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SC ने सुनाया बड़ा आदेश, दुर्घटना के शिकार बच्चों और दिव्यांगों को मिले कुशल श्रमिक के बराबर मुआवजे

इंदौर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना उसे कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे।  सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसका असर देशभर में होगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना अब बच्चे को कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे, अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो इन दस्तावेजों को पेश करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी। फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजी जाए, ताकि निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके। बता दें, अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इंकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मप्र में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14,844 मासिक, यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है। साल 2012 में हुई थी दुर्घटना, ऐसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी गुजर रहे वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (जिला न्यायालय) के समक्ष दस लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। जिला न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश बीमा कंपनी को दिए। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई। इसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की राशि 35 लाख 90 हजार रुपये कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या? बता दें कि अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इनकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14844 मासिक यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।     कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन को ही मानें बच्चे की आय     कोर्ट ने फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजने का दिया निर्देश ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला? 14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी एक वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के समक्ष 10 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश बीमा कंपनी को दिया। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। ऐतिहासिक फैसला, देशभर में लागू होगा     सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। पहली बार बच्चों की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने पर उन्हें कुशल श्रमिक मानते हुए कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति के लिए हकदार माना है। फैसले का असर पूरे देश में चल रहे क्लेम प्रकरणों पर पड़ेगा। -राजेश खंडेलवाल, दुर्घटना क्लेम प्रकरण के वकील  

बॉलीवुड एक्ट्रेस पर मेलबर्न में भारी जुर्माना, 1.25 लाख रुपए चुकाने पड़े

मेलबर्न भारत के कई हिस्सों में शादी या किसी भी त्योहार में महिलाएं बालों में गजरा लगाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फूलों से बना ये गजरा लगाने पर आपको 1.25 लाख रूपए का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है. जी हां, हाल ही में मलयालम एक्ट्रेस नव्या नायर ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मलयाली समुदाय द्वारा आयोजित ओणम समारोह में हिस्सा लेने के लिए गई थीं, लेकिन वहां पहुंचते ही उनके साथ ऐसी घटना हुई, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. गजरे के कारण एक्ट्रेस ने चुकाई मोटी रकम बता दें कि मेलबर्न अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर मलयालम एक्ट्रेस नव्या नायर को उनके हैंडबैग में रखे गए चमेली के फूलों की वजह से रोक लिया गया. 15 सेंटीमीटर लंबी एक छोटी सी चमेली की माला ले जाने के कारण एक्ट्रेस को 1980 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग ₹1.25 लाख) का भारी जुर्माना भरना पड़ा है. ओणम समारोह के मंच से खुद एक्ट्रेस ने इस घटना का खुलासा किया है. मंच पर एक्ट्रेस ने बताया कि यह माला उनके पिता ने उनके लिए कोच्चि एयरपोर्ट से खरीदी थी. एक्ट्रेस नव्या नायर ने माला को दो टुकड़ों में बांट दिया था. जिसका एक टुकड़ा कोच्चि से सिंगापुर की फ्लाइट में पहन लिया, लेकिन सिंगापुर पहुंचते-पहुंचते वह मुरझा गया था. माला का दूसरा टुकड़ा एक्ट्रेस ने एक प्लास्टिक कैरी बैग में रखकर अपने हैंडबैग में रख लिया, ताकि वह सिंगापुर एयरपोर्ट पर फिर से पहन सकें. लेकिन नव्या नायर को मालूम नहीं था कि फूलों को इस तरह ऑस्ट्रेलिया ले जाना कानून के खिलाफ है. मेलबर्न अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने जब उनके बैग की तलाशी ली तो चमेली के फूल देखकर उन्हें रोक लिया और तुरंत जुर्माना लगाया दिया. नव्या ने ओणम समारोह के मंच से अपनी बात रखते हुए कहा, ‘मुझे पता है कि मुझसे गलती हुई, लेकिन यह जानबूझकर नहीं किया गया था. मैं बस अपने पिता के कहने पर वह माला ले जा रही थी. उन्होंने मुझे 28 दिनों के अंदर जुर्माना भरने को कहा है.’ बता दें कि ऑस्ट्रेलिया का बायो-सिक्योरिटी कानून इस मामले में बेहद सख्त है. ऑस्ट्रेलियाई सीमा बल की वेबसाइट के मुताबिक, ‘पौधे, फूल और बीज’ जैसे जैविक पदार्थ बिना सरकारी परमिट के देश में लाना मना है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये पदार्थ कीटों, बीमारियों और जैविक असंतुलन का कारण बन सकते हैं. खासतौर पर उन फूलों और बीजों पर मिट्टी, पत्ते, फलियां या तनों के अवशेष पाए जाने पर इन्हें खतरे की श्रेणी में रखा जाता है.

