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राहुल गांधी केस अपडेट: सुनवाई की नई तारीख 3 सितंबर तय

प्रयागराज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के लिए तीन सितंबर की तिथि सोमवार को तय की। राहुल गांधी ने वाराणसी के विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली एक याचिका नए सिरे से सुनवाई करने के लिए एसीजेएम की अदालत के पास भेज दिया जिसके खिलाफ राहुल गांधी ने इस उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह मामला अमेरिका में सिखों के संबंध में 2024 में दिए गए एक बयान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता नागेश्वर मिश्रा के वकील के अनुरोध पर न्यायमूर्ति समीर जैन ने सोमवार को सुनवाई टाल दी और अगली तिथि तीन सितंबर तय की। वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) के समक्ष एक आवेदन किया था जिसने 28 नवंबर, 2024 को इस मामले में सुनवाई के बाद राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाले आवेदन को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि उक्त भाषण अमेरिका में दिया गया, इसलिए यह मामला उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है। अदालत द्वारा मामला खारिज किए जाने को राव ने पुनरीक्षण अदालत के समक्ष चुनौती दी जिसने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली और एसीजेएम को इस मामले में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया। यह मामला सितंबर, 2024 का है। अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है। उनके इस बयान को लेकर विरोध हुआ था और इसे भड़काऊ और विभाजनकारी बताया गया था। वाराणसी के निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस बयान के खिलाफ वाराणसी के सारनाथ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन जब वह सफल नहीं हुए तो उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अदालत में एक आवेदन दाखिल किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 28 नवंबर, 2024 को यह कहते हुए उनका आवेदन खारिज कर दिया था कि यह मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है और यह उनके न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है। इसके बाद, नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसे अदालत द्वारा 21 जुलाई, 2025 को स्वीकार कर लिया गया। अब राहुल गांधी ने इस निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की है जिसमें दलील दी गई है कि वाराणसी की अदालत का आदेश गलत, अवैध और न्यायिक क्षेत्र से बाहर का है।  

आतंकवाद पर PM मोदी के तीखे तेवर, PAK को मिली सख्त नसीहत

बीजिंग  शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर सीधा हमला बोला और पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया. खास बात यह रही कि मोदी का यह भाषण उस वक्त हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी वहीं मौजूद थे. क्या बोले पीएम मोदी? पीएम मोदी ने कहा, 'हाल ही में हमने पहलगाम में आतंकवाद का बहुत ही घिनौना रूप देखा. इस दु:ख की घड़ी में, जो मित्र देश हमारे साथ खड़े रहे, मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं. यह हमला केवल भारत की अंतरात्मा पर ही आघात नहीं था, यह मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश, हर व्यक्ति को खुली चुनौती थी. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है, क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुलेआम समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है?' 'SCO को लेकर भारत की नीति के तीन स्तंभ' प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में SCO को लेकर भारत की नीति के तीन स्तंभ बताए- S यानी Security (सुरक्षा), C यानी Connectivity (कनेक्टिविटी) और O यानी Opportunity (अवसर). उन्होंने कहा कि सुरक्षा, शांति और स्थिरता विकास की नींव हैं, लेकिन आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद इस राह की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं.  मोदी का भाषण सुन उड़ा शहबाज के चेहरे का रंग उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद पर किसी भी तरह के डबल स्टैंडर्ड स्वीकार्य नहीं होंगे और सभी देशों को एकजुट होकर इसका हर रूप में विरोध करना होगा. पीएम मोदी जब आतंकवाद पर भाषण दे रहे थे तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ उनके सामने ही बैठे थे. जैसे ही पीएम ने पहलगाम हमले का जिक्र किया शहबाज के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं.

