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सोना-चांदी बाजार में बड़ी गिरावट, चांदी में ₹16 हजार से ज्यादा की टूट; अमेरिका बना वजह

नई दिल्‍ली सोना और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान भारी गिरावट आई है. चांदी एक ही झटके में 16,600 रुपये तक टूट चुकी है, जबकि सोने की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है. शु्क्रवार को रात 11.30 बजे कमोडिटी मार्केट के बंद होने तक चांदी के भाव 16,000 से ज्‍यादा टूट चुके थे, जबकि सोने के दाम में भी करीब 4000 रुपये तक की गिरावट आई थी।   सोने और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान इतनी भारी गिरावट सिर्फ अमेरिका की वजह से आई है. MCX पर दाम तेजी से गिरने के बाद सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी के भाव में गिरावट आई है. दिल्‍ली से लेकर मुंबई तक सोने-चांदी सस्‍ते हो चुके हैं।  MCX पर सोने-चांदी की कीमत  मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने के भाव में 3947 रुपये गिरकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी की कीमत 16,595 रुपये गिरकर 2,48,201 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. सोने-चांदी के भाव में ये गिरावट अमेरकी-ईरान तनाव और फेड रेट बढ़ोतरी की आशंका के बीच आया है।  क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में आई ये गिरावट?  इंटरनेशलन मार्केट में सोना 3.4 फीसदी तक गिर गया है. अमेरिका में जॉब डाटा अनुमान से बेहतर डेटा आया है. इसका असर बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर पड़ा है. दोनों में तेजी देखी जा रही है, जिससे सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट रही है.  वहीं अमेरिका फेडरल बैंक इस साल इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका-ईरान में लड़ाई से कच्‍चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. इससे मंहगाई बढ़ने का खतरा बन गया है. यह भी सोने-चांदी में गिरावट की बड़ी वज है।  इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी के भाव  अमेरिका में 5 जून को स्पॉट गोल्ड 3.2 फीसदी गिरकर 4,330.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं सिल्वर 7.1 फीसदी गिरकर 68.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. भारत में सोना 2 फीसदी और चांदी करीब 7 फीसदी टूटी है।   आपके शहर में सोने की कीमत      दिल्‍ली में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,43,860 रुपये है.      चेन्‍नई में 22 कैरेट गोल्‍ड प्राइस 1,45,525 रुपये है.      मुंबई में 22 कैरेट सोने के दाम  ₹1,42,752 है.      बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,43,22 रुपये है.  17 जून को होगी फेड की बैठक  जानकारों का कहना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिंसंबर ट्रेडर्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है.अक्‍टूबर में यह बढ़ोतरी 60 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद दिख रही है. हालांकि, जॉबा डेटा आने से पहले उम्‍मीद थी कि कम से कम इस साल तो इंटरेस्‍ट नहीं बढ़ सकता है. फेड के अधिकारियों की बैठक 16-17 जून को होने वाली है. इस बैठक की अध्यक्षता नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श करेंगे. इस बैठक के बाद फैसले का ऐलान किया जाएगा।  (नोट- सोने-चांदी में किसी भी तरह की खरीदारी से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

