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शारदीय नवरात्रि में अपनाएं ये 9 विशेष भेंटें, जीवन में मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि

हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व साल में दो बार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025 से हो रही है. नवरात्रि का मतलब सिर्फ व्रत रखना या पूजा करना नहीं है, बल्कि यह माता दुर्गा की साधना, भक्ति और आत्मशक्ति को जगाने का पावन समय माना जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर दिन का अपना महत्व होता है. मान्यता है कि अगर इन दिनों माता को उनके प्रिय रंगों और वस्तुओं से प्रसन्न किया जाए तो जीवन से दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और खुशियां घर आ जाती हैं. आइए जानते हैं नवरात्रि 2025 में कौन से खास उपाय करने चाहिए. नवरात्रि के 9 दिनों में मां को अर्पित करें ये खास वस्तुएं 1. पहला दिन – मां शैलपुत्री नवरात्रि की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा से होती है. इस दिन पीले रंग के वस्त्र, फूल और मिठाई चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है. यह रंग ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है. ऐसा करने से जीवन में नए अवसर खुलते हैं और धन-समृद्धि का मार्ग बनता है. 2. दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी मां ब्रह्मचारिणी साधना और संयम की देवी मानी जाती हैं. इन्हें हरे रंग की चीजें बेहद प्रिय हैं. इस दिन हरे वस्त्र, पत्तियां और श्रृंगार सामग्री अर्पित करने से आत्मबल बढ़ता है और जीवन में शांति आती है. 3. तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में पीले और हरे रंग का संयोजन अर्पित करना शुभ माना जाता है. यह संयोजन साहस, संतुलन और आत्मविश्वास को मजबूत करता है. 4. चौथा दिन – मां कुष्मांडा मां कुष्मांडा को नारंगी रंग बेहद प्रिय है. इस दिन नारंगी वस्त्र, फल और मिठाई चढ़ाने से आत्मविश्वास बढ़ता है और रुके हुए काम बनने लगते हैं. 5. पांचवां दिन – मां स्कंदमाता मां स्कंदमाता की पूजा में सफेद रंग की चीजें अर्पित करनी चाहिए. यह रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है. माना जाता है कि इससे घर में खुशहाली और मानसिक सुकून बना रहता है. 6. छठा दिन – मां कात्यायनी छठे दिन मां कात्यायनी को लाल रंग की वस्तुएं जैसे वस्त्र, पुष्प और फल अर्पित करें. लाल रंग विजय और शक्ति का प्रतीक है. इस उपाय से शत्रु बाधा दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है. 7. सातवां दिन – मां कालरात्रि मां कालरात्रि की पूजा में नीले रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है. यह रंग नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और भय से मुक्ति दिलाता है. 8. आठवां दिन – मां महागौरी आठवें दिन मां महागौरी को गुलाबी रंग की वस्तुएं अर्पित करें. गुलाबी रंग प्रेम, करुणा और सकारात्मकता का प्रतीक है. इससे रिश्तों में मिठास बढ़ती है और घर का माहौल सुखद रहता है. 9. नौवां दिन – मां सिद्धिदात्री नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा में बैंगनी रंग की वस्तुएं चढ़ानी चाहिए. यह रंग आध्यात्मिक उन्नति और गूढ़ ज्ञान का प्रतीक है. ऐसा करने से साधक को सफलता और उन्नति का वरदान मिलता है.

