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पितृपक्ष 2025: पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए करें यह आसान जल अर्पण तरीका

पंचांग के अनुसार, इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 से हो रही है और यह 21 सितंबर 2025 तक चलेगा. यह 15 दिनों की वह अवधि है जब दिवंगत पूर्वजों को याद करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं. पितृपक्ष में पितरों को जल अर्पित करना, जिसे तर्पण भी कहा जाता है, एक बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक कर्म है. इस क्रिया को सही नियमों के साथ करना बेहद ज़रूरी है ताकि पितरों की आत्मा को शांति मिल सके और उनका आशीर्वाद प्राप्त हो. आइए, जानते हैं पितृपक्ष में पितरों को जल चढ़ाने के सही नियम और विधि. जल अर्पित करने की सही दिशा तर्पण करते समय दिशा का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है. पितरों को जल हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अर्पित करना चाहिए. दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है. कैसे करें तर्पण? (सही विधि) स्नान और शुद्धता: तर्पण करने से पहले स्नान करके खुद को शुद्ध करें. साफ़ और धुले हुए वस्त्र धारण करें. सही पात्र: जल अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के पात्र का उपयोग करें. प्लास्टिक या स्टील के पात्र का उपयोग वर्जित है. कुशा और तिल का उपयोग: तर्पण के लिए कुशा (एक प्रकार की घास) और काले तिल का उपयोग अनिवार्य माना जाता है. जल में काले तिल मिलाकर अर्पित किए जाते हैं. हाथ की सही मुद्रा: जल अर्पित करते समय अपनी अनामिका (ring finger) और अंगूठे के बीच कुशा और तिल रखकर जल को धीरे-धीरे पात्र से गिराना चाहिए. इस मुद्रा को पितृतीर्थ कहते हैं. जल का प्रवाह: जल अर्पित करते समय ॐ पितृभ्य: नम: या ॐ पितृ देवताभ्यो नमः मंत्र का जाप करना चाहिए. जल को किसी पवित्र नदी, तालाब या जलाशय के पास प्रवाहित करना उत्तम होता है. अगर यह संभव न हो, तो घर में किसी गमले या तुलसी के पौधे को छोड़कर, किसी ऐसी जगह जल गिराएं जहां वह व्यर्थ न हो. ये गलतियां बिल्कुल न करें? गलत दिशा में तर्पण: दक्षिण के बजाय किसी अन्य दिशा में जल अर्पित न करें. अशुद्ध अवस्था: बिना स्नान किए और अशुद्ध वस्त्र पहनकर तर्पण न करें. लोहे या स्टील का पात्र: तर्पण के लिए लोहे या स्टील के बर्तनों का उपयोग बिल्कुल न करें. जूते-चप्पल पहनकर तर्पण: कभी भी जूते-चप्पल पहनकर तर्पण नहीं करना चाहिए. पितृपक्ष का महत्व हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इन 15 दिनों के दौरान पितर पृथ्वी पर अपने वंशजों से मिलने आते हैं. इस दौरान किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से उनकी आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं.

