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दोस्ती के बहाने MBA छात्रा से दुष्कर्म, मामला दर्ज

झांसी उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में शादी का झांसा देकर एमबीए की छात्रा से दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। जहां साथ पढ़ने वाले युवक ने पहले उसे प्रेम जाल में फंसाया फिर शारीरिक संबंध बनाया। जब युवती ने शादी करने की बात कही तो युवक उस पर भड़क गया और जान से मारने की धमकी देने लगा। युवती के शिकायत के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। शॉपिंग के बहाने युवती से दुष्कर्म यह पूरा मामला जिले के सीपरी बाजार थाना क्षेत्र का है। पीड़ित युवती ने बताया कि एमबीए की पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात भोजला निवासी विशाल से हुई। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हुई। इसी बीच 29 अप्रैल को विशाल युवती को शॉपिंग कराने के बहाने ग्वालियर शिवपुरी हाईवे स्थित एक होटल ले गया। फिर पीड़िता से शादी करने की बात कहकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। सुनाई उत्पीड़न की कहानी पीड़िता ने बताया कि जब मैंने युवक से शादी करने की बात कही तो वह मुझ पर भड़क गया। पीड़िता ने युवक के घरवालों से भी शिकायत की लेकिन वे लोग भी उसे धमकाने लगे। जिसके बाद पीड़िता ने थाने में न्याय की गुहार लगाई और आरोपी समेत उसके भाई बॉबी के खिलाफ सीपरी बाजार थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