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया हवाई और जमीनी सर्वेक्षण

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों दंतेवाड़ा और बस्तर का हवाई सर्वेक्षण एवं जमीनी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर सहायता पहुँचना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता तथा तत्परता आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय दंतेवाड़ा के चूड़ीटिकरा पारा में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर पहुँचे, जहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि शिविरों में पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आवास की व्यवस्था निरंतर बनी रहे। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनके पुनर्वास के कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों में सभी जरूरी व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को राशन, बर्तन और कपड़े जैसे आवश्यक सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बाढ़ प्रभावितों को आवश्यकता अनुसार मकान की मरम्मत अथवा नए मकान निर्माण के लिए सहायता राशि समय पर देने के निर्देश दिए। श्री साय ने कलेक्टर एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को बाढ़ से हुई फसल क्षति, पशुधन हानि सहित अन्य नुकसानों का शीघ्र आंकलन कर प्रभावितों को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त पुल का भी निरीक्षण किया और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था तथा पुनर्निर्माण कार्यों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ कठिनाई अवश्य लाती हैं, परंतु प्रशासनिक तत्परता और जनसहयोग से इन कठिनाइयों का समय पर समाधान संभव है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष देखभाल की जाए तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य शिविर का जायजा लिया मुख्यमंत्री साय ने यहाँ लगाए गए स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल टीम से दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की तैनाती और मरीजों को दी जा रही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद करते हुए यह भी पूछा कि क्या वे प्रशासन की मदद से संतुष्ट हैं। प्रभावितों ने जिला प्रशासन के त्वरित सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। साय ने बाढ़ प्रभावितों की स्वास्थ्य जांच, बीमारों के उपचार और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता के बारे में मौजूद अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्थिति सामान्य होने तक बाढ़ प्रभावितों को शिविर में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ के बाद संभावित उल्टी-दस्त तथा अन्य जलजनित मौसमी बीमारियों पर निरंतर निगरानी रखने और बचाव हेतु पेयजल स्रोतों का अनिवार्य रूप से क्लोरीनेशन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने आमजन को पीने के शुद्ध पानी का उपयोग करने, स्वच्छता एवं साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को प्रभावित वार्डों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

