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महिला नक्सली कमांडर सुजाता, इनामी राशि 1 करोड़, ने आत्मसमर्पण किया बस्तर में आतंकवाद खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम

बस्तर  छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और लगातार हो रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन को देखते हुए एक करोड़ की इनामी कुख्यात महिला नक्सली सुजाता ने आखिरकार सरेंडर कर दिया। छत्तीसगढ़ के नक्सल मोर्चे में इन दिनों सुरक्षा बलों की भारी दहशत है। ऐसे में सुजाता के सरेंडर से बस्तर संभाग में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे मुहिम के बीच माओवादियों संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। सुजाता दक्षिण बस्तर में कई वर्षों से एक्टिव थी और नक्सलियों के दक्षिण सब जोन ब्यूरो इंचार्ज रह चुकी है। सुजाता पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था। कुख्यात नक्सली कमांडर किशनजी की पत्नी है सुजाता पुलिस सूत्रों के मुताबिक सुजाता ने तेलंगाना में सरेंडर किया है। उसके सरेंडर से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। यह सरेंडर नक्सल संगठन का मनोबल गिराने वाला साबित होगा। खास बात यह है कि सुजाता कुख्यात नक्सली कमांडर किशनजी की पत्नी है, जो कुछ साल पहले पश्चिम बंगाल में मुठभेड़ के दौरान मारा गया था। सरेंडर करने वाली सुजाता खुद सीसी मेंबर है और कई राज्यों में उस पर लाखों का इनाम घोषित है। बढ़ा है दबाव दरअसल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक नक्सलियों के खात्मे का ऐलान किया है. इसके बाद छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है. इसी अभियान के चलते बसवाराजू, बालकृष्णा जैसे एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ में मार गिराया है. इनके अलावा भी कई बड़े कैडर मारे गए हैं. इससे नक्सल संगठन को बहुत बड़ा झटका लगा है. इसी बढ़ते दबाव के चलते नक्सली इलाका छोड़कर भाग रहे हैं. ऐसे में नक्सली सुजाता ने भी तेलंगाना में जाकर सरेंडर किया है.  सुजाता का पति भा मारा गया नक्सली सुजाता नक्सलियों की दक्षिण सब ज़ोनल ब्यूरो की इंचार्ज है. बस्तर में कई वर्षों से सक्रिय थी. सुजाता बंगाल में मारे गए नक्सली कमांडर किशनजी की पत्नी है. बताया जा रहा है कि पति और अन्य साथियों के मारे जाने के बाद सुजाता भी काफी घबरा चुकी थी. ऐसे में उसने तेलंगाना पुलिस के सामने जाकर सरेंडर कर दिया.   सुजाता दक्षिण बस्तर में सक्रिय रहीपुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुजाता लंबे समय से छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सक्रिय रहकर बड़े हमलों की साजिश रचने में शामिल रही है। सुजाता के सरेंडर को छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को खत्म करने के अभियान को बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बार बरसात में भी ऑपरेशन चलाया जा रहा है और एनकाउंटर में लगातार शीर्ष माओवादी मारे जा रहे हैं। सुजाता ने गिरफ्तारी की खबर का किया था खंडन सूत्रों के मुताबिक, 17 अक्टूबर 2024 को सुजाता को तेलंगाना से गिरफ्तार करने की खबर सामने आई थी पर यह खबर अफवाह साबित हुई थी। क्योंकि खुद सुजाता ने ही इसका खंडन करते हुए कहा था कि उसकी गिरफ्तारी की खबर अफवाह है। कहा गया था कि वह इलाज कराने के लिये बस्तर से तेलंगाना गई थी, जहां पर उसे तेलंगाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बस्तर के जंगलों में बीता सुजाता का समय डीके एसजेडसी के सचिव रामन्ना की मौत के बाद सुजाता को डीकेएसजेडसी का प्रभारी बनाया गया था। इसके पश्चात वर्तमान में वह साउथ सब जोनल ब्यूरो की प्रभारी के रुप में कार्यरत थी। सुजाता का अधिकांश समय बस्तर के जंगलों में बीता है। वह तेलंगाना और बंगाल में भी सक्रिय रह चुकी है। बस्तर में तर्रेम थाना के भट्टीगुड़ा, तुमलपाट व मीनागुट्टा के जंगलों में अक्सर देखी जाती थी। वह अपने परिवार की तीसरी बड़ी नक्सली थी, जिसे नक्सलियों का थिंक टैंक माना जाता था। यही कारण है कि उसे नक्सलियों की सर्वोच्च सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया था। नामनक्सल संगठन में सुजाता के कई नाम प्रचलित नक्सल संगठन में उसके कई नामनक्सल संगठन में सुजाता के कई नाम प्रचलित हैं। उसे पद्मा, कल्पना, सुजाता, सुजातक्का, झांसीबाई कहा जाता है। बंगाल में उसे मैनीबाई के नाम से भी जाना जाता है। 12वीं तक पढ़ी सुजाता अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, ओडि़या, तेलुगु के साथ गोंडी, हल्बी बोली की जानकार है। बड़े हमलों के पीछे सुजाता का दिमाग बड़े हमलों के पीछे सुजाता का ही दिमाग रहा है। 2007 में एर्राबोर में 23 जवान बलिदान, अप्रैल 2010 में ताड़मेटला में 76 जवान बलिदान, 2010 में गादीरास में 36 की हत्या, झीरम में 2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमले में 31 की हत्या, 2017 ¨चतागुफा में 25 जवान, मिनपा में 17 जवान, टेकुलगुड़ेम में 21 जवान के बलिदान की घटनाओं के पीछे सुजाता ही रही है। माओवादी संगठन को लगातार झटका छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठनों को एक के बाद एक लगातार झटके मिल रहे हैं। दो दिन पहले छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुलिस एनकाउंटर में 10 नक्सली मारे गए थे, जिसमें एक करोड़ का इनामी नक्सली सीसी मेंबर मनोज उर्फ बालकृष्ण भी शामिल था। गरियाबंद में मारे गए सभी 10 नक्सलियों रुपये 2.40 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वहीं एक दिन पहले बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने दो नक्सलियों को मार गिराया था। नक्सलियों की पहचान हिड़मा पोड़ियाम और मुन्ना मड़कम के रूप में हुई थी। दोनों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। मुठभेड़ स्थल से एक 303 रायफल, एक नग 12 बोर बंदूक सहित विस्फोटक सामान और प्रतिबंधित नक्सल संगठन के अन्य सामान बरामद किए गए हैं।

