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रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू का डंका विदेशों तक, GI टैग मिलने से बढ़ा सम्मान

रतलाम   मध्य प्रदेश को देश विदेश में पहचान दिलाने वाली रतलाम की बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को जीआई टैग मिल गया है. इससे पहले रतलाम की सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को भी जीआई टैग मिला था. रतलाम मध्य प्रदेश का ऐसा पहला जिला है जहां की चार-चार यूनिक प्रोडक्ट को जीआई टैग मिला है. GI टैग मिलने से रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी के उत्पादक किसानों को फायदा मिलेगा और मांग बढ़ने से इनके बेहतर दाम भी किसानों को मिल सकेंगे।  भारत सरकार से मिला GI टैग, किसानों को फायदा उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंगल सिंह डुडवे ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, '' सैलाना क्षेत्र में उगाई जाने वाली बालम ककड़ी और रतलाम जिले के बांगरोद के गराडू को भारत सरकार से जीआई टैग मिल गया है. वर्तमान में रतलाम जिले में बालम ककड़ी लगभग 100 हेक्टेयर और गराडू लगभग 120 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं. इन फसलों के उत्पादन से जिले के बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं. अब इन्हें रतलाम के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकेगी. दोनों फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा और जिले के अन्य किसान भी इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे।  क्यों खास है रतलाम की बालम ककड़ी? सैलाना क्षेत्र के आदिवासी अंचल में उगाई जाने वाली एक खास किस्म की ककड़ी जिसे बालम ककड़ी के नाम से जाना जाता है. अपने खास स्वाद और भीतर से निकलने वाले केसरिया और हरे रंग के लिए प्रसिद्ध है. वैसे तो ककड़ी को सलाद के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन इस बालम ककड़ी को लोग नाश्ते के तौर पर खाने में उपयोग करते हैं. बालम ककड़ी के खास स्वाद का आनंद बारिश के मौसम में केवल एक महीने के लिए ही लेने को मिलता है. अगस्त से सितंबर महीने के बीच बालम ककड़ी की बहार आती है।  रतलाम के नाम से जाना जाएगा मालवी गराडू रतलाम के बांदगरोद, खेतलपुर, सेजावता और धमोतर क्षेत्र में उगाया जाने वाला यह खास किस्म का कंदमूल फ्राई करके स्नैक्स के रूप में उपयोग किया जाता है. गराडू अपने बेहतरीन स्वाद, अंदर से मुलायम व बाहर से कुरकुरा होने की वजह से लोगों को खूब पसंद आता है. ठंड के मौसम में आने वाले इस फल के स्वाद का आनंद लेने के लिए देश के बड़े शहरों सहित दुबई तक से आर्डर आते हैं. गराडू विटामिन मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. वैसे तो मालवा के अन्य जिलों में भी गराडू की खेती की जाती है लेकिन रतलाम के आसपास के गांव में उत्पादित किए जाने वाले गराडू की साइज और क्वालिटी अच्छी होती है इसलिए रतलाम के गराडू की मांग अधिक बनी रहती है।  क्या होता है जीआई टैग? जीआई टैग (GI Tag) यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग. जैसा की नाम से समझ आता है यहा किसी उत्पाद का 'भौगोलिक संकेतक' होता है. यह टैग प्रमाणित करता है कि वह उत्पाद उसी स्थान से आया है, जिसका दावा किया जा रह है.जीआई टैग आमतौर पर उत्पादके विशिष्ट भौगोलिक मूल स्थान, पारंपरिक गुणवत्ता और ख्याति के आधार पर दिया जाता है।  रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी को जीआई टैग दिलवाने के प्रयास मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने शुरू किए थे. इसके बाद अब रतलाम जिले के पास चार-चार यूनिक प्रोडक्ट के जीआई टैग मौजूद है। 

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में छाई ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’, 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को मिली सराहना

