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पीएम सेतु के तहत आईटीआई होंगी अपग्रेड पीएम सेतु योजना की राज्य स्टीयरिंग कमेटी की बैठक सम्पन्न

रायपुर पीएम-सेतु (PM-SETU) योजना के तहत सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक और उद्योग-अनुकूल बनाया जा रहा है । इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन जैसी नई तकनीकों में प्रशिक्षित कर रोजगार के काबिल बनाना है। पुरानी मशीनों को बदलकर नई तकनीक वाली मशीनें लगाई जाएंगी और डिजिटल कंटेंट व स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा दी जाएगी।                मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में पीएम सेतु योजना के तहत गठित राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने योजना के तहत राज्य की चयनित औद्यागिक प्रशिक्षण संस्थानों को अपग्रेड करने की जा रही कार्यवाही की प्रगति की समीक्षा की।               बैठक में पीएम सेतु के तहत राज्य के विभिन्न औद्योगिक संस्थानों की सलाह से स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आईटीआई अपग्रेड करने और उद्योग नेतृत्व वाले एंकर इंडस्ट्रियल पार्टनर्स के चयन हेतु जारी किए जाने वाले पात्रता मापदण्डों के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई। इसी तरह से ईओआई में भाग लेने वाले उद्योगों सहित समस्त पात्र उद्योगों एवं सार्वजनिक उपक्रमों को प्रस्ताव के लिए अनुरोध के बारे में प्रक्रिया में सहभागिता हेतु अवसर प्रदान करने पर भी चर्चा हुई।             इसी तरह से प्रधानमंत्री सेतु योजना अंतर्गत एंकर इंडस्ट्रियल पार्टनर्स के ऑनबोर्डिंग हेतु जारी किए जाने वाले ड्राफ्ट के प्रस्ताव के अनुरोध के बारे में भी चर्चा हुई। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव  रजत कुमार, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव  बसवराजु एस. सहित वित्त विभाग, श्रम, स्कूल शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, छत्तीसगढ़ स्टेट काउंसिल, रोजगार एवं प्रशिक्षण, सीआईआई एवं भारत सरकार कौशल विकास और उद्यम शीलता महानिदेशालय छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अधिकारियों ने भाग लिया।

अमित शाह की बैठक में दिल्ली स्लम नीति 2026 और यमुना सफाई पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में मंगलवार को दो अहम मीटिंग हुईं। पहली मीटिंग दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापना को लेकर जबकि दूसरी सालों से पेंडिंग चल रही 'किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना' पर हुई। जिससे दिल्ली में नाला बन चुकी यमुना को भी साफ पानी मिल सकेगा। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में झुग्गी-बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर हुई बैठक में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत केंद्र व दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इसमें दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए गए। यमुना सफाई की दिशा में बड़ा कदम गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सालों से पेंडिंग चल रही 'किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना' पर हुई दूसरी मीटिंग में संबंधित राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में सहमति बनती दिखाई दी। इसका सबसे बड़ा एक फायदा दिल्ली में नाला बन चुकी यमुना को साफ करने के रूप में भी मिलेगा। जिसके तहत हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी दिल्ली और राजस्थान को देने पर भी सहमति बनी। इससे यमुना में साफ पानी का फ्लो काफी बढ़ जाएगा। लंबे समय बाद इस मीटिंग में सभी राज्य इस प्रोजेक्ट के लिए एमओयू पर साइन करने के लिए सहमत हुए हैं। मंत्रालय के मुताबिक एमओयू साइन होने के बाद इस किशाऊ परियोजना को कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इस पर काम शुरू होगा। इस बांध परियोजना के तहत केंद्र सरकार 90 फीसदी और शेष 10 फीसदी का बजट इन छह राज्यों द्वारा खर्च किया जाएगा।     बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य तमाम अधिकारी शामिल हुए। रिव्यू मीटिंग में शाह ने दिल्ली सरकार को दिए आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों (JJ Clusters) के पुनर्वास मुद्दे पर हुई रिव्यू मीटिंग में बड़े फैसले लिए गए। इसमें दिल्ली में पीपीपी मॉडल पर झुग्गी-झोपड़ियों का विकास होगा। इसमें दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 आज निर्धारित हो गई। शाह ने निर्देश दिए कि दिल्ली सरकार जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी करे। इससे झुग्गी बस्तियों में रहने वाले करीब चार लाख परिवारों को लाभ होगा। इसमें आने वाले समय में दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही रंगरूप बदलने पर निर्देश जारी किए गए। मीटिंग में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली के एलजी तरनजीत सिंह संधू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव समेत केंद्र और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास बैठक में गृह मंत्री शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार जल्द ही दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026 को अधिसूचित करने की कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मोड पर झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास के लिए पांच क्लस्टर के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) 45 दिन में टेंडर जारी करें। इसके साथ ही अतिरिक्त 50 झुग्गी-झोपड़ी संकुलों के लिए भी परियोजना दस्तावेज तथा निविदा प्रपत्र जल्द बनाए जाएं। गृह मंत्री ने कहा कि झुग्गियों की पात्रता की तिथि एक जनवरी, 2025 के अनुसार तय की जाए। DDA और DUSIB से 45 दिन में टेंडर जारी करने को कहा शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रति माह पुनर्वास की कम से कम पांच PPP आधारित परियोजनाओं की निविदा जारी करना सुनिश्चित करे। गृह मंत्री ने कहा कि पुनर्वास कॉलोनियों के निर्माण में आंगनवाड़ी केंद्र, शैक्षणिक सुविधाएं, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान जैसी सामूहिक सुविधाओं का समुचित एवं पर्याप्त प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि आज के निर्णय से झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 4 लाख परिवारों को लाभ होगा।  

