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मुख्यमंत्री यादव ने मऊगंज जिले के देवतालाब शिव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मऊगंज जिले के देवतालाब शिव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान आशुतोष का रुद्राभिषेक भी किया। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव से प्रदेश की निरंतर प्रगति और जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिवकुंड का अवलोकन किया और इसका सौंदर्यीकरण कराए जाने की बात कही। मंदिर परिसर में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार बांकेलाल के शहनाई वादन की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, विधायक देवतालाब श्री गिरीश गौतम, विधायक सिरमौर श्री दिव्यराज सिंह, विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी सहित स्थानीय जन उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि विंध्य की धरा में मऊगंज जिले के देवतालाब शिव मंदिर का विशिष्ट स्थान है। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने केवल एक रात में एक ही पत्थर से शिव मंदिर का निर्माण किया था। रीवा-बनारस हाईवे पर स्थित देवतालाब शिव मंदिर में साल भर भक्तों की भीड़ रहती है। विंध्य में परंपरा रही है कि बद्रीनाथ और चारोंधाम की यात्रा का फल तभी मिलता है जब देवतालाब में भगवान शिव के दर्शन किए जाएं। चारधाम यात्रा के बाद भी लोग देवतालाब अवश्य जाते हैं।

राजनीति की नई उड़ान: निशांत तैयार, बस नीतीश कुमार का ओके बाकी

नई दिल्ली/पटना  बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर हलचल तेज हो गई है। हालांकि, नीतीश कुमार लंबे समय से वंशवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं, लेकिन जेडीयू के भीतर अब यह राय बन रही है कि पार्टी को बचाने और मजबूत करने के लिए निशांत की राजनीति में एंट्री जरूरी है। हाल ही में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख और एनडीए सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने पटना की रैली में कहा कि अगर निशांत तुरंत राजनीति में नहीं आए तो जेडीयू को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।  रिपोर्ट में एक करीबी सूत्र के हवाले से कहा, “निशांत राजनीति में आने के लिए तैयार हैं, उन्हें सिर्फ अपने पिता की मंजूरी चाहिए।” सूत्र ने आगे कहा, "हम वंशवाद को बढ़ावा न देने के मुख्यमंत्री के रुख से वाकिफ हैं, लेकिन हमें व्यावहारिक होना होगा। अगर जेडीयू को एक पार्टी के रूप में जिंदा रहना है और फलना-फूलना है, तो निशांत को राजनीति में लाना होगा। सिर्फ वही कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर सकते हैं और पार्टी को मजबूती से खड़ा कर सकते हैं।" जेडीयू नेताओं का कहना है कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री की सेहत और प्रशासन पर पकड़ को लेकर चिंता बढ़ी है। कई नेताओं ने दावा किया कि सरकार के कुछ फैसले नौकरशाहों के प्रभाव में लिए गए हैं, जिससे पार्टी की पकड़ कमजोर होती दिख रही है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “एनडीए की 100 से ज्यादा सीटों पर बैठकें हुईं, लेकिन दलित और युवा वर्ग की भागीदारी घटी है। निशांत इस स्थिति को बदल सकते हैं।” जेडीयू में समर्थन, लेकिन अंतिम फैसला नीतीश का जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने हाल ही में कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से निशांत को राजनीति में देखना चाहते हैं, लेकिन अंतिम फैसला नीतीश कुमार का ही होगा। आपको बता दें कि नालंदा से लेकर हरनौत तक निशांत को चुनाव मैदान में उतारने की मांग उठ चुकी है। निशांत इस साल जनवरी से कई बार मीडिया के सामने आए हैं और अपने पिता के समर्थन में जनता से अपील भी की है। बताया जाता है कि वह समाजवादी नेताओं राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के विचारों का अध्ययन भी कर रहे हैं।  