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मुंबई में प्रदर्शित हुई 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित डॉक्यूमेंट्री का अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के बीच 64 कैनवास से 15,000 किलोमीटर की आध्यात्मिक यात्रा से सिनेमा तक का सफर भोपाल 19वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 मुंबई में कलाकार एवं साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की 64 योगिनी प्रदेश के मितावली स्थित मंदिर पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ का प्रदर्शन हुआ। संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के लिए पहली बार प्रदर्शित की गई। मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (Mumbai International Film Festival – MIFF) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा फिल्म समारोह है। यह विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने डॉ. बीना उन्नीकृष्णन एवं उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप्ति चावला, डॉ. बीना उन्नीकृष्णन, सिनेमैटोग्राफर प्रदीप सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति रही। हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं 64 योगिनी मंदिर: अपर मुख्य सचिव शुक्ला मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश के मितावली (मुरैना), जबलपुर और खजुराहो के 64 योगिनी मंदिर हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मितावली का 64 योगिनी मंदिर, जिसने भारत की पुरानी संसद भवन की वास्तुकला को प्रेरित किया, यह आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूचि में भी शामिल है। ‘Y64 – Whispers of the Unseen’ जैसी परियोजना इस अद्वितीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचा रही है। डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की कलात्मक यात्रा के माध्यम से यह फिल्म युवाओं को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सृजनशीलता, साहस, आत्म-अन्वेषण और स्त्री शक्ति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों से परिचित कराती है। 64 योगिनियों ने मुझे इस कार्य के लिए चुना, यह मेरा सौभाग्य : डॉ. बीना उन्नीकृष्णन डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि लगभग साढ़े बारह वर्ष पूर्व उन्होंने 64 योगिनियों के चित्रांकन की प्रक्रिया को केवल एक दस्तावेज़ के रूप में संजोने की शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ यह प्रयास समर्पण, धैर्य और आत्म-परिवर्तन की प्रेरणादायक सिनेमाई यात्रा बन गया। इस वर्ष उन्होंने 64 मूल चित्रों के साथ भारत के 14 शहरों में लगभग 15,000 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर हजारों लोगों को योगिनी परंपरा से परिचित कराया तथा कला, संस्कृति और अध्यात्म पर व्यापक संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा “जब मैंने यह यात्रा शुरू की थी, तब मैं केवल उत्तर खोजती एक कलाकार थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह एक पुस्तक, प्रदर्शनी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और अंततः एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का रूप ले लेगी। योगिनियों ने मुझे भय से परे जाना और अपने स्त्रीत्व तथा अदृश्य मार्ग पर विश्वास करना सिखाया। मैं हमेशा कहती हूँ कि मैंने योगिनियों को नहीं चुना, बल्कि योगिनियों ने मुझे चुना है। उन्होंने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल योगिनी मंदिरों के इतिहास और रहस्य को नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आह्वान को पूरा करने के लिए आवश्यक साहस और समर्पण की कहानी भी प्रस्तुत करती है। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। विरासत और संस्कृति का अद्भुत संगम है फिल्म 64 योगिनि मंदिरों से प्रेरित यह अनूठी फिल्म, संस्कृति, अध्यात्म और विरासत का अद्भुत संगम है। कंकाली ट्रस्ट और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री भारत के योगिनी मंदिरों से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उत्सव भी है। यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को ऐसे संसार में ले जाती है, जहाँ कला, आस्था, इतिहास और आत्म-परिवर्तन एक-दूसरे से जुड़कर एक अद्वितीय अनुभव का निर्माण करते हैं। 

