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18 साल बाद अहमदाबाद ब्लास्ट पीड़ितों को न्याय, 38 दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर

अहमदाबाद साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कायम रखा है. इसके साथ ही दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया. अदालत ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।  यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन किया था. मार्च 2025 से इस मामले की नियमित आधार पर सुनवाई चल रही थी. राज्य सरकार की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि करने की याचिका और दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।  दरअसल, अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे. इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था।  इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह पूरा मामला 26 जुलाई 2008 का है, जब अहमदाबाद में एक के बाद एक करीब 70 मिनट के भीतर कुल 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बम को साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाया गया था।  20 धमाके, 59 लोगों की गई थी जान 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 49 मिनट के अंदर एक के बाद एक 20 धमाके हुए थे। इस सीरियल ब्लास्ट में 59 लोगों की जान चली गई थी। हमलावरों ने नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था। अस्पतालों, बसों, सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में बम लगाए थे। 38 आरोपियों को फांसी, 11 को उम्रकैद इस केस के 14 साल बाद 2022 में सेशन कोर्ट ने 38 आरोपियों को फांसी और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस मामले को सबसे दुर्लभ बताया और कहा कि मौत की सजा देना उचित है। साथ ही, मारे गए और घायल लोगों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह पहला मामला है, जब किसी भी केस में एक साथ 38 आरोपियों को दोषी मानते हुए अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। राज्य सरकार ने भी दायर की थी याचिका इसके बाद, सभी दोषियों ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। वहीं, राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट के समक्ष मौत की सजा के लिए याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट क्यों पहुंचा मामला? कानून के मुताबिक, किसी भी अपराधी को फांसी देने के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी मिलना जरूरी होता है, इसीलिए सजा पाए दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। दोषियों के वकीलों ने पुलिस की जांच, सबूतों और कबूलनामों पर सवाल उठाए। हमलावरों ने शहर की बसों, बाजारों और अस्पताल तक को निशाना बनाया था. धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से भी बम बरामद हुए थे. आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. बताया जाता है कि यह धमाके साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे।  इस मामले में सरकार ने 78 लोगों को आरोपी बनाकर 35 अलग-अलग केस दर्ज किए थे, जिनकी सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई गई थी. करीब 14 साल की लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।  उस समय 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि सबूतों की कमी के चलते 28 लोगों को बरी कर दिया गया था. भारत के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका था जब एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।  इस मामले में स्पेशल कोर्ट में 1150 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे और 8 फरवरी 2022 को 6700 से ज्यादा पन्नों का फैसला सुनाया गया था. स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।     

सिया गोयल पहले से थी शादीशुदा! WhatsApp चैट से हुआ बड़ा खुलासा, जांच में नया मोड़

पुणे पुणे के लोहगढ़ किले से धक्का देकर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस जांच और डिजिटल सबूतों से खुलासा हुआ है कि मामले की मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल ने सह-आरोपी चेतन चौधरी से गुपचुप तरीके से शादी रचा ली थी। पुलिस का मानना है कि यह शादी सगाई से महीनों पहले ही हो चुकी थी। परिवार से छिपाकर की थी 'सीक्रेट मैरिज' न्यूज18 मराठी की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि जांचकर्ताओं का मानना है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने करीब चार महीने पहले अपने-अपने परिवारों को बिना बताए गुपचुप शादी कर ली थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से रिकवर की गई वॉट्सऐप चैट्स को खंगाला। डिजिटल सबूतों से खुली साजिश की पोल जांचकर्ताओं ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों के पिछले 6 से 7 महीने के कॉल रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा, वॉट्सऐप चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की गहन जांच की है। पुलिस का दावा है कि इस डिजिटल एक्टिविटी से साफ होता है कि दोनों ने अपनी शादी की बात परिवारों से छिपाकर रखी थी। पुलिस को संदेह है कि सीक्रेट मैरिज के बाद ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची गई। 14 जून को फेल हो गया था हत्या का पहला प्लान पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश 14 जून को की गई थी, लेकिन वह नाकाम रही। जांचकर्ताओं का दावा है कि सिया ऐन मौके पर डर गई और पीछे हट गई, जिसकी वजह से वह प्लान फेल हो गया था। पुलिस का कहना है कि इसके बाद दोनों आरोपियों के बीच कई मैसेज का आदान-प्रदान हुआ, जिसमें आगे की साजिश पर चर्चा की गई। वॉट्सऐप चैट में लिखा- 'तुम भी आ जाओ, मिलकर धक्का दे देंगे' पुलिस के हाथ एक ऐसी अहम वॉट्सऐप चैट लगी है, जिसने इस हत्याकांड की पूरी कहानी साफ कर दी है। रिकवर किए गए एक मैसेज में कथित तौर पर सिया ने चेतन से कहा कि वह अकेले इस काम को अंजाम देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है, इसलिए उसने चेतन को अपने साथ आने के लिए कहा। पुणे मर्डर केस जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया ने मैसेज में लिखा था: "मुझमें इसे करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आ जाओ- हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से धक्का दे देंगे।" पुलिस का दावा है कि इस खौफनाक बातचीत के बाद 18 जून को कथित तौर पर दोनों ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच लगातार जारी है और यह पूरा केस कोर्ट के विचाराधीन है।

दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ तस्करी मामले में आरोपियों को 2 वर्ष का सश्रम कारावास

दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ तस्करी मामले में आरोपियों को 2 वर्ष का सश्रम कारावास 10 वर्ष पुराने प्रकरण में अदालत ने सुनाया फैसला, प्रत्येक पर ₹5 हजार का जुर्माना भोपाल  भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ की तस्करी से जुड़े लगभग 10 वर्ष पुराने मामले में 2 आरोपियों को 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह निर्णय अपराध क्रमांक 59/2016 (दिनांक 22 अगस्त 2016) में 29 जून 2026 को सुनाया गया। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, मध्यप्रदेश तथा क्राइम ब्रांच भोपाल को प्राप्त सूचना के आधार पर 22 अगस्त 2016 को राहुल नगर झुग्गी बस्ती स्थित मंदिर के पास मुख्य मार्ग से 2 संदिग्धों को घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ में उनकी पहचान भोपाल निवासी अमन वामने और वरुण विश्वकर्मा के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद कपड़े के थैले से एक जीवित दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ बरामद किया गया। क्राइम ब्रांच ने वन्यजीव को विधिवत जब्त कर दोनों आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच के साथ स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, मध्यप्रदेश के तीन शासकीय अधिकारियों ने अभियोजन पक्ष के साक्षी के रूप में न्यायालय में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। विशेष लोक अभियोजकों की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।  

5वीं और 8वीं की पुनः परीक्षा का रिजल्ट जारी, राज्य शिक्षा केंद्र ने घोषित किए परिणाम

राज्य शिक्षा केंद्र ने 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम किए घोषित 5वीं में 80% और 8वीं में 74 % से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण सत्र 2025-26 में पांचवीं में कुल 98.89 और आठवीं में 98.19 % हुआ परीक्षा फल भोपाल मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग ने मंगलवार को कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। विद्यार्थी व अभिभावक राज्य शिक्षा केन्द्र के परीक्षा पोर्टल पर परिणाम देख सकते हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 की पुन: परीक्षा में कक्षा 5वीं में 80.42 एवं कक्षा 8वीं में 74.16 % परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं, मुख्य वार्षिक परीक्षा और पुन: परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या को मिलाकर इस सत्र में कक्षा 5वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.89 एवं कक्षा 8वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.19 प्रतिशत रहा है। राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह ने बताया कि विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण उक्त परिणामों को राज्य शिक्षा केन्द्र के https://www.rskmp.in/result.aspx पर अपना रोल नम्बर डालकर देख सकते हैं। साथ ही शिक्षक, संस्था प्रमुख भी अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम इसी पोर्टल पर देख सकते हैं। गौरतलब है कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा 16 से 23 जून के बीच कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षाओं का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 71, 548 तथा कक्षा 8वीं के 76, 274 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे। इन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेश में कुल 322 केन्द्र बनाए गए थे। 17, 000 से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं के द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई थी। वहीं कक्षा पांचवीं में शासकीय स्कूलों के कुल 46, 665 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 36, 217 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा में 581 में से 352 विद्यार्थी पास हुए हैं, तो वहीं अशासकीय स्कूलों के 24, 302 विद्यार्थियों में से 20, 971 विद्यार्थी परीक्षा में पास हुए हैं। इसी प्रकार कक्षा 8वीं में शासकीय स्कूलों के कुल 56,738 विद्यार्थियों में से 40, 315 उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा के 423 में से 268 और अशासकीय विद्यालयों के 19, 113 में से 15,978 विद्यार्थी पास हुए हैं।  