रायपुर : मुख्यमंत्री से पूज्य संत श्री असंग देव जी ने की सौजन्य भेंट

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में परम पूज्य संत श्री असंग देव जी ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने शॉल और श्रीफल भेंट कर पूज्य संत श्री असंग देव जी का सम्मान किया तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। संत श्री असंग देव जी ने मुख्यमंत्री को गौमाता की प्रतिमा भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और पूज्य संत श्री असंग देव जी के मध्य विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब तथा बड़ी संख्या में संत असंग देव जी के अनुयायी संतगण भी उपस्थित थे।

Mutual Fund निवेशकों के लिए राहत, SEBI ने कम किया एग्जिट लोड, जानें क्या बदलेगा

मुंबई  बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने  म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टर प्रोटेक्शन और फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने मैक्सिमम परमीसिबल एग्जिट लोड को 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी कर दिया है। इससे म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि यह लोड फंड से निकासी के समय लगता है। सेबी ने इस बैठक में आइपीओ, कमोडिटी और बीमा सेक्टर से जुड़े नियमों को सरल किया है, जिससे निवेशक आकर्षित हो सके। क्या है एग्जिट लोड और किसे मिलेगा फायदा? जब आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और कुछ समय बाद अपने यूनिट्स बेचकर बाहर निकलते हैं, तो फंड हाउस आपसे एक शुल्क ले सकता है। इसे एग्जीट लोड कहा जाता है। एग्जीट लोड कम होने से सीधे तौर म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें कम निकासी शुल्क देना होगा। बड़ी कंपनियों के लिए हुआ यह फैसला सेबी ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपए से एक लाख करोड़ रुपए के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत का कम से कम पब्लिक शेयर रखने के मानदंड को अब मौजूदा तीन सालों की जगह पांच सालों में हासिल किया जा सकता है। जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ के बीच है, उनके लिए सेबी ने न्यूनतम 6,250 करोड़ या आइपीओ के बाद मार्केट कैप का 2.75 प्रतिशत तक का रखने की बात कही है। वहीं, 5 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए, सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश का आकार 15,000 करोड़ रुपए या 1 प्रतिशत रखने की बात कही है। एंकर कोटे में मिलेगी प्राथमिकता एंकर कोटे में बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों के लिए 7 फीसदी अतिरिक्त कोटा होगा। यानी बीमा, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंडों के लिए 40 प्रतिशत कोटा होगा। इसके अलावा 250 करोड़ रुपए से अधिक के स्वीकार्य एंकर आवंटियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है। बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को आईपीओ एंकर बुक के लिए रिजर्व कैटेगरी में शामिल किया जाएगा। एमपीएस नियम हो जाएंगे सरल इससे जियो जैसे मेगा इश्यू के लिए पब्लिक ऑफर और एमपीएस नियम अब ज्यादा सरल हो जाएंगे। कॉर्पोरेट्स पर दबाव घटेगा कंपनियों को कम समय में बड़े पैमाने पर इक्विटी डायल्यूशन से बचने का मौका मिलेगा। ऑफर्स से रिटेल और संस्थागत निवेशकों को ज्यादा अवसर मिलेंगे।

भारत में अमेरिका के राजदूत पद पर सर्जियो गोर की दावेदारी पर विवाद गहराया

