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छत्तीसगढ़ी लोकगीतों पर थिरके भाजपा सांसद-विधायक, सीएम साय और प्रदेश प्रभारी नबीन ने बजाया मांदर

सरगुजा भाजपा सांसद-विधायकों के प्रशिक्षण शिविर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश प्रभारी नितिनत नबीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत सांसद और विधायक छत्तीसगढ़ी लोकगीतों पर जमकर थिरके. सीएम साय और नितिन हाथों में मांदर लेकर थिरकते दिखे. बता दें कि मैनपाट में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ. शिविर के दूसरे दिन के सत्र के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ. विधायक अनुज शर्मा के गाने पर सीएम विष्णुदेव साय, प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन समेत सभी भाजपा विधायक और सांसद जमकर थिरके.

पेसा एक्ट जनजातीय पहचान और स्वशासन की गारंटी देता है: मंत्री श्री पटेल

पेसा एक्ट जनजातीय समाज की स्वतंत्रता और संस्कृति की ढाल है: मंत्री पटेल मंत्री पटेल बोले– पेसा एक्ट आदिवासी जीवन मूल्यों और अधिकारों की सुरक्षा का कानून है पेसा एक्ट जनजातीय पहचान और स्वशासन की गारंटी देता है: मंत्री श्री पटेल नवनियुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं विकासखंड  अधिकारियों के प्रशिक्षण का समापन पेसा कानून के क्रियान्वयन पर हुई विशेष कार्यशाला भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नवनियुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं विकासखंड अधिकारियों की पहली पोस्टिंग प्रदेश के जनजातीय विकासखंड में की जा रही है। इन विकासखंडों में पेसा मोबलाइजर्स के साथ कार्य कर नवनियुक्त अधिकारियों को जमीनी स्तर पर पेसा कानून के क्रियान्वयन की जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि पेसा कानून के क्रियान्वयन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ ही जनजाति कार्य विभाग की बड़ी भूमिका है। उन्होंने पेसा कानून को जनजातीय समाज की स्वतंत्रता और जीवन मूल्यों की रक्षा का माध्यम बताया। मंत्री पटेल मंगलवार को मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) भोपाल में नवनियुक्त जनपद सीईओ एवं बीडीओ के प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं पेसा कानून पर कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किये और स्मृति दर्पण पुस्तिका का भी विमोचन भी किया। मंत्री पटेल ने कहा कि शासकीय सेवा को व्यक्तिगत लाभ न मानते हुए समाज और संस्था की प्रतिष्ठा का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी सेवा जनजातीय क्षेत्र में होने पर स्वस्थ मन से, निष्काम भाव से जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के लिए, उनके जीवन दर्शन के लिए, उनको दबावों से मुक्त कराने के लिए कार्य करें। मंत्री पटेल ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए प्रदेश के विभिन्न पंचायत में 1400 से अधिक नवीन ग्राम पंचायत भवन स्वीकृत कराए गए है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज को मज़बूत करना केवल इमारतें बनाना ही नहीं, बल्कि संसाधनों और सही माहौल की उपलब्धता से संभव है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं उनका संरक्षण करना भी आवश्यक है। अब फेंसिंग और पानी की व्यवस्था के बिना पौधारोपण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल स्रोत, भूमि को पुनर्जीवित करने के प्रयास करना चाहिए। मंत्री पटेल ने कहा कि ग्रामीण विकास में पात्र व्यक्ति को सबसे पहले लाभ मिलना न्याय की सच्ची परिभाषा है। सभी पात्र हितग्रहियों को शासन की योजनाओं के लाभ पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए अधिकारियों को जनजातीय विकासखंड में भेजने से उन्हें अधिक जमीनी अनुभव मिलेगा। पेसा एक्ट के अंतर्गत ग्राम सभाओं की सक्रियता और वास्तविक बैठकें सुनिश्चित करने पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गौण खनिज अधिकारों की रक्षा की ज़िम्मेदारी अब जनपद सीईओ की होगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति का सम्मान आवश्यक है- नदी, पहाड़ और वृक्ष जीवनदायिनी संगम हैं। जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति आस्था और उनकी जीवन शैली से सीखना चाहिए। मंत्री पटेल ने “जल गंगा संवर्धन अभियान” और “एक बगिया माँ के नाम” अभियान के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कई कार्य किए गए। मंत्री पटेल ने कहा कि अभियान के तहत उन्होंने 80 से अधिक छोटी नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि जल स्रोतों के संरक्षण के साथ ही पौधों के संरक्षण के लिए “एक बगिया मां के नाम” अभियान की शुरुआत 15 जुलाई से की जा रही है। इस अभियान के तहत एक एकड़ ज़मीन पर बगिया लगाने के लिए ₹3 लाख की सहायता दी जाएगी – पहले साल ₹2 लाख, फिर क्रमशः ₹52,000 और ₹48,000 की किश्तों में दी जाती है। स्व सहायता समूह की महिलाओं को निजी भूमि पर बागवानी के लिए विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी। मंत्री पटेल ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग शुरू हो चुका है, जिससे योजनाएं वैज्ञानिक आधार पर बनेगी और चलेंगी। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं की असफलता का कारण साइट सिलेक्शन की गलतियां हैं, जिसे नवीन तकनीक का समावेश कर ठीक किया जा सकता है। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, डायरेक्टर वाल्मी श्रीमती सरिता बाला, उप सचिव ह्रदयेश श्रीवास्तव सहित जनजातीय विकासखंडों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के नवनियुक्त सीईओ एवं बीडीओ, 20 जिलों के जिला पेसा समन्वयक तथा जनजातीय विकासखंडों के समन्वयक उपस्थित थे।  