साव ने दिए निर्देश : निर्माणाधीन सड़कों और पुलों की वजह से बरसात में लोगों को आवाजाही में न हो परेशानी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर प्रवास का दूसरा दिन : मिशन अमृत, राष्ट्रीय राजमार्ग और तालाब सौंदर्यीकरण कार्यों का किया निरीक्षण साव ने दिए निर्देश : निर्माणाधीन सड़कों और पुलों की वजह से बरसात में लोगों को आवाजाही में न हो परेशानी  रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने चार दिवसीय बस्तर प्रवास के दूसरे दिन आज कोण्डागांव में विभिन्न विकास एवं अधोसंरचना निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की जानकारी की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखते हुए सभी कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने कोंडागांव नगर पालिका में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत निर्माणाधीन जल प्रदाय योजना के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रगतिरत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का जायजा लेकर परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को ठेकेदार के साथ बेहतर समन्वय बनाकर निर्माण कार्य की बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाने को कहा। उन्होंने गुणवत्ता और समय-सीमा का  विशेष ध्यान रखने को कहा। केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 योजना के तहत कोण्डागांव में पेयजल आपूर्ति के लिए 9 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत कोण्डागांव से 25 किलोमीटर दूर कोसारटेडा बांध से पानी लाकर उसका शोधन कर नल कनेक्शनों के माध्यम से घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। योजना के तहत दो ओवरहेड टैंकों का भी निर्माण किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कोपाबेड़ा में 3 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे तालाब सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कोपाबेड़ा से शिव मंदिर तक निर्माणाधीन सड़क चौड़ीकरण कार्य का भी जायजा लिया। लगभग 2.9 किलोमीटर लंबी यह सड़क 4 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से निर्मित की जा रही है। उप मुख्यमंत्री साव ने निर्माणाधीन कोण्डागांव-नारायणपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-130डी के कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी से सड़क के साथ ही इस मार्ग में बनने वाले पुल-पुलियों के निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने इस प्रगतिरत सड़क के कारण बरसात में लोगों को आवाजाही में कोई समस्या न हो, इसका खास ध्यान रखने को कहा।  साव ने कोंडागांव के चिखलपुट्टी में नवनिर्मित बस स्टैंड का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को यहां यात्री सुविधाओं के विस्तार तथा बस स्टैंड के समुचित संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना, नगर पालिका के अध्यक्ष नरपति पटेल और उपाध्यक्ष जसकेतू उसेंडी सहित लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे।

“राम नाम पर पहले पाबंदी थी” – गोंडा में विपक्ष पर जमकर बरसे सीएम योगी

गोंडा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोंडा को 515.6 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उपहार दिया। उन्होंने इस मौके पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले यहां पर भगवान श्रीराम का नाम लेने पर प्रतिबंध था। भगवान का नाम लेने वाले श्रद्धालुओं पर डंडे बरसते थे। अब ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब अगर कोई उत्सव के रंग में भंग डालने का काम करेगा तो उसका भविष्य स्वाहा हो जाएगा। सीएम योगी ने गोंडा में परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद जनसभा को संबोधित किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद गोंडा का विकास तुष्टीकरण, अराजकता, भाई-भतीजावाद और जातिवाद की भेंट चढ़ गया था। उसी का खामियाजा गोंडा को भुगतना पढ़ा। जहां सरयू मैया की असीम कृपा रहनी चाहिए थी। जहां फसले लहलहाते हुए देश के पेट को भरने का कार्य करती। वह जनपद पिछड़ता गया। सीएम योगी ने कहा कि महाराज सुहेलदेव हमारे लिए प्रेरणा है। आक्रांताओं को दहलाने वाला शौर्य कैसा होना चाहिए, महाराज सुहेलदेव उसके प्रतीक हैं। विदेशी आक्रांताओं के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए, विदेशी आक्रांताओं का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए इसकी प्रेरणा महराज सुहेलदेव ने हम सबको एक हजार वर्ष पहले दी थी। देश की आजादी में कैसे त्याग और बलिदान होना चाहिए गोंडा उसका प्रतीक है। आज गोंडा के पास अपना इंजीनियरिंग और एग्रीकल्चर कॉलेज है। कम्पोजिट विद्यालय और अस्पताल बन रहे हैं। गोंडा में जहां जो चाहिए वो विकास किया जा रहा है। विकास के कार्य, गरीब कल्याणकारी कार्य, विरासत से जुड़े हुए कार्य, नौजवानों के लिए नौकरी और निवेश के माध्यम से रोजगार हो। यह तब संभव हो पा रहा है, जब आपने कमल का बटन दबाया। अच्छी सरकार चुनोगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। सीएम योगी ने कहा कि अब तो श्री अयोध्या धाम में राम भक्त के अलावा कोई 'रामद्रोही' घुस ही नहीं सकता है। ऐसी व्यवस्था कर दी गई है। आज अयोध्या चमक रही है। एक नई अयोध्या का मॉडल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि 2015-16 में भी दुर्गा पूजा के समय गोंडा में दंगे का प्रयास किया गया था। मां दुर्गा की पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन नहीं किया जाता था। उत्सव के पहले उपद्रव होता था। उन्होंने कहा कि बेटी सुरक्षित नहीं। व्यापारी सुरक्षित नहीं। और सत्ता में बैठे लोग 2017 के पहले इन दंगाई और पेशेवर गुंडो के सामने नतमस्तक होते थे। प्रदेश में कर्फ्यू रहता था। अब उत्सव के रंग में किसी ने भंग डालने का काम किया तो उसका वर्तमान तो जाएगा ही, उसका भविष्य भी स्वाहा हो जाएगा। 500 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है। अब उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और कोई भी अपराधियों के रंग में भंग नहीं डाल सकता। अयोध्या में अब रामभक्तों के अलावा कोई रामद्रोही कदम भी नहीं रख सकता।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व: शावकों संग बाघिन रिद्धि का खूबसूरत वीडियो हुआ वायरल