बिजली बकाया ₹7,000 करोड़ से अधिक, हरियाणा सरकार ने डिफॉल्टरों के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की

चंडीगढ़  हरियाणा की बिजली वितरण कंपनियां गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही हैं। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) पर उपभोक्ताओं का बकाया जून 2025 तक बढ़कर 7,695.62 करोड़ रुपए हो गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, न केवल ग्रामीण और शहरी घरेलू उपभोक्ता बल्कि औद्योगिक इकाइयां और सरकारी विभाग भी बिल चुकाने में पीछे हैं। बिजली निगम सरकारी तंत्र से ही बिलों की वसूली नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और कमजोर हुई है। 22 लाख से अधिक उपभोक्ता बने डिफाल्टर हरियाणा में 22 लाख 21 हजार 315 उपभोक्ता समय पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर पाए हैं और अब डिफाल्टर बन चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या ऐसे उपभोक्ताओं की भी शामिल है, जिनकी बिजली आपूर्ति अभी भी चालू है, जबकि कई उपभोक्ताओं के कनेक्शन पहले ही काट दिए गए हैं। सबसे अधिक बकाया ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं पर ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता के सबसे अधिक बकाया लगभग 4,400 करोड़ रुपए। शहरी घरेलू उपभोक्ता के करीब 834 करोड़ रुपए। कृषि क्षेत्र के किसानों पर 194 करोड़ रुपए कर बकाया। गैर-घरेलू (वाणिज्यिक प्रतिष्ठान) के लगभग 770 करोड़ रुपए। औद्योगिक इकाइयां के 1,063 करोड़ रुपए से अधिक का बिजली बिल बकाया है। सरकारी विभाग के स्वयं सरकारी कार्यालयों पर ही 389 करोड़ रुपए का बकाया। अन्य श्रेणी के लगभग 43 करोड़ रुपए बकाया है। बकाया नहीं देने पर क्या होगा? बिजली का बिल नहीं भरने पर पहले जुर्माना और ब्याज लगता है, फिर बिजली कनेक्शन काटा जा सकता है। कनेक्शन कटने पर आपको दोबारा जोड़ने के लिए शुल्क देना पड़ता है, और बकाया बिल का भुगतान न करने पर यह बढ़ता जाता है, जिससे लाखों रुपए तक का भुगतान भी करना पड़ सकता है। हरियाणा में लागू वन टाइम सेटलमेंट स्कीम हरियाणा में बिजली पेंडिंग बिल डिफाल्टरों को ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बड़ी राहत दे चुके हैं। विज ने पेंडिंग बिल के भुगतान को लेकर ऊर्जा विभाग की ओर से वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू कर चुके हैं। वन टाइम बिल का भुगतान करने में 10% की छूट मिल रही। साथ ही 100% सरचार्ज में भी छूट भी विभाग दे रहा है। स्कीम के तहत किश्तों में बिल देने पर 100% सरचार्ज माफ होगा। घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा इंडस्ट्री और दूसरे उपभोक्ताओं को भी राहत दी गई है। ये दोनों उपभोक्ता यदि पेंडिंग बिल भरेंगे तो उन्हें भी 50% सरचार्ज माफ की सुविधा मिलेगी। स्कीम पूरी होने में दो महीने बचे अनिल विज ने चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय में चार महीने पहले इस स्कीम को लागू करने का ऐलान दिया था। उन्होंने कहा था सूबे में यह योजना 6 महीने तक लागू रहेगी। ऊर्जा मंत्री बिजली बिल बकाएदारों से अपील कर चुके हैं कि वह अधिक से अधिक संख्या में इस योजना का लाभ उठाएं। अपना बकाया बिल जमाकर वह इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। इस योजना का अच्छा रिस्पांस मिलने पर इसकी अवधि को विभाग बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