यूक्रेन की राजधानी पर रूस का भीषण हमला, सरकारी बिल्डिंग्स ध्वस्त

यूक्रेन  युद्धविराम के लिए चल रहे प्रयासों के बीच रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक रूस ने सैकड़ों ड्रोन अटैक किए हैं। हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। यूक्रेनी अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। कीव नगर प्रशासन के प्रमुख तैमूर तकाचेंको ने बताया कि मृतकों में एक साल का बच्चा भी शामिल है। उसका शव बचावकर्मियों ने मलबे से निकाला। वहीं रूस के ड्रोन अटैक में कीव की एक सरकारी इमारत में भी आग लग गई। कीव के मेयर विटालि क्लिट्स्को के अनुसार, रूसी ड्रोन का मलबा स्वियातोशिन्स्की जिले और डार्नित्स्की जिले में एक आवासीय इमारत पर गिरा। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए कई प्रयास कर चुके हैं। हालांकि अब तक उन्हें कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई है। बीते दिनों राष्ट्रपति पुतिन ने अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके बाद ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी बातचीत की। हालांकि रूस और यूक्रेन दोनों ही अपने शर्तों पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं। एक दिन पहले ही यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि सितंबर के पहले छह दिनों में ही रूस ने 1300 से ज्यादा ड्रोन अटैक किए हैं। इसके अलावा 900 गाइडेड हवाई बम और 50 से ज्यादा मिसाइलें दागी गई हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध थमने की बजाय जोर पकड़ रहा है।  

शुभमन गिल की नेट्स पर बैटिंग ने चौंकाया विराट-धोनी को, पूर्व कोच ने खोला राज़

नई दिल्ली भारतीय टेस्ट कप्तान शुभमन गिल टीम इंडिया के उभरते सितारों में से एक हैं। विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों के रिटायर होने के बाद सभी फॉर्मेट में कप्तानी की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जा सकती है। टेस्ट में कप्तान बनाने के बाद उन्हें आगामी एशिया कप 2025 में टी20 टीम का उप-कप्तान भी बनाया गाय है। वहीं रिपोर्ट्स यह भी हैं कि उन्हें जल्द ही वनडे टीम की कमान भी सौंपी जा सकती है। शुभमन गिल सभी फॉर्मेट के खिलाड़ी है, अंडर-19 वर्ल्ड कप से लेकर सीनियर टीम तक उन्होंने हर मौके पर खुदको साबित किया है। कोहली-धोनी और शास्त्री ने गिल के पहले सेशन के बाद ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि इस लड़के में कुछ खास है और यह अगला उभरता सितारा बन सकता है। इसका खुलासा हाल ही में टीम इंडिया के पूर्व बैटिंग कोच संजय बांगर ने किया है। बांगर ने बताया कि कैसे गिल ने 2019 वर्ल्ड कप की तैयारियों के दौरान हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। शास्त्री तो चाहते थे कि उन्हें उसी समय प्लेइंग XI में जगह दी जाए। बांगर ने दूरदर्शन स्पोर्ट्स पर कहा, "यह उनका पहला सत्र था और वह नेट्स पर बल्लेबाजी करने उतरे। रवि शास्त्री मुख्य कोच थे, कप्तान विराट कोहली थे और एमएस धोनी अभी भी टीम में थे। हम 2019 के वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी कर रहे थे। साइड-आर्म थ्रोअर्स और मैंने शुभमन को गेंदबाजी करना शुरू किया। जब हम गेंद को ऊपर की ओर डालते, तो वह ड्राइव खेलते।" थोड़ा सा ऑफ-स्टंप के बाहर है तो कट मारे। थोड़ा सा शॉर्ट दे दो तो पुल मारे। दूसरा नेट बंद हो गया, इनका ही नेट चल रहा था और सब देख रहे हैं कि ये क्या है।" बांगर ने यह भी बताया कि कोच शास्त्री गिल को लेकर कितने उत्साहित थे, उन्होंने कहा कि वह गिल को सीधे प्लेइंग इलेवन में शामिल करना चाहते थे। उन्होंने आगे कहा, "कोच रवि शास्त्री इतने प्रभावित हुए कि वह उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल करना चाहते थे। 'इसको अभी खिला दो।' उन्होंने अपने पहले नेट सेशन में ही ऐसी छाप छोड़ी, और तब हमें एहसास हुआ कि यह लड़का खास है।"  

