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नए सर्किल रेट से यूपी के इस जिले में जमीनें होंगी महंगी, जानें कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें

बदायूं जमीन खरीदने और बेचने वाले सावधान हो जाएं। अगले सप्ताह से नए सर्किल रेट लागू हो रहे हैं। उसके अनुसार जिले की जमीन 15 प्रतिशत महंगी हो जाएगी। कुछ इलाकों में 18 प्रतिशत तक जमीनों के रेट बढ़ाए गए हैं। इससे उन जमीन मालिकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो नए सर्किल रेट के अनुसार अपनी जमीन बेचना चाह रहे हैं और जो लोग खरीदने के विचार में है, उन्हें 15 प्रतिशत ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। जिला प्रशासन की ओर से पिछले छह माह से जिले की जमीनों का सर्वे चल रहा था। उसके अनुसार जून में नए सर्किल रेट लागू होने थे लेकिन इससे पहले जिन किसानों या जमीन मालिकों की जमीन अधिग्रहण हो चुकी थी। उनका भुगतान भी पूरा नहीं हो पाया था। उनकी जमीनें पुराने सर्किल रेट के अनुसार अधिग्रहण की गईं थीं और उसी के हिसाब से उनका भुगतान हो रहा था। भुगतान न होने की वजह से जिले में नए सर्किल रेट लागू नहीं हो सके थे लेकिन अब उप निबंधक कार्यालय और जिला प्रशासन ने नए सर्किल रेट लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह से जिले में नए सर्किल रेट लागू कर दिए जाएंगे। जिले भर की जमीनों के 15 से 18 प्रतिशत तक मूल्य बढ़ाए गए हैं। अधिकतर जमीनों के 15 प्रतिशत तक ही मूल्य बढ़े हैं जबकि जहां सबसे ज्यादा महंगी जमीन है, वहां पर 18 प्रतिशत तक मूल्य बढ़ा दिए गए हैं। इसका फायदा उन जमीन मालिकों को सबसे ज्यादा होगा, जो किसी कारण बस अपनी जमीन बेचना चाह रहे हैं। अब उन्हें नए सर्किल रेट के हिसाब से जमीन का पैसा मिलेगा लेकिन अब उन लोगों के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी जो लोग जमीन खरीदने का विचार बना रहे हैं। उन्हें अब नए सर्किल रेट के अनुसार जमीनों का भुगतान करना पड़ेगा। शहर के आसपास इलाके के लोगों को सबसे ज्यादा होगा लाभ इस समय शहर के आसपास इलाके में ही सबसे ज्यादा जमीन की खरीद फरोक्त हो रही है। शहर के तमाम व्यापारी बाईपास पर जाकर जमीनें तलाश रहे हैं, जिससे उनका कोई ठिकाना बन सके। इसके अलावा मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे, आंवला, बरेली, उझानी, उसहैत, अलापुर मार्गों पर जमीनें तलाशी जा रही हैं। नए सर्किल रेट के लागू होने से इन इलाकों में जमीनें महंगी हो जाएंगी। या फिर जिन इलाकों में सबसे ज्यादा प्लाटिंग चल रही है। वहां के लोगों को लाभ होगा। उन्हें नए सर्किट रेट के अनुसार ही भुगतान प्राप्त होगा।  

