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नीट 2026 परीक्षा: 21 जून को अभ्यर्थियों को मुफ्त बस यात्रा, CM ने दिए निर्देश

पटना नीट परीक्षा देने वाले दिन बिहार के छात्र-छात्राओं का बस भाड़ा नहीं लगेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीट परीक्षार्थियों के लिए सभी सरकारी बसों में मुफ्त सफर का ऐलान किया है। 21 जून को होने वाले नीट एग्जाम में शामिल होने वाले अभ्यर्थी बिना टिकट के ही बस का सफर कर सकेंगे। सीएम ने इस संबंध में सभी जिलों को निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने शुक्रवार को नीट परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा भी की। सीएम सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को नीट परीक्षा के मद्देनजर कई अहम निर्देश दिए। सभी जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। बता दें कि 21 जून को बिहार समेत देश भर में नीट परीक्षा का आयोजन होगा। पेपर एक ही पारी में एक ही दिन होगा। पूर्व में हुए पेपर लीक और धांधली से बचने के लिए इस बार प्रशासन ने सख्त तैयारियां की हैं। बिहार में 331 सेंटर पर होगा नीट एग्जाम राज्य के 35 जिलों में नीट परीक्षा के 331 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन सक्रिय है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नीट परीक्षा के आयोजन में किसी तरह की लापरवाही ना बरतें। सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। समय से तैयारियां पूरी कर ली जाएं। परीक्षा केंद्रों पर सुविधाएं जरूर रखें सम्राट चौधरी ने कहा कि नीट एग्जाम सेंटर पर परीक्षार्थियों के लिए पेयजल, शौचालय, बिजली आपूर्ति, मेडिकल सहायता और अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाए। नीट परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को यातायात की समुचित व्यवस्था मिले। सूचना तंत्र को प्रभावी बनाया जाए। ताकि उन्हें सहूलियत हो और परेशानी का सामना ना करना पड़े। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस परीक्षा के मार्क्स के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में यूजी कोर्स के लिए एडमिशन होते हैं। पिछले महीने 3 मई को नीट यूजी एग्जाम आयोजित किया गया था। मगर पेपर लीक होने और गड़बड़ी मिलने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने फिर से परीक्षा का आयोजन करने का ऐलान करते हुए तारीख 21 जून तय की। परीक्षा का समय दोपहर 2 से शाम 5.15 बजे के बीच रखा गया है। हालांकि, परीक्षार्थियों को समय से पहले ही एग्जाम सेंटर पहुंचना होगा। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए राज्य सरकार कुछ अतिरिक्त बसों का संचालन भी कर सकती है। एग्जाम देने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त सफर का ऐलान करने के बाद बिहार की सरकारी बसों में 21 जून को भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है। इससे अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पिछले महीने हुई नीट परीक्षा के पेपर लीक के तार बिहार से भी जुड़े थे। इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने पेपर लीक के मुख्य सरगना रॉकी उर्फ राकेश रंजन को दबोचा। उसके तार इस रैकेट के पुराने मास्टरमाइंड संजीव मुखिया से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा झारखंड, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से भी कई लोगों को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि 3 मई को हुई नीट परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी। परीक्षा से पहले ही कई परीक्षार्थियों के पास पेपर पहुंच गए थे। इसका सौदा लाखों रुपये में किया गया था।