चूरू: जगुआर फाइटर जेट क्रैश में दोनों पायलट शहीद, जांच के आदेश जारी

चूरू राजस्थान के चूरू ज़िले में इंडियन एयरफोर्स का जगुआर ट्रेनर विमान ट्रेनिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई. इस घटना को लेकर भारतीय वायुसेना ने गहरा दुख जताया है. साथ ही हादसे की वजह का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (आंतरिक जांच) के आदेश दे दिए गए हैं. ये जांच इस बात की विस्तृत समीक्षा करेगी कि विमान दुर्घटनाग्रस्त कैसे हुआ. भारतीय वायुसेना ने X पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि वह इस कठिन समय में शोकाकुल परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है. वायुसेना ने कहा कि हम बहादुर पायलटों की शहादत को सलाम करते हैं और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं. जोरदार धमाके के बाद उठी आग की लपटें प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्लेन का मलबा एक खेत में मिला है, साथ ही मानव अंग भी बुरी तरह क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं. हादसे के तुरंत बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों ने बताया कि एक जोरदार धमाका सुनाई दिया, इसके बाद धुआं और आग की लपटें उठती देखीं. ग्रामीणों ने खेतों में लगी आग को बुझाने की कोशिश भी की. दोपहर 1:25 बजे हुआ हादसा स्थानीय पुलिस अधिकारी कमलेश ने बताया कि विमान दोपहर करीब 1:25 बजे गिरा. हादसे के बाद जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं. साथ ही सेना की राहत और जांच टीम के भी जल्द ही घटनास्थल पर पहुंचने की उम्मीद है. वहीं, भारतीय वायुसेना ने कहा कि हादसे के वक्त विमान ट्रेनिंग पर था.  भारतीय वायुसेना ने दी ये जानकारी भारतीय वायुसेना ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक यह दुर्घटना उस समय हुई जब लड़ाकू विमान प्रशिक्षण उड़ान पर था। इस दुर्घटना में दोनों पायलटों को गंभीर चोटें आईं। किसी भी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। वायुसेना इस दुखद घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करती है और इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की गई है। हादसे के बाद कैसा था मंजर राजस्थान में वायुसेना के कई अड्डे हैं, जिनमें जोधपुर और बीकानेर में प्रमुख प्रतिष्ठान हैं। घटना के तुरंत बाद इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने बताया कि आसमान से तेज़ आवाज़ सुनाई दी, जिसके बाद खेतों से आग और धुआं उठता दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों ने यह भी बताया कि दुर्घटना के कारण आस-पास के खेतों में आग लग गई, जिसे उन्होंने खुद बुझाने की कोशिश की। पुलिस अधिकारी ने कही ये बात जिला कलेक्टर अभिषेक सुराना और पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचे। सेना का एक बचाव दल भी घटनास्थल पर पहुंच गया है। दुर्घटना के सही कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। सेना अपनी प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद आधिकारिक बयान जारी करेगी। स्थानीय पुलिस अधिकारी राजलदेसर कमलेश ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि विमान दोपहर करीब 1.25 बजे भनोदा गांव के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। उन्होंने बताया कि दुर्घटनास्थल के पास मानव शरीर के अंग मिले हैं। प्लेन क्रैश होने के बाद क्या होता है     बता दें कि किसी भी प्लेन क्रैश के बाद सबसे पहले इमरजेंसी सर्विस को एक्टिव कर दिया जाता है।           उस एरिया को पुलिस सील कर देती है और किसी को भी उस जगह पर जाने की इजाजत नहीं होती है। कोई भी घटनास्थल तक नहीं जा सकता है।            इसके बाद एजेंसियां विमान हादसे की जांच करती हैं और मलबे का निरीक्षण करती हैं।            इसके बाद फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर जैसे उपकरणों की खोज की जाती है, जिससे कि यह पता लगाने की कोशिश की जा सके कि विमान क्यों क्रैश हुआ था। क्रैश हुए विमान के मलबे का क्या होता है ?      विमान हादसे के बाद उसका मलबा दूर तक जाकर गिरता है।            अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में प्लेन क्रैश होकर बिल्डिंग पर जा गिरा था और उसका आधा हिस्सा बिल्डिंग पर था और बाकी का हिस्सा जमीन पर गिरा था।           मलबे में से ब्लैकबॉक्स खोजने की कोशिश की जाती है।           सबसे पहले तो मलबे का इस्तेमाल जांच में किया जाता है, लेकिन उसके बाद उसे ऐसे ही नहीं छोड़ दिया जाता है।            जो भी एजेंसियां उस विमान दुर्घटना की जांच करती हैं, वे मलबे में जो पुर्जे काम के होते हैं, उनको खोलकर अलग कर लेती हैं।           इसके बाद लैब में उनकी जांच की जाती है, जिससे कि यह देखा जा सके कि वे दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं या नहीं।           जो भी काम का मलबा नहीं होता है, उसको नीलाम कर दिया जाता है।   5 महीने में तीसरा हादसा बता दें कि पिछले 5 महीने में तीसरी बार जगुआर प्लेन दुर्घटना का शिकार हुआ है. इससे पहले 7 मार्च को अंबाला में और 2 अप्रैल को गुजरात के जामनगर में जगुआर ट्रेनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. अंबाला में पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा था, लेकिन जामनगर हादसे में एक पायलट की मौत हो गई थी. सीएम भजनलाल ने जताया दुख राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी हादसे पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि चूरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का दुखद समाचार प्राप्त हुआ. घटना के तुरंत बाद से प्रशासन अलर्ट मोड पर है और राहत-बचाव कार्य के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति दें.