‘I Love Muhammad’ अभियान ने पकड़ा जोर, मुस्लिम समाज ने निकाले जुलूस

 कानपुर  उत्तर प्रदेश के उन्नाव, बरेली, कौशांबी, लखनऊ, महाराजगंज जैसे शहरों के अलावा उत्तराखंड के काशीपुर और तेलंगाना के हैदराबाद समेत देश के कई शहरों में 'I Love Muhammad' के समर्थन में मुस्लिम समाज सड़कों पर उतर आया है. जगह-जगह जुलूस भी निकाले जा रहे हैं. इस दौरान कई जगह पुलिस और मुस्लिम समाज का आमना-सामना भी हुआ है. यूपी के उन्नाव में जुलूस के दौरान पुलिस पर पथराव का आरोप सामने आया है. यहां महिलाओं ने पुलिस की लाठियां छीनी और पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाकर पथराव किया गया. सवाल ये है कि अचानक 'I Love Muhammad' को लेकर मुस्लिम समाज जुलूस क्यों निकाल रहा है? आखिर ऐसा क्या हुआ है कि मुसलमान I Love Muhammad को लेकर सड़कों पर आ रहे हैं? इस पूरे विवाद की पटकथा उत्तर प्रदेश के कानपुर में लिखी गई. यहां बारावफात के जुलूस के दौरान I Love Muhammad के साइन बोर्ड पर ऐसा विवाद हुआ, जिसका असर अब यूपी समेत देश के अलग-अलग शहरों में दिखने लगा है. कानपुर में I Love Muhammad साइन बोर्ड को लेकर क्या विवाद था? I Love Muhammad को लेकर पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक विवाद हुआ. ये पूरा मामला 5 सितंबर के दिन सामने आया था. कानपुर के रावतपुर में बारावफात जुलूस निकाला जा रहा था. जिस रास्ते पर जुलूस निकाला जा रहा था, उसी रास्ते पर एक जगह I Love Muhammad का साइन बोर्ड लगा दिया गया. इसको लेकर हिंदू पक्ष ने विरोध किया और आरोप लगाया कि यहां नई परंपरा शुरू की जा रही है. कानपुर में ये बवाल बढ़ता उससे पहले पुलिस सक्रिय हो गई. पुलिस ने कराया था समझौता जैसे ही I Love Muhammad साइन बोर्ड को लेकर विवाद शुरू हुआ, पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों पक्षों में समझौता करवा दिया गया. कानपुर पुलिस के डीसीपी दिनेश त्रिपाठी के मुताबिक, सरकार का नियम है कि जुलूस में किसी तरह की नई परंपरा नहीं डाली जाएगी. मगर बारावफात के जुलूस के दौरान कुछ लोगों ने नई परंपरा डालते हुए परंपरा वाली जगह से टेंट हटाकर नई जगह लगाया और I Love Muhammad का पोस्टर भी लगाया. डीसीपी दिनेश त्रिपाठी के मुताबिक, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विवाद का खात्मा किया और पुरानी परंपरा वाली जगह पर ही टेंट और साइन बोर्ड लगवा दिया. इस दौरान डीसीपी ने साफ किया कि I Love Muhammad को लेकर कोई भी केस दर्ज नहीं किया गया है. मुस्लिम और हिंदू पक्ष ने लगाए एक दूसरे पर पोस्टर फाड़ने के आरोप इस बीच कानपुर में मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि उसके साइन बोर्ड को फाड़ दिया गया था. हिंदू पक्ष ने आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष के जुलूस में शामिल लोगों ने उनके धार्मिक पोस्टर फाड़े. वैसे पुलिस के बीच-बचाव के बाद ऐसा लगा कि मामला शांत हो गया, पर तभी एक नई घटना सामने आ गई. कानपुर पुलिस की FIR के बाद शुरू हुआ बवाल इस मामले में ट्विस्ट तब आया जब कानपुर पुलिस ने 9 सितंबर को दो दर्जन