सक्ति जिले के ठठारी गांव पहुंचे मुख्यमंत्री, चौपाल लगाकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत सक्ती जिले के ग्राम ठठारी के प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने चतुर्भुज तालाब पार स्थित विशाल बरगद के पेड़ की छांव में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। खुले वातावरण में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं, सुझाव प्राप्त किए तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। जनचौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि यह जानना भी है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। उन्होंने ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली, पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही अत्याधुनिक सीएम हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था होगी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ लेकर उपभोक्ता बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि  रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं तथा बस्तर में जनता के सहयोग से शांति और विकास का नया वातावरण स्थापित हुआ है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के समक्ष गांव की आवश्यकताओं, विकास कार्यों तथा विभिन्न योजनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने चतुर्भुज विष्णु मंदिर के निकट श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आरती घाट निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए ठठारी में बैंक शाखा खोलने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने ठठारी को नगर पंचायत बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने हेतु कलेक्टर को निर्देशित करते हुए कहा कि आने वाले समय में ठठारी को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य भी स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और सहभागिता को मजबूत करना है। जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी सीधे लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, तभी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। बरगद की छांव में सजी यह चौपाल ग्रामीणों के लिए एक यादगार अवसर बन गई, जहां उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिला। जनचौपाल में सांसद मती कमलेश जांगड़े, मती संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

‘शक्तिमान’ के जैकाल का स्टार किड्स पर बयान, बोले- “2-3 साल एक्टिंग सीख लो”

शक्तिमान अपने वक्त का भारत का सबसे पसंद किया जाने वाला सुपरहीरो शो है। इस शो के किरदार आज भी लोगों को याद हैं। अब शक्तिमान में डॉक्टर जैकाल का किरदार निभाने वाले एक्टर ललित परिमू ने जाह्नवी कपूर और अनन्या पांडे जैसे स्टार किड्स को एक्टिंग सीखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जब आप एक बड़े परिवार से आते हो तो सीखने का जज्बा नहीं होता है। स्टार किड्स की ट्रोलिंग पर क्या बोले शक्तिमान के जैकाल? सिद्धार्थ कनन ने एक्टर से कहा कि अक्सर जाह्नवी कपूर, अनन्या पांडे, शनाया कपूर जैसे स्टार किड्स को इसलिए ट्रोल किया जाता है कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती है। तो इन स्टार किड्स को आप क्या सलाह देंगे? एक्टर ने कहा- एक्टिंग सीख लो। अनन्या पांडे- जाह्नवी कपूर को दी एक्टिंग सीखने की सलाह उन्होंने कहा, “सीख लो एक्टिंग। थोड़ा झुक के, 2-3 साल एक्टिंग सीखने में लगा लो। लेकिन दिक्कत ये है कि अगर आप एक बड़े परिवार से हैं तो वो सीखने का जज्बा नहीं होता है। वो तब आता है जब आप में आर्थिक कमियां हों।” अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए एक्टर ललित ने कहा कि एक्टिंग को पहले दिन से किसी बिजनेस की तरह नहीं ट्रीट किया जा सकता है, एक आखिरकार एक आर्ट फॉर्म है। लोग अपने सोशल मीडिया, फैशन या फिजिकल अपीरियंस के जरिए स्पॉटलाइट में रह सकते हैं, लेकिन एक एक्टर को एक आर्टिस्ट को अपने अंदर से बनाना पड़ता है। नए एक्टर्स की फिल्में नहीं देखते ललित परिमू ललित परिमू ने ये भी माना कि वो आज के एक्टर्स का काम नहीं देखते हैं, वो आज भी क्लासिक बॉलीवुड जैसे कि राजेश खन्ना और दिलीप कुमार की फिल्में देखते हैं। अर्जुन कपूर की ट्रोलिंग पर क्या बोले ललित परिमू? ललित अर्जुन कपूर के साथ फिल्म मुबारकां में नजर आए थे। उस फिल्म की रिलीज के बाद अर्जुन कपूर को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। ललित से अर्जुन की ट्रोलिंग को लेकर भी सवाल हुआ। उन्होंने कहा, "ये लोग खुशनसीब हैं कि ऐसे परिवार से आते हैं और एक्टर्स बन गए हैं। लेकिन ये बहुत दुख की बात है। कह नहीं सकता कि इन लोगों को बिल्कुल ही एक्टिंग नहीं आती। ये कहना न्यायसंगत नहीं होगा। ये लोग एक्टिंग कर रहे हैं और लोग अपनी जर्नी और अनुभवों से ही सीखते हैं। हमारे संजय दत्त साहब और अभिषेक बच्चन भी इस जर्नी से गुजरे हैं और समय के साथ बेहतर हुए हैं।

