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राजा भोज मल्टीक्लास सेलिंग चैम्पियनशिप 2025 का आग़ाज़ 16 सितंबर से, लहरों पर दिखेगा जज़्बा

बड़ी झील(खानूगाँव) बनेगी जलक्रीड़ा उत्सव का केंद्र, देशभर से आएंगे राष्ट्रीय स्तर के नाविक भोपाल भोपाल की जीवनदायिनी बड़ी झील (खानूगाँव) 16 से 21 सितंबर तक रोमांचक जलक्रीड़ा प्रतियोगिता का गवाह बनेगी। इस दौरान आयोजित राजा भोज मल्टीक्लास सेलिंग चैम्पियनशिप 2025 में देशभर से राष्ट्रीय स्तर के नाविक भाग लेंगे और अपने उत्कृष्ट कौशल का प्रदर्शन करेंगे। नियम क्लिनिक संपन्न प्रतियोगिता की तैयारियों के अंतर्गत 12 एवं 13 सितंबर को रूल्स क्लिनिक का आयोजन हुआ। इसमें 85 से अधिक नाविकों ने सक्रिय भागीदारी की। अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित सेलिंग जजों ने प्रतिभागियों को रेसिंग नियमों, तकनीकी प्रक्रियाओं और खेल की बारीकियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। युवाओं में बढ़ेगा साहस और खेल भावना तेज़ हवाओं और ऊँचे उत्साह के बीच यह चैम्पियनशिप जलक्रीड़ा प्रेमियों के लिए रोमांच और प्रतिस्पर्धा का अनूठा संगम साबित होगी। आयोजन समिति का मानना है कि यह न केवल जलक्रीड़ा को नई पहचान देगा बल्कि युवाओं में साहस, रणनीति और खेल भावना को भी प्रोत्साहित करेगा।

विधायक ध्रुव की घोषणा: NCC कैडेट्स के लिए ड्रोन खरीद हेतु 1 लाख रुपए सहायता

 गरियाबंद  देवभोग के आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में संचालित इकलौते जूनियर एयर विंग एनसीसी कैडेट कोर के बीच पहुंचे विधायक जनक ध्रुव ने शनिवार सुबह कैडेट्स के साथ करीब दो घंटे बिताए. ड्रिल देखकर अपने पुराने दिन याद करते हुए उन्होंने कैडेट्स से संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना. उड़ान प्रशिक्षण के लिए उपकरणों की कमी जानने पर विधायक ने ड्रोन खरीदी के लिए 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की, जिसे सुनकर कैडेट्स ने उनका अभिवादन किया. विधायक ने जमीन पर बैठकर छात्रों के साथ किया नाश्ता विधायक ध्रुव आज सुबह नगर पंचायत अध्यक्ष राजेश तिवारी के साथ हायर सेकेंडरी स्कूल के मैदान में मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचे. इसी दौरान आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल परिसर में कैडेट्स ड्रिल कर रहे थे. यह नज़ारा देखकर विधायक खुद को रोक नहीं पाए और उनके बीच पहुंच गए. पूर्व खेल अधिकारी और स्कूल समय में एनसीसी कैडेट रहे विधायक ध्रुव ने नज़दीक जाकर सभी से परिचय लिया. इसके बाद वे छात्रों के साथ जमीन पर बैठकर नाश्ते में भी शामिल हुए. इस दौरान स्कूल प्रिंसिपल गिरीश बेहरा भी मौजूद रहे. विधायक ने कहा कि यह गौरव की बात है कि जिले का एकमात्र एयर विंग एनसीसी जूनियर कैडर देवभोग में मौजूद है. उन्होंने इसे छात्रों के उज्जवल भविष्य और ग्रामीण क्षेत्र में एनसीसी को नई दिशा देने वाला मील का पत्थर बताया. साथ ही संस्थान को वर्ष 2023 में स्थापित कराने वाले शिक्षक गणेश सोनी की सराहना भी की. 40 कैडेट जिन्हें ड्रोन देगा फ्लाइंग की बारीकियां एनसीसी आफिसर गणेश सोनी ने बताया कि 20 सीनियर और 20 जूनियर मिलाकर यहां कुल 40 कैडेट हैं, जिसमें 19 गर्ल्स और 21 बॉयज है. सीनियर कैडेट को 22 रायफल में 10 राउंड फायर कर वेपन की ट्रेनिंग भी दी गई है. तकनीकी प्रेक्टिकल के लिए रायपुर हेड क्वाटर जाना होता है. विधायक ध्रुव के आर्थिक सहायता से ड्रोन आते ही प्रदेश के 25 जूनियर यूनिट में से देवभोग़ एयर विंग का इकलौता स्वयं का ड्रोन वाला इकलौता यूनिट हो जाएगा. फ्लाइंग की बेसिक जानकारी प्रायोगिक तौर पर मिलेगी. रिमोट से चलने वाले इस ड्रोन में पायलटिंग की बेसिक जानकारी के अलावा अक्षांश, देशांश की सटीक जानकारी, एक्जेक्ट लोकेशन पर लैंड करने की बेसिक जानकारी कैडेट को मिलने लगेंगे. ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी.