हेमा मालिनी के नेतृत्व में NDA की टीम करेगी करूर दौरा, जानें पूरा मिशन

नई दिल्ली तमिलनाडु के करूर में TVK की रैली के दौरान हुई भगदड़ में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक हादसे के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने एक 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। यह टीम हादसे की वजहों की जांच करेगी और पीड़ित परिवारों से भी मिलेगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस समिति का गठन किया है। इस टीम में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, तेजस्वी सूर्या, बृजलाल, अपराजिता सरंगी, रेखा शर्मा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और TDP के के. पुट्टा महेश कुमार शामिल हैं। इस समिति की संयोजक भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी होंगी।   कहां-कहां जाएगी NDA की टीम? भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। बयान के अनुसार, यह टीम घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का आकलन करेगी और एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। इससे पहले केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन और तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन के साथ पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी। सीतारमण ने करूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भी दौरा किया और घायलों का हालचाल जाना। स्टालिन का संदेश तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस घटना को बहुत बड़ी त्रासदी बताया। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत जिला प्रशासन को सक्रिय कर सभी जरूरी कदम उठाने के आदेश दिए। स्टालिन ने अपने वीडियो संदेश में कहा, करूर में जो हुआ वह एक क्रूर त्रासदी है। यह ऐसा हादसा है जो पहले कभी नहीं हुआ और भविष्य में भी कभी नहीं होना चाहिए। मैंने अस्पातल जाकर जो दृश्य देखे वे अब भी मेरी आंखों के समने ताजा हैं।  

फटाफट परिणाम! बुरी नजर हटाने के लिए 3 वास्तु शास्त्र के टिप्स

घर परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति होता है। जब घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है, तभी जीवन में सफलता और संतोष मिलता है। लेकिन क्या होगा अगर बार-बार घर पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो, और बुरी नजर का साया आपके परिवार और संपत्ति पर पड़ता रहे ? ऐसे समय में वास्तु शास्त्र के सरल लेकिन प्रभावी उपाय आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र हमारे घर की ऊर्जा और वातावरण को संतुलित करने की एक प्राचीन विद्या है। जब घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, तो बुरी नजर का असर कम हो जाता है। वास्तु के अनुसार, घर के कुछ खास स्थान और चीजें ऐसी होती हैं जो बुरी नजर को रोकने और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर भगाने में मदद करती हैं। मुख्य द्वार पर तुलसी का पौधा लगाएं तुलसी का पौधा हमारे घर के लिए सबसे शुभ माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार भी घर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है। तुलसी के पौधे में एक सकारात्मक ऊर्जा होती है जो बुरी नजर को रोकती है और घर में खुशहाली लाती है। मुख्य द्वार के समीप तुलसी का पौधा लगाएं। रोज सुबह तुलसी की पूजा करें और उसकी नियमित देखभाल करें। तुलसी की पत्तियां घर के मंदिर में भी रख सकते हैं। इससे घर में शांति, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। घर के कोनों में नींबू-मिर्च का टोटका यह एक बेहद लोकप्रिय और प्राचीन वास्तु उपाय है। नींबू और मिर्ची का टोटका नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने और बुरी नजर को टालने में कारगर होता है। यह टोटका घर में दरवाजे या खिड़कियों के पास लगाया जाता है ताकि किसी भी नकारात्मक नजर का प्रवेश रोका जा सके। नींबू के साथ हरी मिर्च को लटकाएं। इसे मुख्य द्वार के बाहर या घर के ऐसे स्थान पर लगाएं जहां से बाहर की नजर आती हो। कुछ लोगों का मानना है कि नींबू मिर्च का टोटका हर 15-20 दिन में बदलना चाहिए ताकि उसकी ऊर्जा बनी रहे। घर में गणेश जी और नारियल का पूजन गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभता का देवता माना जाता है। वास्तु में गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर घर के मुख्य द्वार के पास स्थापित करने से बुरी नजर से बचाव होता है। साथ ही, घर में नियमित नारियल का पूजन भी नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है। घर के पूजा स्थल पर गणेश जी की मूर्ति रखें। व्रत या शुभ कार्य के दिन नारियल का पूजन करें और गणेश मंत्र का जप करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त होता है।

कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण: IIT मद्रास ने लॉन्च किया जीनोम और टिशू बैंक

