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बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की बाढ़ प्रभावित इलाकों पर CM साय की नजर, राहत कार्यों का किया मूल्यांकन रायपुर में CM विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत इंतजामों की समीक्षा बैठक की दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक : स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश रायपुर दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक:स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में बाढ़, आपदा एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, क्षेत्रीय विधायक चैतराम अटामी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने विगत 26 एवं 27 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से हुई हानि तथा प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की जानकारी बैठक के माध्यम से ली। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासनिक अमलों द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक तत्परता एवं त्वरित कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते माह आई इस प्राकृतिक आपदा और विभीषिका से जो जन-धन एवं अधोसंरचना की क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। यह संतोष की बात है कि जिला प्रशासन द्वारा फौरी तौर पर बचाव एवं राहत कार्य के लिए कदम उठाए गए। साथ ही शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन दान स्वरूप दिया, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ आपदा से चारों जिलों में 115 करोड़ रुपये की विभिन्न अधोसंरचनाओं को क्षति हुई है। इनकी मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गैर-शासकीय एवं स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चारों जिलों में स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं स्वास्थ्य शिविर आवश्यकतानुसार जारी रखें। उन्होंने कहा कि प्रशासन निरंतर प्रभावितों के संपर्क में रहे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सतत जारी रखे। इसके लिए लगातार कैंप लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए तथा उन्हें समसामयिक सलाह देते हुए आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को राहत राशि अविलंब जारी करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न होने पाए। इसके लिए कार्यपालन अभियंता तत्काल प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को प्रेषित करें। साथ ही केशकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के सुधार कार्य हेतु तात्कालिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने पशु-हानि पर दी जाने वाली मुआवजे की राशि के लिए नए निर्देशों के अनुसार आवंटन देने हेतु कलेक्टरों को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में मलेरिया, टाइफाइड एवं जलजनित रोग पनपने न पाएं। उन्होंने पेयजल के सभी स्रोतों में क्लोरीनेशन कराने और उसका परीक्षण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इससे पहले दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टरों ने निर्धारित एजेंडा अनुसार बाढ़ से हुई क्षति और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की क्रमवार जानकारी दी। बैठक में अतिवृष्टि से प्रभावित ग्रामों, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों, बाधित विद्युत आपूर्ति एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति प्रस्तुत की गई। साथ ही जन-धन हानि, बाढ़ में बह गए घरों एवं मवेशियों के बारे में संख्यात्मक एवं तथ्यात्मक आंकड़े पीपीटी के माध्यम से साझा किए गए। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावितों का रेस्क्यू कर उन्हें राहत कैंपों में ठहराना, तात्कालिक उपचार उपलब्ध कराना और खाद्य सामग्री वितरित करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सर्वाधिक क्षति नदी-नालों के किनारे स्थित ग्रामों के निवासियों को हुई है, परंतु समय पर प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराई गई। बैठक में बस्तर संभाग के संभागायुक्त डोमन सिंह, आईजी बस्तर सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत, सुकमा कलेक्टर देवेश ध्रुव, बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा, जिला पंचायत बस्तर के सीईओ प्रतीक जैन सहित एसपी एवं जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।

