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विदेशी प्रतिनिधियों ने देखा इंदौर का ऐतिहासिक वैभव, BRICS सम्मेलन के दौरान होलकर इतिहास से हुए रूबरू

इंदौर  इंदौर में चल रहे ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भाग लेने आए अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों के लिए बुधवार की सुबह कुछ खास थी। उनके लिए एक बार फिर शहर के ऐतिहासिक स्थलों का इतिहास जीवंत किया गया। राजवाड़ा पैलेस में पुराने समय में लगने वाले दरबार की तरह हरकारों की गूंज सुनाई दी और शास्त्रीय संगीत की स्वर-लहरियां गूंजीं।  ब्रिक्स सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उनके लिए सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। पहले यह वॉक बोलिया सरकार छत्री से होना थी, लेकिन उसके बजाय मेहमान साढ़े छह बजे सीधे राजवाड़ा पहुंचे। यहां उनके लिए गोल मेज लगाई गई थी। गोपाल मंदिर की सुंदरता देख मेहमान हुए मुग्ध इतिहासकार जफर अंसारी ने इंदौर की महारानी देवी अहिल्या के शासनकाल के अलावा होलकरकाल से जुड़े इतिहास के तथ्य बताए। राजवाड़ा में जब दरबार लगता था, तब दूसरे राज्यों के राजाओं को किस तरह हरकारा देकर सम्मानित किया जाता था, इसकी प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद राजवाड़ा पर संगीत और नृत्य की प्रस्तुति भी कलाकारों ने दी। इसके बाद मेहमान गोपाल मंदिर पहुंचे और पहली मंजिल पर लकड़ी के नक्काशीदार भवनों को निहारा। लिया इंदौरी व्यंजनों का स्वाद हेरिटेज वॉक में शामिल मेहमानों के लिए इंदौरी नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। स्टॉल पर रखे गए पोहे, जलेबी के साथ मेहमानों ने चाय-कॉफी का लुत्फ भी लिया। करीब डेढ़ घंटे तक हेरिटेज वॉक में शामिल होने के बाद मेहमान होटल के लिए रवाना हो गए। चखे आम, लोक नृत्यों पर थिरके मेहमान हेरिटेज वाॅक के बाद विदेशी मेहमान ग्रामीण हाट पहुंचे। यहां उन्होंने जैविक खेती के उत्पादों को देखा और स्टाॅल पर आमों का स्वाद भी चखा। इंडोनेशिया से आई रीना सुप्रिहाती ने आदिवासी गीत पर नृत्य भी किया।

परमा एकादशी व्रत कल, इन नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानें क्या करें और क्या नहीं

इंदौर  Parama Ekadashi 2026: क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में एक ऐसी एकादशी भी है जो हर साल नहीं, बल्कि लगभग 3 साल में एक बार आती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं अधिकमास (मलमास) के कृष्ण पक्ष में आने वाली परमा एकादशी की. मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के कई जन्मों के पाप, पुरानी दरिद्रता और आर्थिक कष्ट दूर हो सकते हैं. इस बार परमा एकादशी का व्रत 11 जून यानी कल रखा जाएगा।  लेकिन जितना ज्यादा इस व्रत का महत्व है, उतने ही कठोर इसके नियम भी माने गए हैं. कहा जाता है कि छोटी-सी गलती भी व्रत का फल कम कर सकती है. इसलिए जानिए परमा एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए, ताकि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहे।  परमा एकादशी पर क्या न करें 1. तुलसी या किसी भी पौधे के पत्ते न तोड़ें इस दिन तुलसी तोड़ना वर्जित माना गया है. कोशिश करें कि एक दिन पहले ही पूजा के लिए तुलसी पत्र तोड़ लें।  2. झाड़ू लगाते समय सावधानी रखें घर की सफाई करते समय ध्यान रखें कि किसी चींटी या छोटे जीव को नुकसान न पहुँचे. अहिंसा का पालन इस दिन विशेष रूप से जरूरी है।  3. दशमी से ही रखें नियम व्रत रखने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. साथ ही तामसिक भोजन, मांसाहार और नशे से दूरी बनाए रखें।  4. नमक का सेवन न करें एकादशी के दिन सामान्य नमक खाना वर्जित है. बहुत जरूरत हो तो सेंधा नमक का सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।  5. इन चीजों से करें परहेज इस दिन चावल, मसूर की दाल, मूली और बैंगन नहीं खाने चाहिए. शास्त्रों में विशेष रूप से चावल का त्याग करने को कहा गया है।  6. निंदा और बुरे विचारों से बचें किसी की बुराई करना या मन में नकारात्मक विचार लाना व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है।  7. दिन में न सोएं व्रती को दिन में सोने से बचना चाहिए. संभव हो तो रात में जागकर भगवान का भजन-कीर्तन करें, जिससे व्रत का फल और बढ़ता है।  क्या करें? – भगवान विष्णु की श्रद्धा से पूजा करें. – शांत मन से व्रत का पालन करें. – दान-पुण्य करें. – ब्राह्मणों को जूते या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करना शुभ माना गया है. परमा एकादशी की मान्यता कहा जाता है कि परमा एकादशी का व्रत करने वाला व्यक्ति न केवल इस जन्म में सुख पाता है, बल्कि उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी मिलता है। 

