शनिवार को मणिपुर के नागा समुदाय के विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठख में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो मौजूद थे, लेकिन इस बैठक के बाद अटकलों का दौर तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की मणिपुर इकाई ने सवाल उठाया कि आखिर विधायकों और गृहमंत्री की बैठक के बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह मौजूद क्यों नहीं थे? कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर मणिपुर के नागा विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच में बैठक मणिपुर सीएम के बिना कैसे आयोजित हो सकती है? इस बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मणिपुर कांग्रेस ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस विधायक दल के नेता केशम मेघचंद्र सिंह ने कहा कि इस बैठख के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच की बैठक से मुख्यमंत्री को अलग रखना यह पद की गरिमा और उसके अधिकार को कम करता है। इसके साथ ही उन्होंने विधायकों के साथ केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने के लिए पहुंचे उप मुख्यमंत्री लोसी दीखो पर भी सवाल उठाया। विधायकों को अपने मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं- कांग्रेस मेघचंद्र ने कहा, "यह बैठक दिखाती है कि उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो और नागा विधायकों को अपने ही मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है। इसलिए तो वह बिना मुख्यमंत्री के सीधे नागा विधायकों से मिलने के लिए पहुंचे हैं।" इसके अलावा उन्होंने बैठक में मौजूद नागालैंड के मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रशासन राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से होना चाहिए न कि पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री के द्वारा आखिर मणिपुर के विधायकों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नागालैंड के सीएम ने क्यों किया? दूसरे उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन पर कटाक्ष करते हुए मेघचंद्र ने कहा कि राज्य में पर्याप्त सुरक्षा होने के कबाद भी डिप्टी सीएम का दिल्ली में रहना यह दिखाता है कि उनकी प्राथमिकता क्या है। वह राज्य की नहीं केंद्र की राजनीति करना चाहते हैं। इतना ही नहीं मेघचंद्र ने सीएम को कागजी शेर करार देते हुए कहा कि राज्य के शासन पर उनका प्रभाव खत्म हो गया है। कांग्रेस की तरफ से उठाए गए इन सवालों का अभी तक भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

NEET UG Re-Exam में 8 बोनस मार्क्स का ऐलान, आज ही दर्ज करें आपत्ति, फिर नहीं मिलेगा मौका

लुधियाना. नेशनल टेस्टिंग एजैंसी (एन.टी.ए.) द्वारा आयोजित की गई नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट आने से पहले ही विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है और परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों के 4 नंबर एडवांस में पक्के हो गए हैं। 21 जून को हुए री-एग्जाम की प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई है जिसमें फिजिक्स के एक सवाल को 'ड्रॉप' यानी हटा दिया गया है। इस हटाए गए सवाल के बदले परीक्षा में बैठने वाले सभी विद्यार्थियों को पूरे 4 बोनस नंबर दिए जाएंगे, भले ही किसी विद्यार्थी ने उस सवाल को हल करने की कोशिश की हो या नहीं। चूंकि यह परीक्षा एक ही शिफ्ट में हुई थी इसलिए देशभर के सभी 20 लाख विद्यार्थियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा फिजिक्स के ही एक अन्य सवाल के 2 जवाब सही पाए गए हैं। जिन विद्यार्थियों ने उन दोनों विकल्पों में से किसी एक को भी चुना होगा, उन्हें भी पूरे 4 नंबर मिलेंगे। इलैक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स और वर्नियर कैलिपर्स से जुड़े सवालों को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई गई थी। विशेषज्ञ अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि उच्च स्तरीय तैयारियों के बावजूद री-एग्जाम के प्रश्नपत्र में भी ऐसी नौबत क्यों आई और क्या प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कोई बड़ी कमी रह गई थी। आपत्तियां दर्ज कराने का मौका एन.टी.ए. द्वारा जारी प्रोविजनल आंसर-की में यदि किसी विद्यार्थी को किसी सवाल के जवाब को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह उसे 28 जून तक चैलेंज कर सकता है। एक सवाल को चैलेंज करने की फीस 200 रुपए तय की गई है। अगर आपत्ति सही पाई जाती है, तो यह फीस वापस कर दी जाएगी। फाइनल आंसर-की आने के बाद ही साफ होगा कि क्या कोई और सवाल भी हटाया गया है। फिजिक्स के साथ-साथ कैमिस्ट्री, बायोलॉजी और जूलॉजी में भी कुछ सवालों के गलत होने की आशंका जताई जा रही है।