मोहन कैबिनेट में नए चेहरे, पुराने मंत्रियों पर संकट! 3 सीनियर मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।  इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा। सीएम बोले- परफॉर्मेंस बनेगा आधार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते हैं। बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।     बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ाना: क्षेत्र की सीमित हिस्सेदारी से उपजी नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।     महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना: महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए रीती पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को अवसर मिल सकता है।     ओबीसी समीकरण और 2028 की तैयारी: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।     निकाय चुनाव की तैयारी: अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन सीटों की स्थिति, प्रत्याशी चयन, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर फीडबैक जुटा रहा है।     सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलन: मौजूदा कैबिनेट में सिंधिया समर्थक नेताओं की मजबूत मौजूदगी है। फेरबदल में पार्टी को यह प्रभाव बनाए रखते हुए संगठन के पुराने नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देना होगा। इन मंत्रियों पर हटने का खतरा समीक्षा रिपोर्ट और विवादों के आधार पर कुछ मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:     विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में रहे। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और संगठन की नाराजगी भी सामने आई। पूर्व में भी उनके कुछ बयान पार्टी के लिए असहजता का कारण बने थे।     दिलीप अहिरवार: पहली बार विधायक बने अहिरवार को कैबिनेट में जगह मिली थी। हालांकि हालिया समीक्षा में उनके कामकाज को अपेक्षित स्तर का नहीं माना गया, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।     प्रतिमा बागरी: उनका नाम जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद में चर्चा में रहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है। उनके भाई की गिरफ्तारी का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना।     राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह के विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।     एदल सिंह कंषाना : रेत खनन और माफिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। उनके स्टाफ के सदस्य तबादलों के एवज में रिश्वत मांगते के खुफिया कैमरे में कैद हुए। इन मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव     प्रहलाद पटेल: उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने पर उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त विभाग भी दिए जा सकते हैं।     कैलाश विजयवर्गीय: विभागों में बदलाव संभव है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और जिम्मेदारियां क्या होंगी इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।     तुलसीराम सिलावट: विभागीय पुनर्संतुलन के तहत उनके विभाग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह कहते हैं कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं, जिन्होंने सपने में भी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। पार्टी ने उन्हें तीसरी या चौथी पंक्ति से उठाकर इतने बड़े पद पर बैठाया है। उनके साथ प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता काम कर रहे हैं, जो अनुभव और कद में उनसे कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में इन नेताओं का असहज होना लाजमी है। यह उस समय का पॉलिटकल कंपल्शन या मजबूरी थी। यह चल रहा था और आगे भी चल सकता है। नए चेहरों की एंट्री: कौन हैं दावेदार? संभावित नए चेहरों में सागर के प्रदीप लारिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी चर्चा में है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम … Read more