चौंकाने वाली रिपोर्ट: यमुनानगर के 592 तालाब बने कचरा घर, 69 जलाशय सूखने की कगार पार

यमुना नगर. जिले में तालाबों और जोहड़ों की बिगड़ती हालत का असर अब भूजल पर साफ दिखाई देने लगा है। जिले के 805 तालाबों में से 592 प्रदूषित हैं, करीब 500 अतिक्रमण की चपेट में हैं। 69 पूरी तरह सूख चुके हैं और 20 से ज्यादा तालाब गायब हो गए। कब्जा कर निर्माण कर लिया गया। इसके कारण वर्षा जल का प्राकृतिक संचयन प्रभावित हो रहा है और सातों ब्लाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लाक को अटल भूजल योजना में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जिले के कई क्षेत्रों में हर वर्ष भूजल स्तर एक से डेढ़ फीट तक गिर रहा है। तालाब और जोहड़ ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की सबसे पुरानी और प्रभावी व्यवस्था माने जाते रहे हैं। बरसात का पानी इनमें एकत्र होकर धीरे-धीरे जमीन में समाता था, जिससे भूजल रिचार्ज होता था। लेकिन अब बड़ी संख्या में तालाब अतिक्रमण, गंदगी, सीवरेज और गाद की समस्या से जूझ रहे हैं। कई तालाबों की जलधारण क्षमता भी काफी घट चुकी है। जिले में करीब 500 तालाब अतिक्रमण की चपेट में जिले में करीब 500 तालाब अतिक्रमण की चपेट में बताए गए हैं। इनमें से 256 तालाब गंभीर रूप से अतिक्रमित श्रेणी में हैं। वहीं 592 तालाब प्रदूषित पाए गए हैं। कई स्थानों पर सीवरेज का पानी तालाबों में पहुंच रहा है, जबकि 69 तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे वर्षा का बड़ा हिस्सा बिना रुके नालों और ड्रेनों के जरिए बाहर निकल जाता है। जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे गोविंद भाटिया का कहना है कि तालाब केवल जलाशय नहीं, बल्कि भूजल रिचार्ज का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब तालाबों में पानी रुकना कम हो जाता है तो उसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले जोहड़ सालभर पानी का स्रोत बने रहते थे, लेकिन अब उनकी स्थिति तेजी से बदल रही है। जगाधरी, रादौर, सरस्वतीनगर, व्यासपुर, छछरौली, साढौरा और प्रतापनगर ब्लाकों के ग्रामीण भी जल संकट को महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण मोहन वर्मा, प्रवीण कुमार व कुशल पाल सिंह का कहना है कि पहले वर्षा का पानी तालाबों और जोहड़ों में जमा होता था, जिससे आसपास के क्षेत्रों में नमी बनी रहती थी। अब पानी तेजी से बह जाता है और गर्मी के दिनों में जल संकट बढ़ जाता है। इसका असर पशुपालकों पर भी पड़ रहा है। जिन तालाबों से कभी पशुओं को पानी मिलता था, वहां अब या तो पानी नहीं है या उसकी गुणवत्ता खराब हो चुकी है। तालाबों के पुनरुद्धार के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत जिले में 42.16 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद 20 परियोजनाएं लंबित हैं। नगर निगम क्षेत्र में 45 तालाबों पर कार्य प्रस्तावित था, लेकिन अब तक दो परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं। चार ब्लाकों पर विशेष फोकस भूजल स्तर में लगातार गिरावट को देखते हुए अटल भूजल योजना के तहत रादौर, जगाधरी, सरस्वतीनगर और साढौरा ब्लाक चिन्हित किए गए हैं। इन चारों ब्लाकों की 251 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यहां भूजल का दोहन अधिक और संरक्षण अपेक्षाकृत कम है। जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर गंभीरता से हो काम भूजल विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में पानी लगातार गहराई में जा रहा है। जगाधरी, रादौर, सरस्वतीनगर और बिलासपुर खंडों में वर्ष 2014 से 2018 के बीच भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भी पानी और नीचे खिसका है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 के बाद इन क्षेत्रों में भूजल स्तर एक से सवा मीटर तक और नीचे चला गया है। वर्तमान में व्यासपुर खंड की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां भूजल 25 मीटर की गहराई पर पहुंच चुका है। रादौर में पानी 18 मीटर, सरस्वतीनगर और प्रतापनगर में 15-15 मीटर, जगाधरी में करीब 14.5 मीटर, साढौरा में 11 मीटर और छछरौली में नौ मीटर गहराई पर उपलब्ध है। वैज्ञानिक डाक्टर राजेश गडिया का कहना है कि जिले में हर साल औसतन एक से डेढ़ फीट तक भूजल स्तर नीचे जा रहा है। यदि जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