सांसद उम्मेदाराम ने खेत सिंह हत्या मामले में किया बड़ा बयान, मांग की कड़ी सजा

जोधपुर बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल आज जोधपुर प्रवास पर रहे। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि खेत सिंह की जिस तरीके से हत्या की गई, वह निंदनीय है। दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी घटना करने का दुस्साहस न करें। उन्होंने कहा कि घटना के बाद जो हालात सामने आया, वह और भी निंदनीय है। जिला प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक रहा और स्थिति को नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुआ। उससे भी अधिक निंदनीय यह रहा कि जिस तरह भाजपा नेताओं का वहां जमावड़ा होता गया और प्रशासन तमाशबीन बनकर स्थिति बिगड़ते देखता रहा। यह प्रशासन की 100% विफलता रही। घटना को तूल देने और सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश की गई। 'प्रशासन मूकदर्शक बना रहा' बेनीवाल ने कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से शांतिप्रिय और आपसी भाईचारे का प्रतीक रहा है, लेकिन भाजपा ने जलती आग में घी डालने का काम किया। वहां जाकर भाजपा नेताओं ने जनता को भड़काया और अलग-अलग तरीके से दिए गए भाषणों से स्थिति और बिगड़ गई। परिणामस्वरूप लोगों के घर जला दिए गए, दुकानों को तोड़ दिया गया और उनमें आग लगा दी गई, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने बताया कि समय रहते उन्होंने एसपी को कॉल किया। एसपी मौके पर पहुंच गए, लेकिन कलेक्टर भी वहां पहुंचे और उनकी मौजूदगी में ही स्थिति को जानबूझकर बिगाड़ा गया। मैंने आईजी साहब से बात की, वे मौके पर गए, लेकिन तब भी हालात नहीं संभले। आखिरकार मैंने फिर आईजी साहब से फोन कर स्थिति को नियंत्रित करवाया। उनकी निगरानी में ही मामला शांत हुआ। 'इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो' सांसद बेनीवाल ने कहा कि हालात बिगड़ने के पीछे भाजपा का हाथ है। भाजपा ने भोली-भाली जनता को भड़काकर स्थिति को खराब किया। मैंने अधिकारियों से मांग की है कि सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। हत्या में शामिल लोगों के साथ-साथ जिन्होंने कानून अपने हाथ में लेकर स्थिति को बिगाड़ा, उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं है' उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से भाईचारे का प्रतीक रहा है और यहां की स्थिति सामान्य बनी रहनी चाहिए। लेकिन भाजपा की राजनीति शुरू से ही लोगों को भड़काकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की रही है। जब जिम्मेदार नेता ही जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करें और उन्हें भड़काएं, तो यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। कानून सबके लिए है, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और कानून हाथ में लेना बिल्कुल गलत है। भाजपा एक तरफ "डबल इंजन की सरकार" की बात करती है, वहीं कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ती हैं। सबको कानून के दायरे में रहकर चलना चाहिए। मैं हमेशा शांति का पक्षधर रहा हूं। घटना के वक्त भी देखा गया कि राजनीतिक फायदे के लिए अशांति फैलाने की कोशिश की गई। जानें क्या था डांगरी गांव यह चर्चित मामला  जैसलमेर जिले का सीमावर्ती गांव डांगरी पिछले तीन दिनों से मानो युद्धक्षेत्र बना हुआ था। 2 सितंबर की रात पर्यावरण प्रेमी और किसान खेत सिंह की बेरहमी से हत्या के बाद गांव गुस्से और आक्रोश से सुलग उठा। गांव की गलियों से लेकर खेतों तक हर जगह मातम और गुस्से का माहौल था। हालात इस कदर बिगड़े कि प्रशासन को पूरे गांव को छावनी में तब्दील करना पड़ा। आखिरकार 48 घंटे की जद्दोजहद और कई दौर की वार्ता के बाद गुरुवार देर रात समझौता हुआ और शुक्रवार सुबह खेत सिंह की अंतिम यात्रा शांति के बीच निकली।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से मनेंद्रगढ़ के लोगों की बड़ी मांग पूरी होने की कगार पर