लापता चार मासूम बच्चों की पानी भरे गड्ढे में मिली लाश

मेजा/प्रयागराज मेजा इलाके के बेदौली गांव से लापता चार मासूम बच्चों की बुधवार सुबह घर से कुछ ही दूरी पर पानी भरे गड्ढे में लाश उतराती हुई मिली तो सनसनी फैल गई। चारों बच्चों में दो भाई-बहन हैं। बाकी दो पड़ोसी हैं। सूचना पर मौके पर एसीपी मेजा एसपी उपाध्याय के साथ मेजा थाना अध्यक्ष राजेश उपाध्याय पहुंच गए। चारों बच्चों के शव को पहले सीएचसी रामनगर ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। घर में कोहराम मचा हुआ है।   मेजा थाना क्षेत्र के बेदौली गांव के आदिवासी बस्ती के ज्यादातर लोग गांव में स्थित ईंट भट्ठा या मनरेगा में मजदूरी का काम करते हैं। उनकी बस्ती के पास ही ईंट भट्ठा संचालित होता है। ईंट भट्ठा संचालक द्वारा मिट्टी निकालने के चक्कर में बड़ा गड्ढा कर दिया गया है। जिसमें बारिश का पानी भरा हुआ है। मंगलवार शाम तीन बजे बस्ती के लोग मनरेगा के काम में चले गए थे। शाम पांच जब बस्ती के लोग घर आए तो हीरा आदिवासी का बेटा हुनर (5), हीरा आदिवासी की बेटी वैष्णवी (3), संजय आदिवासी का बेटा खेसारी लाल (5) और विमल आदिवासी का बेटा कान्हा (5) वर्ष घर से लापता थे। इन चारों बच्चों की खोजबीन पूरी बस्ती के लोग काफी देर तक किए लेकिन कुछ भी पता नहीं चल सका। मेजा पुलिस ने रात में ही चारों बच्चों के लापता होने पर गुमशुदगी दर्ज कर खोजबीन शुरू की थी, लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। बुधवार सुबह छह बस्ती के लोगों की निगाह ईंट भट्ठा के बगल पानी भरे गड्ढे पर गई तो वहां पर चारों मासूम बच्चों की लाश उतरती हुई दिखी। ऐसे में सनसनी फैल गई। घर में कोहराम मच गया। बस्ती के लोगों ने चारों बच्चों की उतराती हुई लाश को बाहर निकाल लिया। सूचना पर एसीपी मेजा, एसडीएम मेजा सुरेंद्र प्रताप यादव सहित कई थानों की फोर्स पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक चारों बच्चे खेलते खेलते पानी भरे गड्ढे में चले गए। जिससे चारों मासूम बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ने चारों बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसडीएम मेजा ने बताया की चारों बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए सहायता के रूप में दिया जाएगा। मेजा थाना क्षेत्र के बेदौली गांव में पानी में डूबने से जिन चार बच्चों की मौत हुई है उसमें दो बच्चे सगे भाई बहन हैं। यह बच्चे हीरा आदिवासी के हैं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।  घटना के बाद बस्ती में कोहराम मचा हुआ। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। परिवार के लोगों से घटना के बारे में जानकारी ली।  

माधव को आज बड़ी सौगात मिली, खदान खोदी और पहले ही दिन पहली ही बार में हीरा मिलने के साथ ही उसकी किस्मत भी चमक उठी

 पन्ना मध्य प्रदेश में हीरे उगलने वाली नगरी पन्ना की धरती कब किसकी किस्मत पलट दे और कब किसे रंक से राजा बना दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ  देखने को मिला, जब माधव आदिवासी नाम के सामान्य मजदूर की किस्मत पलट गई और वह अचानक लखपति बन गया। पन्ना की कृष्णा कल्याणपुर पट्टी की उथली खदान में मजदूरी करने वाले आदिवासी युवक माधव को आज उस वक्त बड़ी सौगात मिली, जब उसने किस्मत आजमाने के लिए पहली बार खदान खोदी और पहले ही दिन पहली ही बार में हीरा मिलने के साथ ही उसकी किस्मत भी चमक उठी। इस मजदूर ने  खदान की खुदाई चालू की थी और पहले ही दिन उसे 11 कैरेट 95 सेंट का उज्ज्वल किस्म का बेशकीमती हीरा मिल गया। 40 लाख रुपए से भी ज्यादा है कीमत इस बारे में जानकारी देते हुए हीरा अधिकारी रवि पटेल ने बताया कि माधव को मिला हीरा बेहद साफ और कीमती है, साथ ही उन्होंने बताया कि इस हीरे की अनुमानित कीमत 40 लाख रुपए से भी ज्यादा आंकी जा रही है। हीरा मिलने के बाद माधव मजदूर ने इसे नियम के अनुसार पन्ना स्थित हीरा कार्यालय में जमा कर दिया। पटेल ने आगे की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अब यह हीरा आगामी नीलामी में जाएगा और नीलामी की रकम में से 12.5% रॉयल्टी काटकर बाकी रकम माधव को दी जाएगी। माधव को मिले इस हीरे से ना केवल एक साधारण आदिवासी मजदूर की जिंदगी बदल जाएगी, बल्कि इसके साथ ही उसने अपने हौसले और मेहनत से वहां काम कर रहे अपने जैसे लाखों मजदूरों के मन में भी इसी तरह की उम्मीदें जगा दी हैं। पन्ना की धरती से हर दिन ऐसे चुनिंदा भाग्यशाली लोगों की झोली में हीरे डालकर उनके सपने पूरे करती है।

