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PhonePe यूजर्स के लिए खुशखबरी! RBI ने दी हरी झंडी, अब पेमेंट का अनुभव होगा और आसान

नई दिल्ली भारत की अग्रणी डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाता कंपनी phone-pe को रिजर्व बैंक से एक बड़ी अनुमति मिल गई है, जो न सिर्फ कंपनी के कारोबार के लिए बल्कि करोड़ों छोटे कारोबारियों और दुकानदारों के लिए भी बेहद अहम है। अब तक सिर्फ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की सुविधा देने वाली Phone-Pe को आरबीआई ने online payment aggregator के रूप में कार्य करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस नए दर्जे के साथ अब phone-pe सीधे मर्चेंट्स (दुकानदारों व व्यापारियों) को जोड़ पाएगी और उनके ग्राहकों से ऑनलाइन पेमेंट लेकर उन्हें सीधे उनके खाते में ट्रांसफर कर सकेगी। यानी अब फोनपे न केवल ग्राहकों को भुगतान सेवा देगी, बल्कि खुदरा व्यापारी भी इसके माध्यम से तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक पेमेंट कलेक्शन सिस्टम का लाभ ले पाएंगे। phone-pe के मर्चेंट बिज़नेस के प्रमुख युवराज सिंह शेखावत ने कहा कि यह बदलाव खासतौर पर उन छोटे और मध्यम कारोबारियों (SMEs) के लिए फायदेमंद होगा जो अभी तक डिजिटल पेमेंट की दुनिया में पीछे रह गए थे। अब वे भी आधुनिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर पाएंगे, जिससे उनका व्यवसाय और तेज़ी से डिजिटल हो सकेगा। इस अनुमति के साथ phone-pe अब अपने पेमेंट गेटवे प्लेटफॉर्म को और बेहतर बना सकेगा – ऐसा सिस्टम जो मर्चेंट्स को कुछ ही मिनटों में ऑनबोर्ड करता है, आसान इंटीग्रेशन की सुविधा देता है, और ग्राहक को स्मूद चेकआउट एक्सपीरियंस प्रदान करता है। भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनियों में शामिल phone-pe phone-pe 2016 में लॉन्च हुई थी और आज यह भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनियों में शामिल है। इसके पास 65 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूज़र्स, 4.5 करोड़ से अधिक मर्चेंट्स का नेटवर्क और प्रतिदिन 36 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन्स हैं। कंपनी का विस्तार अब पेमेंट्स से आगे बढ़कर लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट, हाइपरलोकल ई-कॉमर्स और यहां तक कि स्वदेशी app Store तक हो चुका है। क्या है online payment aggregator? online payment aggregator दरअसल एक ऐसा डिजिटल माध्यम होता है जो व्यापारियों को उनके ग्राहकों से विभिन्न डिजिटल तरीकों से पेमेंट स्वीकार करने में मदद करता है – चाहे वो UPI हो, कार्ड्स हों या वॉलेट्स। इस प्रक्रिया में मर्चेंट को ऑनबोर्ड किया जाता है, फिर उनकी वेबसाइट या ऐप में पेमेंट गेटवे को जोड़ा जाता है। इसके बाद ग्राहक अपना मनचाहा पेमेंट विकल्प चुनकर भुगतान करता है और सिस्टम उस पेमेंट को प्रोसेस कर मर्चेंट को ट्रांसफर कर देता है। RBI की यह मंजूरी फोनपे के लिए महज एक लाइसेंस नहीं, बल्कि नए युग का प्रवेशद्वार है – जहां यह कंपनी देश के कोने-कोने में बैठे छोटे दुकानदारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में एक मजबूत कड़ी बन सकती है।  