सतपुड़ा और पेंच टाइगर रिजर्व में वन संरक्षण एवं आवास प्रबंधन कार्यों को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन को बढ़ावा देने की दिशा में मध्यप्रदेश टाइगर फाउंडेशन और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के बीच 2 महत्वपूर्ण एमओयू हुए हैं। इनका उद्देश्य नर्मदापुरम स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व तथा सिवनी स्थित पेंच टाइगर रिजर्व में पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण को समर्थन प्रदान करना है। समझौतों के अंतर्गत सतपुड़ा एवं पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और आवास प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इनमें वॉच टावरों का निर्माण, वन गश्ती अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, सौर ऊर्जा आधारित जल प्रणालियों की स्थापना, आक्रामक वनस्पति प्रजातियों का उन्मूलन तथा देशज घास भूमियों का पुनर्स्थापन शामिल है। ये समझौते दोनों टाइगर रिजर्व में जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन की स्थितियां बेहतर करने सहायक होंगे। इस अवसर पर डब्ल्यूसीएल प्रबंधन ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कंपनी अपनी सीएसआर के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण तथा भारत की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में निरंतर सार्थक योगदान दे रही है। डब्ल्यूसीएल के प्रतिनिधियों ने कहा कि अपने अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक तथा कार्यात्मक निदेशकों के दूरदर्शी नेतृत्व में कंपनी सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण एवं समुदाय-केंद्रित प्रभावी पहलों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे उसके परिचालन क्षेत्रों में संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक  देवा प्रसाद, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक सु राखी नंदा सहित डब्ल्यूसीएल एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, डब्ल्यूसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक  एच.एस. पांडे, डब्ल्यूसीएल के  बिक्रम घोष (निदेशक, वित्त/मानव संसाधन),  आनंदजी प्रसाद (निदेशक, तकनीकी/संचालन) और  संदीप परांजपे (निदेशक, परियोजना एवं नियोजन) उपस्थित रहे।  

