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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर नशामुक्त भारत के लिए नमो मैराथन का किया शुभारंभ

बोले, जीएसटी रिफॉर्म से नए रोज़गार का सृजन होगा और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने में मिलेगी मदद मिलेगी  गरीब को राहत देने के साथ हर उपभोक्ता को सभी सुविधाओं से आगे बढ़ाते हुए व्यापारी के कल्याण के मार्ग से भी जुड़ा है जीएसटी रिफॉर्म  लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के उपहार के रूप में हर देशवासी और प्रदेशवासी को जीएसटी रिफॉर्म का गिफ्ट दिया है। इससे जहां एक ओर जरूरी चीजें छात्रों के लिए शिक्षण सामग्री, दूध, दही, घी, पनीर, खाने की वस्तुओं में भारी छूट दी गयी है, वहीं दूसरी ओर नशे और फिजूलखर्ची पर भारी टैक्स लगाया गया है। युवाओं के सपनों को उड़ान देने के लिए बाइक, कार, घर, घर पर लगने वाले स्टील, सीमेंट आदि पर भी छूट दी गयी है। यह घोषणा 3 सितंबर को जीएसटी काउंसिल ने की थी, जिसे 22 सितंबर से पूरे देश में लागू किया जा रहा है। वहीं विजयदशमी पर हर गांव, हर कस्बे और हर जिले में युवाओं को बुराई के प्रतीक पाप, अत्याचार, भ्रष्टाचार, अन्याय और नशे का पुतला जलाना होगा। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आवास पर रविवार को नशामुक्त भारत के लिए नमो युवा रन का शुभारंभ करते हुए कही। नमो मैराथन कालिदास मार्ग से शुरू होकर 1090 चौराहे तक जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत माता की जय के जयकारों से युवाओं को हौसला बढ़ाया।  जीएसटी रिफॉर्म से हर व्यक्ति की खरीद की क्षमता और बाजार की ताकत बढ़ेगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म से देश और प्रदेश का हर गरीब महंगाई से मुक्त और युवा सस्ते में शिक्षण सामग्री खरीद सकेगा। वहीं हर व्यक्ति की खरीद की क्षमता बढ़ेगी, बाज़ार की ताकत बढ़ेगी, नए रोज़गार का सृजन होगा, व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी और रोज़गार के नये अवसर पर भी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह गरीब को राहत के साथ सामान्य उपभोक्ता को हर प्रकार की सुविधा से आगे बढ़ाते हुए व्यापारी के कल्याण के मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में हर प्रदेशवासी को जीएसटी रिफॉर्म से अवगत कराना होगा। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 2 अक्टूबर यानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती तक भारतीय जनता पार्टी पूरे देश भर में 'सेवा पखवाड़ा' मना रही है। इस सेवा पखवाड़ा का शुभारंभ प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश के धार से “स्वस्थ नारी, सशक्त समाज” थीम के साथ किया। प्रधानमंत्री का स्पष्ट मानना है कि यदि नारी स्वस्थ होगी तो परिवार सशक्त होगा, समाज सशक्त होगा और राष्ट्र भी सशक्त बनेगा। इसी सोच के आधार पर सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम पूरे देश में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने हर जनपद में रक्तदान शिविर आयोजित कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई प्रदान की। रक्तदान के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूरे देशभर में स्वच्छता अभियानों को भी गति दी। स्वास्थ्य शिविरों और स्वच्छता कार्यक्रमों के जरिए सेवा पखवाड़ा को “विकसित भारत” की संकल्पना से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। युवा शक्ति सेवा पखवाड़ा के तहत नमो मैराथन से जुड़ रही सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के अवसर पर देशवासियों से “विकसित भारत” का संकल्प लेने और पंच प्रण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि गुलामी के अंशों को समाप्त करना होगा, अपनी विरासत का सम्मान करना होगा, सेना व वर्दीधारी बलों के प्रति आदर रखना होगा, सामाजिक समता के निर्माण के लिए कार्य करना होगा और अपने नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा। यही पंच प्रण भारतवासियों को विकसित भारत की यात्रा का सारथी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इसी प्रेरणा से उत्तर प्रदेश ने 'विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश' अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। अभियान को प्रदेश में युवाओं, किसानों, श्रमिकों, व्यापारियों और बुद्धिजीवियों का अपार समर्थन मिल रहा है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में योगदान देने को तैयार है। आत्मनिर्भरता को विकसित होने की कुंजी बताते हुए उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर समाज स्वस्थ समाज से ही बनता है और ऐसे आयोजनों जैसे 'नमो मैराथन' से समाज को नई दिशा मिलती है।  वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री ने देश में स्वास्थ्य और युवा कल्याण से जुड़े कई अभियानों को गति दी। विश्व योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, ‘खेलो इंडिया’, ‘फिट इंडिया मूवमेंट’, ‘सांसद खेलकूद प्रतियोगिताएं’ जैसे अभियानों से युवाओं को प्रेरणा मिली। साथ ही ‘मिशन रोजगार’ के जरिए युवाओं के लिए अवसर सुनिश्चित किए गए। आज वही युवा शक्ति सेवा पखवाड़ा के तहत 'नमो मैराथन' से जुड़ रही है। युवा शक्ति आगे बढ़ती है तो राष्ट्र के लिए गौरव और यदि नशे की आेर बढ़ती है तो उसका पतन मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति अपार ऊर्जा का प्रतीक है। यदि यह सकारात्मक दिशा में बढ़ेगी तो राष्ट्र के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगी, लेकिन यदि नशे की ओर मुड़ेगी तो उसका पतन निश्चित है। ‘नमो मैराथन’ के जरिए युवाओं से नशामुक्ति का आह्वान भी किया जा रहा है। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती और 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन होंगे। इसी क्रम में नमो मैराथन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें युवा मोर्चा के कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। इस बार संयोग से 2 अक्टूबर को ही विजयादशमी भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर बुराइयों को समाप्त कर एक सशक्त और समर्थ भारत की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रतीक होगा। उन्होंने युवाओं से अनुशासन और शालीनता के साथ कार्यक्रम में शामिल होने का आह्वान किया और कहा कि अनुशासन ही युवा की सबसे बड़ी ताकत है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव, मेयर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ला, डॉ. नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।   

