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चोरी से परेशान किसान बोले- बार-बार नुकसान क्यों? QR कोड दो, रकम सीधे ले जाओ

फरीदकोट. फरीदकोट के गांव पक्की कलां में ट्यूबवेल मोटरों की लगातार हो रही चोरियों से परेशान किसानों ने चोरों को ही एक अनोखा प्रस्ताव दे दिया है। किसानों का कहना है कि चोर उनकी मोटरें चोरी करने की बजाय खेतों में अपना यूपीआई (UPI) स्कैनर या क्यूआर कोड लगाकर चले जाएं, वे आपस में पैसे इकट्ठे करके उनके खाते में डाल देंगे, लेकिन उनकी कृषि मशीनरी को नुकसान न पहुंचाया जाए। यह अनोखी अपील उस समय सामने आई जब बीती रात चोरों ने गांव के खेतों से करीब 25 ट्यूबवेल मोटरें चोरी कर लीं। एक ही रात में बड़ी संख्या में मोटरों की चोरी के बाद किसानों ने अपना रोष और बेबसी जाहिर करने के लिए एक पोस्टर तैयार किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में मोटरों की चोरी उनके लिए बड़ा संकट बन जाती है। मोटरों के गायब होने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है और फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। उनका आरोप है कि बार-बार हो रही चोरियों के बावजूद न तो पुलिस और न ही प्रशासन इस समस्या पर प्रभावी रोक लगा सका है। गांव के किसानों ने कहा कि हर साल ऐसी घटनाओं के कारण उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मोटरों की चोरी से फसलों का पूरा चक्र प्रभावित हो जाता है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है। इसी कारण वे मजबूरी में यह कहने को विवश हुए हैं कि चोर मोटरों को हाथ न लगाएं और बदले में पैसे ले जाएं। गांव के किसान और मजदूर रात के समय खेतों में बने कमरों में रहकर मोटरों की रखवाली करते थे, लेकिन अब चोरी करने वाले गिरोहों के हथियारबंद होने के कारण लोग डर महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि अंधेरा होते ही खेत सुनसान हो जाते हैं और किसान अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। बताया जा रहा है कि ये चोरी करने वाले गिरोह 10 से 12 सदस्यों के होते हैं और चोरी की गई मोटरों को तोड़कर कबाड़ियों को बेच देते हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पहले भी ऐसे मामलों में कुछ चोरीशुदा मोटरें कबाड़ियों से बरामद की जा चुकी हैं। किसानों की यह अनोखी अपील उनकी बेबसी और कृषि उपकरणों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाती है, जिसने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

फुहारों से बदला मौसम का मिजाज, बस्तर समेत कई इलाकों में 5 दिन तक राहत के आसार

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बस्तर समेत कई इलाकों में प्री मानसून बारिश शुरू हो गई है. राजधानी रायपुर को अभी राहत देने वाली बारिश का इंतजार है. मध्य इलाके- बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. इन क्षेत्रों में 42 डिग्री के करीब तापमान दर्ज हो रहा है. मौसम विभाग ने संभावना जताई कि प्रदेश में अगले 5 दिनों तक एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन की गतिविधि के साथ तेज हवा, वज्रपात और वर्षा जारी रहेगी. मौसम विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में एक दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई. इस दौरान सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान बिलासपुर में 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं सबसे कम न्यूनतन तापमान 23.4 पेंड्रा रोड में दर्ज हुआ. रायपुर में आज ऐसा रहेगा मौसम ? रायपुर में शनिवार को मौसम विभाग ने आसमान में बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है. हालांकि अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. इन इलाकों में हुई बारिश जानकारी के अनुसार प्रदेश के ओडगी में 5 सेंटीमीटर, कुआकोंडा में 4 सेंटीमीटर, बड़े बचेली में 3 सेंटीमीटर, सुकमा, बलरामपुर, तोंगपाल, कांसाबेल, मनोरा में 2-2 सेंटीमीटर बारिश हुई है. चिरमिरी, गादीरास, छिंदगढ़ में भी बारिश हुई. मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने जानकारी दी  कि छत्तीसगढ़ में लगातार नमी आ रही है. बस्तर में वर्षा भी हो रही है. मानसून के लिए तय मानकों के अनुरूप वर्षा होने और परिस्थितियों पर नजर है. मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हालात मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, पूरे गोवा, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्सों, कर्नाटक के कुछ और हिस्सों, तमिलनाडु के शेष हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिम-मध्य, पूर्व मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और यह समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ है. प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है.

