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जालंधर में विजय सांपला से SIT ने की पूछताछ, बहबल कलां मामला फिर सुर्खियों में

जालंधर. पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सापला बहाबल कल मामले में पंजाब सरकार की गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के सामने पेश होने के लिए गए हैं। जालंधर के पीएपी कैंपस में जांच टीम ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया है। विजय सांपला ने सर्किट हाउस में अपने समर्थन के साथ इस पर चर्चा की और उसके बाद मार्च के रूप में पीएपी कैंपस के लिए निकले हैं। विजय सांपला ने कहा कि पंजाब सरकार भारतीय जनता पार्टी के पंजाब में बढ़ते कदमों को रोकने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्होंने पंजाब के राज्यपाल को कई साल पहले ज्ञापन देकर जांच की मांग की थी। संभवत इस ज्ञापन के सिलसिले में उन्हें बुलाया गया है। आधिकारिक नोटिस के अनुसार, सांपला को पूछताछ और अपना बयान दर्ज कराने के लिए जालंधर में पंजाब सशस्त्र पुलिस परिसर में पेश होने के लिए कहा गया है। नोटिस में कहा गया कि एसआईटी का मानना ​​है कि सांपला मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से वाकिफ हैं और चेतावनी दी गई है कि आदेश न मानने पर कानून के लागू प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है। नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए, सांपला ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करना चाहते हैं और उन्होंने पेश होने की तारीख का समय आगे बढ़ाने के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध किया है। आधिकारिक समन दस्तावेज पर हाथ से लिखे नोट में, सांपला ने संगठन से जुड़े पहले से तय कामों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन अभी राज्य के आधिकारिक दौरे पर हैं और उनका वहां मौजूद रहना जरूरी है। सांपला ने कहा, ‘‘भले ही इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन जब अगली तारीख तय हो जाएगी, तो मैं उनके मन में मौजूद किसी भी शक को दूर करने के लिए जरूर पेश होऊंगा।’’

पंकज कपूर ने सुनाया शाहरुख खान से जुड़ा NSD का दिलचस्प किस्सा

दिग्गज एक्टर पंकज कपूर ने हाल ही में पुरानी यादें ताजा करते हुए शाहरुख खान से जुड़ा एक दिल छू लेने वाला किस्सा शेयर किया. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में अपने स्टूडेंट के दिनों को याद करते हुए, पंकज ने बताया कि बॉलीवुड सुपरस्टार ने एक बार उभरते हुए एक्टर्स की जिंदगी में बैकस्टेज एक छोटा लेकिन यादगार रोल निभाया था. किंडल कास्ट के यूट्यूब चैनल पर अपने पुराने क्लासमेट्स के साथ हाल ही में हुई मुलाकात के बारे में बात करते हुए, पंकज ने कहा कि NSD से ग्रेजुएट हुए उन्हें 50 साल हो गए थे और उन्होंने अपने घर पर एक गेट-टुगेदर रखा था. इस मुलाकात के दौरान, उनके स्टूडेंट के दिनों की यादें ताजा हो गईं, जिसमें मशहूर थिएटर डायरेक्टर इब्राहिम अल्काज़ी के पुराने किले में किए गए नाटकों की कहानियां भी शामिल थीं. पंकज ने याद किया कि इब्राहीम अलकाजी जी एक साथ तीन बड़े नाटकों- रजिया सुल्तान, तुगलक और अंधा युग को डायरेक्ट कर रहे थे. ये नाटक किले की पुरानी दीवारों के बैकग्राउंड में किए गए थे, जिससे एक शानदार और यादगार थिएटर का एक्सपीरियंस मिला. पंकज कपूर ने सुनाया किस्सा एक्टर को 'रजिया सुल्तान' का एक खास सीन याद आया जिसमें भूखे नागरिक शासक के सामने जमा हुए थे. पहले साल के स्टूडेंट के तौर पर, पंकज और उनके दोस्तों को भीड़ का हिस्सा बनाया गया था, जबकि उनके दो क्लासमेट्स ने सैनिक का रोल निभाया था. सीन के दौरान, सैनिकों को भीड़ की तरफ नान फेंकने थे, और स्टूडेंट ने जल्द ही एक चालाक प्लान बनाया. पंकज ने याद करते हुए कहा, 'हमने दोस्तों के साथ एक टीम बनाई. वे हमारी तरफ नान फेंकते, हम उन्हें पकड़ते, और इंटरवल के दौरान हम समोसे खरीदते, सब कुछ बैकस्टेज ले जाते और साथ में नान, समोसा और चाय का मजा लेते.' हालांकि, यह सीक्रेट प्लान ज्यादा देर तक छिपा नहीं रहा. पंकज के मुताबिक, अलकाजी ने आखिरकार देखा कि कुछ एक्टर सीन की स्टेजिंग में बदलाव कर रहे थे और तुरंत उन्हें डांट लगाई. इस कहानी को और भी खास बनाने वाली बात थी समोसे सप्लाई करने वाले व्यक्ति की पहचान. उन्होंने याद करते हुए कहा, 'वे समोसे हमें कोई और नहीं बल्कि शाहरुख खान सप्लाई करते थे. उस समय वह 10 साल का लड़का था. उसके पिता वहां कैंटीन चलाते थे.' शाहरुख के पिता चलाते थे कैंटीन इससे पहले, 2016 में टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में, शाहरुख खान ने बताया था कि उनके पिता NSD में कैंटीन चलाते थे. उन्होंने कहा, 'मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) का हिस्सा नहीं था, लेकिन मैं वहां के कई एक्टर्स के साथ काम करता था. मनोज बाजपेयी भी वहां से नहीं थे, लेकिन उन्होंने और मैंने रघुवीर यादव जैसे एक्टर्स के साथ काम किया जो NSD का हिस्सा थे. जब हम दिल्ली में थिएटर करते थे, तो वे हमारे बोलने के तरीके और उच्चारण को बेहतर बनाने में मदद करते थे. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा. मेरे पिता NSD में कैंटीन चलाते थे, इसी वजह से मैं वहाँ के सभी बेहतरीन एक्टर्स को जान पाया.'