कपिल शर्मा शो पर बड़ी कार्रवाई, कानूनी नोटिस से मचा हड़कंप

मुंबई कपिल शर्मा का शो मुश्किलों में घिरता हुआ नजर आ रहा है। 'द ग्रेट इंडियन कपिल शर्मा शो’ का तीसरा सीजन अपने फिनाले की ओर बढ़ रहा है, जिसमें अक्षय कुमार विशेष मेहमान होंगे। लेकिन फिनाले से ठीक पहले शो कानूनी विवाद में फंस गया है। मिली जानकारी अनुसार निर्माता फिरोज ए. नाडियाडवाला ने नेटफ्लिक्स और शो के निर्माताओं को 25 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कॉमेडियन किकू शारदा ने शो में परेश रावल द्वारा निभाए गए आइकॉनिक किरदार ‘बाबूराव गणपत राव आपटे’ की नकल बिना अनुमति के की। यह कापीराइट और किरदार अधिकारों का उल्लंघन है। नोटिस में 2 दिन के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने, विवादित स्किट हटाने और नुकसान की भरपाई करने की मांग की गई है। नाडियाडवाला ने बयान में कहा, बाबूराव सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि हमारी हेरा-फेरी की रूह है। इस विरासत को बिना अनुमति कोई छू नहीं सकता। किसी को भी व्यापारिक लाभ के लिए इसका दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं है। यह हमारी मेहनत, सोच और रचनात्मकता का नतीजा है। कानूनी नोटिस में कापीराइट एक्ट 1957 की धारा 51, ट्रेडमार्क एक्ट की धारा 29 और कापीराइट एक्ट की धारा 14 का उल्लंघन बताया गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि पालन न करने पर सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या कैटरीना कैफ हैं प्रेग्नेंट? वायरल तस्वीर पर सोशल मीडिया में मचा हलचल

मुंबई  कैटरीना कैफ बीते एक साल से फिल्मी पर्दे से दूर हैं. पिछली बार एक्ट्रेस फिल्म मैरी क्रिसमस में दिखी थीं, जो साल 2024 में रिलीज हुई थी. इसके बाद से कैटरीना को किसी भी फिल्म में नहीं देखा गया है. ऐसे में लंबे समय से पर्दे से दूर रहने की वजह उनका प्रेग्नेंट होना बताया जा रहा है. बार-बार कैटरीना की प्रेग्नेंसी की खबरें उड़ रही हैं. अब सोशल मीडिया पर कैटरीना कैफ की एक तस्वीर वायरल हो रही है. इस तस्वीर में कैटरीना का बेबी बंप होने का दावा किया जा रहा है. अब इस वायरल पोस्ट पर कैटरीना के फैंस बहुत खुश हैं और खुद को कमेंट्स करने से रोक नहीं पा रहे हैं. तेज हुईं कैटरीना कैफ की प्रेग्नेंसी की अटकलें अब जैसे जैसे ये अटकलें तेज हो रही हैं और कैटरीना कैफ की प्रेग्नेंसी की चर्चा तेज हो रही है, फैंस बस इंतजार कर रहे हैं कि आखिरकार विक्की और कैटरीना कब ऐलान करेंगे. 30 जुलाई को कैटरीना कैफ की प्रेग्नेंसी को लेकर अटकलें शुरू हुईं, जब मुंबई के एक फेरी पोर्ट पर कैटरीना और विक्की का वीडियो वायरल हुआ. कैटरीना ने ढीली सफेद शर्ट और बैगी पैंट पहनी थी, और उनके आरामदायक कपड़े और सावधानी से चलने के तरीके ने कई फैंस को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वह प्रेग्नेंट हैं. पोस्ट पर “क्या वह प्रेग्नेंट हैं?” और “लगता है वह जरूर प्रेग्नेंट हैं” जैसे कमेंट्स की बाढ़ आ गई, जिससे इंटरनेट पर चर्चा शुरू हो गई. इससे पहले, कैटरीना के न्यू ईयर ईव पोस्ट में पोल्का-डॉट ड्रेस ने भी प्रेग्नेंसी की बातें शुरू कर दी थीं. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके लुक को बॉलीवुड के “पोल्का-डॉट प्रेग्नेंसी मिथ” से जोड़ते हुए अनुष्का शर्मा और दीपिका पादुकोण के साथ तुलना की, जो प्रेग्नेंसी के दौरान इसी तरह के प्रिंट में देखी गई थीं. हालांकि, एक ढीली ड्रेस और एक वायरल वीडियो से ही प्रेग्नेंसी की पुष्टि नहीं होती, और ये अटकलें ज्यादातर बेबुनियाद रहीं. रेडिट पर वायरल इस तस्वीर में कैटरीना कैफ को मरून रंग के गाउन में देखा जा रहा है. वह कैमरा से अलग खड़ी हुई हैं. वहीं, गुड न्यूज यह है कि इस तस्वीर में कैटरीना कैफ का बेबी बंप नजर आ रहा है. अब उनके फैंस इस तस्वीर को देख बहुत खुश हैं और उन्हें अब कैटरीना के पहले बच्चे का इंतजार है. इससे पहले खबर आई थी कि कैटरीना और विक्की बहुत जल्द अपने पहले बच्चे के पेरेंट्स बनने जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि विक्की-कैटरीना अक्टूबर या नवंबर में मां-बाप बन जाएंगे. वहीं, प्रेग्नेंसी की अफवाहों के बीच कैटरीना फिल्मी पर्दे से गायब हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो मां बनने के बाद कैटरीना कैफ मैटरनिटी लीव पर रहेंगी और अपने बच्चे को संभालेंगी.