से अधिक लोगों पर केस दर्ज कर दिया. ये केस बारावफात के जुलूस के दौरान I Love Mohammad नाम के बोर्ड बनाकर नई परंपरा शुरू करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए दर्ज किया गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि कानपुर के रावतपुर थाना क्षेत्र के इस मामले में 9 नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर केस किया गया. ओवैसी के एक्स पोस्ट के बाद ट्रिगर हुआ मामला 15 सितंबर को AIMIM चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक एक्स पोस्ट को कोट करते हुए पोस्ट लिखी. इसमें उन्होंने कानपुर पुलिस को टैग करते हुए लिखा कि I Love Mohammad कहना जुर्म नहीं है. अगर है तो इसकी हर सजा मंजूर है. ओवैसी ने जिस एक्स पोस्ट को कोट किया, उसमें भी दावा किया गया था कि मुस्लिम पक्ष की ओर से कथित तौर पर नई परंपरा शुरू करने को लेकर पुलिस ने केस किया है. कानपुर पुलिस ने अलग कहानी बताई वहीं कानपुर पुलिस ने दावा किया है कि आई लव मोहम्मद के लिखने या बैनर लगाने पर कोई FIR नहीं की गई, बल्कि परंपरागत स्थान से अलग हटकर नए स्थान पर बैनर लगाने और जुलूस निकालने के दौरान इस पक्ष के द्वारा दूसरे पक्ष का बैनर फाड़ने पर हुई है. कानपुर पुलिस ने अनुरोध किया इस संबंध में कोई भ्रांति न फैलाई जाए. कानपुर पुलिस की सफाई जबतक आती, तब तक देशभर में I Love Muhammad हैशटैग ट्रेंड करने लगा. देशभर में जगह-जगह मुस्लिम समाज इसके समर्थन में जुलूस निकाल रहा है. ऐसा ही जुलूस यूपी के उन्नाव में भी निकाला गया, जिस दौरान टकराव देखने को मिला है. भाजपा और सपा आमने-सामने आए हालांकि, पूरे मामले पर सपा और भाजपा आमने-सामने हैं. सपा प्रवक्ता अमीक जमाई कह रहे हैं कि यह पूरी तरह से पुलिस का फेलियर है और चाहे आई लव श्री राम हो और आई लव मोहम्मद हो बोलने की आजादी होनी चाहिए तो वहीं भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कह रहे हैं कि आप यूपी में कोई पुलिस की वर्दी को हाथ लगाएगा या कानून भंग करने की कोशिश करेगा तो तुरंत कार्रवाई होगी. मौलाना सुफियान निजामी ने इस पूरे मामले पर FIR वापस लेने की मांग की है. कानपुर में I Love Muhammad का बैनर पोस्टर लगाने पर करीब 20 से 25 लोगों पर FIR दर्ज हुई है. उन्नाव में भी बीती रात मुस्लिम मोहल्लों में दूसरे समुदाय के युवकों ने हाथों में I Love Muhammad के बैनर पोस्टर लेकर धार्मिक नारों के साथ जुलूस निकाला और आक्रोश व्यक्त किया. कानपुर पुलिस के द्वारा 4 सितंबर को सैयदनगर जफर वाली गली के सामने बारावफात रोशनी के कार्यक्रम सड़क पर लगाए गए I Love Muhammad के बैनर लगाए जाने का जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो उस बैनर को वहां से हटवाकर दूसरी जगह लगवा दिया था, क्योंकि विरोध था कि कभी ऐसा बैनर उस जगह लगा ही नहीं था, जिसे लगाया गया. पुलिस ने विवाद शांत करवाया था. पुलिस के अनुसार 5 सितंबर को बारावफात जुलूस के दौरान हिंदू बस्ती में चल रहे भंडारे के पोस्टर को अज्ञात मुस्लिम युवकों ने फाड़ दिया था. उन्नाव में पथराव के बाद पुलिस ने 8 … Read more