जंगल के पास हाथी ने ग्रामीण को सूंड से उठाकर पटका, मौके पर जान गई

कोरबा खेत में काम कर घर लौट रहे ग्रामीण का सामना लोनर हाथी से हो गया. वह भागकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचता, इससे पहले दंतैल ने सूंड से पकड़कर ग्रामीण को जमीन पर पटक दिया. जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना कटघोरा वनमंडल के पसान वन परिक्षेत्र अंतर्गत तनेरा ग्राम के गोरिल्ला डांड़ की है. जानकरी के मुताबिक, धन सिंह गोंड़ 45 वर्ष परिवार सहित निवास करता था. धनसिंह रविवार दोपहर करीब 2.30 बजे खेत के समीप जंगल से जलाऊ लकड़ी लेकर घर लौट रहा था. इसी दौरान उसका सामना लोनर हाथी से हो गया. धन सिंह दंतैल से अपनी जान बचाकर भाग रहा था. वह सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इससे पहले ही दंतैल ने उसे सूंड से पकड़कर जमीन पर पटक दिया. इससे उसकी मौत हो गई. पसान रेंजर मनीष सिंह ने बताया कि हमला करने वाले हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा गया है. ग्रामीणों से घटनाक्रम की जानकारी ली गई. आगे की कार्यवाही करते हुए ग्रामीणों को हाथी से दूर रहने की समझाइश दी गई है. वन विभाग की ओर से नियमों के मुताबिक, पीड़ित परिवार को 25 हजार रुपए की तत्काल सहायता राशि दी गई है. वहीं हाथी के दहशत में गुजर-बसर कर रहे ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए तो वे गांव छोड़ने के लिए मजबूर होंगे.

बाबा बागेश्वर का नवरात्रि संदेश: इस बार लेना होगा बड़ा प्रण

छतरपुर  नवरात्र के पावन अवसर पर बाबा बागेश्वर ने भक्तों को एक खास संदेश दिया. बाबा ने कहा कि इस नवरात्र में हम सबको यह प्रण लेना चाहिए कि भारत में हो रहे लव जिहाद को रोकें. उनका कहना था कि सनातन धर्म की बेटियां सुरक्षित रहें, हमारी परंपराओं पर कोई आंच न आए, यही हमारी जिम्मेदारी है. बाबा बागेश्वर का संकल्प भक्तों की भीड़ बाबा के आसपास उमड़ पड़ी और उन्होंने ध्यानपूर्वक सुना. बाबा बागेश्वर ने भावुक होकर कहा, “हमारे देश की बेटियां हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं. उन्हें बचाना हम सबका कर्तव्य है. जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, विदेशी ताकतें हमारी परंपराओं में सेंध लगाती रहेंगी.” इस मौके पर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री भी उपस्थित थे. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “हे भगवती, इस नवरात्र में हम सब यह वचन ले रहे हैं कि लव जिहाद जैसी घटनाओं को हम पूरी ताकत से रोकेंगे. हमारा जीवन चाहे जैसा भी हो, वह सनातन धर्म की सेवा में समर्पित रहेगा.” धीरेंद्र शास्त्री बोले- हिंदू हज नहीं जाते, तो मुस्लिमों को गरबा में नहीं आना चाहिए गरबा पंडालों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत में बवाल मचा हुआ है. छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जिस तरीके से सनातन हिंदू विचारधारा के लोग हज यात्रा में नहीं जाते हैं, तो मुस्लिमों को भी गरबा में नहीं आना चाहिए.  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आयोजिकों को सलाह दी है कि गरबा समारोह के मुख्य दरवाजे पर छिड़कने के लिए गोमूत्र रखना चाहिए. यह बात बागेश्वर महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने गृह जिले छतरपुर जिले के लवकुश नगर स्थित धार्मिक स्थल बंबरबेनी माता के दर्शन करने के दौरान कही.  मध्य प्रदेश के बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा है कि गैर-हिंदुओं का भी नवरात्रि उत्सव और 'गरबा' नृत्य कार्यक्रमों में भाग लेने का स्वागत है, बशर्ते वे फिर से सनातन धर्म अपनाएं और माथे पर तिलक लगाने और आरती करने जैसे नियमों का पालन करें.   विधायक शर्मा ने कहा कि अगर मुसलमान या ईसाई फिर से देवी की पूजा करना चाहते हैं, तो उन्हें एक चम्मच गंगाजल पीने और तुलसी का पत्ता खाने पर हिंदू धर्म में स्वीकार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर कुछ लोगों को लगता है कि उनके माता-पिता ने हिंदू धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाकर गलती की है और वे फिर से हिंदू बनना चाहते हैं, तो वे अभी ऐसा कर सकते हैं क्योंकि "सभी का DNA हिंदू है". हालांकि, भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए चेतावनी दी कि अगर कोई गरबा स्थलों पर (प्रवेश पाने के लिए) छल करने की कोशिश करता पाया गया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. देवी दुर्गा और उनके विभिन्न रूपों की पूजा को समर्पित नवरात्रि उत्सव 22 सितंबर से शुरू हो चुका है. इस उत्सव के दौरान गुजरात का एक जीवंत नृत्य गरबा खेला जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागी शामिल होते हैं. विश्व हिंदू परिषद  सहित कई हिंदूवादी संगठन ऐसे आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश का विरोध करते रहे हैं ताकि 'लव जिहाद' के प्रयासों को रोका जा सके. बेटियों की सुरक्षा के लिए जागरूकता भक्तों ने बाबा के शब्दों को अपने दिल में जगह दी और कई लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया. उन्होंने कहा कि वे अपने आसपास के लोगों को जागरूक करेंगे और हर संभव प्रयास करेंगे कि बेटियां सुरक्षित रहें और सनातन धर्म की परंपराएं मजबूती से बनी रहें. बाबा बागेश्वर ने कहा कि नवरात्र सिर्फ मां भगवती की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा समय है जब हम अपने जीवन में अच्छे संस्कार, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए संकल्प लें. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को सही शिक्षा दें, समाज में जागरूकता फैलाएं और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने में सक्रिय भूमिका निभाएं. इस अवसर पर भक्तों ने मिलकर माता की आराधना की, मंत्र पढ़े और संकल्प लिया कि वे अपने कर्तव्यों को निभाने में पीछे नहीं हटेंगे. नवरात्र का यह पर्व अब केवल उत्सव का नहीं, बल्कि जागरूकता और सुरक्षा का संदेश देने वाला पर्व बन गया है.

