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23 जून राशिफल: इन 6 राशि वालों के लिए खुलेंगे तरक्की के द्वार, आएगी शुभ सूचना

मेष 23 जून के दिन अपने प्लान और सब्र पर भरोसा करें। सलाह ये रहेगी की अपने रूटीन पर ध्यान दें। काम को ऑर्गनाइज करें। अचानक बदलाव से बचें। पैसे के मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है। रिलेशन छोटे-छोटे अच्छे कामों से बेहतर होते हैं। वृषभ 23 जून के दिन क्लियर प्लान फॉलो करें। विनम्र रहें, और छोटी-छोटी मदद लें। शाम तक सफलता धीरे-धीरे मिलेगी। आज रात छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाएं। आज आप शांत और स्थिर महसूस करेंगे। धीमे कामों को ध्यान से कर पाएंगे। छोटी-छोटी तरक्की से अच्छे नतीजे मिलेंगे। मिथुन 23 जून के दिन आपकी एनर्जी ज्यादा हाई रहेगी और प्रैक्टिकल भी सोचेंगे। एक समय में एक ही काम पर फोकस करें। आज के दिन छोटे-छोटे स्टेप्स पूरे करें, और अपने करीबी लोगों के साथ अपनी खुशी शेयर करें। कर्क 23 जून के दिन छोटे प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए तैयार रहेंगे। आपको जल्दी रिजल्ट और खुशी मिल सकती है। साथ ही आप शांत रहेंगे। आज के दिन भविष्य के क्लियर लक्ष्यों पर फोकस करेंगे। सिंह 23 जून के दिन आपकी लगातार देखभाल से भरोसा बनेगा। आपको खुशी के छोटे-छोटे मौके मिल सकते हैं। हर कदम पर सब्र रखें और खुद के साथ नरमी से पेश आएं। आज के दिन आप एनर्जेटिक महसूस करेंगे। कन्या 23 जून के दिन दोस्ताना मदद से प्रैक्टिकल कदम बेहतर नतीजे देंगे। सब्र रखें और खुद पर मेहरबान रहें। छोटे बदलावों पर भरोसा करें। आपकी जिज्ञासा मददगार रास्ते खोल सकती है। दोस्ताना सवाल पूछें। तुला 23 जून का दिन हल्का मोमेंटम देगा। छोटे काम आसानी से पूरे हो सकते हैं। बातचीत आसानी से सुलझ जाएगी, और चुनाव नैचुरल लगेंगे। छोटे ब्रेक लें, करीबी लोगों की बात सुनें, और वादे निभाएं। वृश्चिक 23 जून के दिन आज ध्यान से प्लानिंग करने का सही समय है। परिवार या कोई एक काम चुनें, एक क्लियर और आसान प्लान बनाएं। आज के दिन अपने आइडिया शेयर करें। छोटे-छोटे, लगातार कदम स्ट्रेस कम कर सकते हैं। धनु 23 जून के दिन आप चीजें मैनेज कर सकते हैं। आज आपकी भावनाएं मजबूत हैं। अच्छे कामों पर भरोसा करें, धीरे बात करें। आपके आसान प्लान से दोस्तों, परिवार को सपोर्ट और मन की शांति मिल सकती है। लगातार तरक्की करें। मकर 23 जून के दिन दोस्तों के साथ आइडिया शेयर करें। नई सीख मजेदार और प्रोडक्टिव लग सकती है। छोटे-छोटे एक्सपेरिमेंट आपकी स्किल बढ़ाने और रोज के काम आसान बनाने में मदद करते हैं। आज के दिन शांत और खुश रहें। कुंभ 23 जून के दिन कोई छोटा नोट पढ़ें और कोई नया आसान आइडिया आजमाएं, जिससे काम या खेल आसान हो जाए। आज के दिन छोटे-छोटे काम निपटाने के लिए अपने तेज दिमाग का इस्तेमाल करें। एक आसान प्लान आजमाएं, नोट्स लिखें। मीन 23 जून के दिन आज शांति से कदम उठाएं। जरूरी काम तय करें। आज के दिन परिवार की मदद करें। एक छोटा प्लान बनाएं ताकि बिना स्ट्रेस या जल्दी बदलाव के लगातार तरक्की हो और पलों का मजा लें सकें।  