संसद के सामने विरोध का बवंडर: ब्रिटेन में भारी प्रदर्शन, 400 से ज्यादा लोग हिरासत में

ब्रिटेन  ब्रिटेन की संसद के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने फिलिस्तीन एक्शन समूह पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 400 से ज्यादा लोगों गिरफ्तार कर लिया। ब्रिटेन की सरकार ने फिलिस्तीन एक्शन समूह को आतंकवादी संगठन घोषित किया है और इसी के विरोध में प्रदर्शनकारी संसद के बाद इकठ्ठा हुए थे। इन लोगों ने जमकर नारेबाजी भी की। विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने वाले समूह डिफेंड अवर ज्यूरीज ने कहा कि लंदन में प्रदर्शन में 1500 लोग शामिल हुए। उन्होंने ‘मैं नरसंहार का विरोध करता हूं, मैं फिलिस्तीनी कार्रवाई का समर्थन करता हूं’ जैसे नारे लिखे हुए पोस्टर लिए हुए थे। कुछ ही मिनटों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया, जबकि राहगीर ‘शर्म करो’ और ‘मेट पुलिस, एक पक्ष चुनो, न्याय या नरसंहार’ के नारे लगा रहे थे। किन धाराओं में हुई गिरफ्तारी विरोध प्रदर्शन शुरू होने के 8 घंटे बाद पुलिस ने कहा कि उसने 425 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 25 से अधिक को अधिकारियों पर हमला करने या सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन के लिए और बाकी को आतंकवाद अधिनियम के तहत अरेस्ट किया गया। इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने शनिवार को सभी स्तरों के मंत्रिस्तरीय पदों में बड़े फेरबदल किया। इसके तहत महिला सांसदों को मंत्रिमंडल के सबसे सीनियर पदों पर नियुक्त किया है। पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद की गृह मंत्री के पद पर पदोन्नति हुई। गृह कार्यालय की पूर्व अधिकारी यवेट कूपर को विदेश मंत्री नियुक्त किया गया। चांसलर रेचल रीव्स के साथ-साथ शीर्ष तीन सरकारी पदों का नेतृत्व पहली बार महिलाओं के हाथ में होगा।  

आपदा पीड़ितों के लिए राहत सामग्री हुई रवाना, मनोहर लाल ने किया शुभारंभ

पंजाब  पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने जन-जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रदेश के 23 जिलों के सैकड़ों गांव पानी में डूबे हुए हैं। खासकर फिरोजपुर, तरनतारन, मोगा, गुरदासपुर और जालंधर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। खेत-खलिहान, घर और सड़कें पानी में डूबने से लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस त्रासदी की घड़ी में केंद्र सरकार पूरी संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ पंजाब सरकार और बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है। इसी क्रम में रविवार को केंद्रीय शहरी विकास, आवास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोनीपत भाजपा कार्यालय से राहत सामग्री से भरे ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन ट्रकों में कपड़े, खाद्य सामग्री, पानी की बोतलें, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान शामिल है, जिन्हें सीधे बाढ़ प्रभावित जिलों में भेजा जाएगा। मनोहर लाल ने कहा कि संकट की इस घड़ी में हरियाणा के लोग पंजाब के साथ खड़े हैं। भाजपा संगठन और कार्यकर्ता लगातार प्रभावित गांवों में पहुंचकर मदद पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया और सहयोग जारी रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर सोनीपत के मेयर राजीव जैन, विधायक निखिल मदान, राई से विधायक कृष्णा गहलोत सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने मिलकर राहत सामग्री चढ़ाने और उसके वितरण की तैयारी में हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं में देशवासियों की चिंता की है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से पंजाब के प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत मिलेगी और हालात सामान्य होंगे।