न्यायालय की दखल से खुला रास्ता, पैरा एथलीट को मिली चैंपियनशिप में खेलने की मंजूरी

दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट के दखल की वजह से एक एथलीट वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग ले पाएगा। यह चैंपियनशिप 22 सितंबर से नई दिल्ली में शुरू हो रही है। पैरा ओलिंपिक कमिटी ऑफ इंडिया की चूक की वजह से इस खिलाड़ी का नाम चैंपियनशिप के लिए चुने गए एथलीटों की सूची में नहीं आ पाया था। निकल चुकी लास्ट डेट जस्टिस सचिन दत्ता ने 18 सितंबर को श्रवण कुमार की याचिका पर पारित आदेश में कहा कि वैसे तो एथलीटों की लिस्ट जमा करने की अंतिम तारीख पहले ही निकल चुकी है। पर, यह देखते हुए कि यह इवेंट नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है, उम्मीद है कि संबंधित आयोजन समिति वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भागीदारी के मकसद से याचिकाकर्ता का नाम शामिल कराने के लिए गंभीर प्रयास करेगी। कोर्ट ने कमिटी को दिए निर्देश कोर्ट ने पैरा ओलंपिक कमिटी ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि वह संबंधित इंटरनेशनल बॉडी के साथ इस मामले को सख्ती से आगे बढ़ाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि याचिकाकर्ता का नाम आगामी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम में शामिल हो। केंद्र से भी इसमें मदद की उम्मीद जताई गई है। मामले में याचिकाकर्ता का पक्ष एडवोकेट स्वास्तिक सिंह ने रखा तो केंद्र और अन्य प्रतिवादियों के लिए एडवोकेट रुचिर मिश्रा और नवीन कुमार चौधरी पेश हुए। इस कारण से नहीं अपडेट हुआ खिलाड़ी का नाम याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि उक्त चैंपियनशिप के लिए चुने गए खिलाड़ियों की सूची से उसके नाम को गलत तरीके से बाहर कर दिया गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पैरा ओलिंपिक कमिटी ऑफ इंडिया ने डिस्कस थ्रो कैटिगरी में उसकी रैंकिंग नहीं भेजी जिसकी वजह से वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स बॉडी ने याचिकाकर्ता की रैंकिंग अपडेट नहीं की। यह चैंपियनशिप 22 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दी दलील 2025 दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने 7वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में 41.34 मीटर का थ्रो किया, जो तय मिनिमम एलिजिबिलिटी स्टैंडर्ड (एमईएस) 29.80 मीटर से काफी ज्यादा है। प्रदर्शन-आधारित एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करने के बावजूद, याचिकाकर्ता को आगामी वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए नहीं चुना गया ।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्य स्तरीय वन्य-प्राणी सप्ताह-2025 का आयोजन एक से सात अक्टूबर तक किया जायेगा