Bajaj Chetak ने रचा रिकॉर्ड, लॉन्च के बाद अब तक 5.1 लाख यूनिट्स की बिक्री

मुंबई  दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto की इलेक्ट्रिक स्कूटर Bajaj Chetak ने जनवरी 2020 में लॉन्च होने के बाद से अब तक 5,10,000 से ज़्यादा यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर दिया है. ख़ास तौर पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इन बिक्री हुए यूनिट्स में से 40 प्रतिशत से ज़्यादा यानी करीब 2,06,366 यूनिट्स बिक्री नवंबर 2024 के बाद के 10 महीनों में हुई है. Bajaj Chetak की बिक्री की उपलब्धि Bajaj Auto ने यह उपलब्धि हाल ही में आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बावजूद हासिल की है. गौरतलब है कि रेयर अर्थ मैग्नेट की कमी के कारण Bajaj Chetak का उत्पादन अस्थायी रूप से रुक गया था. फिर भी, Bajaj Chetak लगातार भारत में सबसे ज़्यादा बिकने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटरों में से एक रहा है. Bajaj Chetak , TVS iQube के साथ टॉप स्थान पर भी रहा, जब तक कि हालिया समस्याओं ने इसे क्रम में नीचे नहीं गिरा दिया. हालांकि, अब उत्पादन फिर से पटरी पर आने के साथ, हम आने वाले महीनों में बिक्री के आंकड़ों में सुधार की उम्मीद कर सकते हैं. इस सफलता का श्रेय Bajaj Auto द्वारा Bajaj Chetak लाइनअप में कई वेरिएंट पेश करने और देश भर में 3,800 से ज़्यादा टचपॉइंट्स के अपने व्यापक सर्विस नेटवर्क का लाभ उठाने को दिया जा सकता है. अब तक बेचे गए 5,10,007 Chetak स्कूटरों में से, 3,48,251 यूनिट्स अप्रैल 2024 से पिछले 20 महीनों में भेजी गईं. दिल चस्प बात यह है कि Bajaj Auto के कारखाने से भारत भर के डीलरों तक पिछली 2,00,000 यूनिट्स 10 महीने से भी कम समय में भेजी गईं. Bajaj Chetak पोर्टफोलियो में वर्तमान में दो बैटरी कॉन्फ़िगरेशन वाले चार मॉडल शामिल हैं. इनमें Bajaj Chetak 3001 में 3kWh की बैटरी मिलती है, जबकि 3501, 3502 और 3503 वेरिएंट में 3.5kWh का बड़ा बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है. इस रेंज की कीमतें 99,900 रुपये से शुरू होकर 1.35 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती हैं.

महापौर–पार्षद निधि के लिए 102.97 करोड़ रुपए जारी, नगरीय निकायों में आएगी रौनक

रायपुर राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों को कुल 102 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए जारी किए हैं। विभाग ने निकायों को पार्षद निधि के कुल 72 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपए, महापौर/अध्यक्ष निधि के कुल 30 करोड़ 63 लाख 75 हजार रुपए आबंटित कर दिए हैं। विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दोनों मदों में 50-50 प्रतिशत राशि निकायों को जारी की है। नगरीय प्रशासन विभाग ने पार्षद निधि के रूप में राज्य के 14 नगर निगमों को कुल 21 करोड़ 96 लाख रुपए जारी किए हैं। वहीं 54 नगर पालिकाओं को 23 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपए, 120 नगर पंचायतों को 27 करोड़ रुपए की पार्षद निधि जारी की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से 14 नगर निगमों को दस करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए की महापौर निधि आबंटित की गई है। राज्य के 54 नगर पालिकाओं को दस करोड़ 50 लाख रुपए और 120 नगर पंचायतों को दस करोड़ एक लाख 25 हजार रुपए अध्यक्ष निधि जारी की गई है।