पंजाब में 2027 चुनाव की तैयारी तेज, कांग्रेस युवा मतदाताओं पर फोकस कर चलाएगी रीरूट कैंपेन

चंडीगढ़. पंजाब में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अभी से चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी इस बार पूरी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में कांग्रेस बुधवार से प्रदेश में एक विशेष जनसंपर्क और संवाद अभियान ‘पंजाब रीरूट अभियान’ शुरू करने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ना, विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करना और पंजाब के भविष्य को लेकर पार्टी की सोच को लोगों तक पहुंचाना है। चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-37 के ला भवन में इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। कार्यक्रम को लेकर पार्टी की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव 2027 में युवाओं की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है और इसी वर्ग तक प्रभावी पहुंच बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। गुटबाजी समाप्त करने की कोशिश पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के भीतर मौजूद गुटबाजी को समाप्त कर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना है। पिछले कुछ वर्षों में आंतरिक मतभेदों ने पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में यह अभियान केवल जनसंपर्क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता को भी मजबूत करने का माध्यम बनेगा। ‘पंजाब रीरूट अभियान’ के तहत युवाओं के अलावा किसानों, कर्मचारियों, व्यापारियों, महिलाओं और अन्य सामाजिक वर्गों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की राय, सुझाव और समस्याओं को जानने की कोशिश की जाएगी। प्रदेश से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर पार्टी का दृष्टिकोण भी साझा किया जाएगा। पहली बार मतदान करने वालों पर फोकस राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं की संख्या काफी महत्वपूर्ण होगी। यही कारण है कि कांग्रेस ने इस वर्ग तक पहुंच बनाने की रणनीति पर विशेष जोर दिया है। पार्टी का लक्ष्य ऐसे मतदाताओं के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करना है जो पिछले चुनाव के बाद मतदाता सूची में शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि यह अभियान आने वाले समय में संगठन को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ चुनावी तैयारियों को भी मजबूती प्रदान करेगा। कांग्रेस का प्रयास है कि प्रदेशभर में लगातार जनसंपर्क गतिविधियां चलाकर लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जाए और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