यूपी के कुकरैल में घड़ियाल संरक्षण की सफलता, 1970 से अब तक बड़ी उपलब्धि

लखनऊ यूपी में कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके घड़ियाल आज सफल संरक्षण का घंटा बजा रहे हैं। लखनऊ स्थित कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी गूंज अब देश ही नहीं, विदेश के कई चिड़ियाघरों तक सुनाई दे रही है। कुकरैल के वैज्ञानिक कैप्टिव ब्रीडिंग (बंदी प्रजनन) मॉडल को नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी ने भारत के सबसे सफल संरक्षण प्रोजेक्ट्स में शामिल किया है। यही वजह है कि यहां जन्मे घड़ियाल आज भूटान, पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका (न्यूयॉर्क) और जापान के चिड़ियाघरों में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये देश भी इस मॉडल को अपनाने की पहल कर रहे हैं। 1970 के दशक में स्थिति बेहद गंभीर थी, जब पूरे देश में केवल 250 से 300 घड़ियाल ही बचे थे। इस संकट को देखते हुए 1975 में कुकरैल पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई। शुरुआत में चंबल नदी (इटावा) से अंडे लाकर वैज्ञानिक तरीके से हैचिंग की गई और घड़ियाल संरक्षण की नींव रखी गई। 1988 से यहां नियमित प्रजनन शुरू हुआ और आज स्थिति यह है कि केंद्र में 466 घड़ियाल मौजूद हैं। हर वर्ष लगभग 140 से 160 नए घड़ियाल यहां जन्म ले रहे हैं। इस वर्ष नमामि गंगे परियोजना के तहत 500 अंडों को हैच करने का लक्ष्य तय किया गया है। नदियों को मिल रहा नया जीवन कुकरैल में जन्म लेने वाले घड़ियालों को ढाई वर्ष तक विशेष देखरेख में रखा जाता है, जिसके बाद उन्हें गंगा, घाघरा, चंबल, गेरुआ और गंडक जैसी नदियों में छोड़ा जाता है। इससे नदियों का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत हो रहा है और जैव विविधता को नई ऊर्जा मिल रही है। इसके अलावा दुधवा, कतर्नियाघाट, हस्तिनापुर और महाराजगंज की नदियों में भी घड़ियाल फल-फूल रहे हैं। राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, राज्य ईको-पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है और दुर्लभ घड़ियालों को देखने देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। कुकरैल केंद्र में म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जहां हर साल लगभग दो लाख घरेलू और सैकड़ों विदेशी पर्यटक पहुंच रहे हैं। सनातन परंपरा में देवी गंगा के वाहन मकर के रूप में पूजनीय यह जीव आज उत्तर प्रदेश के प्रयासों से वैश्विक पटल पर नई जिंदगी पा चुका है।  