रायपुर : किसानों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल : इस माह मिलेगा 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर किसानों के हित में एक बड़ी राहत मिल रही है। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में 20 हजार टन, द्वितीय सप्ताह में 35 हजार टन और शेष 5 हजार टन की आपूर्ति माह के अंत तक सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार संवेदनशील है और यह अतिरिक्त आबंटन उनकी खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने में सहायक होगा। मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के लिए 28 अगस्त की स्थिति में सहकारी क्षेत्र में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन, इस तरह कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है। इसके विरुद्ध 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसमें 3 लाख 42 हजार 444 मीट्रिक टन सहकारी क्षेत्र और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र से वितरण शामिल है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 6 लाख 17 हजार 798 मीट्रिक टन वितरण से अधिक है, जो इस बार की बेहतर आपूर्ति व्यवस्था का प्रमाण है। प्रदेश में किसानों के लिए नैनो खाद की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 78 हजार 919 और निजी क्षेत्र में 1 लाख 12 हजार 140, इस तरह कुल 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल नैनो यूरिया का भंडारण हुआ है। इसी प्रकार सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 58 हजार 809 और निजी क्षेत्र में 79 हजार 810, कुल 2 लाख 38 हजार 619 बॉटल नैनो डीएपी संग्रहित किया गया है। अब तक किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल नैनो यूरिया और 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल नैनो डीएपी वितरित किया जा चुका है। प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार ने 14.62 लाख टन रासायनिक खाद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके विरुद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख टन का भंडारण कर लिया गया है। भंडारण के आधार पर किसानों को अब तक 13.19 लाख टन खाद वितरित किया गया है। यह व्यवस्था बताती है कि समितियों और निजी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रदेश के किसानों को इस माह बड़ी राहत मिली है। भारत सरकार ने सितंबर माह के लिए छत्तीसगढ़ को कुल 60,800 मीट्रिक टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें 58,100 मीट्रिक टन स्वदेशी और 2,700 मीट्रिक टन आयातित यूरिया शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में यूरिया की आपूर्ति लगभग 100 प्रतिशत स्वदेशी कंपनियों के माध्यम से होती है। इसलिए इस माह किसानों को यूरिया की कोई कमी नहीं होगी। कंपनी प्रतिनिधियों से चर्चा के उपरांत यह जानकारी दी गई कि सितंबर माह के कुल स्वदेशी आबंटन का लगभग 30 से 35 प्रतिशत अर्थात् करीब 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया प्रथम सप्ताह में उपलब्ध हो जाएगा। इसके अतिरिक्त आगामी 15 दिनों में लगभग 60 प्रतिशत यानी 35 हजार मीट्रिक टन तथा शेष मात्रा भी माह के अंत तक आपूर्ति कर दी जाएगी। राज्य सरकार ने सभी कंपनियों को समयबद्ध रेकवार आपूर्ति कार्यक्रम प्रस्तुत करने और किसानों की मांग के अनुसार उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि आगामी 10 से 12 दिनों में मांग के अनुरूप आपूर्ति कर ली जाएगी और प्रदेश में यूरिया की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की सुविधा के लिए भारत सरकार के इस सहयोग पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समय पर उपलब्ध यूरिया से खरीफ फसलें सुरक्षित रहेंगी और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की आपूर्ति उनकी समयबद्ध जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकता से की जा रही है। अब तक निर्धारित लक्ष्य का 98 प्रतिशत यूरिया किसानों तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को मौसम और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त खाद की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी और उनकी उपज सुरक्षित रहेगी। इस संबंध में गत दिनों कृषि मंत्री रामविचार नेताम और राज्य के सांसदों ने भी केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा से भेंट कर छत्तीसगढ़ के किसानों की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार से लगातार संपर्क किया गया और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 60 हजार टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में सहकारी सोसायटियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद का वितरण सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। किसान समितियों में आसानी से खाद उपलब्ध करा पा रहे हैं और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे खेती-किसानी प्रभावित होने के बजाय और मजबूती पा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसानों ने सरकार और प्रशासन की इस पहल पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर यूरिया और अन्य खाद उपलब्ध होने से बुवाई और फसल प्रबंधन का काम सुचारू रूप से हो रहा है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से खरीफ सीजन में किसानों को समुचित राहत मिलेगी और छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर FIR, लेखपाल-नायब तहसीलदारों ने धरना दिया