सरकार का बड़ा फैसला: 48 लाख लोगों की होगी मुफ्त रजिस्ट्री, कपास पर मंडी शुल्क घटा और सामान्य शुल्क बढ़ा

भोपाल  स्वामित्व योजना में 48 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त में रजिस्ट्री कराने राज्य सरकार ने पंचायत उपकर और पंजीयन शुल्क माफ करने का अध्यादेश जारी कर दिया है। इसके लिए विधानसभा में दोनों ही विभागों से संबंधित मामलों में विधेयक भी सरकार मानसून सत्र के दौरान ला सकती है। इसके साथ ही 9 जून को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर कपास पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत करने और मंडी में लगने वाले सामान्य शुल्क को एक से 1.50 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन भी सरकार ने जारी कर दिया है। मोहन यादव सरकार ने 2 जून को हुई कैबिनेट बैठक में 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के अंतर्गत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है। इससे सरकार पर 3800 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने वाला है। अलग-अलग विभाग न जारी किए नोटिफिकेशन इस निर्णय पर अमल के लिए राज्य सरकार के पंजीयन और पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने अलग-अलग अध्यादेश के नोटिफिकशन जारी कर दिए हैं। पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत उपकर के रूप में ली जाने वाली राशि ऐसे मामलों में माफ किए जाने और पंजीयन विभाग ने पंजीयन व मुद्रांक शुल्क माफ किए जाने का नोटिफिकेशन किया है। नौ जून को हुई कैबिनेट में तय किया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस की कमी पूरी करने एवं पंजीयन की कार्यवाही होगी। इसके बाद नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे। आयुक्त भू संसाधन की कमेटी पूरी कराएगी प्रोसेस योजना के क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। कपास पर ली जाने वाली मंडी फीस कम करने के आदेश 9 जून को मोहन कैबिनेट ने कपास पर ली जाने मंडी फीस को 1% से घटाकर 0.5% करने का निर्णय लिया था। इसके बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि कपास की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी फीस 0.50 रुपए यानी 50 पैसे होगी। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय जिनिंग मिलों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें है, जिनकी प्रोसेसिंग कैपिसिटी लगभग 13 लाख मीट्रिक टन है। महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में रुकेगा पलायन प्रदेश में कपास पर मंडी फीस की दर में कमी किए जाने से जिनिंग मिलों का महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन रुकेगा। इन्हें प्रदेश में ही व्यवसाय करने को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे रोजगार में तथा जीएसटी संग्रहण में वृद्धि होगी। जिनिंग मिलों की इनपुट लागत में कमी आएगी और उनकी आर्थिक व्यवहारिता में वृद्धि होगी। महाराष्ट्र सरकार पहले ही 0.5 प्रतिशत फीस ले रही है जिसके चलते एमपी का जिनिंग मिल कारोबार प्रभावित हो रहा था। नोटिफाइड उपज के हर 100 रुपए पर डेढ़ रुपए लगेगा मंडी शुल्क इसके साथ ही कृषि उपज मंडियों में लगने वाले सामान्य मंडी शुल्क को एक रुपए से बढ़ाकर एक रुपए 50 पैसे किया गया है। इससे 500 करोड़ रुपये की आय होगी। 9 जून को हुए कैबिनेट के फैसले के बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अधिसूचित कृषि उपज की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी टैक्स 1 रुपए के स्थान पर 1.50 रुपए वसूला जाएगा। इस राशि से जिलों में कोल्डस्टोरेज, वेयरहाउस प्रोसेस्ड यूनिट्स एवं लॉजिस्टिक सुविधाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इस शुल्क राशि में से 50 पैसे व्यापार विकास निधि के अंश के रूप में किसानों के कल्याण में उपयोग किया जायेगा। इसमें निराश्रित शुल्क को यथावत् 20 पैसे रखा जाएगा। बाकी आय का उपयोग किसान सड़क निधि एवं कृषि अनुसंधान तथा अधोसंरचना विकास में किया जाएगा।

