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जम्मू-कश्मीर रियासी हादसा: भूस्खलन में 7 की मौत, कई लोगों के दबे होने की आशंका

 रियासी  जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के राजगढ़ इलाके में भारी बारिश और ऊपरी इलाकों में बादल फटने से एक बार फिर से फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई है. इस घटना में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं. वहीं रियासी जिले के महौर क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार मलबे से अब तक 7 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. प्रशासन के अनुसार कई मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से कुछ पूरी तरह बाढ़ के पानी में बह गए. हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है. रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि लापता लोगों को तलाशा जा सके. साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए हैं. अधिकारियों ने कहा कि हालात पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी भेजी जाएंगी. लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है. वहीं रियासी भूस्खलन की घटना में स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमें मौके पर राहत-बचाव अभियान चला रही हैं. जम्मू-कश्मीर में लगातार बादल फटने की घटना और फ्लैश फ्लड अगस्त 2025 में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी तबाही मची है. इस महीने में प्रदेश को लगातार फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड्स का सामना करना पड़ा, जिससे खासतौर पर जम्मू क्षेत्र में बड़ी तबाही हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते में आई भीषण बारिश ने जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा जिलों में तबाही मचाई. इन घटनाओं में अब तक 36 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सिर्फ रियासी और डोडा जिलों में ही कम से कम 9 लोगों की जान गई. भारी बारिश से भूस्खलन हुए, नदियों का जलस्तर बढ़ गया और कई गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई. इससे पहले, 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में एक बादल फटने की घटना हुई थी. यह इलाका माता वैष्णो देवी यात्रा के मार्ग पर स्थित है और समुद्र तल से 9,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है. इस क्लाउडबर्स्ट में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल और लापता बताए गए. तेज फ्लैश फ्लड्स ने श्रद्धालुओं के कैंप, मकान और पुल बहा दिए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इलाके में सामान्य बारिश ही दर्ज हुई थी, लेकिन क्लाउडबर्स्ट की वजह से सीमित क्षेत्र में अचानक पानी का सैलाब आ गया. क्लाउडबर्स्ट क्या है? भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, किसी छोटे क्षेत्र (20–30 वर्ग किलोमीटर) में एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश को क्लाउडबर्स्ट कहा जाता है. यह घटना अक्सर पहाड़ी इलाकों में होती है. मॉनसून की नमी से भरी हवाएं जब पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो ठंडी होकर घने बादल बना देती हैं. इनमें जब पानी का भार असहनीय हो जाता है तो अचानक भारी बारिश के रूप में गिरता है. इस अचानक बारिश से मिनटों में फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड और मडफ्लो जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज की वजह से इस तरह की घटनाओं की संख्या और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं.

यात्रियों के लिए खुशखबरी: इंदौर-भोपाल-नागपुर वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ोतरी