छत्तीसगढ़ राज्य को डीएमएफ संबंधी उत्कृष्ट कार्यों के लिए भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा किया गया सम्मानित

रायपुर  भारत सरकार के खान मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। आज नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक दिवसीय “नेशनल डीएमएफ वर्कशॉप” के दौरान केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी किशन रेड्डी ने मुख्यमंत्री के सचिव और खनिज सचिव श्री पी. दयानंद को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। खान मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना द्वारा नेशनल डीएमएफ पोर्टल में समस्त राज्यों के डीएमएफ से संबंधित डेटाबेस का संधारण किया जा रहा है। डीएमएफ के ऑडिट रिपोर्ट का राज्य डीएमएफ पोर्टल एवं नेशनल डीएमएफ पोर्टल में 90 प्रतिशत डेटाबेस पूर्णतः अपलोड किए जाने पर छत्तीसगढ़ राज्य को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को मॉडल राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया और अन्य राज्यों को भी डेटा अपलोडिंग, पारदर्शिता और ज़मीनी क्रियान्वयन के अनुकरण की सलाह दी गई। उल्लखेनीय है कि नेशनल डीएमएफ  कार्यशाला का आयोजन प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना एवं डीएमएफ की प्रभावशीलता को बढ़ाने और खनन क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से सचिव, संचालक एवं खनन प्रभावित जिलों के कलेक्टर्स शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, अधोसंरचना एवं आजीविका जैसे विविध क्षेत्रों में समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य में अब तक 16,506 करोड़ रुपये की लागत से 1,01,313 विकास कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 70,318 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं। राज्य शासन द्वारा डीएमएफ के क्रियान्वयन में पारदर्शी और जनहितकारी दृष्टिकोण को अपनाते हुए, प्रत्येक जिले में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों की योजना और निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। यह नीति न केवल भौतिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण को भी लक्ष्य में रखती है। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की ओर से सचिव, खनिज साधन विभाग श्री पी. दयानंद, संचालक श्री रजत बंसल के साथ बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा, कोरबा, रायगढ़ एवं दंतेवाड़ा जिलों के कलेक्टर्स एवं डीएमएफ के नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भजनलाल बोले – अंतिम पायदान के व्यक्ति के सशक्तीकरण के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से समर्पित