देश का पहला कॉस्मेटिक लेजर इंस्टिट्यूट जयपुर में, लेजर तकनीक की नई क्रांति

जयपुर  राजधानी जयपुर स्थित प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह अस्पताल में लोगों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए लगातार नए नवाचार किए जा रहे रहें हैं. इसको लेकर अस्पताल के अलग-अलग विभागों में बीमारियों के लिए इंस्टीट्यूट और सेंटर शुरू किए जा रहे हैं. हाल ही में सवाई मानसिंह अस्पताल में जेनेटिक टेस्टिंग लैब और टॉक्सिकोलॉजी लैब की शुरुआत की गई थी.अब इस अस्पताल में खूबसूरत दिखने की चाह रखने वालों और चर्म रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए देश का पहला सरकारी कॉस्मेटिक लेजर इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी की शुरुआत होने वाली है. कॉस्मेटिक लेजर इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी की शुरूआत होने के बाद चर्म रोग से संबंधित बिमारियों के मरीजों को इसका सबसे ज्यादा फायदा लाभ मिलेगा. सवाई मानसिंह अस्पताल के चरक भवन में 7 करोड़ रुपए की लागत से इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी तैयार हो गया है, जो 3 महीने में शुरू हो जाएगा. इंस्टीट्यूट में झड़ते  बालों को दोबारा उगाने, चेहरे पर मस्से हटाने, अनचाहे बालों को खत्म करने, बालों की ग्रोथ बढ़ाने, घाव भरने, सफेद दाग, जन्म से बने दाग-धब्बों, टेंटू और पिगमेंटेशन जैसी सभी प्रकार की परेशानियों का इलाज एक्साइमर तकनीक से होगा. इन खास मशीनों से होगा चर्म रोग का इलाज  सवाई मानसिंह अस्पताल में तैयार हो रहे इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी में इलाज के लिए खासतौर पर लेजर और कॉस्मेटिक प्रोसिजर से जुड़े सभी लोगों का इलाज आधुनिक मशीनों से बेहतर तरीके से होगा. जिसमें चमड़ी पर रोगों की गहराई से जांच के लिए डर्मास्कोप, बाल झड़ने का कारण, मोटाई और स्कैल्प की जांच के लिए ट्राइकोस्कोप, स्कीन से अनचाहे बाल हटाने लिए डायोड लेजर, चेहरे के खड्डे भरने और मस्से हटाने के लिए फ्रेक्शनल कार्बन डाइ ऑक्साइड, सफेद दागों का इलाज, फोटोथेरेपी, टेटू और बर्थमार्क जैसे चिन्हों को हटाने के लिए एनडी-याग लेजर से इलाज की सुविधा लोगों को यहां मिलेगी. चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी संस्थान सरकारी स्तर पर देश का पहला और विदेश स्तर पर लंदन के बाद दूसरा इंस्टीट्यूट होगा. इंस्टीट्यूट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना है, जहां इलाज के साथ डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी. सवाई मानसिंह अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल के चर्म रोग विभाग में हर साल करीब चार लाख मरीज इलाज के लिए आते हैं. बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल में इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी शुरू की जा रही है.  इसके बाद लाखों लोगों को हर साल इसका फायदा मिलेगा. इंस्टीट्यूट शुरू होने के बाद लोगों को ख़ासतौर पर सफेद दाग के लिए एक्साइमर से आसान इलाज के साथ रिसर्च सुविधा, रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बेहतरीन दवाईयां उपलब्ध होगी. इंस्टीट्यूट शुरू होने के बाद निजी कॉस्मेटिक सेंटर्स पर महंगा इलाज से राहत मिलेगी और पैसे की बचत भी होगी. इंस्टीट्यूट में लोगों के लिए सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिलेगी. अभी फिलहाल चरक भवन के इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी में फर्नीचर इंस्टालेशन और अन्य तमाम कार्य चल रहे हैं, जो जल्द ही पूरे हो जाएंगे.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तिरुनेलवेली में 1100 एकड़ जमीन अब वक्फ प्रॉपर्टी नहीं