इंदौर इंदौर से नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड की कमेटी ने लिया है। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और सीटों की भारी मांग को देखते हुए ट्रेन में अतिरिक्त कोच जोड़ने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, नए रैक कब जोड़े जाएंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। 7 वंदे भारत ट्रेनों में बढ़ेंगे कोच रतलाम मंडल जुड़े वरिष्ठ ने बताया कि इस मामले में लिखित में किसी तरह की कोई जानकारी मिली नहीं है। रेलवे बोर्ड ने हाल ही में वंदे भारत की ऑक्यूपेंसी (ट्रेन में कितनी सीटें भरी हुई हैं) और यात्रियों की मांग के संबंध में सभी जोन और मंडलों से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद देशभर में चल रही सात वंदे भारत ट्रेनों में कोच बढ़ाने का फैसला लिया गया है।   यात्रियों की बढ़ती संख्या है प्रमुख मुद्दा रतलाम रेलवे मंडल से मिली जानकारी के अनुसार, मंडल ने बढ़ती संख्या में यात्रियों और टिकट की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया था। वर्तमान में इंदौर-भोपाल-नागपुर वंदे भारत आठ कोच की है, जिसमें कुल 530 सीटें हैं। इसमें 52 सीटें एक्जीक्यूटिव क्लास और शेष चेयरकार कोच में हैं। वर्तमान सीट व्यवस्था और कोच विस्तार की योजना सी-वन और सी-सेवन कोच में कुल 88 सीटें हैं। सी-टू से सी-सिक्स तक के पांच कोच में प्रत्येक कोच में 78 सीटें हैं, कुल 390 सीटें। बी-वन कोच (एक्जीक्यूटिव क्लास) में 52 सीटें हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार कोच संख्या बढ़ाकर इसे 16 कोच की ट्रेन बनाया जाएगा। इसमें कुल सीटों की संख्या लगभग 1150 से अधिक हो जाएगी। वंदे भारत एक्सप्रेस में कोच बढ़ाने का निर्णय रेलवे बोर्ड की कमेटी ने लिया है। इन रूट्स पर अपग्रेडेशन सीनियर डीसीएम हीना केवलरामानी ने कहा कि इंदौर-नागपुर, मेंगलुरु-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, सिकंदराबाद-तिरुपति, चेन्नई एग्मोर-तिरुनेलवेली, मदुरै-बेंगलुरु कैंट, देवघर-वाराणसी, हावड़ा-राउरकेला रूट पर चलने वाली वंदे भारत में अपग्रेडेशन होगा। फिलहाल लिखित में जानकारी नहीं है वंदे भारत ट्रेन में कोच बढ़ाने के मामले में फिलहाल हमारे पास लिखित में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है। इंदौर-भोपाल-नागपुर वंदे भारत में कुल 90 फीसदी की ऑक्यूपेंसी है। कुछ सेक्शन में 100 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी है। यात्रियों को मिलेगी राहत सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि आगामी महीनों में त्योहारी सीजन और यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए इंदौर-भोपाल-वंदे भारत में कोच की संख्या बढ़ाई जा रही है। इससे हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी। इस मामले में रेल मंत्री से हमने पत्र लिखकर मांग की थी।

मालवा एक्सप्रेस शनिवार को भी रहेगी रद्द, 30 अगस्त को चार ट्रेनें कैंसल

इंदौर उत्तर रेलवे जम्मू मंडल के कठुआ-माधोपुर पंजाब रेल खंड में ट्रैफिक सस्पेंड होने के कारण रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली तथा अपने आरंभिक स्टेशन से 30 अगस्त को चलने वाली चार ट्रेनें निरस्त की गई है। इसके कारण श्रीमाता वैष्णोदेवी के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होगी। मालूम हो कि माता वैष्णोदेवी के दर्शन करने के लिए यात्रियों का जत्था इकट्ठे टिकट कई दिनों पहले ही करवा लेता है। यात्रा की तिथि आने के पहले ही यात्री आने जाने की तैयारियाें में जुट जाते हैं। रेलवे जनसंपर्क विभाग के अनुसार महू-इंदौर-श्रीमाता वैष्णोदेवी कटड़ा मालवा एक्सप्रेस ट्रेन लगातार दूसरे दिन 30 अगस्त को निरस्त रहेगी। वहीं, श्रीमाता वैष्णोदेवी कटड़ा से महू के लिए चलने वाली ट्रेन भी निरस्त रहेगी। उत्तर रेलवे जम्मू मंडल के कठुआ-माधोपुर पंजाब रेलवे खंड के डाउन लाइन के ब्रिज संख्या 17 पर रेल ट्रैफिक सस्पेंड होने के कारण इंदौर सहित रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली ट्रेनें प्रभावित रहेंगी। 30 अगस्त 12472 श्रीमाता वैष्णोदेवी कटड़ा-बांद्रा टर्मिनस बांद्रा एक्सप्रेस नई दिल्ली स्टेशन पर शार्ट टर्मिनेट की गई। 30 अगस्त गांधी धाम से श्रीमाता वैष्णोदेवी कटड़ा तक चलने वाली गाड़ी संख्या 12473 निरस्त रहेगी। ट्रेनों के बारे में अधिक जानकारी के लिए यात्री कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं।