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश के हर व्यक्ति-हर परिवार को सशक्त और समृद्ध बनाते हुए उनकी सेवा करना हमारी सरकार का सर्वोच्च ध्येय है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा इसी दिशा में हमारा एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरे समर्पण और निष्ठा से काम कर रही है। शर्मा मंगलवार को बीकानेर में श्रीडूंगरगढ़ के गुसांईसर बड़ा गांव में पंडित दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल शिविर के अंतर्गत आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान से ही देश-प्रदेश का समग्र विकास संभव है। उनकी इस भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने वंचितों को वरीयता देते हुए अपनी नीति एवं कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा इसी रूपरेखा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिविर में हो रहे तत्परता से कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में 24 जून से 9 जुलाई तक चलने वाले इस पखवाड़े के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किसान, युवा, महिला एवं मजदूर सहित सभी वर्गाें को लाभान्वित किया जा रहा है। इन शिविरों में नामांतरण, बंटवारे, रास्ते के प्रकरण, पशु टीकाकरण, पानी टंकियों की सफाई, लीकेज मरम्मत, बिजली के झूलते तारों का दुरूस्तीकरण जैसे कई जरूरत के काम तत्परता से किए जा रहे हैं। जिनसे आमजन को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं। महिलाओं-युवाओं के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध राज्य सरकार श्री शर्मा ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य की डबल इंजन की सरकार प्रदेश में हर वर्ग और हर क्षेत्र का विकास तेजी से कर रही है। महिला कल्याण को प्रमुख प्राथमिकता देते हुए नीतियों एवं योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ो प्रोत्साहन योजना, मेधावी छात्राओं को साइकिल वितरण, कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना आदि के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है। श्री शर्मा ने कहा कि युवाओं के रोजगार के सपने को पूरा करने के लिए राज्य सरकार कृतसंकल्पित है। हमने डेढ़ वर्ष के अल्प कार्यकाल में 69 हजार पदों पर नियुक्तियां दी है और लगभग 1 लाख 88 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल में पेपरलीक का एक भी प्रकरण सामने नहीं आया है।   किसानों के कल्याण के लिए उठाए महत्वपूर्ण कदम मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए गोपाल क्रेडिट कार्ड और किसान सम्मान निधि जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाया। साथ ही, किसानों की मांग के अनुरूप मूंगफली की खरीद के लिए निर्धारित समय को भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए हम रामजल सेतु लिंक परियोजना (ईआरसीपी) और यमुना जल समझौता पर तेजी से कार्य कर रहे हैं। साथ ही, हमने इंदिरा गांधी और गंगनहर परियोजना के विकास कार्य के लिए भी 4 हजार करोड़ रुपये दिए हैं। वहीं, हम किसानों को वर्ष 2027 तक दिन के समय में बिजली उपलब्ध कराने के लिए दृढ़संकल्पित हैं। जरूरतमंद का हो रहा आर्थिक सशक्तिकरण श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने पंडित दीनदयाल गरीबी मुक्त गांव योजना की पहल की है जिसके