धमतरी का महा-परिवर्तन, 60 करोड़ रुपए की ऐतिहासिक खरीदी के साथ तैयार होगा आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब

धमतरी का 'महा-परिवर्तन': 60 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड खरीदी और 30 हजार मीट्रिक टन का नया 'लॉजिस्टिक्स हब' ​अब नहीं भटकेगा किसान, ब्रॉडगेज रेल और आधुनिक गोदामों से बदलेगी धमतरी की तकदीर ​धान का कटोरा अब बनेगा 'वेयरहाउसिंग हब': धमतरी की नई आर्थिक उड़ान रायपुर     ​​छत्तीसगढ़ का कृषि प्रधान जिला धमतरी आज विकास और आत्मनिर्भरता के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। कभी रबी फसलों के रिकॉर्ड उपार्जन के बाद भंडारण की कमी से जूझने वाला यह जिला, आज अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और प्रशासनिक दूरदर्शिता के कारण प्रदेश के एक प्रमुख 'वेयरहाउसिंग एवं कृषि लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में उभर रहा है।       ​राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) और छत्तीसगढ़ राज्य भंडारण गृह निगम (SWC) के संयुक्त प्रयासों से जिले में 30 हजार मीट्रिक टन की अतिरिक्त वैज्ञानिक भंडारण क्षमता विकसित की जा रही है, जो धमतरी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है।     ​अतीत की चुनौती से लिया सबक               ​विगत वर्षों में धमतरी ने रबी फसलों, विशेषकर चने के रिकॉर्ड उत्पादन और उपार्जन का गवाह बना। लेकिन इस खुशी के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आई।जिले में पर्याप्त भंडारण क्षमता का न होना। मजबूरी में उपज को दूसरे जिलों के गोदामों में भेजना पड़ा, जिससे न केवल परिवहन का खर्च बढ़ा, बल्कि प्रशासनिक और सहकारी संस्थाओं पर भी भारी दबाव पड़ा।     ​इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए धमतरी प्रशासन ने जिले में ही स्थायी और आधुनिक भंडारण अधोसंरचना विकसित करने की एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू किया। ​'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' का मिला संबल      ​केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना” धमतरी के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके तहत जिले की चार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का चयन किया गया है। जिसमे ​अंवरी,​कोसमर्रा,पोटियाडीह-आमदी और ​कोलियारी शामिल है। ​इन चारों समितियों में 2,500-2,500 मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदामों का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है। इनके पूरा होते ही ग्रामीण स्तर पर ही 10 हजार मीट्रिक टन की अतिरिक्त भंडारण सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने के लिए दूर नहीं भटकना पड़ेगा। ​इसके साथ ही, राज्य भंडारण गृह निगम (SWC) द्वारा धमतरी और कुरूद में 10-10 हजार मीट्रिक टन क्षमता के दो बड़े गोदाम विकसित किए जा रहे हैं। केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के पास पहले से उपलब्ध 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक की क्षमता के साथ अब धमतरी का नेटवर्क बेहद मजबूत होने जा रहा है। रिकॉर्ड खरीदी और आर्थिक समृद्धि(रबी विपणन वर्ष 2026)        ​भंडारण क्षमता में यह विस्तार हवा में नहीं, बल्कि जमीन पर बढ़ती कृषि समृद्धि को देखकर किया जा रहा है। रबी विपणन वर्ष 2026 में जिले के 9,103 किसानों से 1 लाख 16 हजार 162 क्विंटल चने की रिकॉर्ड खरीदी की गई है, जिसके एवज में 60.54 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में भुगतान करने की प्रक्रिया जारी है। चने के साथ-साथ सरसों और मसूर का भी सफल उपार्जन किया गया है। ​राइस मिलर्स और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार     ​धान मिलिंग के क्षेत्र में धमतरी हमेशा से अग्रणी रहा है, लेकिन अक्सर तैयार चावल और धान के सुरक्षित रख-रखाव की समस्या आती थी। इस नई क्षमता विस्तार से ​मिलिंग गतिविधियों में तेजी आएगी,​भंडारण का दबाव कम होगा और ​परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी कमी आएगी। ​इसके साथ ही, धमतरी में ब्रॉडगेज रेल लाइन पर जल्द शुरू होने वाला रैक संचालन जिले के विकास में चार चांद लगाने वाला है। रेल मार्ग जुड़ने से यहां का चावल और कृषि उत्पाद देश के बड़े बाजारों तक बेहद कम लागत में पहुंच सकेंगे। ​     धमतरी में विकसित हो रही वेयरहाउसिंग अधोसंरचना और जल्द प्रारंभ होने वाली ब्रॉडगेज रेल सेवाएं जिले को प्रदेश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स एवं व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। यह पहल रोजगार सृजन, व्यापार विस्तार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। भंडारण क्षमता बढ़ने से कृषि उपज का बेहतर प्रबंधन, परिवहन लागत में कमी और विपणन व्यवस्था में सुधार होगा। यह नई अधोसंरचना किसानों, सहकारी संस्थाओं, व्यापारियों और उद्योगों के लिए दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगी। ​     ​धमतरी की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे सही समय पर सही बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का निर्माण करके एक पूरे क्षेत्र की तकदीर बदली जा सकती है। आने वाले वर्षों में, भंडारण की यह सुदृढ़ व्यवस्था और रेल कनेक्टिविटी न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगी, बल्कि धमतरी को छत्तीसगढ़ के नक्शे पर एक बड़े 'कृषि-व्यापार और लॉजिस्टिक्स हब' के रूप में नई पहचान दिलाएगी।