अब नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर, महिलाओं को 2100 रुपये की सुविधा ऑनलाइन

हरियाणा  हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने बीते दिन 25 सितंबर से ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ लागू करने की घोषणा की, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 2,100 रुपये दिए जाएंगें। इस योजना का लाभ 23 साल या उससे अधिक आयु की महिलाओं को मिलेगा। विवाहित और अविवाहित दोनों तरह की महिलाएं होंगी।  बता दें कि पहले चरण में वो परिवार शामिल होंगे, जिनकी सालाना आय 1 लाख रुपये से कम है। पहले चरण में 19 से 20 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिलेगा। ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ लागू करना हरियाणा में बीजेपी के चुनावी वादों में शामिल था। नायब सैनी ने कहा है कि आने वाले छह-सात दिनों में योजना को लेकर एक ऐप भी लॉन्च किया जाएगा। इसकी मदद से पात्र महिलाएं अपने घर पर बैठकर मोबाइल से ही फॉर्म अप्लाई कर पाएंगी।   

सरकार ने जारी किए वाहन-सारथी-फास्टैग डेटा एक्सेस नियम, यूज़र्स की प्राइवेसी पर रहेगा खास ध्यान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नेशनल ट्रांसपोर्ट रिपॉजिटरी (NTR) से जुड़ी नई नीति पेश की है। यह डेटाबेस पूरे देश के वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, चालान और सड़क हादसों के रिकॉर्ड को जोड़ता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) (एमओआरटीएच) ने इस महीने की शुरुआत में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को "नेशनल ट्रांसपोर्ट रिपॉजिटरी से डेटा साझा करने की नीति" भेजी। कौन-कौन से प्लेटफॉर्म जुड़े हैं इस रिपॉजिटरी में वाहन, सारथी, ई-चालान, eDAR (ई-डार) (इलेक्ट्रॉनिक एक्सीडेंट रिपोर्ट) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन फास्टैग जैसे प्लेटफॉर्म से डेटा लिया जाता है। इसमें 39 करोड़ से ज्यादा वाहनों और 22 करोड़ से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस का रिकॉर्ड मौजूद है। इस लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा सरकारी डेटाबेस माना जा सकता है। प्राइवेसी और कानूनी सुरक्षा सरकार का कहना है कि संवेदनशील पर्सनल डेटा की "कंट्रोल्ड शेयरिंग" होगी, ताकि नागरिकों की प्राइवेसी (निजता) बनी रहे। यह नियम डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अनुरूप होंगे। मंत्रालय ने 18 अगस्त को जारी एक परिपत्र में कहा, "यह नीति व्यक्तिगत डेटा साझा करने के लिए सहमति के संबंध में हाल की कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान करती है।" हर स्टेकहोल्डर को वही डेटा मिलेगा जो उसके काम से जुड़ा होगा। जहां जरूरत होगी वहां नागरिक की सहमति भी अनिवार्य होगी। मंत्रालय ने साफ किया कि हर ट्रांजैक्शन में सुरक्षा और गोपनीयता को प्राथमिकता दी जाएगी। किसे मिलेगी कितनी पहुंच इस नई नीति के तहत पुलिस और जांच एजेंसियों को पूरे डेटाबेस की पूरी पहुंच मिलेगी। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश सिर्फ अपने-अपने क्षेत्र का डेटा देख पाएंगे। और देशभर का डेटा शेयर करने के लिए उन्हें MoRTH से मंजूरी लेनी होगी। सरकारी एजेंसियों को API इंटीग्रेशन के जरिए डेटा तक पूरी पहुंच दी जाएगी। वहीं रिसर्च और शैक्षणिक संस्थानों को केवल अनाम (बिना नाम वाला) डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। आम नागरिकों की पहुंच सीमित होगी। वे mParivahan और DigiLocker जैसे एप पर दिन में केवल तीन बार तक ही वेरिफिकेशन कर पाएंगे। दूसरी ओर, बीमा कंपनियों, बैंकों, स्मार्ट कार्ड वेंडर और नंबर प्लेट बनाने वाली कंपनियों जैसी प्राइवेट सेवाओं को उनकी भूमिका के हिसाब से डेटा तक पहुंच मिलेगी, लेकिन इसके लिए सख्त सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। डेटा शेयरिंग के तरीके डेटा शेयरिंग के लिए हर प्लेटफॉर्म की अलग भूमिका तय की गई है। वाहन से गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, मालिकाना हक, इंश्योरेंस और चालान की जानकारी मिलेगी। सारथी  से ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता, अंतरराष्ट्रीय परमिट और अपराध का रिकॉर्ड मिलेगा। ई-चालान से ट्रैफिक उल्लंघन और कोर्ट केस की जानकारी मिलेगी, जबकि ई-डार (eDAR) से सड़क हादसे से जुड़े ड्राइवर, पैसेंजर और पैदल यात्री का डेटा मिलेगा। FASTag के जरिए गाड़ी से जुड़े बैंक अकाउंट और टोल ट्रांजैक्शन की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने डेटा शेयरिंग का सबसे सुरक्षित तरीका API-आधारित एक्सेस को माना है, जिसमें ऑथेंटिकेशन, एन्क्रिप्शन और IP वाइटलिस्टिंग जैसी सुविधाएं होंगी। सरकारी विभाग आधार-वेरीफाइड पोर्टल से डेटा एक्सेस कर पाएंगे। प्राइवेट कंपनियों को नागरिक की सहमति के आधार पर एक्सेस मिलेगा और आम लोग केवल अपने व्यक्तिगत डेटा की वेरिफिकेशन कर पाएंगे। बड़े पैमाने पर डेटा ट्रांसफर केवल खास मामलों में ही होगा, वो भी एन्क्रिप्टेड माध्यम से। रिसर्च और पब्लिक यूज के लिए डेटा सरकार के data.gov.in पोर्टल पर अनाम रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सरकार का मानना है कि यह नया फ्रेमवर्क ट्रांसपोर्ट सेवाओं को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा। इससे कारोबार करना आसान होगा और डेटा के गलत इस्तेमाल पर भी कड़ी रोक लगाई जा सकेगी।