नई दिल्ली अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का अगला राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया मामलों के लिए विशेष दूत नियुक्त करने के फैसले पर कड़ा सवाल उठाया है। बोल्टन ने साफ कहा कि वह गोर को इस जिम्मेदारी के लिए "योग्य नहीं" मानते। बोल्टन ने कहा, "मैं नहीं मानता कि सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के राजदूत बनने के योग्य हैं।" बोल्टन की यह टिप्पणी भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले दो दशकों के संभवतः सबसे खराब दौर की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें ट्रंप की टैरिफ नीति और उनके प्रशासन द्वारा भारत की लगातार आलोचना के कारण तनाव और बढ़ गया है। 38 वर्षीय सर्जियो गोर ट्रंप के करीबी सलाहकार हैं और वाइट हाउस में सीधे राष्ट्रपति तक पहुंच रखते हैं। हालांकि एएनआई को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने उनकी अंतरराष्ट्रीय अनुभव और जटिल वैश्विक मुद्दों की समझ पर चिंता जताई। पूर्व एनएसए ने कहा कि गोर की नियुक्ति ट्रंप की "व्यवहारिक" विदेश नीति का हिस्सा लगती है, जो रणनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत वफादारी पर आधारित है। ट्रंप ने अगस्त में ट्रूथ सोशल पर घोषणा की थी कि वे सर्जियो गोर को भारत के लिए अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत के पद पर पदोन्नत कर रहे हैं। ट्रंप ने गोर को "मेरा शानदार दोस्त" बताते हुए उनकी सराहना की थी। उन्होंने लिखा, "राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक के रूप में, सर्जियो और उनकी टीम ने रिकॉर्ड समय में लगभग 4,000 अमेरिका फर्स्ट पैट्रियट्स को केंद्र सरकार के हर विभाग में भर्ती किया है- हमारे विभाग और एजेंसियां 95 प्रतिशत से अधिक भरी हुई हैं! सर्जियो अपनी वर्तमान भूमिका में तब तक बने रहेंगे जब तक उनकी (संसद द्वारा) पुष्टि नहीं हो जाती।" रूसी तेल खरीद पर बोल्टन की टिप्पणी: प्रतिबंधों में 'असंगति' ट्रंप के पिछले कार्यकाल में एनएसए रहे बोल्टन ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कई देशों ने रूस से कच्चा तेल खरीदकर प्रतिबंधों की "कमजोरी" का फायदा उठाया। उनके अनुसार, प्रतिबंधों का मकसद रूस की आय को कम करना था ताकि उसका युद्ध तंत्र कमजोर हो सके, लेकिन तेल बिक्री को पूरी तरह रोकना नहीं था, क्योंकि ऐसा करने से यूरोप और अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ सकती थीं। बोल्टन ने कहा, “यहां तक कि तकनीकी रूप से कई देशों ने प्रतिबंधों का उल्लंघन भी नहीं किया, बल्कि रूस से कैप प्राइस से नीचे तेल खरीदकर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दाम पर बेचा। मूल उद्देश्य यही होना चाहिए कि रूस के युद्ध तंत्र को फंडिंग न मिले।” भारत को दी सलाह – "ट्रंप को वन-टाइम डील मानें" पूर्व NSA बोल्टन ने भारत को सलाह देते हुए कहा कि नई दिल्ली को ट्रंप को "एक बार की घटना" मानना चाहिए और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर फैसले करने चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत सरकार को चाहिए कि ट्रंप को एक ‘वन-टाइम प्रपोजिशन’ की तरह देखें और अपने हितों के अनुसार कदम उठाएं। ट्रंप की नीतियां अमेरिकी राजनीति के बड़े दृष्टिकोण को नहीं दर्शातीं।" ट्रंप की विदेश नीति शैली पर तीखी आलोचना बोल्टन ने ट्रंप की विदेश नीति को "अनिश्चित और लेन-देन आधारित" बताते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की बड़ी वजह ट्रंप का "अनियमित और अस्थिर" तरीका रहा है। ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाते हुए कुल दंडात्मक टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है। यह दबाव इसलिए बनाया गया ताकि भारत रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद बंद करे। इस कदम से दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापार वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ा है।  