आज से कांग्रेस का अभियान, ‘वोट चोरी’ के खिलाफ जनता के बीच संदेश पहुंचाएगी

जयपुर राजस्थान में  राजनीतिक तापमान लगातार चढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा पर वोट चोरी और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए "वोट चोर-गद्दी छोड़" नाम से हस्ताक्षर अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। यह अभियान 15 सितंबर से 15 अक्टूबर 2025 तक राज्यभर में चलाया जाएगा। अभियान की तैयारियों को लेकर पीसीसी में कांग्रेस पदाधिकारियों की एक बैठक भी हो चुकी है। इसमें जिले भर से कांग्रेस पदाधिकारियों को बुलाया गया था। बैठक में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, सहप्रभारी चिरंजी राव, रित्विक मकवाना और पूनम पासवान समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया-  15 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक विभिन्न चरणों में प्रदेशभर में कांग्रेस द्वारा भाजपा की वोट चोरी के विरूद्ध हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा। पहले चरण में जिला स्तर पर बैठकें अभियान के प्रथम चरण में दिनांक 15 सितम्बर से 17 सितम्बर तक सभी जिला कांग्रेस कमेटियों की बैठक आयोजित होगी जिसमें जिला प्रभारी, अभियान प्रभारी, जिला पदाधिकारी को उक्त जिले में निवासरत जनप्रतिनिधिण शामिल रहेंगे और वोट चोर-गद्दी छोड़ हस्ताक्षर अभियान की तैयारियां करेंगे। दूसरा चरण: घर-घर जाएगी कांग्रेस इसके पश्चात् ब्लॉक, मण्डल, नगर कांग्रेस स्तर तक इस अभियान के लिये पदाधिकारियों की बैठक होगी। अभियान के प्रथम चरण में पार्टी के सभी पदाधिकारियों के हस्ताक्षर अभियान के तहत लिए जाएंगे तथा अगले चरण में कांग्रेस के नेता एवं कार्यकर्ता घर-घर जाकर आमजन से ज्ञापन पर हस्ताक्षर लेकर भाजपा की वोट चोरी के विरूद्ध जनमत संग्रह करेंगे। इस अभियान के तहत् कांग्रेस के नेता एवं कार्यकर्ता घर-घर हस्ताक्षर अभियान कराते हुये भाजपा द्वारा सरकार बनाने के लिये की गई वोट चोरी के साथ ही केन्द्र एवं राज्य सरकार की विफलतायें भी उजागर करेंगे। निकाय चुनावों का मुद्दा भी गूंजेगा इस अभियान में कांग्रेस निकाय चुनावों के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेरने का काम करेगी। डोटासरा ने बताया कि राजस्थान में निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के 5 साल का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद भी  भाजपा इन संस्थाओं के चुनाव नहीं करवा रही है और कांग्रेस सरकार के शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को जिस प्रकार ठण्डे बस्ते में डाला जा रहा है इससे प्रदेशवासियों को अवगत करवाया जायेगा।

सुप्रिया भट्टाचार्य ने देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संस्थाओं की दिशा पर गंभीर चिंता जताई