लखनऊ  सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर ही FIR लाद दी गई । सरकारी कर्मचारियों पर हुई एफआईआर के विरोध में नगर निगम मुख्यालय पर लेखपालों और नायब तहसीलदारों ने धरना दिया । मांग रखी गई है कि एफआईआर निरस्त कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने चेतावनी भी दी कि जब तक एफआईआर वापस नहीं होगी, तब तक सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई भी नहीं करेंगे। पूरा मामला 25 अगस्त को अर्जुनगंज क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में करीब डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान बत्तमीजी करने पर नायब तहसीलदार ने किसान को धक्का मार दिया था। इस मामले में 28 अगस्त को नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार और लेखपाल सुभाष कौशल पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर दर्ज होने से नगर निगम में तैनात लेखपाल और नायब तहसीलदार लामबंद हो गए और सोमवार दोपहर एक से शाम पांच बजे तक मुख्यालय पर धरना दिया। इसमें निगम संपत्ति विभाग के साथ-साथ चकबंदी संघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए। नायब तहसीलदार रत्नेश ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई थी। फरवरी में कब्जेदार राममिलन को नोटिस जारी किया गया था। अप्रैल में भी कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन विरोध और गाली-गलौज के कारण लौटना पड़ा। आखिरकार 25 अगस्त को पुलिस बल के साथ कार्रवाई करनी पड़ी। धरने में रखी गईं यह प्रमुख मांगें – डीसीपी दक्षिणी, एसीपी गोसाईंगंज और सुशांत गोल्फ सिटी के थानाध्यक्ष का ट्रांसफर किया जाए। – अतिक्रमण हटाने के दौरान नगर निगम टीम को पुलिस पूरी सुरक्षा दे। – एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो। – कब्जा हटाते वक्त जब टीम से गाली-गलौज हुई तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इसकी जांच हो।

तत्पर प्रशासन, राहत का सहारा! बाढ़ प्रभावितों को मिला जरूरी राशन

रायपुर दंतेवाड़ा में हाल ही में आई बाढ़ से निपटने और प्रभावितों को आवश्यक मदद पहुँचाने में प्रशासन तत्पर रहा। अपने विदेश दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कोरिया से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर बाढ़ प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। आज मुख्यमंत्री के दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा पहुँचने पर बाढ़ प्रभावित परिवारों ने प्रशासन द्वारा समय पर बचाव एवं राहत पहुँचाने के लिए आभार व्यक्त किया। मौजूद लोगों ने कहा कि सरकार की इस संवेदनशील पहल से सभी प्रभावित परिवार सुरक्षित और सकुशल हैं। राहत शिविर में रहने, भोजन और इलाज जैसी सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। बाढ़ पीड़ित गुप्तेश्वरी कश्यप, शालिनी शर्मा, सविता पात्रे एवं लता सागर ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि राहत शिविर में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है और अब राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा भी दिया गया है। मकान ढहने पर सहायता राशि भी मिल चुकी है और अब घर बनने तक वे यहाँ राहत शिविर में रहेंगे। प्रभावितों ने बताया कि बाढ़ आने के साथ ही प्रशासन की अपील पर सभी लोग सुरक्षित ऊँचे स्थान पर चले गए थे। फिर बाढ़ का पानी उतरने के बाद उन्हें चूड़ी टिकरापारा के छात्रावास भवन में राहत शिविर में ठहराया गया। इसी तरह रीता कश्यप, द्रोपदी नाग, कुंदन गुप्ता, महेश नाग, बबीता नाग सहित अन्य प्रभावितों ने भी प्रशासन के राहत एवं पुनर्वास प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री के समक्ष भावुक हुईं सोमड़ी सोढ़ी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय बाढ़ प्रभावितों से मिलने के दौरान चूड़ी टिकरापारा निवासी सोमड़ी सोढ़ी के घर पहुँचे तो श्रीमती सोमड़ी सोढ़ी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से पूरा घर डूब गया था। बाढ़ आने के एक दिन पहले वह अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुई थीं और उनकी दोनों बेटियाँ भी साथ में थीं, इस कारण उनकी जान बच गई। अस्पताल से ठीक होकर शुक्रवार को वह घर लौटीं। सोमड़ी ने बताया कि बाढ़ के पानी में घर का पूरा सामान खराब हो गया है। इस बीच प्रशासन ने राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा उपलब्ध कराया है। साथ ही राहत शिविर में नाश्ता, भोजन और इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। इस आपदा की घड़ी में सरकार की सहायता के लिए श्रीमती सोमड़ी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार प्रकट किया। इसी तरह दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा के बाढ़ प्रभावित सुरेश बघेल ने बताया कि बाढ़ आने के दिन पूरा परिवार घर में ही था। प्रशासन की सूचना पर वे सभी सुरक्षित स्थान पर चले गए और एक दिन बाद राहत शिविर पहुँचे। पिछले शुक्रवार को वे शिविर से घर लौटे हैं। सुरेश ने बताया कि प्रशासन द्वारा राशन, बर्तन, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा, कंबल-चादर और कपड़े जैसे सभी जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।