सीमा सुरक्षा में बड़ी सफलता, घुसपैठिया ने अवनीत कौर से मिलने की वजह बताई

ऑक्ट्रोई सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि आरएस पुरा सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया गया. घुसपैठिए की पहचान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा निवासी सिराज खान के रूप में हुई है. BSF की शुरुआती जांच और पूछताछ में पता चला है कि सिराज खान पंजाबी एक्ट्रेस अवनीत कौर से मिलने आया था. हालांकि अभी भी BSF सहित दूसरी एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं. सिराज को  रात 9.20 बजे ऑक्ट्रोई चौकी पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने देखा. जिसके बाद उसे सीमा बाड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया गया. अधिकारी ने बताया कि सिराज के पास से कुछ पाकिस्तानी करेंसी नोट बरामद हुए हैं. फिलहाल भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की उसकी कोशिश के पीछे के असली मकसद का पता लगाने के लिए पूछताछ की जा रही है. पाकिस्तान के सरगोधा का रहने वाला है आरोपी  घुसपैठिए की गिरफ्तारी के संबंध में बीएसएफ की तरफ से एक प्रेस रिलीज भी जारी की गई है. जिसमें कहा गया है कि 7 सितंबर 2025 को लगभग 21:10 बजे बीएसएफ के जवानों ने एक संदिग्ध गतिविधि देखी. जिसमें एक पाकिस्तानी नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर जम्मू के सुचेतगढ़ तहसील में सीमा बाड़ की ओर आक्रामक रूप से बढ़ रहा था. सतर्क जवानों ने उसे चेतावनी दी, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया. ऐसे में खतरा भांपकर बीएसएफ के जवानों ने उस पर गोलीबारी की. फिर उसे बीएसएफ की हिरासत में ले लिया गया. बाद में पूछताछ के दौरान उसने अपनी पहचान सिराज खान, पुत्र जाहिद खान, गांव 27 चक, तहसील भलवाल, जिला सरगोधा, पंजाब, पाकिस्तान के रूप में बताई. साथ ही उसने यह भी बताया है कि वह पंजाबी एक्ट्रेस अवनीत कौर से मिलने आया था.

मोक्षित कॉरपोरेशन पर DGGI की बड़ी कार्रवाई, 162 करोड़ का GST घोटाला, करोड़ों का नोटिस जारी

रायपुर डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI), रायपुर जोनल यूनिट ने मेसर्स मोक्षित कारपोरेशन और उससे जुड़ी 85 फर्मों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 162.22 करोड़ रुपये के कर योग्य मूल्य पर 28.46 करोड़ रुपये के अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का नोटिस जारी किया है. फरवरी 2024 से शुरू हुई जांच में पता चला कि मोक्षित कारपोरेशन ने फर्जी इनवॉइस के जरिए बड़े पैमाने पर GST अपवंचन किया. जांच के दौरान विभागीय टीमों ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कई फर्मों के ठिकानों पर तलाशी और निरीक्षण किया. इस दौरान खुलासा हुआ कि फर्म के पार्टनर शशांक चोपड़ा ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर दर्जनों फर्जी फर्में स्थापित की थीं, जिनके जरिए अनुचित ITC का दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियां संचालित की गईं. इन गतिविधियों के लिए 200 से अधिक बैंक खातों का उपयोग किया गया. जांच के बाद मोक्षित कारपोरेशन पर 28.46 करोड़ रुपये की कर मांग की गई है, साथ ही संबद्ध 85 फर्मों को दंड नोटिस जारी किए गए हैं. यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर चल रहे GST फर्जीवाड़े को उजागर करने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. गौरतलब है कि DGGI ने फरवरी 2024 में जांच शुरू की थी, जिसके बाद ACB-EOW ने भी शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया. प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर ने भी इस मामले में कार्रवाई की है.