नई दिल्ली  कैंसर अभी भी दुनिया भर में एक जानलेवा बीमारी है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है. बढ़ते मामलों के चलते वैसा इलाज चाहिए जो हर व्यक्ति के जीन और टिशू के अनुकूल हो. इस ज़रूरत को देखते हुए आईआईटी मद्रास ने एक नई पहल की है, एक कैंसर जीनोम और टिशू बैंक बनाकर, जो भारत में पर्सनलाइज्ड (व्यक्ति-विशेष) कैंसर उपचार को एक नई राह दे सकती है. सवाल आता हो कि कैसे करेगा काम ये बैंक? तो इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है देश भर के कैंसर रोगियों से लगभग 7,000 ट्यूमर सैंपल्स इकट्ठे करना और उन्हें लैब में बढ़ाना. इन नमूनों पर अलग-अलग थेरेपी ट्राय की जाएगी, ताकि यह देखा जाए कि किस थेरेपी का कौन से रोगी पर सबसे असर है. इस तरह, डॉक्टर अनुमान लगाने की बजाय पहले यह जान सकेंगे कि किस इलाज से बेहतर परिणाम मिलेंगे. आईआईटी मद्रास की खोज आईआईटी मद्रास की टीम ने पहले ही एक दिलचस्प खोज की है. आपको बता दें कि एक स्तन कैंसर में ऐसा म्यूटेशन पाया है जो भारत में ज्यादा आम है, जबकि पश्चिमी देशों में नहीं. इससे यह पता चलता है कि सिर्फ विदेशी जीनोमिक डेटा पर भरोसा करना सही नहीं है, बल्कि भारत-विशिष्ट अध्ययन ज़रूरी हैं. भारत में नयापन और असर यह कैंसर जीनोम-टिशू बैंक भारत के एटलस (Bharat Cancer Genome Atlas) से जुड़ा है. इस डेटाबेस में भारत के कई कैंसर मामलों का जीनोमिक डेटा शामिल किया जाएगा. यह इंफॉर्मेशन डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को मदद करेगी कि कौन सी दवाएं और इलाज कैसे काम करें. इस पहल का एक बड़ा मकसद है प्रिसिजन मेडिसिन लाना यानी ऐसा इलाज जो हर रोगी की जीन और बॉडी प्रोफ़ाइल को ध्यान में रखते हुए तय किया जाए. इससे इलाज अधिक असरदार होगा, साइड इफेक्ट कम होंगे और मरीज को बेहतर जीवन मिलेगा. क्यों जरूरी होते हैं कैंसर जीनोम और टिशू बैंक कैंसर जीनोम और टिशू बैंक जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि हर इंसान के डीएनए अलग होते हैं. कैंसर भी अलग अलग लोगों में अलग तरीकों से बढ़ता है. अभी तक ज्यादातर इलाज विदेशी रिसर्च और डेटा पर होते हैं, जबकि भारतीयों के जीन और टिश्यूज में अंतर पाया जाता है. अगर भारतीयों के पास अपना डेटा और टिश्यू बैंक होगा तो डॉक्टर और वैज्ञानिकों को समझने में आसानी होगी कि किस तरह का कैंसर ज्यादा होता है और कौन सी दवा या थेरेपी बेहतर असर करेगी. दूसरा कारण है कि कैंसर के इलाज में समय और सटीकता बहुत मायने रखती है. अगर डॉक्टरों के पास पहले से जानकारी होती कि किस मरीज को कौन सी दवा कितनी असरदार होती, तो इलाज में देरी नहीं होगी और सही दवा और थेरेपी भी दी जा सकेगी.  