School Merger के बाद नई पदस्थापना पर नहीं पहुंचे शिक्षक, विभाग ने सेवा से किया पृथक

भिलाई. युक्तियुक्तकरण से प्रभावित 4 सहायक शिक्षक एलबी को नए पदांकित शालाओं में ज्वाइनिंग नहीं करने पर जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने कड़ी कार्रवाई की है। उन्हें तत्काल प्रभाव से पदच्युत कर दिया गया है। इसके पहले उन्हें निलंबित किया गया था। दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय छ.ग. द्वारा युक्तियुक्तकरण के पश्चात नए पदांकित शालाओं में ज्वाइनिंग नहीं करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे। इस निर्देश के परिपालन में चार सहायक शिक्षकों पर गाज गिरी है। इन सहायक शिक्षकों में नारायण दास जोशी, जानेश्वर कुमार ठाकुर, प्रदीप देशमुख तथा लक्ष्मी नारायण चंद्राकर शामिल है। बताया जा रहा है कि इन्हें नई पदांकित शाला में ज्वाइनिंग के लिए 5 बार अवसर प्रदान किया गया था। बावजूद इन्होंने ज्वाइनिंग नहीं दी। लिहाजा इन पर कार्रवाई की गई। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से जिले के बड़ी संख्या शिक्षक प्रभावित हुए। अधिकाश शिक्षक कोर्ट का शरण लिए। इसके चलते जिला, संभाग तथा राज्य स्तर पर ऐसे प्रकरणों की सुनवाई हुई। इस सुनवाई में कई शिक्षकों के प्रकरण को मान्य किया गया। इसी आस में चार सहायक शिक्षक भी अपने स्तर पर प्रयासरत रहे कि उनका भी प्रकरण मान्य हो । मगर दांव उल्टा पड़ गया। उनसे नौकरी छीनने की नौबत आ गई। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर (छ.ग.) के पत्र क्रमांक/ युक्ति./ 2026/ 139 नवा रायपुर, दिनांक 28.05.2026 के द्वारा प्राप्त निर्देश के परिपालन में छ.ग. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-10 के उपनियम (नौ) के तहत इन सभी 4 सहायक शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से पदच्युत (डिसमिसल) किए जाने का आदेश जारी किया है।

CM योगी की घोषणा पर तेजी से कार्रवाई, टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन ट्रांसफर के आदेश, निवेशकों के लिए अवसर