गोरखपुर पंचायत की पहल, सरपंच ने दान की जमीन पर बनाई आधुनिक चौपाल

 फतेहाबाद  बदलते दौर के साथ हरियाणा के ग्रामीण आंचल की तस्वीर तेजी से बदल रही है। विकास की इस बयार में अब गांवों की पारंपरिक चौपालें भी आधुनिक और हाईटेक रूप अख्तियार करने लगी हैं। कभी केवल पेड़ की छांव या साधारण कमरों तक सीमित रहने वाली ये चौपालें अब वातानुकूलित और इंटरनेट जैसी शहरी सुविधाओं से जगमगा रही हैं। जिले के कई गांवों में पंचायतों ने इन सामाजिक सरोकार के केंद्रों को शानदार तरीके से विकसित किया है, जो न केवल ग्रामीणों के बैठने का स्थान हैं, बल्कि उनके मनोरंजन और आपसी भाईचारे का मुख्य आधार बन चुकी हैं। इसी कड़ी में जिले के ऐतिहासिक गांव गोरखपुर की पंचायत ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। गांव के सरपंच मंदीप योगी ने बताया कि उनके गांव में कई चौपालें हैं, जिनमें से मुख्य चौपाल को पूरी तरह से आधुनिक रंग-रूप में ढाल दिया गया है। इस चौपाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के लिए सरपंच ने अपनी निजी जमीन पंचायत को दान में दी है। इस नवनिर्मित चौपाल में ग्रामीणों के लिए इंटरनेट से लेकर एसी तक की वीआईपी व्यवस्था की गई है। यहां गांव के बुजुर्ग नियमित रूप से बैठते हैं। सरपंच का मानना है कि इस चौपाल में आकर आपसी चर्चा करने और ताश खेलने से बुजुर्गों का मानसिक तनाव दूर होता है और वे अकेलापन महसूस नहीं करते। सरपंच ने दान की जमीन, गोरखपुर में तैयार की हाईटेक चौपाल गांव गोरखपुर के सरपंच मंदीप योगी ने ग्रामीण विकास में व्यक्तिगत योगदान देते हुए खुद की जमीन पंचायत को दान कर दी, जिस पर अब सर्वसुविधायुक्त चौपाल खड़ी है। पंचायत अब गांव की अन्य चौपालों का कायाकल्प करने की योजना पर भी तेजी से काम कर रही है ताकि हर वर्ग को इसका लाभ मिले। ग्रामीण परिवेश में चौपाल केवल एक भवन नहीं, बल्कि गांव का वह सार्वजनिक और लोकतांत्रिक मंच है जहां ग्रामीण संस्कृति धड़कती है। गांव पीलीमंदोरी में भी पंचायत ने इस दिशा में सराहनीय कार्य किया है। पीलीमंदोरी में चौपाल के साथ बना शानदार विश्राम गृह गांव पीलीमंदोरी के सरपंच धर्मवीर गोरछिया ने बताया कि पंचायत ने न सिर्फ चौपाल को आधुनिक बनाया है, बल्कि इसके साथ एक सर्वसुविधायुक्त विश्राम गृह का भी निर्माण करवाया है। चौपाल में जहां हवादार पंखे और बैठने की उत्तम व्यवस्था है, वहीं विश्राम गृह में तमाम आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं, जिससे गांव में आने वाले आगंतुकों को ठहराने में आसानी होती है। सरपंच धर्मवीर गोरछिया का कहना है कि चौपाल गांव का ऐसा मुख्य केंद्र है जहां राजनीति की बिसात बिछती है, सामाजिक नुक्कड़ सभाएं होती हैं और पंचायती फैसले लिए जाते हैं। अब इन चौपालों के हाईटेक होने से ग्रामीण बेहद खुश हैं।  

अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला गैंग पकड़ा गया, चंडीगढ़ पुलिस ने 3 को दबोचा

चंडीगढ़. चंडीगढ़ में ऑपरेशन सेल टीम ने एक इंटरस्टेट आर्म्स नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 3 ऐसे अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 2 देसी कट्टे, एक पिस्तौल और 2 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मौलीजागर के अभिषेक (23), डड्डूमाजरा के विकास उर्फ ​​भट्टी (20) और मनीमाजरा के तैयब उर्फ ​​चेतन (20) के रूप में हुई है। ऑपरेशन सेल के अनुसार, सबसे पहले 8 जून को पुलिस टीम ने अभिषेक को फेज-2 के पास से एक देसी पिस्तौल और 2 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था और उसे कोर्ट में पेश करके रिमांड पर लिया गया था। रिमांड के दौरान पूछताछ के बाद 10 जून को ऑपरेशन सेल टीम ने डड्डूमाजरा के रहने वाले विकास को सेक्टर-43 में CTU वर्कशॉप के पीछे से गिरफ्तार किया। उसके पास से एक देसी कट्टा भी बरामद हुआ। अभिषेक की टिप-ऑफ पर ऑपरेशन सेल ने 15 जून को किशनगढ़ चौकी के पास स्लिप रोड से तैयब उर्फ ​​चेतन को एक देसी कट्टे के साथ गिरफ्तार किया। जांच दौरान सामने आया है कि आरोपी अभिषेक के खिलाफ 19 क्रिमिनल केस दर्ज हैं।