हरियाणा का यह जिला मनाएगा धूमधाम से दशहरा, देखें 70 फीट रावण और विशाल मूंछें

सिरसा  इस बार सिरसा में दशहरे का पर्व कुछ खास और अनोखा होने जा रहा है। यहां एक बेहद आकर्षक और अलग तरह का रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत हैं उसकी जलेबी जैसी लंबी, घुमावदार मूंछें। करीब 40 फीट लंबी इन मूंछों के साथ 70 फीट ऊंचा यह रावण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस अनोखे पुतले के पीछे हैं दिल्ली के मशहूर कारीगर बाबा भगत, जो पिछले 40 वर्षों से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बनाने की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। चार दशकों से रामायण की कहानी को जीवित रख रहे हैं बाबा भगत बाबा भगत का कहना है कि वे अब तक दिल्ली और सिरसा में मिलाकर हजारों पुतले बना चुके हैं। सिर्फ सिरसा में ही पिछले 20 वर्षों में उन्होंने लगभग 4000 छोटे रावण के पुतले तैयार किए हैं, जिन्हें बच्चे खास पसंद करते हैं। बच्चे इन पुतलों को मोहल्लों और गलियों में जलाकर अपने तरीके से दशहरा मनाते हैं। वहीं, बड़े पुतलों की बात करें तो बाबा भगत अब तक 500 से अधिक विशालकाय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बना चुके हैं। हर साल वे करीब 100 छोटे रावण के पुतले तैयार करते हैं, जिनकी मांग पूरे साल बनी रहती है—केवल दशहरे के लिए नहीं, बल्कि सजावट और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए भी। इस बार 70 फीट का भव्य रावण, होगी 40 फीट की जलेबी मूंछ  इस बार सिरसा में जो रावण का पुतला तैयार हो रहा है, वह करीब 70 फीट ऊंचा होगा और इसकी सबसे अनोखी बात होगी इसकी 40 फीट लंबी जलेबी जैसी मूंछें, जो इसे बाकी रावणों से बिल्कुल अलग और खास बना रही हैं। इसके अलावा, कुंभकर्ण और मेघनाथ के भी विशाल पुतले तैयार किए जा रहे हैं, जो इस आयोजन को और भी भव्य बना देंगे। कला नहीं, एक संस्कार है यह काम – बाबा भगत बाबा भगत का कहना है कि वे इस कला को केवल रोजगार या पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक सेवा के रूप में करते हैं। उनका उद्देश्य है कि नई पीढ़ी रामायण और रावण की कहानी से जुड़े, केवल पुतले जलाकर उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे अर्थ और संस्कृति को भी समझे। हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि मौजूदा समय में महंगाई ने इस परंपरा को बनाए रखना कठिन बना दिया है। कागज, बांस, रंग और अन्य सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका और उनके परिवार का जुनून कम नहीं हुआ। परिवार ही टीम है – मिलकर बनाते हैं इतिहास बाबा भगत के परिवार के करीब 20 सदस्य इस परंपरा में उनके साथ काम कर रहे हैं। कोई ढांचा तैयार करता है, कोई कागज चिपकाता है, तो कोई रंग भरने का काम करता है। महीनों की मेहनत के बाद ये भव्य पुतले आकार लेते हैं। इस बार सिरसा का दशहरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक दृश्यात्मक अनुभव होगा। जलेबी मूंछों वाला 70 फीट ऊंचा रावण, उसके साथ विराट कुंभकर्ण और मेघनाथ, दर्शकों को अद्भुत दृश्य और जीवन भर की यादें देंगे। रावण बुरा था या नहीं, बहस का विषय हो सकता है… बाबा भगत का मानना है कि “रावण बुरा था या नहीं, यह बहस का विषय हो सकता है, लेकिन उसकी कहानी अच्छाई और बुराई के बीच फर्क करना सिखाती है। यही संदेश हम अपने पुतलों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं।  