प्रधानमंत्री मोदी का स्वदेशी मंत्र: अब पैसों से नहीं, पसीने से होगी असली पहचान!

नई दिल्ली ‘मेरी स्वदेशी की व्याख्या बहुत सिंपल है. पैसा किसका लगता है, उससे लेना-देना नहीं है.  डॉलर है, पाउंड है… वह करेंसी काली है या गोरी है, मुझे लेना-देना नहीं है. लेकिन जो प्रोडक्शन है उसमें पसीना मेरे देशवासियों का होगा. जो प्रोडक्शन होगा, उसमें महक मेरे देश की मिट्टी की होगी.’ मोदी ने पिछले दिनों गुजरात में मारुति सुजुकी ई-विटारा इलेक्ट्रिक एसयूवी और हाइब्रिड बैटरी यूनिट का उद्घाटन करते हुए जब स्वदेशी की इस तरह व्याख्या की तो कई बातें स्पष्ट हो गईं. पीएम के बयान से यह साफ हो गया कि सरकार के स्वदेशी का दायरा इसके परंपरागत परिभाषा से कहीं व्यापक और वृहद है. रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में PM  नरेंद्र मोदी ने फिर से स्वदेशी मंत्र का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता को जैसे स्वदेशी के मंत्र से ताकत मिली, वैसे ही देश की समृद्धि को भी स्वदेशी के मंत्र से ही शक्ति मिलेगी.  हर घर को स्वदेशी का प्रतीक बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा किआज जाने-अनजाने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत सी विदेशी चीजें जुड़ गई हैं, हमें पता तक नहीं है. हमारे जेब में कंघी विदेशी है कि देसी है, पता ही नहीं है. हमें इनसे भी मुक्ति पानी होगी.   उन्होंने 'मेक इन इंडिया' पर जोर देते हुए कहा कि हम वो सामान खरीदें, जो मेड इन इंडिया हो, जिसमें हमारे देश के नौजवानों की मेहनत लगी हो, हमारे देश के बेटे बेटियों का पसीना हो. उन्होंने कहा कि ये हर भारतीय का मिजाज़ बनना चाहिए. स्वदेशी का विचार सहज भाषा में कहें तो स्वदेशी का अर्थ है "अपने देश का" या अपने देश में निर्मित वस्तुएं, सेवाएं और देश में पैदा हुए और फले-फूले विचार. स्वदेशी का कॉन्सेप्ट भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था. इसका उद्देश्य विदेशी (विशेषकर ब्रिटिश) वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना था. तब महात्मा गांधी स्वदेशी के ब्रैंड एम्बेसडर थे.    आधुनिक संदर्भ में स्वदेशी का मतलब स्थानीय उत्पादों, प्रौद्योगिकी और संसाधनों को प्राथमिकता देना है ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और विदेशी निर्भरता कम हो.    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन परंपरागत रूप से स्वदेशी को राष्ट्रीय गौरव और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक मानते हैं. इनका तर्क है कि स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा.    कुछ साल पहले तक तो संघ और स्वदेशी जागरण मंच स्वदेशी को विदेशी कंपनियों की "आर्थिक गुलामी" से बचने का उत्तर मानते थे. ये संगठन  विदेशी निर्भरता कम करने और संरक्षणवादी नीतियों को अपनाने की वकालत करते हैं.    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 की कोरोना संकट के दौरान स्वदेशी के पुश पर जोर दिया था.    PM मोदी ने 12 मई को "आत्मनिर्भर भारत अभियान" की घोषणा की थी. जिसमें स्वदेशी को आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बताया गया था.    इसका फोकस स्थानीय विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और विदेशी आयात से निर्भरता कम करना था. इसी दौरान पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल का नारा दिया. इसका मतलब था कि भारतीयों को स्थानीय उत्पाद, लोकल सामान के बारे में खुलकर बात करना चाहिए और इसका प्रचार करना चाहिए.   यह पीएम मोदी द्वारा स्वदेशी को जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करता था.    इसी दौरान पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की. इसके साथ ही उन्होंने MSME, कृषि, और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन शुरू किए. रक्षा में 101 आयात वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया गया. स्वदेशी को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ा   आगे के वर्षों में पीएम मोदी ने स्वदेशी को केवल स्थानीय उत्पादों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका से जोड़ा. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जो नारा दिया गया उसी का नाम है, "मेक इन इंडिया, और मेक फॉर द वर्ल्ड" का नारा.    पीएम मोदी ने मेक इन इंडिया का नारा दिया तो निश्चित रूप से ये विदेशी पूंजी के स्वागत का न्योता था. दरअसल मेक इन इंडिया स्वदेशी और वैश्वीकरण का मिश्रण है, जो विदेशी पूंजी को आकर्षित कर भारत को मैन्युफैक्चरिंग और नवाचार का हब बनाता है. यह भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति को मजबूत करने की घोषणा है. पैसा किसका लगता है, कौन सा देश लगाता है, बड़ी बात नहीं    यही वजह है कि पीएम मोदी ने अहमदाबाद में साफ कह दिया है कि स्वदेशी प्रोडक्शन में पैसा किसका लगता है, कौन सा देश लगाता है, ये बड़ी बात नहीं है. जो बड़ी बात है वो यह है कि प्रोडक्शन भारत भूमि में हो और इसका लेबर भी भारत से आए.    लेकिन सवाल है कि स्वदेशी को लेकर उस संगठन का क्या कहना है जो भारत में इसके पक्ष में सबसे बड़ा आंदोलन चलाता है. स्वदेशी जागरण मंच भारत में स्वदेशी आंदोलन की बड़ी ताकत है.    स्वदेशी को समझाते हुए स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक अश्विनी महाजन कहते हैं कि इस टर्म को बहुत हद तक बदनाम किया गया और स्वदेशी की जो परिभाषा को जिस तरह से महात्मा गांधी ने समझाया उसके अनुसार स्वदेशी का अर्थ है अपने आस-पास के परिवेश के साजो-सामान का इस्तेमाल करना. उससे सामान बनाना और श्रेष्ठता लाना और अगर उसमें कुछ कमी हो तो उसको ठीक करना.    स्वदेशी आंदोलन में विदेशी सहयोग को स्वीकार करने की बात करते हुए अश्विनी महाजन ने आजतक डॉट इन से कहा, "स्वदेशी का मतलब कोई विदेशों से कटना नहीं है. विदेशों से संबंध नहीं रखना इसका मतलब स्वदेशी नहीं है. विदेशों से सामान नहीं खरीदना-बेचना स्वदेशी नहीं है, ये तो ऑटर्की (Autarky) है. स्वदेशी एक सकारात्मक विचार है." आजादी के समय स्वदेशी में बहिष्कार के कॉन्सेपट को समझाते हुए उन्होंने कहा कि ये उस काल की एक खासियत थी.    आधुनिक अर्थ में स्वदेशी को समझाते हुए उन्होंने कहा कि, "पीएम मोदी ने पहले मेक इन इंडिया कहा, फिर आत्मनिर्भर भारत कहा, फिर अब स्वदेशी की बात की. ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और परिस्थितियों के हिसाब से हम स्वदेशी को चुनते हैं." स्वदेशी को बदनाम किया गया   स्वदेशी जागरण मंच … Read more