60 लाख का गांजा बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह के तीन तस्कर गिरफ्तार

दुर्ग नशे के विरूद्ध दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गांजा तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों से 3 क्विंटल 88 किग्रा गांजा जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपए और नगदी रकम 95 हजार, कंटेनर में भरा अन्य सामान कंटेनर सहित कुल 1 करोड़ 53 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया है. पूरा मामला कुम्हारी थाना क्षेत्र का है. दुर्ग जिले में नशे के विरूद्ध लगातार कार्रवाई करने एसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर नशे के कारोबार करने वालों के संबंध में नशे के कारोबारियों के विरूद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में 7 सितंबर को मुखबीर से सूचना प्राप्त हुई कि कंटेनर वाहन क्रमांक NL01-AH-9524 में अवैध रूप से गांजा भरकर नेशनल हाईवे से रायपुर से दुर्ग की ओर आ रहा है. सूचना पर पुलिस की टीम ने टोल प्लाजा कुम्हारी में नाकेबंदी की. मुखबीर के बताए अनुसार रायपुर से दुर्ग की ओर कंटेनर गाड़ी NL01-AH-9524 आते दिखा, वाहन को रोककर पूछताछ पर वाहन चालक ने अपना नाम उमेश यादव पिता शोभित यादव उम्र 46 साल निवासी जय नगर जिला मधुबनी बिहार का बताया. आगे पूछताछ में बताया कि वह कंटेनर में आमतल्ला कोलकाता पश्चिम बंगाल से सामान लेकर गुजरात के लिए निकला था. रास्ते में ग्राम बारकोड़, देवघर, उड़िसा में परिचित का राहुल मिला, जिसने 13 बोरी गांजा को नागपुर में शाहिद के पास छोड़ने को बोला और प्रत्येक बोरी का 5000 रुपए देने की बात हुई तब उक्त गांजा को कंटेनर लॉक होने से कंटेनर का नट निकालकर गेट खोलकर गांजा भरकर नागपुर लेकर जाना स्वीकार किया। इसके पूर्व भी एक खेप गांजा शाहीद के पास नागपुर छोड़ना बताया. मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में उनके आदेशानुसार कंटेनर का नट निकालकर गेट खोला गया. कंटेनर की तलाशी करने पर कंटेनर के पीछे हिस्से में 13 नग प्लास्टिक बोरी रखा हुआ मिलने पर कंटेनर से नीचे उतारकर बोरियां खोलकर देखा गया, जिसके अंदर पॉलिथिन में गांजा भरा हुआ था. 13 बोरियों में 388 पैकेट एक-एक किलोग्राम के कुल वजनी 3 क्विंटल 88 किग्रा गांजा जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपए और नगदी रकम 95 हजार, कंटेनर में भरा अन्य सामान कंटेनर सहित कुल कीमत 1 करोड़ 53 लाख रुपए का माशरूका जब्त किया गया. आरोपी की निशानदेही पर थाना कुम्हारी एवं एसीसीयू की संयुक्त टीम नागपुर जाकर ट्रेप लगाकर मादक पदार्थ गांजा खरीदी करने पहुंचे अन्य आरोपी मुस्ताक अहमद एवं फयाज अंसारी को गिरफ्तार किया. मामले की अग्रिम कार्रवाई अपराध दर्ज कर थाना कुम्हारी से की जा रही है.