आम की छांव में सजी मुख्यमंत्री की चौपाल, खाट पर बैठकर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं; मौके पर दिए समाधान

आम की छांव में मुख्यमंत्री की चौपाल: खाट पर बैठे, ग्रामीणों की सुनी बात, मौके पर दिए समाधान निमधा में नर्सिंग कॉलेज, मिनी स्टेडियम और मंगल भवन की घोषणा लापरवाह अधिकारियों को सख्त चेतावनी : महिलाओं को दिया ‘करोड़पति दीदी’ बनने का मंत्र स्व-सहायता समूहों की सफलता को मिली नई पहचान, मुख्यमंत्री ने किया ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आज मरवाही विकासखंड के ग्राम निमधा में एक अनूठा और आत्मीय जनसंवाद देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय गांव के बीच आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए, उनकी समस्याएं सुनीं और शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बिजली, पानी, राशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासन स्वयं गांवों तक पहुंचकर जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव है, उनका मौके पर ही समाधान किया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों और मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने जिले में नर्सिंग कॉलेज, ग्राम निमधा में मिनी स्टेडियम तथा सर्वसमाज के लिए विशाल मंगल भवन की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तीनों मांगों को तत्काल स्वीकृति प्रदान करते हुए उनकी घोषणा की। ग्रामीणों द्वारा बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याएं उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों से जानकारी ली और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएंगे। जनसंवाद के दौरान राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायत सामने आने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित राजस्व निरीक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री के इस स्पष्ट संदेश से सुशासन और जवाबदेही के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक बार फिर सामने आई। मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद करते हुए उन्हें आर्थिक प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य केवल लखपति बनना नहीं, बल्कि करोड़पति दीदी बनना होना चाहिए। महिलाओं ने उन्हें बताया कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त होने वाली राशि उनके परिवार, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है, जिसका लाभ ग्राम निमधा सहित पूरे जिले की महिलाओं को मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा की कि प्रदेश में शीघ्र ही सीएम हेल्पलाइन प्रारंभ की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध निराकरण के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जा रही है। जनचौपाल के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। महिलाओं ने विष्णु भोग चावल, ब्लैक राइस, शहद, पापड़ और लड्डू जैसे स्थानीय उत्पादों की आकर्षक टोकरी मुख्यमंत्री को भेंट की। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की सराहना करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने सरई के दोना-पत्तल में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों – जामुन, कोईलार भाजी, बेल का शरबत, आम की चटनी और आमपना का स्वाद भी लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की प्रेरणादायक सफलता कहानियों पर आधारित ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास, परिश्रम और सफलता का जीवंत दस्तावेज है, जो हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह दौरा केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि लोगों के बीच बैठकर उनकी वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और राज्य सरकार इसी संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सुसमीरा पैकरा, उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, नगर पालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चतुर्भुज विष्णु मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की खुशहाली की कामना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ऐतिहासिक चतुर्भुज विष्णु मंदिर में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना सुशासन तिहार के दौरान सक्ती जिले के ठठारी गांव पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सक्ती जिले के जैजैपुर विकासखंड स्थित ग्राम ठठारी पहुंचकर ऐतिहासिक चतुर्भुज विष्णु मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।  