फ्लाइट के दौरान कॉकपिट में जबरन घुसने की कोशिश, यात्रियों में फैली सनसनी

बेंगलुरु एअर इंडिया एक्सप्रेस की बेंगलुरु-वाराणसी फ्लाइट से एक सुरक्षा संबंधी घटना का मामला सामने आया है. सोमवार को फ्लाइट संख्या IX1086 सुबह 8 बजे बेंगलुरु से वाराणसी के लिए उड़ान भरती है. फ्लाइट जब मिड-एयर थी तो एक यात्री जिसे टॉयलेट जाना था वह कथित तौर पर जबरन कॉकपिट में घुसने की कोशिश की. जिससे हड़कंप मच गया. यात्री से लेकर केबिन क्रू तक पहले घबरा गए. हालांकि, मामले को फिर समय रहते सुलझा लिया गया.  अधिकारियों ने इस मामले की पुष्टि करते हुए जानकारी दी है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ कोई समझौता नहीं किया गया, मामले को संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है.  मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, एअर इंडिया एक्सप्रेस ने बयान जारी करते हुए कहा, 'हमें मालूम है कि मीडिया में खबरें चल रही हैं कि हमारी बेंगलुरु से वाराणसी आने वाली एक फ्लाइट में यात्री ने कॉकपिट में घुसने की कोशिश की, वह टॉयलेट जाना चाहता था.' एअर इंडिया एक्सप्रेस ने आगे कहा, 'हम लोगों को आश्वासन देने चाहते हैं कि हमारी सुरक्षा प्रणाली मज़बूत और इसमें कोई कमी नहीं की गई. वर्तमान में इस मामले की जांच की जा रही है.' फ्लाइट अपने तम समय सुबह 10 बजे अपने टाइम पर वाराणसी पहुंची. इस घटना की वजह से फ्लाइट में कोई विलंब नहीं हुआ.  यह ताजा मामला पिछले महीने जून 2024 में हुई एक समान घटना की याद दिलाती है, जब एक 25 साल के शख्स को कोझिकोड से बहरैन जा रही एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट के दरवाजे को खोलने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उस घटना के दौरान विमान को मुंबई में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी और आरोपी ने केबिन क्रू पर भी हमला किया था. इंडियन एविएशन के नियम क्या कहते हैं? इंडियन एविएशन के नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री जबरन कॉकपिट में घुसने की कोशिश करता है तो उसे सबसे गंभीर 'प्रोटोकॉल के विरुद्ध' माना जाता है. इस मामले में सजा दो साल से तक हो सकती है, साथ ही पूरे जीवन आपको नो-फ्लाई लिस्ट में भी डाला जा सकता है.

अरुणाचल को 5100 करोड़ की सौगात, पीएम मोदी ने नॉर्थईस्ट को अष्टलक्ष्मी करार दिया

ईटानगर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में 5,125 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की शुरुआत की है। इनमें शि-योमी जिले में दो प्रमुख पनबिजली परियोजनाओं और तवांग में एक सम्मेलन केंद्र शामिल हैं। उद्घाटन के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब अरुणाचल देश का पावर सेंटर बनने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि जिन परियोजनाओं की शुरुआत की गई वे डबल इंजन सरकार के दोहरे लाभ का उदाहरण हैं। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जिन इलाकों को वह पिछड़ा कहकर छोड़ देती थी, आज उनका ही विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्य हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है। तवांग मठ से नामसाई पैगोडा तक अरुणाचल प्रदेश शांति और सद्भाव की भूमि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद 70 से अधिक बार पूर्वोत्तर का दौरा किया है, केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान इस क्षेत्र की अनदेखी की गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश को पिछले 10 साल में केंद्र से एक लाख करोड़ रुपये मिले, जो कांग्रेस शासन के दौरान मिले धन से 16 गुना ज़्यादा हैं। मुझे पता था कि दिल्ली में बैठकर पूर्वोत्तर का विकास नहीं हो सकता, इसलिए मंत्रियों और अधिकारियों को कई बार इस क्षेत्र में भेजा। पीएम मोदी ने कहा, जहां काम करना मुश्किल होता था, उन्हें कांग्रेस पिछड़ा कहकर भूल जाती थी। ऐसा करके कांग्रेस अपनी नाकामियों को छिपा ले जाती थी। यही कारण है कि लोगों का निरंतर पलायन हुआ। हमारी सरकार ने इस अप्रोच को बदल दिया। जिनको कांग्रेस पिछड़ा जिला कहती थी, हमने उन्हें ऐस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट बनाया और विकास को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा, बॉर्डर के जिन गांवों को कांग्रेस लास्ट विलेज कहती थी, उन्हें हमने फर्स्ट विलेज मांगा। उन गांवों में विकास की नई रफ्तार है। बाइब्रेंट विलेज की सफलता ने लोगों का जीवन आसान बनाया है। अरुणाचल प्रदेश के गांवों में भी बिजली और इंटरनेट की सुविधाएं पहुंची हैं। पहले बॉर्डर से शहरों की ओर पलायन होता था लेकिन अब बॉर्डर के गांव टूरिजम के नए केंद्र बन गए हैं। जैसे-जैसे नए इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ रही है, वैसे-वैसे यहां टूरिजम बढ़ रहा है। बीते दशक में यहां टूरिस्ट की संख्या में दो गुनी वृद्धि हुई है। अरुणाचल का सामर्थ्य कल्चर से जुड़े टूरिजम से भी ज्यादा है। प्रधानमंत्री ने कहा, दुनिया में कनसर्ट टूरिजम की भी बाढ़ आ रही है। तवांग में बनने जा रहा आधुनिक कन्वेंशन सेंटर अरुणाचल के टूरिजम में एक नया आयाम जोड़ेगा। इसे वाइब्रेंट विलेज अभियान से भी बहुत मदद मिलेगी। यह अभियान मील का पत्थर शाबित हो रहा है। आज दिल्ली और ईटानगर दोनों जगह बीजेपी सरकार है। केंद्र और राज्य दोनों की ऊर्जा विकास में लग रही है। कांग्रेस पर करारा हमला बोलेते हुए पीएम मोदी ने कहा, महंगाई बढ़ रही थी, चारों ओर घोटाले हो रहे थे और तब भी कांग्रेस सरकार टैक्स का बोझ बढ़ाती जा रही थी। उस समय दो लाख की कमाई पर भी इनकम टैक्स चुकाना पड़ता था। उस समय की सरकार बच्चों की टॉफी पर भी 20 पर्सेंट से ज्यादा टैक्स लेती थी। तब मैंने कहा था कि मैं आपकी कमाई और बचत दोनों को बढ़ाने का काम करूंगा। बीते सालों हमने 12 लाख तक की आय पर इनकम टैक्स जीरो कर दिया और आज से जीएसटी को भी हमने सिर्फ दो स्लैब तक सीमित कर दिया है। 5 फीसदी और 18 फीसदी। बहुत सारी चीजें टैक्स फ्री हो गई हैं। आप आराम से अब अपना नया घर बना सकते हैं। मोटरबाइक खरीदना है, बाहर खाने-पीने जाना है, घूमने जाना है, यह सब पहले से सस्ता हो गया। यह जीएसटी बचत उत्सव बहुत यादगार बनने वाला है। हमें संकल्प लेना है कि हम स्वदेशी अपनाएं। खरीदें वही जो देश में बना हो, बेचें वही जो देश में बना हो। गर्व से कहें कि यह स्वदेशी है।