CG में कच्ची दीवार बनी काल, दो मासूमों की मौत, महिला की हालत नाजुक

बेमेतरा. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां दीवार ढहने से दो बच्चियों की मौत हो गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना से गांव में कोहराम मच गया है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। यह पूरा मामला नवागढ़ विधानसभा के ग्राम राउरपुर का है। बच्चियों की पहचान वंशिका (11) और राधिका (7) पिता ओमप्रकाश कोशले के रूप में हुई है और घायल महिला की पहचान शशिकला के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि आज दोनों बच्चे घर के आंगन में बर्तन धो रहे थे। इसी दौरान दीवार भरभरा कर गिर गई, जिसकी चपेट में दोनों बच्चे और महिला आ गई। दोनों बच्चों की मौत, महिला घायल चीख पुकार मचते ही पड़ोसी मौके पर पहुंचे और आनन फानन में 108 के जरिए सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक दोनों बच्चियों की मौत हो चुकी थी। वहीं महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे रायपुर रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच में जुट गई।

रेलवे में अनुकंपा नियुक्ति पर खुशखबरी, पात्र कर्मचारियों को मिलेगा पुरानी पेंशन का लाभ

भोपाल. रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने वाले रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के अनुसार अब मृतक रेल कर्मचारी के आश्रित द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के लिए पहली बार आवेदन जमा करने की तारीख को ही भर्ती की मुख्य तिथि यानी क्रूशियल डेट माना जाएगा। इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिनका आवेदन 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले जमा किया गया था, लेकिन उनकी वास्तविक नियुक्ति एक जनवरी 2004 के बाद हुई। ऐसे कर्मचारियों को भी अब पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा। आवेदन की तारीख होगी भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में पहले कोई सीधा विज्ञापन या अधिसूचना जारी नहीं होती थी। इसी वजह से इन नियुक्तियों की कट-ऑफ तारीख तय करने में परेशानी आती थी। प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत किस तारीख से मानी जाए। रेलवे बोर्ड के नए आदेश के बाद अब यह तय कर दिया गया है कि जिस दिन अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन जमा किया गया था, वही तारीख भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तारीख मानी जाएगी। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को दिए निर्देश रेलवे बोर्ड के उप निदेशक वित्त रमेश चंद्र पांडेय ने 24 जून को इस संबंध में नया आदेश जारी किया है। आदेश में उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोन, उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों और मुख्य वित्तीय सलाहकारों को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अब उन सभी लंबित मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा, जिनमें तकनीकी तारीखों के कारण आश्रित कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। पहले क्या था नियम? अब तक पुरानी पेंशन का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलता था, जिनकी भर्ती प्रक्रिया एक जनवरी 2004 से पहले शुरू हो गई थी या जिन्हें उस तारीख से पहले नियुक्ति मिल गई थी। अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में प्रक्रिया शुरू होने की तारीख को लेकर असमंजस बना रहता था। नए आदेश से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है और कई कर्मचारियों को पेंशन संबंधी लाभ मिल सकेगा। यूनियनों ने फैसले का किया स्वागत मेंस यूनियन के महामंत्री आरडी यादव और इंप्लाइज संघ के महामंत्री आरपी सिंह ने रेलवे बोर्ड के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे रेलकर्मियों के परिवारों के हित में ऐतिहासिक और न्यायसंगत कदम बताया। CPRO शशिकांत त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इन सभी कर्मचारियों को रेलवे सेवा पेंशन नियम 2026 के तहत कवर किया जाएगा।