रायपुर: बाढ़ में गईं किताबें और टेबलेट खराब, फिर भी नहीं रुकी पूनम की पढ़ाई

रायपुर : बाढ़ में बही पुस्तकें, टेबलेट भी हुआ खराब, पर नहीं रुकेगी पूनम की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी रायपुर: बाढ़ में गईं किताबें और टेबलेट खराब, फिर भी नहीं रुकी पूनम की पढ़ाई मुसीबतों के बीच जज्बा! बाढ़ में बह गईं पुस्तकें, पूनम फिर भी कर रही तैयारी मुख्यमंत्री की पहल पर पूनम को मिली पुस्तकें और नया टेबलेट रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर बाढ़ से प्रभावित दंतेवाड़ा की पूनम पटेल की प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी आगे भी निर्बाध जारी रहेगी। पूनम पटेल, दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में रहकर पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में दंतेवाड़ा में आई बाढ़ से प्रभावित होने के कारण पूनम का पूरा परिवार राहत शिविर में है। आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूनम से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। मुख्यमंत्री की पहल पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी हेतु पूनम को आवश्यक पुस्तकें और एक नया टेबलेट उपलब्ध कराया गया है। अब पूनम की यूपीएससी तैयारी में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। दंतेवाड़ा जिले के चूड़ीटिकरा पारा वार्ड की रहने वाली पूनम पटेल पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में आई बाढ़ में उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया और घर का सारा सामान बह गया। पूनम ने बताया कि बाढ़ के पानी में उनकी सभी पुस्तकें बह गईं और टेबलेट भी खराब हो गया। पूनम ने कहा कि उनके पिता संतोष पटेल किराना दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उन्हीं की आमदनी से बड़ी मुश्किल से एक-एक पैसा जोड़कर यूपीएससी की पढ़ाई के लिए टेबलेट खरीदा था। बाढ़ के पानी में पुस्तकें और टेबलेट खराब हो जाने से पूनम आगे की तैयारी को लेकर बेहद चिंतित थीं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा पूनम को नया टेबलेट और प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। इस सहायता से पूनम को बड़ी राहत मिली है। अब पूनम के प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह में बाढ़ भी बाधा नहीं डाल पाएगी।

बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत, सीएम मान ने घोषित की लाखों की आर्थिक सहायता

होशियारपुर  पिछले कुछ दिनों से होशियारपुर में हो रही भारी बारिश के कारण हजारों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और 7 लोगों की जान चली गई है। छत गिरने से 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य लोग लगातार बारिश के कारण आए बाढ़ के पानी में डूब गए। इस त्रासदी पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रभावित परिवारों को 4-4 लाख रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। 7 शोक संतप्त परिवारों में कुल 28 लाख वितरित किए जाएंगे। होशियारपुर के सांसद डा. राज कुमार चब्बेवाल ने नौगराईं गांव के मृतक सुरमू मोहम्मद के परिवार को व्यक्तिगत रूप से 4 लाख का मुआवजा चैक सौंपा। वह बाढ़ के पानी में बह गए थे और उनकी मृत्यु हो गई। इस अवसर पर डा. राज कुमार ने गहरी संवेदना व्यक्त की और संकट की घड़ी में लोगों के साथ खड़े रहने की पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रही है और बारिश व बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए शीघ्र सहायता और पुनर्वास सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा, "प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने और पीड़ितों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। डा. राज ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को यह भी आश्वासन दिया कि वह 24×7 फ़ोन पर उपलब्ध हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का व्यक्तिगत रूप से दौरा करके स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्होंने ख़तरनाक और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर उनके लिए बनाए गए सुरक्षित आश्रय गृहों में जाने का आग्रह किया और लोगों को सलाह दी कि वे बाढ़ग्रस्त चो या पुलों का उपयोग करके अपनी जान जोखिम में न डालें। हाल ही में हुई बारिश ने पंजाब के विभिन्न हिस्सों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य जारी हैं। 