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 27 सितम्बर प्रथम आओ-प्रथम पाओ के आधार पर प्रतिभागियों को दिया जायेगा प्रवेश भोपाल  वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में राज्य स्तरीय वन्य-प्राणी सप्ताह-2025 का आयोजन एक से सात अक्टूबर तक किया जायेगा। राज्य स्तरीय वन्य-प्राणी सप्ताह में विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा। इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिये रजिस्ट्रेशन कराने की अंतिम तिथि 27 सितम्बर, 2025 है। राज्य स्तरीय वन्य-प्राणी सप्ताह में छात्र-छात्राओं के लिये गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा। इनमें 'चित्रकला, भारत के वन्य-जीव, उनका रहवास एवं आपसी संचार' विषय पर फोटो प्रदर्शनी प्रतियोगिता, पक्षी अवलोकन शिविर, जागरूकता के लिये सृजनात्मक कार्यशाला-सह-प्रतियोगिता, महाविद्यालयीन विद्यार्थी वाद-विवाद, तत्कालीन कहानी, कथा-वाचन, खजाने की खोज, मेहंदी, पॉम पेंटिंग, फोटोग्राफी, रंगोली, युवा संसद, रन फॉर वाइल्ड लाइफ, शिक्षक वाद-विवाद, रेस्क्यू एवं वन्य-जीव संरक्षण तथा अनुश्रवण के उपकरणों से संबंधित कार्यशाला, वाइल्ड लाइफ एण्ड नेचर एक्सपो, विद्यालयीन वाद-विवाद प्रतियोगिता, मानव-वन्य-जीव-सह-अस्तित्व, मिशन लाइफ के साथ ही से नो टू प्लास्टिक से संबंधित विषयों पर "वॉक थ्रू क्विज कम एग्जीवीशन और टोडलर वॉक प्रतियोगिता का आयोजन होगा। कार्यक्रम स्थल पर प्रतिभागियों को प्रथम आओ-प्रथम पाओ के आधार पर प्रवेश दिया जायेगा। वन्य-प्राणी सप्ताह में विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी वन विहार स्थित विहार वीथिका में लगायी जायेगी। प्रदर्शनी के अवलोकन के लिये भोपाल स्थित महाविद्यालय, विद्यालयों के छात्र-छात्राओें को आईडी कॉर्ड पर गेट क्रमांक-2 से नि:शुल्क पैदल प्रवेश दिया जायेगा। अन्य जानकारी के लिये वन विहार के सहायक संचालक एवं कार्यक्रम समन्वयक मोबाइल नम्बर-9424790615, इकाई प्रभारी पर्यटन रेंज ऑफिसर मोबाइल नम्बर-9424790611 और सहायक समन्वयक मोबाइल नम्बर-9424790613 से सम्पर्क किया जा सकता है।  