महाकाल भक्तों के लिए बड़ा बदलाव! भस्म आरती में अब 3 माह में एक बार ही मिलेगा मौका

उज्जैन उज्जैन में भगवान महाकाल की भस्म आरती की अनुमति के लिए अब श्रद्धालु तीन माह में केवल एक बार अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकेंगे। यह व्यवस्था प्रोटोकॉल से आने वाले ऐसे मोबाइल नंबरों पर भी लागू होगी, जिनसे हर माह भस्म आरती की अनुमति ली जा रही है। हालांकि, मंदिर समिति का कहना है कि यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिसे अब और प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग 15 दिन पहले ऑनलाइन करवा सकते थे। इसके लिए मोबाइल नंबर से जुड़ा कोई विशेष नियम नहीं था। वर्ष 2024 में भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के चलते तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का निर्णय लिया था। यह व्यवस्था कुछ समय तक लागू रही, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। अब एक बार फिर भस्म आरती की अनुमति को लेकर मिल रही शिकायतों के चलते मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि एक मोबाइल नंबर का उपयोग तीन माह बाद ही दोबारा किया जा सकेगा। इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया गया है। अब जो श्रद्धालु प्रोटोकॉल या अन्य माध्यमों से हर माह भस्म आरती की अनुमति लेकर दर्शन करने आते थे, उन्हें तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति मिल सकेगी। महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। इसे अब और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं किया जा सकेगा। वर्ष 2024 में भी हुआ था नियम लागू बता दें कि 2024 में भी तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने भस्म आरती की बुकिंग में धांधली की शिकायतों के बाद एक आधार और एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में एक बार अनुमति का नियम बनाया था। कुछ समय तक ये व्यवस्था चली, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। अब फिर से शिकायतें बढ़ने पर नियम को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। मंदिर प्रशासन ने दी सफाई महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भस्म आरती में सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिले और कुछ लोगों द्वारा बार-बार बुकिंग कर सीटें कब्जाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। आम श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा मंदिर समिति का मानना है कि नए नियम से उन भक्तों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से भस्म आरती के दर्शन के लिए स्लॉट मिलने का इंतजार करते हैं। अब एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार बुकिंग करने की संभावना कम होगी और अधिक श्रद्धालु इस विशेष आरती में शामिल हो सकेंगे। इससे भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी बढ़ेगी। क्या बदला नए नियम में? अब एक मोबाइल नंबर और एक आधार कार्ड से तीन महीने में केवल एक बार ही भस्म आरती की अनुमति मिलेगी। यह नियम आम श्रद्धालुओं और प्रोटोकॉल श्रेणी दोनों पर समान रूप से लागू रहेगा। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य भस्म आरती में सभी भक्तों को समान अवसर उपलब्ध कराना और बुकिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रशासक बोले – नियम नया नहीं, सिर्फ सख्ती बढ़ाई महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने साफ किया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। अब इसे और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि आम श्रद्धालुओं को भी आसानी से दर्शन का मौका मिले। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं हो सकेगा। जानिए क्या बदला नियम में? • पहले: प्रोटोकॉल से हर महीने बुकिंग संभव थी • अब: हर मोबाइल नंबर से 3 महीने में सिर्फ 1 बार बुकिंग • लागू: आम श्रद्धालु + प्रोटोकॉल दोनों पर • मकसद: बार-बार दर्शन करने वालों पर रोक, सबको समान मौका • आधार कार्ड: एक आधार से भी 3 महीने में 1 बार ही अनुमति आम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत इस नियम से उन आम भक्तों को फायदा होगा जो महीनों तक ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते थे। अब वीआईपी और बार-बार दर्शन करने वालों की मोनोपॉली टूटेगी। मंदिर समिति का दावा है कि इससे भस्म आरती में पारदर्शिता बढ़ेगी।    .

