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Bhopal Metro Update: जुलाई से दोनों ट्रैक पर शुरू होगा संचालन, CMRS निरीक्षण की तैयारी

भोपाल  अपनी धीमी रफ्तार को लेकर सुर्खियों में आई भोपाल मेट्रो जल्द ही नए कलेवर में नजर आएगी। इसकी न सिर्फ स्पीड बढ़ेगी, बल्कि फेरे भी बढ़ जाएंगे। जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया शेड्यूल जारी होगा। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए बुलाया है, जो अगले सप्ताह आ सकती है। यही टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। असिस्टेंट कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम पहले ही निरीक्षण कर चुकी है। बता दें कि सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑरेंज-येलो लाइन के 2 रूट 30 किलोमीटर लंबे हैं। फिलहाल 12 किमी में ही मेट्रो दौड़ रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। इस वजह से सवाल उठने लगे हैं। भोपाल मेट्रो तो साइकिल से भी धीमी रफ्तार से दौड़ रही है। भोपाल मेट्रो की सुस्त रफ्तार भोपाल में मेट्रो संचालन की सुस्त रफ्तार को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया। करीब 30 किमी के लिए हुए करीब 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। सिस्टम नहीं होने से एक ही ट्रैक पर दौड़ रही जानकारी के अनुसार, भोपाल और इंदौर में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि भोपाल में ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। यहां दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बाद ही मेट्रो दौड़ रही है। जिस ट्रैक पर दौड़ती, उसी पर वापसी सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही हैं। यानी जो जा रही है, वह उसी ट्रैक पर लौट रही है। जबकि अप ट्रैक (एम्स से सुभाष नगर) पर ट्रेन नहीं दौड़ती। नए सिस्टम के बाद दोनों तरफ से ट्रेन चलेगी। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक लगेगी भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी। नए सिस्टम से यह फायदा नए सिस्टम के शुरू होने के बाद मेट्रो दोनों ओर से चलेगी। इससे 75 मिनट की टाइमिंग कम होगी। इससे लोगों को आसानी से मेट्रो मिल सकेगी। फेरे भी बढ़ जाएंगे। ऐसे में सुबह और शाम को ऑफिस टाइमिंग पर भी मेट्रो मिल सकेगी।