रांची झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रिया भट्टाचार्य ने हिंदी दिवस के अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी हम सभी का गौरव है और देश की एकता और अस्मिता का प्रतीक है। भट्टाचार्य ने झामुमो कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लोकतंत्र में सबकी समान भागीदारी जरूरी है, लेकिन देश में पिछले 11 वर्षों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संस्थाओं की दिशा चिंताजनक हो गई है। भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर दौरे को लेकर उनकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मणिपुर, जो पिछले दो वर्षों में पूर्वोत्तर का सबसे अशांत राज्य रहा है, वहां की स्थिति बेहद भयावह है। लगभग 960 लोग जातीय संघर्ष में मारे गए, हजारों लोग घायल हुए और 10,000 से अधिक घर जल गए। भट्टाचार्य ने मणिपुर में कुकी और मैतई ट्राइबल समुदायों के बीच हुए एथनिक क्लैश को देश में सबसे बड़ा जातीय हिंसा करार दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि इस हिंसा के पीछे बीजेपी की संप्रदायिक और राजनीतिक नीतियों की भूमिका स्पष्ट है। भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी को दिल्ली से इंफाल तक जाने में 870 दिन का इतना लंबा समय लग गया, जबकि इस बीच उन्होंने 44 देशों की यात्रा करके लगभग 1,70,000 किलोमीटर की दूरी तय कर ली। इस संदर्भ में उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों भारत के प्रधानमंत्री को मणिपुर जैसी संवेदनशील जगह पर इतनी देरी से जाना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर की 30 लाख की आबादी में 50,000 से अधिक लोग डिटेंशन सेंटर में बंद हैं और 10,000 से अधिक घर जल चुके हैं, लेकिन मोदी जी ने वहां जाकर केवल 7,000 पक्के घर बनाने की घोषणा की। उनका कहना था कि यह दौरा चुनावी उद्देश्य से किया गया था क्योंकि मणिपुर में आगामी चुनाव होने वाले थे। भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि मणिपुर की पूर्व मुख्यमंत्री को 2024 में इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन केंद्र की सरकार ने यहां की वास्तविक समस्याओं पर कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में बीजेपी की सरकार‘बांटने की राजनीति'कर रही है, जहां धर्म, जाति और लिंग के आधार पर विभाजन किया जा रहा है। इस राजनीतिक रणनीति से देश का समरसता भंग हो रही है और लोकतंत्र कमजोर पड़ रहा है। भट्टाचार्य ने झारखंड की बात करते हुए कहा कि झारखंड में कई आदिवासी समुदायों पर भी ऐसे दबाव बनाए जा रहे हैं और बार-बार एथनिक क्लैश कराने की कोशिश होती है, लेकिन झारखंड में ऐसा नहीं होने देंगे। वहीं उन्होंने कहा कि झारखंड हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सामुदायिक एकता और न्याय के साथ आगे बढ़ रहा है। भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार से मणिपुर की स्थिति को समझते हुए वहां तुरंत शांति स्थापित करने और वहां के लोगों को संरक्षण देने की मांग की। केवल चुनावी शोज़बाजी से कोई समाधान नहीं होगा, बल्कि स्थायी शांति और विकास के लिए वास्तविक कदम उठाने होंगे ताकि पूर्वोत्तर क्षेत्र में लोकतंत्र मजबूत हो सके।