तिरुनेलवेली तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में एक मस्‍जि‍द गांव की 1,100 एकड़ जमीन पर दावा ठोक रही थी. कह रही थी क‍ि यह वक्‍फ प्रॉपर्टी है और इसे सिर्फ मुस्‍ल‍िम धर्म के कार्यों में इस्‍तेमाल क‍िया जाना चाह‍िए. मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो मद्रास हाईकोर्ट ने एक झटके में खार‍िज कर द‍िया. साफ कहा क‍ि वक्‍फ प्रॉपर्टी सिर्फ 2.34 एकड़ जमीन है, जो 1712 में मदुराई सामस्थानम के तत्कालीन शासक ने दान की थी. कांस्य पत्रक पर इसके सबूत हैं, लेकिन बाकी जमीन बिल्‍कुल मस्‍ज‍िद की नहीं है. इस मामले में मस्जिद ने दावा किया था कि यह विशाल क्षेत्र वक्फ संपत्ति में आता है और इसका उपयोग धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए. मस्जिद की ओर से यह तर्क दिया गया था कि पूरे 1,100 एकड़ क्षेत्र पर उनके धार्मिक अधिकार हैं. इसके विपरीत, जमीन पर अधिकार रखने वाले अन्य पक्षों ने इसे विवादित बताया और अदालत में चुनौती दी. मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की गहन सुनवाई के बाद इतिहास और दस्तावेजों को आधार मानते हुए निर्णय दिया. अदालत ने कहा कि जब इतिहास कांस्य पत्रों में बोलता है, तो झूठे दावे स्वतः ही पिघल जाते हैं. 1712 का कांस्य पत्रक स्पष्ट रूप से दिखाता है कि केवल 2.34 एकड़ जमीन का ही मस्जिद को अधिकार है और बाकी भूमि किसी अन्य पक्ष की है या सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई थी. मस्‍ज‍िद के ल‍िए झटका अदालत ने इस फैसले में यह भी दिखाया कि वक्फ संपत्ति की वास्तविकता और इसके कानूनी दावे को इतिहास और प्रमाण पत्रों के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए. इस प्रकार, बड़े दावे और आरोपों के बावजूद न्यायालय ने ऐतिहासिक दस्तावेजों को सर्वोच्च माना. मस्जिद के लिए यह फैसला एक झटका है, क्योंकि उसका दावा जमीन के बड़े हिस्से पर था. अब मस्जिद केवल उसी जमीन का उपयोग कर सकती है, जो 1712 में दिये गए मण्यम के तहत प्रमाणित है. अदालत के फैसले से यह भी संदेश गया कि धार्मिक संस्थाओं द्वारा किए गए वक्फ दावे कानूनी और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर ही मान्य होंगे. प्रमाणों के आगे नहीं ट‍िक पाया विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वक्फ संपत्ति और ऐतिहासिक दस्तावेजों के महत्व को उजागर करता है. यह दिखाता है कि लंबे समय से किए जा रहे दावे भी कानूनी प्रक्रिया और प्रमाणों के सामने टिक नहीं पाते. इस फैसले के बाद तिरुनेलवेली जिले में भूमि विवादों पर भी प्रभाव पड़ सकता है. अन्य वक्फ संस्थाओं और धार्मिक संगठनों को यह संकेत मिलेगा कि उनके दावे के लिए ऐतिहासिक प्रमाण और कानूनी दस्तावेज अनिवार्य हैं. झूठे दावे सच नहीं हो जाते मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला वक्फ संपत्ति के मामलों में इतिहास और दस्तावेजों की अहमियत को रेखांकित करता है और भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायालय के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन कर सकता है. अदालत ने कहा कि झूठे दावे और अतिशयोक्ति की कोई जगह नहीं है, और प्रमाणों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा। यह निर्णय धार्मिक संस्थाओं के लिए एक चेतावनी भी है कि वे अपने दावों में ईमानदारी और सटीकता दिखाएं.