किफायती आवास सुविधाओं के विस्तार को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के मिलेंगे नए अवसर

यूपी में बढ़े पर्यटक तो योगी सरकार ने किया ‘होम स्टे नीति’ में बड़ा बदलाव अब 8 कमरे तक होंगे पंजीकृत, बीएंडबी और होम स्टे इकाइयों के लिए ऑटो रिन्यूअल की सुविधा शुरू किफायती आवास सुविधाओं के विस्तार को मिलेगा बढ़ावा, रोजगार के मिलेंगे नए अवसर पर्यटन क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप किया गया संशोधन: मंत्री जयवीर सिंह लखनऊ  उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए योगी सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बीएंडबी इकाइयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को पहले से और आसान बनाया गया है। साथ ही पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी प्रदान की गई है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि योगी सरकार का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और स्थानीय लोगों को भी पर्यटन से जुड़ने के अधिक अवसर मिल सकें। 6 की जगह अब 8 कमरों के लिए मिली मंजूरी उन्होंने बताया कि संशोधित नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में अब न्यूनतम एक और अधिकतम आठ कमरे (16 बेड) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पूर्व में अधिकतम 6 कमरों को ही किराये पर दिए जाने की व्यवस्था थी। यह भी साफ किया गया है कि शहरी इलाकों में होम स्टे ऐसी रिहायशी प्रॉपर्टी में चलने चाहिए जो या तो आवेदक की अपनी हो या फिर विकास प्राधिकरण से लीज पर ली गई जमीन पर बनी हो। प्रॉपर्टी के मालिक या उनके परिवार के सदस्यों का वहीं रहना जरूरी है। पर्यटकों को आवास के साथ भोजन की सुविधा बीएंडबी श्रेणी के अंतर्गत आवासीय अथवा लीज पर लिए गए भवनों में अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत किए जा सकेंगे। ऐसी इकाइयों में घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को आवास के साथ नाश्ता और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इकाई में केयरटेकर का निवास अनिवार्य होगा और लीज पर लिए गए भवन की लीज अवधि न्यूनतम तीन वर्ष होनी चाहिए। 16 बेड वाली डॉरमेट्री भी इस श्रेणी में पात्र मानी जाएगी। उन्होंने बताया कि आठ कमरों से अधिक क्षमता वाले आवासीय भवनों, होटल, मोटल और गेस्ट हाउस जैसी इकाइयों को इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत नहीं किया जाएगा। तीन महीने पहले होगा स्वतः नवीनीकरण संशोधन के तहत पंजीकृत इकाइयों को बड़ी राहत देते हुए पोर्टल आधारित स्वतः नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की व्यवस्था भी लागू की गई है। अब इकाई संचालक अपने पंजीकरण की अवधि समाप्त होने से पूर्व विभागीय पोर्टल पर स्वयं नवीनीकरण करा सकेंगे। यह सुविधा पंजीकरण समाप्ति की तिथि से तीन माह पूर्व उपलब्ध रहेगी। पर्यटन आधारित रोजगार बढ़ेंगे अपर मुख्य सचिव पर्यटन विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि यह संशोधन प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण आवास क्षमता बढ़ाने के लिए यह कदम विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।