मौसम में बदलाव: कई जिलों में गहराए बादल, आज रात से भारी बारिश का अलर्ट जारी

लखनऊ मौसम में बदलाव हुआ है। सोमवार की सुबह से धूप की बजाय बादल छाए हुए हैं। इधर कई दिनों से उमस से परेशान लोगों को मौसम से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई मानसून वापसी के बीच आगामी सप्ताह पूर्वी उत्तर प्रदेश में अच्छी वर्षा की संभावना है। सोमवार शाम तक प्रदेश के कई जिलों में बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून रविवार को राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस चला गया है। अगले दो से तीन दिनों के दौरान राजस्थान के कुछ और हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की पश्चिमी राजस्थान से वापसी हो रही है। पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी में निम्न दाब का क्षेत्र बन रहा है। इसके मध्य भारत की ओर बढ़ने के साथ ही मानसून द्रोणी निष्प्रभावी हुई है। परिणामस्वरुप बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के उत्तर प्रदेश के पूर्वी व मध्यवर्ती भाग तक पहुंचने से वर्षा की गतिविधियों में फिर से वृद्धि होगी। रविवार को कानपुर रहा सबसे ज्यादा गर्म मौसम विभाग के अनुसार, तराई, पूर्वांचल और मध्यांचल के जिलों में आगामी सप्ताह के दौरान कहीं मध्यम तो कहीं भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान कई जगहों पर बारिश के दौरान मेघगर्जन के भी आसार हैं। 17-18 सितंबर के दौरान राजधानी लखनऊ में भी मध्यम से तेज वर्षा होने की संभावना है। रविवार को कानपुर सबसे गर्म रहा जहां अधिकतम तापमान 37 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं दूसरे नंबर पर उरई का अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री दर्ज किया गया। सोमवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश की संभावना है, वहीं पूर्व उत्तर प्रदेश में भी कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। दो दिन बाद अच्छी बारिश के आसार  पिछले कई दिनों से उमस ने परेशान कर रखा है। माैसम विभाग ने दो दिन बाद राहत मिलने के संकेत दिए हैं। माैसम विभाग के अनुसार 17 और 18 सितंबर को राजधानी में मध्यम या तेज बारिश हो सकती है। सोमवार की शाम या रात में बूंदाबांदी की भी संभावना बन रही है। आंचलिक मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार को राजधानी के आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। देर शाम से रात तक बादल छिटपुट बारिश कर सकते हैं। इससे तापमान में गिरावट होगी और उमस से थोड़ी राहत मिल सकती है। बुधवार एवं बृहस्पतिवार को अच्छी बारिश होने के आसार हैं। शनिवार के मुकाबले रविवार को तापमान में मामूली वृद्धि दर्ज की गई। ऐेसे में लाेग पूरे दिन उमस भरी गर्मी से परेशान रहे। आसमान में कुछ देर के लिए बादल आए तो, मगर बिना बरसे ही चले गए। रविवार को अधिकतम तापमान 35.9 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 2.5 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री रहा जो सामान्य से 2.7 डिग्री अधिक रहा।  

हरियाणा से बॉलीवुड तक का सफर! दिविता जुनेजा की पहली फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ सिनेमाघरों में रिलीज

