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मुरैना में बंदूक लाइसेंस को लेकर बड़ी कार्रवाई, 282 रद्द, 411 पर तलवार लटकाई गई

मुरैना मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में लाइसेंसी बंदूकधारियों पर प्रशासन और पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने ऐक्शन लेते हुए  जिले के ऐसे 282 लोगों के शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज या लंबित हैं। इस मामले की जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि जिले के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इस मामले की जानकारी देते हुए जिला कलेक्टर अंकित अस्थाना ने बताया कि पुलिस अधीक्षक की ओर से 411 ऐसे लाइसेंसी शस्त्रधारियों की सूची तैयार की गई थी, जिनके खिला आपराधिक मामले दर्ज हैं या फिर वे अदालत में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर जिला दंडाधिकारी अदालत ने जिले के 411 लाइसेंसी शस्त्रधारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अस्थाना ने बताया कि इनमें से सिर्फ 129 लोगों ने ही अपने विरुद्ध उल्लेखित अपराध में दोष मुक्त होने के आदेश प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि शेष 282 लोगों द्वारा दस्तावेज जमा न करने के कारण उनके लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। मुरैना के पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ ने बताया कि उन्होंने पिछले 16 वर्षों का रिकॉर्ड खंगालकर 411 लाइसेंसधारियों की सूची तैयार की थी। उन्होंने कहा कि अब जिनके लाइसेंस निलंबित हुए हैं, उन्हें जल्द ही अपने हथियार जमा कराने होंगे। ऐसा न करने पर शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लंबे समय से लोग बंदूक को अपनी शान समझते रहे हैं और अक्सर यहां हर्ष फायरिंग और आपसी विवादों में लाइसेंसी बंदूकों के इस्तेमाल की शिकायतें मिलती रही हैं। सिर्फ मुरैना जिले में शस्त्र लाइसेंस धारकों की संख्या 25 हजार से अधिक है।

महाकाल महालोक तक उज्जैन में अंडरपास बनेगा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित

उज्जैन  धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध उज्जैन शहर में हरिफाटक चौराहे से महाकाल महालोक तक नया अंडरपास बनने जा रहा है। इस पर 40 करोड़ 57 लाख रुपये खर्च होंगे। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, अंडरपास न केवल हरिफाटक पुल पर यातायात का दबाव कम करेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को महाकाल मंदिर और प्रमुख स्थलों तक सुगम और सुरक्षित पहुंच भी सुनिश्चित करेगा। निर्माण भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुसार किया जाएगा। इसमें अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। निर्माण के दौरान भी यातायात को सुचारू रखने के लिए योजना बनाई जा रही है। अंडरपास की डिजाइन इस तरह तैयार की गई है कि इंदौर-देवास की तरफ से आने वाले श्रद्धालु हरिफाटक पुल पर चढ़े बिना सीधे महाकाल महालोक के नंदी द्वार (जहां भगवान गणेश की विशाल मूर्ति स्थापित है) तक पहुंच सकें। इसकी लंबाई 600 और चौड़ाई 22 मीटर तय की है। मार्ग का कुछ हिस्सा भूमिगत होगा। निर्माण से जिला पंचायत का संभागीय हाट बाजार भी प्रभावित होगा। नया मार्ग महाकाल महालोक के साथ चारधाम मंदिर, त्रिवेणी कला संग्रहालय और रोपवे के बनने वाले दूसरे स्टेशन तक की पहुंच आसान बनाएगा। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तैयारी परियोजना को उज्जैन में वर्ष 2028 में लगने जा रहे महाकुंभ सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उस समय करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे और तब यह अंडरपास भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इससे न केवल पुलिस और प्रशासन का प्रबंधन आसान होगा, बल्कि आम श्रद्धालुओं को भी परेशानी नहीं होगी। ऐतिहासिक नगरी की सबसे बड़ी जरूरत अंडरपास न केवल एक ट्रैफिक प्रबंधन उपाय है, बल्कि उज्जैन को धार्मिक पर्यटन हब के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम भी है। यह परियोजना उज्जैन को ऐसे माडल शहर के रूप में स्थापित करेगी, जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम हो। इस अंडरपास से उज्जैन का महाकाल क्षेत्र पहले से ज्यादा पहुंच योग्य, सुविधाजनक और सुरक्षित बन जाएगा और यही इस ऐतिहासिक नगरी की सबसे बड़ी जरूरत है। – रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर

रेलवे टेक्नीशियन का अभिनव अविष्कार: इंदौर में कप्लर टेस्टिंग डिवाइस से समय की होगी बचत

इंदौर  रेलवे में तकनीकी जांच के क्षेत्र में एक नई और रोचक पहल सामने आई है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के इंदौर में पदस्थ इलेक्ट्रिक टेक्नीशियन-वन भगवती लाल सालवी ने लोको इंजन और कोच को जोड़ने वाली बिजली की केबल की जांच के लिए एक यूआईसी कप्लर टेस्टिंग डिवाइस बनाई है। इस मशीन ने रेलवे कर्मचारियों का काम आसान कर दिया है और घंटों का काम मिनटों में पूरा हो रहा है। इस नवाचार से न केवल रेलवे की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि यह तकनीकी दक्षता को भी बढ़ाएगा। सालवी की इस पहल ने रेलवे के कर्मचारियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है, जिससे वे अपने कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे। समय की बचत होती तो ट्रेनों समय से रवाना की जा सकेंगी। एक व्यक्ति ही 10 मिनट में कर लेगा परीक्षण लोको और कोच की इन केबल की जांच के लिए पहले दो कर्मचारियों की आवश्यकता होती थी। ये कर्मचारी केबल की जांच आधे से एक घंटे में पूरा करते थे। इस समय को बचाने के लिए टेक्नीशियन-वन सालवी ने कप्लर टेस्टिंग डिवाइस बनाई। इस डिवाइस के परीक्षण का कार्य अब सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा सिर्फ दस मिनट में किया जा सकता है। सालवी के इस नवाचार के लिए पश्चिम रेलवे के चीफ इंजीनियर डीके राठी ने मुंबई में 19 सितंबर को उन्हें पुरस्कृत किया। सालवी ने बताया कि इस डिवाइस के उपयोग से इंदौर में ट्रेनों के केबल की जांच हो रही है, जबकि पहले यह काम मैनुअल किया जाता था और इसमें अधिक समय लगता था। एक ही व्यक्ति आसानी से सभी पिन की जांच करेगा इस डिवाइस की विशेषता यह है कि लोको और कोच को जोड़ने वाली इस केबल में करीब 13 पिन होती हैं। इन्हें मैनुअल मल्टीमीटर से जांचने में आधे से एक घंटे से अधिक का समय लगता था और दो कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती थी। सालवी की बनाई डिवाइस से अब एक ही व्यक्ति आसानी से सभी पिन की जांच कर सकता है। इससे समय की बचत के साथ-साथ खराब केबल को तुरंत पहचान कर बदलने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। इससे ट्रेनों के संचालन में भी कोई देरी नहीं होती है।

मंडला का नया कदम: शराब पीने पर भारी जुर्माना, शिकायतकर्ता को मिलेगा इनाम; नशा मुक्ति अभियान को मिली नई ताकत