चानौत जल आंदोलन तेज, 24 गांवों ने संभाली जिम्मेदारी, दो घंटे हाईवे रहा जाम

हांसी पेयजल की मांग को लेकर चल रहे चानौत के आंदोलन ने सोमवार को नया और निर्णायक मोड़ ले लिया। आंदोलनकारियों ने दोपहर एक बजे से तीन बजे तक हांसी-बरवाला मार्ग पर टेंट गाड़कर रोड जाम कर दिया, जिससे हाइवे पर दो घंटे तक वाहनों के पहिए थम गए सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। यातायात को वैकल्पिक मार्गों से निकाला गया, जबकि आंदोलन के बीच धरना समिति ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि अब यह लड़ाई केवल चानौत की नहीं रहेगी, बल्कि रोघी और बूरा खाप के 24 गांव बारी-बारी से आंदोलन की जिम्मेदारी संभालेंगे। धरना समिति ने घोषणा की कि अब प्रतिदिन एक गांव पूरे आंदोलन का संचालन करेगा। जिस गांव की बारी होगी, उसी दिन उस गांव की पंचायत, महिला शक्ति और ग्रामीण धरनास्थल पर पहुंचकर व्यवस्था संभालेंगे। आंदोलन को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इसी को लेकर मंगलवार को 24 गांवों के सरपंचों और धरना समिति की संयुक्त बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। गांव में टी-कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग गांव में टी-कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर 16 मई से आंदोलन लगातार जारी है। धरना समिति का कहना है कि उनकी मांग आज भी वही है और जब तक गांव को टी-कनेक्शन से पानी नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। समिति ने दावा किया कि सरकार चाहे जितना समय लगा दे, ग्रामीण पीछे हटने वाले नहीं हैं। धरना समिति के सदस्यों ने बताया कि आंदोलन को लगातार चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर उपायुक्तों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। इसके बाद चार जुलाई को धरनास्थल से ट्रैक्टर मार्च निकाला गया और गांव के जलघर तक मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया गया। सोमवार का हाइवे जाम उसी आंदोलन की अगली कड़ी था। हाल ही में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने एनएचआइ से एनओसी नहीं मिलने का हवाला देते हुए भाखड़ा पाइप लाइन का कार्य रोक दिया था। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष पाइप लाइन के लिए नहीं, बल्कि टी-कनेक्शन के माध्यम से गांव को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए है। जाम के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम पूरे समय मौके पर मौजूद रही। अधिकारियों ने स्थिति पर लगातार नजर रखी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। निर्धारित समय पूरा होने के बाद आंदोलनकारियों ने जाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद हाइवे पर यातायात सामान्य हो सका। अब 24 गांव मिलकर लड़ेंगे पानी की लड़ाई धरना समिति के अनुसार अब रोघी और बूरा खाप के 24 गांव आंदोलन को नई मजबूती देंगे। हर दिन एक गांव धरनास्थल की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा। उसी गांव के ग्रामीण, पंचायत और महिलाएं पूरे दिन आंदोलन का संचालन करेंगी। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था से आंदोलन लगातार चलता रहेगा और सरकार पर समाधान निकालने का दबाव भी बढ़ेगा। मंगलवार को सभी 24 गांवों के सरपंचों की बैठक में इसकी विस्तृत रूपरेखा तय की जाएगी।  

50 साल पुरानी जमीन का रिकॉर्ड बदलेगा, गम्हरिया में जियाडा को मिलेगा मालिकाना हक

जमशेदपुर सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया अंचल में लगभग 50 वर्ष पूर्व अधिग्रहित की गई 3000 एकड़ सरकारी भूमि के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। क्या था मामला? करीब 50 साल पहले झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) के लिए इस भूमि का अधिग्रहण कर रैयतों को मुआवजा दे दिया गया था। लंबे समय तक राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त न होने के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर जमीन पुराने रैयतों के नाम ही दिख रही थी। इसी विसंगति का फायदा उठाकर भू-माफिया द्वारा सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की जा रही थी। इससे अंचल कर्मचारियों और बिचौलियों के पौ बारह थे। अब क्या होगी कार्रवाई? गम्हरिया के अंचल अधिकारी (सीओ) प्रवीण कुमार के अनुसार, जियाडा के ऑनलाइन आवेदन के बाद प्रभावित पक्षों को नोटिस जारी कर आपत्तियां मांगी जा रही हैं। विधिवत सुनवाई के बाद सरकारी अभिलेखों में जियाडा का मालिकाना हक दर्ज कर दिया जाएगा, जिससे धोखाधड़ी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार आदित्यपुर-गम्हरिया औद्योगिक क्षेत्र वर्तमान में गंभीर भूमि संकट से जूझ रहा है। जमीन न होने के कारण नए उद्योगों की स्थापना के लिए 500 से अधिक आवेदन लंबित हैं। इस म्यूटेशन प्रक्रिया और हाल ही में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद जियाडा को सुगम भूमि आवंटन सुनिश्चित करने में बड़ी सफलता मिलेगी, जिससे क्षेत्र में भारी निवेश के नए मार्ग प्रशस्त होंगे।  