संस्कृत शिक्षा व्यवस्था में सुधार की तैयारी, संचालन के लिए जल्द आएगी SOP

पटना. प्रदेश के संस्कृत स्कूलों के संचालन को ले शिक्षा विभाग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहा है। संस्कृत विद्यालय अब एसओपी के माध्यम से ही संचालित होंगे। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने संस्कृत शिक्षा बोर्ड के दफ्तर को इंटर मीडिएट कांउसिल भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। संस्कृत स्कूलों को ले बन रहे एसओपी के बारे में मिली जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था की जा रही कि सब कुछ डिजिटल मोड में उपलब्ध हो। अभी संस्कृत स्कूलों के बारे में एक जगह सभी जानकारी नहीं है। आसानी से मिलेगी जानकारी कुछ सूचनाएं संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पास है और कुछ सचिवालय में। एसओपी के तहत अब संस्कृत स्कूलों को कितना अनुदान मिला और विद्यालय का संचालन कहां हो रहा यह जानकारी सहजता से मिल सकेगी। अभी यह मालूम करने में परेशानी है कि संस्कृत स्कूल बीच में ही कहां-कहां बंद हो गए। जो राजकीय संस्कृत संचालित हो रहे थे उनमें बहुतों के बंद होने की सूचना विभाग को मिलती रहती है पर विभाग के पास इसका विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं रहता। जो एसओपी बनाया जा रहा उसके हिस्से में यह जानकारी भी रहेगी कि कितने संस्कृत विद्यालय सही तरीके से संचालित हो रहे। एसओपी के माध्यम से यह गाइडलाइन उपलब्ध कराया जाएगा कि कब किस विद्यालय को अनुदान मिलना है। संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी इसके माध्यम से नियमित की जाएगी। जिस संस्कृत विद्यालय में शिक्षकों की संख्या छात्रों के लिहाज से काफी कम है वहां आने वाले समय में नियुक्ति की प्रक्रिया भी आरंभ होगी। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई तक एसओपी के आने की उम्मीद है।  

आठ नगर निगमों को मिलेंगे नए मेयर, 7 पद सामान्य और मोगा सीट आरक्षित घोषित

मोगा. पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों के बाद अब मेयर पदों के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। स्थानीय निकाय विभाग ने आठ नगर निगमों में मेयर पदों के आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार मोगा नगर निगम में मेयर का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि शेष सात नगर निगमों में मेयर पद सामान्य श्रेणी के लिए खुले रहेंगे। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि 26 मई 2026 को अबोहर, बटाला, बरनाला, बठिंडा, कपूरथला, मोगा, पठानकोट और साहिबजादा अजीत सिंह नगर नगर निगमों के आम चुनाव संपन्न हुए थे। चुनाव परिणाम आने के बाद अब मेयर पदों के आरक्षण और चुनाव संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2017 में लागू किए गए मेयर पदों के आरक्षण संबंधी नियमों के तहत निर्धारित रोस्टर प्रणाली के अनुसार मोगा नगर निगम का मेयर पद पिछड़े वर्ग (BC) के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा अबोहर, बटाला, बरनाला, बठिंडा, कपूरथला, पठानकोट और साहिबजादा अजीत सिंह नगर में मेयर पद सामान्य श्रेणी के लिए उपलब्ध रहेगा। मंडलायुक्तों को भेजे गए आदेश इस संबंध में जालंधर, फिरोजपुर, पटियाला, रूपनगर और फरीदकोट के मंडलायुक्तों को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि नगर निगमों के नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के बाद मेयर चुनाव के लिए बैठक बुलाई जाए और चुनाव प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न कराई जाए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां मेयर पद आरक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित किया गया है, वहां संबंधित श्रेणी के पात्र सदस्य को ही मेयर चुना जाना सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अंतर्गत राज्यभर में पहले ही दिन 6 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा

अहमदाबाद विश्व पर्यावरण दिवस’ पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी से प्रेरित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ होगया। गांधीनगर से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के करकमलों से राज्यव्यापी अभियान का आरंभ किया गया । गांधीनगर के ‘ज’ रोड पर लोकभवन स्टाफ क्वार्टर्स के पास 0.5 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘वन कवच’ पद्धति से लगभग 5,000 पौधों का रोपण कर यह राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया । उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2024 में नई दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का शुभारंभ किया गया था। वन विभाग के अनुसार वन एवं पर्यावरण मंत्री  अर्जुन मोढवाडिया तथा राज्य मंत्री  प्रवीण माळी के मार्गदर्शन में समग्र राज्य में इस अभियान को गतिमान बनाया जाएगा। पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता बायोडायवर्सिटी के संरक्षण के लिए गांधीनगर में 57 स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। जो कि त्रि- स्तरीय होगा। जिसमें 16 प्रजातियों के 20 प्रतिशत उच्च स्तरीय पौधें, 25 प्रजातियों के 50 प्रतिशत मध्यम स्तरीय तथा विभिन्न 16 प्रजातियों के 30 प्रतिशत निम्न स्तरीय पौधों का समावेश होगा। इस वन कवच माइक्रो फॉरेस्ट की विशेषता यह है कि यह बहुत कम स्थान में अत्यंत सघन तथा तेजी से विकसित होने वाला शहरी जंगल तैयार करता है। इसके अतिरिक्त; वन विभाग के अनुसार इस अभियान अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री तथा गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श् अमित शाह के लोकसभा क्षेत्र को ‘हरियाली लोकसभा’ बनाने के लिए वन विभाग द्वारा लगभग 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 50 लाख से अधिक पौधे लगाकर ‘वन कवच – माइक्रो फॉरेस्ट’ तैयार किया जाएगा। ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ से शुरू कर आगामी सप्ताह तक वन विभाग द्वारा पूरे गुजरात को कवर करने वाले विभिन्न जन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जो कि इस प्रकार हैं : राज्यभर में ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर कुल 50 हजार ‘समूह स्तर’ निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक समूह द्वारा 12 पौधों का रोपण किया जाएगा और एक ही दिन में पूरे राज्य में 6 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। इस सप्ताह के दौरान प्रत्येक जिला स्तर पर मुख्य चार कार्यक्रम तथा सभी 265 तहसीलों को विधानसभा क्षेत्र में महानुभावों की अध्यक्षता में सघन पौधो का रोपण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सप्ताह के दौरान 265 तहसील स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से 1.53 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा तथा 1.87 लाख से अधिक पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। साथ ही तहसीलों में 861 निर्धारित स्थलों पर वन विभाग के मार्गदर्शन में अतिरिक्त 4.15 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग ने राज्य के प्रत्येक नागरिक, सामाजिक संस्थाओं तथा युवाओं से अपनी माता के नाम पर कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसके संरक्षण करने के लिए अनुरोध किया है।

हादसों पर रोक की तैयारी, 3814 खतरनाक भवनों को गिराने की कवायद तेज

भिलाई नगर. मानसून 15 जून से दस्तक देने वाला है और शहर के गरीबों के लिए 10-15 साल पहले बने 3814 आवास मौत का साया बन गए हैं। आईएचएसडीपी, वाम्बे, अटल व रैश्ने योजना के आवास अब जर्जर हो चुके हैं। कहीं सीढ़ी धंस गई, कहीं बालकनी – छज्जा टूट कर गिर रहे हैं, तो कहीं दीवारों से सरिए बाहर झांक रहे हैं। आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने सर्वे किया। रिपोर्ट में कई मकानों को रहने लायक नहीं, खंडहर की स्थिति बताया है। इसके बाद निगम ने हितग्राहियों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। पीएम आवास योजना के नोडल अधिकारी ने बताया कि इन जर्जर मकानों को तोड़कर जी प्लस 2 स्तर की बहुमंजिला बिल्डिंग बनाई जाएगी। अभी जहां 12 परिवार रहते हैं, वहां नई बिल्डिंग में 18 से ज्यादा परिवार शिफ्ट हो सकेंगे। निगम अधिकारियों ने हितग्राहियों से पीएम आवास में शिफ्ट होने की अपील की है।