रावण दहन समारोह: HEC धुर्वा में होगी भव्य उत्सव, सीएम हेमंत समेत कई दिग्गज शामिल

रांची झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं विजयादशमी रावण दहन समिति के मुख्य संरक्षक आलोक कुमार दुबे ने बताया कि इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार 2 अक्टूबर को शालीमार बाजार, एचईसी धुर्वा में भव्य विजयादशमी रावण दहन समारोह आयोजित होगा। यह समारोह 1968 से निरंतर चल रहा है और झारखंड एवं रांची का सबसे पुराना रावण दहन मंच है, जिसमें हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस महत्वपूर्ण आयोजन में रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर असत्य, अहंकार एवं अन्याय पर सत्य और धर्म की विजय का संदेश दिया जाता है। दूबे ने बताया कि यह आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रावण दहन समारोह में आयोजित आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन की भव्यता को और बढ़ा देते हैं। समिति के अध्यक्ष संजीत यादव और पदाधिकारियों ने झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से मुलाकात कर उन्हें रावण दहन समारोह में आमंत्रित किया। दोनों मंत्रियों ने कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री दीपिका पांडे सिंह और लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव सहित कई विशिष्ट अतिथियों को भी समारोह में आमंत्रित किया जा रहा है। दूबे ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन सुविधाओं को पूर्ण रूप से सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने बताया कि हालांकि बारिश का मौसम आयोजकों के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन प्रशासन और समिति के संयुक्त प्रयास से इस बार का रावण दहन समारोह और भी भव्य रूप से आयोजित होगा। सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की ओर से 28 सितंबर को डोरंडा छप्पन सेट में मां दुर्गा का पट खोलने का पावन कार्य और पूजा पंडाल का उद्घाटन भी किया जाएगा। यह आयोजन भी श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में भाग लेने के लिए आमंत्रित करता है। दूबे ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे परिवार सहित इस पवित्र अवसर पर शामिल होकर विजयादशमी के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है और इससे समाज में एकता और सछ्वावना बढ़ती है।  

मुख्यमंत्री यादव का संदेश: नवरात्रि से बढ़ाएं सामाजिक समरसता

नवरात्रि पर्व मिलकर आराधना करने और सद्भाव बढ़ाने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री भोपाल के भेल क्षेत्र में भोजपाल गरबा महोत्सव में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नवरात्रि पर्व हमें एक साथ मिलकर आराधना करने, मेलजोल और सद्भाव बढ़ाने का माध्यम बनता है। यह पावन पर्व शक्ति-आराधना का पर्व है। यह अवसर इतिहास के गौरवशाली अध्याय का स्मरण करवाता है। नवरात्रि पर्व में मां जगदम्बा, भगवान कृष्ण के स्वरूप और देवी-देवताओं के रूप में हमारे कलाकार उत्साह और श्रद्धा का परिचय देते हैं। ऐसी अनुभूति होती है कि माँ भवानी साक्षात हमारे बीच आ गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि दशहरा पर्व भगवान राम की असुरों पर विजय के साथ माँ जगदम्बा द्वारा महिषासुर का वध करने के उल्लास का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार की रात्रि भोपाल के भेल क्षेत्र में भोजपाल गरबा महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। वर्ष 2014 के बाद बदल गया है भारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व में अलग पहचान बनाई है। जहां तक शौर्य की बात है अब कोई भी शत्रु भारत में आतंकवादी गतिविधि घटित करने की हिम्मत नहीं कर सकता। भारत, शत्रु को पाताल तक जाकर भी तलाश कर सकता है और शत्रु के घर में घुसकर उसे सबक सिखाने की क्षमता रखता है। ऑपरेशन सिंदूर इस बात का उदाहरण है कि भारत दुश्मन के किसी मंसूबे को सफल नहीं होने देगा। वर्ष 2014 के पहले का भारत बदल चुका है, अब कोई शत्रु भारत से बच नहीं सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में भारत के समस्त देव स्थानों पर आनंद की वर्षा हो रही है। भारत में शौर्य प्रदर्शन और विकास के साथ कई क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। खेल क्षेत्र में की बात करें तो गत रविवार को हुए 20-20 एशिया कप मैच में भारत की विजय सभी भारतीयों का गर्व बढ़ाने का कारण बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोजपाल गरबा महोत्सव का यह दूसरा वर्ष है। यहां नागरिकों और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पदाधिकारी और गरबा महोत्सव के संयोजक  सुनील यादव के साथ अन्य पदाधिकारियों को गरबा महोत्सव को अभिनव स्वरूप देने की बधाई दी और सराहना की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निर्वहन के लिए अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में संयोजक  सुनील यादव,  रविंद्र यति,  विकास विरानी,  अमन यादव और अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। गरबा महोत्सव के आखिरी दिन विशाल जनसमूह और कलाकार दल ने गरबा की आकर्षक प्रस्तुति दी।  

ई-व्हीकल यूज़र्स के लिए खुशखबरी! सरकार लगाएगी 72 हजार चार्जिंग स्टेशन, PM E-Drive को मिला बूस्ट