शिक्षा से रोजगार तक बड़ा फोकस: सीएम योगी के मार्गदर्शन में आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने अपने माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है। इसके साथ ही बालश्रम, भिक्षावृत्ति एवं वैश्यावृत्ति जैसी परिस्थितियों से मुक्त कराकर पुनर्वासित बच्चों को भी इस योजना के माध्यम से पारिवारिक वातावरण में बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जा रहा है। आर्थिक सहायता से बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 2,500 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, ऐसे युवक-युवतियां जिन्होंने माता-पिता दोनों अथवा उनमें से किसी एक को खो दिया है, उन्हें 18 से 23 वर्ष की आयु तक स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। वर्तमान समय में प्रदेशभर में कुल 1,03,611 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सहायता किसी संबल से कम नहीं है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना भी है। बाल संरक्षण को मिल रही नई मजबूती, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर योगी सरकार बाल संरक्षण और पुनर्वास को लेकर विशेष रूप से गंभीर नजर आ रही है। बालश्रम और भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं से मुक्त कराए गए बच्चों को परिवार आधारित वातावरण में पुनर्वासित कर मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनका सामाजिक विकास भी सुनिश्चित हो रहा है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है। कई छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मंशा है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। वहीं बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त पात्र बच्चों की प्राथमिकता के आधार पर पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिया जाए। इसके लिए जिले स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण, सत्यापन एवं जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पात्रता रखने वाला कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे। सी. इंदुमति, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

तेज रफ्तार पर लगेगी लगाम! IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों संग यूपी परिवहन विभाग ने बनाई नई स्पीड पॉलिसी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर कई अभियान चला रही है। सड़क हादसों को रोकना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। इसी क्रम में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञ और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग मिलकर ‘उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी’ पर काम कर रहे हैं। इसके तहत हाईवे और एक्सप्रेसवे की तरह ही शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर भी वैज्ञानिक आधार पर गति सीमा निर्धारित करना है। इस पहल का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की रोकथाम कर लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पॉलिसी का फाइनल ड्राफ्ट जल्द ही प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। हाल में उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की अध्यक्षता में स्टेट रोड सेफ्टी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा तैयार उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी के ड्राफ्ट पर विस्तृत चर्चा हुई। नीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और एविडेंस-बेस्ड अप्रोच के माध्यम से सड़कों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर को कम करना है। इसके तहत केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों की व्यस्त सड़कों, बाजारों, स्कूल-कॉलेजों के आसपास के मार्गों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के लिए भी उपयुक्त गति सीमा तय की जाएगी। इससे अनियंत्रित गति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी। प्रदेश सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा ड्राफ्ट आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों और परिवहन विभाग ने इस पॉलिसी के लिए प्रदेशभर में विस्तृत अध्ययन किया है। तैयार किए गए पॉलिसी ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें शामिल करते हुए संशोधन किया जाएगा। इसके बाद परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश स्पीड मैनेजमेंट पॉलिसी को प्रदेश सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजेगा। मंजूरी मिलने के बाद यह पॉलिसी प्रदेश के विभिन्न विभागों के सहयोग से लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों की प्रकृति और यातायात घनत्व के अनुरूप गति सीमा तय होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। वहीं विभाग सेफ सिस्टम अप्रोच के तहत सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित गति, सुरक्षित सड़क यात्री, सुरक्षित वाहन और पोस्ट-क्रैश केयर पर भी ध्यान दे रहा है। साथ ही सुरक्षित गति ऑडिट, प्रवर्तन व्यवस्था, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, वाहन फिटनेस निरीक्षण, जनजागरूकता अभियान के जरिए भी सुरक्षित यातायात सुनिश्चित कर रहा है।

डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग

लोक निर्माण से लोक कल्याण नवाचार से नव निर्माण तक : 2.5 वर्षों में लोक निर्माण विभाग की कार्य पद्धत्ति में आया ऐतिहासिक परिवर्तन डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग हर सड़क, हर परियोजना में गुणवत्ता का संकल्प भोपाल कभी सड़क और भवन निर्माण तक सीमित समझा जाने वाला मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग आज नवाचार, तकनीकी आधुनिकीकरण, पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही के क्षेत्र में देश के अग्रणी विभागों में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व तथा लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह के मार्गदर्शन में पिछले 2.5 वर्षों के दौरान विभाग ने केवल अधोसंरचना निर्माण ही नहीं किया, बल्कि कार्यप्रणाली में ऐसे परिवर्तनकारी सुधार लागू किए हैं, जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट सोच रही है कि विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि वह पर्यावरण संरक्षण, जनभागीदारी, तकनीकी दक्षता और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। इसी सोच को आधार बनाकर लोक निर्माण विभाग ने अनेक अभिनव पहलें शुरू की हैं। विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा मॉडल : लोक कल्याण सरोवर सड़क निर्माण कार्यों के दौरान आवश्यक मिट्टी एवं मुरम की खुदाई को विभाग ने पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी बनाने का अभिनव निर्णय लिया। अब “लोक कल्याण सरोवर” विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में विभाग द्वारा 506 से अधिक लोक कल्याण सरोवर निर्मित किए गए, जिन पर कोई अतिरिक्त व्यय नहीं हुआ। इन सरोवरों के लिए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर विशेष डिजिटल मॉड्यूल विकसित किया गया है, जो निर्माण स्थलों के समीप ऐसे स्थानों की पहचान करता है जहाँ वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। यह पहल जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सड़कों से भूजल संवर्धन की नई पहल जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट की चुनौती को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सड़क किनारे “ग्राउंड वाटर रिचार्ज बोर” निर्माण की अभिनव योजना प्रारंभ की है। प्रत्येक किलोमीटर पर रिचार्ज बोर विकसित किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 840 किलोमीटर लंबाई की सड़कों पर लगभग 1000 रिचार्ज बोर निर्मित किए जा रहे हैं, जिससे वर्षा जल सीधे धरती के भीतर पहुंच सकेगा। ग्रीन बिल्डिंग की दिशा में निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में सभी नवीन शासकीय भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों एवं ऊर्जा दक्षता सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 1500 से अधिक अभियंताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया तथा GRIHA काउंसिल के साथ समझौता कर भवन निर्माण को राष्ट्रीय ग्रीन मानकों से जोड़ा गया। वर्षा जल संचयन, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन अब प्रत्येक नए भवन निर्माण का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं।  लोकपथ एप लोक निर्माण विभाग द्वारा 2 जुलाई 2024 को शुरू किया गया “लोकपथ मोबाइल ऐप” नागरिक सहभागिता आधारित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक सड़क संबंधी शिकायतों की जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सीधे विभाग तक पहुंचा सकते हैं। शिकायतों के निराकरण के लिए चार दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।     