भयावह बाढ़ पंजाब में: 13,000 करोड़ से अधिक का आर्थिक और मानविक संकट

पंजाब पंजाब में बाढ़ ने तबाही मचा दी है। राज्य के 23 जिलों के 1960 गांव बाढ़ की मार झेल रहे हैं, जहां 1.74 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं और 46 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, लाखों लोगों के घर और सामान का नुकसान हुआ है। पंजाब सरकार के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, राज्य को बाढ़ से अब तक 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शनिवार को चंडीगढ़ में केंद्रीय टीम के सदस्यों के साथ बैठक में यह आंकड़े साझा करते हुए राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। केंद्रीय टीम को बताया गया कि किसानों के पशुधन का भी काफी नुकसान हुआ है। लगभग एक दर्जन जिलों की सड़कें, पुल, बिजली ट्रांसफार्मर, स्कूल, स्वास्थ्य संस्थान और कई अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान गुरदासपुर और अमृतसर में हुआ है। अधिकारियों ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के मुआवजा नियमों में संशोधन की मांग भी की, ताकि पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जा सके। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल क्षति के लिए 6800 रुपये प्रति एकड़ के बजाय 50 हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाने चाहिए। जनहानि के लिए 4 लाख रुपये के बजाय 8 लाख रुपये दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, विकलांगता के लिए 1.5 लाख रुपये और दुधारू पशु की मौत पर 75 हजार रुपये दिए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की छतें गिर गई हैं, उनके मुआवजे में भी वृद्धि की जानी चाहिए। हालांकि, पंजाब सरकार के विभिन्न विभाग बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं और अंतिम रिपोर्ट बाढ़ खत्म होने के बाद ही तैयार की जाएगी। गौरतलब है कि केंद्रीय अधिकारियों की एक टीम 4 सितंबर को पंजाब पहुंची थी और उसने दो दिनों तक विभिन्न बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा किया।    

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत! 3% DA बढ़ने वाला है, तारीख सामने आई

नई दिल्ली  त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तोहफा देने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3% की बढ़ोतरी का ऐलान करने वाली है। इस फैसले से देशभर में 1.2 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। जानकारी के अनुसार, इसका औपचारिक ऐलान अक्टूबर के पहले हफ्ते में किया जा सकता है। अभी कितना भत्ता मिल रहा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इस बार घोषणा का समय खास तौर पर दिवाली के समय करेगी। ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहारी मौसम में अतिरिक्त राहत मिल सके। बता दें कि संशोधन के बाद कर्मचारियों का डीए 55% से बढ़कर 58% हो जाएगा। यह बढ़ोतरी जुलाई 2025 से लागू मानी जाएगी यानी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई से सितंबर तक के तीन महीने का एरियर (बकाया) भी मिलेगा, जो अक्टूबर की सैलरी के साथ दिए जाने की संभावना है। कब-कब होता है डीए रिवीजन? केंद्र सरकार हर साल दो बार डीए में बढ़ोतरी करती है। पहला संशोधन होली से पहले (जनवरी-जून अवधि के लिए)। दूसरा संशोधन दिवाली से पहले (जुलाई-दिसंबर अवधि के लिए)। पिछले साल अक्टूबर 2024 में सरकार ने दिवाली से करीब 2 हफ्ते पहले डीए बढ़ाने का ऐलान किया था। इस साल दिवाली 20-21 अक्टूबर 2025 को है और उसी को देखते हुए इसे कर्मचारियों के लिए त्योहारी तोहफा माना जा रहा है। डीए कैसे तय होता है? डीए की गणना 7वें वेतन आयोग के तहत औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है। इसका फार्मूला 12 महीने के CPI-IW औसत पर आधारित होता है। जुलाई 2024 से जून 2025 तक CPI-IW औसत 143.6 रहा, जिसके आधार पर डीए दर 58% तय हुई है। यानि अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़कर 58% हो जाएगा, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत और त्योहारी सीजन में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। सैलरी और पेंशन पर असर अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹50,000 है, तो पहले 55% डीए के हिसाब से उसे ₹27,500 मिल रहा था। अब 58% डीए लागू होने पर यह बढ़कर ₹29,000 हो जाएगा। यानी हर महीने कर्मचारी को ₹1,500 अतिरिक्त मिलेंगे। इसी तरह, यदि किसी पेंशनभोगी की बेसिक पेंशन ₹30,000 है, तो पहले 55% डीआर के तहत उसे ₹16,500 मिल रहा था। अब 58% पर यह राशि बढ़कर ₹17,400 हो जाएगी। यानी पेंशनभोगी को हर महीने ₹900 ज्यादा मिलेंगे। हालांकि, यह बढ़ोतरी व्यक्ति की सैलरी या पेंशन पर निर्भर करेगी, लेकिन सामूहिक रूप से देखें तो करोड़ों परिवारों की आय में अच्छा-खासा इजाफा होगा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल यह डीए बढ़ोतरी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अल्पकालिक राहत देती है, लेकिन असली बदलाव 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद दिखेगा।  