अंबाला  हरियाणा के अंबाला की बेटी दिविता जुनेजा ने बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में एंट्री मार ली है। दिविता जुनेजा ने अपनी पहली फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया है, जो हाल ही में देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई है। जूही चावला, मल्लिका शेरावत और परिणीति चोपड़ा जैसी कई मशहूर अभिनेत्रियों के बाद अब हरियाणा की यह बेटी भी बॉलीवुड की चमक-दमक में शामिल हो चुकी है। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा दिविता जुनेजा का जन्म हरियाणा के अंबाला में हुआ था और उन्होंने अपनी शुरुआती परवरिश वहीं की। उनका परिवार आज भी अंबाला से जुड़ा हुआ है, जबकि वे वर्तमान में चंडीगढ़ में रहती हैं। दिविता के पिता संजीव जुनेजा अंबाला के एक प्रतिष्ठित बिजनेसमैन हैं। दिविता ने अपनी स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ के विवेका हाई स्कूल से पूरी की और इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने टैगोर थिएटर में कई नाटकों में भाग लेकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। अभिनय के प्रति लगाव और मुंबई में संघर्ष बचपन से ही दिविता को संगीत, नृत्य और अभिनय का गहरा शौक था। उन्होंने एक्टिंग को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिविता मुंबई पहुंचीं, जहां उन्होंने एक प्रतिष्ठित एक्टिंग स्कूल से अभिनय की बारीकियां सीखीं। मुंबई में रहते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर शॉर्ट फिल्में बनाना शुरू किया, जिससे उनके अभिनय कौशल में निखार आया। बॉलीवुड में पहला मौका – ‘हीर एक्सप्रेस’ दिविता की बुआ, राधिका चीमा के अनुसार, डायरेक्टर उमेश शुक्ला नए चेहरे की तलाश में थे। दिविता की भोली सादगी ने डायरेक्टर को प्रभावित किया और उन्हें ‘हीर एक्सप्रेस’ में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला। दिविता के माता-पिता, तारा और संजीव जुनेजा, तथा भाई दिव्यम ने उनके सपनों को पूरा करने में हमेशा उनका समर्थन किया है। दिविता का सोशल मीडिया संदेश फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ के रिलीज के बाद दिविता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि वे भगवान कृष्ण का आशीर्वाद लेकर वृंदावन में माथा टेककर इस फिल्म की यात्रा शुरू करना चाहती थीं। उन्होंने फिल्म टीम की मेहनत, समर्पण और धैर्य की भी प्रशंसा की। फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ की कहानी और सफलता ‘हीर एक्सप्रेस’ एक फैमिली कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, जो रिश्तों, प्यार और परिवार के महत्व पर आधारित है। फिल्म में दिविता जुनेजा के अलावा प्रीत कामनी, आशुतोष राणा, गुलशन ग्रोवर और संजय मिश्रा जैसे अनुभवी कलाकार भी हैं। फिल्म की कहानी एक पंजाबी लड़की ‘हीर’ की है, जो लंदन में एक भारतीय रेस्तरां चलाती है। उसकी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, जो उसे परिवार के साथ जुड़ाव की अहमियत समझाते हैं। फिल्म की शूटिंग भारत से लेकर लंदन तक हुई है, जिसमें इमोशन, रोमांच और रिश्तों की गर्माहट का बेहतरीन मेल है। गृहनगर में उत्साह और प्रतिक्रिया अंबाला में फिल्म का पहला शो हाउसफुल रहा, जिसमें दिविता खुद मौजूद थीं और उन्होंने दर्शकों से सीधे उनके रिव्यू लिए। यह उनके गृहनगर के प्रति उनकी आत्मीयता और सम्मान को दर्शाता है।