आज यह प्लेटफॉर्म केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं, बल्कि जवाबदेह प्रशासन का प्रतीक बन चुका है। हजारों शिकायतों का त्वरित निराकरण कर विभाग ने जनविश्वास को मजबूत किया है। तकनीक आधारित औचक निरीक्षण : गुणवत्ता पर शून्य समझौता गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने देश में अपनी तरह की अनूठी सॉफ्टवेयर आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित की है। प्रत्येक माह की 5 और 20 तारीख को सॉफ्टवेयर द्वारा रैंडम तरीके से चयनित 35 परियोजनाओं का निरीक्षण किया जाता है। अब तक लगभग 980 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप 77 ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए, 28 को ब्लैकलिस्ट किया गया, 16 कंसल्टेंट्स को नोटिस दिए गए, एक को ब्लैकलिस्ट किया गया तथा 105 अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई। वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले 38 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशंसा भी प्राप्त हुई। यह व्यवस्था स्पष्ट करती है कि विभाग में गुणवत्ता और जवाबदेही पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की 14 मंडलीय प्रयोगशालाओं को 61 अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। साथ ही 14 मोबाइल प्रयोगशालाएं भी शुरू की गई हैं, जो निर्माण स्थल पर ही गुणवत्ता परीक्षण कर सकती हैं। 25 निजी प्रयोगशालाओं को भी एम्पैनल किया गया है जिससे स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित हो सके। बिटुमिन गुणवत्ता सुधार का बड़ा निर्णय प्रदेश की सड़कों की दीर्घकालिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने बिटुमिन की खरीद केवल सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों—आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल से ही सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जीआईएस आधारित डिजिटल क्रांति भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से विभाग ने 71 हजार 210 किलोमीटर सड़कों, 2 हजार 975 भवनों और 1 हजार 426 पुलों का जियो-टैग्ड सर्वेक्षण पूरा किया है। अब प्रत्येक परिसंपत्ति डिजिटल मानचित्र पर उपलब्ध है। इसी आधार पर रोड नेटवर्क मास्टर प्लान, बजट मॉड्यूल, डीपीआर मॉड्यूल तथा परियोजनाओं के वैज्ञानिक समय निर्धारण जैसे अत्याधुनिक सिस्टम विकसित किए गए हैं। इससे योजना निर्माण अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और परिणामोन्मुख हुआ है।  अभियंताओं की क्षमता वृद्धि पर विशेष ध्यान विभाग ने पहली बार 1700 से अधिक अभियंताओं का प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन (Training Need Assessment) कर व्यापक क्षमता निर्माण ढांचा विकसित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 10 जनवरी 2026 को इसके साथ प्रशिक्षण कैलेंडर, लोक कल्याण सूचकांक और विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ हुए समझौतों का शुभारंभ किया।  प्रदेश का पहला इंजीनियर ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट लोक निर्माण विभाग के इतिहास में पहली बार एक समर्पित इंजीनियरिंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ETRI) की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा घोषित यह संस्थान केवल लोक निर्माण विभाग ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी निर्माण विभागों के अभियंताओं के लिए राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बनेगा।    पिछले ढाई वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने यह सिद्ध किया है कि अधोसंरचना विकास केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। यदि तकनीक, पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और मानव संसाधन विकास … Read more