मंडला मंडला जिले में नशा मुक्ति अभियान (Nasha Mukti Abhiyan) अब जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। मोहगांव के ग्राम पंचायत कौआडोंगरी के पोषक ग्राम सकरी एवं खैरी रैयत में ग्रामीणों ने एकजुट होकर संपूर्ण ग्राम को नशा मुक्त बनाने की ठानी है। गांव में ग्रामवासियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि गांव में शराब बनाने व पीने वालों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। शराब बनाने या पीने वालों की जानकारी देने वाले को 5 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने गांव में रैली भी निकाली। महिलाओं की दिखी अधिक भागीदारी ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि गांव को पूरी तरह नशामुक्त बनाया जाएगा। इस दौरान महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी करते हुए स्पष्ट कहा कि नशे से परिवार और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए अब गांव में किसी भी कीमत पर शराब नहीं बनने दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सामाजिक बहिष्कार भी किया जाएगा। कहीं तोड़ रहे शराब भट्टी तो कहीं लगा रहे जुर्माना ग्राम पंचायत सिंहपुर, नैनपुर, बीजाडांडी क्षेत्र के कई गांवों में भी इसी प्रकार ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक कर शराबबंदी का निर्णय लिया है। कुछ गांवों में तो महिलाओं ने मोर्चा संभालते हुए शराब की भट्टियों को तोड़कर नष्ट किया था। वहीं कई पंचायतों में यह नियम बनाया गया है कि अगर कोई शराब बेचते या बनाते पाया गया तो उस पर सामूहिक जुर्माना लगाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि नशा ही गरीबी, घरेलू हिंसा और बीमारियों की जड़ है। यदि इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए तो गांवों का विकास तेजी से हो सकता है। नशा मुक्ति के इस सामूहिक प्रयास से अब जिले के कई गांव आदर्श ग्राम की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। लोगों का कहना है कि शराबबंदी होने से जहां खुशहाली आएगी वहीं यहां बच्चे शिक्षा की ओर आगे बढ़ेंगे।  शराब न बेचने को लेकर समाज से ली सहमति जिला मुख्यालय से 15-20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम लफरा में विगत लंबे समय से कच्ची पक्की शराब बड़े पैमाने पर बेची जा रही थी। जिससे ग्रामीण महिलाओं ने विरोध शुरु किया तो समाज के लोग भी समर्थन में कर रहे हैं। गांव के नंदा समाज और केवट समाज ने अपनी सहमति से शराब न बेचने का निर्णय लिया है। यहां क्षेत्रीय जनपद सदस्य जानकी पुष्पकार, सरपंच विमला मरावी के साथ ही उपसरपंच, वाडाँ पंच भी शराब बंदी का समर्थन करते हुए समय समय पर जागरूकता रैली व पुलिस के सहयोग से कार्रवाई भी करा रहे हैं। मोहगांव के ग्राम कुम्हरों में भी मई माह में बैठक कर ग्रामीणों ने शराबबंदी का निर्णय लिया है। शराब बनाने पर 20 हजार रुपए, उपयोग करने वालों पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया है। ग्राम शोधन पिपरिया में भी शराब बनाने और पीने पर प्रतिबंधित करते हुए जुर्माना भी निर्धारित किया गया है। 

कान्हा नेशनल पार्क की सफारी फुल, लेकिन सतपुड़ा में नए वाहनों से होगी शानदार सफारी