महिलाओं के खाते में 4500 रुपये ट्रांसफर! भगवंत मान सरकार ने किया बड़ा ऐलान, जानें किसे मिलेगा लाभ

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रदेश की महिलाओं के लिए एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत महिलाओं के खातों में एक साथ तीन महीने की सत्कार राशि एक जुलाई को पहुंच जाएगी. योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं के खातों में एडवांस राशि के साथ अप्रैल से देय बकाया रकम सीधे ट्रांसफर की जाएगी।   इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए 4,500 रुपये और सामान्य श्रेणी की महिलाओं के लिए 3,000 रुपये की पहली किस्त (तीन महीने की आर्थिक सहायता के बराबर) एक जुलाई को उनके बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी।  किन महिलाओं को कितना मिलेगा लाभ? राज्य सरकार की इस योजना के तहत सामान्य श्रेणी की महिलाओं को मासिक 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये मिलेंगे.  दरअसल, मान ने रविवार को प्रदेश के चनार्थल कलां गांव में 'लोक मिलनी' (जन-संवाद) कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित किया और इसी दौरान योजना के तहत राशि देने का ऐलान किया.  उन्होंने कहा, 'एक जुलाई को महिला लाभार्थियों को उनके मोबाइल फोन पर सूचनाएं प्राप्त होंगी, जिनमें उनके खातों में जमा की जा रही आर्थिक सहायता के बारे में जानकारी दी जाएगी।  महिलाएं सम्मान की हकदार मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वित्तीय सहायता शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह निश्चित रूप से उन्हें सम्मान, स्वाभिमान और आत्म-विश्वास देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे स्वयं जीवन की स्रोत हैं। माताओं-बहनों के आशीर्वाद दुनिया की हर चुनौती को पार करने में मदद करते हैं। घरेलू दर्जे को सुधारने, लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करना बहुत जरूरी है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो परिवार खुशहाल होते हैं और समाज आगे बढ़ता है। एसआईआर पर भी दी प्रतिक्रिया एक अन्य मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भारत चुनाव आयोग द्वारा चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पंजाब सरकार किसी भी असली वोट को काटने नहीं देगी। मैं लोगों को सचेत करना चाहता हूं कि भाजपा वैध वोटों को काटने के लिए एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकती है, जैसा कि चुनाव वाले अन्य राज्यों में हुआ है। हालांकि, हम पूरी तरह से सतर्क हैं और भगवा पार्टी के नापाक इरादों को सफल नहीं होने देंगे। पंजाब के हर असली मतदाता की रक्षा की जाएगी। राहुल महाजन तीन महीने की राशि एक साथ खाते में बता दें कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'मावां-धीयां सत्कार योजना' की घोषणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान की थी. इस योजना के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 9300 करोड़ रुपये का आवंटित किया है. प्रदेश सरकार का दावा है कि इस योजना का लाभ राज्य की करीब 97 फीसदी वयस्क महिलाओं को मिलेगा. इस योजना को सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से लागू कर दिया था, इसलिए अप्रैल, मई और जून की बकाया राशि भी लाभार्थियों के खाते में जमा की जाएगी।    फतेहगढ़ साहिब में 'लोक मिलनी' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "नौ दिन बाद पहली जुलाई को 18 साल से अधिक उम्र की महिला लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर उनके खातों में वित्तीय सहायता जमा होने के नोटिफिकेशन प्राप्त होंगे। जनरल श्रेणी से संबंधित महिलाओं को ₹1,000 प्रति माह, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह मिलेंगे। यह पैसा बिना किसी मध्यस्थ के सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही हैं, वे भी इस योजना के पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस पहल का लाभ मिलने की उम्मीद है और पंजाब सरकार ने इसके लिए ₹9,300 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "यह वित्तीय सहायता शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह निश्चित रूप से उन्हें सम्मान, स्वाभिमान और आत्म-विश्वास देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे स्वयं जीवन की स्रोत हैं। माताओं-बहनों के आशीर्वाद दुनिया की हर चुनौती को पार करने में मदद करते हैं। घरेलू दर्जे को सुधारने, लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करना बहुत जरूरी है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो परिवार खुशहाल होते हैं और समाज आगे बढ़ता है।" एक अन्य मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "भारत चुनाव आयोग द्वारा चल रही एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान पंजाब सरकार किसी भी असली वोट को काटने नहीं देगी। मैं लोगों को सचेत करना चाहता हूं कि भाजपा वैध वोटों को काटने के लिए एस.आई.आर. प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकती है, जैसा कि चुनाव वाले अन्य राज्यों में हुआ है। हालांकि, हम पूरी तरह से सतर्क हैं और भगवा पार्टी के नापाक इरादों को सफल नहीं होने देंगे। पंजाब के हर असली मतदाता की रक्षा की जाएगी।" मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझसे पहले के मुख्यमंत्री कभी भी आम लोगों से नहीं मिले। वे तापमान चेक करने के बाद ही अपने आलीशान घरों से बाहर आते थे। दूसरी तरफ मैं 24 घंटे लोगों के लिए मौजूद रहता हूं। जनता की सेवा मेरे लिए कोई कभी-कभी की जाने वाली गतिविधि नहीं है, यह मेरी जिम्मेदारी है।" पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "इन नेताओं ने अपने सरकारी पदों का दुरुपयोग करके अथाह संपत्ति इकट्ठी की और बड़े-बड़े महल बनाए। उनकी आलीशान रिहायशों की दीवारें ऊंची थीं और उनके दरवाजे आम लोगों के लिए बंद रहते थे। वे जनता की पहुंच से दूर रहे और आखिरकार लोगों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। जब नेता लोगों की बात सुनना बंद कर देते हैं तो लोग भी आखिरकार उन नेताओं को सुनना बंद कर देते हैं।" "पंजाब के लोगों ने उन लोगों को बार-बार नकारा है, जिन्होंने उन्हें बारी-बारी से लूटा। इन नेताओं ने आम लोगों को लंबे समय तक मूर्ख बनाया, लेकिन पंजाबी … Read more

सिंहस्थ 2028 की सुरक्षा होगी हाईटेक, RPF ने मांगे 4500 जवान, ड्रोन और 700 CCTV कैमरे