मोहन सरकार का प्रशासनिक सर्जरी प्लान! CMO में नई टीम, 15 अफसरों के तबादले संभव

भोपाल  मध्यप्रदेश के 3 प्रमुख सचिव (पीएस), 2 संभागायुक्त और 10 कलेलटरों पर तबादले की तलवार लटकी है। कभी भी इनके तबादले किए जा सकते हैं। ये सभी लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ है, इनमें से 75 फीसद पहले से नई पदस्थापना की जुगत में हैं तो, कुछ को सरकार बदलने का मन बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक प्रमुख सचिवों में अमित राठौर, गुलशन बामरा और सोनाली पोंकशे वायंगंकर का नाम बताया जा रहा है। इनके पास क्रमश: वाणिज्यिक कर, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय विभाग है। जहां पर ये दो साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय में कुछ पदों पर नए सिरे से जमावट की सुगबुगाहट है। हाल में मुख्यमंत्री के सचिव आलोक सिंह को आईजी पंजीयन बनाकर भेजा है। माना जा रहा है कि उनका काम किसी युवा आइएएस को दिया जा सकता है। हालांकि पहले से मुख्यमंत्री के पास इलैया राजा टी और कौशलेंद्र विक्रम सिंह जैसे दो युवा सचिव हैं। बीते बुधवार को भी 29 IAS का हो चुका है तबादला बता दें कि बीते बुधवार सरकार ने 29 आइएएस का तबादला किया था, जिनमें से 20 फीसद आइएएस को बदलने की जिम्मेदारी ऐन वक्त पर ली गई। अभी भी आइएएस खेमे में कुछ नामों के बदलाव के पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं। कई अफसरों से अतिरिक्त प्रभार भी वापस लिए गए। पशुपालन में पीएस, खादी बोर्ड में आएंगे नए एमडी आइएएस माल सिंह जून माह में सेवानिवृब होंगे। वे फिलहाल खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के एमडी है, जबकि जुलाई में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सेवानिवृब हो रहे हैं। वे पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव है। इन दोनों ही आइएएस के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके पास मौजूद जिम्मेदारी किसी अन्य आइएएस (MP Transfer cmo) को देनी होगी। तबादलों को हर बार चुनौती देते हैं हजारों शासकीय सेवक तबादलों के बाद अब 1000 से अधिक मामलों में स्थगन की आशंका है। मध्यप्रदेश के 75 फीसद विभागों ने इससे बचने के लिए हाईकोर्ट जबलपुर समेत हाईकोर्ट की दोनों खंडपीठ में केविएट दायर कर दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर बार तबादलों के बाद हजारों की संख्या में शासकीय सेवक कोर्ट चले जाते हैं और तबादलों को चुनौती दे देते हैं। एक विभाग प्रमुख ने बताया कि जो तबादले (MP Transfer IAS Transfer) प्रशासकीय आधार पर किए जाते हैं, उनमें स्थगन की स्थिति कई बार बनती है। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते इस साल पहले ही न्यायालयों में केविएट लगा दी है। ताकि स्थगन से पहले विभाग को भी पक्ष रखने का मौका मिल सके। पूर्व में इन कमियों के कारण शासकीय सेवकों को आसानी से स्थगन मिल गए, बाद में ऐसे प्रकरण लंबे चलते हैं और स्थगन खारिज कराना मुश्किल हो जाता है। स्थगन मिला तो विभागाध्यक्षों को करनी पड़ती है सुनवाई कानून मामलों के जानकारों का कहना है कि स्थगन स्थाई नहीं होते, बल्कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें संबंधित शासकीय सेवक को सुनवाई का अवसर दिया जाता है। यह सुनवाई तबादला (MP Transfer IAS Transfer CMO Transfer) करने वाले विभाग के प्रमुख द्वारा की जाती है। यदि वे संबंधित शासकीय सेवक के तर्कों से संतुष्ट न हों तो तबादला यथावत रखते हैं। ये कमिश्नर, जिन्हें बुलाने की तैयारी  मनोज खत्री, ग्वालियर- कब से पदस्थ- 29 जून 2024 सुरभि गुप्ता, शहडोल – कब से पदस्थ – 18 नवंबर 2024 ये पीएस, जिनकी बदल सकती है जिम्मेदारी (MP Transfer PS) अमित राठौर, वाणिज्य कर – कब से पदस्थ – 25 जनवरी 2024 गुलशन बामरा, जनजातीय कार्य – कब से पदस्थ – 12 नवंबर 2024 सोनाली पोंकशे वायंगंकर, सामाजिक न्याय – कब से पदस्थ 12 अगस्त 2024 इन कलेक्टर्स को वापल बुला सकती है सरकार (MP Transfer of Collectors) कलेक्टर – जिला – कब से पदस्थ     रुचिका चौहान- ग्वालियर – 11 नवंबर 2024     केदार सिंह – शहडोल – 13 अगस्त 2024     गिरीश मिश्रा – राजगढ़ – 12 अगस्त 2024     रिजू बाफना – शाजापुर – 5 जनवरी 2024     अदिति गर्ग – मंदसौर – 29 जुलाई 2024     पार्थ जायसवाल – छतरपुर – 6 अगस्त 2024     मृणाल मीना – बालाघाट – 12 अगस्त 2024     हर्षल पंचोली – अनूपपुर – 13 अगस्त 2024     हिमांशु चंद्रा – नीमच – 13 अगस्त 2024     किरोड़ीलाल मीना – भिंड – 16 फरवरी 2024

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे 2036 पौधों के वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ

रायपुर.  अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर 23 जून को छत्तीसगढ़ में खेल और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बीएसएफ कैंप, नया रायपुर स्थित ग्राम पलौद में विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन दोपहर 1 बजे होगा। मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति से खिलाड़ियों, खेल संगठनों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ेगा। 2036 पौधों के रोपण का लक्ष्य भारतीय ओलंपिक संघ के आह्वान पर इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 2036 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जलवायु संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। खेल और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश इस आयोजन के माध्यम से खिलाड़ियों और युवाओं को खेलों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। वृक्षारोपण अभियान प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। युवा खिलाड़ियों को मिलेगी प्रेरणा छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का मानना है कि मुख्यमंत्री की सहभागिता से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी। इससे खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूकता बढ़ेगी। हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनभागीदारी आधारित अभियान चला रही है। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम खेल और प्रकृति के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा तथा ‘हरित छत्तीसगढ़-हरित भारत’ के संकल्प को और मजबूत करेगा।

टेट अनिवार्यता पर झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, विशेष परीक्षा की मांग कर रहे शिक्षक

 रांची  शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य किए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सामान्य अभ्यर्थियों के लिए आयोजित होनेवाली झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में ही कार्यरत शिक्षकों को भी सम्मिलित करने का निर्णय लिया है। विभाग ने बकायदा इसके निर्देश झारखंड एकेडमिक काउंसिल को दिए हैं, लेकिन कार्यरत शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लागू ही करना है तो कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा पृथक रूप से आयोजित हो। शिक्षकों ने तमिलनाडु तथा उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला भी दिया है, जहां न्यायालय के आदेश आने के बाद कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। तमिलनाडु में जहां इसपर निर्णय लिया जा चुका है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसे लेकर रिपोर्ट मांगी गई है कि कितने शिक्षक यह परीक्षा उत्तीर्ण हैं तथा कितने को यह परीक्षा उत्तीर्ण होना बाकी है। इसे लेकर जारी पत्र में कहा गया कि सरकार कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने पर विचार कर रही है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सभी राज्यों से कार्यरत शिक्षकों के लिए वर्ष में दो शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने को कहा है। दूसरी तरफ, झारखंड में सामान्य अभ्यर्थियों के लिए हो रही परीक्षा में ही शामिल करने का निर्णय लिया गया है जो उचित नहीं है। इधर, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ सहित कई अन्य संघ सर्वोच्च न्यायालय में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने की भी तैयारी कर रहे हैं बताते चलें कि न्यायालय ने कक्षा एक से आठ के उन शिक्षकों के लिए भी यह पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया है जो आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त हैं। हालांकि शिक्षक नियुक्त होने के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का प्रविधान आरटीई में ही किया गया है।

फसल नुकसान झेल रहे किसानों को सरकार का तोहफा, 13 जिलों में कृषि इनपुट अनुदान जारी

पटना खेतों में लगी फसल की क्षति के बाद मुआवजे के इंतजार कर रहे बिहार के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मंत्री सम्राट चौधरी ने इन किसानों को फसल क्षति की राशि सीधे उनके खाते में भेज दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को 13 जिलों के 3.96 लाख किसानों के खाते में 200 करोड़ की अनुदान राशि हस्तांतरित की है। यह राशि फसल क्षति के लिए कृषि इनपुट अनुदान के रूप में दी गई है। लोक सेवक आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि है आगे भी जिन किसानों के आवेदन आए हैं, उन्हें कृष इनपुट अनुदान की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है की डबल इंजन की सरकार बिहार के किसानों के लाभ के लिए काम कर रही है। आपको बता दें कि हाल ही में बिहार समेत देश भर के करोड़ों किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून को करीब साढ़े नौ लाख किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। अब आज बिहार के किसानों को फसल क्षति अनुदान सीएम सम्राट चौधरी ने ट्रांसफर किया है। दरअसल 2025-26 के दौरान जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा था। उन्हीं किसानों को सरकार द्वारा यह जरूरी मदद दी जा रही है। मार्च के तीसरे और चौथे हफ्ते में अचानक आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से रबी की फसल को बिहार में काफी नुकसान पहुंचा था। जिन किसानों के फसल का नुकसान हुआ है सीएम ने उनके खाते में मुआवजे की राशि भेजी है। आपको बता दें कि कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत सरकार आंधी, बारिश या सूखाड़ समेत अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों के फसल का नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा देती है। यह योजना करीब 2 हेक्टेयर भूमि में हुए फसल के नुकसान तक के लिए मान्य है। कृषि इनपुट अनुदान योजना में कितनी राशि मिलती है आपको यहां बता दें कि इस योजना के तहत सरकार ने न्यूनतम सहायता राशि भी तय कर दी है। इसके तहत असिंचित क्षेत्र के लिए कम से कम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए न्यूनतम 2,500 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसकी एक खास बात यह भी है कि इस योजना का लाभ सिर्फ भू-स्वामी किसान ही नहीं बल्कि रैयत और गैर रैयत (बटाईदार या पट्टे पर खेती करने वाले) किसान भी ले सकते हैं।