नर्मदापुरम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई क्षेत्र में सैलानियों के लिए  2 नए वाहन मिल गए हैं। एक अक्टूबर को पार्क खुलने के पहले 2 और वाहन आने वाले हैं। इससे मढ़ई में सफारी वाहनों की कमी नहीं रहेगी। सैलानियों को लेकर वाहन किस जगह पर हैं। इसकी लोकेशन देने के लिए वाहनों में जीपीएस भी लगाया गया है। एसटीआर में सैलानियों को घुमाने के लिए 20 वाहन हैं। इसमें से लगभग 4 वाहन 15 साल से अधिक पुराने हो गए थे। इसलिए जंगल सफारी कराने में उनको उपयोग नहीं किया जाता था। 24 घंटे ऑन रहेगी वाहनों की लोकेशन सैलानियों के पार्क खुलने के पहले 4 नए सफारी वाहन मढ़ई पहुंचा दिए जाएंगे। इस तरह 20 वाहनों से सैलानी जंगल सफारी करेंगे। जीपीएस से लैस अत्याधुनिक वाहनों की लोकेशन 24 घंटे ऑनलाइन रहेगी। इसके जरिए सैलानियों को लेकर निकला वाहन किस जगह पर है इसकी पूरी लोकेशन एसटीआर के कंट्रोल रूम को रहेगी।  एसटीआर के कोर जोन के मढ़ई और चूरना में कर सकेंगे एंट्री एक अक्टूबर से एसटीआर के कोर जोन के मढ़ई और चूरना में सैलानियों का प्रवेश शुरू हो जाएगा। इसके लिए जंगल के अंदर सफारी मार्गो की मरम्मत शुरू की गई है लेकिन बारिश के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहा है। शुरुआती दिनों में सैलानियों को पूरी सफारी नहीं कराएंगे। 5 पेट्रोल 1 सौर ऊर्जा चलित मोटर की मरम्मत सैलानियों को तवा नदी के बैक वॉटर में 5 पेट्रोल और 1 सौर ऊर्जा चलित मोटर बोट सैलानियों की जंगल सफारी कराएगी। एसटीआर ने मोटर बोट की मेटेनेंस शुरू कर दिया है। एक अक्टूबर के पहले बोट सैलानियों के उपयोग के तैयार हो जाएंगी। शुरू हो चुकी है बुकिंग एक अक्टूबर से जंगल सफारी करने के लिए सैलानी ऑन लाइन बुकिंग करने लगे हैं। मंगलवार तक प्रदेश के टाइगर रिजर्व में 1 से 3 अक्टूबर तक के लिए एसटीआर में मढ़ई, चूरना में 6, पेंच में 13, बांधवगढ़ में 14 , पन्ना 12 और कान्हा में 24 सफारी बुक की गई हैं। एसटीआर खुलते ही सफारी शुरू कराई जाएगी। मढ़ई के लिए 4 नए सफारी वाहन मढ़ई के लिए 4 नए सफारी वाहन मिल गए हैं। पार्क खुलते ही जंगल सफारी कराने के लिए इनका उपयोग किया जाएगा। सभी मोटर बोट का मेंटेनेंस भी किया जा रहा है। – अंकित जामोद, एसडीओ मढ़ई एसटीआर नर्मदापुरम

बचत और स्वच्छ ऊर्जा के लिए एमपी सरकार ने दिया निर्देश, हर शहर में सोलर प्लांट होंगे स्थापित