चिरमिरी नागपुर रोड हॉल्ट परियोजना के लिए रेल मंत्रालय ने दावा आपत्ति के बाद 198 भूखंडों के अधिग्रहण के लिए जारी किया अधिसूचना अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण,  जल्द ही शुरू होगा मुआवजा वितरण का कार्य रायपुर,  स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल का प्रयास जिले में यात्री सुविधाओं और रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए  रंग ला रहा है। उनकी कोशिशों से रेल मंत्रालय ने चिरमिरी नागपुर हॉल्ट रेल परियोजना के लिए दावा आपत्ति के बाद भू अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। रेल मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिसूचना जारी की है।  केंद्रीय सरकार ने रेल अधिनियम 1989 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चिरमिरी नागपुर रोड हाल्ट रेल परियोजना (17 किलोमीटर) के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के अंतर्गत 36.392 हेक्टेयर रकबे की कुल 198 भूमि खंडों को परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही अब शीघ्र ही प्रभावितों को मुआवजा वितरण का कार्य शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार ने सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट पर सहमति प्रदान करते हुए अंतिम रूप से भूमि अधिग्रहण की घोषणा की है। अधिसूचना के अनुसार, यह भूमि अब भारत सरकार (रेल मंत्रालय) के नाम दर्ज होगी और परियोजना कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी। रेल मंत्रालय (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2018-19 में मंजूरी दी गई थी। भूमि अर्जन की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समयावधि में कुल 32 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 5 आपत्तियां सही पाई गईं। सक्षम प्राधिकारी द्वारा शेष आपत्तियों का निराकरण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई।

सांसद महुआ मोइत्रा पर फिर घिरा विवाद, अब सीएम ममता करेंगी पूछताछ

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा का विवाद पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। मोइत्रा एक बार फिर विवादों में घिरती दिख रही हैं। उनकी एक कथित विवादित टिप्पणी को लेकर अखिल भारतीय मतुआ महासंघ ने नाराज़गी जताई है। महासंघ की ओर से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर मामले में दखल देकर कार्रवाई की मांग की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि सीएम ममता बनर्जी उनकी क्लास ले सकतीं हैं। दरअसल, 31 अगस्त को नदिया ज़िले में एक सभा को संबोधित करते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा था कि ‘साल भर तृणमूली और चुनाव के समय सनातनी बनने का खेल क्यों? हर एससी बूथ पर जहां एक सामान्य जाति की महिला को 1000 रुपये मिलते हैं, वहां एससी महिला को 1200 रुपये मिलते हैं। फिर भी एससी, नामशूद्र, मतुआ बूथों पर बीजेपी को 100 में से 85 वोट मिलते हैं। काम के वक्त ममता, सड़क के वक्त ममता, और जब लाभ लेने की बात आती है तो कंठमाला पहन कर सब आ जाते हैं। सच्चाई हमेशा कड़वी होती है।  रिपोर्ट के मुताबिक, महासंघ की ओर से 3 सितंबर को भेजे गए इस पत्र में महासचिव सुकैश चंद्र चौधरी ने लिखा है कि महुआ मोइत्रा की टिप्पणी से मतुआ समुदाय आहत और क्रोधित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह ‘एक अभिभावक की तरह कदम उठाकर समुदाय का दर्द कम करें। हालांकि पत्र के लेटरहेड पर महासंघ की अध्यक्ष और तृणमूल की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर का नाम है, लेकिन उस पर हस्ताक्षर महासचिव चौधरी के हैं।  ममता बाला ठाकुर ने इस मुद्दे पर कहा, ‘यह उनकी (महुआ की) व्यक्तिगत राय है। यह धार्मिक मुद्दा है, इसमें मैं बतौर सांसद क्यों बोलूं? संगठन ने निर्णय लिया है। जो कुछ कहा गया वह अपमानजनक है, और मैं इस पर ज़्यादा शब्द बर्बाद नहीं करना चाहती।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वह महुआ मोइत्रा से इस विषय पर बात करेंगी तो उन्होंने पलटकर कहा, ‘क्यों करूं?’ मोइत्रा की इस टिप्पणी पर भाजपा ने भी कड़ा रुख अपनाया है।  पार्टी नेता दिपंकर सरकार ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा, उन्होंने एससी/एसटी महिलाओं और मतुआ समुदाय का अपमान किया है। न केवल आस्था पर टिप्पणी की, बल्कि महिलाओं का भी अपमान किया। अब उन्हें अदालत में पेश होकर सफाई देनी होगी। इधर, केंद्रीय मंत्री और मतुआ नेता शांतनु ठाकुर, जो ममता बाला ठाकुर के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं, के लिए यह विवाद अपने घरेलू मतभेदों से राहत का मौका बन सकता है। शांतनु का अपने बड़े भाई और विधायक सुब्रत ठाकुर तथा मां छबी रानी ठाकुर के साथ धार्मिक प्रमाणपत्रों के मुद्दे पर टकराव जारी है।  