छात्र संख्या के आधार पर बिहार के विद्यालयों में तय होंगे शिक्षकों के पद

पटना बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य के स्कूलों में टीचरों की न्यूनतम संख्या तय कर दी है। शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया है कि पहली से पांचवीं तक के क्लास में 60 छात्रों पर 2 शिक्षकों का होना जरूरी है तो वहीं 61 से 90 छात्रों पर 3 टीचरों का स्कूल में होना अनिवार्य है। बिहार के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षकों की न्यूनतम संख्या कर दी गई है। वास्तविक नामांकन, कक्षा संरचना और विषयगत आवश्यकता के आधार पर इनकी संख्या तय की जाएगी। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार समीक्षा में पाया गया है कि राज्य के अनेक विद्यालयों में निर्धारित मानक के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं है। कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है। ऐसे में पूरे राज्य में शिक्षकों के युक्तिकरण और संतुलित वितरण के लिए नया मानक तैयार किया गया है। आदेश में अहम प्रवाधान किए गए हैं कि पहली से आठवीं तक संचालित विद्यालयों में शिक्षक आवश्यकता निर्धारण के लिए कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालांकि, विद्यालय में एक ही प्रधानाध्यापक होंगे। छठी से आठवीं तक छठी से आठवीं तक के लिए प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक-एक शिक्षक विज्ञापन एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा (सामान्यत: हिंदी) में होंगे। 105 से 140 छात्रों के बीच नामांकन होने पर चौथ शिक्षक अंग्रेजी विषय का होगा। जबकि 140 से 175 छात्रों के बीच नामांकन होने पर पांचवां शिक्षक संस्कृत या उर्दू का होगा। इसी तरह 175 से अधिक छात्रों पर आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त शिक्षक दिए जाएंगे। पहली से पांचवी तक के छात्र और शिक्षकों की संख्या कुछ इस तरह निर्धारित की गई है। 61 से 90 – 2 91 से 120 – 4 121 से 150 – 5 150 से अधिक – 5 शिक्षक, 1 प्रधान 150 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:30 से अधिक नहीं होगा। शिक्षा विभाग के छह अफसरों पर वित्तीय गड़बड़ियों में गाज वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के आरोप में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सोमवार को छह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है। अधिकारियों में से कुछ की वेतन-पेंशन से कटौती और वेतन वृद्धि पर रोक की भी अनुशंसा की गई है। यह आदेश 8 मई 2026 से प्रभावी होगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि बांका के पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) पवन कुमार पर लापरवाही का आरोप है। वे अभी पूर्वी चंपारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी हैं। भोजपुर के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मो. इरशाद अंसारी को वित्तीय अनियमितता में बर्खास्त करने की अनुशंसा की गई है। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पूर्व सचिव राजेश कुमार पर लापरवाही का आरोप है। शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी में सुपौल के पूर्व डीईओ रामाशीष महतो पर कार्रवाई की गई है। बांका के पूर्व डीईओ रह चुके देवेन्द्र कुमार झा पर भी वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। मधुबनी के मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरजीना खातून को विद्यालय परित्याग प्रमाणपत्र पर प्रतिहस्ताक्षर के लिए अवैध राशि लेने के आरोप हैं।