माध्यम से ग्रामीण परिवारों को बीपीएल श्रेणी से बाहर निकाला जाएगा। इसके अंतर्गत पांच हजार गांवों को बीपीएल मुक्त किया जा रहा है। वहीं, 10 हजार गांवों में बीपीएल परिवारों का सर्वे और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में लाभान्वितों का दायरा बढ़ाते हुए 51 लाख पात्र परिवारों को जोड़ा है। हमारी सरकार बनाएगी श्रीडूंगरगढ़ में ट्रोमा सेंटर इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्रीडूंगरगढ़ में ट्रोमा सेंटर के निर्माण के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए भी आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बिना बजट के ट्रोमा सेंटर की घोषणा की थी। श्री शर्मा ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते और उन्होंने सिंधु जल समझौते को निरस्त कर कड़ा संदेश दिया। समारोह में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, विधायक सुश्री सिद्धि कुमारी, ताराचंद सारस्वत, विश्वनाथ मेघवाल, अंशुमान सिंह भाटी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन

अनूपपुर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर श्रीमती माया विश्वलाल के निर्देशानुसार नालसा (बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं) योजना, 2024 एवं नालसा (डीएडब्ल्यूएन-नशा मुक्त भारत के लिए नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता और कल्याण मार्गदर्शन) योजना, 2025 के संबंध में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमगवां, सरस्वती शिशु मंदिर अमगवां, शासकीय हाईस्कूल मौहरी, सोनम सिंधु शिशु पूर्व मा. विद्यालय मौहरी एवं शासकीय पूर्व मा.वि. सेन्दुरी में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। उक्त शिविरों में न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनूपपुर विनोद कुमार वर्मा, जिला विधिक सहायता अधिकारी बृजेश पटेल, पैरालीगल वालेंटियर सहित विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण, विद्यार्थीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं योजना शारीरिक और मानसिक अपरिपक्वता के आधार पर बच्चों को विशेष देखभाल और सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे या कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चे विशेष रूप से कमजोर होते है और उन्हें विशेष सुरक्षा और सहायता की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, यह योजना ऐसे बच्चों के लिए न्यायिक प्रक्रियाओं को नेविगेट करने में मदद करने के लिए बच्चों के अनुकूल कानूनी सेवाओं तक पहुंच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी  बृजेश पटेल ने डीएडब्ल्यूएन-नशा मुक्त भारत के लिए नशीली दवाओं के प्रति जागरूकता और कल्याण मार्गदर्शन योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना नशा मुक्त भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य, नशीली दवाओं के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना, नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकना, नशा पीड़ितों को उपचार और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना एवं एक स्वस्थ और नशा मुक्त समाज का निर्माण करना है।    

केजरीवाल बोले- LG की रुकावटों के बावजूद दिल्ली में किए बहुत काम, ‘मेरे को तो नोबेल प्राइज मिलना चाहिए…