ये 5 क्रिकेटर नहीं बन पाएंगे एशिया कप का हिस्सा, टीम इंडिया अगले हफ्ते करेगी उड़ान

नई दिल्ली  भारतीय टीम आगामी एशिया कप में हिस्सा लेने के लिए चार सितंबर को दुबई में एकत्रित होगी। सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व वाली भारतीय टीम 10 सितंबर को अपने अभियान की शुरुआत करेगी। हालांकि बीसीसीसीआई ने कथित तौर पर फैसला किया है कि आगामी एशिया कप 2025 के लिए चुने गए पांच स्टैंडबाय खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल, प्रसिद्ध कृष्णा, वाशिंगटन सुंदर, रियान पराग और ध्रुव जुरेल मुख्य टीम के साथ दुबई नहीं जाएंगे।   भारत टूर्नामेंट के अपने पहले मैच में 10 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात से भिड़ेगा और उसके बाद 14 सितंबर को दुबई में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान का सामना करेगा। सुपर फोर चरण से पहले उसका तीसरा ग्रुप मैच 19 सितंबर को ओमान के खिलाफ होगा। जब बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी से पूछा गया कि क्या कोई स्टैंडबाय खिलाड़ी टीम के साथ यात्रा करेगा, तो अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "नहीं, स्टैंडबाय खिलाड़ी मुख्य टीम के साथ दुबई नहीं जाएंगे।" अधिकारी के मुताबिक जरूरत पड़ने पर ही खिलाड़ी को बुलाया जाएगा। भारतीय टीम में शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन बतौर ओपनर खेल सकते हैं। यशस्वी जायसवाल की जरूरत तभी पड़ेगी जब उनमें से कोई चोटिल हो। यही बात प्रसिद्ध पर भी लागू होती है, जो जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह या हर्षित राणा के चोटिल होने पर खेल सकते हैं। गौरतलब है कि भारत ने अपनी टीम में केवल 15 खिलाड़ियों को शामिल किया, जबकि एशिया कप के नियम के अनुसार उन्हें 17 खिलाड़ियों की टीम चुनने की अनुमति थी। एशिया कप के लिए भारतीय टीम में शामिल अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा गुरुवार को शुरू हुए दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में उत्तर क्षेत्र की तरफ से पूर्व क्षेत्र के खिलाफ जबकि कुलदीप यादव मध्य क्षेत्र की तरफ से उत्तर पूर्व क्षेत्र के खिलाफ खेल रहे हैं। सूर्यकुमार एशिया कप में 15 सदस्यीय भारतीय टीम की अगुवाई करेंगे जबकि टेस्ट कप्तान शुभमन गिल उनके उप कप्तान होंगे। एशिया कप के सभी मैच दो स्थान दुबई और अबुधाबी में आयोजित किए जाएंगे।  