राज्य की कला प्रतिभाओं को सम्मान: बिहार कला पुरस्कार में चुने गए 52 कलाकार

पटना  पटना में बिहार कला पुरस्कार योजना से संबंधित प्रेस कॉन्फ़्रेंस का आयोजन कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मोतीलाल प्रसाद की अध्यक्षता में किया गया. इस अवसर पर विभागीय सचिव प्रणव कुमार समेत अन्य अधिकारीगण एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे. मंत्री मोतीलाल प्रसाद ने बताया कि बिहार कला पुरस्कार का उद्देश्य राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाक्षुष (दृश्य) एवं प्रदर्श कला की विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्थापित एवं नवोदित कलाकारों को सम्मानित करना है. तीन वर्षों के लिए 52 कलाकारों का चयन वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए कुल 52 कलाकारों का चयन किया गया है, जिसमें निम्नलिखित श्रेणियां सम्मिलित हैं:     22 स्थापित कलाकार     18 नवोदित कलाकार     6 राष्ट्रीय पुरस्कार     6 लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार चयन विवरण:     2022-23: 6 स्थापित, 7 नवोदित, 2 राष्ट्रीय, 2 लाइफटाइम     2023-24: 8 स्थापित, 5 नवोदित, 2 राष्ट्रीय, 2 लाइफटाइम     2024-25: 8 स्थापित, 5 नवोदित, 2 राष्ट्रीय, 2 लाइफटाइम पुरस्कार स्वरूप और धनराशि बिहार सरकार द्वारा चयनित कलाकारों को कुल 27,72,000 रुपए की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी. पुरस्कार स्वरूप निम्नानुसार राशि एवं सम्मान सामग्री दी जाएगी:     राष्ट्रीय पुरस्कार – ₹1,00,000- स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र     लाइफटाइम अचीवमेंट – ₹1,00,000 – स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र     स्थापित कलाकार – ₹51,000 – स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र     नवोदित कलाकार – ₹25,000 – स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र प्रमुख विजेता कलाकारों के नाम (वर्ष 2022-23)     राष्ट्रीय पुरस्कार: चित्रा प्रसाद, पद्मश्री दुलारी देवी     लाइफटाइम अचीवमेंट: अनिल बिहारी, सुमन कुमार वर्ष 2023-24     राष्ट्रीय पुरस्कार: कल्पना पटवारी, पद्मश्री बउआ देवी     लाइफटाइम अचीवमेंट: पद्मश्री निर्मला देवी, भरत सिंह भारती वर्ष 2024-25     राष्ट्रीय पुरस्कार: रत्नेश्वर प्रसाद (प्रदर्श कला), अशोक कुमार विश्वास (चाक्षुष कला)     लाइफटाइम अचीवमेंट: शिवन पासवान (गोदना कला), भरत शर्मा व्यास (लोक गायन) इसके अतिरिक्त समकालीन कला, लोक कला, रंगमंच, शास्त्रीय एवं लोक संगीत, वाद्य वादन, नृत्य इत्यादि क्षेत्रों के कुल 18 अन्य कलाकारों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा. सम्मान समारोह: 24 सितंबर को होगा आयोजन मंत्री मोतीलाल प्रसाद ने बताया कि चयन प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी, जिसे अब संपन्न कर लिया गया है. तीन वर्षों के पुरस्कारों की घोषणा के साथ 24 सितंबर 2025 को सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा. विभागीय सचिव प्रणव कुमार ने बताया कि इस योजना के तहत 150 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से उच्च गुणवत्ता वाले कलाकारों का चयन किया गया है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना के लिए आवेदन की तिथि बढ़ाई जा सकती है. राज्य सरकार की प्रतिबद्धता मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार सरकार कलाकारों को पहचान, सम्मान और प्रोत्साहन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. बिहार कला पुरस्कार राज्य की सांस्कृतिक गरिमा को समृद्ध करने और कला के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा है.  