प्रकृति और‍विज्ञान के संतुलन पर केन्द्रित भारतीय परम्पराओं का गौरवपूर्ण प्रतीक है वैदिक घड़ी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित करेगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रकृति और‍विज्ञान के संतुलन पर केन्द्रित भारतीय परम्पराओं का गौरवपूर्ण प्रतीक है वैदिक घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और ऐप का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं के मोबाइल में डाउनलोड करवाया विक्रमादित्य वैदिक क्लॉक ऐप मुख्यमंत्री निवास पहुंची शौर्य स्मारक से आरंभ हुई भारत का समय-पृथ्वी का समय रैली मुख्यमंत्री निवास में स्थापित की गई विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतवर्ष ने अपने ज्ञान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अलौकिक किया है। कालगणना की पद्धति 300 साल पहले तक हमारे देश से दुनिया तक जाती थी। भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पहलु प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है, जो विश्व कल्याण का पोषक है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परम्परा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। विरासत-विकास-प्रकृति और तकनीक के संतुलन का प्रकटीकरण विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अनावरण और उसके ऐप लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। राजा भोज पर यूट्यूब सीरीज के फोल्डर और खगोल विज्ञान पर फिल्म सीडी का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का मंत्रोच्चार के बीच अनावरण किया। इस अवसर पर शौर्य स्मारक से आरंभ हुई 'भारत का समय-पृथ्वी का समय' रैली मुख्यमंत्री निवास पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में शामिल युवाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के ऐप का लोकार्पण, राजा भोज पर निर्मित यू-ट्यूब सीरीज के फोल्डर का विमोचन और खगोल विज्ञान पर केन्द्रित फिल्म की सीडी का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक घड़ी के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आहवान किया और उपस्थित युवाओं से मोबाइल में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी डाउनलोड करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर वैदिक घड़ी भेंट की गई। भारतीय कालगणना में ऋतुओं के प्रभाव का विशेष महत्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि सनातन संस्कृति के व्रत, त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर नहीं आते, उनकी गणना में ऋतुओं का प्रभाव शामिल है। सावन-भादो-कार्तिक माह का प्रभाव हम सब अपने जीवन में अनुभव कर रहे हैं। पूर्णिमा और अमावस्या का समुद्र पर प्रभाव ज्वार-भाटा से आंका जा सकता है, इससे हमारी तिथियों की सत्यता भी प्रमाणित होती है। मानसिक रोगियों पर अमावस्या और पूर्णिमा का प्रभाव चिकित्सा शास्त्र भी स्वीकार करता है। मानव शरीर संरचना में 70 प्रतिशत जल का अंश है, जो अमावस्या और पूर्णिमा पर प्रभावित होता है। इसी का परिणाम है कि मानसिक चिकित्सालयों को अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष सतर्कता बरतने के स्थाई निर्देश हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में समय की गणना सूक्ष्मतम स्तर तक की गई है। सनातन संस्कृति में सूर्योदय से सूर्योदय तक की गणना का विधान है। इस प्राचीन गणना में 30 मुहूर्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में विभिन्न सिद्धांतों पर विचार-विमर्श के लिए कोई बंधन या दंड नहीं है, जबकि कालगणना पर वैचारिक मतभेद के कारण मृत्युदंड देने का उद्धरण पश्चिम के इतिहास में मिलता है। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का हैं जीवंत उदाहरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खगोलीय अध्ययन के लिए सूर्य से बनने वाली छाया के आधार पर सूर्य की गति की गणना की गई। उन्होंने बताया कि भारत का केन्द्र उज्जैन है और उज्जैन का केन्द्र वर्तमान में डोंगला में स्थित है। डोंगला का प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से जुड़ता है। संभवत: डोंगला के इस महत्व से ही भगवान श्रीकृष्ण का आगमन हुआ था। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का जीवंत उदाहरण हैं। पंचांग के विद्वान चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तिथि, नक्षत्र, वार, व्रत, त्यौहार और मुहूर्तों की जानकारी वर्तमान में भी त्वरित रूप से उपलब्ध कराते हैं। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास के द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री निवास केवल मुख्यमंत्री का नहीं, अपितु सभी प्रदेशवासियों की धरोहर है। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार है। भारतीय संस्कृति के अतीत के गौरवशाली पृष्ठों का प्रकटीकरण हमारा दायित्व है। इसी का परिणाम है कि हमारी कालगणना का केन्द्र उज्जैन है, परंतु कालगणना की पद्धति की जानकारी प्रदेश की राजधानी में हो, इसके लिए प्रयास करते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना भोपाल में की गई। भारतीय कालगणना की पद्धति की जानकारी का वैश्विक रूप से भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक घड़ी के ऐप के माध्यम से हम अपने मोबाइल में वैदिक घड़ी का संचालन कर सकते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा और संस्कृति विभाग के इस आयोजन में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम आजादी के अमृतकाल में चल रहे हैं। पूरी दुनिया का समय बदल रहा है, पश्चिम के बाद अब पूर्व का समय आया है। प्रधानमंत्री मोदी विश्व में भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए हैं प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने दृष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्हीं के प्रयासों से वर्ष 2014 में दुनिया के अंदर यूनेस्को के माध्यम से योग को पुनर्स्थापित किया गया। भारत का ज्ञान, कौशल और विशेषता केवल भारत के लिए नहीं है, यह समूची मानवता के लिए है। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए इस भाव से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम निरंतर सक्रिय और अग्रसर हैं। सुशासन के उच्चतम मापदंडों के आधार पर वर्तमान व्यवस्थाओं का हो रहा है संचालन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन के आधार पर ही विक्रमादित्य काल वर्तमान समय तक याद किया जाता है। सुशासन के इन्हीं उच्चतम मापदंडों के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान में व्यवस्थाओं का संचालन हो रहा है। उनके प्रत्येक निर्णय से देश … Read more

किसानों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल रू इस माह मिलेगा 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया

चालू खरीफ सीजन में अब तक 6.39 लाख टन यूरिया वितरित, गत वर्ष इसी अवधि में हुआ था 6.17 लाख टन का वितरण राज्य में यूरिया और अन्य रासायनिक खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध, किसानों की मांग पर केंद्र सरकार ने स्वीकृत किया अतिरिक्त आबंटन रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर किसानों के हित में एक बड़ी राहत मिल रही है। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में 20 हजार टन, द्वितीय सप्ताह में 35 हजार टन और शेष 5 हजार टन की आपूर्ति माह के अंत तक सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार संवेदनशील है और यह अतिरिक्त आबंटन उनकी खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने में सहायक होगा। मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के लिए 28 अगस्त की स्थिति में सहकारी क्षेत्र में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन, इस तरह कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है। इसके विरुद्ध 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसमें 3 लाख 42 हजार 444 मीट्रिक टन सहकारी क्षेत्र और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र से वितरण शामिल है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 6 लाख 17 हजार 798 मीट्रिक टन वितरण से अधिक है, जो इस बार की बेहतर आपूर्ति व्यवस्था का प्रमाण है। प्रदेश में किसानों के लिए नैनो खाद की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 78 हजार 919 और निजी क्षेत्र में 1 लाख 12 हजार 140, इस तरह कुल 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल नैनो यूरिया का भंडारण हुआ है। इसी प्रकार सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 58 हजार 809 और निजी क्षेत्र में 79 हजार 810, कुल 2 लाख 38 हजार 619 बॉटल नैनो डीएपी संग्रहित किया गया है। अब तक किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल नैनो यूरिया और 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल नैनो डीएपी वितरित किया जा चुका है। प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार ने 14.62 लाख टन रासायनिक खाद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके विरुद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख टन का भंडारण कर लिया गया है। भंडारण के आधार पर किसानों को अब तक 13.19 लाख टन खाद वितरित किया गया है। यह व्यवस्था बताती है कि समितियों और निजी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की आपूर्ति उनकी समयबद्ध जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकता से की जा रही है। अब तक निर्धारित लक्ष्य का 98 प्रतिशत यूरिया किसानों तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को मौसम और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त खाद की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी और उनकी उपज सुरक्षित रहेगी। इस संबंध में गत दिनों कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम और राज्य के सांसदों ने भी केंद्रीय उर्वरक मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से भेंट कर छत्तीसगढ़ के किसानों की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार से लगातार संपर्क किया गया और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 60 हजार टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में सहकारी सोसायटियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद का वितरण सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। किसान समितियों में आसानी से खाद उपलब्ध करा पा रहे हैं और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे खेती-किसानी प्रभावित होने के बजाय और मजबूती पा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसानों ने सरकार और प्रशासन की इस पहल पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर यूरिया और अन्य खाद उपलब्ध होने से बुवाई और फसल प्रबंधन का काम सुचारू रूप से हो रहा है।  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से खरीफ सीजन में किसानों को समुचित राहत मिलेगी और छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की