एशिया कप की तैयारी: सूर्यकुमार यादव नेतृत्व में भारतीय टीम ने दुबई में किया जोरदार अभ्यास

दुबई सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए यहां पहुंची भारतीय टीम ने अभ्यास शुरु कर दिया है। एशिया कप में भारतीय टीम का पहला मुकाबला 10 सितंबर को मेजबान यूएई से होना है। भारतीय टीम आईसीसी अकादमी में अभ्यास के लिए उतरी। भारतीय टीम 14 सितंबर पाकिस्तान और 19 सितंबर को ओमान से खेलेगी। वहीं प्लेऑफ मुकाबले 20 सितंबर से प्रारंभ होंगे। अभ्यास सत्र में कप्तान सूर्यकुमार यादव, उप-कप्तान शुभमन गिल, संजू सैमसन, जितेश शर्मा, तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा सभी ने नेट्स पर लंबे समय तक बल्लेबाजी की। भारतीय टीम यहां बिना अभ्यास के ही पहुंची है। टीम प्रबंधन का मानना था कि दुबई की आबोहवा में स्वयं को ढालने के लिए दुबई में ही अभ्यास करना बेहतर रहेगा। इस टूर्नोमेंट में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की टी20 में वापसी पर भी सबकी नजर रहेंगी। इसके अलावा ये देखना होगा कि इंग्लैंड में टेस्ट टीम की कप्तानी करते हुए 700 से अधिक रन बनाने वाले शुभमन गिल यहां कितने रन बना पाते हैं। ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या भी लंबे समय के बाद इस टूर्नामेंट से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते दिखेंगे। भारतीय टीम ने मुख्य कोच गंभीर, बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने अभ्यास शुरु किया। ग्रुप ए में भारतीय टीम, पाकिस्तान, यूएई और ओमान शामिल के साथ हैं जबकि ग्रुप बी में श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और हांगकांग की टीमें हैं।   

यूएस ओपन में सिनर अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना कार्लोस अल्काराज से होगा

न्यूयॉर्क यानिक सिनर ने यूएस ओपन के मेंस सिंगल्स फाइनल में जगह बना ली है। डिफेंडिंग चैंपियन ने सेमीफाइनल में 25वीं वरीयता प्राप्त फेलिक्स ऑगर-अलियासिम को 6-1, 3-6, 6-3, 6-4 से शिकस्त दी। अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना कार्लोस अल्काराज से होगा। दूसरी ओर, कार्लोस अल्काराज आर्थर ऐश स्टेडियम में 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच को मात देकर फाइनल में पहुंचे हैं। यानिक सिनर को सेमीफाइनल मैच के पांचवें गेम में थोड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने तेजी से लय हासिल की और सर्विस बचाते हुए पहला सेट आसानी से अपने नाम कर लिया। कनाडाई खिलाड़ी फेलिक्स ऑगर-अलियासिम दूसरी बार यूएस ओपन सेमीफाइनल में उतरे थे। उन्होंने दूसरे सेट में वापसी करते हुए 5-3 की बढ़त लेकर सेट जीता और स्कोर बराबर कर दिया। तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन यहां से मोमेंटम फिर से सिनर की ओर मुड़ गया। मेडिकल टाइमआउट लेने के बाद सिनर ने दोबारा लय हासिल कर ली और तीसरा सेट जीतकर बढ़त बनाई। चौथे सेट में भी उन्होंने अहम मौकों पर शानदार सर्विस करते हुए अलियासिम की वापसी की कोशिशों को नाकाम किया और मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह पक्की कर ली। अपनी सटीकता के लिए मशहूर सिनर भले ही कुछ मौकों पर लड़खड़ाए, लेकिन आखिर तक मजबूती से टिके रहे। इसी के साथ उन्होंने लगातार तीसरे ग्रैंड स्लैम फाइनल में स्पेनिश स्टार अल्काराज से भिड़ने का मौका हासिल कर लिया। इस जीत के साथ यानिक सिनर ओपन एरा में ऐसे चौथे खिलाड़ी बने, जिन्होंने एक ही सीजन में सभी चार ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई। सिनर से पहले यह उपलब्धि रॉड लेवर, रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच ने हासिल की थी। यानिक सिनर ने जीत के बाद खुशी जताते हुए कहा, “यह सीजन कमाल का रहा है। ग्रैंड स्लैम हमारे लिए सबसे अहम टूर्नामेंट होते हैं। शानदार दर्शकों के बीच खुद को एक और फाइनल में देखना, खासकर इस सीजन के आखिरी फाइनल में, इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।”  