गुरपतवंत पन्नू के प्रमुख सहयोगी की गिरफ्तारी, निज्जर के बाद बढ़ाई थी सक्रियता

ओटावा  भारत विरोधी खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू का खास पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। खबर है कि कनाडा पुलिस ने उसके सबसे बड़े सहयोगियों में से एक इंदरजीत सिंह गोसाल को गिरफ्तार किया है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि यह गिरफ्तारी किस मामले में हुई है। इससे पहले नवंबर 2024 में भी हिंदू मंदिर में हुई हिंसा से जुड़े केस में गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन बाद में रिहा कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोसाल को SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस के फाउंडर गुरपतवंत सिंह पन्नू का राइट हैंड माना जाता है। खबर है कि हरदीप सिंह निज्जर के बाद गोसाल ही कनाडा में एसएफजे के बड़े मोहरे के रूप में काम कर रहा था। निज्जर की जून 2023 में कनाडा के सरी में हत्या कर दी गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की अगुवाई वाली सरकार ने इस कांड के तार भारत से जोड़ने की कोशिश की थी। कनाडा में रिपोर्ट ने मचाई थी खलबली सितंबर की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कम से कम दो खालिस्तानी चरमपंथी समूहों को देश के भीतर से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। ‘2025 असेस्मेंट ऑफ मनी लॉन्डरिंग एंड टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क इन कनाडा’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कनाडा के अंदर से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले खालिस्तानी चरमपंथी समूहों की पहचान बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के रूप में की गई। ओटावा की खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 1980 के दशक के मध्य से कनाडा में राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक चरमपंथ का खतरा खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा भारत के पंजाब में खालिस्तान नामक एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश के माध्यम से उत्पन्न हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में आपराधिक संहिता के तहत सूचीबद्ध और राजनीति से प्रेरित हिंसक चरमपंथ में शामिल कई आतंकवादी संगठन जैसे हमास, हिज्बुल्ला और खालिस्तानी हिंसक चरमपंथी समूह बब्बर खालसा इंटरनेशनल तथा इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन कनाडा के अंदर से ही वित्तीय सहायता प्राप्त करते पाए गए हैं।