बाजार स्ट्रीट क्षेत्रों में भूतल और प्रथम तल पर बन सकेंगे मकान

 लखनऊ क्या बाजार स्ट्रीट वाले क्षेत्रों में दुकान के साथ मकान बनाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश शासन ने बाजार स्ट्रीट में नक्शा पास करने को लेकर स्थिति पूरी तरह से साफ कर दी है। बाजार स्ट्रीट वाले क्षेत्रों में भूस्वामी के चाहने पर भूतल (Ground Floor)और प्रथम तल (First Floor) का भी आवासीय नक्शा पास किया जाएगा। इन दोनों तलों पर व्यावसायिक नक्शा पास करने की व्यवस्था है। शासन से कुछ विकास प्राधिकरणों ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके आधार पर विकास प्राधिकरणों को विस्तृत-दिशा निर्देश भेजा गया है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग शहरों के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार कराता है। इसमें सड़कों की चौड़ाई के आधार पर भू-उपयोग चिह्नित किए जाते हैं। भवन विकास उपविधि में इसके मुताबिक ही नक्शा पास करने की व्यवस्था दी जाती है। आवास विभाग ने पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशंस जारी किया है। प्राधिकरणों ने स्थिति स्पष्ट करने को कहा था कुछ विकास प्राधिकरणों ने इसके कुछ बिंदु को लेकर शासन से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था। इसके आधार पर पूरी स्थिति साफ की गई है। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि बाजार स्ट्रीट में व्यावसायिक उपयोग पूरे भूखंड की गहराई के आधार पर दी जाएगी। भूतल व प्रथम तल व्यावसायिक होगा। शेष तलों का इस्तेमाल आवासीय होगा। भूखंड स्वामी के अनुरोध पर भूतल व प्रथम तल पर आवासीय उपयोग की अनुमति भी दी जाएगी। बाजार स्ट्रीट में मिश्रित भू उपयोग को मंजूरी दी गई है यूपी में 18 या 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर बाजार स्ट्रीट के रूप में चिह्नित किया गया है। इसका मकसद व्यवस्थित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की सुविधा देना है। बाजार स्ट्रीट में मिश्रित भू-उपयोग की सुविधा दी गई है। मसलन नीचे दुकान और ऊपर मकान बनाने का नक्शा पास किया जाता है। यूपी में अब आठ कमरे वाले होमस्टे भी होंगे पंजीकृत वहीं, प्रदेश में लगातार बढ़ रही पर्यटन गतिविधियों और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) एवं होम स्टे नीति-2025 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और बी एंड बी इकाइयों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया गया है तथा पंजीकृत इकाइयों को ऑनलाइन स्व-नवीनीकरण (ऑटो रिन्यूअल) की सुविधा भी प्रदान की गई है। अब आठ कक्ष वाले भवन भी होम स्टे नीति के तहत पंजीकृत किए जाएंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संशोधित नीति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में संचालित होम स्टे इकाइयों में अब न्यूनतम एक तथा अधिकतम आठ कक्ष (16 शैय्या) पंजीकृत कराए जा सकेंगे। पूर्व में अधिकतम छह कक्षों को ही किराये पर दिए जाने की व्यवस्था थी।