मुख्यमंत्री साय नवनिर्मित नगर पंचायत शिवनंदनपुर के शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज अपने सूरजपुर प्रवास के दौरान नवनिर्मित नगर पंचायत शिवनंदनपुर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष  रितेश जायसवाल सहित सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए जनसेवा और विकास के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने नगर पंचायत शिवनंदनपुर के वार्ड क्रमांक 06 में सुसज्जित मंगल भवन निर्माण की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को महत्वपूर्ण सौगात दी। मुख्यमंत्री की घोषणा पर उपस्थित नागरिकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शिवनंदनपुर को नगर पंचायत का दर्जा मिलना क्षेत्र की वर्षों पुरानी आकांक्षा की पूर्ति है। इससे क्षेत्र में सुनियोजित नगरीय विकास का मार्ग प्रशस्त होगा तथा नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि जनता ने जिस विश्वास के साथ अपने प्रतिनिधियों का चयन किया है, उस विश्वास पर खरा उतरना अब उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों से बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनप्रतिनिधि जनता और शासन के बीच सेतु बनकर जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री  साय ने शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने तथा अपने अधिकारों और सुविधाओं के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं मुख्यमंत्री कॉल सेंटर के माध्यम से नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। सरकार जनता की समस्याओं के समयबद्ध और प्रभावी निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सभा को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि शिवनंदनपुर के नगर पंचायत बनने से क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में शिवनंदनपुर में विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। उन्होंने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने तथा क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने का आह्वान किया। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रयासों और दूरदर्शी सोच के कारण शिवनंदनपुर को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हुआ है। यह क्षेत्र के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जिससे नागरिकों को बेहतर नगरीय सुविधाएं और विकास कार्यों का लाभ मिलेगा। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने विभागीय स्टॉलों का किया अवलोकन शपथ ग्रहण समारोह के पश्चात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी एवं जागरूकता स्टॉलों का अवलोकन किया। समाज कल्याण विभाग के स्टॉल में दो दिव्यांग हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल प्रदान की गई तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत तीन हितग्राहियों को उनके नवीन आवास की चाबियां सौंपी गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में बच्चों के पोषण हेतु तैयार किए जाने वाले खिचड़ी, हलवा, खुरमा, बर्फी, कटुआ, गुलगुला तथा रेडी-टू-ईट पोषण आहार का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री ने पोषण आहार का अवलोकन कर इसकी सराहना की। इस दौरान तीन गर्भवती महिलाओं की गोदभराई तथा दो बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी संपन्न कराया गया। मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं से संवाद कर योजना से प्राप्त लाभों की जानकारी ली। इसके अलावा आदिवासी विकास विभाग, कृषि विभाग, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जल संसाधन विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग के स्टॉल में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करवां के विद्यार्थियों द्वारा सोलर सैनिटेशन किट सहित विभिन्न नवाचारों एवं वैज्ञानिक मॉडलों का प्रदर्शन किया गया, जिसकी मुख्यमंत्री ने सराहना की। विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को किया गया लाभान्वित मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं लाभ का वितरण किया। मत्स्य पालन प्रसार योजना के अंतर्गत फुटकर मत्स्य विक्रय उपकरण प्रदाय योजना के तहत कुंजनगर निवासी मती भारती केवट एवं मती तपेश्वरी राजवाड़े को आइस बॉक्स के साथ 6-6 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य योजनाओं के तहत शिवनंदनपुर निवासी  अमरूत को वय वंदन कार्ड प्रदान किया गया। वहीं आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत शिवनंदनपुर एवं कुरूवां के पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरित कर योजना का लाभ प्रदान किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री  दयाल दास बघेल, सांसद  चिंतामणि महाराज, प्रेमनगर विधायक  भूलन सिंह मरावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा, सरगुजा संभाग के आयुक्त  नरेंद्र दुग्गा, आईजी  दीपक झा, कलेक्टर मती रेना जमील सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अवैध कब्जों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, बलरामपुर में 23 मकान हटाकर 7 एकड़ भूमि खाली कराई