नवरात्रि आज से शुरू, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

रांची आज यानी सोमवार से नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। इस बार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से लेकर 1 अक्टूबर तक रहने वाली है। वहीं, सीएम हेमंत ने झारखंड वासियों को नवरात्रि की बधाई दी है। सीएम हेमंत ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर सभी को अनेक-अनेक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार। शक्ति, श्रद्धा और साधना का यह पावन पर्व सभी के जीवन को हर्ष और उल्लास से भर दे। मां सभी को उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें, यही कामना करता हूं। जय मां! हर वर्ष शारदीय नवरात्रि का पर्व आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। राजस्थान से लेकर उत्तर भारत के राज्यों में मंदिरों से लेकर घर- घर में घटस्थापना की जाती है। इसके लिए  नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का सबसे ज्यादा महत्व होता है और इस दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित कर मां दुर्गा के नौ रूपों पूजा किया जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, आज यानी 22 सितंबर को प्रतिपदा तिथि पूरे दिन रहेगी। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत आज रात 1 बजकर 23 मिनट पर हो चुकी है और यह तिथि कल यानी 23 सितंबर को देर रात 2 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। घटस्थापना के लिए दूसरा महत्वपूर्ण मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक चलेगा। इस शुभ मुहूर्त में की गई पूजा और स्थापना बेहद फलदायी मानी जाती है।

कोयला घोटाला: सौम्या चौरसिया के निज सचिव की गिरफ्तारी, EOW ने स्पेशल कोर्ट में पेश किया

रायपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला मामले में EOW ने कार्रवाई तेज कर दी है. रविवार को कई जगहों पर छापेमारी के बाद सोमवार को पूर्व IAS सौम्या चौरसिया के निज सचिव रहे जयचंद कोसले को गिरफ्तार कर ACB/EOW की विशेष कोर्ट में पेश किया है. जयचंद कोसले पर आरोप है कि उन्होंने सौम्या चौरसिया का निज सचिव रहते हुए कोल घोटाले से 50 लाख रुपए कमाया है. EOW आय कोर्ट से जयचंद को 14 दिन के पुलिस रिमांड में लेने का प्रयास कर रही है. प्रदेश में कुल 10 ठिकानों पर रेड बता दें, आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने ‘शराब घोटाला’ और ‘कोयला घोटाला’ मामलों में  रविवार की सुबह राजधानी रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की. राजधानी रायपुर में शराब कारोबारी अवधेश यादव और उनके सहयोगियों के छत्तीसगढ़ स्थित 3 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की. इसके अलावा सौम्या चौरसिया के निजी सहायक रहे जयचंद कोसले के सभी ठिकानों पर भी दबिश कार्रवाई पूरी कर ली गई है. दोनों घोटालों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, नगदी और तकनीकी उपकरण जब्त किए गए जिनकी जांच फिलहाल जारी है. साथ ही यह कार्रवाई सुबह से रात लगभग 11ः30 बजे तक चली. रेड कार्रवाई के दूसरे दिन आज जयचंद को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है. क्या है कोयला घोटाला मामला ? ED की जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों से मिलीभगत के बाद ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर कोयला ट्रांसपोर्ट करने वालों से अवैध वसूली की. जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच कोयले के हर टन पर 25 रुपये की अवैध लेवी वसूली गई. 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया गया था. खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर बिश्रोई ने आदेश जारी किया था. यह परमिट कोल परिवहन में कोल व्यापारियों को दिया जाता है. पूरे मामले का मास्टरमाइंड किंगपिन कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को माना गया. इसमें जो व्यापारी पैसे देता उसे ही खनिज विभाग से पीट और परिवहन पास जारी होता था, यह रकम 25 रुपये प्रति टन के हिसाब से सूर्यकांत के कर्मचारियों के पास जमा होती थी. इस तरह से स्कैम कर कुल 570 करोड़ रुपये की वसूली की गई. कहां खर्च की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि इस घोटाले की राशि को सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने में खर्च किया गया. साथ ही चुनावी खर्चों के लिए भी इस अवैध राशि का इस्‍तेमाल किया गया. आरोपियों ने इससे कई चल-अचल संपतियों को खरीदा. क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला मामला? ईडी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान साल 2019 से 2022 तक लाइसेंसी शराब दुकानों पर डुप्लिकेट होलोग्राम लगाकर बड़ी मात्रा में अवैध शराब बेची जाती थी, जिसके चलते छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था. उस दौरान शराब को स्कैनिंग से बचाने के लिए नकली होलोग्राम भी लगाया जाता था, ताकि वह किसी की पकड़ में न आ सके. इस होलोग्राम को बनाने के लिए घोटाले में संलिप्त लोगों ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में होलोग्राफी का काम करने वाली PHSE (प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फ़िल्म्स प्राइवेट लिमिटेड) कंपनी को टेंडर दिया था. ईडी ने अपनी जांच के बाद यह बताया है कि यह कंपनी होलोग्राम बनाने के लिए पात्र नहीं थी, फिर भी नियमों में संशोधन करके यह टेंडर उसी कंपनी को दे दिया गया था. ईडी के टेंडर दिलाने के एवज में कंपनी के मालिक से भारी कमीशन लिया गया था. यह जानकारी सामने आने के बाद जब कंपनी के मालिक विधु गुप्ता को ईडी ने गिरफ्तार किया तो उसने कांग्रेस सरकार में CSMCL में एमडी अरुणपति त्रिपाठी, बिजनेसमैन अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा का नाम लिया. ED ने जब इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, तो मामले में और भी खुलासे होने लगे. इसके बाद साल 2024 के अंत में कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का नाम सामने आया. सूत्रों के मुताबिक ED की जांच में पता चला है कि कवासी लखमा को शराब घोटाले से पीओसी से हर महीने कमिशन मिलाता था.