भोपाल   प्रदेश में नगरीय निकायों के अनावश्यक खर्चों को कम करने के लिए अब नगरीय विकास विभाग नकेल कसने की तैयारी में है। सभी निकायों को मितव्ययिता अपनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अनावश्यक खर्च रोकने के लिए सभी निकायों का अब एनर्जी ऑडिट भी होगा। इसमें आवश्यक लोड के अनुसार ही कनेक्शन लिया जाएगा। सभी निकायों के अस्थायी बिजली कनेक्शन भी बंद कराए जा रहे हैं। इनके स्थान पर सोलर पावर प्लांट(Solar Plant) लगेंगे, जिससे बिजली व्यय कम हो सके। इसके अलावा डीजल वाहनों की बजाय अब इलेक्ट्रिक वाहन ही खरीदे जाएंगे। निकायों को राजस्व वसूली बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे साल भर में होने वाली बचत नगर में जनता से जुड़े हुए विकास संबंधी कामों में खर्च होगी। हर निकायों में लगेंगे सोलर प्लांट हर नगरीय निकाय को सोलर पॉवर प्लांट(Solar Plant) लगाने के लिए निर्देश दिए हैं। जिन निकायों में स्थान उपलब्ध है वे अपने यहां यह प्लांट लगा सकते हैं। जिनके पास जमीन उपलब्ध नहीं है वे प्रदेश में अन्य स्थानों पर यह प्लांट लगा सकते हैं। भोपाल निगम ने नीमच में सोलर प्लांट लगाया है। वहां जितनी बिजली बनेगी उतनी यहां नगर निगम को बिल में छूट मिलेगी। इससे बिजली बिल काफी कम होगा। कचरा वाहन भी ईवी होंगे विभाग ने तय किया है कि अब निकायों में जो नए वाहन खरीदे जाएंगे वे ईवी ही होंगे। फिलहाल डीजल वाहनों का संचालन बंद नहीं किया जाएगा। लेकिन एक बार डीजल वाहन खटारा होने के बाद उसकी जगह दूसरा डीजल वाहन नहीं खरीदा जाएगा। उसकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन लेंगे। कचरा परिवहन के लिए जो वाहन उपयोग किए जाएंगे वे भी ईवी ही होंगे। इसके लिए चार्जिंग पॉइंट की भी व्यवस्था की जाएगी। 15000 करोड़ बचत का अनुमान नगरीय विकास विभाग ने छोटे-छोटे बचत के उपायों को प्रभावी करने की योजना बनाई है। विभाग का अनुमान है कि सिर्फ फिजूलखर्ची पर रोक लगा कर ही प्रदेश की निकायों में 15 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। महापौरों ने रखी सुरक्षा और वित्तीय मांगें  मंत्रालय में हुई बैठक में नगर निगमों के महापौरों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के बाद बढ़ते खतरों को देखते हुए गनमैन की तत्काल मांग की। महापौरों ने कहा कि पिछली बैठक में सुरक्षा का आश्वासन मिला था, पर अब तक व्यवस्था नहीं हुई। साथ ही सरकारी जमीन निगमों के नाम दर्ज करने की मांग की ताकि विकास कार्य सुचारू हो सकें। महापौरों ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि सीधे उपलब्ध कराने की भी मांग की, ताकि वे बिजली बिल स्वयं चुका सकें। इंदौर महापौर ने अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही, वहीं भोपाल महापौर ने विसर्जन घाटों सहित कई जगहों पर निगम के नाम जमीन न होने से जनसुविधाएं प्रभावित होने का मुद्दा उठाया। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि निगम खर्च कम करें और शुल्क बढ़ाने जैसे सख्त फैसले लेकर राजस्व बढ़ाएं। एसीएस संजय दुबे ने संपत्ति किराए की दरें बढ़ाने, सोलर प्लांट लगाने और खर्चों की समीक्षा कर आय-व्यय संतुलन सुधारने के सुझाव दिए। कहा, बिजली, ईंधन और स्थापना व्यय की समीक्षा कर इनमें कमी की जा सकती है। सोलर प्लांट से बिजली बिल कम किया जा सकता है। बीते वर्ष चुंगी क्षतिपूर्ति से चुकाए बिजली के 60 करोड़ रुपए बता दें, प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा पेयजल, स्ट्रीट लाइट आदि के लिए विद्युत वितरण कंपनियों से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन स्थानीय निकायों द्वारा रहवासियों से शुल्क की वसूली में कमी आई है। इसलिए बिल नहीं चुका पाते। इसे देखते हुए वर्ष 2024 में नगरीय विकास विभाग ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से लगभग 60 करोड़ बिजली बिल चुकाने के लिए जारी किए थे। प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, कटनी, सागर, सतना, देवास, खंडवा और रतलाम के निकायों के बिजली बिल एक करोड़ रुपए से अधिक थे। सोलर प्लांट लगने के बाद बिजली बिलों में जरूर राहत मिलेगी।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों में कड़ा प्रतिबंध, जुर्माना भी लगाया जाएगा