कांग्रेस विधायकों का प्रदर्शन: वसुंधरा विधानसभा में वेल में विरोध जारी

जयपुर राजस्थान विधानसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी पहुंची। वसुंधरा राजे ने जिस अंदाज में अपनी सियासी सक्रियता बढ़ाई है उसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं। राजे दोपहर को शून्य काल के दौरान विधानसभा पहुंची। हालांकि वे सदन के अंदर नहीं गईं लेकिन हां पक्ष में बीजेपी विधायकों से मिलीं। इसके बाद उन्होंने स्पीकर वासुदेव देवनानी से भी मुलाकात की। इसी दौरान राजे ने विधानसभा देखने पहुंचे स्कूल के बच्चों से भी बातचीत की। इधर कांग्रेस विधायकों का विरोध प्रदर्शन सदन के भीतर भी जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने कानून व्यवस्था को लेकर पहले सदन के बाहर नारेबाजी की। इसके बाद सदन में प्रश्नकाल के बाद शून्यकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। चौमू से कांग्रेस विधायक शिखा बराला और नीमकाथाना से सुरेश मोदी ने स्थगन प्रस्ताव पर 2 मिनट बोलते हुए सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर विफल होने के अरोप लगाए। शिखा बराला ने कहा कि अपराधाें के मामले में जयपुर ने देश के दूसरे शहरों को पीछे छोड़ दिया है। यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं है। दिन दहाड़े चैन स्नैचिंग हो रही है।  बीजेपी विधायकों ने विरोध किया तो कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। वहीं प्रश्नकाल दौरान खाद संकट और कालाबाजारी के मुद्दे पर भी जोरदार बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पूरक सवाल करते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा से पूछा कि उन्होंने फैक्ट्रियों पर छापे तो मारे, लेकिन कितने मिलावटखोरों को जेल भेजा गया? उन्होंने मुख्यमंत्री की भरतपुर बैठक का हवाला देते हुए पूछा, "सीएम ने बैठक की, लेकिन उसका क्या नतीजा निकला?" इसके जवाब में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि दो कंपनियों के गोदाम, जो टैगिंग से भरे थे, उन्हें सील कर दिया गया है। उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा, "हमें विपक्ष का भी साथ चाहिए ताकि कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो सके।" मीणा ने बताया कि भरतपुर में भी चूरू की तरह ही खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। "प्रदेश में किसी भी जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। केवल डीएपी की थोड़ी बहुत कमी है। लेकिन हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आगे किसी भी प्रकार की खाद की कमी ना हो।" उन्होंने कहा कि डीएपी की कमी वैश्विक कारणों, विशेषकर यूक्रेन युद्ध और जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों की वजह से आई है। "यूरिया की प्रदेश में कोई कमी नहीं है, और हम हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।"  

कांग्रेस का घेराव और हंगामा, BJP बोली- कांग्रेसियों ने की तोड़फोड़; सर्किट हाउस मामला गरमाया