रायपुर : शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव से श्री ओमप्रकाश सेन ने की सौजन्य भेंट

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव से आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में  स्थित उनके कार्यालय में श्री ओमप्रकाश सेन ने सौजन्य मुलाकात की। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के 3 दिवसीय आईडीसी कैम्प में छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिनिधि श्री ओमप्रकाश सेन ने सक्रिय सहभागिता करते हुए प्रदेश का गौरव बढ़ाया।            शासकीय कचना धुरवा कॉलेज, छुरा जिला – गरियाबंद में बी कॉम तीसरे सेमेस्टर के छात्र श्री ओमप्रकाश सेन, ग्राम दादरगांव पुराना निवासी हैं। कैम्प से लौटने के उपरांत उन्होंने मंत्री श्री यादव से मुलाकात की। मंत्री श्री यादव ने ओमप्रकाश सेन को राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की भागीदारी हेतु हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवा शक्ति ही देश का भविष्य है। प्रदेश के छात्र राष्ट्रीय मंचों पर सहभागिता कर समाज और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने श्री ओमप्रकाश सेन के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे भी इसी तरह सामाजिक व शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान देते हुए आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया।

मार्केट में वापसी! रिलायंस ने दिलाई रफ्तार, सेंसेक्स 300 अंक उछला

मुंबई  शेयर बाजार में तेजी लगातार दूसरे दिन जारी है, मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स-निफ्टी मंगलवार को भी ग्रीन जोन में ओपन हुए. एक ओर जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 80500 के पार ओपन हुआ, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी अपने पिछले बंद के मुकाबले उछाल के साथ कारोबार की शुरुआत करता नजर आया. इस बीच काफी दिनों से सुस्त पड़े देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में ओपनिंग के साथ ही जोरदार तेजी देखने को मिली है.  सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी जारी बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,364.49 की तुलना में 80,520.09 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में ये 8057.94 के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया. इसके साथ ही एनएसई का निफ्टी अपने पिछले कारोबारी बंद 24,625.05 के मुकाबले मामूली उछाल के साथ 24,653 पर खुला और फिर इसके बाद ये तेज रफ्तार पकड़ते हुए नजर आया और 24,685.85 पर ट्रेड करने लगा.  सुस्ती से जागा रिलायंस का शेयर  शेयर बाजार में कारोबार ओपन होने के साथ ही कई दिनों से गिरावट झेल रहा मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस का शेयर मंगलवार को ओपनिंग के साथ ही रफ्तार पकड़ता हुआ नजर आया. ये अंबानी स्टॉक 2.05% की उछाल के साथ 1381 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. शेयर में लौटी तेजी के चलते रिलायंस का मार्केट कैपिटल भी उछलकर एक बार फिर 19 लाख करोड़ रुपये के पार जा पहुंचा.  इसके अलावा लार्जकैप कंपनियों में शामिल एटरनल शेयर (1.74%), एनटीपीसी शेयर (1.36%), पावर ग्रिड शेयर (1.35%), एचयूएल शेयर (1.20%) की तेजी लेकर कारोबार करता दिखा.  मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर नजर  लार्जकैप स्टॉक्स के अलावा अगर नजर डालें, मिडकैप और स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल कंपनियों के शेयरों पर, तो सन टीवी शेयर (6.54%), फोनिक्स शेयर (4.47%), जेएसडब्ल्यू इंफ्रा शेयर (2.18%) और ओलेक्ट्रा शेयर (2.10%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा पीएसबी, एमआईएसीएल, सेंट्रल बैंक, गोदरेज प्रॉपर्टी के शेयर भी ग्रीन जोन में बने हुए थे.  वहीं स्मॉलकैप में रेणुका इंडस्ट्री का शेयर 12.20 फीसदी की जोरदार तेजी लेकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा शुगर कंपनियों के स्टॉक्स में भी तेजी देखने को मिली. इनमें शामिल धर्मपुर शुगर जहां 11.59%, अवध शुगर में 8.92%, तो वहीं उत्तम शुगर 8.83% की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था. इसके अलावा मोबीक्विक शेयर (9.59%), आईटीआई शेयर (8.30%) चढ़कर ट्रेड कर रहा था. 