शाला प्रवेशोत्सव से पहले प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकें पहुँचाने के लिए प्रशासन सजग: पावरा

अहमदाबाद  गुजरात राज्य शाला पाठ्यपुस्तक मंडल के कार्यवाहक अध्यक्ष  मनुभाई पावरा ने कहा है कि मुख्यमंत्री  भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन औरे शिक्षा मंत्री  प्रद्युमन वाजा तथा शिक्षा राज्य मंत्री मती रिवाबा जाडेजा के नेतृत्व में पाठ्यपुस्तक वितरण का कार्य चल रहा है। गुजरात बोर्ड से संबद्ध प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तक के सभी माध्यमों की पाठ्यपुस्तकों को निर्धारित समयसीमा में विद्यार्थियों तक पहुँचाने के लिए मंडल द्वारा युद्धस्तर पर एवं सुदृढ़ आयोजन के साथ कार्य शुरू किया गया है।  मनुभाई ने अधिक विस्तार से जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि चालू शैक्षणिक वर्ष में विद्यार्थियों के हित में कुछ नूतन विषयों को जोड़कर पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया समय पर प्रारंभ कर दी गई थी, लेकिन कुछ अनिवार्य न्यायिक प्रक्रियाओं – कोर्ट केस तथा ईरान सहित अन्य देशों के बीच उत्पन्न हुई वैश्विक युद्ध की विषम स्थिति के कारण कागज के आयात में लगभग ढाई से तीन महीनों का आकस्मिक विलंब हुआ था। हालाँकि; मंडल की समग्र टीम सभी अंतरराष्ट्रीय एवं कानूनी अवरोधों को पार कर विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य जरा भी प्रभावित न हो; इसके लिए हाल में दिन-रात पुरजोर तरीके से प्रिंटिंग कार्य कर रही है। अध्यक्ष  पावरा ने राज्य के नागरिकों तथा अभिभावकों को विश्वास दिलाया कि इन सभी आकस्मिक वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पुस्तकों के मूल्य में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है और अभिभावकों पर एक भी रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने नहीं दिया जाएगा। पुस्तक वितरण की वर्तमान स्थिति तथा आगामी सुदृढ़ आयोजन की रूपरेखा देते हुए अध्यक्ष  मनुभाई ने जोड़ा कि राज्य के निजी एवं नॉन-ग्रांटेड विद्यालयों के लिए शुल्कयुक्त पुस्तकें वितरकों तक समय पर पहुँचा दी गई हैं, जो वर्तमान में विद्यार्थियों को उपलब्ध भी हो चुकी हैं, जबकि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के सभी विद्यार्थियों को आगामी 'शाला प्रवेशोत्सव' से पूर्व ही सभी पाठ्यपुस्तकें तहसील स्तर तक पूर्ण रूप से निःशुल्क मिल जाएँ; ऐसी माइक्रो-प्लानिंग प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त; सरकारी तथा ग्रांटेड माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में भी पुस्तकें अत्यंत तेजी से पहुँचाने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियाँ तत्परता से कार्य कर रही हैं। अभिभावकों और विद्यार्थियों को पूर्ण रूप से आश्वस्त करते हुए अध्यक्ष  मनुभाई ने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों अथवा सुदूरवर्ती-रिमोट क्षेत्रों में आकस्मिक परिस्थितिवश यदि भौतिक रूप से (फिजिकली) पुस्तक पहुँचने में थोड़ा भी विलंब हो, तो भी विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य कहीं अवरुद्ध न हो; इसके लिए मंडल ने अत्याधुनिक 'डिजिटल बैकअप' की अग्रिम व्यवस्था की है। मंडल की आधिकारिक वेबसाइट  https://gsstb.gujarat.gov.in/gsstb/Textbook पर सभी माध्यमों की पाठ्यपुस्तकें डिजिटल रूप में – ई-पुस्तकों (e-Books) के रूप में अपलोड कर दी गई हैं। शैक्षणिक सत्र के प्रारंभिक चरण में शिक्षक तथा विद्यार्थी बिना किसी कठिनाई के वेबसाइट से सीधे ही प्रकरणों को डाउनलोड कर सकेंगे। इसके साथ ही; शिक्षक भी इनका