नई दिल्ली इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले हर किसी के जेहन सबसे बड़ा सवाल चार्जिंग इंफ्रा को लेकर ही उठता है. ड्राइविंग रेंज की चिंता को तो कार कंपनियों ने काफी हद तक बड़े बैटरी पैक से दूर करने की कोशिश की है. लेकिन अब भी लोग ये सोचते हैं कि, “इलेक्ट्रिक कार ले तो लें… लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का क्या?”. इलेक्ट्रिक कारों की कीमत के बाद दूसरी सबसे बड़ी टेंशन यही है, जिसने भारत में EV क्रांति की रफ्तार धीमी कर दी है. अब सरकार इस सबसे बड़े रोड़े को हटाने की तैयारी में है.  भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (PM E-Drive) योजना के तहत पब्लिक ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की है. यह गाइडलाइंस न सिर्फ उद्योग जगत बल्कि आम उपभोक्ता के लिए भी अहम साबित होंगी, क्योंकि अब भारत में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या और पहुंच दोनों में बड़ा विस्तार देखने को मिलेगा. इसमें साफ कहा गया है कि पब्लिक चार्जिंग स्टेशन बनाने वालों को तगड़ी सब्सिडी मिलेगी. कहीं 70%, कहीं 80%, और सरकारी इमारतों में लगे फ्री चार्जर पर तो पूरी 100% सब्सिडी दी जाएगी. सरकार की 10,000 करोड़ रुपये की PM E-Drive योजना में से 2,000 करोड़ रुपये चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे. इसका लक्ष्य है 72,300 नए पब्लिक चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना. योजना का जोर खासतौर पर मेट्रो शहरों, स्मार्ट सिटीज़, राज्य की राजधानियों और नेशनल व स्टेट हाईवे जैसे हाई-डेन्सिटी इलाकों पर होगा. गाइडलाइंस के मुताबिक-      सरकारी इमारतों (जैसे दफ्तर, अस्पताल, स्कूल, रेज़िडेंशियल कॉम्प्लेक्स) में यदि पब्लिक के लिए मुफ्त चार्जिंग की सुविधा दी जाएगी, तो 100% सब्सिडी मिलेगी.     PSU आउटलेट्स, एयरपोर्ट, मेट्रो/बस स्टेशन, बंदरगाह और NHAI टोल प्लाज़ा पर बने चार्जिंग स्टेशनों को 80% तक इंफ्रास्ट्रक्चर और 70% तक EVSE सब्सिडी दी जाएगी.     मॉल, मार्केट और सड़कों पर बने स्टेशन को 80% सब्सिडी सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिलेगी।     बैटरी स्वैपिंग और बैटरी चार्जिंग स्टेशन भी 80% सब्सिडी के दायरे में आएंगे. सब्सिडी की गणना ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा तय बेंचमार्क कॉस्ट या वास्तविक लागत (जो भी कम हो) के आधार पर होगी. उदाहरण के लिए, 50 kW तक के चार्जर पर 6.04 लाख रुपये और 150 kW से अधिक पर 24 लाख रुपये की लागत तय है. वहीं, एक 50 kW CCS-II चार्जर की बेंचमार्क कॉस्ट 7.25 लाख रुपये और 100 kW CCS-II चार्जर की 11.68 लाख रुपये तय की गई है. योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि चार्जिंग स्टेशनों को