मुख्यमंत्री साय ने भगवान विष्णु से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए आशीर्वाद मांगा। यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार यहां स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा चौथी शताब्दी की मानी जाती है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता को और अधिक विशेष बनाती है। उल्लेखनीय है कि सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लगातार प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। वे गांवों में पहुंचकर आमजन से सीधे संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, जनसमस्याओं और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक ले रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री साय ग्राम ठठारी में आयोजित जनचौपाल में भी शामिल हुए, जहां उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शासन की योजनाओं के लाभांवितों से चर्चा कर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनसमस्याओं के त्वरित और संवेदनशील निराकरण के निर्देश दिए। इस अवसर पर जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

वैभव सूर्यवंशी बने चर्चा में, पहली बार सीनियर टीम में चयन

नई दिल्ली आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के साथ-साथ एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम का ऐलान शनिवार (6 जून) को किया गया है. मेन्स सेलेक्शन पैनल की भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के हेडक्वार्टर में बैठक हुई, जिसमें स्क्वॉड को अंतिम रूप दिया गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीम का ऐलान चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने किया. तीनों टूर्नामेंट में टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे, वहीं तिलक वर्मा टीम के उप-कप्तान बने हैं. 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को भी पहली बार सीनियर टीम में शामिल किया गया है. उधर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए रेस्ट दिया गया है. वो एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा लेंगे और उन्हें मोहम्मद सिराज की जगह टीम में जगह मिली है. हालांकि सिराज इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर टी20 टीम में शामिल किए गए हैं. सबसे बड़ी खबर ये रही कि सूर्यकुमार यादव की टी20 कप्तानी छिन गई है और उन्हें टीम में भी शामिल नहीं किया गया है. बीसीसीआई की अपेक्स काउंसिल कमेटी की मीटिंग में सूर्य को हटाने पर फैसला लिया गया. बस शनिवार को औपचारिक ऐलान किया गया. इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम की घोषणा बाद में की जाएगी.सचिन तेंदुलकर को जब 1989 में टीम इंडिया से पहली बार खेलने का मौका मिला था, तब उनकी उम्र 16 साल 205 दिन थी. यानी वैभव जब 26 जून को अपना पहला मैच खेलेंगे तब वह सिर्फ 15 साल 180 दिन के ही होंगे, जो कीर्तिमान है।  इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय स्क्वॉड: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), रवि बिश्नोई, अभिषेक शर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, मोहम्मद सिराज, संजू सैमसन, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, ईशान किशन, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, शिवम दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव और वैभव सूर्यवंशी. एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), रवि बिश्नोई, अभिषेक शर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, जसप्रीत बुमराह, संजू सैमसन, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, ईशान किशन, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, शिवम दुबे, वरुण चक्रवर्ती और वैभव सूर्यवंशी. आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), रवि बिश्नोई, अभिषेक शर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, मोहम्मद सिराज, संजू सैमसन, अक्षर पटेल, हर्षित राणा, ईशान किशन, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, शिवम दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव और वैभव सूर्यवंशी. भारत का आयरलैंड दौरा (जून) • पहला टी20: 26 जून, बेलफास्ट • दूसरा टी20: 28 जून, बेलफास्ट भारत का इंग्लैंड दौरा (जुलाई) • 1 जुलाई: पहला टी20, चेस्टर ले स्ट्रीट • 4 जुलाई: दूसरा टी20, मैनचेस्टर • 7 जुलाई: तीसरा टी20, नॉटिंघम • 9 जुलाई: चौथा टी20, ब्रिस्टल • 11 जुलाई: पांचवां टी20, साउथम्प्टन • 14 जुलाई: पहला वनडे, बर्मिंघम • 16 जुलाई: दूसरा वनडे, कार्डिफ • 19 जुलाई: तीसरा वनडे, लॉर्ड्स