महिदपुर को मिला सामाकोटा बैराज और 13 उप स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन सहित आसपास के क्षेत्र को मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा का आशीर्वाद प्राप्त है। माँ क्षिप्रा इस क्षेत्र के किसानों को अन्न उत्पादन के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराकर आशीर्वाद प्रदान करती है। महिदपुर भाग्यशाली है कि क्षिप्रा नदी पर बने लगभग सभी बांध और जलाशय महिदपुर में ही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ: 2028 के भव्य आयोजन के लिए इन दिनों उज्जैन और इसके आसपास हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य जारी हैं। डोंगला से गुजरने वाला नया फोरलेन महिदपुर की नई तकदीर लिखेगा। महिदपुर शहर ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में भी अपनी अलग पहचान रखता है, इसमें भी और गति आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को उज्जैन के महिदपुर में विकास कार्यों के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से कुल 207 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत के 19 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें करीब 188 करोड़ 42 लाख रुपए की लागत के सामाकोटा बैराज के लोकार्पण सहित क्षेत्र के 13 उप-स्वास्थ्य केंद्र के नए भवनों, महाविद्यालय एवं स्कूलों के नवीन भवनों तथा नवीन विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाकोटा बैराज उज्जैन जिले में जल संरक्षण को नई ऊर्जा देगा। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जिससे हमारे अन्नदाता किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल और खेतों को नई संजीवनी मिलेगी। इतना ही नहीं, पानी की हरेक बूंद को सहेजने का यह भागीरथ प्रयास आने वाले सिंहस्थ और उज्जैन के भविष्य के लिए कवच का कार्य करेगा।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिदपुर की मावा-बाटी और गुलाटी दोनों ही प्रसिद्ध है। यहां आने का अलग ही आनंद है। भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्थान महिदपुर में है। काल गणना में भी यहां के डोंगला का योगदान अतुलनीय है। राजा जयसिंह ने 300 साल पहले उज्जैन, बनारस, जयपुर, मथुरा और दिल्ली में वेधशालाओं (जंतर-मंतर) का निर्माण कराया। सम्राट विक्रमादित्य और आर्यभट्ट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने डोंगला में आधुनिक ऑब्जर्वेटरी का निर्माण कराया है। दुनिया अपनी घड़ी में डोंगला से स्टैंडर्ड टाइम तय करे, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में विश्व में भारत ने अपनी अलग छवि बनाई है। प्रधानमंत्री  मोदी देश में सबसे लंबे समय तक लगातार सरकार चलाने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने देशवासियों को नि:शुल्क आवास, गरीबों को रसोई गैस और 5 लाख तक के नि:शुल्क इलाज की बड़ी सौगातें दी हैं। राज्य सरकार ने भी नवाचार करते हुए एयर एंबुलेंस की शुरुआत की है। सरकार राहवीर योजना अंतर्गत सड़क पर घायलों की मदद करने वालों को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है। हमारी सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सम्मान निधि और लाड़ली बहनों को निरंतर राशि दी जा रही है। अब तक लाड़ली बहनों को 60 हजार करोड़ की राशि अंतरित कर चुकी है। हमारी सरकार प्रदेश के अन्नदाताओं और बहनों के सम्मान के लिए कृत संकल्पित होकर आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने पिछला वर्ष उद्योग और रोजगार को और यह वर्ष किसान कल्याण को समर्पित किया है। पहले सिंचित रकबा मात्र 7.5 लाख हेक्टेयर था। वर्ष 2002-03 से प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने की शुरुआत हुई। वर्ष 2023 में हमारी सरकार बनने तक प्रदेश की 44 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित थी। अब ढाई साल में ही यह आंकड़ा बढ़कर 65 लाख हैक्टेयर हो गया है। राज्य सरकार ने आगामी ढाई वर्ष में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 100 लाख हैक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिया जा रहा है। किसानों को एमएसपी की गारंटी देकर सरकार ने 2652 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा है। सोयाबीन पर भी किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया है। प्रदेश में किसानों के लिए सड़क, बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। किसानों को सिंचाई के लिए अब दिन में भी बिजली प्रदाय की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुराने जमाने में जब उज्जैन में परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, तब लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के वंशज और तत्कालीन महाराज ने महिदपुर में सिंहस्थ का आयोजन कराया था। महिदपुर में महारानी गंगाबाई के नाम पर एक घाट भी बना है। उनकी वीरता और 1857 की क्रांति के सूर्यवीरों के अदम्य साहस, पुरुषार्थ एवं पराक्रम का गौरवशाली संग्राम महिदपुर की ऐतिहासिक धरा पर लड़ा गया, जिसने स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी थी। कार्यक्रम को जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, स्थानीय सांसद  अनिल फिरोजिया, महिदपुर विधायक  दिनेश जैन (बोस) सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक  बहादुर सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।  