महिलाओं के लिए नई उम्मीद: नीतीश की रोजगार स्कीम लॉन्च, तेजस्वी ने किया अलग योजना का ऐलान

पटना  बिहार में तेजस्वी यादव और कांग्रेस के ‘माई बहिन मान योजना’ वादे के बाद से जिस तरह की संभावना जताई जा रही थी, उसी अनुरूप सीएम नीतीश कुमार ने महिलाओं को ध्यान में रखते हुए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ शुरू करने की घोषणा कर दी है। शुक्रवार को कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी और सितंबर से योजना चालू हो जाएगी। महिलाओं की मदद के लिए सरकार इस स्कीम के तहत परिवार की एक औरत को 10 हजार रुपये देगी, जिससे वो अपनी पसंद का रोजगार शुरू कर सके। छह महीने बाद उस महिला के रोजगार का आकलन करके जरूरत हुई तो सरकार 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी करेगी। ‘माई बहिन मान योजना’ में सरकार बनने पर महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये नकद देने का वादा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि महिलाओं के हित में एक महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व निर्णय लिया गया है, जिसके सकारात्मक दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का मुख्य लक्ष्य राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को उनकी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता देना है। इस योजना के तहत आवेदक महिला को पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये मिलेंगे, जिस राशि से उसे स्व-रोजगार शुरू करना है। सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया है जबकि निगर विकास और आवास विभाग को जरूरत के हिसाब सहयोग देना है। नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि अगले महीने यानी सितम्बर 2025 से ही महिलाओं के खाते में फंड ट्रांसफर शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिलाओं द्वारा रोजगार शुरू करने के 6 माह के बाद आकलन करते हुए 2 लाख रुपए तक की अतिरिक्त सहायता आवश्यकतानुसार दी जा सकेगी। इसके साथ ही सरकार गांव से शहर तक महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए हाट बाजार विकसित करेगी। नीतीश ने उम्मीद जताई है कि इस योजना से न सिर्फ महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी बल्कि राज्य के अंदर ही रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और मजबूरी में काम के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। नीतीश कुमार और उनकी सरकार ने इससे पहले तेजस्वी यादव के ज्यादातर चुनावी वादों पर कुछ ना कुछ ऐक्शन ले रखा है। तेजस्वी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया है तो नीतीश ने 1 अगस्त से 125 यूनिट फ्री बिजली देना शुरू कर दिया है। सरकारी नौकरी पर दोनों के बीच श्रेय की लड़ाई चल ही रही थी कि जुलाई में नीतीश कैबिनेट ने अगले पांच साल में एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का संकल्प पास कर दिया। नीतीश सरकार ने जून में वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया। तेजस्वी ने सरकार बनने पर 1500 करने का वादा किया है। तेजस्वी ने सरकारी नौकरियों में 100 फीसदी डोमिसाइल नीति का वादा किया है तो नीतीश कैबिनेट ने 5 अगस्त को शिक्षक बहाली में 84.4 फीसदी पद बिहार के निवासियों के लिए आरक्षित कर दिया। 60 परसेंट जातीय आरक्षण के ऊपर नीतीश ने इससे पहले ही अनारक्षित 40 फीसदी पदों के अंदर 35 फीसदी पद बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया था, जिससे प्रभावी डोमिसाइल 74 फीसदी तक पहुंच गया था। अनारक्षित कोटे में बची 65 फीसदी सीटों पर अगस्त में 40 फीसदी पद बिहार से मैट्रिक या इंटर करने वालों के लिए रिजर्व कर दिया गया था, बोर्ड चाहे कोई भी हो।