दंतेवाड़ा सहित सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के उच्चाधिकारियों की बैठक:स्थिति सामान्य होने तक अधिकारियों को मुस्तैद रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में बाढ़, आपदा एवं राहत कार्यों की समीक्षा की। इस बैठक में दंतेवाड़ा के अलावा बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंकराम वर्मा, वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, क्षेत्रीय विधायक श्री चैतराम अटामी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने विगत 26 एवं 27 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से हुई हानि तथा प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की जानकारी बैठक के माध्यम से ली। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रशासनिक अमलों द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, जो सराहनीय है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों से हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक तत्परता एवं त्वरित कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते माह आई इस प्राकृतिक आपदा और विभीषिका से जो जन-धन एवं अधोसंरचना की क्षति हुई है, वह अपूरणीय है। यह संतोष की बात है कि जिला प्रशासन द्वारा फौरी तौर पर बचाव एवं राहत कार्य के लिए कदम उठाए गए। साथ ही शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन दान स्वरूप दिया, जो अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आई बाढ़ आपदा से चारों जिलों में 115 करोड़ रुपये की विभिन्न अधोसंरचनाओं को क्षति हुई है। इनकी मरम्मत के लिए राज्य शासन द्वारा हर संभव सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गैर-शासकीय एवं स्वैच्छिक संगठनों के कार्यों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि चारों जिलों में स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं स्वास्थ्य शिविर आवश्यकतानुसार जारी रखें। उन्होंने कहा कि प्रशासन निरंतर प्रभावितों के संपर्क में रहे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सतत जारी रखे। इसके लिए लगातार कैंप लगाकर ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जाए तथा उन्हें समसामयिक सलाह देते हुए आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को राहत राशि अविलंब जारी करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित न होने पाए। इसके लिए कार्यपालन अभियंता तत्काल प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को प्रेषित करें। साथ ही केशकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग के सुधार कार्य हेतु तात्कालिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान सचिव आपदा प्रबंधन श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने पशु-हानि पर दी जाने वाली मुआवजे की राशि के लिए नए निर्देशों के अनुसार आवंटन देने हेतु कलेक्टरों को निर्देशित किया। स्वास्थ्य विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार डोर-टू-डोर सर्वे कराया जाए। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में मलेरिया, टाइफाइड एवं जलजनित रोग पनपने न पाएं। उन्होंने पेयजल के सभी स्रोतों में क्लोरीनेशन कराने और उसका परीक्षण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। इससे पहले दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों के कलेक्टरों ने निर्धारित एजेंडा अनुसार बाढ़ से हुई क्षति और जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत कार्यों की क्रमवार जानकारी दी। बैठक में अतिवृष्टि से प्रभावित ग्रामों, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों, सड़कों, बाधित विद्युत आपूर्ति एवं मोबाइल नेटवर्क की स्थिति प्रस्तुत की गई। साथ ही जन-धन हानि, बाढ़ में बह गए घरों एवं मवेशियों के बारे में संख्यात्मक एवं तथ्यात्मक आंकड़े पीपीटी के माध्यम से साझा किए गए। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावितों का रेस्क्यू कर उन्हें राहत कैंपों में ठहराना, तात्कालिक उपचार उपलब्ध कराना और खाद्य सामग्री वितरित करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि सर्वाधिक क्षति नदी-नालों के किनारे स्थित ग्रामों के निवासियों को हुई है, परंतु समय पर प्रशासनिक राहत उपलब्ध कराई गई। बैठक में बस्तर संभाग के संभागायुक्त श्री डोमन सिंह, आईजी बस्तर श्री सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत, सुकमा कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव, बीजापुर कलेक्टर श्री संबित मिश्रा, जिला पंचायत बस्तर के सीईओ श्री प्रतीक जैन सहित एसपी एवं जिला स्तर के अधिकारीगण मौजूद थे।

मुख्यमंत्री की पहल पर पूनम को मिली पुस्तकें और नया टेबलेट

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बाढ़ से प्रभावित दंतेवाड़ा की पूनम पटेल की प्रशासनिक अधिकारी बनने की तैयारी आगे भी निर्बाध जारी रहेगी। पूनम पटेल, दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में रहकर पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में दंतेवाड़ा में आई बाढ़ से प्रभावित होने के कारण पूनम का पूरा परिवार राहत शिविर में है। आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पूनम से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। मुख्यमंत्री की पहल पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी हेतु पूनम को आवश्यक पुस्तकें और एक नया टेबलेट उपलब्ध कराया गया है। अब पूनम की यूपीएससी तैयारी में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। दंतेवाड़ा जिले के चूड़ीटिकरा पारा वार्ड की रहने वाली पूनम पटेल पिछले तीन वर्षों से यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में आई बाढ़ में उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया और घर का सारा सामान बह गया। पूनम ने बताया कि बाढ़ के पानी में उनकी सभी पुस्तकें बह गईं और टेबलेट भी खराब हो गया। पूनम ने कहा कि उनके पिता श्री संतोष पटेल किराना दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उन्हीं की आमदनी से बड़ी मुश्किल से एक-एक पैसा जोड़कर यूपीएससी की पढ़ाई के लिए टेबलेट खरीदा था। बाढ़ के पानी में पुस्तकें और टेबलेट खराब हो जाने से पूनम आगे की तैयारी को लेकर बेहद चिंतित थीं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा पूनम को नया टेबलेट और प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। इस सहायता से पूनम को बड़ी राहत मिली है। अब पूनम के प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह में बाढ़ भी बाधा नहीं डाल पाएगी।