रांची में चावल महंगा, थोक-खुदरा में 4–6 रुपये तक अंतर

रांची  झारखंड की राजधानी रांची के खुदरा और थोक बाजार में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कृषि उत्पादन बाजार समिति (एपीएमसी) पंडरा की ओर से 17 जून 2026 को रिपोर्ट जारी की गई है. एपीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की अधिकांश वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, खुदरा और थोक बाजार में कई उत्पादों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला. खुदरा बाजार में लखीभोग चावल सबसे महंगा पीएमसी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक खुदरा बाजार में लखीभोग चावल की कीमत 55 रुपये प्रति किलो रही. वहीं परिमल चावल 38 रुपये और मंसूरी चावल 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है. तीनों किस्मों का औसत खुदरा मूल्य 42.67 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. इसके मुकाबले थोक बाजार में लखीभोग चावल 49.50 रुपये प्रति किलो, परिमल 34 रुपये और मंसूरी 31 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. थोक बाजार में चावल का औसत मूल्य 38.17 रुपये प्रति किलो रहा. दालों के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं दैनिक आवश्यक वस्तुओं की रिपोर्ट के अनुसार चना दाल, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग दाल और मसूर दाल के दाम सामान्य स्तर पर बने हुए हैं. बाजार में इन वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त होने के कारण कीमतों में कोई उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने से दालों के दाम नियंत्रित हैं. हालांकि मानसून की स्थिति और परिवहन लागत आने वाले दिनों में कीमतों को प्रभावित कर सकती है. खाद्य तेलों की कीमतें भी स्थिर रिपोर्ट में मूंगफली तेल, सरसों तेल, वनस्पति तेल, सोया तेल, सूरजमुखी तेल और पाम तेल के मूल्य भी शामिल किए गए हैं. इन उत्पादों के दाम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है. खुदरा और थोक बाजार में तेलों की कीमतों में कुछ अंतर जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता बनी हुई है. यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात मानी जा रही है. सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बरकरार एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार आलू, प्याज और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. मंडी में सब्जियों की आवक नियमित रूप से हो रही है, जिससे कीमतों पर दबाव नहीं बढ़ा है. व्यापारियों के अनुसार, मौसम अनुकूल रहने और आपूर्ति श्रृंखला सुचारु होने के कारण बाजार में फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है. इसी वजह से उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं सामान्य कीमतों पर उपलब्ध हो रही हैं. खुदरा और थोक बाजार में कीमतों का अंतर स्वाभाविक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया कि थोक बाजार की तुलना में खुदरा बाजार में कीमतें अधिक हैं. इसका कारण परिवहन खर्च, भंडारण, पैकेजिंग और खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन माना जाता है. विशेष रूप से चावल की तीन प्रमुख किस्मों में खुदरा और थोक बाजार के बीच चार से छह रुपये प्रति किलो तक का अंतर दर्ज किया गया. इससे साफ है कि बड़ी मात्रा में खरीद करने वाले व्यापारियों को कम कीमत का लाभ मिलता है, जबकि अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते वही उत्पाद महंगा हो जाता है. नियंत्रण में हैं कीमतें रिपोर्ट के अनुसार, रांची और आसपास के इलाकों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं. चावल, दाल, खाद्य तेल और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. यदि आने वाले दिनों में मौसम और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रहती है, तो बाजार में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम दिखाई देती है. फिलहाल रसोई का बजट किसी आपदा प्रबंधन योजना जैसा नहीं लग रहा, जो अपने आप में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है.

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण की पहल जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय : जन स्वास्थ्य अभियान म. प्र.