भारत की पहली प्रदूषण-रहित ट्रेन का आगाज, हरियाणा से होगी शुरुआत

हरियाणा  भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर सितंबर 2025 में ट्रायल रन के लिए तैयार है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, और यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है।  इसे भारतीय रेलवे की अभूतपूर्व पहल माना जा रहा है। यह पर्यावरण के अनुकूल कदम है। ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली उत्पन्न की जाती है, जिसमें पानी और भाप खर्च होती है। इसका कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण-मुक्त है।    यह ट्रेन 1,200 हॉर्सपावर की क्षमता वाली होगी जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है. अन्य देशों (जैसे जर्मनी) की हाइड्रोजन ट्रेनें आमतौर पर 500-600 हॉर्सपावर की होती हैं। ट्रेन में 8 यात्री कोच और 2 हाइड्रोजन स्टोरेज कोच हैं जो एक बार में 2,638 यात्रियों को ले जा सकती है. 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है। किलो हाइड्रोजन इस ट्रेन को 4.5 लीटर डीजल के बराबर माइलेज देता है. 8-10 कोच खींचने के लिए 2.4 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है, जिसके लिए ट्रेन में दो पावर प्लांट लगाए गए हैं।    ट्रेन का निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, जो 1955 में स्थापित भारत की पहली कोच उत्पादन इकाई है. ट्रेन का डिजाइन लखनऊ के अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा तैयार किया गया है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इस ट्रेन की अनुमानित लागत 82 करोड़ रुपये है. भारतीय रेलवे ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत 35 ऐसी ट्रेनों के लिए 2,800 करोड़ रुपये और बुनियादी ढांचे के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।   

बेरोजगारों के लिए खुशखबरी: MP में महीने के ₹1500 पाने का आसान तरीका

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहयोग देने के लिए एमपी बेरोजगारी भत्ता योजना 2025 शुरू की है। इस योजना के तहत योग्य आवेदकों को हर महीने ₹1,500 की सहायता राशि दी जाएगी, जिससे वे नौकरी की तलाश के दौरान अपनी दैनिक ज़रूरतें पूरी कर सकें और कौशल विकास पर ध्यान दे सकें। योजना के मुख्य लाभ आर्थिक सहयोग से युवाओं को नौकरी की तैयारी में मदद। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और आसान। योग्य उम्मीदवारों को समय पर सीधा बैंक खाते में राशि का ट्रांसफर। पात्रता मानदंड इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदक को निम्न शर्तें पूरी करनी होंगी: मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। आयु 21 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास। परिवार की वार्षिक आय ₹3 लाख से कम होनी चाहिए। वर्तमान में किसी भी प्रकार की नौकरी में न हों। आवश्यक दस्तावेज़ आवेदन के समय इन कागज़ों की जरूरत होगी: आधार कार्ड पैन कार्ड निवास प्रमाण पत्र आय प्रमाण पत्र 12वीं की मार्कशीट बैंक खाता विवरण पासपोर्ट साइज़ फोटो मोबाइल नंबर जन्म प्रमाण पत्र आवेदन की प्रक्रिया एमपी रोजगार पोर्टल पर जाएं। "नया पंजीकरण" विकल्प चुनें। मांगी गई जानकारी को सही तरीके से भरें। आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। आवेदन सबमिट कर भविष्य के लिए रसीद सुरक्षित रखें।