केंद्र सरकार में संभावित बदलाव, पिछड़ी जातियों और क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली  केंद्र सरकार में फेरबदल की अटकलें तेज हो चली हैं। बताया जा रहा है कि इस फेरबदल के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक संदेश के नजरिए से इस फेरबदल में तीन अहम मतदाता समूहों युवा, पिछड़ी जातियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई सांसदों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। फेरबदल के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों और नीट पेपर लीक मामले पर सरकार के खिलाफ रुख के मद्देनजर इस फेरबदल के जरिये बड़ा संदेश देने की कोशिश की जाएगी। बताया जा रहा है कि जहां एक दर्जन से ज्यादा राज्य मंत्रियों की जगह युवा सांसदों (शायद कुछ अपने पहले कार्यकाल वाले भी) को लाया जा सकता है, वहीं मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की अपनी कोशिश के तहत मंत्रिपरिषद में महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ा सकते हैं। यूपी में कायम रखना चाहेंगे पिछड़ी जातियां को समर्थन आधार उत्तर प्रदेश में किसी भी चुनावी जीत के लिए पिछड़ी जातियां आधार होती हैं, इसलिए उम्मीद है कि प्रधानमंत्री जुलाई 2021 के फेरबदल वाले तरीके को ही अपनाएंगे और अलग-अलग पिछड़ी जातियों के सांसदों को शामिल करेंगे, ताकि अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनावों में उनके बीच पार्टी का समर्थन आधार बना रहे। राजनीतिक विजन और नैरेटिव तय करना चाहेगी बीजेपी वहीं बीजेपी और उसके NDA गठबंधन के सूत्रों का कहना है कि इस कवायद से राजनीतिक विजन और नैरेटिव तय हो सकता है, जो मोदी के तीसरे कार्यकाल के बाकी समय में केंद्र के कामकाज और उससे भी अहम, 2029 के लोकसभा चुनावों और उससे पहले होने वाले कई विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की चुनावी रणनीति को आकार देगा। हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या इसमें बेरोजगारी पर काबू पाने, ईंधन की बढ़ती कीमतों और बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने जैसे मामलों में केंद्र के खराब रिकॉर्ड के लिए जवाबदेही भी तय की जाएगी या नहीं।

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद घरेलू LPG कीमतें बनी हुईं स्थिर

 नई दिल्ली एक तरफ कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में लगातार गिर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ एलपीजी सिलेंडर दे दाम स्थिर है। युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में दो बार इजाफा किया गया था। पहली बार सिलेंडर का रेट 7 मार्च 2026 को बढ़ा था। तब एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, दूसरी बार कीमतों में 7 जून को इजाफा हुआ था। तब दाम 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। बता दें, आज रविवार को एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। कीमतें पुराने स्तर पर ही हैं। कॉमर्शियर सिलेंडर की कीमतों में युद्ध के शुरू होने के बाद तेज इजाफा दर्ज किया है। मौजूदा समय में देश के कई बड़े शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर का रेट 3100 रुपये को क्रॉस कर गया। घरेलू सिलेंडर का क्या है दाम? (LPG Cylinder Rates) नई दिल्ली – 942 रुपये कोलकाता – 968 रुपये मुंबई – 941.50 रुपये चेन्नई – 957.50 रुपये गुरुग्राम – 950.50 रुपये नोएडा – 939.50 रुपये बेंगलुरू – 944.50 रुपये भुवनेश्वर – 968 रुपये चंडीगढ़ – 951.50 रुपये हैदराबाद – 994 रुपये जयपुर – 945.50 रुपये लखनऊ – 979.50 रुपये पटना – 1031.50 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 951 रुपये कॉमर्शियल सिलेंडर का क्या है रेट? नई दिल्ली – 3113.50 रुपये कोलकाता – 3255.50 रुपये मुंबई – 3067.50 रुपये चेन्नई – 3283 रुपये गुरुग्राम – 3130 रुपये नोएडा – 3113.50 रुपये बेंगलुरू – 3198 रुपये भुवनेश्वर – 3290 रुपये चंडीगढ़ – 3136 रुपये हैदराबाद – 3367 रुपये जयपुर – 3141 रुपये पटना – 3400 रुपये लखनऊ – 3236 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 3152 रुपये स्थिति में हो रहा है सुधार केंद्र सरकार ने बीते दिनों इंडस्ट्री को सप्लाई किए जाने वाले एलपीजी सिलेंडर की लिमिट को हटा लिया है। यानी अब उनके डिमांड के हिसाब से एलपीजी सिलेंडर मिलेंगे। सरकार ने कहा कि हालिया स्तर पर एलपीजी की बेहतर स्थिति के बाद यह फैसला लिया गया है। बता दें, युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने इंडस्ट्रीयल एलपीजी सिलेंडर पर कैप लगा दिया था भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत तक हिस्सा कतर सहित कई अन्य अरब देशों से मंगाता है। लेकिन युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई थी। जिसके बाद देश में एलपीजी की किल्लत देखने को मिली। सरकार ने स्थिति को देखते हुए इंडस्ट्रीयल सप्लाई पर सीमा लगा दिया। वहीं, शहरों और गांवों में बुकिंग एक निश्चित दिन तय कर दिए। इन सबके अलावा केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने का भी निर्देश ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को दिया था।