चुनावी साख पर सवाल: मध्य प्रदेश में फर्जीवाड़े का नया खुलासा

नागौद लोकतंत्र के मंदिर को शर्मसार करने वाला मामला मापला जिला के नागौद विकासखंड से सामने आया है। वार्ड क्रमांक 6, गढ़ी टोला में पूर्व पार्षद और विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश पांडे उर्फ फूलन महाराज के मकान क्रमांक 122 में कुल 89 मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं। इनमें अलग-अलग जातियों और परिवारों के लोग शामिल हैं। इस मामले ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। कुछ ऐसे रची साजिश स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला महज लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश प्रतीत होता है। ओमप्रकाश पांडे ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर बीएलओ से मिलीभगत कर यह फर्जीवाड़ा कराया। रजिस्टर में मकान संख्या का क्रम भी अव्यवस्थित रखा गया, ताकि यह खेल आसानी से पकड़ में न आए।   एक ही मकान में दर्ज 89 मतदाता विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही मकान में इतनी बड़ी संख्या में मतदाता दर्ज करने से किसी भी उम्मीदवार को कृत्रिम बढ़त दिलाई जा सकती है। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की उदासीनता और संभावित मिलीभगत पर भी गंभीर सवाल खड़ा करती है। सूची में दर्ज नामों में शंकर प्रसाद, चुरेमा कुमार, प्रिया पत्नी सुरेगा कुमार, संदीप पिला, विमला पति मयूरा प्रसाद, आजाद बुनकर, अमर चौरसिया, ज्योति कुमार, दीपक शर्मा, रश्मि, रोशनी और अन्य शामिल हैं।   चुनावी साख पर सवाल लोगों का सवाल है कि क्या इतने विविध लोग व एक साथ इतने कमरों वाले मकान में रह सकते हैं? राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो जनता के मन में यह धारणा मजबूत होगी कि लोकतंत्र अब केवल सत्ता का खेल बन गया है। क्षेत्रीय लोग और सामाजिक संगठन प्रशासन और निर्वाचन आयोग से मांग कर रहे हैं कि इस मामले की तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।  

देर या नीयत? मंदसौर में दो लाख रुपये सिंचाई पर खर्च, ट्रैक्टर विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें

मंदसौर गरोठ वन परिक्षेत्र में अफसरों-कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार का नया उदाहरण पेश किया है। हनुमंतिया बीट में पौधे लगाने के बाद उनकी सिंचाई पर दो लाख चार हजार 48 रुपये खर्च किए गए। लगाए गए बिलों के मुताबिक, इनमें 1 लाख 53 हजार 600 रुपये का भुगतान टैंकर के लिए किया गया, वहीं सिंचाई की मजदूरी का भुगतान 50,448 रुपये रहा। खास बात यह है कि बिल में जो नंबर ट्रैक्टर के बताए गए, वह परिवहन विभाग में बाइक, मोपेड व स्कूटर के नाम पर पंजीकृत हैं, जबकि एक नंबर का तो परिवहन विभाग की वेबसाइट पर भी कोई रिकार्ड नहीं मिल रहा। बता दें मंदसौर वन मंडल के अंतर्गत गरोठ वन परिक्षेत्र की हनुमंतिया बीट में 95.382 हेक्टेयर वन भूमि है। आरोप है कि यहां पदस्थ रहे वनरक्षक, परिक्षेत्र सहायक और वन परिक्षेत्र अधिकारी की मिलीभगत के चलते अभी तक वन क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया है, जबकि कागजों में बिल भी लग रहे हैं। शिकायतकर्ता बालू सिंह निवासी किलगारी ने सूचना के अधिकार के तहत 15 फरवरी 2019 से 22 अप्रैल 2019 के बीच लगाए गए बिलों की पड़ताल की, तो धांधली सामने आई। 8 अप्रैल 2023 को शिकायत के दो साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत का निराकरण नहीं किया गया।