 बरेली जिले में टेक्सटाइल पार्क का इंतजार जल्द पूरा होने वाला है। मुख्यमंत्री ने जहां बरेली समेत पांच शहरों में टेक्सटाइल पार्क की घोषणा की है, वही मिल की भूमि का टेक्सटाइल पार्क के लिए हस्तांतरण का आदेश भी जारी हो गया है। अभी तक यह भूमि सहकारी कताई मिल संघ के पास है। खास बात यह है कि कैबिनेट के आदेश पर भूमि हस्तांतरण निश्शुल्क रूप से किया जाएगा। इसके लिए सहकारी कताई मिल की ओर से भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना में एकीकृत टेक्सटाइल पार्क का लाभ बरेली को भी मिलेगा। जिले में लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को इसकी घोषणा कर अंतिम मुहर भी लगा दी। प्रस्तावित पार्क बहेड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूर नानकपुरी-टांडा मार्ग पर ग्राम सैदपुर खुर्द स्थित उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल परिसर में विकसित किया जाएगा। करीब 79.61 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाला यह पार्क प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग को नई गति देने के साथ रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बनेगा। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से तैयार पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार पार्क का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल या नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है तथा योजना की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। पार्क में वस्त्र उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही रेडीमेड प्लग एंड प्ले शेड, आंतरिक सड़कें, विद्युत वितरण व्यवस्था, जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन, कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), गोदाम, लाजिस्टिक सुविधाएं, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्र, श्रमिक हास्टल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामान्य प्रसंस्करण केंद्र विकसित किए जाएंगे। हथकरघा व वस्त्र उद्योग के सहायक आयुक्त सर्वेश शुक्ला ने बताया कि सहकारी कताई मिल संघ की ओर से पुराना भवन ध्वस्त करने की निविदा की गई है। भवन ध्वस्त होने के साथ ही मौके से पुरानी मशीनरी को भी हटाया जाएगा। इसके बाद बाउंड्रीवाल आदि बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इन कार्यों में अभी एक महीने से अधिक समय लग सकता है। बिजली, पानी, सड़क का मांगा प्रस्ताव प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के विकास के लिए हथकरघा व वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बिजली, पानी आपूर्ति व सड़क निर्माण का प्रस्ताव संबंधित विभागों से मांगा गया है। इसके लिए विभाग की ओर से पत्र तैयार कर योजना की जानकारी देते हुए संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने के लिए कहा गया है। पार्क में सहायक उद्योगों को मिलेगा स्थान पार्क में केवल वस्त्र निर्माण इकाइयां ही नहीं बल्कि सहायक उद्योगों को भी स्थान मिलेगा। इनमें बटन, जिपर, फास्टनर, ट्रिम्स, लेबल एवं टैग निर्माण, पैकेजिंग सामग्री, तकनीकी वस्त्र, गोदाम तथा अन्य संबंधित उद्योग शामिल होंगे। योजना के अनुसार पार्क में न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी और किसी एक इकाई को कुल औद्योगिक भूमि का 40 प्रतिशत से अधिक आवंटित नहीं किया जाएगा। कौशल विकास, प्रयोगशाला, प्रदर्शनी पार्क निर्माण से पहले पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट में प्रशासनिक भवन, अनुसंधान एवं विकास केंद्र, कौशल विकास केंद्र, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, विपणन एवं प्रदर्शनी केंद्र, खुदरा सुविधाएं, ट्रक पार्किंग, औद्योगिक श्रमिक आवास, कामन कैंटीन, फायर स्टेशन और हरित क्षेत्र जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रस्ताव किया गया है। इससे एक ही जगह सभी सुविधाएं मिल सकेंगी। स्थापित होने वाली इकाइयों पर मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन उत्तर प्रदेश सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के अंतर्गत पार्क में स्थापित होने वाली इकाइयों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। इसके तहत प्लांट एवं मशीनरी पर 25 प्रतिशत पूंजी अनुदान, ऋण पर ब्याज की 60 प्रतिशत प्रतिपूर्ति तथा अन्य अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यदि पार्क का विकास पीपीपी माडल पर होता है तो राज्य सरकार मास्टर डेवलपर को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत पूंजी अनुदान प्रदान करेगी। यह अनुदान अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की सीमा तक होगा और छह किस्तों में जारी किया जाएगा। वहीं, यदि पार्क का विकास सीधे नोडल एजेंसी से किया जाता है तो सरकार परियोजना लागत के बराबर ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराएगी। योजना के कार्यान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं अपैरल औद्योगिक विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह एजेंसी भूमि चयन, व्यवहार्यता अध्ययन, मास्टर प्लान, भूमि आवंटन नीति तथा परियोजना के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएगी। उद्योग स्थापना के लिए उद्यमियों से मांगे आवेदन पार्क में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों से विभाग ने आनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस संबंध में सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग बरेली परिक्षेत्र सर्वेश कुमार शुक्ला को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। विभाग को उम्मीद है कि इस परियोजना के माध्यम से बरेली क्षेत्र उत्तर प्रदेश के उभरते हुए टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बहेड़ी में प्रस्तावित यह पार्क बरेली मंडल के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे विशेष रूप से महिलाओं और कुशल श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा प्रदेश के वस्त्र उद्योग को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता मिलेगी।