कराची मुठभेड़: ग्रेनेड और गोलीबारी से 90 मिनट तक चला ऑपरेशन, एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया

नई दिल्ली पाकिस्तान के शहर कराची में शनिवार देर रात सुरक्षाबलों के कैंप पर हमला हुआ है। इस हमले में चार पाकिस्तानी रेंजर्स की मौत हुई है, जबकि 6 आतंकी भी मारे गए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ लिया है। शनिवार देर शाम हुए इस हमले में सबसे पहले एक धमाका हुआ इसके बाद गोलियां चलने की आवाज आने लगी। तुरंत ही पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया इसके बाद मुठभेड शुरू हो गई। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से जुड़े एक संगठन जमात-उल-अहरार ने ली है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार देर रात कराची के मौसमियात चौरंगी इलाके में सिंध रेंजर्स के कैंप पर हमला हुआ था। इसी इलाके में कई कॉलेज और पाकिस्तानी मौसम विभाग का केंद्र भी है। हमले के तुरंत बाद रेंजर्स ने पूरे घटनास्थल को घेर लिया। फिर गोलीबारी शुरु हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह हमला करीब 8.30 बजे शुरु हुआ था। आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के ठिकानों को निशाना बनाया और फिर गोलीबारी शुरू कर दी। करीब 90 मिनट तक चली इस गोलीबारी में 6 आतंकवागी मारे गए, जबकि एक हमलावर को जिंदा पकड़ लिया गया है ग्रेनेड से हुआ था हमला इससे पहले रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि उसे सबसे पहले गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-5 के पास हमले की जानकारी मिली थी। इसके बाद तुरंत ही सेंट्र्ल कमांड को सूचित किया गया और पाकिस्तानी सेना का आतंकरोधी दस्ता वहां पहुंच गया। पाकिस्तानी पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच के मुताबिक, हमलावर कार से आए थे। उन्होंने सीधे जाकर रेंजर्स के कैंप से अपनी कार को टकरा दिया और सीधा अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने अंदर ग्रेनेड से हमला किया। इसके बाद उनके और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो कि करीब 90 मिनट तक चली। TTP के सहयोगी ने ली हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी सेना की नाक में दम करने वाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के सहयोगी आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। बता दें, टीटीपी मुख्य रूप से पाकिस्तान में अफगानिस्तान की तरह ही तालिबान शासन स्थापित करना चाहता है। इसके लिए वह खैबर पख्तूनख्वा से अपना अभियान चलाता है। आमतौर पर वह पाकिस्तानी सेना और उसके सैनिकों को निशाना बनाता है। पिछले कई वर्षों से यह संगठन पाकिस्तान सैन्य जनरलों, सैनिकों और पुलिस को निशाना बनाता आ रहा है। पाकिस्तानी सेना का आरोप है कि हमला करके यह लड़ाके अफगानिस्तान भाग जाते हैं। इन्हीं तालिबान लड़ाकों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान आए दिन अफगानिस्तान में हमला करता रहता है।