Punjab Congress Crisis: बघेल की बैठक में नहीं पहुंचे चन्नी, दिल्ली में हाईकमान से करेंगे शिकायत

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पार्टी हाईकमान की ओर से मतभेद दूर करने की जिम्मेदारी संभाल रहे पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल मंगलवार को भी लगातार दूसरे दिन नेताओं के साथ बैठक करेंगे। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और वरिष्ठ नेता परगट सिंह के दिल्ली में होने के कारण वे इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। बघेल मंगलवार को सबसे पहले पंजाब कांग्रेस भवन में जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद हाल ही में गठित चुनाव समिति, कोर कमेटी तथा अन्य समितियों के अध्यक्षों के साथ अलग-अलग बैठक कर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगे। सोमवार को उन्होंने चुनाव समिति के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह, विजय इंदर सिंगला, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से वन-टू-वन मुलाकात कर संगठन की स्थिति पर फीडबैक लिया था। पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की तस्वीर हुई स्पष्ट  चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं के बैठक में शामिल न होने से पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की तस्वीर और स्पष्ट हो गई है। चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और परगट सिंह फिलहाल दिल्ली में हैं। सूत्रों के अनुसार चन्नी समर्थक नेता कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात कर संगठनात्मक नियुक्तियों और प्रदेश नेतृत्व से जुड़े अपने पक्ष को रखने की तैयारी में हैं। इस बीच मंगलवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने की भी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक चन्नी ने राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। हालांकि मुलाकात का समय तय नहीं हुआ था। माना जा रहा है कि चन्नी गुट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व और हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर अपनी आपत्तियां सीधे केंद्रीय नेतृत्व के सामने रख सकता है। उधर, प्रताप सिंह बाजवा भी चन्नी गुट और वड़िंग गुट के बीच संवाद स्थापित कर विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति बनती नजर नहीं आई है। पार्टी के भीतर दो धड़ों के बीच खिंचतान बरकरार रहने से विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बघेल ने कहा चन्नी से हुई है उनकी बात भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी चरणजीत सिंह चन्नी से फोन पर बात हुई है। चन्नी फिलहाल शहर से बाहर हैं और एक-दो दिन में लौटेंगे। उनके लौटने के बाद उनसे अलग से बैठक कर पंजाब की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बघेल का कहना है कि वह सभी नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर मतभेद दूर करने और पार्टी को एकजुट कर चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।  

रिश्वत के आरोप पर हरियाणा में बवाल, किसान ने XEN से की हाथापाई

टोहाना. दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के एक्सईएन कार्यालय में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। गांव गाजूवाला निवासी देवेंद्र व अन्य लोगों ने एक्सईएन कृष्ण कुमार के साथ हाथापाई की और जबरन उनके हाथ में रुपये पकड़ाने की कोशिश की। खुद को बचाने के लिए एक्सईएन स्टाफ कार्यालय की तरफ भागे, लेकिन हमलावर वहां भी पहुंच गए। वहां एक अधेड़ ने एक्सईएन को बगल में दबाने का प्रयास किया। घबराए एक्सईएन लगातार स्टाफ से डायल 112 पर कॉल कर पुलिस बुलाने की गुहार लगाते रहे। इसके बाद अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर उन्हें छुड़वाया। किसान का आरोप : दलाल के जरिए मांगे दो लाख हमला करने वाले किसान देवेंद्र ने एक्सईएन पर एपी (कृषि पावर) कनेक्शन के लिए दो लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया। देवेंद्र के अनुसार, उनका 2018 का कनेक्शन पेंडिंग है। पहले तीन लाख का एस्टीमेट बना, फिर बढ़ाकर सवा चार लाख कर दिया गया। एसई एसएस राय के रिवाइव करने के आदेश और पूरी राशि भरने के बाद भी कनेक्शन नहीं दिया गया, जिससे उन्हें 20 लाख का नुकसान हुआ है। देवेंद्र ने आरोप लगाया कि एक्सईएन अपने दलाल सुमित के जरिए काम करता है और छुट्टी के दिन उनके खेत में ड्रोन से फोटो व तहसीलदार से पैमाइश करवाई जा रही है। इस मामले में उन्होंने बिजली मंत्री अनिल विज और डीएचबीवीएन के एमडी को ईमेल भेजकर एक्सईएन को सस्पेंड करने और मंजूर हुए कनेक्शनों की जांच की मांग की है।