 रणथंभौर राजस्थान के सबसे बड़े और मशहूर रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) से एक बेहद ही मनमोहक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो ने वन्यजीव प्रेमियों का दिल जीत लिया है. 'बाघों की नर्सरी' कहे जाने वाले इस रिजर्व में बाघिन टी-124 (RBT-124 Riddhi) अपने शावकों पर मां का प्यार लुटाती और उनकी नटखट अठखेलियों का आनंद लेती नजर आ रही है. वायरल वीडियो में क्या दिखा? 40 सेकंड के इस वीडियो में बाघिन रिद्धि जमीन पर आराम से लेटी हुई अपने दो शावकों को दूध पिलाती नजर आ रही है. तभी पीछे झाड़ियों में से एक और नन्हा शावक अठखेलियां करता हुआ निकलता है और सीधे अपनी मां के पेट पर आकर खड़ा हो जाता है. जब वह नटखट शावक नीचे उतरता है, तो बाघिन अपनी एक टांग हवा में उठाकर उसे भी दूध पीने का इशारा करती है. मां का इशारा पाते ही वह शावक भी अपने बाकी भाई-बहनों के साथ दूध पीने में मग्न हो जाता है. डीएफओ का अंदेशा हुआ सच इससे पहले रणथंभौर के नाल घाटी वन क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त के दौरान बाघिन रिद्धि को सिर्फ एक नन्हें शावक के साथ देखा गया था. तब उस शावक की उम्र करीब 2 से 3 महीने आंकी गई थी. रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने उस वक्त बताया था कि अभी बाघिन के साथ एक ही शावक नजर आया है, लेकिन संभवतया उसने और भी शावकों को जन्म दिया होगा. इस नए वायरल वीडियो ने वन विभाग के उस अंदेशे पर मुहर लगा दी है. शावकों को सुरक्षित और अठखेलियां करते देखना बाघ संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी सफलता है. बाघिन रिद्धि और उसके शावकों को किसी तरह का व्यवधान न हो, इसके लिए वन विभाग द्वारा नाल घाटी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. वन विभाग की टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. रणथंभौर में कुल कितने बाघ हैं? रणथंभौर में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या वन प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक सुखद अहसास है. यहां के बाघों की वजह से न सिर्फ रणथंभौर बल्कि प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व भी आबाद हो रहे हैं. रणथंभौर में बाघों का वर्तमान कुनबा 77 तक पहुंच चुका है. इसमें 25 बाघ हैं, 23 बाघिन और 29 शावक हैं.

चीनी एक्टर जिन जे का 33 साल की उम्र में निधन, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में शोक