महाभारत के विदुर की सीख, ये चार आदतें रोकती हैं सफलता की राह

सफलता पाना हर किसी का सपना होता है, लेकिन कई बार हम अनजाने में ही अपनी कुछ आदतों की वजह से अपने ही रास्ते का कांटा बन जाते हैं. महाभारत काल के महान विद्वान महात्मा विदुर ने बहुत पहले ही उन 4 चीजों के बारे में बता दिया था, जो किसी भी व्यक्ति की प्रोग्रेस को पूरी तरह बर्बाद कर सकती हैं. अगर आप वाकई जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आज ही इन 4 आदतों को पहचानें और उनसे दूरी बना लें. 1. गुस्सा (क्रोध): गुस्सा इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है. जब हमें गुस्सा आता है, तो हमारी सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है.  गुस्से में लिए गए फैसले अक्सर गलत होते हैं, जिसका पछतावा हमें पूरी जिंदगी करना पड़ता है. समझदारी इसी में है कि गुस्से को काबू में रखा जाए. 2. अति उत्साह (जल्दबाजी या बहक जाना): खुशी अच्छी बात है, लेकिन बहुत ज्यादा खुशी या भावनाओं में बह जाना खतरनाक हो सकता है.  जब हम हद से ज्यादा उत्साहित होते हैं, तो हम वास्तविकता से दूर हो जाते हैं और अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते.  जीवन में संतुलन रखना ही सफलता की कुंजी है. 3. चापलूसी (खुशामद के जाल में फंसना): अक्सर लोग अपना मतलब निकालने के लिए हमारी झूठी तारीफ करते हैं.  अगर आप उनकी बातों में आकर बहक जाते हैं, तो यह आपके आत्मसम्मान के लिए ठीक नहीं है.  हमेशा कड़वा ही सही, लेकिन सच सुनने का साहस रखें. चापलूसों से बचकर रहना ही आपकी भलाई है. 4. अहंकार (घमंड): मैं ही सब कुछ हूं – यह सोच आपकी तरक्की का सबसे बड़ा रोड़ा है. अहंकारी व्यक्ति कभी कुछ नया नहीं सीख पाता क्योंकि उसे लगता है कि उसे सब पता है. सफल वही लोग होते हैं जो हमेशा जमीन से जुड़े रहते हैं और नई चीजें सीखने के लिए तैयार रहते हैं.

बैतूल के आदिवासी अंचल में बदलाव लाने वाले मोहन नागर को आज राष्ट्रपति भवन में मिलेगा पद्मश्री सम्मान

राजगढ़ मध्य प्रदेश के लिए कल का दिन बेहद गौरवशाली होने जा रहा है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को मंगलवार 23 जून 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजा जाएगा। आदिवासी अंचल में शिक्षा, ग्राम विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय तक किए गए उनके अद्वितीय कार्यों के लिए देश के सर्वोच्च मंच से उनकी इस साधना को सम्मानित किया जा रहा है। जब सब कुछ छोड़ आदिवासियों के बीच पहुंचे मोहन नागर बता दें कि 23 फरवरी 1968 को राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर ने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। छात्र जीवन से ही समाज सेवा की लौ जल रही थी, इसलिए साल 1991 में वे अपना सब कुछ छोड़कर आदिवासी कल्याण के संकल्प के साथ बैतूल जिले के सुदूर इलाकों में आ गए। बैतूल के आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि पर्याप्त बारिश के बावजूद जल संचयन के अभाव में सर्दियों की शुरुआत में ही कुएं-बावड़ी सूख जाते हैं। इस पानी की किल्लत की वजह से स्थानीय आदिवासियों को भारी पलायन करना पड़ता था, जिसे रोकने के लिए मोहन नागर ने जल-संरक्षण को अपना जीवन बना लिया। श्रमदान से खड़ी कीं 75 हजार जल संरचनाएं मोहन नागर ने बहते पानी को रोकने के लिए एक बेहद सस्ता और पारंपरिक लोक-फॉर्मूला अपनाया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर सीमेंट की खाली बोरियों में रेत और मिट्टी भरकर नदी-नालों पर 'बोरी बंधान' की शुरुआत की। सतपुड़ा की पहाड़ियों पर भगीरथ प्रयास 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के दौरान उन्होंने अभूतपूर्व जनभागीदारी (श्रमदान) का उदाहरण पेश करते हुए सतपुड़ा पारिस्थितिकी क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर रिकॉर्ड 75,000 जल संरचनाओं का निर्माण कराया और हजारों पौधों का रोपण किया, जिससे क्षेत्र का वाटर लेवल कई फीट ऊपर आ गया।

ट्रांसफर एक्सप्रेस: सरकार ने जारी की तबादला सूची, कई अधिकारियों को मिली नई पोस्टिंग

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल की सूचना मिली है। यहां एक साथ 12 तहसीलदार डिप्टी कलेक्टर बने है। इन अधिकारियों को पदोन्नत करते हुए तबादला आदेश जारी किया है। 3 वर्ष के लिए अधिकारी एक ही जगह पर टिके रह सकते है। यह पदोन्नत अधिकारियों की सेवाएं छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा नियम, 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत शासित होगी।

कैंसर जांच में बड़ी सफलता: IIT दिल्ली ने 60 रुपए में पैंक्रियाज कैंसर टेस्ट का दावा किया