MP में लागू हुआ नगरपालिका संशोधन अध्यादेश 2025, समझें इसके मुख्य प्रावधान और प्रभाव

भोपाल   प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के पार्षद अब अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाकर नहीं हटा सकेंगे। उन्हें सीधे जनता ही हटाएगी। इसके लिए सरकार ने मप्र नगरपालिका संशोधन अध्यादेश 2025 लागू कर दिया है। इसके अनुसार अध्यक्ष को हटाने के लिए कराए गए गुप्त मतदान में नपा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से आधे से ज्यादा बहुमत जरूरी होगा। अध्यक्ष को वापस बुलाने की प्रक्रिया भी पद संभालने के तीन साल तक शुरू नहीं हो सकेगी। इतना ही नहीं, अध्यक्ष को वापस बुलाने की प्रक्रिया पूरे कार्यकाल में सिर्फ एक बार हो सकेगी। विधि एवं विधायी विभाग ने मप्र नगरपालिका संशोधन अध्यादेश 2025 का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया है। अध्यादेश कैबिनेट में मंजूर होने के साथ 9 सितंबर को ही राजपत्र में प्रकाशन के लिए भेजा गया था। वर्तमान में अविश्वास से जूझ रहे अध्यक्षों को भी राहत अध्यादेश लागू होने के बाद वर्तमान में शिवपुरी समेत अन्य नगरीय निकायों में अविश्वास से जूझ रहे अध्यक्षों को राहत मिलेगी। इसके लागू होने से मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के अविश्वास प्रस्ताव संबंधी प्रावधान निष्प्रभावी हो गए हैं। वहीं अध्यादेश के लागू रहने की अवधि में नपा अधिनियम में अध्यादेश के संशोधनों के अधीन रहते हुए ही प्रभावी होगा। खासतौर पर धारा 3 से 18 तक संशोधन ही प्रभावी होंगे। बता दें, अध्यादेश 6 माह तक लागू रहेगा। इस अवधि में विधानसभा में इस प्रस्ताव को पारित कराना जरूरी है।

नालों-नहरों की गंदगी पर सैलजा का सीएम को पत्र, कार्रवाई की मांग

चंडीगढ़  कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव व सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर सिरसा संसदीय क्षेत्र में नहरी-नालों की सफाई, घग्गर नदी तटबंधों के मजबूतीकरण और अमृत योजना में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते तो न तो बाढ़ का इतना बड़ा संकट खड़ा होता और न ही किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ती। सैलजा ने याद दिलाया कि मई-जून में ही उन्होंने नहरी नालों की सफाई और तटबंधों की मजबूतीकरण का आग्रह किया था। 30 जून तक अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी हुए थे और तीन जुलाई को सिरसा में हुई दिशा की बैठक में भी मामला उठाया गया था, मगर धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में सिरसा, फतेहाबाद और जींद के दौरे के दौरान सांसद ने पाया कि नहरी नालों व सीवरेज की समय पर सफाई न होने से फसलें जलमग्न हो गई और आवासीय क्षेत्र भी प्रभावित हुए। उन्होंने हिसार-घग्गर ट्रेन मार्ग से जुड़े गांवों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि हजारों एकड़ फसल पानी में डूबकर नष्ट हो गई। सांसद ने सरकार द्वारा घोषित मुआवजा राशि को किसानों के साथ मजाक बताते हुए उचित और पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की। सैलजा ने सिरसा नगर की अमृत योजना पर भी सवाल उठाए और कहा कि सीवर सफाई न होने से बारिश में नागरिकों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