 चीनी एक्टर जिन जे का 33 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उनकी टैलेंट एजेंसी, शेंगशी गुआंगनियन कल्चर कंपनी लिमिटेड ने आज 6 जून को इस दुखद खबर की पुष्टि की। एजेंसी के मुताबिक जिन जे का निधन 4 जून को चीन के हांग्जो में उनके घर पर हुआ। हालांकि मौत की वजह के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। एजेंसी का बयान एजेंसी ने एक सार्वजनिक बयान में इस दुखद खबर की आधिकारिक पुष्टि करते हुए लिखा, 'हम बहुत दुख के साथ यह एलान कर रहे हैं कि हमारे साथ काम करने वाले एक्टर जिन जे (झांग जियावेई) का 4 जून, 2026 को हांग्जो में उनके घर पर निधन हो गया।' कंपनी ने उन्हें एक बेहतरीन युवा एक्टर और मॉडल बताते हुए उनके परिवार और करीबियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। एजेंसी ने की गुजारिश ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी ने इस कठिन समय में परिवार की निजता का सम्मान करने की भी अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स और न्यूज आउटलेट्स से गुजारिश की कि वे बिना पुष्टि वाली अफवाहें न फैलाएं। न ही ऑनलाइन अटकलें लगाएं, ताकि उनके करीबी लोग शांति से उनके अंतिम संस्कार की तैयारियों पर पूरा ध्यान दे सकें। फैंस और साथी हुए दुखी जिन जे के अचानक निधन की खबर चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गई। इस दुखद घटना के बाद, फैंस और साथी एक्टर्स की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। सभी उन्हें एक समर्पित, मेहनती कलाकार, सच्चे, मिलनसार और विनम्र व्यक्ति के रूप में याद कर रहे हैं।      जिन जे का करियर 30 जनवरी 1993 को शेडोंग प्रांत के वेइहाई में जन्मे जिन जे ने सबसे पहले एक फैशन मॉडल के तौर पर पहचान बनाई। बाद में उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और मेनस्ट्रीम टीवी सीरीज के साथ-साथ कामयाबी हासिल की। उन्होंने 'हेलो जोआन', 'फॉरगेट यू रिमेंबर लव', 'बिगन अगेन', 'लीगली रोमांस', 'ब्यूटी रीबॉर्न' और 'डोंट नेगोशिएट विद योर बॉस' जैसे कई रोमांटिक शो में अपने काम से दर्शकों का दिल जीता।  

शिल्पा शिंदे ने कबूला झूठा आरोप, ‘भाबीजी घर पर हैं’ विवाद फिर भड़का

मशहूर टीवी शो 'भाबीजी घर पर हैं' की पूर्व अंगूरी भाभी यानी शिल्पा शिंदे इस समय एक बहुत बड़े विवाद में फंस गई हैं. हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में यह कबूल किया है कि उन्होंने शो के प्रोड्यूसर पर यौन उत्पीड़न (सेक्शुअल हैरेसमेंट) के झूठे आरोप लगाए थे. इस बीच ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिल्पा शिंदे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है. हालांकि, इस चौतरफा आलोचना और कानूनी शिकंजे के डर के बावजूद शिल्पा के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर बेहद आक्रामक अंदाज में पोस्ट शेयर कर अपने आलोचकों को 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो' की खुली चुनौती दे डाली है. शिल्पा शिंदे का पोस्ट वायरल चारों तरफ से घिरने के बाद भी शिल्पा शिंदे बैकफुट पर आने को तैयार नहीं हैं. शनिवार को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक रील और कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए खुद का बचाव किया और एक बेहद बेबाक नोट लिखा. उन्होंने अपनी तस्वीरों के साथ लिखा, 'एक महिला बनो! और हमेशा 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो' कहने के लिए तैयार रहो.' इस पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए आगे लिखा, 'जलने वालों जलते रहो, अपना खून किसी जरूरतमंद को मत दो, जला-जलाकर खत्म कर दो.' सेक्शुअल हैरेसमेंट को लेकर पोस्ट इस पोस्ट के बाद शिल्पा ने एक और पोस्ट शेयर किया. जिसमें उन्होंने लिखा, 'अपना PR का काम करते रहिए.लेकिन इस मामले के बारे में झूठी बातें फैलाना बंद कीजिए. यौन उत्पीड़न (सेक्शुअल हैरेसमेंट) का मतलब है – कोई भी ऐसा अनचाहा यौन व्यवहार जिससे किसी व्यक्ति को असहज, डरा हुआ, अपमानित या बुरा महसूस हो. बिना मर्जी के शारीरिक संपर्क, यौन टिप्पणी या मजाक, गलत मैसेज या तस्वीरें, बार-बार अनचाही कोशिशें, यौन भावना जगाने वाले इशारे… इसलिए अपनी मनगढ़ंत थ्योरी फैलाना बंद कीजिए. जागो ग्राहक जागो.' AICWA ने जताई गहरी चिंता दूसरी तरफ, शुक्रवार को ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने इस पूरे मामले पर एक कड़ा आधिकारिक बयान जारी किया. एसोसिएशन ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि 'भाबीजी घर पर हैं' के प्रोड्यूसर संजय कोहली पर पब्लिसिटी या विवाद सुलझाने के लिए यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाना पूरी बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री के लिए बेहद चिंताजनक विषय है. 2016 में क्या था विवाद, क्यों लगाए थे झूठे आरोप? इस विवाद की जड़ें साल 2016 से जुड़ी हुई हैं. उस वक्त शिल्पा शिंदे ने अचानक इस बेहद पॉपुलर कॉमेडी शो को छोड़ दिया था और प्रोड्यूसर्स पर मानसिक प्रताड़ना, बकाया पैसे न देने और सेट पर खराब माहौल बनाने के साथ-साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगा दिए थे. हालांकि, बाद में यह मामला आपसी समझौते के साथ खत्म हो गया था.  भारती और हर्ष के साथ बातचीत में शिल्पा ने याद किया कि जब उन्होंने ये आरोप लगाए थे, तब उनके दोस्तों ने उन्हें आगाह किया था कि वे क्या कर रही हैं. इस पर शिल्पा ने अब सफाई देते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े उस विवाद को सुलझाने के लिए उनके पास कोई और रास्ता नहीं बचा था और शो छोड़ने के बाद अपने करियर को बचाने के लिए उन्होंने मजबूरी में यह कदम उठाया था.