बाढ़ से बेहाल पंजाब: प्रधानमंत्री मोदी पहुंचेंगे, जानिए किस हद तक होगा मदद पैकेज

पंजाब पंजाब में विनाशकारी बाढ़ ने हाहाकार मचा रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पंजाब में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक वह 9 सितंबर को पंजाब जाएंगे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। पीएम मोदी गुरदासपुर जाकर जमीनी स्तर पर हालात देखेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े राहत पैकेज का भी ऐलान कर सकते हैं। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है, जबकि 1.75 लाख हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सेना, सीमा सुरक्षा बल, पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। पंजाब दशकों में आई सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण सतलुज, ब्यास और रावी नदियों तथा मौसमी नालों के उफान के चलते यह स्थिति बनी है। इसके अलावा, हाल के दिनों में पंजाब में हुई भारी बारिश ने हालात को और गंभीर कर दिया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को पोंग बांध का जलस्तर मामूली घटकर 1,394.19 फुट दर्ज किया गया, हालांकि यह अब भी उसकी अधिकतम सीमा 1,390 फीट से चार फुट ऊपर है। शुक्रवार शाम बांध का जलस्तर 1,394.8 फुट था। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को बांध में पानी का प्रवाह 99,673 क्यूसेक था, जो घटकर 47,162 क्यूसेक रह गया, जबकि निकासी 99,673 क्यूसेक पर यथावत बनी रही। भाखड़ा बांध के मामले में शनिवार को जलस्तर 1,678.14 फुट दर्ज किया गया, जो शुक्रवार को 1,678.47 फुट था। सतलुज नदी पर बने इस बांध में पानी का प्रवाह 62,481 क्यूसेक और निकासी 52,000 क्यूसेक रही। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बाढ़ को पांच दशकों में सबसे भीषण बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब और पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में लगातार हुई बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है, जिससे सभी जिलों के लगभग 2,000 गांव प्रभावित हुए हैं। ताजा बुलेटिन के अनुसार, 3.87 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 46 मौतों की पुष्टि हुई है। एक अगस्त से पांच सितंबर के बीच 14 जिलों से 43 मौतें दर्ज की गई थीं। कुल 23 जिलों के 1,996 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक सात-सात मौतें होशियारपुर और अमृतसर से हुईं। इसके बाद पठानकोट में छह, बरनाला में पांच, लुधियाना और बठिंडा में चार-चार, मानसा में तीन, गुरदासपुर, रूपनगर और एसएएस नगर में दो-दो और पटियाला, संगरूर, फाजिल्का और फिरोजपुर से एक-एक मौत दर्ज की गई। पठानकोट में तीन लोग लापता हैं। इसी बीच, फिरोजपुर जिले के तल्ली गुलाम गांव का 50 वर्षीय व्यक्ति उफनती नदी की तेज धारा में बह गया और उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जिले में पानी का स्तर खतरनाक स्तर पर है और लगातार बाढ़ से गांवों में रहने वालों का जीवन कठिन हो गया है। बाढ़ से संबंधित यह आंकड़े एक अगस्त से छह सितंबर तक की अवधि के हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 22,854 लोगों को प्रभावित इलाकों से निकाला जा चुका है। चीमा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि क्षेत्र को 18 जिलों में भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, मकानों और पशुधन को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि घग्गर नदी का जलस्तर भी 750 फुट के खतरे के निशान को पार कर गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने इस अभूतपूर्व बाढ़ पर तुरंत कार्रवाई करते हुए संवेदनशील रवैया अपनाया है। मंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से जवाबदेही और समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि इस संकट के लिए "राजनीतिक अवसरवाद" के बजाय सहयोगात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। चीमा ने कहा कि तबाही के बावजूद पंजाब सरकार ने तेज और समन्वित तरीके से कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में लगभग 200 राहत शिविर लगाए गए हैं, जहां 7,000 से अधिक विस्थापित लोगों को शरण दी गई है। एनडीआरएफ की 24 और एसडीआरएफ की दो टीमें, 144 नौकाओं की मदद से राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर शनिवार को निशाना साधते हुए कहा कि वह बाढ़ के लिए नदियों में अवैध खनन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता वित्तीय मदद की घोषणा करने के बजाय सिर्फ “फोटो खिंचवाने” के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करते हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया और कहा कि चौहान ने बाढ़ सहायता के लिए “एक पैसा” भी घोषित नहीं किया, जबकि राज्य सरकार ने केंद्र से ‘लंबति’ 60,000 करोड़ रुपये की मांग की है। ‘आप’ के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। वहीं होशियारपुर जिले में टांडा और मुकेरियां उप-विभागों के निचले इलाकों में भारी नुकसान हुआ है, जहां धान, गन्ना और मक्का जैसी फसलों को भारी क्षति हुई है। उपायुक्त आशिका जैन ने कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा दिया जाएगा और समय पर राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग समन्वय से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। इस बीच, कपूरथला जिले के उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि ब्यास नदी में पानी का प्रवाह 1.72 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। 