‘सतलुज’ फिल्म पर बनेगी समीक्षा कमेटी, जसवंत सिंह खालड़ा के उठाए सवालों को लेकर बढ़ी बहस

चंडीगढ़. पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर केंद्र सरकार ने समीक्षा समिति (रिव्यू कमेटी) गठित की है। भाजपा के पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की ओर से की गई अपील के बाद यह कमेटी बनाई गई है। इसकी पुष्टि भाजपा नेता आरपी सिंह ने की है। समिति फिल्म की विषयवस्तु, तथ्यों और इसमें दर्शाए गए घटनाक्रम की समीक्षा करेगी। दावा किया जा रहा है कि फिल्म केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी लिए बिना ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी की गई थी। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। करीब तीन साल तक रिलीज अटकी रहने के बाद फिल्म को पहले तय नाम 'पंजाब 95' की जगह 'सतलुज' नाम से दो दिन पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के महज दो दिन बाद ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद एक बार फिर जसवंत सिंह खालड़ा का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। जसवंत सिंह खालड़ा ने आतंकवाद के दौर में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर करने का अभियान चलाया था। उन्होंने श्मशान घाटों, नगर निगम और अन्य सरकारी अभिलेखों से दस्तावेज जुटाकर दावा किया था कि उस दौर में करीब 25 हजार युवकों की कथित फर्जी मुठभेड़ों में हत्या कर उन्हें लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके दावों ने उस समय पूरे देश में हलचल मचा दी थी और मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया था। इसी अभियान के दौरान 6 सितंबर 1995 को अमृतसर स्थित उनके घर के बाहर से उनका कथित अपहरण कर लिया गया। इसके बाद उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई शुरू की। अगले दिन उन्होंने थाना इस्लामाबाद में अपहरण का मामला दर्ज कराया, लेकिन पुलिस लगातार यह कहती रही कि जसवंत सिंह खालड़ा उसकी हिरासत में नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मामले को अदालत तक पहुंचाया। पुलिस से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर परमजीत कौर ने 12 सितंबर 1995 को सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सरकार बताए कि जसवंत सिंह खालड़ा कहां हैं और यदि वे किसी एजेंसी की हिरासत में हैं तो उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया जाए। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब किया और बाद में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए 15 नवंबर 1995 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की जांच और लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद विशेष अदालत ने वर्ष 2005 में छह पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चार दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 23 नवंबर 2011 को हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया। करीब 16 वर्ष तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद दोषियों की सजा कायम रही। अब फिल्म 'सतलुज' को लेकर बनी समीक्षा समिति के बीच जसवंत सिंह खालड़ा का संघर्ष और 1990 के दशक के पंजाब से जुड़े घटनाक्रम एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन गए हैं। समिति की रिपोर्ट के बाद फिल्म को लेकर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

CG में फर्जी खाद-बीज बेचने वालों पर सख्ती, 28 दुकानों का लाइसेंस निलंबित, 33 को नोटिस

जगदलपुर. खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद और बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने नकली और संदिग्ध गुणवत्ता वाले खाद-बीज के कारोबार पर सख्त रुख अपनाया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने जिलेभर में व्यापक जांच अभियान शुरू किया, जिसमें कई दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की गई है। 33 दुकानों को नोटिस, 28 की बिक्री पर तत्काल रोक जांच के दौरान अब तक 33 खाद-बीज विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं नियमों के उल्लंघन और अनियमितता पाए जाने पर 28 दुकानों में खाद-बीज के विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है, ताकि किसानों तक केवल प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद ही पहुंच सकें। 6 दुकानों से खाद-बीज जब्त, एक विक्रेता पर एफआईआर कार्रवाई के तहत 6 दुकानों से खाद-बीज जब्त कर संबंधित प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं गंभीर अनियमितता के एक मामले में संबंधित विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा दो दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं, जबकि दो अन्य दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर प्रशासन ने कड़ा संदेश दिया है। स्टॉक और मूल्य सूची प्रदर्शित करना होगा अनिवार्य कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, नकली खाद-बीज की बिक्री या नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग ने सभी खाद-बीज विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक की स्थिति और निर्धारित बिक्री मूल्य को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। किसानों के हितों की रक्षा के लिए जारी रहेगा अभियान साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों को जिलेभर में लगातार निरीक्षण और जांच अभियान जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नकली या अमानक खाद-बीज की बिक्री करने वाले कारोबारियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।