जालंधर में मचा बवाल: सांसद चन्नी लापता, लोग सड़कों पर, Video हो रही तेजी से वायरल

जालंधर  जालंधर संसदीय क्षेत्र के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी इन दिनों राजनीतिक और जनभावनाओं के घेरे में हैं। हालात यह हैं कि क्षेत्र की जनता उन्हें "लापता सांसद" कहकर पुकार रही है। वजह साफ है कि जालंधर के शाहकोट, नकोदर और फिल्लौर इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं। शहर में भी बाढ़ जैसे हालात बने रहे, सैंकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लोग सरकारी मदद की आस लगाए बैठे हैं, मगर उनके सांसद खुद कहीं और अपनी सक्रियता दिखाते नजर आते हैं। आम जनता में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर जिस जनता ने 2024 में उन्हें रिकॉर्ड मतों से जीताकर लोकसभा भेजा, उस जनता की सुध लेने में चन्नी पीछे क्यों हैं? यूं तो चरणजीत चन्नी का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों से घिरा रहा है। मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले चन्नी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में चमकौर साहिब और भदौर से एक साथ चुनाव लड़ा, मगर दोनों ही जगह हार का सामना करना पड़ा। जनता ने उन्हें सिरे से नकार साफ संदेश दिया कि मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी कार्यशैली पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इन हालातों के चन्नी का चमकौर साहिब हलके से लगाव अब भी खत्म नहीं हुआ है। यही कारण है कि हाल के दिनों में वे लगातार उसी हलके में सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे बोरियों में मिट्टी भरते, ट्रैक्टर चलाते और राहत कार्यों का हिस्सा बनते नजर आते हैं। दूसरी ओर, जालंधर की जनता इसे "ड्रामा" मान रही है। लोगों का कहना है कि सांसद चन्नी को जालंधर की जनता ने जिताया, मगर वे अभी भी चमकौर साहिब से ही राजनीति चमकाने में लगे हैं। मतदाताओं का कहना है कि चुनावों के दौरान चन्नी ने हर समय जनता के साथ खड़े रहने का वादा किया था, मगर आज जब जनता संकट में है तो वे नदारद हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस पदाधिकारी तक उनसे मिलने को तरस रहे हैं। वहीं जनता की नाराजगी को देखते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव (ऑर्गेनाइजेशन) कैप्टन संदीप संधू ने द्वारा हाल ही जारी किए पत्र में विशेषकर सांसद चन्नी का जिक्र किया गया और उनसे आग्रह किया गया कि वे हाईकमान के फैसले के अनुरूप अपने संसदीय क्षेत्र जालंधर में सक्रिय रहें। यह आदेश इस बात का संकेत है कि पार्टी भी चन्नी की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि यदि सांसद की यह कार्यप्रणाली जारी रही तो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को जालंधर में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस किस मुंह से 9 विधानसभा हलकों में वोट मांगने जाएगी। भले ही सांसद चन्नी पत्र जारी होने के बाद विगत पिछले दिनों नकोदर व शाहकोट हलकों का हवाहवाई दौरा कर बाढ़ के हालातों में काम करने की अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर खानापूर्ति कर गए है। चन्नी को जालंधर से मिली राजनीतिक संजीवनी, मगर फिर भी जनता से दूरी 2022 में करारी हार झेलने के बाद चन्नी का राजनीतिक करियर लगभग खत्म माना जा रहा था। मगर जून 2024 में जालंधर की जनता ने उन्हें भारी मतों से जिताकर एक नई राजनीतिक संजीवनी दी। इस जीत ने चन्नी को फिर से राजनीतिक परिदृश्य में स्थापित किया। अब अफसोस है कि चुनाव जीतने के बाद चन्नी का जनता से रिश्ता लगातार कमजोर होता चला गया। वे कब जालंधर आते हैं और कब चले जाते हैं, कहां रहते है, इसका पता गिने-चुने लोगों को ही रहता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में जालंधर के विभिन्न हिस्सों में "सांसद लापता" के पोस्टर तक लगाए गए। बाढ़ त्रासदी पर सांसद की चुप्पी जालंधर में हाल ही में बाढ़ के हालातों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में घर गिर गए, लोग बेघर हुए और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ऐसी स्थिति में सांसद का फर्ज था कि वे राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते। मगर चन्नी की चुप्पी और गैरमौजूदगी ने लोगों को गहरी निराशा में डाल दिया है। जालंधर के कई ग्रामीणों के अलावा शहरी लोगों का कहना है कि यदि उनके सांसद खुद प्रभावित गांवों व शहर के क्षेत्रों में जाकर हालात देखते तो प्रशासन पर भी काम करने का दबाव बढ़ता। जनता की उम्मीदों पर फिरा पानी जालंधर की जनता का गुस्सा इस बात को लेकर ज्यादा है कि उन्होंने जिस नेता को दोबारा राजनीति की मुख्यधारा में लाया, वही नेता आज उनकी तरफ पीठ फेर चुका है। एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा कि उन्होंने चन्नी साहब को अपना सांसद बनाया ताकि वे उनकी आवाज संसद तक पहुंचाएं, मगर वे तो खुद ही गायब हो गए। फिल्लौर के एक युवक ने तंज कसते हुए कहा, सांसद को खोजने के लिए अब शायद गुमशुदगी का इश्तहार देना पड़ेगा। वहीं शहर में बारिश से प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके घर टूट गए, खेत बर्बाद हो गए, मगर सांसद साहब को यहां आने की फुर्सत नहीं। लोगों का कहना है कि जालंधर की जनता ने उन्हें जिताया, मगर वे आज मात्र चमकौर साहिब के सांसद बने बैठे है।  

महिला आरक्षक दुष्कर्म मामला: अनिला भेड़िया ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप, डीजी और आईजी से करेंगे शिकायत