दिव्यांगता मामले में HC का अहम फैसला, कारोबारी के परिवार को मिलेगी 87 लाख की राहत

चंडीगढ़. सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का शिकार हुए एक कारोबारी के परिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने करीब 22 वर्ष पुराने मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण जींद (एमएसीटी) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाते हुए कुल 87.66 लाख रुपये कर दिया। पहले ट्रिब्यूनल ने 24.86 लाख रुपये मुआवजा दिया था। अब अदालत ने 62.80 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने श्याम सुंदर गुप्ता के कानूनी वारिसों की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि दुर्घटना ने पीड़ित की न केवल शारीरिक क्षमता छीन ली, बल्कि उसकी आजीविका और सामान्य जीवन जीने की संभावनाएं भी समाप्त कर दी थीं। ऐसे मामलों में पीड़ित और उसके परिवार को न्यायोचित एवं पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए। रिकार्ड के अनुसार 26 नवंबर 2003 को हुए सड़क हादसे में श्याम सुंदर गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। चिकित्सकीय जांच में उन्हें 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग घोषित किया गया। वह अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में असमर्थ हो गए थे और जीवन भर दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर हो गए। दुर्घटना के बाद उन्हें देश के विभिन्न अस्पतालों में लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। लगभग 12 वर्ष तक बिस्तर पर रहने के बाद 26 मार्च 2015 को उनका निधन हो गया। हाई कोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने मुआवजा तय करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। अदालत ने आयकर रिटर्न के आधार पर उनकी मासिक आय 10,855 रुपये मानी और भविष्य की आय की संभावनाओं को भी जोड़ा। इसके बाद 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए आय के नुकसान की पुनर्गणना की गई। अदालत ने दर्द एवं पीड़ा के लिए 15 लाख रुपये, परिचारक खर्च के लिए आठ लाख रुपये, चिकित्सा खर्च के लिए 35 लाख रुपये से अधिक, विशेष आहार, परिवहन खर्च, जीवन की सुविधाओं से वंचित होने तथा विशेष उपकरणों के लिए अलग-अलग मुआवजा प्रदान किया। अदालत ने कहा कि दुर्घटना के कारण पीड़ित सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन जीने की क्षमता खो बैठा था, जिसकी भरपाई केवल चिकित्सा खर्च से नहीं हो सकती। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि घायल व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद भी इलाज, दर्द एवं पीड़ा तथा अन्य खर्चों के मद में मिलने वाली राशि उसके कानूनी वारिसों को प्राप्त करने का अधिकार है, क्योंकि यह राशि उसकी संपत्ति का हिस्सा बन जाती है। इसी आधार पर अदालत ने बीमा कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि दो महीने के भीतर जमा कराने का आदेश दिया।