बलरामपुर. बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर में प्रशासन ने शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 मकानों पर बुलडोजर चलाकर लगभग 7 एकड़ 75 डिसमिल जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश पर राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की, जिससे क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध कब्जों पर प्रशासन ने सख्त संदेश दिया है। सुनियोजित तैयारी के साथ की गई कार्रवाई प्रशासन की ओर से अतिक्रमण मुक्ति के लिए सुनियोजित तैयारी की गई। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आनंद राम नेताम के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने संबंधित भूमि का अभिलेखीय परीक्षण किया, सीमांकन कराया तथा अतिक्रमण की स्थिति का विस्तृत सर्वेक्षण किया। इसके बाद संबंधित व्यक्तियों को नियमानुसार नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने लोगों को समझाइश देते हुए स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने का अवसर भी प्रदान किया। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में सुनिश्चित किया गया कि कार्रवाई पूरी तरह कानून सम्मत एवं पारदर्शी तरीके से हो। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आम नागरिकों की सुविधाओं और संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा जाए। निर्देशों के अनुरूप अनुविभागीय अधिकारी (रा.) आनंद राम नेताम के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के बाद निर्धारित तिथि को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। प्रशासनिक अमले की उपस्थिति में 23 मकानों से अतिक्रमण हटाया गया और लगभग 7 एकड़ 75 डिसमिल भूमि को मुक्त कराया गया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण, व्यवस्थित रूप से संपन्न हुई तथा कहीं भी अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हुई। अतिक्रमण हटने के बाद मुक्त कराई गई भूमि को पुनः शासकीय अभिलेखों के अनुरूप सुरक्षित किया गया। इस भूमि का उपयोग भविष्य में जनहित एवं विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को लाभ मिलेगा। कलेक्टर का सख्त संदेश कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिले में शासकीय भूमि की नियमित निगरानी की जाए तथा अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी भूमि को सुरक्षित रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इस दिशा में आगे भी प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।

हिसार में मुफ्त साइकिल योजना पर सवाल, 8 साल में 54% बढ़ी कीमत

हिसार  आठ साल पहले हरियाणा के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 6 के अनुसूचित वर्ग के बच्चों के लिए निशुल्क साइकिल योजना शुरू की। ताकि जिन बच्चों का घर से स्कूल की दूरी 2 या इससे अधिक किलोमीटर दूर है तो साइकिल चलाकर वह बच्चा स्कूल पहुंच सकें, जिससे वह पढ़ाई से वंचित न रह जाए। लेकिन उपरोक्त निशुल्क योजना अभिभावकों की जेबें खाली कर रही है। कारण है कि शिक्षा निदेशालय ने 8 साल से प्रदेश के बाजारों का कोई रिव्यू नहीं किया। जिस कारण 2018 से लेकर 2026 तक 20 व 22 इंची साइकिलों की कीमत 54 प्रतिशत बढ़कर 6 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। जोकि अभिभावकों को भरना पड़ता है। जबकि सरकार अभी तक पुराने नियमानुसार केवल 46 प्रतिशत पैसा ही अभिभावकों को दे रही है। जिस कारण अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ता है। बता दें कि निशुल्क साइकिल योजना के तहत सरकार 20 इंच की साइकिल के 2800 रुपये व 22 इंच की साइकिल के तीन हजार रुपये ही दे रही है। बच्चों को पसंद आती है 4500 रुपये की साइकिलें हर साल सरकारी स्कूलों में लगने वाले निशुल्क साइकिल मेले में बच्चों को 4500 रुपये व इससे अधिक कीमत की साइकिलें पसंद आती है। जोकि लंबे समय तक चलने वाली भी होती है और गुणवत्तायुक्त भी होती है। लेकिन सरकार की ओर तय कीमत की साइकिलें न तो गुणवक्तायुक्त होती है और न ही लंबे समय तक चलने वाली होती है। जिस कारण न बच्चे और न ही अभिभावक तय कीमत की साइकिलों में रूचि दिखाते हैं। शिक्षा निदेशालय ने निशुल्क साइकिल योजना के तहत प्रदेश के समस्त डीईओ को कुल एक करोड़ रुपये अलाट कर दिए है। कुछ दिन में समस्त डीईओ को 5-5 लाख रुपये मिल जाएंगे। ताकि मेले के सफल आयोजना में तय राशि को खर्चा जा सकें। इसके लिए डीईओ को आदेश दिए है कि वे विज्ञापन सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू कर दें। ताकि समय रहते मेला लगाया जा सकें। मेले में खाने-पीने का खर्चा कौन उठाएगा निशुल्क साइकिल योजना के तहत लगने वाले मेले में दूर-दराज से आए बच्चों व शिक्षकों के लिए रिफ्रेशमेंट उपलब्ध करवाया जाता है।जिसका पैसा सरकार बाद में जारी करती है। जिस कारण बड़ा सवाल रहेगा कि बीते साल की तरह इस साल भी रिफ्रेशमेंट का खर्चा कौन उठाएगा। हिसार के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नरेंद्र शर्मा ने कहा कि मैंने अभी डीईईओ पद पर ज्वाइन किया है। मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।  

शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित की जाएंगी गोशालाएं

गो संरक्षण विशेष-मेगा कैंपेन चलाकर घर-घर पहुंचाया जाएगा ‘जहर मुक्त भोजन’ शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित की जाएंगी गोशालाएं सीएम योगी के निर्देश पर गो संरक्षण से रोजगार, प्राकृतिक खेती और स्वदेशी ऊर्जा मॉडल तैयार गोशालाओं के आसपास रहने वाले परिवारों तक पहुंचेंगे जहरमुक्त सब्जियां, अनाज और फल गोशालाओं के पांच किलोमीटर दायरे में रहने वाले परिवारों को उत्पाद पहुंचाकर होगी शुरुआत   लखनऊ प्रदेश में ‘जहर मुक्त भोजन’ का मेगा कैंपेन शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अब लोगों की थाली तक सीधे खेतों से निकला शुद्ध और जहरमुक्त भोजन पहुंचाया जाएगा। इस पूरे महाभियान का केंद्रबिंदु उत्तर प्रदेश की गोशालाएं होंगी, जिन्हें अब सिर्फ गोसंरक्षण ही नहीं, बल्कि शुद्ध खाद्य पदार्थों के बड़े सप्लाई सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में चयनित गोशालाओं के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले परिवारों को इस महा अभियान से जोड़ा जाएगा। इन परिवारों तक प्राकृतिक खेती से उपजे खाद्यान्न, ताजी सब्जियां, फल और पंचगव्य आधारित उत्पाद सीधे पहुंचाए जाएंगे। गो सेवा आयोग ने इसके लिए ‘फार्म टू कंज्यूमर’ (खेत से सीधे उपभोक्ता तक) मॉडल तैयार किया है। इससे उपभोक्ताओं को सही कीमत पर और किसानों को उनकी उपज का और बेहतर मूल्य मिल सकेगा। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य हर नागरिक को बीमारियों से बचाना और उन्हें ‘जहर मुक्त भोजन’ उपलब्ध कराना है। सबसे पहले चयनित गोशालाओं के आसपास के परिवारों से इसकी शुरुआत होगी। यह मॉडल गोशालाओं को ग्रामीण समृद्धि और सेहत का नया केंद्र बनाएगा। ‘जहर मुक्त भोजन’ मिशन की विशेषताएं  जैविक खाद्य: गोशालाओं के सहयोग से तैयार होने वाली 100% जैविक सब्जियां, फल और अनाज सीधे घरों तक पहुंचेंगे।  पहला टारगेट रेडियस: शुरुआती फेज में गोशाला के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।  मल्टी-प्रोडक्ट बास्केट: अनाज-सब्जियों के अलावा औषधीय उत्पाद, पंचगव्य घी, और शुद्ध दूध भी इस चेन का हिस्सा होंगे।  स्थायी बाजार: केमिकल-फ्री उत्पाद तैयार करने वाले स्थानीय किसानों को अब अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, गोशालाएं ही उनका बाजार बनेंगी। ग्रामीण स्तर पर पैदा होंगे बंपर रोजगार गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ‘जहर मुक्त भोजन’ के इस पूरे चक्र को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय युवाओं को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर बंपर रोजगार पैदा होंगे। प्रदेश में यह प्रयोग देश के सामने 'सेहत और समृद्धि' का एक अनूठा उदाहरण बनने जा रहा है।