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूर करने के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को निजी संस्थाओं के हाथों सौंपने की पहल एक बार फिर से एक ऐसे मॉडल को लागू करने का प्रयास है जो देश और दुनिया में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में विफल साबित हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों शुरुआती चरण में निजी संस्थाओं को देने जा रह है और प्रयोग सफल होने पर इस पूरे प्रदेश में लागू करने का विचार है।  ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में यह पहली बार नहीं है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को निजी हाथों में देने का प्रयास किया गया है। इससे पहले 3 नवंबर 2015 को अलीराजपुर जिला अस्पताल और जोबट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को राज्य स्वास्थ्य समिति ने दीपक फ़ाउंडेशन के साथ नियमो की अनदेखी करते हुये अनुबंध किया था, जिसमे चिकित्सकों की नियुक्ति संबन्धित संस्था द्वारा कि जाना थी, लेकिन यह मॉडल सफल नहीं हो पाया और क्षेत्र के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं देखा गया नतीजतन सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था।   वर्ष 2020-21 में नीति आयोग द्वारा जिला अस्पतालों को निजी संस्थाओं को देने का सुझाव दिया गया था, जिसे तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने विरोध करते हुये मानने से इंकार कर दिया था।  लेकिन 2024-25 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 13 जिला अस्पतालों को निजी क्षेत्र को सौंपने का फिर से प्रयास किया जिसके खिलाफ मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्ताशसी चिकित्सा अधिकारी संघ, एमपी मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्ताशसी चिकित्सा महासंघ, ईएसआई चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा शिक्षा,  मद्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, मनोरमा, मध्यप्रदेश नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन, संविदा चिकित्सक संघ, आशा / आशा सहयोगिनी श्रमिक संघ, जन स्वास्थ्य अभियान (JSAI), अस्पताल बचाओ-जीव बचाओ” नेटवर्क, वकीलों और आम नागरिकों ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरन के खिलाफ एकजुट आवाज उठाई थी। इसके बाद सरकार ने जिला अस्पतालों के निजीकरण की योजना से पीछे हटने की घोषणा की थी। परंतु बाद में सार्वजनिक निजी भागीदारी के नाम पर प्रदेश सरकार ने नाममात्र की दर से निजी संस्थानो को जमीन आवंटित करने की बात कही थी।  अब पुनः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की पहल राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य जिम्मेदारी से पीछे हटने का संकेत है। निजी स्वास्थ्य संस्थानो का मात्र एक ही उद्देश्य होता है मुनाफा कमाना और हम सभी ने कोविड महामारी के दौरान निजी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों की मुनाफाखोरी के अनुभवों को बहुत नजदीक से देखा है। पिछले कुछ सालों से प्रदेश सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थाओं के निजीकरण का प्रयास कर रही है, जिससे सरकार की मंशा और प्राथमिकताएँ स्पष्ट होती है ।  हम सभी का यह मानना है कि  कल्याणकारी राज्य होने के नाते जनता को मौलिक अधिकारों के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, भोजन, आवास के अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी और कर्तव्य है। सरकार का यह कदम जनता के मौलिक अधिकार "राइट टू लाइफ के अनुच्छेद 21" का उल्लंघन हैं और संविधान के नीति निदेशक सिद्धांतों और अनुच्छेद 47 का उल्लंघन भी है।  अभियान के राष्ट्रीय कन्वेनर अमूल्य निधि ने कहा कि हाल की SRS रिपोर्ट सहित विभिन्न स्वास्थ्य आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, जवाबदेही और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि सरकारी संस्थानों को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा देने की। ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 के अनुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 4134 उप स्वास्थ्य केंद्र, 1045 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 245 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो की कमी है इसी प्रकार की कमी आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में भी है। साथ ही इन स्वास्थ्य केन्द्रो में चिकित्सक और अन्य मेडिकल और पेरा मेडिकल स्टाफ की कमी भी है। जन स्वास्थ्य अभियान मध्यप्रदेश का मानना है कि सरकार का प्रयास प्राथमिक स्वास्थ्य…

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से अतिक्रमण हटाया, अवैध सड़क निर्माण पर मंडल की कार्रवाई

रायपुर  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रायपुर के सेजबहार फेस-1 कॉलोनी क्षेत्र में अपनी आवंटित भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बनाई जा रही सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। मंडल की ओर से यह कार्रवाई सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद की गई। जानकारी के अनुसार दीनदयाल आवास योजना के तहत कलेक्टर रायपुर के आदेश दिनांक 3 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार और दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए गृह निर्माण मंडल को आबंटित की गई थी। इस परियोजना के लिए 17 मई 2006 को विकास अनुज्ञा भी स्वीकृत की गई थी। स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि 1327 आवास स्वीकृत योजना के अनुसार बनाए गए, जबकि 39 आवास निर्धारित ले-आउट से अलग निर्मित किए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण हुआ। भूमि विवाद की स्थिति के कारण भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। हाल ही में मंडल ने अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया। इस दौरान पता चला कि एक निजी बिल्डर ने मंडल की भूमि के हिस्से पर अवैध कब्जा कर बिना अनुमति सड़क निर्माण शुरू कर दिया है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई की। कार्यपालन अभियंता नितेश कश्यप के नेतृत्व में गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध सड़क को हटाया और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। कार्रवाई में मंडल के कई अधिकारी और अभियंता शामिल रहे। मंडल के अधिकारियों ने बताया कि यह भूमि उनकी महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडल अपनी भूमि और परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