ब्राउन’ रिव्यू: करिश्मा कपूर की दमदार वापसी, लेकिन थ्रिलर में रह गई सस्पेंस की कमी

साइकोलॉजिकल थ्रिलर के दीवानों के लिए फैंस की फेवरेट लोलो (करिश्मा कपूर) लेकर आई हैं नई सीरीज 'ब्राउन'. 2016 में आई अभिक बरुआ की नॉवेल 'सिटी ऑफ डेथ' पर बेस्ड ये शो डायरेक्टर अभिनय देव ने बनाया है. पुलिस इंवेस्टिगेशन और ब्रूटल मर्डर मिस्ट्री को दिखाती इस 7 एपिसोड की सीरीज क्या आपको आखिर तक बांधे रखने का दम रखती है? कहानी कोलकाता के एक रसूखदार परिवार की बेटी के दर्दनाक मर्डर से शो शुरू होता है. सिर से धड़ अलग कर पीड़िता को मौत के घाट उतारा गया है. पूरे कोलकाता में सनसनी फैली है. हर तरफ दहशत का माहौल है. पुलिस पर मीडिया और पॉलिटिकल पार्टी की तरफ से आरोपी को पकड़ने का दबाव है. ऐसे में केस की कमान रीटा ब्राउन (करिश्मा), कोलकाता पुलिस फोर्स की डिटेक्टिव, को दी जाती है. रीटा के साथ इस केस पर अर्जुन सिन्हा (सूर्या शर्मा) काम करता है. अपनी पर्सनल लाइफ के ट्रॉमा की वजह से रीटा डिप्रेशन और एल्कोहल से स्ट्रगल कर रही है. वो अतीत की यादों में डूबी रहती है. केस पर काम करते हुए उसे भी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है. कहानी में सस्पेंस तब आता है जब एक और लड़की की निर्मम हत्या होती है. रीटा ये मर्डर मिस्ट्री सुलझाते हुए दिल दहला देने वाले शॉक और दर्द से गुजरती है. क्या रीटा सभी चुनौतियों से लड़कर ये केस सुलझा पाती है? इसका जवाब आपको शो देखकर ही मिलेगा. एक्टिंग करिश्मा कपूर के टैलेंट पर हर किसी को भरोसा है. कोई भी रोल हो, वो हर किरदार में अपना बेस्ट ही देती हैं. रीटा ब्राउन के किरदार को उन्होंने बखूबी निभाया है. वो हर इमोशंस को स्क्रीन पर दिखाने में कामयाब रही हैं. इस रोल को करिश्मा ने पूरी तरह नॉन ग्लैमरस और नो मेकअप लुक के साथ प्ले किया है. सूर्या शर्मा ने इंस्पेक्टर अर्जुन सिन्हा के रोल में अच्छा काम किया है. वो करिश्मा को कॉम्पलिटमेंट करते नजर आए. सोनी राजदान ने करिश्मा की मां का रोल किया. वो जब भी स्क्रीन पर दिखीं अच्छी लगीं. जीशू सेनगुप्ता ने साइकेट्रिस्ट संदीप चक्रवर्ती के रोल में बैलेंस एक्ट किया. हालांकि उनका रोल थोड़ा और दमदार लिखा जा सकता था. मेकर्स ने उनके पोटेंशियल को यूज नहीं किया. हेलन ने करिश्मा की रिलेटिव बर्था का रोल किया. वो जब भी दिखीं सीन में फन वाइब ऐड करती नजर आईं. बाकी कलाकारों ने भी अपने पार्ट को अच्छे से प्ले किया. सिंगर शान कैमियो रोल में हैं. कहां रही कमी? सीरीज थोड़ी स्लो पेस में है. ब्राउन जैसे साइकोलॉजिकल और क्राइम थ्रिलर में मेकर्स की सबसे बड़ी जीत तब होती है, जब आखिर तक खूनी का पता ना चले. लेकिन ब्राउन में ये कोशिश फेल हुई है. क्लाइमैक्स से पहले ही निर्मम हत्याएं करने वाला वो खूनी कौन है, ये प्रेडिक्टिबल हो जाता है. ये इस शो का सबसे बड़ा ड्रॉबैक है. स्क्रीनप्ले धीमा है. शो के एपिसोड लंबे खींचे हुए लगते हैं. कहानी में ऐसे मोड़ कम हैं जो आपकी हवाइयां उड़ा दे. क्यों देखें सीरीज? क्राइम थ्रिलर के चाहने वालों के लिए ब्राउन वन टाइम वॉच है. सिनेमैटोग्राफी अच्छी है. कोलकाता की तंग गलियों, डार्कनेस, दुर्गा पूजा की वाइब को कैमरे पर खूबसूरती से दिखाया गया है. बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के पेस के साथ मैच करता है.करिश्मा के लिए ये शो देखा जा सकता है. एक्ट्रेस ने पूरा शो अपने कंधों पर चलाया है. उन्हें कॉप अवतार में देखा जा सकता है.