ट्रंप को करारा झटका, चावल के दाने पर रुक गई करोड़ों की डील

नई दिल्ली  हर देश की अपनी कुछ सांस्कृतिक और लोक मान्यताएं होती हैं. इसकी वजह से वो किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करते हैं. ये न सिर्फ राजनीतिक बल्कि कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलाव ले आती हैं. कई बार ये सामने आ जाती हैं तो कई बार समझने पर पता चलता है कि जो दिख रहा है, वैसा है नहीं. कुछ ऐसा ही चल रहा है इस वक्त जापान में, जहां अमेरिका से साथ टैरिफ घटाने पर होने वाली एक डील होते-होते रुक गई. 550 अरब डॉलर के मेगा निवेश समझौते की प्रक्रिया अचानक ही रुक गई. जापान के कारोबार सलाहकार रयोसेई अकाजावा ने अमेरिका जाना था लेकिन उनका दौरा आखिरी मिनट में रद्द कर दिया. अकाजावा का यह दौरा अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक के साथ फाइनल बातचीत के लिए तय था. निवेश पैकेज की घोषणा इसी हफ्ते की जानी थी, जिसमें मुनाफे के बंटवारे जैसी अहम बातें तय होनी थी. क्या है ये पूरा निवेश समझौता, जो थम गया अमेरिका और जापान के बीच सहमति बनी थी कि अगर जापान यह 550 अरब डॉलर का मेगा इनवेस्टमेंट करता है, तो टोक्यो पर लगने वाले टैरिफ 25% से घटाकर 15% कर दिए जाएंगे. हालांकि इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा – ‘यह पैसा हमारा है, हम जैसे चाहें वैसे लगाएंगे’. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस इनवेस्टमेंट का 90 फीसदी मुनाफा अपने पास रखेगा, बस यहीं जापान की बात बिगड़ गई. जापानी सरकार की ओर से कहा गया है कि कुछ अहम बिंदुओं पर सहमति नहीं बनने की वजह से दौरा रद्द किया गया है. इसमें ऑटो पार्ट्स पर तुरंत टैरिफ हटाना और पुराने कार्यकारी आदेश में बदलाव करना शामिल है. ‘चावल’ का है अहम रोल इस पूरे मामले में अहम भूमिका जापानी चावल की है. दरअसल जापान और अमेरिका के समझौते की प्रक्रिया मई से ही चल रही है. अब मु्द्दा ये है कि डोनाल्ड ट्रंप हमेशा की तरह अपनी शर्तों पर निवेश चाहते हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ये भी लिख दिया था कि जापान ने अमेरिका के लिए अपना एग्रीकल्चर सेक्टर खोल दिया है. यहां मामला सीधा चावल से जुड़ा था. जापानी किसान कभी नहीं चाहते हैं कि अमेरिका का चावल जापानी बाजारों में आए, जिसे लेकर पहले भी विरोध हो चुका है. दशकों से यहां अमेरिकी चावल का विरोध होता रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि ये सस्ता चावल किसानों के बाजार को खत्म कर देगा. जापानी लोग स्टिकी राइस खाते हैं और वे इसे पौष्टिक मानते हैं. दूसरी तरफ चावल जापान में सांस्कृतिक पहचान माना जाता है. जापानी लोग इसे अपने गांव से जोड़कर देखते हैं. भले ही जापान में बाकी भोजन आयात होता हो लेकिन उनकी कोशिश रहती है कि चावल घरेलू उत्पादन तक ही सीमित रहे, भले ही उनकी कीमतें ज्यादा हों. जापान का चावल आयात वैसे तो जापान में चावल का आयात होता लेकिन अमेरिकी चावल का ज्यादा विरोध है क्योंकि ये सस्ता होता है. जापान टैरिफ बढ़ने की सूरत में जापान से चावल का आयात कम कर चुका ह, जिसे अमेरिका बढ़ाना चाहता है. वहीं भारत का जापान में चावल का निर्यात पिछले दो सालों में बढ़ा है. साल 2024 में जापान ने भारत से $5.74 मिलियन का चावल आयात किया जो साल 2023 ( $2.08 मिलियन) की तुलना में दोगुने से ज्यादा था. ऐसे में अमेरिका से अगर जापान चावल आयात नहीं करता, तो भारत से उसकी डील हो सकती है.