एस्केड योजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

जयपुर, पशुपालन विभाग द्वारा भारत सरकार की असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कंट्रोल ऑफ एनिमल डिजीज (एस्केड) योजना के अंतर्गत राज्य रोग निदान केंद्र के तत्वावधान में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत पशु चिकित्सा अधिकारियों को फॉरेंसिक आस्पेक्ट ऑफ वेट्रो लीगल केसेज के पहलुओं के साथ साथ डीएनए फिंगर प्रिटिंग के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। दो चरणों में संपन्न दो प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रदेश भर से कुल 185 पशु चिकित्सकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के आयोजन में राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान तथा एस एम एस मेडिकल कॉलेज की भी सहभागिता रही। राज्य रोग निदान केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ लोकेश शर्मा ने बताया कि राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के विषय विशेषज्ञों ने प्रशिक्षणार्थियों को फॉरेंसिक पहलुओं के साथ साथ डीएनए फिंगर प्रिटिंग आदि विषयों के बारे में जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज द्वारा ब्रूसेल्ला, लेप्टोस्पाइरोसिस और स्क्रब टाइफस जैसे जूनोटिक रोगों के जांच हेतु प्रशिक्षणार्थियों का ब्लड सैंपल लिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पशु चिकित्सकों को संबोधित करते हुए विभाग के निदेशक डॉ आनंद सेजरा ने कहा कि पशु चिकित्सा न्यायशास्त्र ¼Veterinary Jurisprudence½ वह क्षेत्र है जो पशु चिकित्सा कानून, नैतिकता, और कानूनी मामलों से संबंधित है, जिसमें पशुओं के उपचार के दौरान हुई लापरवाही या दुर्व्यवहार के कानूनी निहितार्थ और पशु-कानूनी मामलों में पोस्टमार्टम और कानूनी रिकॉर्ड का प्रबंधन शामिल है। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों के क्षमतावर्द्धन के लिए इस तरह के प्रशिक्षण के कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। उल्लेखनीय है कि एस्केड योजना का मुख्य उद्देश्य प्रमुख रोगों की रोकथाम व नियंत्रण हेतु टीकाकरण, टीका उत्पादन तथा रोग निदान की सुविधाएं पशुपालकों को उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक हानि से बचाना है।

15 हजार तक बढ़ा स्ट्रीट वेंडरों का लोन, समय पर किश्त चुकाने पर मिलेगा अतिरिक्त लाभ