कक्षा 12 सेवाओं वाले CBSE पोर्टल को बनाया गया निशाना, जांच में जुटी IFSO इकाई

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने सीबीएसई के परिणाम घोषित होने के बाद की सेवाओं से संबंधित (पोस्ट रिजल्ट सर्विसेज) पोर्टल को निशाना बनाकर किए गए साइबर हमलों को लेकर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस पोर्टल को कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन जैसी सेवाओं के लिए दो जून को शुरू किया गया था। पुलिस के अनुसार, सीबीएसई की ओर से ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस’ (आईएफएसओ) इकाई में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 और 43(एफ) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले बोर्ड ने एक बयान में कहा कि उसके ‘पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल’ को निशाना बनाकर किए गए ‘समन्वित और परिष्कृत साइबर हमलों की शृंखला’ के संबंध में दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। बोर्ड ने कहा कि पिछले तीन दिनों से परिणाम घोषित होने के बाद की सेवाओं से संबंधित उसके पोर्टल पर लगातार साइबर हमले किए जा रहे थे। इन हमलों में बड़ी मात्रा में संदिग्ध और नुकसान पहुंचाने वाले ‘इंटरनेट ट्रैफिक’ इस्तेमाल किया गया, जो देश के भीतर और विदेश में मौजूद कई अलग-अलग आईपी एड्रेस से आ रहा था। सीबीएसई ने कहा, ‘चूंकि यह पोर्टल देश भर के लाखों छात्रों को परिणाम के बाद की सेवाएं प्रदान करता है, इसलिए इसके कामकाज में किसी भी प्रकार की बाधा से बड़ी संख्या में हितधारकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने, जनता को काफी असुविधा होने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने और बोर्ड के खिलाफ छात्रों में असंतोष पैदा होने की आशंका है।’ बोर्ड ने आरोप लगाया कि हमलों का स्पष्ट उद्देश्य मंच को बाधित करना, वैध उपयोगकर्ताओं की पहुंच को रोकना और राष्ट्रीय विरोधी तत्वों द्वारा अनधिकृत रूप से जानकारी निकालने का प्रयास करना था। सीबीएसई ने दावा किया कि सभी हमलों को सफलतापूर्वक ‍विफल कर दिया गया और उसके प्रणाली से किसी भी प्रकार की डेटा चोरी या उस तक अनधिकृत पहुंच का पता नहीं चला। सीबीएसई ने कहा कि आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी), सीईआरटी-इन और अन्य केंद्रीय सरकारी एजेंसियों की साइबर सुरक्षा टीम के सहयोग से निरंतर 24 घंटे निगरानी और प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया गया। कैसे सामने आया यह विवाद? यह घटनाक्रम कक्षा 12 के कुछ छात्रों की शिकायतों को लेकर उठे विवाद के बीच सामने आया है। छात्रों का आरोप है कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं। कैबिनेट सचिवालय ने मंगलवार को सीबीएसई द्वारा ओएसएम प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।  