जगदलपुर बीते शनिवार देर शाम जगदलपुर सर्किट हाउस में हुए बवाल का मामला अब सियासी तूल पकड़ चुका है. वन मंत्री केदार कश्यप पर कर्मचारियों से गाली-गलौज और मारपीट के आरोप लगे थे, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंचा. इस घटना के विरोध में आज कांग्रेसियों ने भानपुरी स्थित वन मंत्री केदार कश्यप के निजी कार्यालय का घेराव किया. प्रदर्शन के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गई. वहीं भाजपा ने कांग्रेसियों पर मंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है. प्रदेश प्रवक्ता भाजपा अमित चिमनानी ने ट्वीटर पर कांग्रेस का वीडियो पोस्ट कर कहा है कि कांग्रेसियों की करतूत देखें. कार्यालय में पत्थर, महिला पुलिस जवान पर पत्थर, ये एक राजनीतिक दल के लोग हैं या पत्थरबाज? एक बेटी जो अपनी ड्यूटी कर रही थी उसे मारकर कांग्रेसियों ने घायल कर दिया है. दर्द इतना हुआ कि हमारी शेरनी बहन की आंखों में आसू आ गए, इसकी माफी नहीं मिलेगी. बता दें कि वन एवं परिवहन मंत्री भाजपा के वरिष्ठ नेता केदार कश्यप पर सर्किट हाउस के कर्मचारी ने मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है. मामला तब सामने आया, जब मंत्री दौरे से लौटकर सर्किट हाउस पहुंचे और कर्मचारियों पर दरवाजा देर से खोलने को लेकर नाराज हो गए. यह मामला अब सियासी तूल पकड़ लिया है. इस मामले में मंत्री केदार कश्यप ने कहा था कि दौरे से लौटने के बाद उन्होंने सिर्फ कर्मचारियों को डांटा था, मारपीट का आरोप पूरी तरह गलत है. नारेबाजी करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता मंत्री के जगदलपुर स्थित वृंदावन निवास में घुसने की कोशिश भी कर रहे थे, लेकिन बैरिकेडिंग के कारण पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई. कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब मंत्री केदार कश्यप पर कर्मचारियों से बदसलूकी और मारपीट के आरोप लगे हों। उन्होंने याद दिलाया कि पहले कोंडागांव में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं. मौर्य ने कहा कि केदार कश्यप सत्ता के नशे में चूर होकर दो कानून लागू करना चाहते हैं जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है. इसके अलावा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मंत्री ने सर्किट हाउस कर्मचारी और उसकी पत्नी पर दबाव बनाया कि वे केस वापस लें. कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारी की नौकरी पर आंच आती है तो पार्टी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी. रायपुर में मंत्री बंगले का घेराव करने निकले कांग्रेसियों को पुलिस ने रोका सर्किट हाउस में कर्मचारी से मारपीट मामले में रायपुर में भी मंत्री केदार कश्यप के बंगले का घेराव करने कांग्रेसी कार्यकर्ता निकले थे, जिसे पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया. इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे समेत बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल थे. पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी है. गरीब, आदिवासी परिवार को प्रताड़ित करने का काम सरकार के मंत्री और उनसे जुड़े लोग कर रहे हैं. भाजपा के मंत्री नेता सत्ता के नशे में चूर हैं. वरिष्ठ मंत्री खाना बनाने वाले को लात घुसे से मार रहे हैं. उसकी सम्मान की न्याय की लड़ाई कांग्रेस पार्टी लड़ रही है. भाजपा ने छत्तीसगढ़ को बनाया अपराध का गढ़ : विकास उपाध्याय विकास उपाध्याय ने कहा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को जानकारी देकर आज मंत्री के बंगले का घेराव करने निकले थे. पुलिस अपराधियों को तो रोक नहीं पाती है, लेकिन हमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बैरिकेड लगाकर रोका गया. उन्होंने कहा, इस प्रदेश को भाजपा ने अपराध का गढ़ बना दिया है. हम आज सड़क की लड़ाई लड़ रहे हैं. पीड़ित की एफआईआर नहीं लिखी जा रही है. भविष्य में उसके साथ कुछ घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी भाजपा और पूरी सरकार की होगी.

प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गौ-शालाऔं को स्वावलंबी बनाना जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को किया जाए प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आत्मनिर्भर गौशाला, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। गौ-शालाएं गोबर, गौमूत्र आदि अपशिष्ट से धन अर्जित कर संपन्न बन सकती हैं। स्वावलंबी गौशालाएं विकसित करने के लिए दुग्ध उत्पादों सहित गौमूत्र-गोबर आदि से निर्मित सामग्री के विक्रय की व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए भी किया जाए। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में स्थानीय परिवेश के अनुरूप देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित किया जाए। गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़े। प्रदेश में उपलब्ध पशुधन के अनुपात में पशु चिकित्सकों की संख्या कम है। गौवंश के बेहतर प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशु चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी आवश्यक है। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड की मंत्रालय में सोमवार को हुई बैठक में दिए। पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशा अनुसार प्रदेश में देसी नस्ल के गौपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गिर, साहीवाल, मालवी और नागौरी नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश के जनजातीय अंचलों में भी गौपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आवश्यक नवाचार किए जाएं। प्रदेश में पशुपालन-कृषि-उद्यानिकी तथा नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समन्वित रूप से कार्य करने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन की दिशा में भी प्रदेश, देश के शीर्षस्थ राज्यों में शामिल हो सकेगा। बैठक में जानकारी दी गई कि गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा गौशाला समितियों के बैंक खातों में राज्य स्तर से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। बोर्ड द्वारा 937 नवीन गौशालाओं की स्थापना उपरांत पंजीयन किया गया है, जिसमें एक लाख 10 हजार गौवंश को आश्रय प्राप्त है। वर्ष 2024-25 में विदिशा, देवास, आगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना तथा रीवा में बायोगैस सह जैविक खाद निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए। नगर निगम ग्वालियर, इंदौर तथा उज्जैन ने वृहद गौशालाओं का संचालन आरंभ किया गया है। भोपाल और जबलपुर में गौशालाओं की स्थापना का कार्य जारी है। बैठक में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति की प्रगति पर भी समीक्षा हुई।  