छिंदवाड़ा दस माह से बंद चल रही प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi Scheme) को सरकार ने फिर से शुरू कर दिया है। स्ट्रीट वेंडरों को लोन 10 हजार रुपए की जगह 15 हजार रुपए मिलेगा। छिंदवाड़ा नगर निगम के योजना कार्यालय में इसके आवेदन भी शुरू हो गए। अब तक 50 स्ट्रीट वेंडरों ने आवेदन किए।  बढ़ाई गई लोन राशि प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि यानी पीएम स्वनिधि योजना (PM SVANidhi Scheme) को अब 2030 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। साथ ही इस स्कीम से मिलने वाले लोन राशि भी बढ़ाई गई है। पहले योजना में स्ट्रीट वेंडरों को 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रुपए तक ऋण दिया जाता था। अब यह राशि 15 हजार, 25 हजार और 50 हजार रुपए तक उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा लोन की किश्त भरने पर हितग्राहियों को बैंकों की ओर से क्रेडिट कार्ड भी जारी किया जाएगा। जिससे 30 हजार रुपए तक पेमेंट किया जा सकेगा। समय पर किश्त चुकाने वाले को मिलेगा रिवॉर्ड योजना के दोबारा शुरू होने पर रेहड़ी संचालकों के लिए ऋण लेने का रास्ता खुल गया है। योजना के तहत सबसे पहले 15 हजार रुपए का ऋण मिलेगा। यदि लाभार्थी इसे समय पर चुका देता है तो अगली बार 25 हजार रुपए का ऋण मिलेगा। इसी तरह 25 हजार रुपए का ऋण समय पर चुकाने पर 50 हजार रुपए का ऋण दिया जाएगा। ऋण लेने के लिए आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज और नगर पालिका क्षेत्र के किसी बैंक में खाता होना जरूरी है। आवेदन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। इसके बाद दस्तावेज नगर निगम में जमा कराने होंगे।  जांच के बाद आवेदन होगा स्वीकार स्ट्रीट वेंडरों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शुरु हुई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना पिछले साल नवम्बर से बंद पड़ी हुई थी। ऐसे में स्ट्रीट वेंडर लोन के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे, लेकिन अब योजना फिर से शुरु कर दी गई है। नगर निगम में दस्तावेज जमा होने के बाद जांच की जाती है और फिर आवेदन स्वीकार होने के बाद लोन मिलता है। कोरोना काल में हुआ था शुभारंभ इस योजना का शुभारंभ कोरोना संक्रमण काल के समय वर्ष 2021-22 में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने छोटे व्यापारियों को पुन व्यवसाय स्थापित करने के लिए किया था। तब से इस योजना में लोन राशि की किश्त जमा करने पर संबंधित हितग्राही को आगे ज्यादा लोन राशि दी जा रही थी।  क्रेडिट कार्ड भी दिया जाएगा- परियोजना अधिकारी पीएम स्वनिधि योजना का पोर्टल लंबे समय बाद शुरू किया गया है। इसमें लोन राशि बढ़ा दी गई है। साथ ही बैंकों की ओर से हितग्राहियों को क्रेडिट कार्ड भी मिलेगा। – उमेश पयासी, परियोजना अधिकारी, पीएम स्वनिधि नगर निगम

SSC परीक्षा सेंधमारी का पर्दाफाश: लखनऊ STF ने नोएडा में 11 आरोपियों को पकड़ा

लखनऊ  लखनऊ एसटीएफ ने केंद्र की एसएससी परीक्षा में सेंधमारी करने वाले 11 मुन्नाभाई को नोएडा के फेज 2 क्षेत्र से पकड़ा है. सभी एक से डेढ़ लाख रूपये लेकर विकलांग अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दे रहे थे. आरोपियों के कब्जे से मोटी रकम करीब 14 लाख से ज्यादा बरामद हुए है. इसके अलावा परीक्षा का टेंडर देख रही कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है. कर्मचारी भी पकड़े गए है. क्या है नियम केंद्र की एसएससी परीक्षा पास करने के लिए विकलांग अभ्यर्थी को ग्रेजुएट होना जरूरी है. उसके राइटर के रूप में सिर्फ वही व्यक्ति परीक्षा दे सकता है जो कि इंटरमीडिएट हो. इस मामले में आरोपी बीटेक पास है. मोटी रकम लेकर आरोपी विकलांग की जगह परीक्षा दे रहे थे. नियमों को ताख पर रखकर ऐसा किया जा रहा था. बीटेक पास है आरोपी लखनऊ एसटीएफ के सीओ प्रमेश कुमार ने बताया कि पकड़े गए आरोपी बीटेक पास है. आरोपियों ने विकलांग अभ्यर्थियों से मोटी रकम ली और उनके स्थान पर परीक्षा दे रहे थे. सटीक सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई है. आरोपी लंबे समय से इस काम को अंजाम दे रहे थे. आरोपियों से पूछताछ जारी है.   सीएमओ के फर्जी प्रमाण पत्र मिले आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सीएमओ के फर्जी प्रमाण पत्र मिले है. इनका इस्तेमाल बीटेक पास राइटर को परीक्षा में बैठाने के लिए किया जाता था. आरोपी खुद की सीएमओ का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर लेते थे. आरोपी मुख्य रूप से साल्वर की भूमिका निभा रहे थे. कर्मचारी कराते थे एंट्री आरोपियों के गैंग में कंपनी के कर्मचारी भी शामिल है. इन कर्मचारियों की भूमिका साल्वर को परीक्षा केंद्र के अंदर एंट्री कराने की रहती थी. बिना कर्मचारी के मिलीभगत के केंद्र के अंदर एंट्री करना संभव नहीं है. इसके बदले में कर्मचारी मोटी रकम लेते थे.