दूषित पानी से बिगड़ी लोगों की सेहत, राजनांदगांव में जांच के लिए जुटे निगम अधिकारी

राजनांदगांव. शहर में इन दिनों टंकी से गंदे पानी की सप्लाई होने के चलते बसंतपुर वार्ड के करीब 15 से अधिक बच्चे बीमार हो गए। है। इन सभी मरीजों का जिला अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। इसमें पीलिया और डायरिया के मरीज बढ़ी संख्या में मिले है। संक्रमण की घटना के बाद नगरनिगम के अधिकारी पानी का सैंपल जांच के लिए ले गए है। संक्रमण के चलते वार्डवासियों के सप्ताहभर पहले ही बसंतपुर वार्ड 43 बीच दहशत फैली हुई है। राजीव नगर में पीलिया के मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हांलाकि इलाज के बाद कई मरीजों को छुट्टी दे दी गई। राजीव नगर वार्ड में शुक्रवार को ही दो नए डायरिया के मरीज सामने आए है, जिनका इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है। वार्डवासियों ने बताया कि पानी गंदा आने के कारण वे परेशान है। रहवासियों की माने तो वे पानी में फिटकारी डालकर इस्तेमाल कर रहे है। इसके बाद भी संक्रमण फैला हुआ है। इससे पहले भी बारिश के दिनों में बसंतपुर इलाके में डायरिया की शिकायत आ चुकी है।