CGPSC परीक्षा घोटाला: रिटायर्ड IAS सहित पांचों आरोपी CBI कोर्ट में हुए पेश

रायपुर CGPSC घोटाला मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को आज सीबीआई की विशेष कोर्ट में पेश किया गया है. पांचों आरोपी पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पीएससी के सचिव रहे पूर्व आईएएस जीवनलाल ध्रुव, सुमीत ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आदिल को सीबीईओ ने गिरफ्तार किया. कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड पर सभी को सीबीआई रिमांड पर सौंपा था. आज रिमांड पूरी होने पर फिर से सभी को कोर्ट में पेश किया गया है. इससे पहले 7 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी सीजीपीएससी घोटाले में सीबीआई ने आज लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक रही आरती वासनिक, पीएससी के सचिव रहे पूर्व आईएएस जीवनलाल ध्रुव और उनके बेटे सुमित ध्रुव समेत निशा कोसले, दीपा आदिल को गिरफ्तार किया था. इससे पहले 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. सीबीआई ने 18 नवंबर को तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था. इसके बाद 10 जनवरी को पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें नितेश सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष के भतीजे, डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयनित) और ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक, सीजीपीएससी) शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, 12 जनवरी को शशांक गोयल और भूमिका कटियार (दोनों डिप्टी कलेक्टर पद के लिए चयनित) और साहिल सोनवानी (डिप्टी एसपी पद के लिए चयनित) को गिरफ्तार किया गया. वर्तमान में सभी आरोपी जेल में बंद हैं. जानें क्या है सीजीपीएससी घोटोला सीजीपीएससी घोटाला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में 2020 से 2022 के बीच हुई अनियमितताओं से जुड़ा मामला है. आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों में योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा कर, प्रभावशाली राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के करीबियों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी तथा अन्य उच्च पदों पर चयनित किया गया. इस घोटाले ने प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए. छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई. जांच एजेंसी ने छापेमारी कर कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद किए और पूर्व अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया. वर्तमान में यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है.

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने दो नक्सलियों को ढेर किया

नारायणपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में आज सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में अब तक दो माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। साथ ही AK-47 समेत भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमावर्ती क्षेत्र के अबूझमाड़ में मुठभेड़ हुई। सुबह से शुरू जारी है। माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षाबलों ने सर्च अभियान शुरू किया था। अभियान के दौरान माओवादियों के साथ रुक-रुक कर मुठभेड़ जारी है। सुरक्षाबलों और पुलिस को अब तक घटना स्थल से दो पुरुष माओवादियों के शव के साथ हथियार बरामद हुए हैं। माओवादियों से एक एके-47 राइफल, अन्य हथियार, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, माओवादी साहित्य, प्रचार-प्रसार सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं जब्त की है। मारे गए माओवादियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। सर्च अभियान अभी भी जारी है। अभियान पूर्ण होने पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।