CM साय बोले: सौर ऊर्जा से उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक और दाता

    रायपुर, प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता अब केवल ऊर्जा उत्पादक ही नहीं, बल्कि ऊर्जा दाता भी बन रहे हैं. पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति के संकल्प को तीव्र गति से पूर्ण करने की ओर अग्रसर है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित सौर ऊर्जा जागरूकता और प्रोत्साहन अभियान को संबोधित करते हुए यह बात कही. मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सौर ऊर्जा के फायदों, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और इसके अंतर्गत मिलने वाली सब्सिडी के विषय में लोगों को जानकारी देने और जागरूक करने के उद्देश्य से सूर्य रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. साथ ही मुख्यमंत्री ने 618 उपभोक्ताओं के खातों में प्रत्येक को 30 हजार रुपये की दर से कुल 1.85 करोड़ रुपये की राज्यांश सब्सिडी का ऑनलाइन अंतरण किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ता प्रदूषण हम सभी के लिए गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है और छत्तीसगढ़ इस लक्ष्य की प्राप्ति में पूरे समर्पण और क्षमता के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए हॉफ बिजली बिल से आगे बढ़ते हुए मुफ्त बिजली की ओर ले जाने का कार्य किया जा रहा है. उन्होंने इसे हर्ष का विषय बताते हुए कहा कि प्रदेशवासी इस योजना के महत्व को समझते हुए स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आमजन से आग्रह किया कि वे अपने आसपास के लोगों को भी इस योजना से जोड़ें और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में प्रदेश को अग्रसर बनाने में योगदान दें. मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उपभोक्ताओं को सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं. साथ ही बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से आसान वित्तीय सुविधा भी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को पूर्ण रूप से मुफ्त बिजली का लाभ मिलेगा. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत आज लाभार्थियों को लेटर ऑफ अवार्ड प्रदान किए गए हैं. इन योजनाओं से उपभोक्ता स्वयं सौर ऊर्जा का उत्पादन कर बिजली का विक्रय कर रहे हैं और साथ ही सस्ती बिजली का लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने सौभाग्य योजना के माध्यम से हर घर बिजली पहुँचाने का संकल्प लिया था. उस समय देश के 18 हजार गाँव अंधेरे में थे और आज उन सभी गाँवों तक बिजली पहुँच चुकी है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अब देश स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन क्षमता केवल 1,400 मेगावाट थी, जबकि आज प्रदेश 30,000 मेगावाट का उत्पादन कर रहा है और पड़ोसी राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहा है. उन्होंने बताया कि नई उद्योग नीति के अंतर्गत ऊर्जा क्षेत्र में 3.50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू संपादित हुए हैं और आने वाले समय में प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता और भी बढ़ जाएगी. मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा. उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाएँ और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की प्राप्ति में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष राजनांदगांव से आए कक्षा 12वीं के छात्र प्रथम सोनी ने सौर ऊर्जा की विशेषताओं और शासन द्वारा इसे बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार रखे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘इम्पैक्ट ऑफ डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी ऑन ग्रिड स्टेबिलिटी’ और ‘एग्रीवोल्टाइक्स परफार्मर हैण्डबुक’ का भी विमोचन किया. इस अवसर पर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में विशेष भूमिका निभाने वाले उत्कृष्ट वेंडरों को भी सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, क्रेडा के चेयरमैन भूपेंद्र सवन्नी, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, क्रेडा के सीईओ राजेश राणा, भारतीय सौर ऊर्जा महासंघ के अध्यक्ष सुमन कुमार, तीनों पॉवर कंपनी के प्रबंध निदेशक सहित बड़ी संख्या में सौर ऊर्जा के उपभोक्ता उपस्थित थे.