रूसी तेल पर भारत का स्टैंड साफ, अमेरिका को दो टूक जवाब

नई दिल्ली  भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद अमेरिका इसे लेकर भारत को लगातार निशाना बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी बेतुके तर्क देकर भारत पर मुनाफाखोरी तक के आरोप लगा चुके हैं। अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अमेरिका को सख्त संदेश दे दिया है। हरदीप पुरी ने कहा है कि भारत ने रूसी तेल खरीदने में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत के ऊर्जा व्यापार ने वैश्विक बाजारों को स्थिर करने और कीमतों को काबू में रखने में मदद की है। पुरी ने वाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो की हालिया टिप्पणी पर जवाब देते हुए यह बातें कहीं हैं। नवारो ने हाल ही में यह बयान दिए हैं कि भारत रूस की आर्थिक मदद कर पुतिन की ‘युद्ध मशीन’ को वित्तपोषित कर रहा है। नवारो ने बीते दिनों दूसरे कुछ बयानों में भी इस तरह की बातें कही हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ तक बता दिया था। वहीं सोमवार को उन्होंने कहा है कि रूस से तेल खरीदने का फायदा भारत के ब्राह्मणों को हो रहा है। भारत का जवाब इस पर जवाब देते हुए ‘द हिंदू’ के लिए लेख में केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि भारत लंबे समय से और फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण से बहुत पहले से पेट्रोलियम उत्पादों का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक रहा है। इसके निर्यात की मात्रा और मुनाफे मोटे तौर पर समान रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने नवारो का नाम लिए बिना लिखा कि कुछ आलोचकों का आरोप है कि भारत रूसी तेल को खरीद कर ‘युद्ध मशीन’ को वित्तपोषित कर रहा है। यह पूरी तरह से गलत और असत्य है।" भारत ने नहीं तोड़े कोई नियम पुरी ने अमेरिका को संदेश देते हुए कहा कि ईरान या वेनेजुएला के कच्चे तेल की तरह रूसी तेल खरीद पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘ रूसी तेल G-7 और यूरोपीय संघ की मूल्य सीमा प्रणाली के अंतर्गत आता है जिसे तेल की आपूर्ति जारी रखने और राजस्व की सीमा निर्धारित करते हुए तैयार किया गया है।’’ केंद्रीयमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसे ‘पैकेज’ के 18 दौर हो चुके हैं और भारत ने हर एक का पालन किया है। भारत द्वारा किया गया हर लेन-देन कानूनी है। हर लेन-देन में वैध निर्यात एवं बीमा, अनुपालन करने वाले व्यापारी और ‘ऑडिट’ माध्यमों का इस्तेमाल किया गया है। भारत ने कोई नियम नहीं तोड़े हैं। भारत ने बाजारों को स्थिर किया है और वैश्विक कीमतों को बढ़ने से रोका है।’’  

बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर और चूल्हा भी उपलब्ध:मकान ढहने पर सहायता राशि भी प्रदान की गई