रोड और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही योगी सरकार

विकसित यूपी @2047: यूपी का नया अवतार : जमीन पर रफ्तार, आकाश में विस्तार  रोड और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही योगी सरकार  2017 से पहले धीमी प्रगति, योगी सरकार ने दी रफ्तार – राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क दोगुना से ज्यादा बढ़ा – सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे के साथ यूपी बनेगा लॉजिस्टिक हब – 2047 तक हर मंडल को एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट देने का मुख्यमंत्री का संकल्प  – पीएमजीएसवाई से गांव-गांव तक पहुंची सड़क – जेवर एयरपोर्ट बनेगा एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 'विकसित यूपी @2047' के विजन की ओर बढ़ते हुए परिवहन और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव का साक्षी बन रहा है। पिछले साढ़े आठ वर्षों में जिस तेजी से सड़क, एक्सप्रेसवे और एविएशन सेक्टर में प्रगति हुई है, उसने न केवल प्रदेश की रफ्तार बढ़ाई है बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और विकास का नया केंद्र बना दिया है। 2017 से पहले की स्थिति : धीमी प्रगति, सीमित संसाधन वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क और एविएशन अवसंरचना विकास की रफ्तार बेहद धीमी थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सड़क लंबाई 2013-14 में 51,549 किलोमीटर से बढ़कर 2016-17 में मात्र 56,846 किलोमीटर हो सकी। हवाई कनेक्टिविटी भी सीमित थी और 17 वर्षों (1999 से 2016 तक) में विमान यात्रियों की संख्या में केवल 55 लाख की वृद्धि हुई थी। प्रदेश में उस समय मात्र तीन एक्सप्रेसवे और गिने-चुने हवाई अड्डे संचालित थे। साढ़े आठ साल में बड़ा बदलाव : जमीन से आकाश तक नई उड़ान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 2017 के बाद सड़क, हवाई और जल परिवहन में समन्वित दृष्टिकोण के साथ ठोस कदम उठाए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क लंबाई 2024-25 तक 77,425 किलोमीटर तक पहुंच गई। वहीं, एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे आगे निकलते हुए 22 एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने के महाअभियान में जुटी हुई है। एविएशन सेक्टर में भी यूपी ने छलांग लगाई और 12 घरेलू तथा 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हो चुके। एक्सप्रेसवे प्रदेश बना उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश अब 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' के रूप में जाना जा रहा है। 1949-50 में जहां कोई एक्सप्रेसवे नहीं था, वहीं 2016-17 तक यह संख्या केवल 3 तक पहुंच सकी थी। लेकिन 2025-26 तक यह बढ़कर 22 हो गई है, इसमें संचालित और निर्माणाधीन दोनों शामिल हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट न केवल आंतरिक कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं, बल्कि लॉजिस्टिक हब के रूप में यूपी की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। प्रमुख निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और व्यापक बनाने के लिए कई नए प्रोजेक्ट शुरू हो गये हैं। इनमें गंगा एक्सप्रेसवे के साथ ही चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे (मुजफ्फरनगर के रास्ते) और चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश का सड़क नेटवर्क न केवल और मजबूत होगा बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार 2004-05 में उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 5,599 किलोमीटर था, जो 2023-24 तक बढ़कर 12,292 किलोमीटर हो गया। इस दोगुनी से अधिक वृद्धि ने राज्य के भीतर व्यापार, माल ढुलाई और औद्योगिक विकास को नई गति दी है। इससे न केवल रसद लागत कम हुई है, बल्कि यूपी उत्तर भारत में एक रणनीतिक ट्रांजिट हब बन गया है। हवाई कनेक्टिविटी में आई क्रांति 1950 में जहां प्रदेश में एक भी हवाई अड्डा नहीं था, वहीं 2025 तक इनकी संख्या 16 (पांच निर्माणाधीन सहित) हो चुकी है। इसमें 12 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शामिल हैं। विशेष रूप से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले समय में एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होगा और कार्गो तथा ट्रांजिट हब के रूप में उत्तर प्रदेश को नई पहचान देगा। विमान यात्रियों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि 2017 से पहले 17 वर्षों में हवाई यात्रियों की संख्या में 55 लाख की वृद्धि हुई थी, जबकि पिछले आठ वर्षों में यह वृद्धि 82 लाख तक पहुंच गई। 2025 में विमान यात्रियों की संख्या 1.42 करोड़ तक अनुमानित है। इस तेजी ने यूपी को विमानन क्षेत्र में नई उड़ान दी है। भविष्य की राह 2030 तक : कनेक्टिविटी का महाजाल प्रदेश में पूरब से पश्चिम की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव के बाद अब योगी सरकार 2030 तक उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी का विशाल नेटवर्क खड़ा करने की दिशा में काम कर रही है। सभी जिला मुख्यालयों को एक्सप्रेसवे से जोड़ने, नेपाल सीमा पर बहुउद्देशीय ट्रांजिट हब विकसित करने और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय रोपवे निर्माण की योजना है। विजन 2047 : एक मंडल-एक एयरपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रमुख विजन है कि 2047 तक उत्तर प्रदेश में हर मंडल का अपना एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट हो। सभी 75 जिलों को एक्सप्रेसवे और एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही ग्रीन स्मार्ट हाईवे, एयर कार्गो हब, हेलिपोर्ट और आधुनिक एविएशन इकोसिस्टम से उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल कनेक्टिविटी सेंटर के रूप में स्थापित करने की योजना है।      