बालोद बीजापुर डिप्टी कलेक्टर पर महिला आरक्षक ने गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में एफआईआर के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने, FIR के 22 दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने और मुख्य सचिव सहित बीजापुर कलेक्टर को पीड़िता द्वारा निलंबन कार्रवाई के लिए लिखे गए पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक अनिला भेड़िया ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को बचाने के उद्देश्य से बालोद पुलिस पर भाजपा सरकार के दबाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। बता दें कि पीड़िता ने बीजापुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके के खिलाफ शादी का झांसा देकर लगातार आठ वर्षों से शारीरिक शोषण करने, तीन बार जबरदस्ती गर्भपात कराने और लाखों रुपए लेने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर डौंडी थाने में लिखित शिकायत भी की है। बीएनएस की धारा 69 के तहत अपराध पंजीबद्ध होने के 22 दिन गुजर जाने के बाद भी आरोपी डिप्टी कलेक्टर फरार है। वहीं पीड़िता द्वारा बैंक स्टेटमेंट जमा करने के बाद भी आज पर्यंत तक आर्थिक शोषण किए जाने की धारा भी नहीं जोड़ी गई है। इस मामले को लेकर पूर्व महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री अनिला ने उक्त पीड़िता समेत पूरे प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय और अनाचार के दोषियों को संरक्षण देने का आरोप भाजपा सरकार पर लगाया है। अनिला भेड़िया ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली भाजपा सरकार महिलाओं के साथ अनाचार करने वालों को बचाने के लिए अपराधियों के साथ खड़े होकर ऐसे ही सम्मान करती है। अभी तक इतने दिन बीत जाने के बाद भी डिप्टी कलेक्टर को जमानत का लाभ दिलाने जानबूझकर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। पुलिस भाजपा सरकार के दबाव में काम कर रही है इसीलिए पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था चरमरा गई है। पीड़िता से मिलेगी पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने कहा कि वो पीड़िता से मिलेगी। पीड़िता को न्याय दिलाने और बालोद जिले की लचर पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर डीजी और आईजी से भी बात की जाएगी। उन्होंने कहा, डिप्टी कलेक्टर के शोषण की शिकार युवती सहित प्रदेश की हर महिला के साथ वे खड़ी हैं।

परीक्षा देने पहुंची छात्रा ने किया खुदकुशी प्रयास, भोपाल में कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में हड़कंप