रायपुर दंतेवाड़ा में हाल ही में आई बाढ़ से निपटने और प्रभावितों को आवश्यक मदद पहुँचाने में प्रशासन तत्पर रहा। अपने विदेश दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कोरिया से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर बाढ़ प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। आज मुख्यमंत्री के दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा पहुँचने पर बाढ़ प्रभावित परिवारों ने प्रशासन द्वारा समय पर बचाव एवं राहत पहुँचाने के लिए आभार व्यक्त किया। मौजूद लोगों ने कहा कि सरकार की इस संवेदनशील पहल से सभी प्रभावित परिवार सुरक्षित और सकुशल हैं। राहत शिविर में रहने, भोजन और इलाज जैसी सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। बाढ़ पीड़ित गुप्तेश्वरी कश्यप, शालिनी शर्मा, सविता पात्रे एवं लता सागर ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि राहत शिविर में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है और अब राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा भी दिया गया है। मकान ढहने पर सहायता राशि भी मिल चुकी है और अब घर बनने तक वे यहाँ राहत शिविर में रहेंगे। प्रभावितों ने बताया कि बाढ़ आने के साथ ही प्रशासन की अपील पर सभी लोग सुरक्षित ऊँचे स्थान पर चले गए थे। फिर बाढ़ का पानी उतरने के बाद उन्हें चूड़ी टिकरापारा के छात्रावास भवन में राहत शिविर में ठहराया गया। इसी तरह रीता कश्यप, द्रोपदी नाग, कुंदन गुप्ता, महेश नाग, बबीता नाग सहित अन्य प्रभावितों ने भी प्रशासन के राहत एवं पुनर्वास प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री के समक्ष भावुक हुईं सोमड़ी सोढ़ी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय बाढ़ प्रभावितों से मिलने के दौरान चूड़ी टिकरापारा निवासी सोमड़ी सोढ़ी के घर पहुँचे तो श्रीमती सोमड़ी सोढ़ी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से पूरा घर डूब गया था। बाढ़ आने के एक दिन पहले वह अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुई थीं और उनकी दोनों बेटियाँ भी साथ में थीं, इस कारण उनकी जान बच गई। अस्पताल से ठीक होकर शुक्रवार को वह घर लौटीं। सोमड़ी ने बताया कि बाढ़ के पानी में घर का पूरा सामान खराब हो गया है। इस बीच प्रशासन ने राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा उपलब्ध कराया है। साथ ही राहत शिविर में नाश्ता, भोजन और इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। इस आपदा की घड़ी में सरकार की सहायता के लिए श्रीमती सोमड़ी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार प्रकट किया। इसी तरह दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा के बाढ़ प्रभावित सुरेश बघेल ने बताया कि बाढ़ आने के दिन पूरा परिवार घर में ही था। प्रशासन की सूचना पर वे सभी सुरक्षित स्थान पर चले गए और एक दिन बाद राहत शिविर पहुँचे। पिछले शुक्रवार को वे शिविर से घर लौटे हैं। सुरेश ने बताया कि प्रशासन द्वारा राशन, बर्तन, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा, कंबल-चादर और कपड़े जैसे सभी जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।

हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: मराठा आंदोलन में तोड़ी गईं सभी शर्तें, सरकार पर उठे सवाल

मुंबई मराठा आरक्षण आंदोलन पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा है कि मनोज जरांगे के नेतृत्व वाला विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं है। इसमें सभी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। कोर्ट ने आगे कहा कि पूरा शहर थम गया है और दक्षिण मुंबई के महत्वपूर्ण स्थान प्रदर्शनकारियों से घिरे हुए हैं। उच्च न्यायालय ने मुंबई में सामान्य स्थिति बहाल करने को कहा। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार से भी सवाल पूछे गए हैं। अदालत ने पूछा कि हालात से निपटने की क्या योजना है। आगे कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएं। जरांगे और समर्थकों को मंगलवार तक समय उच्च न्यायालय ने जरांगे और उनके समर्थकों को स्थिति सुधारने और मंगलवार तक मुंबई की सभी सड़कें खाली करने का मौका दिया। इससे पहले जरांगे ने कहा था कि अगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठों की मांग नहीं सुनी तो पांच करोड़ से ज्यादा लोग मुंबई आएंगे। मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण प्रदर्शनकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि मुंबई में आम आदमी को उनके कारण असुविधा का सामना न करना पड़े। गौरतलब है कि मनोज जरांगे पाटिल मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं। रविवार को उन्होंने कहा कि भले ही गोलियां चल जाएं, लेकिन वह अपना प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। मनसे ने क्या मांग की इस बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता बाला नंदगांवकर ने सोमवार को सुझाव दिया कि राज्य सरकार को कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में आरक्षण आंदोलन के लिए मुंबई आए मराठा समुदाय के लोगों के लिए वानखेड़े स्टेडियम जैसा स्थल उपलब्ध कराना चाहिए। नंदगांवकर ने पत्रकारों से कहा कि मराठा प्रदर्शनकारी शहर में घूम रहे हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि इससे असुविधा हो रही है। चूंकि आज़ाद मैदान की जगह छोटी है, इसलिए सरकार से मेरा अनुरोध है कि प्रदर्शनकारियों को वानखेड़े स्टेडियम जैसा स्थान दिया जाए, ताकि वे एक जगह बैठकर अपना आंदोलन जारी रख सकें।