उज्जैन  उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने मेगा प्लान तैयार कर लिया है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए 4500 अतिरिक्त जवान, डॉग स्क्वॉड, ड्रोन और 700 हाईटेक सीसीटीवी कैमरों की मांग का प्रस्ताव भेजा गया है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से लेकर सभी फ्लैग स्टेशनों तक चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जाएगी। RPF थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के मुताबिक, सिंहस्थ के दौरान उज्जैन मुख्य रेलवे स्टेशन पर दो डॉग स्क्वॉड तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, मोहनपुरा, पंवासा, चिंतामन और विक्रमनगर में बन रहे फ्लैग स्टेशनों पर एक-एक डॉग स्क्वॉड की तैनाती रहेगी। बताया जा रहा है कि प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक ड्रोन भी तैनात किया जाएगा, जो आसमान से पूरे क्षेत्र की निगरानी करेगा। इसके साथ ही 700 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों की मांग की गई है, जिन्हें सभी स्टेशनों पर लगाया जाएगा, ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि कैमरों की नजर से बच न सके। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 4500 अतिरिक्त जवानों की मांग का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है। इसीलिए पड़ी जरूरत सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इनमें से अधिकांश श्रद्धालु ट्रेनों के माध्यम से उज्जैन पहुंचेंगे। रेलवे इस दौरान 7800 विशेष ट्रेनों के संचालन की योजना बना रहा है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए RPF और जीआरएपी दोनों ने अतिरिक्त बल की मांग की है। जीआरएपी भी है तैयार उज्जैन जीआरएपी ने भी 6000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग का प्रस्ताव भेजा है। फ्लैग स्टेशन परिसरों में अस्थायी थाने स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक थाने में 100 पुलिसकर्मी 24 घंटे, सातों दिन (24×7) शिफ्ट के आधार पर तैनात रहेंगे। सिंहस्थ 2028 सुरक्षा प्लान • अतिरिक्त RPF बल – 4500 जवान • डॉग स्क्वॉड – उज्जैन स्टेशन पर 2, बाकी फ्लैग स्टेशनों पर 1-1 • ड्रोन – हर स्टेशन पर 1 • CCTV – 700 अत्याधुनिक कैमरे • GRP बल – 6000 अतिरिक्त जवान • स्पेशल ट्रेनें – 7800 प्लान 

23 जून राशिफल: इन 6 राशि वालों के लिए खुलेंगे तरक्की के द्वार, आएगी शुभ सूचना

मेष 23 जून के दिन अपने प्लान और सब्र पर भरोसा करें। सलाह ये रहेगी की अपने रूटीन पर ध्यान दें। काम को ऑर्गनाइज करें। अचानक बदलाव से बचें। पैसे के मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है। रिलेशन छोटे-छोटे अच्छे कामों से बेहतर होते हैं। वृषभ 23 जून के दिन क्लियर प्लान फॉलो करें। विनम्र रहें, और छोटी-छोटी मदद लें। शाम तक सफलता धीरे-धीरे मिलेगी। आज रात छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाएं। आज आप शांत और स्थिर महसूस करेंगे। धीमे कामों को ध्यान से कर पाएंगे। छोटी-छोटी तरक्की से अच्छे नतीजे मिलेंगे। मिथुन 23 जून के दिन आपकी एनर्जी ज्यादा हाई रहेगी और प्रैक्टिकल भी सोचेंगे। एक समय में एक ही काम पर फोकस करें। आज के दिन छोटे-छोटे स्टेप्स पूरे करें, और अपने करीबी लोगों के साथ अपनी खुशी शेयर करें। कर्क 23 जून के दिन छोटे प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए तैयार रहेंगे। आपको जल्दी रिजल्ट और खुशी मिल सकती है। साथ ही आप शांत रहेंगे। आज के दिन भविष्य के क्लियर लक्ष्यों पर फोकस करेंगे। सिंह 23 जून के दिन आपकी लगातार देखभाल से भरोसा बनेगा। आपको खुशी के छोटे-छोटे मौके मिल सकते हैं। हर कदम पर सब्र रखें और खुद के साथ नरमी से पेश आएं। आज के दिन आप एनर्जेटिक महसूस करेंगे। कन्या 23 जून के दिन दोस्ताना मदद से प्रैक्टिकल कदम बेहतर नतीजे देंगे। सब्र रखें और खुद पर मेहरबान रहें। छोटे बदलावों पर भरोसा करें। आपकी जिज्ञासा मददगार रास्ते खोल सकती है। दोस्ताना सवाल पूछें। तुला 23 जून का दिन हल्का मोमेंटम देगा। छोटे काम आसानी से पूरे हो सकते हैं। बातचीत आसानी से सुलझ जाएगी, और चुनाव नैचुरल लगेंगे। छोटे ब्रेक लें, करीबी लोगों की बात सुनें, और वादे निभाएं। वृश्चिक 23 जून के दिन आज ध्यान से प्लानिंग करने का सही समय है। परिवार या कोई एक काम चुनें, एक क्लियर और आसान प्लान बनाएं। आज के दिन अपने आइडिया शेयर करें। छोटे-छोटे, लगातार कदम स्ट्रेस कम कर सकते हैं। धनु 23 जून के दिन आप चीजें मैनेज कर सकते हैं। आज आपकी भावनाएं मजबूत हैं। अच्छे कामों पर भरोसा करें, धीरे बात करें। आपके आसान प्लान से दोस्तों, परिवार को सपोर्ट और मन की शांति मिल सकती है। लगातार तरक्की करें। मकर 23 जून के दिन दोस्तों के साथ आइडिया शेयर करें। नई सीख मजेदार और प्रोडक्टिव लग सकती है। छोटे-छोटे एक्सपेरिमेंट आपकी स्किल बढ़ाने और रोज के काम आसान बनाने में मदद करते हैं। आज के दिन शांत और खुश रहें। कुंभ 23 जून के दिन कोई छोटा नोट पढ़ें और कोई नया आसान आइडिया आजमाएं, जिससे काम या खेल आसान हो जाए। आज के दिन छोटे-छोटे काम निपटाने के लिए अपने तेज दिमाग का इस्तेमाल करें। एक आसान प्लान आजमाएं, नोट्स लिखें। मीन 23 जून के दिन आज शांति से कदम उठाएं। जरूरी काम तय करें। आज के दिन परिवार की मदद करें। एक छोटा प्लान बनाएं ताकि बिना स्ट्रेस या जल्दी बदलाव के लगातार तरक्की हो और पलों का मजा लें सकें।  