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र स्थित कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब 6वीं कक्षा की छात्रा ने अचानक फर्स्ट फ्लोर से छलांग लगा दी। यह घटना सुबह 7:30 बजे की बताई जा रही है। छात्रा उस समय स्कूल आई थी क्योंकि आज उसका 6th क्लास का एग्जाम था।  अचानक बच्चों के बीच हुई इस घटना से पूरे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। छलांग लगाने के बाद छात्रा के हाथ और पैर में फ्रैक्चर हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।  स्कूल परिसर में लगे CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि छात्रा ने खुद ही छलांग लगाई। घटना के बाद पुलिस को भी सूचना दी गई, फिलहाल गोविंदपुरा थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और इस कदम के पीछे की वजहों की पड़ताल में जुटी है  स्कूल की पहली मंजिल से गिरी छात्रा, हालत गंभीर जानकारी के मुताबिक, घटना के वक़्त छात्रा बहुत सारे बच्चों के साथ थी. हालांकि वो अचानक पहली मंजिल से गिरते हुई नजर आई. पुलिस ने मामले को संदिग्ध बताया, जबकि पिता बोले- 'मैं नहीं कह सकता कैसे ये हादसा हुआ?' निजी अस्पताल में कराया गया भर्ती  बच्ची के पिता ने बातचीत में कहा कि बच्ची का अस्पताल में इलाज जारी. उन्होंने बताया कि स्कूल से बच्ची की गिरने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मैं स्कूल पहुंचा था. अभी तक स्कूल प्रबंधन से बात नहीं हुई है.  उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने सीसीटीवी दिखाया था, जिसमें बच्ची गिरते हुए नजर अजर आ रही थी.   छात्रा की कराई जा रही सीटी स्कैन जांच घायल छात्रा को पिपलानी स्थित बालाजी अस्पताल में भर्ती कराया है। उसकी सीटी स्कैन आदि जांच भी कराई जा रही हैं। फिलहाल उसकी मौसी ही वहां मौजूद हैं। छात्रा को कितनी चोट आई हैं, इसकी पूरी जानकारी शाम तक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पांच बहनों में सबसे छोटी है छात्रा छात्रा की मौसी पिंकी के अनुसार, पिता गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल क्षेत्र में एक फैक्ट्री में काम करते हैं। वहीं उसकी मां फिलहाल चेन्नई गई हुई हैं। घायल छात्रा पांच बहनों में सबसे छोटी है। उसकी अन्य चार बहनों में दो बड़ी बहनें एलएलबी कर रही हैं। वहीं, एक बहन 8वीं और दूसरी 11वीं में है। बच्ची के पिता ने क्या बताया? पिता का कहना है कि बच्ची ने छलांग लगाई है या गिर गई है… कुछ कह नहीं सकते. मेरी बच्ची को खेलने कूदने का शौक है. हो सकता है उस कारण ये हादसा हुआ. मामले की हो रही जांच-एडिशनल डीसीपी एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि बच्ची के गिरने की सूचना मिली है. मामले की जांच की जा रही है. फिलहाल निजी अस्पताल में बच्ची का इलाज जारी है. पूछताछ करने के बाद ही पूरा मामला सामने आ पाएगा. उन्होंने बताया कि बच्ची पहली मंजिल से गिरी है. पूछताछ के बाद ही साफ होगा कि बच्ची गिरी  है या छलांग लगाई है… गौतम सोलंकी ने बताया कि एग्जाम शुरू होने के पहले ये घटना हुई है. 