 भोपाल  अब मध्य प्रदेश के सभी राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्वों में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित कर दिया गया है। एक अक्टूबर से इन्हें खोला जाएगा और इसके साथ ही प्रतिबंध लागू हो जाएगा। वन विभाग इनका कड़ाई से पालन भी करवाएगा। उल्लंघन करने पर 500 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक अर्थदंड का भी प्रविधान किया गया है। बता दें कि पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्क प्रबंधन बायोडिग्रेडिबल पदार्थ से बनी पानी की बोतल सशुल्क उपलब्ध कराएगा। कपड़े के बैग पर्यटकों को सशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे पर्यटक पार्क में प्लास्टिक बैग न लाएं। कपड़े के बैग स्व-सहायता समूह के सदस्यों से तैयार करवाए जाएंगे। इस तरह ईको (पर्यावरण हितैषी) पर्यटन से स्थानीय समुदाय की आजीविका के अवसर विकसित करने का प्रयास भी होगा। इससे उनकी वनों पर उनकी निर्भरता कम होगी और वनों का संरक्षण भी हो सकेगा। स्थानीय समुदाय के लोगों में क्षमता विकास एवं कौशल उन्नयन के लिए गाइड प्रशिक्षण, अतिथि सत्कार, खानसामा और अनुभूति प्रेरक प्रशिक्षण दिए जाएंगे। प्रयास होगा कि ईको पर्यटन से प्राकृतिक और सांस्कृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जाए और स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ के अवसर प्रदान किए जा सकें। गाइड के कौशल का होगा मूल्यांकन इसके अलावा, राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्वों और अभयारण्यों में गाइड के कौशल का मूल्यांकन हर वर्ष किया जाएगा। अपेक्षित मापदंडों के नीचे वाले गाइड को रोस्टर से हटा दिया जाएगा। एक अक्टूबर से गाइड का शुल्क भी बढ़ा दिया गया है। अब वनों में वाहन से एक राउंड के भ्रमण पर पर्यटकों को जी-वन श्रेणी के गाइड को 600 रुपये की जगह एक हजार रुपये तथा जी-टू श्रेणी के गाइड को 480 रुपये के स्थान पर 800 रुपये देने होंगे। प्रदेश में नौ टाइगर रिजर्व     कान्हा टाइगर रिजर्व     बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व     सतपुड़ा टाइगर रिजर्व     पेंच टाइगर रिजर्व     पन्ना टाइगर रिजर्व     रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व     संजय दुबरी टाइगर रिजर्व     डॉ. विष्णु वाकणकर (रातापानी) टाइगर रिजर्व     माधव टाइगर रिजर्व ये राष्ट्रीय उद्यान भी हैं। इसके अलावा दो अन्य राष्ट्रीय उद्यान यानी कुल 11 हैं। प्रदेश में 26 अभयारण्य हैं।     सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में सिंगल यूज प्लास्टिक पहले से ही प्रतिबंधित है। अन्य टाइगर रिजर्वों और राष्ट्रीय उद्यानों में भी अब इसे प्रतिबंधित किया गया है। इसका और अधिक कड़ाई से पालन करवाया जाएगा।     -एल. कृष्णमूर्ति, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी), वन विभाग, मध्य प्रदेश यह होता है सिंगल यूज प्लास्टिक यह प्लास्टिक सिर्फ एक बार इस्तेमाल करके फेंक दिया जाता है। जैसे पालीथीन बैग, प्लास्टिक स्ट्रा, कटोरी, प्लेट, कप, चम्मच, कैंडी, चाकलेट, चिप्स के रैपर आदि। इसे दोबारा उपयोग में लाना कठिन या असंभव होता है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बना रहता है। मिट्टी, पानी, जानवरों और मनुष्यों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।  