रूस को मिलान-कॉर्टिना खेलों में मिलेगा तटस्थ स्थिति में हिस्सा लेने का मौका: IOC

मिलान रूस के खिलाड़ियों को अगले वर्ष होने वाले मिलान-कॉर्टिना शीतकालीन खेलों में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आइओसी) ने कहा कि उसने कभी भी इजरायल पर प्रतिबंध लगाने पर चर्चा नहीं की। आईओसी ने शुक्रवार को मिलान में कार्यकारी बोर्ड की बैठक के बाद पुष्टि की कि वह पिछले वर्ष पेरिस ओलंपिक खेलों में अपनाई गई प्रणाली का पालन करेगा, जिसके तहत रूस के खिलाड़ियों को व्यक्तिगत तटस्थ खिलाड़ी के रूप में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी जाएगी। आईओसी अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने कहा, ‘‘हमने मिलान-कॉर्टिना खेलों में व्यक्तिगत तटस्थ खिलाड़ियों को लेकर बात की। कार्यकारी बोर्ड बिल्कुल वही दृष्टिकोण अपनाएगा जो पेरिस ओलंपिक खेलों में अपनाया गया था। इसमें कुछ भी बदलाव नहीं हुआ है।’’ रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद आईओसी ने 2023 में रूसी ओलंपिक समिति को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही रूस के खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में व्यक्तिगत तटस्थ खिलाड़ी के रूप में भाग ले रहे हैं। इजरायल के गाजा में हमले के बाद उस पर भी इस तरह का प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। इस बारे में पूछे जाने पर कोवेंट्री ने कहा, ‘‘इस कार्यकारी बोर्ड और किसी अन्य कार्यकारी बोर्ड में हमने एनओसी (राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों) का प्रतिनिधित्व नहीं करने पर चर्चा नहीं की है।’’ आईओसी ने पहले कहा था कि इजरायल ने रूस की तरह ओलंपिक चार्टर का उल्लंघन नहीं किया है, जिसने पूर्वी यूक्रेन के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था।  