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सड़क डामरीकरण का कार्य प्रारंभ कराया

रायपुर.  प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने आज नगर निगम कोरबा के वार्ड क्र. 40 पाड़ीमार वार्ड में सड़क डामरीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत उपस्थित थी। उन्होंने डामरीकरण कार्य के दौरान गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने एवं शीघ्र कार्य को पूर्ण किये जाने के निर्देश मौके पर अधिकारियों को दिये।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा अनवरत रूप से किये जा रहे विकास कार्यों की कड़ी में निगम के बालको जोन अंतर्गत वार्ड क्र. 40 पाड़ीमार क्रमांक 01 में 25 लाख रूपए की लागत से राजेश ठाकुर के घर से बरगद चौक होते हुये इंदिरा मार्केट मुख्य मार्ग तक सड़क डामरीकरण का कार्य कराया जा रहा है।  अब तक निगम क्षेत्र में 1000 करोड़ रूपए के विकास कार्य स्वीकृत उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने इस मौके पर अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आशीर्वाद से विगत ढाई वर्ष के दौरान नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रंातर्गत विभिन्न मदों के अंतर्गत लगभग 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत किये गये हैं, जिसमें अनेक कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं, अनेक प्रगति पर हैं तथा शेष कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होने जा रहे हैं। उद्योग मंत्री देवंागन ने अपने उद्बोधन में कहा कि निगम क्षेत्र में 15 करोड़ रूपये के सड़क डामरीकरण कार्य कराये जाने हैं, जिसमें अनेक कार्य पूर्ण भी कर लिये गये हैं, जैसे-जैसे डामर की उपलब्धता होती जायेगी, यह कार्य संपादित होंगे। उन्होेने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारे छत्तीसगढ़ राज्य का तेजी से विकास हो रहा है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार की दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य की विभिन्न योजनाओं से प्रदेश व देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।  बिना भेदभाव के हो रहे विकास कार्य इस अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नगरीय प्रशासन मंत्री व उप मुख्यमंत्री अरूण साव तथा उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के आशीर्वाद से निगम क्षेत्र में व्यापक रूप से विकास कार्य हो रहे हैं तथा सभी 67 वार्डों में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब से हमारी सरकार बनी है, तभी से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के साथ-साथ हमारे कोरबा में भी विकास को तेज गति व सही दिशा मिली है, बरसों से व्याप्त समस्याएं दूर हो रही हैं तथा लोगों को आवश्यक   सुविधाएं सहज रूप से मुहैया हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें कोरबा की जनता का जो भरपूर आशीर्वाद मिला, उन्होंने हम पर जो विश्वास जताया, वह विश्वास हमेेशा बना रहेगा, विश्वास टूटने नहीं दिया जाएगा, इस हेतु हम कृत संकल्पित हैं।  इस अवसर पर एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, सत्येन्द्र दुबे, रजत खुंटे, मंगलराम बंदे, चेतन सिंह मैत्री, चंदादेवी रत्नाकर, तरूण राठौर के साथ ही दिलेन्द्र यादव, जिला उपाध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी, नरेन्द्र पाटनवार, आकाश श्रीवास्तव, मनोज सिंह, जय कुमार राठौर, प्रीति स्वर्णकार, रेणु प्रसाद, दीपक चन्द्रा, लखन चन्द्रा, हेमलता निर्मलकर, निगम के सहायक अभियंता मोतीलाल बरेठ, अंजूलता तिग्गा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, निगम के अन्य कर्मचारीगण एवं काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