चंद्र ग्रहण 2025 : सूतक काल कब से कब तक, जानिए मान्यताएं और महत्व

7 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा की रात पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। ये ग्रहण भारत में दिखाई देगा। 2025 में भारत में दिखाई देने वाले ये एक मात्र ग्रहण है। इसके बाद 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण होगा, जो कि भारत में नहीं दिखेगा। उज्जैन की जीवाजी वैधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त के मुताबिक, चंद्र ग्रहण 7 और 8 सितंबर की दरमियानी रात होगा। इसकी शुरुआत 7 सितंबर की रात 9.56 बजे से होगी। ग्रहण का मध्य रात 11.41 बजे रहेगा। इस समय पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। इसके बाद 8 सितंबर की रात 1.26 बजे ग्रहण खत्म हो जाएगा। ये पूर्ण चंद्र ग्रहण एशिया, हिन्द महासागर, अंटार्कटिका, पश्चिमी प्रशांत महासागर, आस्ट्रेलिया और यूरोप में भी दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण कैसे होता है? चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। चंद्र ग्रहण तब होता है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी लाइन में आ जाते हैं। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है, तो ये चंद्रमा तक पहुंचने वाले सूर्य के प्रकाश को रोक देती है। इस स्थिति में, चंद्र पर पृथ्वी की छाया पड़ने लगती है। नतीजतन, हमें चंद्र या तो आंशिक रूप से या पूरी तरह से ढंका हुआ दिखाई देने लगता है। तीन प्रकार के होते हैं चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण: चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाता है और लालिमा लिए दिखता है, इसे ब्लड मून भी कहते हैं। आंशिक चंद्र ग्रहण: चंद्रमा का कुछ हिस्सा ही पृथ्वी की छाया में आता है। उपछाया चंद्र ग्रहण: चंद्रमा केवल पृथ्वी की हल्की छाया में आता है, जिससे ये थोड़ा-सा धुंधला दिखता है, यह परिवर्तन मुश्किल से नजर आता है। इस ग्रहण की धार्मिक मान्यता नहीं होती है। ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस बार चंद्र ग्रहण का सूतक दोपहर 12.56 बजे से शुरू होगा और ग्रहण खत्म होने के साथ ही खत्म होगा। सूतक के समय में भगवान की पूजा नहीं की जाती है, इसलिए मंदिरों के पट बंद रहते हैं। ग्रहण के सूतक के समय में मंत्रों का मानसिक जप करना चाहिए। मानसिक जप यानी मन ही मन मंत्रों का जप करें। मंत्र बोलना नहीं है। इस समय में दान-पुण्य करना चाहिए। गायों को हरी घास खिलाएं। चंद्र ग्रहण के बाद मंदिरों में सफाई होती है और फिर मंदिर के पट भक्तों के लिए खोले जाते हैं।​​​​​​