अब ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सेवाएं बिना लाइन के: 51 फेसलेस सुविधाएं, प्रदूषण जांच के लिए 600 केंद्र उपलब्ध

भोपाल  परिवहन विभाग में नागरिकों को ऑनलाईन सुविधा देने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। विभाग द्वारा वर्तमान में 51 प्रकार की फेसलेस सुविधा प्रदान की जा रही है। इस तरह की सुविधा देने वाला मध्यप्रदेश देश में दूसरा राज्य है। नागरिकों द्वारा ऑनलाइन सुविधा लेने के लिये अपलोड किये गये दस्तावेजों में कमी होने पर विभाग द्वारा आवेदक को एसएमएस के माध्यम से सूचित भी किया जा रहा है। इस सुविधा से नागरिक किसी प्रकार की कमी होने पर दस्तावेज को पुन: अपलोड कर पा रहे है। विभाग ने जिलेवार परिवहन कार्यों की समीक्षा के लिये एमआईएस कंसोल का उपयोग शुरू किया है। प्रदेश में चलने वाले वाहनों से होने वाले प्रदूषण नियंत्रण के लिये उन्नत पीयूसीसी 2.0 प्रणाली शुरू की है। इस समय प्रदेश में 600 से ज्यादा प्रमाणिक परीक्षण केन्द्र संचालित किये जा रहे है। सभी केन्द्रों को वाहन पोर्टल के पीयूसीसी संस्करण 2.0 के साथ एकीकृत किया गया है। इस सुविधा से नागरिकों को पीयूसी प्रमाण पत्र रियल टाईम पर सिस्टम द्वारा जारी किया जा रहा है। प्रदेश में वाहन परमिट समस्या समाधान के लिये क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण का पुनर्गठन कर संभागीय आयुक्तों को परमिट जारी करने का अधिकार दिया गया है। प्रदेश में 2700 से अधिक स्थाई परमिट होने से अस्थाई परमिट पर निर्भरता कम हुई है। इस व्यवस्था से आरटीओ एवं प्रवर्तन के काम में कमी आई है। पारदर्शिता के उपाय परिवहन विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में ट्रांसपेरेंसी लाने के लिये डिजिटल पेमेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। प्रवर्तन के दौरान पीओएस मशीन के माध्यम से पारदर्शी चालान जारी कर समय पर राजस्व लेखा संधारित किया जा रहा है। प्रवर्तन कर्मचारियों की निगरानी के लिये विभाग द्वारा एप विकसित किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं सुलभ तरीके से नागरिकों को उपलब्ध करवाने के लिये एमपी ऑनलाइन को अधिकृत किया गया है।  