हथियारों का जखीरा पकड़ा गया: पुलिस ने 43 पिस्तौल और 2317 कारतूस जब्त किए

फिरोजपुर  पंजाब में बाढ़ की आड़ में पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी की जा रही है। इसी कड़ी में फाजिल्का पुलिस ने लगातार दूसरे दिन पाकिस्तान से हो रही हथियार तस्करी को नाकाम किया है। शुक्रवार को सीआईए स्टाफ ने गश्त के दौरान गांव थेह कलंदर के निकट दो आरोपियों को दबोचकर उनके कब्जे से 16 पिस्तौल, 38 मैगजीन और 1847 जिंदा रौंद बरामद किए। इससे एक दिन पहले बृहस्पतिवार को पुलिस ने 27 पिस्तौल जब्त की थी। आरोपियों की पहचान गुरविंदर सिंह निवासी गांव झोक डिपुलाना और सोना सिंह निवासी महातम नगर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों बाढ़ का फायदा उठाकर पाकिस्तान से अवैध हथियार ला रहे थे। दो दिनों में लगातार दूसरी बड़ी बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद यह पता लगाया जाएगा कि ये हथियार किन गिरोहों या व्यक्तियों को सप्लाई किए जाने थे और क्या वे पहले भी इस तरह की तस्करी में शामिल रहे हैं। वहीं, बृहस्पतिवार को काउंटर इंटेलिजेंस (सीआई) फिरोजपुर ने स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) फाजिल्का के साथ संयुक्त ऑपरेशन में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक सीमा पार से चल रहे संगठित हथियार तस्करी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था, जिसमें 27 आधुनिक .30 बोर पिस्टलें और 470 कारतूसों सहित दो हथियार सप्लायर्स को गिरफ्तार किये गये। यह जानकारी पुलिस डायरेक्टर जनरल (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव ने दी। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मंगल सिंह उर्फ मंगली, निवासी तेजा रहेला, फाजिल्का, और गुरमीत सिंह, निवासी ग्राम मुहार जमशेर, फाजिल्का के रूप में हुई। विदेशी संस्था और इसकी भूमिका की जांच जारी डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हथियारों का यह बड़ा खेप पाकिस्तान से एक विदेशी संस्था के माध्यम से प्राप्त किया गया था और राज्य में आपराधिक गिरोहों द्वारा उपयोग किया जाना था। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार आरोपी इन हथियारों को अपने विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर आपराधिक समूहों के संचालकों को पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे। डीजीपी ने बताया कि इस मॉड्यूल में शामिल अन्य सदस्यों की पहचान करने तथा तस्करी किए गए हथियारों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। इस अवसर पर एआईजी सीआई फिरोजपुर गुरसेवक सिंह बराड़ ने भी ऑपरेशन बारे जानकारी दी।

लिवर डैमेज के संकेत छिपे हैं पैरों में! जानें वो 8 लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