नेशनल यूनिफाइड EV चार्जिंग हब से जोड़ा जाएगा. इससे यूज़र्स को रियल-टाइम में चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन, उपलब्धता और पेमेंट ऑप्शन मिलेंगे. भारत में फिलहाल करीब 30,000 पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन हैं, जो मौजूदा ईवी डिमांड की तुलना में बेहद कम माने जाते हैं. यही वजह है कि सरकार ने इस योजना में चार्जिंग नेटवर्क को प्राथमिकता दी है. योजना का लक्ष्य है 22,100 फास्ट चार्जर (कारों के लिए), 1,800 (बसों के लिए) और 48,400 चार्जर (टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए) पब्लिक चार्जर इंस्टॉल करना है. इस पूरी परियोजना की इंप्लीमेंटिंग एजेंसी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) होगी. सब्सिडी दो चरणों में जारी की जाएगी, जिसमें परफॉर्मेंस और कम्प्लायंस मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा. चार्जिंग स्टैंडर्ड्स भी तय कर दिए गए हैं-      टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर: लाइट EV DC (IS-17017-2-6) और लाइट EV AC/DC कॉम्बो (IS-17017-2-7) – 12 kW तक.     कार और बसें: CCS-II (IS-17017-2-3) – 50 kW से 250 kW तक.     हेवी ड्यूटी ई-बसेस और ई-ट्रक: CCS-II (250–500 kW), हर गन से कम से कम 120 kW आउटपुट. इस नई गाइडलाइन से यह साफ हो रहा है कि, भारत सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में आक्रामक रणनीति अपना रही है. जानकारों का भी मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क का रणनीतिक विस्तार ही वह निर्णायक कदम होगा, जिससे देश में EV अपनाने की गति दोगुनी हो सकती है. क्या है PM E-Drive स्कीम? पीएम ई-ड्राइव (PM E-Drive) यानी प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट, भारत सरकार की नई योजना है, जिसे 1 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया है और यह मार्च 2026 तक चलेगी. इसका मकसद देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को बढ़ावा देना और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना है. करीब 10,900 करोड़ रुपये के बजट वाली इस योजना के तहत ई-टू व्हीलर, ई-थ्री व्हीलर, ई-बस और ई-ट्रक जैसे वाहनों पर सब्सिडी मिलेगी. साथ ही, सरकार 72,000 से ज़्यादा चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स लगाने की तैयारी में है.  इस योजना की खासियत यह है कि सब्सिडी सीधे ग्राहक तक e-voucher सिस्टम से पहुँचेगी और चार्जिंग स्टेशनों को नेशनल यूनिफाइड EV चार्जिंग हब से जोड़ा जाएगा. ताकि लोकेशन और पेमेंट की सुविधा आसान हो. सरकार चाहती है कि पेट्रोल-डीज़ल पर निर्भरता कम हो, प्रदूषण कम हो और आम लोगों को EV अपनाने में “रेंज एंग्ज़ाइटी” यानी चार्जिंग की चिंता न रहे.