रांची में एचईसी की संपत्ति पर अतिक्रमण, हजारों एकड़ जमीन पर निगरानी पर सवाल

रांची हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) की जमीन अब अवैध निर्माण और किराये के कारोबार का अड्डा बनती जा रही है। कंपनी की खाली पड़ी जमीन पर कब्जा कर कई लोगों ने पक्के मकान, दुकान और छोटे-छोटे व्यावसायिक परिसर तक खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि जमीन कंपनी की, संसाधन कंपनी के और कमाई किसी और की हो रही है। एचईसी के आवासीय और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोग बिना किसी वैध अधिकार के कंपनी की जमीन पर निर्माण कर उसे किराये पर देकर हर माह हजारों रुपये कमा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है जिनका एचईसी से प्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। कई लोग वर्षों पहले रोजगार की तलाश में रांची आए थे और धीरे-धीरे खाली जमीन पर कब्जा कर स्थायी निवासी बन गए। किराये से लाखों की कमाई, कंपनी को नुकसान स्थानीय लोगों के अनुसार, कई अवैध कब्जाधारियों ने एक से अधिक कमरे बनाकर किराये पर दे रखे हैं। कुछ जगहों पर दुकानें, गोदाम और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे हैं। ऐसे निर्माणों से कब्जाधारियों को हर माह हजारों रुपये की आमदनी हो रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कई मामलों में अवैध निर्माण करने वाले लोग खुद उस परिसर में नहीं रहते। उन्होंने कंपनी की जमीन पर मकान या दुकान बनाकर किराये पर दे दिया है और दूसरे स्थानों पर रहने लगे हैं। यानी एचईसी की संपत्ति निजी आय का साधन बन गई है। बिजली-पानी का भी हो रहा दुरुपयोग अवैध निर्माण के साथ-साथ बिजली और पानी के कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कई अवैध बस्तियों और निर्माण स्थलों पर कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कई जगह बिना अनुमति पानी और बिजली की व्यवस्था कर ली गई है। जानकारों का कहना है कि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान की जमीन पर अवैध कब्जा सिर्फ जमीन का मामला नहीं होता, बल्कि इससे सुरक्षा, भविष्य की विकास योजनाओं और कंपनी की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। हजारों एकड़ जमीन की सुरक्षा चुनौती एचईसी की स्थापना के समय कंपनी को बड़े क्षेत्रफल में जमीन उपलब्ध कराई गई थी। कंपनी के पास करीब हजारों एकड़ जमीन का बड़ा भू-भाग रहा है, जिसमें फैक्ट्री परिसर, आवासीय क्षेत्र और खाली जमीन शामिल हैं। समय के साथ आर्थिक संकट और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई क्षेत्रों में अतिक्रमण बढ़ता गया। कंपनी के आवासीय परिसर में हजारों क्वार्टर हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीनों पर धीरे-धीरे अवैध बस्तियां विकसित हो गईं। कुछ स्थानों पर तो स्थायी बाजार और बहुमंजिली निर्माण तक हो चुके हैं। नगर प्रशासन विभाग पर भी सवाल अवैध निर्माण को लेकर एचईसी नगर प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के कारण कब्जाधारियों के हौसले बढ़ते गए। कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर जांच भी चल रही है। हालांकि कंपनी प्रबंधन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता रहा है, लेकिन जमीन की निगरानी और अवैध निर्माण रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है। कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा संकट एचईसी की जमीन पर बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर अब ठोस नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। कंपनी की संपत्ति की पहचान, सीमांकन, डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित निगरानी के बिना अतिक्रमण रोकना मुश्किल होगा। एचईसी की जमीन भविष्य की औद्योगिक गतिविधियों और पुनरुद्धार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जमीन को अवैध कब्जे और निजी कमाई के साधन से बचाना कंपनी के अस्तित्व और भविष्य दोनों के लिए जरूरी है।