शिक्षा से रोजगार तक बड़ा फोकस: सीएम योगी के मार्गदर्शन में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है। इसके साथ ही बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं वैश्यावृत्ति जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराकर पुनर्वासित बच्चों को भी इस योजना के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जा रहा है। आर्थिक सहायता से बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, ऐसे युवक-युवतियां जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। वर्तमान समय में प्रदेशभर में कुल 1,03,611 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता किसी संबल से कम नहीं है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना भी है। बाल संरक्षण को मिल रही नई मजबूती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर योगी सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास को लेकर विशेष रूप से गंभीर नजर आ रही है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं से मुक्त कराए गए बच्चों को परिवार आधारित वातावरण में पुनर्वासित कर मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनका सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। कई छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। वहीं बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त पात्र बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए जिले स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण, सत्यापन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता रखने वाला कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे। सी. इंदुमति, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

तेज रफ्तार पर लगेगी लगाम! IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों संग यूपी परिवहन विभाग ने बनाई नई स्पीड पॉलिसी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर कई अभियान चला रही है। सड़क हादसों को रोकना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। इसी क्रम में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ पर काम कर रहे हैं। इसके तहत हाईवे और एक्सप्रेसवे की तरह ही शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित करना है। इस पहल का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की रोकथाम कर लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जल्द ही प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। हाल में उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी के ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और एविडेंस-बेस्ड अप्रोच के माध्यम से सड़कों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर को कम करना है। इसके तहत केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की व्यस्त सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेजों के आसपास के मार्गों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी उपयुक्त गति सीमा तय की जाएगी। इससे अनियंत्रित गति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ड्राफ्ट आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और परिवहन विभाग ने इस पॉलिसी के लिए प्रदेशभर में विस्तृत अध्ययन किया है। तैयार किए गए पॉलिसी ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल करते हुए संशोधन किया जाएगा। इसके बाद परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी को प्रदेश सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पॉलिसी प्रदेश के विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की प्रकृति और यातायात घनत्व के अनुरूप गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। वहीं विभाग सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क यात्री, सुरक्षित वाहन और पोस्ट-क्रैश केयर पर भी ध्यान दे रहा है। साथ ही सुरक्षित गति ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फिटनेस निरीक्षण, जनजागरूकता अभियान के जरिए भी सुरक्षित यातायात सुनिश्चित कर रहा है।