इतिहास रच गया Maruti, फोर्ड और फॉक्सवैगन को पछाड़कर पहुंचा टॉप-10 ऑटो कंपनियों की लिस्ट में

नईदिल्ली  भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने ग्लोबल ऑटोमोबाइल मार्केट में एक नई पहचान बना ली है. कंपनी अब दुनिया की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कार कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है. ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मारुति सुज़ुकी 8वें स्थान पर पहुंच गई है और सबसे तगड़े मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ फोर्ड, जनरल मोटर्स और फॉक्सवैगन जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है. वही मारुति जिसे आपने गली-मोहल्ले में खड़े अल्टो, वैगनआर और स्विफ्ट के रूप में देखा है, वही मारुति अब फोर्ड, जनरल मोटर्स और यहां तक कि फॉक्सवैगन जैसे बिग शॉट्स को पीछे छोड़ चुकी है. ताजा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब 57.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो चुका है. यह उपलब्धि भारत की ऑटो इंडस्ट्री के लिए किसी मील के पत्थर से कम नहीं है. अब सवाल उठता है कि मारुति की यह छलांग संभव कैसे हुई? इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है हाल ही में लागू हुई संशोधित जीएसटी स्ट्रक्चर. छोटे और बजट-फ्रेंडली कारों, जैसे अल्टो, एस-प्रेसो और वैगनआर पर टैक्स में राहत मिलने से ये कारें और सस्ती हुईं हैं. इसका असर सीधे बुकिंग पर पड़ा और ग्राहकों की कतारें लंबी हो गईं. विदेशी निवेशकों की नज़र भी एक बार फिर भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट पर गई, जहां मारुति का ब्रांड भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है. अगर ग्लोबल लेवल की तस्वीर देखें तो टेस्ला अभी भी बादशाह है. जिसका मार्केट कैप 1.4 ट्रिलियन डॉलर है. इसके बाद टोयोटा (314 बिलियन डॉलर) और चीन की BYD (133 बिलियन डॉलर) का नंबर आता है. फेरारी (92.7 बिलियन डॉलर), बीएमडब्ल्यू (61.3 बिलियन डॉलर) और मर्सिडीज़-बेंज (59.8 बिलियन डॉलर) भी टॉप लिस्ट में शामिल हैं. लेकिन मारुति सुज़ुकी ने अपने 57.6 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन के दम पर जनरल मोटर्स (57.1 बिलियन डॉलर), वोक्सवैगन (55.7 बिलियन डॉलर) और फोर्ड (46.3 बिलियन डॉलर) जैसे बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया है. दुनिया की टॉप 10 ऑटोमोबाइल कंपनियां   रैंक  कंपनी मार्केट कैप (अमेरिकी डॉलर में) 1  टेस्ला 1.4 ट्रिलियन 2 टोयोटा  314 बिलियन 3  बीवाईडी  133 बिलियन 4   फेरारी 92.7 बिलियन 5  बीएमडब्ल्यू   61.3 बिलियन 6 मर्सिडीज़-बेंज  59.8 बिलियन 7 होंडा मोटर  59  बिलियन  8  मारुति सुज़ुकी   57.6 बिलियन 9  जनरल मोटर्स 57.1 बिलियन 10   फॉक्सवैगन   55.7 बिलियन 11 फोर्ड   46.3 बिलियन पैरेंट कंपनी Suzuki भी हुई मारुति के पीछे देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने अपने ही पैरेंट ब्रांड सुज़ुकी मोटर कॉरपोरेशन, जापान को भी पीछे छोड़ दिया है. जिसका वर्तमान मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 29 बिलियन डॉलर है. ग्लोबल रैंकिंग में अब मारुति, होंडा मोटर (59 बिलियन डॉलर) से ठीक नीचे स्थित है. यानी जल्द ही मारुति सुजुकी होंडा को भी पीछे छोड़ सकती है.  

असुरक्षा और भय के जीवन से मिली मुक्ति प्रधानमंत्री आवास योजना से

रायपुर कभी नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे ग्राम पंचायत एलमागुंडा निवासी श्री सोड़ी हुंगा का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना आखिरकार पूरा हो गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में गृह विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’’ (विशेष परियोजना नियद नेल्लानार योजना) के अंतर्गत उनका नाम चयनित किया गया। कलेक्टर बीजापुर के मार्गदर्शन में आवास प्लस ऐप सर्वे और प्राथमिकता क्रम मं  लक्ष्य आवंटन के बाद उनका आवास स्वीकृत हुआ।            पूर्व में नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे श्री हुंगा ने लगातार असुरक्षा और भय से जीवन व्यतीत किया। शासन-प्रशासन पर विश्वास जताते हुए उन्होंने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें प्रोत्साहन राशि और अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1 लाख 20 हजार रुपए की सहायता से पक्का मकान मिला। एलमागुंडा ग्राम पंचायत दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। सीमित परिवहन सुविधाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्री हुंगा ने परिवार के सहयोग से अपने घर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया।          प्रधानमंत्री आवास योजना की प्राप्ति से श्री सोड़ी हुंगा ने भावुक होकर कहा कि पहले नक्सल गतिविधियों में जीवन हमेशा खतरे में रहता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री आवास योजना की बदौलत उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।          प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और नियद नेल्ला नार योजना न केवल आवासीय सुविधा उपलब्ध करा रही है, बल्कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उनका पुनर्वास भी सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि श्री सोड़ी हुंगा जैसे हितग्राहियों की सफलता की कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि योजनाएँ सही दिशा में प्रभावी ढंग से कार्य कर रही हैं।