भजनलाल सरकार ने नागरिक सुरक्षा कोर गठन और NIA कोर्ट को दी मंजूरी

जयपुर मुख्‍यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्‍थान में रेयर अर्थ एल‍िमेंट्स के एक्‍सप्‍लोरेशन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए माइनिंग लीज के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृत दे दी है. बाड़मेर की पचपदरा और शेरगढ़ के नवातला और देवीगढ़ में 207.63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रेयर अर्थ एलिमेंट्स खनिज ब्लॉक के एक्सप्लोरेशन को मंजूरी दी है. मैसर्स सेन्ट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट को एक्सप्लोरेशन लाइसेंस म‍िला है. नागरिक सुरक्षा कोर का गठन सीएम भजनलाल शर्मा ने 8 ज‍िलों में नागर‍िक सुरक्षा कोर का गठन क‍िया है. बालोतरा, डीडवाना-कुचामन, फलौदी, सलूंबर, खैरथल-तिजारा, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ और ब्यावर में ‘नागरिक सुरक्षा कोर' का गठन करने की हरी झंडी म‍िल गई है. जिले में आपदा प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी. NIA कोर्ट की स्थापना होगी एनआईए मामलों के लिए विशेष न्यायालय की स्थापना की मंजूरी दी है. सीएम ने राज्य में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) मामलों की सुनवाई के ल‍िए विशेष न्यायालय की स्थापना करने की अनुमत‍ि दी है. इससे राज्य में न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और प्रभावी होगी. मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता मिलेगी. इन निर्णयों से खनन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सहभागिता सुनिश्चित होगी. मुख्यमंत्री ने समय से लागू करने के न‍िर्देश द‍ि‍ए, ज‍िससे लोगों को लाभ म‍िल सके.  

बीएमएचआरसी में योग सप्ताह के तीसरे दिन मरीजों और विद्यार्थियों के लिए योग सत्र आयोजित

भोपाल आईसीएमआर-भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी), भोपाल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित योग सप्ताह के तीसरे दिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम पल्मोनरी मेडिसिन वॉर्ड तथा नेत्र रोग विभाग के मरीजों और उनके परिजनों को उनकी बीमारियों के अनुरूप उपयोगी योग क्रियाओं एवं प्राणायाम के बारे में जानकारी दी गई। इसके पश्चात संस्थान के नर्सिंग स्टूडेंट्स, पैरामेडिकल स्टूडेंट्स तथा पीजी मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए विशेष योग सत्र आयोजित किया गया। योग प्रशिक्षक  सुशील सिंह ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया तथा स्वस्थ जीवनशैली में योग के महत्व से अवगत कराया।  बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा वास्तव ने बताया कि नियमित योग अभ्यास शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है। साथ ही, रोग की प्रकृति के अनुसार अपनाई जाने वाली योग क्रियाएं उपचार प्रक्रिया को सहयोग प्रदान कर सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकती हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान में 21 जून तक योग सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न वर्गों के लिए योग एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों, विद्यार्थियों और मरीजों तक योग के लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

सिपेट के विद्यार्थियों ने किया आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स फैक्ट्री का औद्योगिक भ्रमण

भोपाल सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया के बलशाली पाइप्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का औद्योगिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने उत्पादन इकाइयों का अवलोकन कर पाइप निर्माण की आधुनिक प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा औद्योगिक संचालन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों, उत्पादन प्रबंधन एवं उद्योगों में कौशल आधारित कार्य संस्कृति के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों ने उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझते हुए उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली का अनुभव प्राप्त किया। औद्योगिक भ्रमण के उपरांत सिपेट के विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं बलशाली बलशाली पाइप आईसेक्ट इंडिया की टीम द्वारा संयुक्त रूप से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास एवं सतत भविष्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। इस पहल पर आईसेक्ट इंडिया के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा, “शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान एवं वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे औद्योगिक भ्रमण विद्यार्थियों को कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर देते हैं और उन्हें उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करते हैं। हमें प्रसन्नता है कि सिपेट के विद्यार्थियों ने हमारे बलशाली पाइप्स संयंत्र का भ्रमण कर उत्पादन प्रक्रियाओं को समझा। साथ ही वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की।” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं अधिकारियों ने आईसेक्ट इंडिया द्वारा संचालित औद्योगिक गतिविधियों की सराहना की तथा इस भ्रमण को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी अनुभव बताया।