नई दिल्ली आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति जैसी डिमांड कर दी है। ट्रंप की ही तरह केजरीवाल ने भी नोबेल पुरुस्कार की मांग कर दी है। मंगलवार को कहा कि दिल्ली को आज आम आदमी पार्टी की याद आ रही है। भाजपा सरकार ने चार महीनों में सब कुछ बर्बाद कर दिया है। एक के बाद एक मोहल्ला क्लीनिक बंद हो रहे हैं। हमने अस्पतालों में दवाइयाँ मुफ़्त कर दी थीं, लेकिन वो बंद कर दी गईं। मुफ़्त जाँचें बंद कर दी गई हैं। दिल्ली का बुरा हाल है। सारी सड़कें टूटी हुई हैं। हर तरफ गंदगी फैली हुई है। ‘छह घंटे की बिजली कटौती शुरू हो गई है’ मोहाली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “छह घंटे की बिजली कटौती शुरू हो गई है। पिछले सात सालों से दिल्ली में एक मिनट की भी बिजली कटौती नहीं हुई। अभी बारिश का मौसम है, फिर भी बिजली कटौती हो रही है। इनकी नीयत खराब है। हर मंत्री ने अपनी दुकान खोल रखी है। इन्हें पैसा कमाना है, इन्हें सुधारों में कोई दिलचस्पी नहीं है।” ‘मुझे नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए’ उन्होंने आगे कहा, “जब तक हमारी सरकार सत्ता में थी, हमें काम नहीं करने दिया गया। इसके बावजूद हमने काम किया। मुझे लगता है कि मुझे शासन और प्रशासन के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए क्योंकि मैंने उपराज्यपाल रहते हुए दिल्ली में बहुत काम किया।” अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जून 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे। दिल्ली में रात में आठ घंटे बिजली कटौती होती थी। हमने 2013 का चुनाव बिजली आंदोलन के ज़रिए जीता था। 2013 में पहली बार सरकार बनने से पहले, मैंने पूरी दिल्ली का चक्कर लगाया और 15 दिन तक उपवास किया। एलजी की रुकावटों के बावजूद दिल्ली में किए बहुत काम- केजरीवाल नोबेल प्राइज को लेकर AAP नेता केजरीवाल के लिए कोई नॉमिनेशन फिलहाल नहीं किया गया है. फिर भी उनका कहना है, "एलजी के रहते हमने दिल्ली में इतने सारे काम कर दिए. इतनी मुश्किलों के अंदर जानकर ताज्जुब होगा कि हमने दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक बनवाए. पांच मोहल्ला क्लीनिक बीजेपी के नगर निगम ने बुल्डोजर भेजकर तोड़ दिए. जिस तरह से इन्होंने हमें परेशान किया…" केजरीवाल ने कहा, "पिछले साल जून में, जब तापमान 50 डिग्री सेल्सियस था, एक मिनट भी बिजली नहीं कटी थी, लेकिन अब बिजली कटौती हो रही है. उन्होंने (बीजेपी) दिल्ली को बर्बाद कर दिया है. वे राजनीति कर रहे हैं, और उन्हें बस पैसा कमाना है. मुझे शासन और प्रशासन के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए क्योंकि मेरी AAP सरकार ने एलजी की रुकावटों के बावजूद राजधानी में इतना काम किया है." दो साल पहले भी केजरीवाल ने जताई थी नोबेल की इच्छा दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल ने नोबेल प्राइज की अपनी इच्छा पहली बार जाहिर नहीं की है. इससे पहले भी कह चुके हैं कि वह नोबेल प्राइज के हकदार हैं. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने कहा था कि 'एलजी दिल्ली सरकार के कामों में अड़ंगा लगाते हैं और बावजूद इसके इतने सारे काम कर दिए हैं कि मुझे नोबेल प्राइज मिलना चाहिए.' क्या शासन-प्रशासन के लिए भी मिलता है नोबेल प्राइज? नोबेल प्राइज की शुरुआत 1901 में अल्फ्रेड नोबेल की याद में की गई थी. अब तक यह प्राइज अलग-अलग कैटगरी में 627 बार 1012 लोगों और संगठनों को दिया गया है. कुछ को एक से ज्यादा बार नोबेल प्राइज मिलने के साथ कुल 976 लोगों और 28 संगठनों को नोबेल प्राइज मिले हैं. फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मेडिसिन, लिट्रेचर, पीस और इकोनॉमिक साइंस जैसे छह कैटगरी में नोबेल दिए जाते हैं. मसलन, अरविंद केजरीवाल जिस कैटगरी के लिए अपनी इच्छा जाहिर कर रहे हैं उस कैटगरी में नोबेल प्राइज अब तक किसी को नहीं दिया गया है. AAP ने बिजली-पानी मुफ्त दिया आप के राष्ट्रीय संयोजक ने आगे कहा, “आम आदमी को क्या चाहिए? उसे बिजली चाहिए, उसे पानी चाहिए, उसके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। घर में कोई बीमार हो तो उसका अच्छा इलाज हो। हमने तय किया कि हम हर परिवार को 200 यूनिट बिजली मुफ़्त देंगे। हम हर परिवार को 20 हज़ार लीटर पानी मुफ़्त देंगे। हमने तय किया कि हम स्कूल और अस्पताल ठीक करेंगे।”