फीफा वर्ल्ड कप के बीच याद आया भारतीय फुटबॉल का गोल्डन दौर

नई दिल्‍ली  फीफा विश्व कप 2026 का काउंड डाउन जारी है। 11 जून (भारतीय समयानुसार 12 जून) 2026 से फुटबॉल के इस महाकुंभ की शुरुआत होगी और फाइनल 19 जुलाई को खेला जाएगा। टूर्नामेंट की मेजबानी संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं। फीफा विश्व कप 2026 में 48 टीमों के बीच 104 मैच खेले जाएंगे। इन टीमों को 4-4 के 12 ग्रुप में बांटा गया है। 11 जून से 27 जून तक ग्रुप स्‍टेज के मैच होंगे। 28 जून से 3 जुलाई तक राउंड ऑफ 32, 4 से 7 जुलाई तक राउंड ऑफ 16 के मुकाबले खेले जाएंगे। क्वार्टर फाइनल 9 से 11 जुलाई तक होगा। इसके बाद सेमीफाइनल 14 और 15 जुलाई, तीसरे स्थान का मैच 18 जुलाई को होगा। बिना जूतों के उतरी भारतीय टीम आइए इस बीच आपको भारतीय मेंस फुटबॉल टीम के एक ब्लैक एंड व्हाइट दौर में ले चलते हैं। भारतीय फुटबॉल टीम ने 1948 के लंदन ओलंपिक (London Olympics 1948) में डेब्‍यू किया। यह टीम फ्रांस के खिलाफ मैच के लिए नंगे पैर मैदान पर उतरी थी। ऐसे में कई बार सोशल मीडिया पर दावे किए जाते हैं कि प्‍लेयर्स के पास जूते खरीदने के पैसे नहीं थे। सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता भी बहुत कम थी। इस मैच में भारत को 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था। स्वतंत्र भारत की ओर से पहला इंटरनेशनल फुटबॉल गोल सरंगापानी रमन ने इसी मैच में किया था। तब भारत के कोच बलेदास चटर्जी थे। अपनी मर्जी से नहीं पहले जूते ओलंपिक की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित 'ओलंपिक में भारतीय फुटबॉल' के बारे में एक डिटेल्‍ड ब्रीफिंग में यह उल्लेख किया गया है कि 31 जुलाई, 1948 को आयोजित मैच के दौरान भारतीय टीम के 11 में से 8 प्‍लेयर्स ने अपनी मर्जी से जूते नहीं पहने थे। हम भारत में फुटबॉल खेलते हैं भारतीय टीम के तब के कप्तान तालीमेरेन एओ (Talimeren Ao) ने अपनी टीम के नंगे पैर खेलने के बारे में कहा, "हम भारत में फुटबॉल खेलते हैं, जबकि आप लोग बूटबॉल खेलते हैं।" माना जाता है कि 8 खिलाड़ियों ने पूर्वी लंदन के क्रिकलफील्ड स्टेडियम के गीले और फिसलन भरे मैदान पर बिना जूते के खेलना पसंद किया। 1953 तक फीफा जैसे कई इंटरनेशनल टूर्नामेंटों में मैचों के दौरान जूते पहनने के बारे में कोई नियम नहीं थे। भारतीय फुटबॉल का गोल्‍डन एज भारत ने इसके बाद लगातार तीन ओलंपिक खेले। इनमें हेल्सिंकी 1952, मेलबर्न 1956 और रोम 1960 शामिल हैं। मेलबर्न में भारतीय फुटबॉल टीम ने इतिहास रचते हुए सेमीफाइनल का टिकट कटाया और सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली एशियाई टीम बनी। इंडिया ने क्वार्टरफाइनल में मेजबान ऑस्ट्रेलिया को शिकस्‍त दी थी। इसके बाद सेमीफाइनल में भारत को यूगोस्लाविया से हार मिली। साथ ही कांस्य पदक मैच में बुल्गारिया से हारने के कारण सैमार बनर्जी की अगुवाई वाली भारतीय टीम मेडल जीतने से चूक गई। 1948 से 1960 के बीच का दौर भारतीय फुटबॉल के स्वर्ण युग के रूप में माना जाता है।  