KCC योजना: किसानों की खेती को मजबूत बनाने वाला बड़ा वित्तीय साधन

लखनऊ खेती में खर्चों का सिलसिला फसल बेचने से पहले शुरू हो जाता है। किसान को बीज खरीदने होते हैं। खाद और सिंचाई का इंतजाम करना होता है। मजदूरी और मशीन का खर्च भी कई बार तुरंत आ जाता है। ऐसे समय में किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को समय पर कर्ज़ लेने में मदद करता है। इससे उन्हें महंगे कर्ज़ पर निर्भर रहने की जरूरत कम होती है और गांव की कमाई और खेती से जुड़ी गतिविधियां मजबूत होती हैं। किसानों तक पहुंच रही कर्ज़ की सुविधा वर्ष 2017 से 2025 तक उत्तर प्रदेश में खेती के लिए 13,42,978.3 करोड़ का कर्ज़ दिया गया। इसके साथ ही नवंबर 2025 तक 492.46 लाख किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। यह दिखाता है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में किसानों तक खेती के लिए कर्ज़ की सुविधा पहुंची है। किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए कर्ज़लेने में मदद करता है। यह सुविधा बुवाई, फसल की देखभाल और कटाई की तैयारी के समय बहुत काम आती है। कई बार किसान को फसल बेचने से पहले ही पैसों की जरूरत पड़ती है। किसान क्रेडिट कार्ड इसी जरूरत को पूरा करता है। गांवों के लिए क्यों जरूरी है किसान क्रेडिट कार्ड गांव में खेती रुकती है तो कई छोटे काम भी रुक जाते हैं। किसान बीज खरीदता है तो दुकान चलती है। मजदूरी देता है तो गांव में आमदनी बढ़ती है। मशीन किराए पर लेता है तो स्थानीय कामकाज को भी सहारा मिलता है। किसान क्रेडिट कार्ड अचानक आने वाली खेती की जरूरतों में भी मदद करता है। किसान को फसल बिकने का इंतजार नहीं करना पड़ता। वह जरूरी खर्च के लिए कर्ज़ का उपयोग कर सकता है। इससे खेती का काम बिना रुकावट आगे बढ़ता है। किसान क्रेडिट कार्ड की मुख्य जानकारी ये आंकड़े बताते हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड और फसल ऋण उत्तर प्रदेश की गांव की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन रहे हैं। छोटे और सीमांत किसानों को मदद किसान क्रेडिट कार्ड छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। ऐसे किसानों के पास अक्सर बचत कम होती है। खेती का खर्च फसल से होने वाली कमाई से पहले आ जाता है। किसान को बीज, सिंचाई, डीजल, खाद या मजदूरी के लिए तुरंत पैसों की जरूरत पड़ सकती है। कर्ज़ की सुविधा मिलने से किसान बिना समय गंवाए खेती का काम जारी रख पाते हैं। प्रदेश में किसानों के लिए दूसरे कदम भी उठाए गए हैं। वर्ष 2017 के बाद 86 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को पुराने कर्ज़ का बोझ कम करने में मदद मिली। पीएम-किसान के तहत 3.12 करोड़ किसानों को 22 किस्तों में 99,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली। इन कदमों से किसानों को सीधी आर्थिकमदद मिली और खेती की जरूरतों में सहारा मिला। फसल नुकसान पर मदद खेती में कर्ज़ सुविधा तब और उपयोगी होती है जब फसल नुकसान के समय भी किसानों को सहायता मिले। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2017-18 से 2025-26 के बीच 353.14 लाख बीमा वाले किसानों को 5,660.33 करोड़ रुपये की मदद राशि मिली। इससे फसल खराब होने पर किसानों पर आर्थिक दबाव कम होता है। किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसानऔर फसल बीमा मिलकर किसानों को मजबूत सहारा देते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड खेती से पहले और खेती के दौरान पैसों की सुविधा देता है। पीएम-किसान सीधी आर्थिक मदद देता है। फसल बीमा नुकसान के समय सहारा देता है। सहकारी बैंकों से बढ़ी कर्ज़ की सुविधा गांवों में ककर्ज़ सुविधा को सहकारी बैंकों से भी मजबूती मिलती है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच उत्तर प्रदेश सहकारी बैंक का कर्ज़ वितरण 9,190 करोड़ रुपये से बढ़कर 23,061 करोड़ रुपये हो गया। बैंक का शुद्ध लाभ 32.82 करोड़ रुपये से बढ़कर 100.24 करोड़ रुपये हो गया। जिला सहकारी बैंकोंका कुल कारोबार भी 28,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 41,234 करोड़ रुपये हो गया। सहकारी बैंक गांवों और किसानों से सीधे जुड़े होते हैं। जब ये बैंक मजबूत होते हैं, तो किसानों और गांव के छोटे कारोबारों को कर्ज़ लेना आसान होता है। इससे खेती, छोटे व्यापार और स्थानीय कामकाज को मदद मिलती है। बीज और खेती की जरूरतों में मदद खेती के लिए कर्ज के साथ अच्छे बीज और जरूरी सामग्री भी समय पर मिलनी चाहिए। वर्ष 2017-18 से 2025 तक किसानों को 546.85 लाख क्विंटल अच्छी गुणवत्ता वाले बीज बांटे गए। इससे किसानों को बेहतर बीज की सुविधा मिली। जब किसानों को कर्ज और खेती की सामग्री दोनों समय पर मिलते हैं, तो खेती की तैयारी बेहतर होती है। किसान बुवाई और फसल की देखभाल की योजना सही तरीके से बना पाते हैं। पाठकों के लिए नोट: यह लेख एचटी ब्रांड स्टूडियो द्वारा ब्रांड की ओर से तैयार किया गया है और इसमें हिंदुस्तान की कोई भी संपादकीय या पत्रकारिता भागीदारी नहीं है।