अंबाला. बब्याल के रहने वाले एवं आइआइटी दिल्ली के छात्र शिवम ने शोध कर पैंक्रियाज कैंसर की बीमारी की जांच के लिए उपकरण यूरोस्मार्ट बनाया है। शिवम का दावा है कि इससे यूरिन (पेशाब) के सैंपल से शरीर में पैंक्रियाज कैंसर का पता चल जाएगा। कुछ लोगों पर इसका टेस्ट भी किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शिवम ने इस उपकरण के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। इससे सिर्फ 60 रुपये में जांच हो सकेगी। उम्मीद है कि जल्द ही यह बाजार में उपलब्ध होगा, जिसके लिए एक प्रक्रिया से गुजरना होगा। वर्ष 2024 में शिवम कुमार बग्गन, कुशाग्र जैन, खालिद भट्ट और प्रो. नवीन की टीम ने शोध शुरू किया था। यह एक साइंस जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है। ऐसे काम करता उपकरण शिवम ने बताया कि यूरोस्मार्ट उपकरण सेंसर पर काम करता है। इस में पोटेंशियो स्टेट सेंसर लगाया है, जो मोबाइल से जुड़ा होता है। मरीज का यूरिन सैंपल इस उपकरण में लिया जाता है। इस पर एक बटन लगाया गया है, जिसे दबाना होता और यूरिन की एक बूंद सेंसर पर पहुंच जाती है। इसके बाद सारा काम सेंसर करता है। करीब 15 मिनट का समय लगता है और रिपोर्ट मोबाइल पर आ जाती है और स्पष्ट हो जाता है कि मरीज को पैंक्रियाज कैंसर है या नहीं। यह जांच ब्लड से होती है, जिसमें काफी समय लगता है। जिसे पैंक्रियाज कैंसर होगा, उसका शरीर बायोमार्कर सीए 19.9 रिलीज करता है। यह ब्लड और यूरिन दोनों में पाया जाता है। अभी इसका ट्रायल प्रथम चरण में है। उम्मीद है कि जल्द ही यह उपकरण बाजार में उपलब्ध होगा। यह है पैंक्रियाज कैंसर पैंक्रियाज कैंसर एक गंभीर बीमारी है जो पैंक्रियाज में कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने के कारण होता है। यह पाचन एंजाइम और इंसुलिन बनाने वाली ग्रंथि को प्रभावित करता है। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होता और देरी से पता चलने के कारण यह और घातक हो जाता है। यही कारण है कि इस तरह का कैंसर काफी घातक हो जाता है, जबकि उपचार काफी महंगा है। आइआइटी दिल्ली के प्रो. एवं शोध टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. नवीन कुमार सिंह ने बताया कि सुबह का पहला यूरिन जांच के लिए बेहतर होता है, क्योंकि इसमें इन्फार्मेशन अधिक होती है। इस टेस्ट में यदि रीडिंग 37 यूनिट प्रति एमएल से नीचे आती है तो पैंक्रियाज कैंसर नहीं मान सकते, जबकि इससे अधिक यह जितना अधिक जाएगा उतना कैंसर माना जाता है। अब इस उपकरण को लेकर एम्स में जा रहे हैं, जहां आगामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उपचार की निगरानी में इस्तेमाल हो सकता: डॉ. यशपाल कैंसर विशेषज्ञ एवं अटल कैंसर केयर सेंटर के निदेशक डा. यशपाल वर्मा का कहना है कि सीए 19-9 एक गैर-विशिष्ट परीक्षण है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इसे एक स्वतंत्र नैदानिक उपकरण के रूप में उपयोग करने के बजाय, उपचार की निगरानी और पुनरावृत्ति का पता लगाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। पित्त की पथरी और अग्नाशयशोथ जैसी सामान्य स्थितियों में भी इसका स्तर अधिक हो सकता है।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर  प्रखर राष्ट्रवादी नेता एवं महान  शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर आज लोक भवन में  राज्यपाल  रमेन डेका ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।                  इस अवसर पर राज्यपाल ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और को सुदृढ़ करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके विचार और आदर्श आज भी देशवासियों को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। लोक भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।