क्या बिहार में गेमचेंजर साबित होंगे MP के CM मोहन यादव? जानिए BJP का सियासी दांव

भोपाल  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सियासी जंग जारी है. इसी कड़ी में बीजेपी ने नई रणनीति अपनाते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बिहार में उतारा है. जानकारों का मानना है कि इस कदम का मुख्य लक्ष्य यादव वोट बैंक पर सीधी पकड़ बनाना, लालू यादव की विरासत को चुनौती देना और एनडीए की पकड़ मजबूत करना है.  14 सितंबर को मोहन यादव पटना पहुंचे और यादव महासभा के बड़े आयोजन में शामिल हुए, जहां कई बड़े नेता भी मौजूद रहे. यह कदम BJP के “एमवाई समीकरण” (मुस्लिम-यादव) को तोड़ने और यादव समुदाय को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. यादव समाज को साधने की कोशिश! डॉ. मोहन यादव के पटना दौरे के दौरान BJP ने यादव समाज को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रम किया. इस आयोजन में ओबीसी आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हंसराज अहीर, बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, छत्तीसगढ़ के मंत्री गजेंद्र यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव और विधायक संजीव चौरेसिया जैसे नेताओं ने मंच साझा किया. एनडीटीवी के रिपोर्ट के अनुसार, इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भगवान कृष्ण पर केंद्रित प्रस्तुतियां हुईं, जिससे राजनीतिक संदेश भी दिया गया. बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर जोर अपने संबोधन में मोहन यादव ने बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बीजेपी के चुनावी एजेंडे से जोड़ा. उन्होंने सम्राट अशोक, पाटलिपुत्र, अवंतिका (उज्जैन) और भोजपुर भाषा के साझा रिश्ते का जिक्र कर बिहार- मध्यप्रदेश की कड़ी बताई. उन्होंने कहा कि बिहार भगवान कृष्ण से जुड़ा राज्य है और यहां भगवान कृष्ण के पुत्र ने सूर्य मंदिर बनवाया था. साथ ही उन्होंने बुद्ध, जैन धर्म के तीर्थंकरों और चाणक्य-नालंदा-तक्षशिला की परंपरा का हवाला दिया. यह बयान स्पष्ट रूप से यादव समुदाय और बिहार की धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना से जुड़ाव दिखाने के लिए था. एमवाई वोट बैंक पर बीजेपी की नजर! भाजपा का यह कदम सीधे तौर पर यादव वोट बैंक को साधने के लिए है, जो अब तक लालू यादव के आरजेडी के प्रभाव में माना जाता रहा है. डॉ. मोहन यादव ने राम मंदिर के मुद्दे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता और खुद को “साधारण कार्यकर्ता” बताकर यादव परिवार की वंशवादी राजनीति पर हमला किया. इससे पहले भी उन्होंने निसादराज सम्मेलन कर मछुआरा समुदाय को जोड़ने की कोशिश की थी, जो बिहार की करीब 45 सीटों पर असर डालता है.

संघर्ष, उम्मीद और न्यायपालिका पर भरोसा—हर मुक़दमे की अपनी कहानी: CJI रमेश सिन्हा

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन प्रेरणा हॉल, कलेक्टरेट भवन, जगदलपुर में किया गया। इस सेमिनार में बस्तर संभाग के चार जिलों जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव के 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी ने वर्चुअल माध्यम से सत्र का उद्घाटन किया। सेमिनार में श्री अमितेंद्र किशोर प्रसाद, न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, पोर्टफोलियो न्यायाधीश, जिला कांकेर की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश ने बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में न्यायपालिका से अपेक्षाएँ बहुत अधिक हैं। लोग हमसे अत्यधिक आशा रखते हैं। यह सेमिनार केवल सीखने का मंच ही नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और विधि के शासन के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि भी है। मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक शिक्षा एक बार की प्रक्रिया नहीं है; बल्कि यह सतत प्रक्रिया है। आज के दौर में जहाँ कानून तेजी से विकसित हो रहे हैं और समाज नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहाँ न्याय के संरक्षक होने के नाते हमें निरंतर अपने ज्ञान को समृद्ध करना और अपनी न्यायिक क्षमता को धार देना अनिवार्य है। सतत प्रशिक्षण सुनिश्चित करता है कि हम अपने संवैधानिक दायित्वों को दक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभा सकें। मुख्य न्यायाधीश ने आगे यह भी कहा कि बस्तर क्षेत्र अपने विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ न्यायपालिका के लिए चुनौतियाँ और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। हमारा दायित्व है कि न्याय समाज के हर कोने तक पहुँचे, विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों तक। यहाँ के न्यायिक अधिकारियों की भूमिका जनता के विश्वास को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है कि न्याय न केवल किया जाए, बल्कि होता हुआ भी दिखाई दे। मुख्य न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति, धैर्य और निष्पक्षता के साथ न्यायिक कार्य करें। याद रखें, प्रत्येक मामले के पीछे एक मानवीय कहानी होती है संघर्ष, आशा और न्यायपालिका में विश्वास की। हमें सदैव यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि न्याय समय पर, पारदर्शी और तर्कपूर्ण तरीके से दिया जाए। अंत में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार समकालीन विधिक मुद्दों पर विचार-विमर्श, अनुभवों के आदान-प्रदान और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने का मूल्यवान अवसर प्रदान करते हैं। इस सेमिनार में हुई चर्चाएँ न्यायिक अधिकारियों की दक्षता को बढ़ाएँगी और उन्हें न्यायिक कार्य की जटिलताओं को और अधिक कुशलता से संभालने योग्य बनाएँगी। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर एवं दंतेवाड़ा के जिलों के न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा दिया गया, परिचयात्मक उद्बोधन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा किया गया। सेमिनार में बस्तर संभाग के कुल 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामलों की कार्यवाही का अवलोकन तथा इनके निपटारे हेतु नवीन उपकरण और तकनीकें, मध्यस्थता में रेफरल जज की भूमिका, डिक्री का क्रियान्वयन गिरफ्तारी एवं सिविल कारागृह में निरुद्धि तथा संपत्ति की कुर्की द्वारा समयबद्ध और प्रभावी प्रवर्तन हेतु रणनीतियाँ, सलाखों के पीछे या स्वतंत्र रिमांड और जमानत के प्रावधानों का गहन विश्लेषण, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के नवीनतम निर्णयों के विशेष संदर्भ के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिए गए।