संदर्भ के रूप में उपयोग कर बच्चों को पढ़ा सकेंगे। पाठ्यपुस्तक मंडल के अध्यक्ष  मनुभाई पावरा ने कहा कि राज्य सरकार तथा पाठ्यपुस्तक मंडल हर विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य और शैक्षणिक हित के प्रति अत्यंत संवेदनशील एवं गंभीर है और किसी भी विषम स्थिति में भी अंतिम छोर के बच्चे तक शिक्षा की सुविधा पहुँचाने के लिए हम कटिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 के डिजिटल प्लेटफार्म और वेबसाइट का किया शुभारंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तेजी से भारत के नए वैश्विक निवेश एवं निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है। हमारा मध्यप्रदेश अब वैश्विक व्यापार जगत में भी अपनी सशक्त पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तथा लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के बीच बढ़ती परस्पर आर्थिक साझेदारी में मध्यप्रदेश भी अपनी अधिकतम क्षमताओं के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश असीम अवसरों की धरती है। प्रदेश की स्थिर और पारदर्शी नीतियां निवेश और उद्योग फ्रेंडली हैं। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, फार्मा इंडस्ट्री, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, डिफेंस सेक्टर, और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में हम तेजी से प्रगति कर रहे हैं। हमारे पास 1.25 लाख एकड़ से अधिक का रेडी-टू-यूज़ लैंड बैंक उपलब्ध है। आज मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा हब बन चुका है। प्रदेश में 5 लाख किमी से अधिक के सुदृढ़ सड़क नेटवर्क और अत्याधुनिक रेल व हवाई कनेक्टिविटी ने यातायात को सुगम बना दिया है। अगले 5 सालों में हम 6 प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करेंगे, जो मालवा से बुंदेलखंड और निमाड़ से विंध्य तक रोड़ कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लैटिन-अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के व्यापार प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश में निवेश, उत्पादन और नवाचार के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि हम आपके साथ एक ठोस और दीर्घकालिक साझेदारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण व्यापार-व्यवसाय के लिए सबसे अनुकूल स्थान है। राज्य में कानून- व्यवस्था की कोई परेशानी नहीं है। यहां औद्योगिक कुशल श्रमिकों की कोई कमी नहीं है। मध्यप्रदेश सबको अपनाने वाला राज्य है, जो एक बार आता है, यहीं का होकर रह जाता है। मध्यप्रदेश में खुले दिल से निवेश करें, यहां निवेश करना बड़े लाभ का सौदा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन व्यापार एवं निवेश मंच – 2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर इस ट्रेड फोरम के उद्घाटन सत्र का विधिवत् आरंभ किया।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए डिजिटल प्लेटफार्म और वेबसाइट का रिमोट से शुभारंभ किया।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन देशों के साझा व्यापार-व्यवसाय पर केन्द्रित स्पेशल मैगजीन 'द बिजनेस टायकून्स' का विमोचन भी किया।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत वित्त वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश का लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों को निर्यात बढ़कर 3 हज़ार 835 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र की विशेष भूमिका रही है।