प्रशांत किशोर का आरोप, अशोक चौधरी का पलटवार- अनाप-शनाप बोल रहे हैं

पटना भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बाद अब जनत दल यूनाईटेड के नेता और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी पर प्रशांत किशोर ने बड़ा आरोप लगा दिया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अशोक चौधरी ने 200 करोड़ की बेनामी संपत्ति खरीदी है। इधर, मंत्री अशोक चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रशांत किशोर अनाप-शनाप बोल रहे हैं। मैंने मानहानी का नोटिस भेजा है, इसलिए बौखलाहट में हैं। अब दोनों नेताओं के इन बयानबाजी से बिहार की सियासत गरमा गई है। प्रशांत किशोर ने शुक्रवार शाम को प्रेस वार्ता के दौरान अशोक चौधरी पर कई आरोप लगाए। कहा कि अशोक चौधरी मुख्यमंत्री के दाहिने हाथ हैं और इन्होंने बिहार में भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड बना दिए हैं। इन्होंने अपने पर्सनल सेक्रेटरी योगेंद्र दत्त के नाम पर साल 2019 में 23 कट्ठा जमीन खरीदा गया। योगेन्द्र दत्त ने दो साल बाद उस जमीन को अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी के नाम 34 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया। लेकिन उनको अकाउंट से सिर्फ 10 लाख रुपये दिए गए। बाद में इनकम टैक्स के नोटिस पर इन्होंने 27 अप्रैल 2025 को इनकम टैक्स नोटिस से बचने के लिए योगेंद्र दत्त को 25 लाख रुपये फिर ट्रांसफर किए? 'इस ट्रस्ट के माध्यम से जमीनों की खरीद की गई' प्रशांत किशोर ने बड़ा आरोप लगाते हुए कि अशोक चौधरी की पुत्री शांभवी चौधरी की जब सगाई हुई, उसके बाद स्वर्गीय किशोर कुणाल के परिवार से जुड़े मानव वैभव विकास ट्रस्ट के माध्यम से करीब 200 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है। हमारे पास इस ट्रस्ट के खिलाफ सबूत नहीं है, लेकिन शांभवी चौधरी के सायन कुणाल से सगाई के बाद ही इस ट्रस्ट के माध्यम से जमीनों की खरीद की गई। पिछले दो साल में सगाई से शादी के बीच कुल 38.44 करोड़ रुपये की पांच जमीनें खरीदी गई जिसका चेक से पेमेंट किया गया। इन सभी जमीनों का मालिकाना हक अशोक चौधरी और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के पास हैं। 'हाल के दिनों में इतनी जमीन की खरीद क्यों की गई है?' प्रशांत किशोर ने सवाल पूछते हुए कहा कि अशोक चौधरी को बताना चाहिए कि इस ट्रस्ट से उनका क्या लेना देना है? अगर कोई लेना देना नहीं है तो ट्रस्ट से जुड़ी अनीता जी जो किशोर कुणाल की पत्नी हैं, उनके अकाउंट से अशोक चौधरी की पत्नी के अकाउंट में रुपये क्यों ट्रांसफर हुए हैं? यह सब रिकॉर्ड हमारे पास है। साथ ही इस ट्रस्ट से जुड़े लोगों जिनमें अनिता जी, पूर्व ब्यूरोक्रेट जियालाल आर्या और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की माताजी जैसे लोग भी हैं, उनको बताना चाहिए कि ट्रस्ट के माध्यम से अचानक हाल के दिनों में इतनी जमीन की खरीद क्यों की गई है? 'मंत्री बोले- बिना साक्ष्य के ही झूठे आरोप लगा रहे पीके' इधर, मंत्री अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर बौखलाहट में हैं। वह सिर्फ झूठे आरोप लगा रहे हैं। इनका साक्ष्य वह दे ही नहीं सकते हैं। मैंने कुछ गलत नहीं किया है। मेरा सबकुछ जनता जानती है। सब कुछ पब्लिक डोमेन में है। मैं हर साल आईटी रिटर्न दाखिल करता हूं। मैंने अपनी कोई संपत्ति नहीं छिपाई है। मैं क्या जवाब दूं? यह तो अजीब बात है कि किसी के खिलाफ जो मन में आए, वह बोल दीजिए। अशोक चौधरी ने कहा कि मैंने हाल में ही प्रशांत किशोर पर मानहानी का नोटिस भेजा था। इसके बाद से वह बौखलाए हुए है। इसी बौखलाहट में वह अनाप-शनाप बोल रहे हैं। 