लिवर शरीर का एक बेहद जरूरी अंग है, जो न केवल टॉक्सिन को बाहर निकालने का काम करता है, बल्कि डाइजेशन, हार्मोन बैलेंस और इम्युनिटी में भी अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, जब लिवर में गड़बड़ी या डैमेज होता है, तो इसका असर केवल पेट या स्किन तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों, खासकर पैरों में भी कई संकेत दिखाई देने लगते हैं। ये संकेत समय रहते पहचानना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि अनदेखी करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। तो आइए जानें लिवर खराब होने के वे कुछ लक्षण जो पैरों में महसूस होते हैं- पैरों में सूजन लिवर जब ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में फ्लूइड रिटेंशन होने लगता है, जिससे पैरों, टखनों और पंजों में सूजन आ जाती है। यह सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है और आराम करने के बाद भी कम नहीं होती। पैरों में खुजली लिवर की बीमारी में बाइल (पित्त) का फ्लो प्रभावित होता है, जिससे शरीर में बाइल साल्ट्स जमा हो जाते हैं और इससे स्किन में खुजली महसूस होती है, जो अक्सर पैरों में अधिक होती है। पैरों में दर्द और भारीपन लिवर डैमेज के कारण टॉक्सिन्स शरीर में जमा हो जाते हैं, जिससे पैरों में भारीपन, सुन्नपन या दर्द महसूस हो सकता है। नसों का उभरना लिवर सिरोसिस की स्थिति में हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे पैरों में नीली नसें उभरने लगती हैं, जिन्हें स्पाइडर वेन्स कहा जाता है। स्किन का पीला पड़ना जब लिवर ठीक से बिलीरुबिन को प्रोसेस नहीं करता, तो शरीर में इसके लेवल बढ़ जाते हैं और इससे स्किन और आंखें पीली हो जाती हैं। पैरों की स्किन में भी पीलापन साफ दिखता है। मांसपेशियों का कमजोर होना लिवर से संबंधित गंभीर बीमारियों में शरीर की मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे पैरों में कमजोरी और थकावट महसूस होती है। पैरों का रंग बदलना लिवर की गड़बड़ी से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे पैरों का रंग नीला, बैंगनी या गाढ़ा पड़ सकता है। झुनझुनी और सुन्नपन लिवर खराब होने से नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है और इससे पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन की शिकायत होती है। पैरों में दिखने वाले ये संकेत लिवर की किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण लगातार बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है, जिससे समय रहते इलाज किया जा सके और लिवर की स्थिति को सुधारा जा सके।  

जीएसटी सुधार को बताया क्रांतिकारी कदम, मुख्यमंत्री साय ने उज्जवल भविष्य की दी उम्मीद