अक्षय कुमार की दो टूक: ईमानदारी से कमाया, इसलिए टैक्स देना गर्व की बात

मुंबई  अक्षय कुमार इंडस्ट्री के उन एक्टर्स में से एक हैं जो एक साल में कई सारी फिल्में करने के लिए मशहूर हैं. जिसमें से उनकी कई फिल्में सुपरहिट, तो कुछ फिल्में फ्लॉप भी होती हैं. अक्षय इंडस्ट्री के सबसे ज्यादा कमाई करने और टैक्स भरने वाले एक्टर्स में से भी हैं. ऐसे में कई बार एक्टर के ऊपर पैसों की सोच रखने का भी आरोप लगता है. अक्षय पर लगा पैसों की सोच रखने का आरोप, क्या बोले एक्टर? हाल ही में अक्षय ने खुद अपनी कमाई पर बात करते हुए उन लोगों पर पलटवार किया है जो उनके ऊपर पैसों की सोच रखने का आरोप लगाते हैं. एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में एक्टर ने कहा, 'अगर पैसे कमाए हैं तो लूटकर नहीं कमाए. मैंने काम करके कमाए हैं. 8 साल से मैं सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाला इंसान हूं. तो मैं सिर्फ पैसों की सोच रखने वाला नहीं हो सकता. पैसा जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है, आपको ये सोचने की जरूरत है.' 'पैसा कमाता हूं, टैक्स देता हूं और उन पैसों से काफी सेवा भी करता हूं. ये मेरा धर्म है. बाकी चाहे कुछ भी कहे, मैं कुछ विश्वास नहीं करता. अगर आपको रिबन काटने से पैसे मिलते हैं तो क्या दिक्कत है? वो पैसे देने को तैयार है? जबतक आप किसी से चोरी नहीं कर रहे, जबतक आप किसी को लूट नहीं रहे हो, जबतक आप मेहनत कर रहे हैं, तबतक कोई दिक्कत नहीं है. मुझे नहीं फर्क पड़ता अगर कोई मुझे पैसों की सोच रखने वाला इंसान कहे.' 'जॉली एलएलबी 3' दिखा रही कमाल, क्या हैं अक्षय के आने वाले प्रोजेक्ट्स? अक्षय इन दिनों अपनी लेटेस्ट रिलीज फिल्म 'जॉली एलएलबी 3' को लेकर भी सुर्खियों में बने हुए हैं. उनकी और अरशद वारसी की फिल्म ने रिलीज के बाद पहले वीकेंड करीब 50 करोड़ की कमाई कर डाली है. फिल्म को हर तरफ से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है. ऐसे में अगर 'जॉली एलएलबी 3' इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो ये पहले हफ्ते में ही 100 करोड़ का आंकड़ा छू लेगी. हालांकि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी. बता दें कि 'जॉली एलएलबी 3' में अक्षय-अरशद के अलावा सौरभ शुक्ला, अमृता राव, हुमा कुरैशी, गजराज राव, राम कपूर और सीमा बिस्वास जैसे एक्टर्स भी फिल्म का हिस्सा हैं. उनकी फिल्म सुभाष कपूर ने डायरेक्ट की है. ये 19 सितंबर के दिन थिएटर्स में रिलीज हुई थी.