प्री-मानसून बारिश ने बदला मौसम का मिजाज, कुछ इलाकों में रिकॉर्ड बारिश, मौसम विभाग की चेतावनी बरकरार

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी बाकी है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं। जून के पहले नौ दिनों में हुई बारिश ने कई जिलों में सामान्य आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 14 जिलों में अब तक 100 प्रतिशत से लेकर 672 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग ने इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है, लेकिन मानसून पूर्व बारिश ने फिलहाल राहत और चुनौती दोनों हालात पैदा कर दिए हैं। 1 से 9 जून के बीच प्रदेश में औसतन आधा इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। बारिश के बीच गर्मी भी बरकरार एक ओर कई इलाकों में बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। मंगलवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में 44 डिग्री और राजगढ़, रीवा व टीकमगढ़ में 43 डिग्री के आसपास तापमान रहा। प्रदेश के 26 शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान 40 डिग्री के करीब रहा, जबकि ग्वालियर में 42.8 डिग्री दर्ज किया गया। निवाड़ी सबसे आगे, नीमच और भोपाल भी रिकॉर्ड सूची में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवाड़ी में सामान्य 1.9 मिमी के मुकाबले 14.7 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो 672 प्रतिशत अधिक है। नीमच में 493 प्रतिशत, आगर-मालवा में 385 प्रतिशत, श्योपुर में 346 प्रतिशत, मंदसौर में 334 प्रतिशत और भोपाल में 304 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा अलीराजपुर, अशोकनगर, देवास, हरदा, मुरैना, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर में भी सामान्य से दोगुने से ज्यादा पानी गिर चुका है। आज 16 जिलों में बारिश के आसार मौसम विभाग ने बुधवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में बारिश की संभावना जताई है। वहीं भोपाल समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है। बदला मौसम का मिजाज, लू की जगह ओलों का अलर्ट मौसम विभाग ने ताजा पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव किया है। जिन जिलों में पहले 10 और 11 जून के लिए लू का अलर्ट जारी किया गया था, वहां अब 12 जून को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मुरैना, भिंड, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओले गिर सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने के संकेत हैं।  

आय से अधिक संपत्ति मामले में रेड, संयुक्त संचालक के ठिकानों से करोड़ों की संपत्ति मिली

इंदौर इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के यहां छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति का पता लगाया।अधिकारी को अब तक के अपने सेवाकाल में वेतन से ढाई करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन छापे में साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति मिली है। उन्होंने अपनी आय से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है।  छापे में स्कीम-103 में एक तीन मंजिला मकान और एक व्यावसायिक परिसर मिला। इसके अलावा स्कीम-140 में 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट भी मिले। 30 वर्षों के सेवाकाल में वे अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे। फिलहाल वे इंदौर में पदस्थ थे। कंडवाल के पास पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के तारापुर, बेकलाय और बनेड़िया में 11 प्लॉट भी मिले हैं। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने बताया कि शिकायत मिलने पर बुधवार सुबह छापे की योजना बनाई गई थी। इसके लिए तीन टीमों का गठन किया गया। मकान, जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर पर टीमों ने छापा मारकर कथित काली कमाई से जुटाई गई संपत्ति का पता लगाया। कंडवाल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया है।लक्ष्मीनारायण कंडवाल महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद पर वर्ष 1996 से पदस्थ हैं। अब विभाग उनके निलंबन की कार्रवाई कर सकता है। बेटे, बहू और रिश्तेदारों के नाम खरीदी जमीनें संयुक्त संचालक कंडारिया ने काली कमाई का पैसा पत्नी, बेटों, पुत्रवधु और रिश्तेदारों के नाम पर जमीनें खरीदने में लगाया। इंदौर के समीप सोनवाय गांव में 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी, जिसकी कीमत साढ़े छह लाख रुपये है। इसके अलावा पीथमपुर के समीप 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि तथा स्कीम-103 में भूखंड क्रमांक 149-सी खरीदा और उस पर जी+3 का 13 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण कराया। इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140 स्थित भूखंड क्रमांक 220 ए.एम. को 21 लाख रुपये में खरीदा। इसके अलावा इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140, सेक्टर ए-टाइप में भूखंड क्रमांक 378 भी 15 लाख रुपये में खरीदा। ग्राम बनेडिया, जिला धार में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। तारपुरा, तहसील सागौर, जिला धार में 2.195 हेक्टेयर कृषि भूमि भी खरीदी। ग्राम बेकल्या, तहसील पीथमपुर, जिला धार में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। आरोपी ने ज्यादातर पैसा संपत्ति खरीदने में ही लगाया। इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया की सांठा बाजार शाखा में एक बैंक लॉकर भी मिला है, जिसे गुरुवार को खोला जाएगा। पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना कंडारिया की पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना हुई थी और लोकायुक्त का छापा पड़ गया। उनका परिवार इंदौर में ही रहता था और ऐशो-आराम की जिंदगी जीता था। कंडारिया झाबुआ, नीमच, रतलाम, रीवा, शहडोल, उज्जैन और देवास में भी पदस्थ रहे। जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर भी खोला छापे के दौरान अधिकारियों को दो मंजिला आलीशान जिम भी मिला, जिसमें आधुनिक मशीनें हैं। इसके अलावा एक डिपार्टमेंटल स्टोर भी मिला, जिसका संचालन कंडारिया के परिवार के सदस्य करते हैं।  