अमेरिकी व्यापार में राहत: ट्रंप ने टैरिफ छूट के लिए आदेश जारी किया

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें निकेल, सोना समेत कई धातुओं के साथ ही साथ फार्मास्युटिकल और रसायनों के निर्यात पर व्यापारिक साझेदारों को टैरिफ में छूट देने की बात कही गई है। इस सूची में शून्य आयात शुल्क के लिए 45 से अधिक श्रेणियों की पहचान की गई है, जिन पर टैरिफ में छूट देने का फैसला लिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ सामानों पर दी छूट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को लागू किए गए अपने रेसिप्रोकल टैरिफ में बदलाव किया है। व्हाइट हाउस ने बताया कि नए आदेश में एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड, रेजिन और सिलिकॉन समेत कई उत्पादों को छूट देने का फैसला लिया गया है। ट्रंप के इस आदेश के बाद अमेरिका और अन्य देशों के बीच विशिष्ट व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन में भी तेजी आ सकती है। इससे अमेरिका के लिए विमान के पुर्जों, जेनेरिक दवाओं और कुछ ऐसे उत्पादों पर टैरिफ हटाना आसान हो जाएगा, जिन्हें घरेलू स्तर पर उगाया, खनन या प्राकृतिक रूप से उत्पादित नहीं किया जा सकता। इसमें कुछ खास मसाले और कॉफी शामिल हैं। अधिकारियों के सिफारिशों के बाद फैसला राष्ट्रपति के आदेश में यह कहा गया है कि ये बदलाव अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह और सिफारिशों के बाद किए गए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि ये बदलाव राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए जरूरी और उचित हैं। इस बदलाव के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और वाणिज्य विभाग को अन्य देशों के साथ समझौतों को लागू करने के लिए कार्रवाई करने का अधिकार होगा, उदाहरण के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ किए गए समझौते। इससे ट्रंप को अपने कार्यकारी आदेशों के माध्यम से इन बदलावों को लागू करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। दरअसल, टैरिफ और कुछ समझौते कई महीनों के दौरान आक्रामक तरीके से तैयार किए गए थे। इनमें कई खामियां थीं, जिनका असर बाजार पर पड़ रहा था। ऐसे में अमेरिका में वे वस्तुएं महंगी हो सकती थीं जिन्हें अमेरिका में उगाया या उत्पादित नहीं किया जा सकता। जिन वस्तुओं को टैरिफ से छूट दी जा रही है, उनमें एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरण, स्यूडोएफेड्रिन, एंटीबायोटिक्स और अन्य औषधियां शामिल हैं। इसके साथ ही सिलिकॉन उत्पाद, रेजिन और एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड भी शामिल हैं।