जीवन के 5 कड़वे सच: जिन्हें अपनाकर रहेंगे हमेशा खुश और बेफ़िक्र

हर इंसान अपनी लाइफ में खुश रहना चाहता है, लेकिन फिर भी कई बार दुख, परेशानी और तनाव हमें घेर ही लेते हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि हम जीवन के कुछ बेहद सरल लेकिन गहरे सच को नजरअंदाज कर देते हैं। जो व्यक्ति इन बातों को समझ लेता है, वो छोटी-छोटी बातों में उलझता नहीं और हर हाल में खुश रहना सीख जाता है। जबकि जो इंसान इन सच्चाइयों को नजरअंदाज करके बेवजह की उम्मीद लगाए बैठा रहता है, उसे दुख और परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिलता है। यकीन मानिए खुश रहना इतना भी मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो कुछ चीजों को जानने की और उन्हें एक्सेप्ट करने की। आइए जानते हैं जीवन से जुड़े इसी सच को। हर चीज पर हमारा कंट्रोल नहीं हो सकता हम अक्सर सोचते हैं कि सब कुछ हमारे हिसाब से हो, हर परिस्थिति वैसी बने जैसी हम चाहें। लेकिन सच्चाई तो यही है कि जीवन में बहुत सी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं, जैसे-पूरी मेहनत के बाद भी फल ना मिलना, किसी दूसरे का आपके साथ बुरा व्यवहार करना या अचानक कोई मुश्किल खड़ी हो जाना। जब हम ये मान लेते हैं कि हर चीज को नियंत्रित करना नामुमकिन है, तो मन को शांति मिलने लगती है। नियंत्रण की जरूरत कम हो जाती है और हम चीजों को स्वीकार करना सीख जाते हैं। यही बात हमारी चिंता को घटाकर खुश रहने की राह खोलती है। परिवर्तन संसार का नियम है कहने को तो ये बात बेहद छोटी है, लेकिन इसमें एक गहरी सच्चाई छुपी हुई है। लोग ये बात सुन तो लेते हैं लेकिन मानने को तैयार नहीं होते कि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं। अच्छे दिन आते हैं और चले भी जाते हैं, वैसे ही बुरे वक्त भी हमेशा के लिए नहीं होते। अगर हम इन बातों को समझ लें कि हर चीज बदलने वाली है, तो हम दुख के समय टूटते नहीं और सुख के समय घमंड नहीं करते। परिवर्तन को जीवन का हिस्सा मानना हमें संतुलित बनाए रखता है और लाइफ के इस बैलेंस में ही सच्चा सुख छिपा हुआ है। तुलना करना दुख की सबसे बड़ी जड़ है इंसान के दुख की सबसे बड़ी वजह है कि वह दूसरों से अपनी तुलना करता है। किसी और की जिंदगी को देखकर, खुद को कम आंकने लगता है। आजकल सोशल मीडिया के दौर में तो ये चीजें और भी बढ़ गई हैं। अगर सुखी जीवन जीना है तो दूसरों से तुलना करना बंद करना होगा। हर इंसान को यह समझना चाहिए कि हर इंसान की जिंदगी का सफर अलग-अलग होता है। जब दो लोगों के चेहरे एक से नहीं होते तो भला दो इंसानों की जिंदगी एक जैसी कैसे हो सकती है। बस ये छोटी सी बात जो समझ जाता है, उसका जीवन बहुत आसान और सुलझा हुआ हो जाता है। सब कुछ हमेशा परफेक्ट नहीं होता जीवन में सब कुछ ठीक हो, हर काम बिना रुकावट के पूरा हो, ऐसी उम्मीद करना भी दुख का एक कारण है। असल जिंदगी में अधूरे काम, अधूरे सपने और उलझने हमेशा रहेंगी। कई बार परफेक्शन का पीछा करना ही दुख का कारण बन जाता है। जब हम लाइफ की इसी अनसर्टेनिटी को अपनाते हैं, तो हम प्रेजेंट में जीना सीखते हैं और यही प्रेजेंट हमें खुश रहने का रास्ता दिखाता है। हर नया दिन ईश्वर का दिया हुआ एक तोहफा है हम अक्सर भविष्य की चिंता में या बीते कल के पछतावे में खो जाते हैं, जो हमारे दुख का एक बड़ा कारण बन जाता है। लेकिन हर किसी को समझना चाहिए कि हर नया दिन, जीवन की नई शुरुआत है। ईश्वर हमें एक नया दिन जीने का मौका दे रहे हैं, इसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए और उसे भगवान का एक खूबसूरत तोहफा समझकर नई एनर्जी के साथ जीना चाहिए। जो इंसान हर नए दिन को नई शुरुआत मानकर जीना शुरु कर देता है, उसके जीवन के दुख खुद ब खुद कम हो जाते हैं।