एक-दो नहीं, 19 सरकारी नौकरियों में चयन! चारू पांडेय की सफलता की कहानी बनी मिसाल

रायपुर  किसी ने क्या खूब कहा है कि "कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती". इस पंक्ति को छत्तीसगढ़ की एक होनहार बेटी चारू पांडे ने अपने जुनून से सच साबित कर दिया है. महज 23 साल की उम्र में चारू ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों एस्पिरेंट्स देखते हैं. उन्होंने SSC, बैंकिंग, रेलवे और पुलिस समेत कुल 19 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. उनकी इसी असाधारण उपलब्धि के लिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी।  रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा की रहने वाली चारू आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही रणनीति के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।  छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर चारू पांडे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तिल्दा-नेवरा में पूरी की. इसके बाद उन्होंने दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से मैथमेटिक्स में बीएससी की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी शुरू कर दी थी. चारू फिलहाल चेन्नई स्थित कैग (CAG) कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. उनकी उपलब्धियों की चर्चा अब सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में हो रही है।  किन परीक्षाओं में हासिल की सफलता चारू ने SSC की कई प्रमुख परीक्षाएं जैसे SSC CGL, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD और SSC CPO को पास किया है. इसके अलावा उन्होंने IBPS PO, IBPS Clerk, SBI PO और SBI Clerk जैसी बैंकिंग परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की. रेलवे भर्ती बोर्ड की NTPC और ग्रुप-D परीक्षाएं भी उन्होंने पास कीं. वहीं पुलिस सेवाओं में दिल्ली पुलिस, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर और ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षाओं में भी उन्होंने सफलता का परचम लहराया. इसके अलावा CG NHM सहित कई दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।  असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी चारू का सफर आसान नहीं था. शुरुआती दौर में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा. कई परीक्षाओं में चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और लगातार सुधार किया. चारू का मानना है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का अवसर होती है. यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही।  सफलता का मंत्र क्या है? चारू बताती हैं कि उनकी तैयारी का आधार सब्जेक्ट वाइज रणनीति, रेग्युलर मॉक टेस्ट और लगातार सेल्फ-इवैल्यूएशन रहा. वह हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों को एनालाइज करती थीं और अगली परीक्षा में उन्हें सुधारने की कोशिश करती थीं. उनका कहना है कि अगर छात्र लक्ष्य तय करें, समय को सही से मैनेज करें और लगातार मेहनत करें, तो सफलता जरूर मिलती है।  चारू पांडे की कहानी यह संदेश देती है कि सपने बड़े हों तो चुनौतियां मायने नहीं रखतीं. छोटे शहर की यह बेटी आज देशभर के युवाओं के लिए उम्मीद, संघर्ष और सफलता का प्रतीक बन चुकी है. उनकी उपलब्धि न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 