अखिलेश यादव का जोरदार हमला: भाजपा के अंदरूनी विवादों पर सियासी तंज

लखनऊ उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने मेरठ में जिलाध्यक्षों की क्लास ली. उन्होंने अध्यक्षों को शुचिता और मर्यादा का पाठ पढ़ाया. इतना ही नहीं एमएलसी और पंचायत चुनाव जीतने के गुर बताए. एमएलसी और पंचायत चुनावों की तैयारी की क्षेत्रीय बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि थाने चौकी जैसे सरकारी व्यवस्था से जुड़े कार्यों को सांसद और विधायकों के लिए छोड़ दें. उन्होंने जिलाध्यक्षों को हिदायत देते हुए कहा कि थाना-चौकी छोड़कर जिलाध्यक्ष संगठन को संभालें. इस पर अखिलेश यादव ने चुटकी ली है. अखिलेश यादव ने भाजपा के खात्मे के कई कारण बताए हैं. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि ‘भाजपाइयों को जमीन-कब्जा, भ्रष्टाचार, अंदरूनी लड़ाई और आपसी उठा-पटक से फ़ुरसत मिले तब तो वे संगठन के बारे में सोचें. भाजपा के खात्मे के मूल कारण हैं:       भाजपा की सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की नकारात्मक राजनीति     ⁠अकूत पैसे कमाने की महाभ्रष्ट सोच     ⁠किसान, मजदूर, युवा, महिला, नौकरी-कारोबार विरोधी नीतियां     ⁠भाजपाइयों के किसी के सगे नहीं होने के हर दिन बढ़ते उदाहरण     ⁠भाजपाइयों के हर स्तर व हर तरफ से भ्रष्ट-चारित्रिक पतन के आते समाचार व वीडियो     ⁠भाजपा व उनके संगी-साथियों द्वारा संविधान व आरक्षण को पिछले दरवाजे से खत्म करने की साजिश     ⁠भाजपा द्वारा अपने सहयोगी दलों का घोर अपमान, उपेक्षा व तिरस्कार     ⁠पीडीए के लिए भाजपाइयों के मन में कूट-कूटकर भरी दुर्भावना     ⁠पीडीए समाज के उत्पीड़न-शोषण को बढ़ावा देने की वर्चस्ववादी सोच सच तो ये है कि समाज में दरार डालते-डालते भाजपा खुद ही दरारों से भर गई है. भाजपा गई!’