हजार साल पुरानी परंपरा: इस मंदिर में नवरात्र के दौरान महिलाओं का प्रवेश निषेध

नालंदा शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह माता रानी के जयकारे गूंज रहे हैं और भक्तगण पूजा-अर्चना में लीन हैं। लेकिन नालंदा जिले के प्रसिद्ध मां आशापुरी मंदिर में आज भी एक अनूठी और सदियों पुरानी परंपरा का पालन किया जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों तक महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित रहता है। गिरियक प्रखंड के घोसरावां गांव स्थित इस मंदिर में नवरात्रि के दौरान महिलाओं को मंदिर परिसर में भी प्रवेश की अनुमति नहीं होती। यही नहीं, पुरुष श्रद्धालुओं के लिए भी इन नौ दिनों में गर्भगृह के दर्शन वर्जित रहते हैं। मंदिर के पुजारी जनार्दन उपाध्याय के मुताबिक, यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है। तांत्रिक अनुष्ठानों के कारण होता है ऐसा पुजारियों का कहना है कि नवरात्रि में होने वाली साधनाएं तंत्र-मंत्र पर आधारित होती हैं, जिनके प्रभाव से नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान यदि महिलाएं उपस्थित हों तो उन पर इन शक्तियों का असर हो सकता है और पूजन विधि में विघ्न उत्पन्न हो सकता है। नवरात्रि के अंतिम दिन विशेष हवन के आयोजन के बाद ही मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। तब जाकर महिलाओं और पुरुषों को गर्भगृह के दर्शन का अवसर मिलता है। इस हवन का उद्देश्य मंदिर की ऊर्जा को शुद्ध करना होता है। नौवीं शताब्दी से चली आ रही परंपरा स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से यह परंपरा चली आ रही है। यहां शारदीय नवरात्र में महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। जानकार बतातें हैं कि आशापूरी मंदिर में महिलाओं का नवरात्र में प्रवेश पर रोक पहली बार नौवीं शताब्दी में लगाई गई थी। उस समय यह क्षेत्र विश्व के प्रमुख बौद्ध साधना केंद्रों में से एक था। बौद्ध भिक्षु और तांत्रिक साधक यहां आकर गहन साधना किया करते थे। नवरात्रि के दौरान तांत्रिक अनुष्ठान की परंपरा तब से ही बनी हुई है। माना जाता है कि मां आशापुरी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, इसी कारण इस मंदिर को 'आशापुरी' कहा जाता है। बिहार ही नहीं, बंगाल, झारखंड और ओडिशा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा का विधान बता दें कि आदिशक्ति की उपासना का पावन पर्व नवरात्रि आज यानी 22  सितंबर से आरंभ हो गया है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा का विधान है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां दुर्गा की साधना भक्तों को शक्ति और आत्मबल प्रदान करती हैं। मां शैलपुत्री की आराधना करने से सांसारिक सुख और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साधक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।  

जीएसटी सुधार लागू, ओपी चौधरी ने कहा- PM मोदी के नेतृत्व में ही संभव

रायपुर पूरे देश में आज से गुड्स एन्ड सर्विस टैक्स (GST) रिफॉर्म लागू हो गया है. दिवाली पर्व से पहले उपभोक्ताओं को मिली सौगात से बाजार गुलजार हो गया है. जीएसटी रिफॉर्म को लेकर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बड़ा बयान दिया है. वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि आज से GST की नई दरें लागू होगी. कई समान सस्ते होंगे. GST 2.O रिफार्म के माध्यम से पीएम मोदी और निर्मला सीता रमन ने देश के 140 करोड़ जनता को एक ऐतिहासिक उपहार दिया है. 12 लाख तक की इनकम टैक्स छूट के बाद सरकार ने अब इससे भी बड़ा तोहफ़ा सभी वर्गों के लोगों को दिया है. रोज़मर्रा की जरूरत की चीज़ें जैसे तेल, शैम्पू, साबुन, टूथब्रश, इसके साथ ही एसी, फ्रिज, टीवी और किसानों के लिए ट्रैक्टर और कृषि यंत्र पर दाम घटा दिए गए हैं. इस ऐतिहासिक फैसले से आम जनता की बचत बढ़ेगी और उनकी क्रय शक्ति (पर्चेसिंग पावर) मजबूत होगी. अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलेगी. ऐसा सिर्फ PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो सकता है. साथ ही, उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि जिन श्रेणियों में कीमतें कम की गई हैं, उसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए. प्रदेशवासियों को नवरात्री पर्व की दी बधाई वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि शक्ति की भक्ति का पर्व नवरात्री की आज से शुरुआत होने जा रही है. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः, जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता वास करते हैं, ऐसा भाव हमारी संस्कृति में रहा है. इस अवसर पर में सभी मातृ शक्ति को प्रणाम है. मातृ शक्ति के प्रति हमारी सरकार समर्पित है. जिसका एक उदाहरण हमारी महत्वकांशी योजना महतारी वंदन योजना है. इस योजना के लाभान्वित हो रही माताएं सारंगढ़ जिले के दानसरा गांव में श्री राम मंदिर का निर्माण कर रही है. योजना का पैसा आज प्रदेश की 70 लाख महतरियों को मिलने से मातृ शक्ति को नया आत्मविश्वास और ऊर्जा मिली है. उन्होंने आगे कहा कि जिन माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, उन्हें ग्रामीण बैंक के माध्यम से मातृ शक्ति ऋण योजना के तहत बिना मॉर्गेज के केवल एक प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर 25,000 रुपए तक का लोन उपलब्ध कराया जा रहा है. इस राशि का उपयोग वह सिलाई मशीन खरीदने, छोटा व्यवसाय शुरू करने या किराना दुकान चलाने के लिए कर सकती हैं.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा में राष्ट्रीय स्तर पर नया मानक स्थापित किया

मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना रिकार्ड न्यूनतम 2 रूपए 70 पैसे प्रति यूनिट टैरिफ पर प्रदान कर रही है नवकरणीय ऊर्जा विश्व के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का मार्गदर्शक बनेगा भारत और मध्यप्रदेश 5 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है प्रदेश की सौर ऊर्जा क्षमता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन को वर्चुअली किया संबोधित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन मध्यप्रदेश में करने का दिया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मुझे गर्व है कि मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना के शुभारंभ के साथ ही नवकरणीय ऊर्जा में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नया मानक स्थापित किया है। यह भारत की पहली परियोजना है, जो रिकार्ड न्यूनतम 2 रूपए 70 पैसे प्रति यूनिट टैरिफ पर स्थिर और डिस्पैचेबल नवकरणीय ऊर्जा प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश में ऊर्जा के विभिन्न स्त्रोतों की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2025 तक सौर क्षमता लगभग 5 हजार मेगावाट पर पहुंच चुकी है, जिसे वर्ष 2035 बढ़ाकर 33 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार द्वारा इंडस्ट्रियल प्रमोशन पालिसी, रिन्यूएबल एनर्जी पालिसी 2025 और पम्प हाइड्रो पालिसी 2025 के अंतर्गत औद्योगिक निवेश के लिए कई आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को नई दिल्ली के होटल ताज में आयोजित सीआईआई अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केन्द्रीय नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  प्रहलाद जोशी, मालदीव के पर्यावरण एवं पर्यटन राज्यमंत्री  मुवियाथ मोहम्मद, सीआईआई और ई.वाय इंडिया के पदाधिकारी एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अगला अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन मध्यप्रदेश में आयोजित करने के लिए सभी को आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हम नेट जीरो के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब केवल भारत का दिल नहीं, बल्कि निर्माण गतिविधियों का केन्द्र भी बन रहा है। यह समय हमारे लिए निर्णायक है, वैश्विक परिस्थितियाँ बदल रही हैं और प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। 'मेक इन इंडिया' और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करते हुए एक ऐसे भारत की नींव रखी जा रही है जो सुरक्षित, सक्षम और विश्व को मार्गदर्शन प्रदान करने की सामर्थ्य रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हम सभी नेट जीरो के लक्ष्य की ओर दृढ़ संकल्पित होकर कदम बढ़ा रहे हैं। आने वाले वर्षों में भारत और मध्यप्रदेश विश्व के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का मार्गदर्शक बनेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था अब दुनिया की आशा और भरोसे का केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि आज भारत को वैश्विक स्तर पर नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता। हमारी मातृभूमि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की आशा और भरोसे का केंद्र बन चुकी है। भारत आज ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, आईटी, कृषि, फार्मा, रक्षा और अंतरिक्ष हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है एवं भारत को स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो और 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का लक्ष्य रखा है। देश 251.5 गीगावाट नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता को पार कर चुका है और सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता में 100 गीगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में से एक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन मिशन', 'पीएम-कुसुम योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और स्मार्ट ग्रिड जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर, स्वच्छ और सतत् दिशा प्रदान की है। परिवारों को मुफ्त बिजली का लाभ मिला है। मध्यप्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अनूठी उपस्थिति के साथ देश के प्रमुख राज्यों में से एक बन चुका है। यहाँ देश का सबसे बड़ा 'सौर पार्क' रीवा में स्थापित है, जो दिल्ली मेट्रो जैसे महत्वपूर्ण उपक्रमों को ऊर्जा प्रदान करता हैं। साथ ही सांची शहर को देश का पहला सोलर सिटी बनाया गया है और ओमकारेश्वर में भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट कार्यरत है। नीमच में भारत का सबसे बड़ा पंप हाइड्रो पॉवर स्टोरेज प्रोजेक्ट विकसित किया गया है, जो ऊर्जा संग्रहण क्षमता के क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाता है।