Jhajjar की रुपांशी का कमाल, अंडर-17 नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया मान

झज्जर. एक साधारण हलवाई की बेटी ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित अंडर-17 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे जिले का नाम चमका दिया है। सिलाना गांव की बेटी रुपांशी (इशु) ने 53 किलोग्राम भारवर्ग के फ्री स्टाइल मुकाबले में देश के शीर्ष पहलवानों को धूल चटाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। राष्ट्रीय स्तर पर इस शानदार उपलब्धि के बाद गांव पहुंचने पर रुपांशी सिलाना का ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार नागरिक अभिनंदन किया गया। शौक से शुरू हुआ सफर, अब देश को मेडल दिलाने की जिद : चैंपियन पहलवान रुपांशी ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके गांव में जब अखाड़ा खुला था, तो वह महज 9 साल की उम्र में शौक-शौक में वहां चली गई थीं। शुरुआत में वह अखाड़े में अकेली लड़की थी, जिसे देखकर लोग कुछ संकोच भी था, लेकिन उनके माता-पिता सहित परिवार ने अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। रुपांशी ने कहा, शुरुआत में न्यूं तो कवै थे कि लड़की कुश्ती करेगी, पर मेरे पापा और मम्मी हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। आज बहुत खुशी हो रही है, जब मैं गोल्ड मेडल जीतकर आई, तो सारा गाम मेरे स्वागत में खड़ा था। इससे पहले रुपांशी रोहतक में हुई स्टेट चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं। पिता बनाते हैं मिठाई, बेटी ने कुश्ती में घोली मिठास रुपांशी के परिवार की पृष्ठभूमि बेहद साधारण है। उनके पिता तिलक राज गांव में ही हलवाई का काम करते हैं और मां घरेलू महिला हैं। दो बहनों और एक बड़े भाई में सबसे छोटी रुपांशी ने अपनी खेल प्रतिभा से साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। रुपांशी का बड़ा भाई भी खेल में रुचि रखता है। खेल के साथ-साथ पढ़ाई को तरजीह देते हुए रुपांशी ने हाल ही में 12वीं कक्षा की परीक्षा भी 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। कड़ी मेहनत और ठेठ हरियाणवी डाइट का कमाल : रुपांशी रोजाना सुबह और शाम 3-3 घंटे अखाड़े में कड़ा अभ्यास करती हैं। अपनी डाइट को लेकर बताया कि वह पूरी तरह से पारंपरिक और पौष्टिक आहार पर निर्भर हैं, जिसमें दूध, दही, घी, चूरमा और खीर मुख्य रूप से शामिल हैं। अभ्यास के ठीक बाद वह नियमित रूप से बादाम रगड़ा पीती हैं। अब रुपांशी का अगला लक्ष्य 14 जून को होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल को पास करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। गुरुओं की मेहनत और ग्रामीणों का मिला भरपूर आशीर्वाद रुपांशी ने अपनी सफलता का श्रेय कोच अमित कुमार को दिया, जिन्होंने सिलाना अखाड़े में उनकी प्रतिभा को निखारा। इसके साथ ही खलीफा पहलवान कली राम, पहलवान कदम कोच और पहलवान राजबीर उर्फ सांडा आदि खलीफाओं के मार्गदर्शन ने मैट पर मजबूत बनाया। गांव आगमन पर आयोजित ''प्रतिभा सम्मान समारोह'' के दौरान सरपंच राकेश कुमार, पूर्व पार्षद हरेंद्र सिलाना, जोहरी पहलवान, पूर्व सरपंच सूरज मल, धर्मबीर, आजाद सिंह, साहब सिंह, रामफल सिंह, लीलू राम और धर्मेंद्र पहलवान, नरेश सहित भारी संख्या में खेल प्रेमियों ने बेटी को आशीर्वाद दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।