पुतिन की नीति ने पलटा खेल, रूस को हुआ आर्थिक लाभ – ट्रंप रह गए पीछे

नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के दबाव में अमेरिका और यूरोप लगातार रूस पर नए-नए प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो यहां तक कह चुके हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीदना बंद करे. लेकिन उनकी ये चाल कामयाब नहीं हो पाई. इसके उलट, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐसा खेल रचा कि देश का खजाना कच्चे तेल की कमाई से भर गया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का समुद्री कच्चा तेल निर्यात 21 सितंबर तक के 28 दिनों में औसतन 36.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया. यह मई 2024 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यानी पश्चिमी देशों की सख्ती और लगातार हमलों के बावजूद रूस ने तेल बेचने का नया रिकॉर्ड बना डाला. यूक्रेन की तरफ से किए गए ड्रोन हमलों ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचाया. इसके कारण उत्पादन घटकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे चला गया, जो अप्रैल 2022 के बाद का सबसे कम स्तर है. जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी के अनुमान के अनुसार, अगस्त और सितंबर में रूस सामान्य रूप से 54 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का प्रोसेस करता था. यूक्रेनी ड्रोन हमलों का शोर ज्‍यादा, असर कम यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और अन्‍य रणनीतिक ठिकानों पर ड्रोन हमले में बड़े नुकसान के दावे किए गए हैं. लेकिन, असल में उतनी हानि हुई नहीं है. रूस ने पिछले हफ्ते बाल्टिक पोर्ट प्रिमोर्स्क से रिकॉर्ड 12 टैंकर कच्चा तेल लेकर निकले. यह दिखाता है कि पंपिंग स्टेशनों पर हमलों के बावजूद रूस की सप्लाई लाइन मजबूत बनी हुई है. बंदरगाहों पर मौजूद स्टोरेज टैंकों ने भी काम आसान कर दिया. पंप स्टेशनों की मरम्मत होने तक इन टैंकों से तेल की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रही. रूस ने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया. रिफाइनिंग कम होने के बाद भी रूस ने कच्चे तेल को घरेलू खपत में लगाने के बजाय सीधे निर्यात टर्मिनलों पर भेज दिया. इससे विदेशों में कच्चे तेल की आपूर्ति और बढ़ गई और रूस की जेब भी भर गई. यूरोपीय संघ की दुविधा यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए रूस पर नए प्रतिबंधों की संभावना अभी दूर दिखती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि आगे कोई नया कदम तभी उठाया जाएगा जब यूरोपीय संघ पूरी तरह रूसी तेल की खरीद बंद करे. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दबाव बना रहे हैं कि यूरोपीय संघ पूरी तरह से रूसी तेल खरीद बंद करे. लेकिन ऐसा होना अभी मुश्किल है. हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश रूस के तेल पर निर्भर हैं और वे इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. इसी कारण यूरोपीय संघ प्रतिबंध लगाने के बजाय अब टैरिफ जैसे व्यापारिक उपायों पर विचार कर रहा है. यह भी पुतिन के लिए राहत की बात है क्योंकि इसका असर सीमित होगा.

Deendayal Ladli Lado Yojana: महिलाओं को आर्थिक सहारा, योजना पोर्टल आज होगा लॉन्च, ₹2100 प्रतिमाह की मदद

चंडीगढ़  हरियाणा के सीएम नायब सैनी आज  दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का शुभारंभ करेंगे, जिसके लिए पंचकूला में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो चुकी है। कल सीएम लाडो लक्ष्मी योजना से संबंधित पोर्टल लांच करेंगे, जिसके बाद 2100 रुपए की राशि के लिए आवेदन प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। हरियाणा दिवस पर एक नवंबर को महिलाओं को खाते में पहली बार 2100 रुपए आएंगे। इसके बाद हर माह 2100 रुपए आते रहेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रीजत को छोड़कर बाकी सभी मंत्रियों की योजना लांच करने के लिए ड्यूटी अलग-अलग जिलों में लगाई गई है। शुरुआत में एक लाख वार्षिक आय वाले परिवारों की की महिलाओं को मिलेगा लाभ प्रदेश सरकार पहले चरण में एक लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ देगी, लेकिन सरकार भविष्य में इस योजना के तीन चरण और लांच करने पर विचार कर रही है। सरकार की योजना पांच लाख रुपए तक वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ देने की है। पहले चरण में 23 से 60 साल उम्र की कुल 20 लाख 97 हजार 256 महिलाओं को 2100 रुपए मासिक भत्ता देने की योजना है। इनमें विवाहित महिलाओं की संख्या 18 लाख 14 हजार 621 है, जबकि अविवाहित महिलाओं की संख्या 2 लाख 82 हजार 635 है। प्रदेश सरकार इस योजना के लिए धीरे-धीरे तीन चरण और जारी करने पर विचार कर रही है। दूसरे चरण में 1 लाख से 1 लाख 80 हजार रुपए वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाओं को लाडो लक्ष्मी योजना के दायरे में लाया जाएगा। लाडो लक्ष्मी योजना के तीसरे चरण में 1 लाख 80 हजार रुपए वार्षिक से 3 लाख रुपए वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाओं को 2100 रुपए मासिक देने की संभावना है। चौथे और अंतिम चरण में 3 लाख से 5 लाख रुपए वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाओं को भी सरकार लाडो लक्ष्मी योजना के दायरे में ला सकती है। लाडो लक्ष्मी योजना का चौथा चरण साल 2028-29 के आसपास आरंभ किया जा सकता है। तीन लाख रुपये वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाओं की संख्या 46 लाख 62 हजार हैं, जिनमें से करीब 22 लाख महिलाओं को पहले चरण में 2100 रुपये मासिक दिए जाने वाले हैं। तीन से पांच लाख रुपये वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाओं की संख्या करीब 7 लाख के आसपास बताई जाती है।