MP में कांग्रेस का जनाधार परीक्षण, जानचे जाएंगे विधायकों और नेताओं के रिपोर्ट कार्ड

 भोपाल  विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार से सबक लेते हुए कांग्रेस पहली बार मध्य प्रदेश में अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की लोकप्रियता का आकलन कराएगी। इसकी शुरुआत नगरीय निकायों से होगी और दूसरे चरण में विधायकों की लोकप्रियता का आकलन करवाया जाएगा। पहले चरण में नगरीय निकायों को इसलिए लिया गया है क्योंकि इसके चुनाव सबसे पहले वर्ष 2027 में प्रस्तावित हैं। इनके परिणाम के बाद प्रदेश में चुनावी वातावरण बनने लगेगा। पार्टी ने तय किया है कि कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनप्रतिनिधियों का मतदाताओं से संपर्क, संवाद और कामकाज के आधार पर पता लगाया जाएगा कि क्षेत्र में उनकी छवि कैसी है। यह भी आकलन किया जाएगा कि यदि वे लोकप्रिय या अलोकप्रिय हैं तो इसकी वजह क्या है। इसके आधार पर कांग्रेस संगठन निकायवार जनप्रतिनिधियों को बुलाएगा और उन्हें आगामी तैयारी के लिए सचेत करने के साथ मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। कांग्रेस के पांच महापौर जीतकर आए थे प्रदेश में नगरीय निकायों के चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। पहली बार कांग्रेस के पांच महापौर (छिंदवाड़ा, ग्वालियर, मुरैना, रीवा और जबलपुर) जीतकर आए थे। हालांकि, नगर पालिका और नगर परिषद में अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने के कारण अधिकतर स्थानों पर भाजपा के अध्यक्ष चुने गए। पार्टी की उम्मीद थी कि इन परिणामों का लाभ विधानसभा चुनाव में मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल 66 सीटों पर सिमटकर रह गई। लोकसभा चुनाव में तो पार्टी का खाता भी नहीं खुला। अब फिर 2027 से नगरीय निकायों के साथ चुनावों का क्रम प्रारंभ होना है। इसे देखते हुए पार्टी ने तय किया है कि वह अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की स्थिति का आकलन कराएगी। यही आगामी चुनाव में टिकट का आधार भी बनेगा। कार्यकर्ताओं के फीडबैक पर तैयार होगी रिपोर्ट प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि पहले चरण में नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों की जनता के बीच छवि, उनके कामकाज, मतदाताओं से संपर्क और संवाद, पार्टी की गतिविधियों में भागीदारी के आधार पर आकलन किया जाएगा। इसके लिए फीडबैक स्थानीय कार्यकर्ताओं से लिया जाएगा। इसके आधार पर बनी रिपोर्ट को सामने रखकर जनप्रतिनिधियों से बात होगी। ठीक इसी तरह विधायकों के कामकाज का आकलन होगा। जो प्रत्याशी चुनाव हार गए थे, उनसे भी फीडबैक लिया जाएगा। इसमें वर्तमान स्थिति के साथ-साथ सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर फोकस रहेगा।