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णणुदेव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में जीएसटी में जो सुधार किए गए हैं, वह देश के डेढ़ सौ करोड़ लोगों के जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आया है। आयकर में ऐतिहासिक छूट के बाद अब जीएसटी के स्लैब का सरलीकरण, इसके रेट में अभूतपूर्व सुधार आम आदमी के जीवन को खुशहाल करने वाले और व्यापार उद्योग को नई गति देने वाले हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इससे न सिर्फ लोगों की बचत में ऐतिहासिक वृद्धि होगी, बल्कि जीएसटी कानूनों के सरलीकरण से अब व्यापारी भी अधिक सुगमता के साथ अपना कार्य कर सकेंगे। मां शक्ति की अराधना के पावन पर्व 'नवरात्रि' से लागू होने वाले यह नए प्रावधान देश को आर्थिक रूप से और शक्तिशाली बनाएंगे। कांग्रेस के समय 17 प्रकार के टैक्स और 13 प्रकार के सेस लागू थे प्रदेश के मुख्यमंत्री साय ने  यहाँ कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आहूत पत्रकार वार्ता में कहा कि 101 वें संविधान संशोधन द्वारा 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने से पहले तक भारत में 17 प्रकार के टैक्स और 13 प्रकार के सेस लागू थे। प्रत्यक्ष कर की बातें करें तो आयकर की दर तो एक समय अधिकतम 97.5 प्रतिशत तक पहुँच गई थी। पिछले वर्ष 12 लाख सालाना की आय को टैक्स फ्री किया गया। अब जीएसटी में चार स्लैब के बदले दो ही स्लैब रखने, सभी उपयोगी वस्तुओं पर कर शून्य करने और अनेक उत्पादों में कर 10 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है।  90 प्रतिशत सामान सस्ते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नये सुधार से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। रोजमर्रा की अनेक वस्तुएँ जैसे तेल, शैम्पू, टूथपेस्ट, मक्खन, पनीर, सिलाई मशीन से लेकर ट्रैक्टर व उसके कलपुर्जे व अन्य कृषि उपकरण तथा व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, शैक्षणिक वस्तुओं के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक व ऑटोमोबाइल उत्पादों को किफायती बनाया गया है। जीएसटी कम होने का लाभ वस्त्र उद्योग को विशेष रूप से निर्यात के लिए होगा। प्रत्येक परिवार को कम से कम 50 हजार की बचत होगी एक परिवार जो अपने जीवन यापन के लिए 3 से 3.5 लाख प्रत्येक वर्ष खर्च करता है, उन्हें काम से कम इतना लाभ मिलेगा। इसी तरह यह सुधार कृषि क्षेत्र के लिए वरदान जैसा है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, रोटावेटर में अलग-अलग तरह के जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। यह किसान के लिए लागत सक्षम कृषि में सहायक होगी। जैव-कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर जीएसटी दर घटाई गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान प्रदेश है। यहां की 80 फीसदी आबादी कृषि करती है। जीएसटी की छूट से 25 हजार से 63 हजार तक की बचत केवल एक ट्रैक्टर की खरीदी पर होगी। 9 लाख रु के ट्रैक्टर पर 65 हजार की बचत 35 HP के ट्रैक्टर जिसकी कीमत लगभग 5 लाख 80 हजार होती थी इस पर 41 हजार रु कम देने होंगे। एक किसान के लिए ये रकम बचना बहुत ज्यादा मायने रखती है। देश भर में एक वर्ष में लगभग 9 लाख ट्रैक्टर बिकते हैं, जिसमें किसानों को सीधे 6 हजार करोड़ की बचत होगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 30 से 35 हजार ट्रैक्टर प्रतिवर्ष बिकने का अनुमान है, जिससे यहां के किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत केवल ट्रैक्टर में जीएसटी रेट कम होने से होगी। ट्रैक्टर के टायर में ही 7 हजार रुपये की बचत होगी। कृषि उपकरणों जैसे हार्वेस्टर, ट्रैक्टर टायर, बागवानी मशीन, खाद बनाने की मशीन, जैव कीटनाशक, मेंथॉल, सिंचाई मशीनों, कृषि मशीनरी, ड्रिप इरीगेशन सिस्टम, स्प्रिंकलर एवं अन्य पर अब केवल 5 प्रतिशत टैक्स होने से भी उत्पादन की लागत में कमी आएगी एवं मुनाफा बढ़ेगा। स्वास्थ्य और जीवन बीमा पूरी तरह टैक्स फ्री मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस कर छूट में एक सबसे उल्लेखनीय बिन्दु जो हमारे लिए निजी तौर पर भी संतोष देने वाला है, वह है स्वास्थ्य बीमा में जीएसटी को शून्य कर देना।  स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा उत्पादों पर कर समाप्त करने का लाभ सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। यह कर छूट सभी के लिए बीमा का लक्ष्य पाने में मददगार होगा। सस्ते इलाज के संदर्भ में यह कदम ऐतिहासिक है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बड़ा लाभ होगा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसके अलावा तेंदू पत्ता और लघु वनोपजों की प्रोसेसिंग मशीन में जीएसटी दर कम करने से हमारे बस्तर-सरगुजा अञ्चल के संग्राहकों को बड़ा लाभ होगा। जनजातीय क्षेत्र में तेंदू पत्ता जैसे लघु वन्य उत्पार्दों की मांग अधिक बढ़ेगी, इससे प्रदेश को भी काफी लाभ होगा। छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष कर महत्वपूर्ण है। इसी तरह कोयले पर सेस हटाना भी महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ को आर्थिक सुधार और शानदार प्रबंधन के लिए केवल प्रोत्साहन राशि के मद में 6200 करोड़ रुपए मिले हैं। जीएसटी अब गुड एंड सिंपल टैक्स हो गया है मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में बनी यह कौंसिल लोकतंत्रिक संघवाद का एक बेहतरीन मॉडल है। छत्तीसगढ़ से पदेन सदस्य के रूप में वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने भी इस सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नया जीएसटी सुधार वास्तव में एक नए क्रांतिकारी आर्थिक युग का सूत्रपात है। इस सुधार से सबसे अधिक लाभान्वित हमारे देश के गरीब और मध्य वर्ग के लोग होंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह एक नए सुनहरे युग में प्रवेश करने जैसा है। किसानों को अधिक सक्षम और देश में रोजी-रोजगार के आधिकाधिक अवसर उपलब्ध होने से प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के सपनों को साकार करने वाली इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी का पूरा प्रदेश अभिनंदन कर रहा है। इस दौरान पत्रकार वार्ता में वित्त मंत्री ओपी चौधरी, भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन, डॉ.नवीन मार्कण्डेय, भाजपा मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय, प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज मौजूद रहे।