हरियाणा: 11 जिलों में खराब लिंगानुपात पर सख्ती, सरकार CMO पर ले सकती है एक्शन

चंडीगढ़  हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने कहा कि लिंगानुपात सुधारने के मामले में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि जिन जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सी.एम.ओ.) परफॉर्मेंस नहीं दिखा रहे, उनके खिलाफ । विभाग सख्त कार्रवाई करेगा और उन पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने आज वर्चुअल माध्यम से राज्य टास्क फोर्स (एस.टी.एफ.) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने सभी सी.एम.ओ. को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में सक्रिय रहते हुए फील्ड स्तर पर निगरानी को और मजबूत करें। साथ ही मुख्यालय के अधिकारियों को भी आदेश दिए कि वे जिलों को पूरा सहयोग प्रदान करें और ठोस कदम उठाएं।  बैठक के दौरान बताया गया कि इस वर्ष 1 जनवरी से 22 सितम्बर तक राज्य का लिंगानुपात सुधर कर 907 हो गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 904 था। हालांकि जिलावार कुछ जिलों की परफॉर्मेंस नकारात्मक सामने आई है, इस सूची में प्रदेश के 11 जिले शामिल थे। इनमें चरखी दादरी, करनाल, सिरसा, हिसार, अंबाला, यमुनानगर, सोनीपत, कैथल, महेंद्रगढ़, भिवानी तथा पलवल शामिल है। इन जिलों में अन्य की तुलना में प्रदर्शन कमजोर पाया गया है और लिंगानुपात माइंस में है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इन जिलों के सी.एम.ओ. को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि वे ठोस कार्ययोजना बनाकर जल्दसे जल्द सुधारात्मक कदम उठाएं।   बैठक में कैथल जिले के मामले पर भी चर्चा हुई, जिसमें एक सरकारी फार्मासिस्ट द्वारा अवैध रूप से एम.टी. पी. किट बेचे जाने की शिकायत मिली थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने सख्त रुख अपनाते हुए कैथल सी. एम. ओ. से कार्रवाई रिपोर्ट लेते हुए निर्देश दिए कि फार्मासिस्ट को तत्काल निलंबित किया जाए और उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।  स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि रिवर्स ट्रैकिंग की प्रक्रिया को और तेज किया जाए। स्वस्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 11 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। बैठक में प्राइवेट चिकित्सकों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी ली गई। इसके साथ ही जिन जिलों के एस. एम. ओ. और सी.एम.ओ. अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं, उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। बैठक में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाए (डी.जी.एच.एस.) डा. मनीष बंसल, डा. कुलदीप सिंह, राज्य टास्क फोर्स के कन्वीनर डा. वीरेंद्र यादव सहित कई अधिकारी शामिल थे