हल्दीघाटी इतिहास पर सवाल, मोहन भागवत बोले महाराणा प्रताप विजयी रहे

उदयपुर  महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उदयपुर के गांधी ग्राउंड में आयोजित 'राष्ट्र चेतना संकल्प सभा' में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इतिहास को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में जीत महाराणा प्रताप की ही हुई थी. इतिहासरों की व्याख्या पर सवाल डॉ. भागवत ने इतिहासकारों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर वर्षों से जो तथ्य परोसे गए हैं, वे वास्तविक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि जब मुगलकालीन इतिहासकार स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि युद्ध में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था, तो फिर जीत किसकी हुई, इसका उत्तर स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि आज के दौर में अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप की जयंती पूरे विश्व में श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई जाती है. यह इस बात का प्रमाण है कि जनता सही इतिहास को भली-भांति जानती है. स्वाभिमान का प्रतीक है भारत का इतिहास सरसंघचालक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का इतिहास कभी भी गुलामी का इतिहास नहीं रहा है बल्कि यह आक्रमणकारियों के विरुद्ध निरंतर संघर्ष और स्वाभिमान का इतिहास है. महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल उनकी सेना का नहीं, बल्कि पूरे समाज का था. उस समय अकबर के पास संसाधनों और शस्त्रों की विशाल शक्ति थी, फिर भी महाराणा प्रताप ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया. महापुरुषों से सुरक्षित है अस्मिता सभा के दौरान उन्होंने बप्पा रावल और ललितादित्य जैसे महान नायकों को नमन करते हुए कहा कि इन्हीं महापुरुषों के त्याग और बलिदान के कारण आज भारत की संस्कृति और अस्मिता सुरक्षित है. डॉ. भागवत ने कहा कि प्रताप का अदम्य साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने बल देकर कहा कि वास्तविक इतिहास को सामने लाना आवश्यक है ताकि देश का युवा अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ सके

जमीन की नापी अब पड़ेगी महंगी, बिहार सरकार ने मापी शुल्क में की बड़ी बढ़ोतरी

सुपौल. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा रैयती जमीन की मापी शुल्क में हाल ही में की गई वृद्धि का असर अब आम भू-धारकों की जेब पर पड़ने लगा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन की मापी कराने के लिए लोगों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी। विभाग ने मापी शुल्क की नई दरें निर्धारित कर दी हैं, जिसके तहत सामान्य और तत्काल मापी दोनों के लिए शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जानकारी के अनुसार, पहले रैयत अपेक्षाकृत कम शुल्क देकर अपनी जमीन की मापी करा लेते थे, लेकिन अब उन्हें लगभग दोगुना शुल्क अदा करना पड़ेगा। विभाग का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था से भूमि मापी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नई दरों के तहत शहरी क्षेत्रों में स्थित रैयती भूमि की सामान्य मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अधिकतम शुल्क 8000 रुपये रखा गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रैयती भूमि की मापी के लिए प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क तय किया है तथा अधिकतम शुल्क 4000 रुपये निर्धारित किया गया है। विभाग ने तत्काल मापी की सुविधा के लिए भी अलग शुल्क निर्धारित किया है। नई व्यवस्था के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में तत्काल मापी कराने के लिए प्रति खेसरा 4000 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि अधिकतम शुल्क 16 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मापी के लिए प्रति खेसरा 2000 रुपये शुल्क देय होगा और इसके लिए अधिकतम शुल्क 8000 रुपये तय किया गया है। स्थानीय स्तर पर नई शुल्क दरों को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कई भू-धारकों का कहना है कि भूमि विवादों के निपटारे, दाखिल-खारिज, बंटवारे एवं अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए मापी आवश्यक होती है। ऐसे में शुल्क बढ़ने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि यदि बढ़े हुए शुल्क के बदले समय पर और पारदर्शी तरीके से मापी कार्य पूरा होता है तो इससे लोगों को लाभ भी मिलेगा। नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू – विभाग द्वारा निर्धारित नई शुल्क दरें राज्यभर में लागू की गई हैं। शुल्क संशोधन का उद्देश्य भूमि मापी सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। भू-धारकों से अपील की कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ऑनलाइन आवेदन करें तथा किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर संबंधित राजस्व कार्यालय से संपर्क करें। – राकेश कुमार, राजस्व पदाधिकारी