सपनों की नौकरी का मौका: MP पुलिस भर्ती सात साल बाद, जल्द देखें कैसे करें आवेदन

भोपाल पुलिस में उप निरीक्षक या सब इंस्पेक्टर (एसआई) और सूबेदार के पद पर चयन की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) इन पदों के लिए अगले सप्ताह विज्ञापन जारी करने जा रहा है। सात वर्ष बाद इन पदों पर भर्ती होने जा रही है। इसके पहले वर्ष 2018 में इन पदों पर भर्ती हुई थी। सात साल तक भर्ती नहीं होने पर एसआई बनने का सपना देख रहे कई युवा अधिकतम उम्र सीमा पार कर चुके हैं। परीक्षा में पहली बार बड़ा बदलाव किया गया है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा के अंकों को जोड़कर प्रावीण्य सूची तैयार की जाएगी।   इसके भर्ती नियम इसी वर्ष जनवरी में शासन ने जारी कर दिए थे। सरकार ने भर्ती नियम तैयार करने में लगभग एक वर्ष लगा दिए, नहीं तो इन पदों पर वर्ष 2024 में ही भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती थी। नियमों में शासन ने प्रारंभिक और लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम भी जारी किया है। चुनौतियों से जुड़े विषयों को दी गई प्राथमिकता पुलिस के सामने नई चुनौतियों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी गई है। उदाहरण के तौर पर प्रारंभिक और लिखित परीक्षा में साइबर अपराध, संचार तकनीक के साथ आने वाली चुनौतियां, इंटरनेट मीडिया, रोबोटिक्स, एआई, जीआइएस, जीपीएस आदि के बारे में भी प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके अतिरिक्त लोकतंत्र और पुलिस, गरीबी और भूख, संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। ऐसी होगी परीक्षा योजना सबसे पहले 100 अंकों की प्रारंभिक परीक्षा होगी जो क्वालिफाइंग होगी। इसमें कुल पदों के 10 प्रतिशत अभ्यर्थियों को चयनित किया जाएगा। इसके बाद 600 अंकों की लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। प्रावीण्य सूची में आने वालों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा जो 100 अंकों की होगी। आखिर में 50 अंकों का साक्षात्कार होगा। इस तरह कुल 750 अंकों के प्राप्तांक के आधार पर प्रावीण्य सूची तैयार की जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण में नई पहल: मध्य प्रदेश से 10 टाइगर की ट्रांसलोकेशन शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के 10 टाइगर उड़ीसा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भेजे जाएंगे। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के निर्देश पर मध्य प्रदेश के टाइगर की अनुवांशिकता और कुनबा बढ़ाने यह निर्णय लिया गया। मध्य प्रदेश ने उड़ीसा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ टाइगर भेजने की तैयारी तेज कर दी है। इन राज्यों के अधिकारियों को टाइगरों की सुरक्षा और प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए पत्र लिखा है। बांधवगढ़, पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व से करीब 10 टाइगरों का चयन कर छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा भेजा जाएगा। इनमें नर-मादा टाइगरों की जोड़ी भी शामिल होगी, ताकि इन राज्यों में टाइगरों की संख्या बढ़ने के साथ ही जीन पूल भी सशक्त हो सके। बांधवगढ़, पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व में टाइगर की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में संख्या बढ़ने से क्षेत्र कम पढ़ रहा है, जिससे टाइगरों का टेरेटरी को लेकर संघर्ष भी बढ़ रहा हैं।  एनटीसीए के निर्देश पर हो रहा है ट्रांसलोकेशन नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। खास बात यह है कि ट्रांसलोकेशन पर आने वाला पूरा खर्च संबंधित राज्य ही वहन करेंगे। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश एक साथ इतने बड़े स्तर पर टाइगरों को बाहर भेजेगा। वर्तमान में प्रदेश में 785 टाइगर हैं, जो देश में सबसे अधिक है और यही कारण है कि यहां से अन्य राज्यों को टाइगर उपलब्ध कराना संभव हो पाया है।  चयनित टाइगरों को अत्याधुनिक वाहनों में सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में अधिकृत पशु चिकित्सक मौजूद रहेंगे और हर चरण पर निगरानी रखी जाएगी, ताकि बाघों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। एमपी में होगी अधिकारियों की ट्रेनिंग ट्रांसलोकेशन को सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश अक्टूबर 2025 में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इसमें छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा के वन अधिकारी मध्य प्रदेश आकर टाइगरों की देखभाल, ट्रैकिंग और संरक्षण से जुड़ी बारीकियां सीखेंगे। यह ट्रेनिंग सेशन भविष्य में भी इन राज्यों को अपने बाघों के बेहतर प्रबंधन में मददगार साबित होगा।

नवरात्रि परंपरा की अनकही कथा, पहला व्रत किससे शुरू किया?