नई तकनीक से एम्स में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज, महिलाओं को बच रहा स्तन; जागरूकता अब भी बड़ी चुनौती

भोपाल  राजधानी भोपाल के एम्स हॉस्पिटल में ब्रेस्ट कैंसर का नई तकनीकी से इलाज किया जा रहा है। इस तकनीकी में ब्रेस्ट कैंसर होने पर महिलाओं का स्तन हटाने की जरूरत नहीं पड़ रही है, बल्कि जिस हिस्से में बीमारी डिटेक्ट होती है उसी का इलाज किया जाता है। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि बीमारी की आधुनिक इलाज में बारे में जागरूकता की कमी है। अक्सर महिलाएं स्तन में गांठ महसूस होने पर भय और गलतफहमी के कारण समय पर चिकित्सकीय मदद लेने से हिचकिचाती हैं। इन तकनीकों का किया जा रहा है उपयोग  एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि एक समय था जब स्तन कैंसर का मतलब पूरे स्तन को हटाना होता था। लेकिन अब समय बदल गया है। आज इसका इलाज बहु-आयामी पद्धति से किया जाता है। जिसमें कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी, सर्जरी, इम्यूनोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का संयोजन होता है। कई मामलों में केवल ट्यूमर को हटाकर और उन्नत ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी से पुनर्निर्माण करके स्तन को सुरक्षित रखा जा सकता है। एम्स के कैंसर सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि यह अत्याधुनिक तकनीक एम्स भोपाल में की जा रही है और इसके उक्तृष्ट परिणाम मिल रहे हैं। ये हैं उन्नत तकनीकें  – ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी: इस तकनीक के माध्यम से स्तन कैंसर के ट्यूमर को हटाकर स्तन को पुनर्निर्माण किया जा सकता है, जिससे स्तन को सुरक्षित रखा जा सकता है। – इंडोसाइनिन ग्रीन (ICG) डाई तकनीक: इस तकनीक के माध्यम से लसीका ग्रंथियों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है और लिम्फेडेमा के खतरे को कम किया जा सकता है। – रेडियोथेरेपी: इस तकनीक के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सकता है और ऑपरेशन की जरूरत को कम किया जा सकता है। – लीनियर एक्सेलेरेटर: यह एक आधुनिक मशीन है जो कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए उच्च ऊर्जा वाली एक्स-रे का उपयोग करती है ¹। सर्जरी के बाद होने वाली लिम्फेडेमा बड़ी परेशानी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद होने वाली चुनौतियों में से एक लिम्फेडेमा है हाथ में एक दर्दनाक सूजन जो महीनों या साल बाद भी दिखाई दे सकती है। इस जोखिम को कम करने के लिए एम्स भोपाल में अब इंडोसाइनिन ग्रीन (ICG) डाई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस डाई को ट्यूमर में इंजेक्ट किया जाता है और इन्फ्रारेड कैमरे से देखने पर यह उन लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) को स्पष्ट करता है, जो स्तन से बगल तक फैलते हैं। इन ग्रंथियों को निकालकर तुरंत फ्रोजन सेक्शन तकनीक से जांचा जाता है। यदि इनमें कैंसर कोशिकाएं नहीं पाई जातीं, तो हाथ की सामान्य लसीका नलिकाओं को सुरक्षित रखा जाता है जिससे लिम्फेडेमा का खतरा बहुत कम हो जाता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।  एम्स भोपाल की पहल – एम्स भोपाल ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें अनुभवी डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल हैं। – अस्पताल में स्तन कैंसर के इलाज के लिए उन्नत तकनीकों और उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।