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक उत्पाद एवं जंबो बैग, कृषि आधारित उत्पाद तथा विनिर्माण क्षेत्र प्रदेश की निर्यात क्षमता के प्रमुख आधार बनकर उभरे हैं। ब्राजील, मेक्सिको, चिली, डोमिनिकन रिपब्लिक, अर्जेंटीना, पेरू और कोलंबिया जैसे देशों के साथ मध्यप्रदेश का व्यापारिक विनिमय लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।     मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आंकड़े लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों में ‘मेड इन इंडिया’ के साथ ‘मेड इन एमपी’ उत्पादों को मिल रहे स्नेह, अपनत्व, विश्वास और दिनों-दिन बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने सुशासन और नेतृत्व क्षमता के बल पर मालवा को नई पहचान दिलवाई थी। उन्होंने कहा कि इंदौर प्राचीन काल में भी उन्नत व्यापार और व्यवसाय की सुगमता के कारण बड़ा व्यावसायिक केन्द्र हुआ करता था। पहले यहां सिल्क मार्ग से दुनियाभर में व्यापार होता था। भारत और लैटिन अमेरिका की परंपराओं में नजदीकियां दिखाई पड़ती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज भारत के सबसे तेज़ी से विकसित होते औद्योगिक राज्यों में से एक है। हम सच्चे अर्थों में ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति अब ‘लोकल से ग्लोबल’ हो रही है। अब हम वैश्विक मूल्य श्रृंखला का भी एक मजबूत हिस्सा बन चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस तरह लैटिन अमेरिका की प्राचीन संस्कृतियों ने मदर अर्थ (Pachamama – पचमामा) को पूजा, वैसे ही हम पंच तत्वों और प्रकृति के कण-कण को पूजते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे उत्सवों का उल्लास, संगीत, अनुराग, पारिवारिक ताना-बाना और हमारी जनजातीय कलाओं की जीवंतता सबमें बड़ी समानताएं हैं। यह बताते हैं कि हमारे जीवन मूल्य और हमारे संस्कार मूलत: एक हैं, समान हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के अमृतकाल में हमारा भारत अपनी क्षमता, योग्यता और विशेषताओं के साथ दुनियाभर में व्यापार, व्यवसाय और सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए कटिबद्ध है।     भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच सहयोग के इस महान मंच की मेजबानी का अवसर मध्यप्रदेश को मिला है। आज हम सिर्फ़ देशों को नहीं, महाद्वीपों को जोड़ने वाली दीर्घकालिक साझेदारियों की नींव रख रहे हैं। यह मंच भारत, लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के बीच नई आर्थिक साझेदारी, नई संभावनाओं और नए विश्वास का सेतु है। भारत का हरेक राज्य अपनी क्षमताओं और विशेषताओं के साथ विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि में तत्पर है। मध्यप्रदेश भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर और पीथमपुर का विशेष ज़िक्र करते हुए कहा कि ये दोनों ही क्षेत्र आज फार्मास्यूटिकल्स का ग्लोबल हब बन चुके हैं। यहां निर्मित दवाएं ब्राजील, पेरू और चिली जैसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रही हैं, जिससे प्रदेश की औद्योगिक क्षमता और गुणवत्ता को वैश्विक मान्यता मिल रही है। ब्राजील की औद्योगिक जरूरतों के लिए मध्यप्रदेश सबसे भरोसेमंद और सप्लाई चेन पार्टनर की भूमिका निभा सकता है। पेरू के साथ इंजीनियरिंग मशीनों की सप्लाई के लिए मध्यप्रदेश एक भरोसेमंद पार्टनर बन सकता है। हम क्यूबा के विश्व प्रसिद्ध बायोटेक एवं फार्मा अनुसंधान के साथ मिलकर चिकित्सा क्षेत्र में नए नवाचार करने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। ब्राज़ील, मेक्सिको, चिली, डोमिनिकन रिपब्लिक, अर्जेंटीना, पेरू और कोलंबिया के साथ मध्यप्रदेश का निरंतर बढ़ता व्यापार … Read more

उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियां तेज, नमामि गंगे मिशन और विकास परियोजनाओं की होगी कड़ी परीक्षा

उज्जैन तीन साल की लंबी प्रतीक्षा और कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने वाले ''नमामी गंगे मिशन'' को केंद्र सरकार से हरी झंडी तो मिल गई है, लेकिन अब प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने इससे भी बड़ी अग्निपरीक्षा शुरू होने जा रही है। गाजियाबाद (उत्तरप्रदेश) की ‘सोमवंशी एनवायरो फर्म’ को 81 करोड़ रुपये का टेंडर मंजूर होने के बाद, अब सबसे बड़ा संकट सिंहस्थ-2028 की समय-सीमा के भीतर इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने का है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक, इस पूरी परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय निर्धारित है। लेकिन तकनीकी और वित्तीय उलझनों के कारण जो परियोजना दो साल पहले शुरू हो जानी थी, उसमें तीन साल की भारी देरी हो चुकी है। इस लेती-लतीफी के कारण अब प्रशासन के पास समय बहुत कम बचा है। वर्तमान में उज्जैन शहर के भीतर सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर सड़क चौड़ीकरण, नए घाटों का निर्माण, पुल, सीवरेज नेटवर्क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दर्जनों विकास कार्य एक साथ समानांतर रूप से चल रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग निर्माण एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय बैठाना और बिना किसी बाधा के समयबद्ध तरीके से काम को अंजाम देना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। यदि इस बार भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ, तो सिंहस्थ से पहले शिप्रा शुद्धिकरण का मुख्य लक्ष्य सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। एमआईसी कब करेगी मंजूर केंद्र सरकार ने तो ठेकेदार तय करने को स्वीकृति दे दी मगर एमआइसी यानी महापौर परिषद से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। ये स्वीकृति कब मिलेगी, स्वीकृति उपरांत कार्य आदेश कब जारी होगा, कब भूमि पूजन होगा, ये अभी तय नहीं हो सका है। 92.78 करोड़ की थी प्रशासनिक स्वीकृति, 81 करोड़ में हुआ टेंडर लॉक शिप्रा नदी में मिलने वाले भैरवगढ़ और पीलियाखाल क्षेत्र के दूषित पानी को रोकने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 24 मई 2023 को ही 92 करोड़ 78 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दे दी थी। जून 2023 में महापौर परिषद (एमआइसी) से हरी झंडी मिलने के बाद चार फर्मों ने निविदा में भाग लिया, लेकिन कड़ी परीक्षण प्रक्रिया के चलते पूर्व के सभी प्रस्ताव निरस्त करने पड़े। इसके बाद इसी साल फरवरी में संशोधित दरों के साथ फिर से टेंडर बुलाए गए, जिसमें अब गाजियाबाद की कंपनी का चयन किया गया है। पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग और 15 साल का मेंटेनेंस इस हाईटेक परियोजना के तहत पीलियाखाल क्षेत्र में 22.06 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और भैरवगढ़ क्षेत्र में 2.38 एमएलडी क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा। बता दे कि अभी भैरवगढ़ क्षेत्र में बाटिक प्रिंट इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे शिप्रा में मिलता है, प्लांट लगने के बाद नहीं मिलेगा। योजना अनुसार दो सीवेज पंपिंग स्टेशन, दो एफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन, 1420 मीटर राइजिंग मेन और 3500 मीटर एफ्लुएंट पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जल की शुद्धता की रियल-टाइम जांच के लिए अत्याधुनिक पीएलसी-स्काडा आधारित मानिटरिंग सिस्टम लगेगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए यह प्लांट सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं से लैस होगा। खास बात यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी ही अगले 15 वर्षों तक इसके संचालन और रख-रखाव का पूरा जिम्मा संभालेगी। सिंहस्थ-2028 के लिहाज से क्या बदलेगा नालों पर रोक: भैरवगढ़ की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों और पीलियाखाल का गंदा पानी अब सीधे शिप्रा नदी में नहीं मिलेगा। शुद्ध जल: सीवेज का पूर्ण उपचार होने से नदी की जल गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा। आस्था का सम्मान: सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आचमन और स्नान के लिए स्वच्छ व अविरल शिप्रा जल मिल सकेगा।