नवरात्रि शक्ति साधना का महापर्व कहा जाता है. नौ दिनों तक मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है. लेकिन सवाल उठता है नवरात्रि व्रत की शुरुआत कब और कैसे हुई? शास्त्र और परंपरा इस सवाल का जवाब दो रूपों में देते हैं. चैत्र नवरात्र का उद्गम प्राचीन काल से जुड़ा है, जबकि शारदीय नवरात्रि की परंपरा समय के साथ स्थापित होकर सबसे लोकप्रिय बन गई. शारदीय नवरात्रि की परंपरा किसने शुरू की? नवरात्रि भारत के सबसे बड़े उत्सवों में से एक है, जिसे शक्ति साधना का पर्व कहा जाता है. नौ दिनों तक मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है लेकिन अक्सर लोग पूछते हैं आखिर सर्वप्रथम नवरात्रि का व्रत किसने रखा था. शास्त्रों और परंपराओं में इसका उत्तर दो भागों में मिलता है एक ओर मार्कंडेय पुराण बताता है कि नवरात्रि व्रत की शुरुआत राजा सूरथ और समाधि वैश्य ने की थी, जबकि दूसरी ओर रामायण में उल्लेख है कि शारदीय नवरात्रि की परंपरा भगवान श्रीराम ने स्थापित की. आइए दोनों पहलुओं को विस्तार से समझते हैं. राजा सूरथ और समाधि वैश्य की कथा: नवरात्रि व्रत का उद्गम मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य यानी दुर्गा सप्तशती में विस्तार से वर्णन मिलता है कि सबसे पहले नवरात्रि का व्रत राजा सूरथ और समाधि वैश्य ने रखा. कथा के अनुसार, राजा सूरथ अपने शत्रुओं से हारकर राज्य से वंचित हो गए. दुखी होकर वे वन में चले गए, जहां उनकी मुलाकात समाधि नामक व्यापारी से हुई. समाधि को भी उसके परिवार ने त्याग दिया था. दोनों ही गहरी पीड़ा में थे और उत्तर खोजते-खोजते मेडा ऋषि के आश्रम पहुंचे. राजा और व्यापारी ने मुनि से अपने दुखों का समाधान पूछा. तब मुनि ने उन्हें बताया कि संसार की सारी शक्तियां आदिशक्ति दुर्गा के अधीन हैं और यदि वे नवरात्र के नौ दिनों तक मां की उपासना करें, तो उनकी मनोकामनाएं पूरी होंगी. राजा सूरथ और समाधि ने पूरे नियम से नौ दिनों तक उपवास और पूजा की. मां दुर्गा प्रसन्न हुईं और राजा को अगले जन्म में साम्राज्य तथा व्यापारी को मोक्ष का वरदान दिया. यही कारण है कि कहा जाता है नवरात्रि व्रत का प्रथम पालन राजा सूरथ और समाधि वैश्य ने किया था. भगवान श्रीराम और शारदीय नवरात्र: आकाल बोधन की परंपरा दूसरी ओर रामायण और लोककथाओं में उल्लेख है कि जब श्रीराम रावण से युद्ध की तैयारी कर रहे थे, तब उन्होंने विजय की कामना से मां दुर्गा की पूजा का संकल्प लिया. समस्या यह थी कि उस समय शरद ऋतु चल रही थी, जबकि नवरात्रि का पर्व पारंपरिक रूप से चैत्र मास में आता था. तब श्रीराम ने शास्त्रों से हटकर शरद ऋतु में ही मां दुर्गा की पूजा आरंभ की. इसे ही आकाल बोधन कहा गया यानी समय से अलग काल में देवी का आवाहन. मां दुर्गा ने श्रीराम को विजय का आशीर्वाद दिया और उसके बाद ही रावण-वध संभव हुआ. इस घटना के बाद से ही शारदीय नवरात्रि की परंपरा शुरू हुई, जो समय के साथ सबसे अधिक लोकप्रिय बन गई. चैत्र और शारदीय नवरात्र: दोनों का महत्व चैत्र नवरात्रि: इसका मूल उद्गम राजा सूरथ और समाधि वैश्य की साधना से जुड़ा है. इसे वसंत ऋतु की शुरुआत और नए साल के आरंभ (हिंदू पंचांग के अनुसार) के रूप में भी मनाया जाता है. वसंत ऋतु की शुरुआत में आता है, इसे आत्मशुद्धि और साधना का पर्व माना जाता है. शारदीय नवरात्रि: भगवान श्रीराम की पूजा और विजय की कथा से जुड़ा. यह आश्विन मास में आता है और आज भारतभर में सबसे अधिक धूमधाम से मनाया जाता है. शरद ऋतु में आने वाला यह नवरात्रि शक्ति, विजय और देवी की कृपा का प्रतीक बन गया. दोनों ही पर्व का आधार एक ही है आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना, लेकिन इनके स्वरूप और महत्ता समय के साथ अलग-अलग रूप में स्थापित हुए.इस तरह नवरात्रि का उद्गम चैत्र मास में हुआ, लेकिन समय के साथ शारदीय नवरात्रि सबसे बड़ी और लोकप्रिय परंपरा बन गया. यही कारण है कि आज लोग इसे शक्ति साधना, विजय और आस्था के महापर्व के रूप में मनाते हैं. इस तरह शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि व्रत की प्राचीन परंपरा राजा सूरथ और समाधि वैश्य से जुड़ी है, लेकिन शारदीय नवरात्रि की परंपरा भगवान श्रीराम ने शुरू की, जब उन्होंने रावण से युद्ध से पहले मां दुर्गा की पूजा की. यही वजह है कि आज शारदीय नवरात्रि को विजय, शक्ति और आस्था का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है.

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