बिना वैध अनुमति नहीं होगी रजिस्ट्री, अनधिकृत कॉलोनियों पर प्रशासन का बड़ा फैसला

पटियाला/सनौर. पटियाला डिवेल्पमेंट अथॉरिटी, पटियाला (पी.डी.ए.) की मुख्य प्रशासक अपरना एम.बी. ने बताया है कि पी.डी.ए. द्वारा जिला पटियाला में बिना स्वीकृति के अस्तित्व में आई अनधिकृत कॉलोनियों के विरुद्ध पापरा एक्ट, 1995 की धाराओं के तहत बनती कार्रवाई की जा रही है। मुख्य प्रशासक ने बताया कि इस संबंध में कई अनधिकृत कॉलोनियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई है तथा संबंधित सब-रजिस्ट्रारों को इन 100 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों में प्लॉटों की रजिस्ट्रियां दर्ज न करने संबंधी भी लिखा गया है। अपरना एम.बी. ने आगे बताया कि कॉलोनाइजरों एवं प्रमोटरों द्वारा इन अनधिकृत कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, सीवरेज और बिजली की सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जातीं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी मेहनत की कमाई इन अनधिकृत कॉलोनियों में न लगाएं और इन अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित प्लॉटों की कोई खरीद-फरोख्त न करें। पी.डी.ए. की मुख्य प्रशासक ने लोगों को सूचित किया कि इन अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित प्लॉटों के लिए पी.डी.ए. कार्यालय द्वारा एन.ओ.सी. जारी नहीं किए जाते। इन अनधिकृत कॉलोनियों की पूरी सूची पी.डी.ए. पटियाला कार्यालय की वैबसाइट पर भी देखी जा सकती है। उन्होंने ऐसे कॉलोनाइजरों और प्रमोटरों को भी चेतावनी दी है कि वे किसी भी प्रकार की कॉलोनी विकसित करने से पहले पुड्डा के नियमों के अनुसार सक्षम अधिकारी से लाइसेंस प्राप्त करें, अन्यथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अनधिकृत कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

ऑनलाइन सीट बुकिंग कर स्टेज कैरिज की तरह चल रहीं बसों पर होगी सख्त कार्रवाई

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट (AITP) के तहत संचालित उन बसों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीटवार बुकिंग कर स्टेज कैरिज की तरह संचालन कर रही हैं। परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर 9 से 11 जून तक प्रदेशव्यापी विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के प्रमुख मार्गों, एक्सप्रेस-वे और टोल प्लाजाओं पर 24 घंटे प्रवर्तन दल तैनात रहेंगे। विशेष रूप से यमुना एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सघन जांच अभियान चलाया जाएगा, ताकि नियमों के विपरीत संचालित हो रही बसों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। अवैध यात्री परिवहन पर रहेगी विशेष नजर परिवहन विभाग के अनुसार, कुछ पर्यटक परमिट धारक बसें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग यात्रियों को सीटवार टिकट बेचकर स्टेज कैरिज की तरह संचालन कर रही हैं, जो परिवहन नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और अवैध यात्री परिवहन को नियंत्रित करने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। संयुक्त टीमें करेंगी कार्रवाई डॉ. उदित नारायण ने बताया कि अभियान के दौरान परिवहन विभाग, यात्रीकर अधिकारियों और रोडवेज अधिकारियों की संयुक्त टीमें विभिन्न स्थानों पर जांच करेंगी। चेकिंग के दौरान दस्तावेजों, परमिट की शर्तों और संचालन प्रणाली की गहन पड़ताल की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर चालान, जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। गौतमबुद्ध नगर में पहले से जारी है कार्रवाई उन्होंने बताया कि गौतमबुद्ध नगर में प्रवर्तन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। मई माह के दौरान 242 बसों की जांच की गई, जिनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब एक लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा वाहनों पर बकाया 67 लाख रुपये का कर भी जमा कराया गया। यात्रियों की सुरक्षा और नियमों के पालन पर जोर परिवहन विभाग का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध यात्री परिवहन पर प्रभावी रोक लगाना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिवहन नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराना है। विभाग को उम्मीद है कि विशेष चेकिंग अभियान के माध्यम से नियमों के विरुद्ध संचालित हो रही बसों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।