PM मोदी को ब्राजील का सर्वोच्च सम्मान, ‘नेशनल ऑर्डर ऑफ सदर्न क्रॉस’ मिला

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक प्रतिष्ठा में एक और तमगा जुड़ गया है। मंगलवार को ब्राजील ने पीएम मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस से सम्मानित किया है। उन्हें ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया है। ब्राजील ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुख वैश्विक प्लेटफार्मों पर भारत-ब्राजील सहयोग को बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि मई 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी को यह 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। पीएम मोदी ने अपने भव्य स्वागत और सर्वोच्च सम्मान देने के लिए ब्राजील की सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। पीएम ने कहा है कि यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व की बात है। पीएम मोदी ने कहा, “आज राष्ट्रपति जी द्वारा मुझे ब्राजील के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित किया जाना, मेरे लिए ही नहीं, 140 करोड़ भारतीयों के लिए अत्यंत गर्व और भावुकता का पल है। इसके लिए ब्राजील की सरकार और लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।” प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत इससे पहले ब्राजील में राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता से पहले प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया गया। यहां प्रधानमंत्री मोदी के औपचारिक स्वागत कार्यक्रम में 114 घुड़सवारों का दस्ता मौजूद था। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उनके स्वागत की झलकियां साझा करते हुए कहा है कि इस यात्रा से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को गति मिलेगी। उन्होंने पोस्ट में कहा,“ ब्रासीलिया में औपचारिक स्वागत की झलकियां। ब्राजील की यह राजकीय यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को गति प्रदान करेगी।” बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 57 वर्षों में ब्राजील की राजकीय यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में ब्राजील पहुंचे हैं, जहां उन्होंने सोमवार को रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लिया था। PM का हुआ भव्य स्वागत जब पीएम ब्रासीलिया पहुंचे तो वहां एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने उन कलाकारों की सराहना की जिन्होंने उनके स्वागत में पारंपरिक ब्राजीलियाई सांबा रेगे नृत्य पेश किया. साथ ही इस दौरान पीएम मोदी के सम्मान में भारतीय संस्कृति को भी पेश किया गया. दरअसल, पीएम मोदी 6-7 जुलाई को रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद ब्रासीलिया पहुंचे. इस यात्रा के दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डी सिल्वा ने पीएम मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुख वैश्विक मंचों पर भारत-ब्राजील सहयोग बढ़ाने में योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया. कई मुद्दों पर हुई द्विपक्षीय वार्ता विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य और लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित आपसी हित के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर द्विपक्षीय चर्चा की. PM ब्रिक्स समिट में हुए शामिल इसी के साथ पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट को प्रोडक्टिव बताया. पीएम ने कहा कि उन्होंने और बाकी देश के नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यापक विचार-विमर्श किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें विभिन्न देशों के साथ भारत की दोस्ती को बढ़ावा देंगी. पीएम मोदी अर्जेंटीना की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार (स्थानीय समय) को ब्राजील पहुंचे. ब्राजील के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 9 जुलाई को नामीबिया पहुंचे हैं. पीएम वहां की संसद को भी संबोधित करेंगे. उन्होंने बुधवार को घाना से पांच देशों की अपनी यात्रा शुरू की थी. घाना से प्रधानमंत्री मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो गए और फिर अर्जेंटीना और ब्राजील का दौरा किया.